ट्रेन हाइजैक करने वाले बलूच विद्रोहियों ने कर दिया बड़ा ऐलान, सभी 214 बंधकों को मार डाला

इस्लामाबाद पाकिस्तानी यात्री ट्रेन का अपहरण करने वाले बलूच विद्रोहियों ने दावा किया है कि उन्होंने सभी 214 सैन्य बंधकों को मार डाला है, क्योंकि बलूच राजनीतिक कैदियों को रिहा करने के लिए सौदे के लिए उनकी 48 घंटे की समय सीमा समाप्त हो गई थी. बलूच लिबरेशन आर्मी, जिसने पाकिस्तानी सेना के इस दावे को खारिज कर दिया कि बंधकों को रिहा करवा लिया गया है.  बीएलए ने कहा कि पाकिस्तानी सरकार की "जिद" ने उन्हें ऐसा करने के लिए मजबूर किया. विद्रोहियों ने सरकार को बलूच राजनीतिक कैदियों और कार्यकर्ताओं को रिहा करने के लिए 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया था. बलूच विद्रोहियों ने अगवा कर ली थी ट्रेन दरअसल बलूचिस्तान को पाकिस्तान से अलग करने की मांग करने वाले अलगाववादी समूह बलूच लिबरेशन आर्मी ने मंगलवार को रेलवे ट्रैक को उड़ाने के बाद पेशावर जाने वाली जाफर एक्सप्रेस को हाईजैक कर लिया था. जिस समय ट्रेन को हाइजैक किया गया उस समय ट्रेन में 400 से ज्यादा लोग मौजूद थे. ट्रेन को कब्जे में लेने के बाद बीएलए के विद्रोहियों ने बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को जाने दिया था. बीएलए ने एक बयान में कहा, "पाकिस्तान ने अपनी पारंपरिक जिद और सैन्य अहंकार का प्रदर्शन करते हुए न केवल गंभीर वार्ता से परहेज किया, बल्कि जमीनी हकीकत से भी आंखें मूंद लीं. इस जिद की वजह से सभी 214 बंधकों को मार दिया गया." ट्रेन में 400 से अधिक यात्री सवार थे, जिनमें से अधिकतर सुरक्षाकर्मी थे. बंधकों को छुड़ाने के लिए अभियान चलाने वाली पाकिस्तानी सेना ने कहा कि 30 घंटे के अभियान के बाद बुधवार को घेराबंदी समाप्त हो गई, जिसमें सभी 33 विद्रोही मारे गए. सेना ने दावा किया कि हमले में 23 सैनिक, तीन रेलवे कर्मचारी और पांच यात्री मारे गए. UNSC में जाफर एक्सप्रेस पर हुए हमले की निंदा यूनाइटेड नेशंस सिक्योरिटी काउंसिल यानि UNSC में पाकिस्तान को बड़ी कामयाबी मिली है। UNSC में पाकिस्तान के बलूचिस्तान में जाफर एक्सप्रेस पर हुए हमले की निंदा की गई है। सबसे खास बात ये है कि पाकिस्तान को डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन का भी साथ मिला है, जिसने अपने पहले कार्यकाल के दौरान बीएलए के हमलों की निंदा करने से परहेज किया था। द न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) ने जाफर एक्सप्रेस पर बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) की तरफ से किए गए "घृणित और कायरतापूर्ण" हमले की कड़ी निंदा की है। यूनाइटेड नेशंस सिक्योरिटी काउंसिल, जिसमें 15 स्थाई और अस्थाई सदस्य होते हैं, उसकी अध्यक्ष डेनमार्क की क्रिस्टीना मार्कस लासेन की तरफ से जारी बयान में दोषियों को इंसाफ के कटघरे में लाने का आह्वान किया गया है। इसके अलावा उन्होंने आतंकी हमले में मारे गये जवानों और नागरिकों के प्रति "गहरी सहानुभूति और संवेदना" जताई है। वहीं उन्होंने सभी देशों से इस संबंध में इस्लामाबाद के साथ सक्रिय रूप से सहयोग करने का आग्रह किया है। UNSC में जाफर एक्सप्रेस हमले की निंदा आपको बता दें कि पाकिस्तान के बलूचिस्तान के पहाड़ी इलाके बोलन में बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी के स्वतंत्रता सेनानियों ने जाफर एक्सप्रेस को हाईजैक कर लिया था। इस दौरान पाकिस्तानी सेना का दावा है कि इस हमले में 440 यात्रियों को बंधक बना लिया गया था, जिन्हें अब रिहा करवा लिया गया है। इस दौरान पाकिस्तान सेना के भी कई दवानों की मौत हो गई है। बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी ने पटरी को उड़ा दिया था। पाकिस्तानी सेना का दावा है कि हमला करने वाले 33 हमलावरों को मार दिया गया है। लेकिन ऑपरेशन शुरू होने से पहले ही 26 यात्रियों को मार दिया गया था, जबकि ऑपरेशन के दौरान चार सुरक्षाकर्मी शहीद हो गए थे। हालांकि बीएलए का दावा है कि अभी भी उसके कब्जे में 150 से ज्यादा पाकिस्तानी सेना के जवान और आम नागरिक हैं। पाकिस्तानी सेना इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी ने कहा है कि 26 शहीद ट्रेन यात्रियों में सेना और एफसी के 18 सुरक्षाकर्मी, पाकिस्तान रेलवे और अन्य विभागों के तीन अधिकारी और पांच नागरिक शामिल हैं। उन्होंने आगे कहा कि आतंकी हमले में मरने वालों की संख्या और बढ़ सकती है क्योंकि 354 यात्रियों में से 37 गंभीर घायल हुए हैं। इस बीच, हमले पर विस्तार से बात करते हुए UNSC ने कहा कि आतंकवाद के इस निंदनीय कृत्य के परिणामस्वरूप कई पाकिस्तानी नागरिकों की गंभीर क्षति हुई। UNSC की तरफ से जारी बयान में कहा गया है कि "सुरक्षा परिषद के सदस्यों ने इस बात की पुष्टि की कि आतंकवाद अपने सभी रूपों और अभिव्यक्तियों में अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए सबसे गंभीर खतरों में से एक है।" बयान में आगे कहा गया है कि आतंकवाद का कोई भी कृत्य आपराधिक और अनुचित है, चाहे उसका मकसद कुछ भी हो, चाहे वह कहीं भी, कभी भी और किसी के द्वारा भी किया गया हो। बलूच विद्रोहियों का दावा हालांकि, बलूच विद्रोहियों ने पाकिस्तान के दावे का खंडन करते हुए कहा कि भीषण लड़ाई जारी है और सुरक्षा बलों को "भारी नुकसान" उठाना पड़ रहा है. अपने ताजा बयान में, बीएलए ने दावा किया कि दर्रा-ए-बोलन नामक ऑपरेशन में उसके 12 कर्मी मारे गए. बीएलए के बयान में आगे कहा गया है, "फ़िदायीन ने कुछ बंधक सैन्य कर्मियों को विशेष बोगियों में बंद कर दिया और अपनी स्थिति संभाल ली, जबकि अन्य बीएलए सैनिक शेष बंधकों को सुरक्षित स्थान पर ले जाने में कामयाब रहे. जब पाकिस्तानी कमांडो पहुंचे, तो फ़िदायीन ने उन्हें घेर लिया और उन पर भीषण हमला किया. कमांडो को भारी नुकसान उठाना पड़ा, जबकि बंधकों को भी मार दिया गया." झूठ बोल रही पाक सरकार- बीएलए पाकिस्तान की सरकार ने बुधवार को ही दावा कर दिया था कि संकट खत्म हो गया है और सभी विद्रोही लड़ाके मारे गए हैं। यह भी दावा किया गया था कि सभी बंधकों को छुड़ा लिया गया है। हालांकि पाकिस्तान की सरकार की तरफ से इसका कोई भी सबूत नहीं जारी किया गया था। अब बीएलए का कहना है कि पाकिस्तान की सरकार केवल झूठ बोल रही है। बीएलए ने कहा कि पाक सरकार को अपने जवानों की फिक्र ही नहीं है। वह बात करने को तैयार नहीं है। बीएलए ने कहा था … Read more

सेना ने कारगिल में सी-17 ग्लोबमास्टर विमान को उतारकर बड़ा दांव चल दिया

 कारगिल भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव कभी एकदम से खत्म नहीं हो पाया। वहीं जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को लेकर पाकिस्तान और चीन सदाबहार दोस्त बने रहते हैं। ऐसे में भारत की चुनौती और भी बढ़ जाती है। बुधवार को सेना ने कारगिल में सी-17 ग्लोबमास्टर विमान को उतारकर बड़ा दांव चल दिया है। यह कदम बड़ा गेमचेंजर साबित हो सकता है। दरअसल सीमा को सुरक्षित रखने के लिए कनेक्टिविटी बहुत जरूरी होती है। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के ऊंचाई वाले इलाकों में अकसर कनेक्टिविटी खत्म हो जाती है। पाकिस्तान 1999 में करगिल पर कब्जा करने की कोशिश कर भी चुका है। ऐसे में भारतीय सेना ने भी अपनी तैयारियों तेज कर दी हैं। जल्द ही लद्दाख को जोड़ने वाली ऑल वेदर सड़क और जोजिला टनल भी शुरू हो जाएगा। क्या हैं सी-17 लैंड करने के मायने कारगिल में सी-17 ग्लोबमास्टर की लैंडिंग के मायने बहुत बड़े हैं। दरअसल इससे सेना का मूवमेंट बढ़ जाएगा। इसके अलावा लॉजिस्टिक सपोर्ट की क्षमता भी चार गुना बढ़ेगी। इस एयरफील्ड से अब तक सी-130 जे सुपर हल्क्युलिस और एएन-32 का संचालन किया जाता था। इनकी अधिकतम क्षणता 6 से सात टन ही थी। वहीं सी-17ग्लोबमास्टर अकेले ही 60 से 70 टन का भार उठा सकता है। इसके अलावा इसकी मदद से 150 से ज्यादा सैनिक हथियारों और उपकरणों के साथ तुरंत फ्रंट पर तैनात हो सकते हैं। पाकिस्तान और चीन दोनों से जंग की स्थिति में कारगिल तक यह पहुंच काम आएगी। कारगिल में सेना को उतारकर जल्दी चीन की सीमा पर भी भेजा जा सकता है। पाकिस्तान इस एयरफील्ड से भी इतना चिढ़ा रहता है कि 1999 के युद्ध के दौरान उसने इसे निशाना बनाया था। यह एयरफील्ड एलओसी से बेहद करीब है। सी-17 ग्लोबमास्टर ऊंचाई वाले इलाकों में और कम तापमान वाले इलाकों के हिसाब से भी तैयार रहता है। सूत्रों का कहना है कि वायुसेना को लगता था कि लेह और श्रीनगर के बीच एक गैप है। अगर कारगिल में ग्लोबमास्टर की लैंडिंग होती है तो यह खाली स्थान भर जाएगा और सेना को सप्लाई और तैनाती दोनों में मदद मिलेगा। कारगिल में कोई पार्किंग बे नहीं है। ऐसे में एक समय में एक ही सी-17 का संचालन हो सकता है। recent visitors 37

कुलगाम में पूर्व सैनिक की हत्या का मामला, पुलिस ने 500 लोगों को हिरासत में लिया, पीओके के आतंकी संगठनों पर है संदेह

 कुलगाम जम्मू कश्मीर के कुलगाम जिले में आतंकी हमले में पूर्व सैनिक की हत्या के मामले में सुरक्षा एजेंसियां एक्शन में आ गई हैं। सेवानिवृत्त सैनिक की हत्या करने वाले बंदूकधारियों की तलाश को जहां सर्च ऑपरेशन चल रहा है तो वहीं पुलिस जम्मू कश्मीर पुलिस और सुरक्षाबलों में 500 से ज्यादा लोगों को डिटेन किया है। इनमें ज्यादातर वे लोग हैं। पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में मौजूद कश्मीरी आतंकवादियों के रिश्तेदार हैं। पूर्व सैनिक के परिवार पर हमला कश्मीर के दक्षिणी हिस्से में आने वाले कुलगाम में संदिग्ध आतंकवादियों ने हमले में एक सेवानिवृत्त सैनिक की हत्या कर दी थी। इस हमले में पूर्व सैनिक की पत्नी और भतीजी को घायल हुए थे। हमले की घटना के बाद अब जम्मू-कश्मीर पुलिस अब सख्त एक्शन के मूड में है। यह पहला मामला है जब सुरक्षाबलों की तरफ से इतनी बड़ी संख्या में लोगों को डिटेन किया गया है। सोमवार को दक्षिण कश्मीर के कुलगाम के बेहिबाग गांव में अज्ञात बंदूकधारियों ने सेवानिवृत्त सैनिक मंजूर अहमद वागे, उनकी पत्नी और उनकी भतीजी पर गोलियां चलाईं थीं। इस हमले में वागे (45) की मौत हो गई, जिसके पेट में गोली लगी, जबकि दो महिलाओं के पैर में गोली लगी और उनका इलाज चल रहा है। उन्होंने कहा कि किसी भी आतंकी हमले के बाद इतने बड़े पैमाने पर लोगों को कभी हिरासत में नहीं लिया गया। इस लिहाज से देखें तो यह अब तक का सबसे बड़ा ऐक्शन है। इन लोगों को इसलिए हिरासत में लिया गया है ताकि संदेश दिया जा सके कि अब आतंकी हमलों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। चाहे सीमा के इधर की बात हो या फिर उस पार का मसला, कहीं भी आतंकवाद को स्वीकार नहीं करेंगे। अज्ञात हमलावरों ने रिटायर्ड सैनिक मंजूर अहमद वागे और उनकी पत्नी पर गोलीबारी की थी। यह हमला दक्षिण कश्मीर के कुलगाम के बेहीबाग गांव में हुआ था। इस हमले में मंजूर अहमद की भतीजी भी घायल हुई थी। हमले में मंजूर अहमद मारे गए, जबकि पत्नी और भतीजी का इलाज चल रहा है और वे खतरे से बाहर हैं। अमित शाह की मीटिंग में पता चली पीओके और पाकिस्तान पर एक बात पुलिस अधिकारी ने कहा कि आतंकियों के खिलाफ बड़े अभियान की वजह यह भी है कि इन लोगों ने रेड लाइन ही पार कर दी। अब तक ये लोग सैनिकों पर हमले करते थे, लेकिन अब उनके परिवार को भी निशाना बनाया है। इसके चलते सुरक्षा बलों में गुस्सा है। इस बीच होम मिनिस्टर अमित शाह ने भी बुधवार को सुरक्षा का जायजा लिया। इस दौरान जानकारी मिली कि पीओके और पाकिस्तान में बड़ी संख्या में लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी जुटे हुए हैं। इसके चलते कश्मीर में अलर्ट घोषित किया गया है। दरअसल बीते कुछ सालों में ऐसे लोगों पर भी सख्त ऐक्शन हुआ है, जो सीधे तौर पर आतंकवाद में शामिल नहीं हैं, लेकिन ओवरग्राउंड वर्कर के तौर पर काम करते रहे हैं। जांच में जुटी पुलिस की विशेष टीम पुलिस की तरफ से इस घटना के हमलावरों को पकड़ने के लिए डिटेन किए गए लोगों से पूछताछ की जा रही है। अभी तक कुलगाम में पूर्व सैनिक के घर पर हमले की घटना की जिम्मेदारी किसी भी आतंकी समूह ने नहीं ली है। वागे 2021 में सेवानिवृत्त हुए थे। पुलिस ने इस मामले की जांच के लिए सीनियर ऑफिसर की टीम भी बनाई है। पुलिस ने एक बयान में कहा कि संदिग्ध आतंकियों को जल्द गिरफ्तार कर लिया जाएगा। टीमें इस पर काम कर रही हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जैश, लश्कर के साथ हिजबुल मुजाहिद्दीन आतंकी संगठन इस क्षेत्र में सक्रिय हैं।     recent visitors 56

कश्मीर में बर्फीले तूफान के कारण पर्यटक फंसे, सेना ने 68 लोगों को बचाया

 जम्मू भारतीय सेना ने गुलमर्ग जाते वक्त रास्ते में फंसे कई पर्यटकों को बचाया है। भारतीय सेना की चिनार कोर ने इस मिशन को अंजाम दिया है। चिनार वॉरियर्स को सिविल प्रशासन से पर्यटकों के फंसे होने की जानकारी मिली थी। इसके मुताबिक पर्यटक गुलमर्ग और तानमार्ग जा रहे थे। इसी दौरान भारी बर्फबारी के चलते पर्यटक यहां पर फंस गए थे। चिनार कोर के मुताबिक इस दौरान कुल 68 लोगों को बचाया गया। इनमें 30 महिलाएं, 30 पुरुष और 8 बच्चे शामिल हैं। इसके बाद सभी 137 पर्यटकों को गर्म खाना, शेल्टर और दवाएं भी मुहैया कराई गईं। चिनार वॉरियर ने इसको लेकर ट्वीट में जानकारी दी है। इसमें बताया है कि चिनार कोर को सिविल एडमिनिस्ट्रेशन से कॉल मिली थी। इसके बाद इस बचाव कार्य को अंजाम दिया गया। इसके मुताबिक चिनार वॉरियर्स ने कुलगाम के मुनाद गांव से एक गर्भवती महिला को निकालने के लिए एक आपातकालीन संकट कॉल का जवाब दिया। भारी बर्फबारी के बीच बचाव दल समय पर घटनास्थल पर पहुंच गया। तत्काल जीवनरक्षक चिकित्सा सहायता प्रदान की गई और रोगी को यारीपोरा के सरकारी अस्पताल में ले जाया गया। गौरतलब है कि चिनार कोर का नाम यहां के चिनार वृक्ष के नाम पर रखा गया है। सेना का यह दल जम्मू कश्मीर के पूर्वी और उत्तरी इलाकों में सुरक्षा इंतजाम देखती है। बता दें कि जम्मू कश्मीर में मौसम खराब है। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के मुताबिक जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग स्थित काजीगुंड कस्बे में बर्फबारी में करीब 2000 वाहन फंस गए हैं। सीएम ने बताया कि उन्होंने अनंतनाग के डिप्टी कमिश्नर से बात की है। उन्होंने लिखा कि डिप्टी कमिश्नर ने बताया कि भारी वाहनों को आगे बढ़ने की अनुमति दी जा रही है और बाकी फंसे हुए वाहनों को निकालने के प्रयास जारी हैं। सीएम ने आगे लिखा कि बर्फीले मौसम के कारण यातायात का बैक अप लेना पड़ा है। फंसे हुए वाहन, दोनों दिशाओं में, धीरे-धीरे आगे बढ़ रहे हैं और जहां आवश्यक हो, सहायता की जा रही है। recent visitors 55

पूर्व सैनिक की मौत की जानकारी रेजिमेंट को लगी, तो कमांडिंग ऑफिसर ने पांच सेना के जवानों को बेटी की शादी का जिम्मा उठाने गांव में भेजा

 मथुरा यूपी के मथुरा में एक पूर्व सैनिक की सड़क हादसे में मौत हो गई. इस घटना के दो दिन बाद ही मृतक की बेटी की शादी होनी थी. ऐसे में खुशियों वाले घर में मातम पसर गया. बेटी शादी को टालना चाहती थी. उधर, पिता के गुजर जाने के बाद परिजनों को बेटी के कन्यादान की चिंता सताने लगी. लेकिन इस बीच कुछ ऐसा हुआ जिसने लोगों को इमोशनल कर दिया. न्यूज एजेंसी के मुताबिक, पूर्व सैनिक की मौत की जानकारी जब उसके रेजिमेंट को लगी, तो कमांडिंग ऑफिसर ने पांच सेना के जवानों को बेटी की शादी का जिम्मा उठाने गांव में भेजा. मृतक के फौजी साथियों ने उसकी बेटी की शादी का ना सिर्फ पूरा जिम्मा उठाया बल्कि उन्होंने बेटी का कन्यादान भी किया. फौजियों ने रिश्तेदारों-मेहमानों की भी देखभाल की, जिसे देख उनके आंसू छलक पड़े. मथुरा के मांट थाने के एसएचओ के अनुसार, पूर्व सैनिक देवेंद्र सिंह (48) की बेटी की शनिवार को शादी होनी थी. लेकिन, शादी से ठीक दो दिन पहले मांट-राया रोड पर सड़क दुर्घटना में उनकी मौत हो गई. जैसे ही इसकी खबर परिवार तक पहुंची शादी का जश्न मातम में बदल गया. पिता की मौत से दुखी दुल्हन ने कथित तौर पर शादी करने से इनकार कर दिया. मृतक देवेंद्र सिंह के रिश्तेदार नरेंद्र ने बताया कि शादी समारोह बीच में ही रुक गया क्योंकि परिवार को कन्यादान समारोह को लेकर चिंता थी, जो दुल्हन के पिता द्वारा किया जाता है. पिता की याद में रो-रोकर बेटी का बुरा हाल हो गया. वहीं, मैरिज होम में चल रही शादी की तैयारी धरी-धरी की रह गई. परिवार के सदस्यों ने बताया कि जब यह सूचना देवेंद्र सिंह के कमांडिंग ऑफिसर तक पहुंची, तो उन्होंने पांच जवानों को गांव भेजा और शादी की रस्में पूरी कराईं. सूबेदार सोनवीर सिंह, सूबेदार मुकेश कुमार, हवलदार प्रेमवीर, विनोद और बेताल सिंह मृतक के गांव पहुंचे और कन्यादान कर पिता का कर्तव्य निभाया और जोड़े को आशीर्वाद दिया. ये सब देखकर लोगों की आंखे नम हो गईं और उन्होंने जमकर सेना के कार्य की प्रशंसा की. गौरतलब हो कि इससे पहले हरियाणा के जींद के एक छोटे में भी CRPF के जवानों ने शहीद की बेटी का कन्यादान किया था.   recent visitors 133

भारत और चीन के सैनिक पूर्वी लद्दाख के डेपसांग में गश्त के बारे में बनी आम सहमति का पालन कर रहे हैं : सेना

नई दिल्ली सेना ने बुधवार को स्पष्ट किया कि भारत और चीन के सैनिक पूर्वी लद्दाख के डेपसांग में गश्त के बारे में बनी आम सहमति का पालन कर रहे हैं और किसी भी पक्ष की ओर से इसमें बाधा उत्पन्न नहीं की जा रही है। सेना ने एक अंग्रेजी दैनिक में ‘ डेपसांग में गश्त बहाल करने पर बातचीत बाधित हुई’ शीर्षक से प्रकाशित समाचार पर स्पष्टीकरण जारी करते हुए कहा कि गत 21 अक्टूबर को बनी सर्वसम्मति के आधार पर, दोनों पक्षों ने प्रभावी ढंग से सैनिकों को पीछे हटाया है । भारतीय पक्ष ने अपने पारंपरिक गश्त वाले क्षेत्रों में गश्त फिर से शुरू कर दी है। दोनों पक्ष आम सहमति का पालन कर रहे हैं और किसी भी पक्ष द्वारा कोई बाधा उत्पन्न नहीं की गई है। सेना ने कहा है कि यह स्पष्ट किया जाता है कि इस अंग्रेजी दैनिक में बुधवार को प्रकाशित लेख काल्पनिक और तथ्यों से परे है। सेना ने मीडिया से अनुरोध किया है कि वह ऐसे संवेदनशील लेख प्रकाशित करने से पहले तथ्यों को सत्यापित कर लें। उल्लेखनीय है की अंग्रेजी दैनिक में प्रकाशित खबर में कहा गया है कि गश्त के तौर तरीकों को लेकर भारत और चीन के सैन्य अधिकारियों के बीच बातचीत में गतिरोध उत्पन्न हो गया है। उल्लेखनीय है कि भारत और चीन के बीच करीब साढ़े चार वर्षों के गतिरोध के बाद 21 अक्टूबर को गश्त व्यवस्था को लेकर आम सहमति बनी थी, जिसके बाद दोनों पक्षों ने अपने-अपने सैनिकों को पीछे हटाया था और डेपसांग तथा डेमचोक दोनों क्षेत्रों में अगस्त शुरू हो गई थी।   recent visitors 103

अखनूर में सेना का बड़ा एक्शन काफिले पर हमला करने वाले तीन आतंकी को किया ढेर

 अखनूर जम्मू के अखनूर इलाके में सुरक्षाबलों ने तीन आतंकियों को मार गिराया है. सोमवार को सेना के काफिले पर घात लगाकर किए गए हमले के बाद सुरक्षाबलों ने इलाके में ऑपरेशन शुरू किया था जिसमें तीन आतंकवादियों को मार दिया गया है. मारे गए आतंकियों के पास से हथियार और गोला-बारूद मिले हैं. सेना का ऑपरेशन अभी जारी है. जम्मू-कश्मीर के अखनूर में आतंकियों ने सेना के वाहन को निशाना बनाया और कई राउंड फायरिंग की। सुरक्षा बल फिलहाल बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान चला रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ हमले के दौरान 3 आतंकी मारा गया है। आधिकारिक तौर पर पुष्टि होनी बाकी है। जानकारी के अनुसार, जम्मू-कश्मीर के अखनूर में आतंकियों ने सेना के काफिले पर हमला किया है। फायरिंग करने वाले दहशतगर्दों की संख्या तीन से चार बताई जा रही है। सूत्रों के अनुसार, आतंकी एक स्थानीय मंदिर के आसपास छिपे हो सकते हैं। हमले के बाद बड़ा तलाशी अभियान चलाया जा रहा है। मिली जानकारी के मुताबिक, आतंकी पहले मंदिर में घुस गए थे और एक मूर्ति को खंडित कर दिया। लेकिन वहां मौजूद लोगों को नुकसान नहीं पहुंचाया। वहां से भागते वक्त आतंकियों ने सेना की एंबुलेंस पर फायरिंग कर दी। जम्मू-कश्मीर पुलिस, भारतीय सेना और स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) की टीम मिलकर तलाशी अभियान चला रही है। फिलहाल इलाके को घेर लिया गया है। जानकारी मिली है कि सोमवार सुबह करीब सात बजे यह हमला हुआ। अखनूर के बटाल गांव के शिव मंदिर के पास घात लगाकर बैठे तीन से चार आतंकियों ने सेना के काफिले पर गोलीबारी की। जम्मू एसएसपी ने कहा कि माना जा रहा है कि तीन आतंकवादी जम्मू जिले के अखनूर के अस्सान मंदिर के पास देखे गए। उन्होंने सेना की एम्बुलेंस पर कुछ राउंड फायरिंग की। इलाके की घेराबंदी कर दी गई है और पुलिस और सुरक्षा बलों ने संयुक्त तलाशी अभियान शुरू कर दिया है।     recent visitors 73