भूपेश बघेल का गढ़ माना जाता है पाटन, बीजेपी ने कांग्रेस उम्मीदवार को चुनाव हारा दिया, अमलेश्वर में भी कांग्रेस की हार हुई

दुर्ग  छत्तीसगढ़ नगरीय निकाय चुनावों के रिजल्ट आज घोषित हो रहे हैं। दुर्ग नगर निगम में बीजेपी बड़ी जीत की तरफ आगे बढ़ रही है। वहीं, पूर्व सीएम भूपेश बघेल को बड़ा झटका लगा है। भूपेश बघेल की नगर पंचायत पाटन में कांग्रेस उम्मीदवार की हार हुई है। भूपेश बघेल, दुर्ग जिले की पाटन विधानसभा सीट से विधायक हैं। ऐसे यहां कांग्रेस की हार के बाद एक बार फिर से संगठन पर सवाल खड़े हो रहे हैं। पाटन नगर पंचायत में भाजपा प्रत्याशी योगेश निक्की भाले ने 601 वोटों से जीत दर्ज की है। कांग्रेस की हार की वजह आपसी गुटबाजी और बागी उम्मीदवारों का चुनाव मैदान में उतरना बताया जा रहा है। वहीं, दूसरी तरफ अमलेश्वर नगर पंचायत में भी बीजेपी को जीत मिली है। अमलेश्वर नगर पंचायत में पहली बार चुनाव हुए थे। इससे पहले यह ग्राम पंचायत थी। भूपेश बघेल के कार्यकाल में ही अमलेश्वर को नगर पंचायत घोषित किया गया था। भूपेश बघेल को झटका पाटन नगर पंचायत में कांग्रेस की हार पूर्व सीएम भूपेश बघेल के लिए बड़ा झटका है। यहां कांग्रेस के कई सीनियर नेताओं ने चुनाव प्रचार किया था। पाटन नगर पंचायत में बीजेपी की जीत से कार्यकर्ताओं में खुशी की लहर है। यहां जीत का जश्न मनाया जा रहा है। अमलेश्वर में भी बीजेपी जीती अमलेश्वर नगर पंचायत में भी बीजेपी ने जीत दर्ज की है। अमलेश्वर नगर पंचायत भी पाटन विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आती है। यहां से बीजेपी उम्मीदवार दयानंद सोनकर 319 मतों से अपना चुनाव जीत गए हैं। वहीं, नगर निगम की बात करें तो बीजेपी सभी 10 नगर निगम में बड़ी बढ़त के साथ आगे चल रह है। महासचिव बने हैं भूपेश बघेल नगरीय निकाय चुनाव के रिजल्ट के एक दिन पहले ही कांग्रेस ने भूपेश बघेल को बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है। भूपेश बघेल को कांग्रेस का राष्ट्रीय महासचिव घोषित किया गया है। भूपेश बघेल को पंजाब राज्य का प्रभार भी सौंपा गया है। recent visitors 46

रायपुर में पूर्व मेयर एजाज ढेबर भी 1500 वोट से हारे, जीत के बाद बीजेपी में जश्न का माहौल

रायपुर छत्तीसगढ़ के 5 नगर निगम में भाजपा ने कब्जा कर लिया है। रायगढ़ में जीववर्धन चौहान ने जानकी काटजू को 36,365 वोट से हरा दिया है। राजनांदगांव में बीजेपी के मधुसूदन यादव ने निखिल द्विवेदी को हराया है। जगदलपुर में भाजपा के संजय पांडेय ने मलकीत सिंह गैदू को किया पराजित। रायपुर में पूर्व मेयर एजाज ढेबर भी 1500 वोट से पार्षद चुनाव हार गए हैं। भाजपा प्रत्याशियों की जीत के बाद बीजेपी में जश्न का माहौल है। लोरमी में भाजपा की जीत के बाद डिप्टी सीएम साव कार्यकर्ताओं संग जमकर थिरके, रायपुर में राजेश मूणत कार्यकर्ताओं संग झूमे। बता दें कि 5 निगम में बीजेपी लीड कर रही है। मंत्री श्यामबिहार जायसवाल की बहू चुनाव हार गईं हैं। कांग्रेस की रीमा ने चंपा जायसवाल को 44 वोट से हराया है। रायपुर में मीनल चौबे 1,01,439 वोट से बढ़त बनाई हुई हैं। 10 निगम, 49 पालिका और 113 नगर पंचायत में मेयर पार्षद और अध्यक्ष पदों के लिए वोटों की गिनती जारी है।   नगर निगम बीजेपी कांग्रेस कौन आगे/ जीते रायपुर मीनल चौबे दीप्ति दुबे मीनल चौबे (बीजेपी) 1,01,439 वोट से आगे दुर्ग अलका बाघमार प्रेमलता पोषण साहू अलका बाघमार (बीजेपी) 15,000 वोट से आगे राजनांदगांव मधुसूदन यादव निखिल द्विवेदी मधुसूदन यादव (बीजेपी) 43,500 वोट से जीते बिलासपुर पूजा विधानी प्रमोद नायक पूजा विधानी (बीजेपी) 20,000 वोट से आगे अंबिकापुर मंजूषा भगत अजय तिर्की मंजूषा भगत (बीजेपी) 11,063 वोट से जीतीं चिरमिरी रामनरेश राय विनय जायसवाल रामनरेश राय (बीजेपी) 4000 वोट से जीते जगदलपुर संजय पांडेय मलकीत सिंह गैदू संजय पांडेय (बीजेपी) जीते रायगढ़ जीववर्धन चौहान जानकी काटजू जीववर्धन चौहान (बीजेपी) 34,365 वोट से जीते कोरबा संजू देवी राजपूत उषा तिवारी संजू देवी राजपूत (बीजेपी) आगे धमतरी जगदीश रामू मेहरा — (कांग्रेस प्रत्याशी का नामांकन रद्द हो चुका है) बीजेपी recent visitors 42

देश में पहली बार 21 राज्यों में भगवा, 92 करोड़ लोगों पर एनडीए का सीधा शासन… मैप में भारत की सियासी तस्वीर

नईदिल्ली लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री मोदी रिकॉर्ड तीसरी बार प्रधानमंत्री बने, लेकिन इस बार बीजेपी अपने दम पर पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने में सफल नहीं हुई। लेकिन इस जीत के बाद कांग्रेस के साथ विपक्ष ने माना की अब मोदी लहर खत्म हो रही है लेकिन तीसरे कार्याकल के बाद हुए विधानसभा चुनावों के परिणाम देखकर इस बात को नकारा नहीं जा सकता की मोदी लहर अभी खत्म नहीं हुई है। मोदी के नेतृत्व में भाजपा ने 8 राज्यों- आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, ओडिशा, जम्मू-कश्मीर, हरियाणा, महाराष्ट्र और झारखंड में चुनाव लड़ा। इसमें आंध्र प्रदेश, अरुणाचल, ओडिशा, हरियाणा और महाराष्ट्र में भाजपा या गठबंधन की सरकार बनी है। 21 राज्यों में NDA की सरकार दिल्ली: दिल्ली चुनाव में भाजपा ने 26 साल बाद सत्ता में वापसी की है। पार्टी ने 70 में से 48 सीटों पर जीत दर्ज करी है और अब सीएम के नाम का ऐलान करने की तैयारी शुरू हो गई है। हरियाणा: हरियाणा विधानसभा चुनाव में 90 सीटों में से भाजपा ने 48 सीटों पर दर्ज की थी। हरियाणा में भाजपा की तीसरी बार सरकार बनी है। नायब सिंह सैनी हरियाणा के 19वें मुख्यमंत्री हैं। उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री हैं। वे 2017 में पहली बार और 2022 में दूसरी बार यूपी के सीएम बने थे। अब अगला विधानसभा चुनाव 2027 में है। उत्तराखंड: उत्तराखंड विधानसभा चुनावों में 70 सीटों में से भाजपा को 47 सीटों पर जीत मिली। पुष्कर सिंह धामी मुख्यमंत्री हैं। अगला विधानसभा चुनाव 2027 में है। बिहार: बिहार में NDA सरकार है और नीतीश कुमार मुख्यमंत्री हैं। ओडिशा: 2024 में ओडिशा की 147 विधानसभा सीटों में से भाजपा ने 78 सीटों पर जीत दर्ज की। ओडिशा के वर्तमान मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी हैं। राजस्थान: राजस्थान में भाजपा ने 200 सीटों में से 115 सीटों पर जीत दर्ज की थी। भजनलाल शर्मा राजस्थान के वर्तमान मुख्यमंत्री हैं। गुजरात: गुजरात में 182 सीटों में से 156 पर भाजपा ने जीत दर्ज की थी। भूपेंद्र पटेल मौजूदा मुख्यमंत्री हैं। महाराष्ट्र: महाराष्ट्र में 288 सीटों में भाजपा को 132 सीटों पर जीत मिली। देवेंद्र फडणवीस मुख्यमंत्री हैं। शिंदे और अजित पवार को डिप्टी सीएम है। गोवा: 40 विधानसभा सीटों वाले गोवा में भाजपा को 26 सीटे मिली और प्रमोद सावंत NDA के मुख्यमंत्री हैं। मध्य प्रदेश: मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में भाजपा को 230 में से 163 सीटों पर जीत मिली थी। मोहन यादव वर्तमान मुख्यमंत्री हैं। छत्तीसगढ़: छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 90 विधानसभा सीटों में 54 सीटों पर जीत दर्ज की। मौजूदा मुख्यमंत्री विष्णु देव साय हैं। आंध्र प्रदेश: आंध्र प्रदेश में NDA की सरकार है और चंद्रबाबू नायडू मुख्यमंत्री हैं। असम, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर और त्रिपुरा में बीजेपी की सरकार है। मेघालय, सिक्किम और नगालैंड में एनडीए गठबंधन की सरकारें हैं। 3 साल में 21 राज्यों में चुनाव 2026 में पश्चिम बंगाल, असम, पुडुचेरी, तमिलनाडु और केरल में चुनाव होंगे। 2027 में गुजरात, पंजाब, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर के विधानसभा चुनाव है। 2 2028 में नगालैंड, त्रिपुरा, कर्नाटक, तेलंगाना, मध्य प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, मेघालय, मिजोरम, छत्तीसगढ़ और राजस्थान शामिल हैं। मध्य और पश्चिमी भारत में एनडीए का दबदबा मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान के साथ-साथ महाराष्ट्र और गुजरात में भी बीजेपी की सरकार है. 2022 में गुजरात और 2023 में मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में बीजेपी ने जीत हासिल की थी. महाराष्ट्र में नवंबर 2024 में बीजेपी नीत एनडीए ने जीत हासिल की थी. इसी तरह उत्तर भारत के बिहार और उत्तर प्रदेश में एनडीए का कब्जा है. झारखंड और पश्चिम बंगाल में इंडिया की सरकार है. दक्षिण भारत की 5 में से 4 राज्यों में इंडिया की सरकार है. केरल, तेलंगाना, कर्नाटक और तमिलनाडु में इंडिया तो आंध्र में एनडीए की सरकार है. 140 करोड़ आबादी, 92 पर NDA का शासन देश की आबादी अभी 140 करोड़ के आसपास है. दिल्ली में जीत के बाद एनडीए का शासन 92 करोड़ लोगों पर हो गया है. 10 करोड़ से ज्यादा आबादी वाले उत्तर प्रदेश (24 करोड़), महाराष्ट्र (12 करोड़) और बिहार (12 करोड़) में एनडीए का ही शासन है. 10 करोड़ या उससे ज्यादा की आबादी वाले किसी भी राज्य में इंडिया की सरकार नहीं है. 5 करोड़ से ज्यादा आबादी वाले 7 में से 4 राज्यों में एनडीए की सरकार है. वहीं तीन राज्यों में इंडिया की सरकार है. 5 करोड़ से ज्यादा आबादी वाले पश्चिम बंगाल (9 करोड़), तमिलनाडु (7 करोड़) और कर्नाटक (6 करोड़) में इंडिया गठबंधन की सरकार है. इसी तरह आंध्र प्रदेश (5 करोड़), गुजरात (6 करोड़), मध्य प्रदेश (8 करोड़) और राजस्थान (8 करोड़) में एनडीए की सरकार है. वहीं 1-5 करोड़ आबादी वाले राज्यों की बात की जाए तो 10 राज्यों में से 6 में एनडीए और 4 में इंडिया की सरकार है. असम (3.5 करोड़), छत्तीसगढ़ (3 करोड़), दिल्ली (1.87 करोड़), हरियाणा (2.8 करोड़) जैसे राज्यों में एनडीए की सरकार है. मेघालय में 33 लाख के आसपास आबादी है. यहां किसी भी गठबंधन की सरकार नहीं है. पहली बार 21 राज्यों में एनडीए की सरकार साल 2018 के मध्य में बीजेपी सत्ता के शीर्ष पर थी. उस वक्त पार्टी के पास 20 राज्यों की सरकार थी. इनमें पूर्वोंत्तर के सभी 7 राज्यों के अलावा उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल, गुजरात, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, हरियाणा और महाराष्ट्र की सरकार शामिल थी. इसके बाद बीजेपी का परफॉर्मेंस लगातार गिरता ही रहा. 7 साल बाद अब बीजेपी ने अपने 20 राज्यों वाला रिकॉर्ड को तोड़ दिया है. भगवा लहर में AAP के दिग्गज धराशायी भगवा लहर में आप के राष्ट्रीय संयोजक व पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया, मंत्री सौरभ भारद्वाज, पूर्व मंत्री सत्येंद्र जैन सहित पार्टी के कई बड़े नेता चुनाव हार गए। मुख्यमंत्री आतिशी को भी कड़े मुकाबले का सामना करना पड़ा, लेकिन वह लगभग 3,500 मतों से चुनाव जीतने में सफल रहीं। कांग्रेस को फायदा, मत फीसद बढ़ा कांग्रेस के प्रदर्शन में सुधार हुआ है। उसका मत प्रतिशत बढ़ा है, लेकिन लगातार तीसरे चुनाव में भी उसका खाता नहीं खुल सका। AAP के वोटरों में BJP ने ऐसे लगाई सेंध वर्ष 2014 व वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में दिल्ली की सभी सातों सीटें … Read more

दिल्ली में नई सरकार का शपथ ग्रहण समारोह 19 या 20 फरवरी को हो सकता है, सरकार गठन की प्रक्रिया तेज

नई दिल्ली दिल्ली विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद सरकार गठन की प्रक्रिया तेज हो गई है। सूत्रों के अनुसार, दिल्ली में नई सरकार का शपथ ग्रहण समारोह 19 या 20 फरवरी को हो सकता है। वहीं, विधायक दल की बैठक 17 और 18 फरवरी को आयोजित की जाएगी, जिसमें नई सरकार के गठन से संबंधित महत्वपूर्ण निर्णय लिए जाएंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज रात अमेरिका से दिल्ली पहुंचेंगे। इसके बाद सरकार बनाने को लेकर एक अहम बैठक होगी। पीएम मोदी के साथ केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह, भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा और पार्टी के अन्य शीर्ष नेता भी मौजूद होंगे। इन नेताओं की बैठक में दिल्ली में सरकार गठन के लिए अंतिम रूप से निर्णय लिया जाएगा। इस दौरान दिल्ली का अगला सीएम कौन होगा, यह भी तय हो जाएगा। भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने दिल्ली में सरकार गठन के लिए पहले ही होमवर्क पूरा कर लिया है। पार्टी ने दिल्ली में सरकार गठन के लिए विधायकों के नामों की एक सूची तैयार की है, जिसमें 48 में से 15 विधायकों के नाम को प्राथमिकता दी गई है। इन 15 विधायकों में से 9 नामों को अंतिम रूप से चुना जाएगा, जिसमें मुख्यमंत्री, मंत्री और स्पीकर के नाम तय किए जाएंगे। सूत्रों के मुताबिक, पार्टी अध्यक्ष जे.पी. नड्डा ने स्पष्ट किया है कि मुख्यमंत्री निर्वाचित विधायकों में से होगा और इस बारे में निर्णय विधायक दल की बैठक में लिया जाएगा। नड्डा ने यह भी संकेत दिया कि मुख्यमंत्री के शपथ ग्रहण के बाद पहली कैबिनेट बैठक में कुछ महत्वपूर्ण नीतिगत फैसले लिए जाएंगे। एक अन्य महत्वपूर्ण घोषणा यह है कि दिल्ली में नई भाजपा सरकार में कोई उपमुख्यमंत्री नहीं होगा। बता दें कि 8 फरवरी को दिल्ली विधानसभा चुनाव के नतीजे घोषित किए गए। इस चुनाव में भाजपा ने 42 सीटों पर शानदार जीत हासिल की, तो वहीं, आम आदमी पार्टी महज 22 सीटों पर सिमट गई। इस चुनाव में एक बार फिर कांग्रेस का खाता नहीं खुला। दिल्ली विधानसभा का मौजूदा कार्यकाल 26 फरवरी को समाप्त हो रहा है और नई सरकार को उससे पहले कार्यभार संभालना होगा। recent visitors 67

दिल्ली में कुछ ऐसे नाम हैं जिन्हें कैबिनेट में जगह मिलना लगभग तय माना जा रहा है

नई दिल्ली दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की जीत के बाद से ही नए मुख्यमंत्री और कैबिनेट को लेकर तरह-तरह की अटकलें लगाईं जा रही हैं। मुख्यमंत्री और मंत्रियों को लेकर कई नामों की चर्चा तेज है। संभव है कि रविवार तक नए मुख्यमंत्री का चुनाव हो जाए और अगले सप्ताह शपथ ग्रहण हो सकता है। दिल्ली में सीएम समेत अधिकतम 7 मंत्री बनाए जा सकते हैं। आम आदमी पार्टी के 10 साल पुराने शासन को खत्म करके भाजपा ने दिल्ली की 70 में से 48 सीटों पर जीत हासिल की है। बहुमत से 12 अधिक सीटें हासिल करने वाली भाजपा ने चुनाव से पहले किसी को मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित नहीं किया था। पीएम मोदी के नाम और उनकी गारंटियों पर बनी सरकार का चेहरा कोई ऐसा शख्स भी हो सकता है, जो अभी तक रेस में नहीं बताया जा रहा है। राजस्थान और मध्य प्रदेश समेत कई राज्यों में भाजपा चौंका चुकी है। हालांकि, कुछ ऐसे नाम हैं जिन्हें कैबिनेट में जगह मिलना लगभग तय माना जा रहा है। ऐसे 8 में से कम से कम 3 विधायकों की कुर्सी पक्की बताई जा रही है। पहले जाट चेहरों की बात, एक केजरीवाल का पुराना साथी पिछले दो चुनावों में भाजपा एक भी जाट बहुल सीट नहीं जीत पाई। लेकिन इस बार जाटों ने खुलकर भगवा पार्टी का साथ दिया। यही वजह है कि भाजपा ने सभी 10 जाट बहुल सीटों मुंडका, नजफगढ़, नांगलोई जाट, मटियाला, बिजवासन, महरौली, बवाना, नरेला, रिठाला और विकासपुरी में जीत दर्ज की। ऐसे में अब जाटों को रिटर्न गिफ्ट भी मिल सकता है। नई दिल्ली सीट पर अरविंद केजरीवाल को हराने वाले प्रवेश वर्मा भी जाट समुदाय से आते हैं। सीएम की रेस में भी वह सबसे आगे बताए जा रहे हैं। पार्टी सूत्रों का कहना है कि यदि नेतृत्व ने सीएम के तौर पर किसी और को भी चुना तो प्रवेश वर्मा को मंत्री पद मिलना लगभग तय है। वहीं, जाट चेहरे के तौर पर पूर्व मंत्री कैलाश गहलोत भी रेस में हैं। गहलोत ने चुनाव से ठीक पहले इस्तीफा देकर आम आदमी पार्टी सरकार को बड़ा झटका दिया था। इस बार वह भाजपा के टिकट पर बिजवासन से विधायक बने हैं। 'आप' सरकार में गृह और परिवहन जैसे अहम मंत्रालय संभाल चुके कैलाश गहलोत के अनुभव को देखते हुए उन्हें सरकार में शामिल किया जा सकता है। 3 में से एक सिख नेता को मिल सकता है पद भाजपा के टिकट पर तीन दिग्गज सिख नेता भी चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे हैं। इनमें किसी एक को कैबिनेट में शामिल किया जा सकता है। राजौरी गार्डन से जीत हासिल करने वाले मनजिंदर सिंह सिरसा प्रमुख दावेदार माने जा रहे हैं। शीला दीक्षित सरकार में मंत्री रहे और लोकसभा चुनाव से ठीक पहले दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष का पद छोड़कर भाजपा में शामिल हुए अरविंदर सिंह लवली भी रेस में आगे बताए जा रहे हैं। वहीं, आम आदमी पार्टी के दूसरे सबसे बड़े नेता मनीष सिसोदिया को जंगपुरा जैसी सीट से हराने वाले तरविंदर सिंह मारवाह को भी दांव लग सकता है। इन तीन में से एक सिख नेता का मंत्री बनना लगभग तय बताया जा रहा है। 3 पूर्वांचली नेताओं में भी रेस दिल्ली में इस बार भाजपा ने उन सीटों पर भी शानदार सफलता हासिल की है, जहां पूर्वांचली वोटर्स की अधिकता है। भाजपा ने झुग्गी-झोपड़ी और कच्ची कॉलोनियों वाली 17 सीटों पर जीत हासिल की है। चुनाव के दौरान आम आदमी पार्टी और भाजपा के बीच पूर्वांचली वोटर्स के लिए खूब खींचतान देखने को मिली। दिल्ली की राजनीति में पूर्वांचलियों की अहमियत को देखते हुए कैबिनेट में कम से कम एक पूर्वांचली नेता का शामिल होने की पूरी गुंजाइश है। इस मामले में लक्ष्मी नगर से जीते अभय वर्मा की दावेदारी मजबूत मानी जा रही है तो आप लहर में भी यहां कमल खिलाने में कामयाब रहे थे। अभय मूल रूप से दरभंगा के रहने वाले हैं। अभय वर्मा के अलावा संगम विहार से जीते चंदन चौधरी और विकासपुरी से जीते पंकज कुमार सिंह भी दावेदार हैं। recent visitors 46

भाजपा राजधानी को ‘मिनी’ भारत के रूप में दिखाना चाहती ,नए मंत्रिमंडल में दो उपमुख्यमंत्री रखने के विकल्प पर भी विचार कर रही

नई दिल्ली दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी किसे मुख्यमंत्री बनाएगी इसे लेकर तमाम तरह की चर्चा चल रही है। कई लोगों के नाम सीएम रेस में चल रहे हैं। पार्टी ने साफ किया है कि 14 फरवरी के बाद मुख्यमंत्री के नाम पर फैसला लिया जाएगा। जवाहर लाल नेहरू में ग्रैंड शपथग्रहण समारोह होगा। इसी बीच भाजपा राजधानी को 'मिनी' भारत के रूप में दिखाना चाहती है। इसके लिए नए मंत्रिमंडल में दो उपमुख्यमंत्री रखने के विकल्प पर भी विचार कर रही है। पार्टी नेताओं ने बुधवार को यह जानकारी दी। विभिन्न जातियों को साधने में मदद मिलेगी पार्टी के कुछ नेताओं ने कहा कि दिल्ली सरकार में दो उपमुख्यमंत्री रखने के कदम से पार्टी को विभिन्न जातियों, समुदायों और क्षेत्रीय पृष्ठभूमि के विधायकों को समायोजित करने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा, 'इसकी बहुत संभावना है क्योंकि ऐसा कई अन्य राज्यों में भी किया गया है, जहां विभिन्न पृष्ठभूमि के नेताओं को समायोजित करने के लिए उपमुख्यमंत्री बनाए गए हैं। पार्टी शासित राज्यों मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और राजस्थान में ऐसा किया गया है।' रविवार को बैठक संभव यह प्रस्ताव राष्ट्रीय नेतृत्व के विचाराधीन है, जो इस पर अंतिम फैसला लेगा, साथ ही मुख्यमंत्री और अन्य मंत्रियों के नामों को भी अंतिम रूप देगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वीकेंड पर विदेश यात्रा से स्वदेश लौटने के बाद भाजपा के सरकार गठन की प्रक्रिया में तेजी आने की संभावना है। पार्टी नेताओं ने बताया कि सदन के नेता का चुनाव करने के लिए भाजपा विधायक दल की बैठक रविवार को होने की संभावना है, जो दिल्ली का अगला मुख्यमंत्री होगा। पीएम ने दिल्ली को कहा था ‘मिनी इंडिया’ दिल्ली विधानसभा चुनाव में भाजपा की शानदार जीत के बाद भाजपा मुख्यालय में अपने भाषण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली को 'मिनी भारत' का प्रतिबिंब बताया था। दिल्ली भाजपा के एक शीर्ष नेता ने कहा, 'पंजाबी, सिख, पूर्वांचली, उत्तराखंडी, वैश्य, जाट समेत समाज के विभिन्न वर्गों से भाजपा नेता अब विधायक बन गए हैं, जिन्हें हमारी सरकार में प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए।' उन्होंने कहा कि उपमुख्यमंत्री बनाने का विचार पार्टी की इस प्रक्रिया में मदद करेगा। मुख्यमंत्री पद के दावेदारों के रूप में भाजपा विधायकों के कई नाम चर्चा में हैं। पार्टी के एक अन्य वरिष्ठ नेता ने कहा, 'अगर भाजपा का मुख्यमंत्री एक समुदाय से होगा, तो उपमुख्यमंत्री के पद का प्रयोग उन अन्य लोगों के दावों को संतुलित करने के लिए किया जा सकता है, जिनके समुदाय जैसे कि महिला, सिख, जाट या बनिया ने पार्टी को दिल्ली में इतनी शानदार जीत दिलाई है।' रोहिणी के विधायक विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि दिल्ली में भाजपा सरकार जल्द ही छठे दिल्ली वित्त आयोग का गठन करेगी जो चार साल से लंबित है। सीएम रेस में किस-किसके नाम सीएम रेस में कई लोगों के नाम चल रहे हैं। जिनमें प्रवेश वर्मा शामिल हैं जिन्होंने नई दिल्ली सीट से आप सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल को हराया है। इसके अलावा दिल्ली भाजपा के पूर्व प्रमुख विजेंद्र गुप्ता और सतीश उपाध्याय, मनजिंदर सिंह सिरसा, पवन शर्मा, आशीष सूद, रेखा गुप्ता और शिखा राय जैसे वरिष्ठ नेता भी शामिल हैं। पार्टी नेताओं ने करनैल सिंह और राज कुमार भाटिया जैसे कुछ नवनिर्वाचित विधायकों को भी शीर्ष पद का संभावित दावेदार बताया है। recent visitors 44

कौन बनेगा दिल्ली का मुख्यमंत्री? रेस में Manoj Tiwari समेत ये नाम आगे..

नई दिल्ली दिल्ली में 26 साल बाद सत्ता में लौटी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) मुख्यमंत्री किसे बनाएगी? यह सवाल अब भी कायम है। भाजपा की ओर से इसको लेकर किसी तरह का संकेत नहीं दिया गया है। लेकिन कई नाम मीडिया और राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बने हुए हैं। अटकलें इस बात की भी तेज है कि इस बार भाजपा दिल्ली में एक पूर्वांचली को मुख्यमंत्री बना सकती है। खासकर किसी ऐसे नेता को यह जिम्मेदारी दी जा सकती है जिनकी जड़ें बिहार में हैं। ऐसा करके भाजपा एक एक साथ दो निशाने साध सकती है। पूर्वांचलियों को रिटर्न गिफ्ट दिल्ली में पूर्वांचली वोटर्स की एक बड़ी आबादी है। इस बार बड़ी संख्या में पूर्वांचली वोटर्स ने भाजपा का साथ दिया है, जो पिछले 2-3 चुनावों में आम आदमी पार्टी के साथ रुख कर चुके थे। भाजपा ने इस बार झुग्गी और कच्ची कॉलोनियों में बेहतर प्रदर्शन किया है, जहां पूर्वांचली वोटर्स की संख्या ज्यादा है। झुग्गी बस्ती की बहुलता वाले 18 विधानसभा में से 10 पर भाजपा ने जीत हासिल की है। वहीं 10 सीटों पर कच्ची कॉलोनियों के वोटर्स हार जीत तय करते हैं और इनमें से 7 पर कमल खिला है। इस हिसाब से देखें तो 17 सीटें जितवाने में पूर्वांचलियों ने भाजपा की मदद की है। इसके अलावा अन्य सीटों पर भी उनकी कम या ज्यादा मौजूदगी है। ऐसे में भाजपा किसी पूर्वांचली को सीएम बनाकर रिटर्न गिफ्ट दे सकती है और आगे के चुनावों के लिए भी अपना बेस मजबूत कर सकती है। दिल्ली से बिहार को साध सकती है भाजपा कुछ जानकारों का मानना है कि भाजपा जिस तरह महीन राजनीति करती है और एक चुनाव के खत्म होते ही दूसरे चुनाव की तैयारी में जुट जाती है, उसको देखते संभव है कि दिल्ली से ही वह बिहार को साधने की कोशिश करे, जहां कुछ महीने बाद विधानसभा चुनाव होने जा रहा है। सूत्रों की मानें तो भाजपा राजधानी दिल्ली में बिहार के किसी नेता को मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बिठाकर ना सिर्फ दिल्ली में मौजूद पूर्वांचलियों को खुश कर सकती है बल्कि इसका असर 1000 किलोमीटर दूर भी होने की उम्मीद है। भाजपा को आगामी बिहार चुनाव में इसका फायदा मिल सकता है। बिहार से बड़ी संख्या में लोग दिल्ली में रोजगार और बेहतर शिक्षा, इलाज की तलाश में दिल्ली आते जाते रहे हैं। बिहार में ऐसे कम ही परिवार आपको मिलेंगे जिसका कोई सदस्य दिल्ली में ना रहता हो। ऐसे में यदि दिल्ली में किसी बिहारी को सीएम बनाया जाता है तो एक सकारात्मक संदेश बिहार के हर परिवार तक पहुंचेगा। बिहारी बना सीएम तो किनका लग सकता है दांव? दिल्ली में भाजपा में पूर्वांचल खासकर बिहार से आने वाले कई बड़े नेता हैं। लेकिन संभव है कि जीते हुए किसी विधायक में से ही पार्टी मुख्यमंत्री बनाएगी। ऐसा होने पर अभय वर्मा, डॉ. पंकज कुमार सिंह और चंदन कुमार चौधरी की लॉटरी लग सकती है। इनमें सबसे मजबूत दावेदार अभय वर्मा को माना जा रहा है जो मूलरूप से दरभंगा के रहने वाले हैं। पेशे से वकील अभय वर्मा दिल्ली भाजपा के उपाध्यक्ष भी हैं। वह आप की लहर में भी लक्ष्मी नगर विधानसभा से चुनाव जीतने में कामयाब रहे थे। इस बार उन्होंने बीबी त्यागी को 11542 वोटों से मात दी है। वहीं, खगड़िया के रहने वाले चंदन चौधरी ने संगम विहार से जीत हिसाल की है। उन्होंने यहां आम आदमी पार्टी के दिनेश मोहनिया को मात दी है। पक्सर से आने वाले डॉ. पंकज कुमार सिंह ने विकासपुरी विधानसभा क्षेत्र से जीत हासिल की है। उन्होंने पहली बार यहां कमल खिलाया है। पंकज के पिता बाबू राज मोहन सिंह दिल्ली में एडिशनल कमिश्नर रह चुके हैं। recent visitors 61