मुख्यमंत्री डॉ. यादव आज 10 हजार गायों की क्षमता वाली हाइटैक गौ-शाला का भूमि-पूजन करेंगे

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव बरखेड़ी डोब, भोपाल में 10 हजार गायों की क्षमता वाली हाइटैक गौ-शाला का भूमि-पूजन आज प्रात: 10 बजे करेंगे। इस अवसर पर पशुपालन एवं डेयरी राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री लखन पटेल भी उपस्थित रहेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में प्रदेश में वर्तमान वर्ष (चैत्र माह से फाल्गुन माह तक) गौ-संरक्षण एवं गौ-संवर्धन वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। इसी को दृष्टिगत रखते हुए भोपाल के बरखेड़ी डोब में 10 हजार गायों की क्षमता वाली अत्याधुनिक गौ-शाला के निर्माण की योजना है। गौ-शाला लगभग 25 एकड़ क्षेत्र में बनाई जा रही है। इसमें गायों के आधुनिक तरीके से रख-रखाव के साथ ही उनके उपचार के लिए सभी संसाधनों से युक्त चिकित्सा वार्ड का भी निर्माण किया जाएगा। गौ-शाला में सीसी टीवी के माध्यम से निरंतर मॉनीटरिंग की व्यवस्था रहेगी। लगभग 15 करोड रुपए की लागत की गौ-शाला का निर्माण कार्य ग्रामीण यांत्रिकी विभाग द्वारा कराया जाएगा, वहीं नगर निगम एवं पशुपालन विभाग नोडल एजेंसी होंगे। गौ-शाला को स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट और जिला पंचायत द्वारा वित्तपोषण किया जाएगा। गौ-शाला का संचालन नगर निगम द्वारा किया जाएगा। गौ-शाला का निर्माण तीन चरणों में होगा, जिसमें प्रथम चरण में लगभग 2000 पशु क्षमता का निर्माण किया जाएगा। इस अत्याधुनिक गौ-शाला में गायों को भूसा, हरा घास, पशु आहार आदि कन्वेयर बेल्ट के माध्यम से पहुंचाया जाएगा। गौ-शाला में गायों के गोबर एवं मूत्र आदि से विभिन्न सामग्री तैयार की जाएगी और जैविक खाद निर्माण के लिए संयंत्र भी लगाया जाएगा। गौ-शाला में रहने वाले पशुओं एवं सड़कों पर घायल एवं बीमार होने वाले पशुओं के उपचार के लिए चिकित्सा वार्ड भी बनाया जा रहा है। recent visitors 67

उज्जैन पधार कर आचार्य सांदीपनि जी से शिक्षा प्राप्त करना सनातन संस्कृति की अद्वितीय घटना है : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि भगवान श्रीकृष्ण का मध्यप्रदेश की धरती उज्जैन पधार कर आचार्य सांदीपनि जी से शिक्षा प्राप्त करना सनातन संस्कृति की अद्वितीय घटना है। महाभारत जैसे भीषण युद्ध के बीच शास्त्र सम्मत मार्ग दिखाते हुए कर्मवाद की शिक्षा देने का उनका प्रयास और विश्व को श्रीमद् भगवद गीता की देन अद्वितीय है। शास्त्र के रूप में स्थापित भगवद गीता विद्वतजन, ऋषि मुनि से लेकर जन-सामान्य तक के मन में जिज्ञासा भी उत्पन्न करती है और समाधान भी प्रदान करती है। गीता को आचरण और व्यवहार में धारण कर मानव, अपने जीवन को कर्मवाद से जोड़कर सद्मार्ग का अनुसरण करते हुए सफलताएं प्राप्त कर सकता है। इस वर्ष गीता जयंती पर इस्कॉन के साथ मिलकर स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा भगवद गीता पर केंद्रित प्रतियोगिता कराने का निर्णय लिया गया है। गीता के श्लोकों का वाचन, अध्ययन-मनन और भगवद गीता में लोगों की रुचि बढ़ाने के उद्देश्य से यह अकादमिक अभियान चलाया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विद्यार्थियों से अधिक से अधिक संख्या में इस प्रतियोगिता में भाग लेने की अपील की। स्कूल शिक्षा विभाग और विक्रमादित्य शोध पीठ द्वारा इस्कॉन के सहयोग से होगी प्रतियोगिता उल्लेखनीय है कि भगवद गीता आधारित मूल्य शिक्षा प्रतियोगिता, स्कूल शिक्षा विभाग और संस्कृति विभाग के विक्रमादित्य शोधपीठ द्वारा इस्कॉन के सहयोग से आयोजित की जा रही है। इसका उद्देश्य छात्रों में स्थायी नैतिक मूल्यों का संचार करना, चरित्र निर्माण को प्रेरित करना और आज के युवाओं में व्याप्त विभिन्न व्यसनों के खतरों के बारे में जागरूकता फैलाना है। जिला स्तर पर 26 से 29 नवंबर तक होंगी प्रतियोगिताएं जिला स्तरीय प्रतियोगिता के अंतर्गत कक्षा-9 से 12 तक के छात्रों के लिए ऑनलाइन क्विज-प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी। प्रत्येक कक्षा की प्रतियोगिता के लिये पृथक-पृथक दिवस निर्धारित किये गये हैं, जिसमें 26 नवंबर को कक्षा -9वीं, 27 नवंबर को कक्षा-10वीं, 28 नवंबर को कक्षा-11वीं और 29 नवंबर को कक्षा-12वीं के छात्रों के लिये क्विज प्रतियोगिता होगी। सभी परीक्षाएं स्कूल में दोपहर 12 बजे से 1 बजे तक आयोजित की जाएंगी। भागीदारी के लिये लिंक 19 नवंबर तक उपलब्ध करवाई जायेगी। प्रत्येक जिले में कक्षा के शीर्ष प्रदर्शन करने वाले छात्र राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में 10 दिसंबर 2024 को उज्जैन में गीता महोत्सव के दौरान शामिल होंगे। राज्य स्तरीय विजेताओं को मुख्यमंत्री द्वारा पुरस्कृत किया जाएगा। यह मूल्य शिक्षा प्रतियोगिता छात्रों के शैक्षिक पाठ्यक्रम को आवश्यक नैतिक मूल्यों जैसे सत्यनिष्ठा, सहानुभूति, सम्मान और उत्तरदायित्व से समृद्ध बनाने के लिए डिजाइन की गई है। साथ ही उन्हें व्यसनों के हानिकारक प्रभावों के प्रति जागरूक करना और जिम्मेदार एवं नैतिक रूप से जागरूक भविष्य के नागरिकों के रूप में उनके व्यक्तित्व के विकास का प्रयास भी इस पहल का लक्ष्य है।   recent visitors 96

पं. धीरेंद्र शास्त्री को पदयात्रा के माध्यम से क्षेत्र में जन-जन को उनका मार्गदर्शन और आशीर्वाद प्राप्त होगा- मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की आध्यात्मिक पदयात्रा के लिए उन्हें बधाई और शुभकामनाएं दी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि स्पष्टवादिता पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की विशेषता है। वे सनातन संस्कृति के उत्थान के उद्देश्य से यात्रा पर निकले हैं। प्रसन्नता का विषय है कि पदयात्रा के माध्यम से क्षेत्र में जन-जन को उनका मार्गदर्शन और आशीर्वाद प्राप्त होगा। उल्लेखनीय है कि बागेश्वर धाम के प्रमुख पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री 21 नवंबर से सनातन के जागरण के लिए बागेश्वर धाम से पद यात्रा आरंभ कर रहे हैं। यह यात्रा 160 किमी की होगी जो 29 नवंबर को ओरछा धाम पहुंचेगी। सनातन का जागरण और जातीय भेदभाव, छुआछूत एवं अगड़े-पिछड़े का भेद मिटाना और सामाजिक एकता को प्रोत्साहित करना पदयात्रा का उद्देश्य है।   recent visitors 78

प्रदेश में 17 हजार 871 बहनों को पोर्टल के माध्यम से मिलेगी नियुक्ति

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बुधवार को मंत्रि-परिषद की बैठक के पहले राजधानी में सरकारी मकानों के आवंटन से संबंधित नए पोर्टल का लोकार्पण किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गृह विभाग को इस पहल के लिए बधाई दी। उल्लेखनीय है कि अब तक इस तरह के पोर्टल का निर्माण नहीं हुआ था। भोपाल स्थित शासकीय आवास आवंटन नियम 2000 के प्रावधानों के अनुसार संपूर्ण आवास आवंटन प्रक्रिया का संचालन अब पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन किया जाएगा। पोर्टल www.sampada.mp.gov.in के माध्यम से आवंटिती अर्थात शासकीय सेवक को ऑनलाइन आवास आवंटन की सूचना पंजीकृत मोबाइल नंबर पर गृह विभाग की ओर से एसएमएस गेटवे MPHOME के माध्यम से रियल टाईम बेसिस पर प्रेषित की जाएगी। शासकीय सेवक के हित में वरीयता क्रम से आवासों के आवंटन का कार्य पोर्टल के माध्यम से जनरेट किया जाएगा। इससे मानवीय हस्तक्षेप और पक्षपात के मामले शून्य हो जाएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बुधवार को न्यू मार्केट के पास निर्मित साऊथ टी.टी. नगर के बहुमंजिला आवास गृहों का आवंटन भी किया। इन नवनिर्मित आवास गृहों में "जी" और "एच" श्रेणी के कुल 1210 आवास शामिल हैं। पोर्टल के माध्यम से शासकीय आवास का आधिपत्य प्राप्त करने की सूचना दी जा सकेगी। आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं की भर्ती होगी ऑनलाइन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं की ऑनलाइन भर्ती के लिए विकसित व्यवस्था की जानकारी प्राप्त की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि निश्चित ही यह पारदर्शी प्रक्रिया त्वरित और सुगमता पूर्वक नियुक्ति की कार्यवाही में मददगार होगी। इसके साथ ही नियुक्ति प्रक्रिया से संबंधित प्राप्त होने वाली शिकायतों की संख्या न्यून हो जाएगी। नई व्यवस्था में आवेदक एमपी ऑनलाइन कियोस्क अथवा स्वयं के मोबाइल पर एप्लीकेशन डाउनलोड कर समस्त दस्तावेजों को आवेदन के साथ अपलोड कर आवेदन कर सकेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ऑनलाइन मॉड्यूल https://chayan.mponline.gov.in/ की कार्यप्रणाली को उपयोगी बताते हुए महिला एवं बाल विकास विभाग को इस शुरूआत के लिए बधाई दी। भारत सरकार ने प्रधानमंत्री जनजातीय न्याय महाअभियान (पीएम जनमन) के अंतर्गत विशेष पिछड़ी जनजातियों के निवास वाले 20 जिलों में 549 नए आंगनवाड़ी केन्द्र मंजूर किए हैं। वर्तमान के 5201 पदों के लिए आंगनवाड़ी केंद्रों में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं की नियुक्ति की जाना है। इसके अलावा अन्य नव सृजित 12 हजार 670 पद मिलाकर कुल 17 हजार 871 पदों की पूर्ति की जाएगी। इस तरह बड़ी संख्या में बहनों को ऑनलाइन नियुक्ति प्रक्रिया के माध्यम से रोजगार प्राप्त होगा। आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को प्रतिमाह 13 हजार एवं आंगनवाड़ी सहायिकाओं को 6500 मासिक मानदेय प्राप्त होगा।   recent visitors 91

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश प्राकृतिक संसाधनों और संपदा से संपन्न राज्य है

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश प्राकृतिक संसाधनों और संपदा से संपन्न राज्य है। प्रदेश की हर काल और युग में विशेष सांस्कृतिक पहचान रही है। आधुनिक काल में औद्योगिक समृद्धि के आधार पर देश का नंबर वन राज्य बनाने के संकल्प के साथ प्रदेश में रोजगारपरक उद्योगों को बढ़ावा दिया जा रहा है। प्रदेश की समृद्ध प्राचीन संस्कृति और कलात्मक धरोहर को संजोए रखते हुए जन-कल्याणकारी नीतियों के माध्यम से उद्योग अनुकूल वातावरण तैयार कर प्रदेश में व्यापार, उद्योग और सेवा क्षेत्रों का वृहद विकास हो रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंगलवार को दिल्ली स्थित भारत मंडपम में चल रहे 43वें भारत अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेले में मध्यप्रदेश दिवस समारोह को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में दो ज्योतिर्लिंग स्थित है। यह नदियों का मायका है, जहां पावन नर्मदा और शिप्रा नदियां बहती हैं। प्रदेश वन्य-जीव से संपन्न एकमात्र टाइगर स्टेट, तेंदुआ स्टेट और चीता स्टेट राज्य है। प्रदेश में खनिज संपदा भी प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है और यह एकमात्र हीरा उत्पादक राज्य है। इसके अलावा प्रदेश की सदियों से कला, संस्कृति और सभ्यता की विशेष पहचान रही है। इसका 5 हजार साल पुराना समृद्ध इतिहास रहा है और यह भगवान श्रीकृष्ण और भगवान श्रीराम की कर्मभूमि और तपोभूमि रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि ऐतिहासिक काल से ही प्रदेश की व्यापार और व्यावसायिक समृद्धि की भी विशेष पहचान रही है। इसी क्रम में वर्तमान में मध्यप्रदेश सरकार संभागीय स्तर पर रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव और औद्योगिक केंद्रों में रोड-शो कर प्रदेश में उद्योगपतियों को निवेश के लिए आमंत्रित कर रहा है। प्रदेश में ‘एक जिला-एक उत्पाद’ योजना के अंतर्गत महिला स्व-सहायता समूह को भी प्रोत्साहित किया जा रही है। प्रदेश में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों के साथ भारी उद्योगों को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। प्रदेश को सबसे तेज गति से बढ़ने वाला राज्य बनाने के उद्देश्य से वर्ष 2025 को उद्योग वर्ष के रूप में मनाया जाएगा। मध्यप्रदेश की सकल घरेलू उत्पाद को अगले 5 साल में दोगुना करने के लिए प्रदेश सरकार संकल्पित है। सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्री श्री चैतन्य कुमार काश्यप ने कहा कि विकसित भारत की प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की परिकल्पना और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की तत्परता के परिणामस्वरुप मध्यप्रदेश औद्योगीकीकरण के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छू रहा है। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री की परिकल्पना से रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव के आयोजन के माध्यम से हर जिले में युवा उद्यमी आगे बढ़ रहे है। प्रमुख उद्योगपतियों को आमंत्रित करने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री डॉ. यादव विदेश यात्रा पर भी जाने वाले हैं। विकसित मध्यप्रदेश बनाने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री ने वर्ष 2025 को उद्योग वर्ष के रूप में मनाने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मेले में मध्यप्रदेश मंडप का दीप प्रज्ज्वलित कर उद्घाटन किया। उन्होंने मध्यप्रदेश मंडप में लगे विभिन्न स्टॉल का अवलोकन भी किया और शिल्पकारों का मनोबल बढ़ाया। मंडप को ‘विकसित भारत@2047’ की थीम पर विकसित किया गया है, जिसमें प्रदेश की धरोहर के साथ स्टार्ट-अप्स और उद्यमों का कलात्मक प्रदर्शन किया गया है। मंडप में युवा, गरीब, नारी और किसान कल्याण के मिशन को प्रमुखता से प्रदर्शित किया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यक्रम में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए पुरस्कार भी वितरित किए। मध्यप्रदेश मंडप में बेस्ट स्टॉल डिस्प्ले के लिए पर्यटन विभाग और हस्तकला के लिए मध्यप्रदेश माटीकला बोर्ड को पुरस्कृत किया गया। मंडप में सर्वश्रेष्ठ सजीव कला प्रदर्शन के लिए श्री मोहम्मद यूसुफ खत्री को सम्मानित किया गया। साथ ही मध्यप्रदेश मंडप के अन्य प्रतिभागियों को भी श्रेष्ठ प्रदर्शन के लिए सम्मानित किया गया। मध्यप्रदेश दिवस समारोह में प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक कार्यक्रम की झलक देखने को मिली। डॉ. शिप्रा सुल्लेरे के संगीत निर्देशन और श्री दविंदर सिंह ग्रोवर के संयोजन में जबलपुर के श्री जानकी बैंड की प्रस्तुति दी गई। सुश्री पूजा श्रीवास्तव के निर्देशन में बुंदेलखंड के अखाड़ा लोक नृत्य की भी मनमोहक प्रस्तुति हुई। कार्यक्रम में केंद्रीय महिला बाल विकास राज्यमंत्री श्रीमती सावित्री ठाकुर, प्रदेश की नगरीय विकास एवं आवास राज्यमंत्री श्रीमती प्रतिमा बागरी और मध्यप्रदेश लघु उद्योग निगम के प्रबंध संचालक श्री दिलीप कुमार भी उपस्थित थे।   recent visitors 83

मुख्यमंत्री ने किया एसोसिएशन ऑफ यूनिवर्सिटीज ऑफ एशिया एंड द पैसिफिक के 17वें सम्मेलन का शुभारंभ

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि भारत का अतीत गौरवशाली रहा है और भारत प्राचीनकाल से ही वैश्विक स्तर पर उच्च शिक्षा का मुख्य केन्द्र रहा। कई देशों के विद्यार्थियों, राजकुमारों ने तक्षशिला, नालंदा जैसे भारत के विश्वविद्यालयों में शिक्षा ग्रहण की। लेकिन ऐतिहासकि रूप से हमें ऐसा कोई उल्लेख प्राप्त नहीं होता, जिसमें भारत में शिक्षा ग्रहण किए किसी व्यक्ति अथवा सत्ताधीश ने अन्य राज्य पर आक्रमण किया हो। यह तथ्य प्राचीन काल से चली आ रही हमारी शिक्षा व्यवस्था के सुदृढ़ जीवन मूल्यों और नैतिक मूल्यों को दर्शाता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंगलवार को होटल ताज में एसोसिएशन ऑफ यूनिवर्सिटीज ऑफ एशिया एंड द पैसिफिक के 17वें सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। अतीत से वर्तमान की कई घटनाएं जीवन मूल्यों के प्रति दृष्टिकोण की भिन्नता के कारण हुई मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि "उच्च शिक्षा का बदलता स्वरूप और हमारे जीवन मूल्य" विषय पर आयोजित यह सम्मेलन सम-सामयिक महत्व का है। अतीत से लेकर वर्तमान तक की कई घटनाएं जीवन मूल्यों के प्रति दृष्टिकोण की भिन्नता के परिणाम स्वरूप ही घटित हुईं। रामायण काल में रावण हो या महाभारत काल में कौरव, योग्यता और क्षमता में कोई भी कम नहीं था, लेकिन उनके जीवन मूल्य और नैतिक मूल्य उचित नहीं थे, इसी कारण उन्हें कभी सम्मान नहीं मिला और वे समाज में तथा इतिहास में सदैव नकारे गए। कर्ण की योग्यता अद्भुत थी, लेकिन उनकी दृष्टि, प्रतिशोध, जिद और नकारात्मक भाव ने उन्हें पतन की ओर अग्रसर किया। इसी प्रकार के उदाहरण हमें सोने की लंका बनाने वाले रावण के भी प्राप्त होते हैं। सभी प्रकार के वैभव और सामर्थ्य होने के बाद भी वे कभी स्वीकारे नहीं गए और नैतिक मूल्यों के आधार पर ही वनवासी श्रीराम ने उन्हें परास्त किया। अर्थात् यह नैतिक मूल्यों और जीवन मूल्यों की ही विजय थी। नई शिक्षा नीति के माध्यम से लागू किए जा रहे हैं कई नवाचार मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रूस-यूक्रेन युद्ध और इजराइल के संघर्ष का उल्लेख करते हुए कहा कि हमारे आदर्शों और जीवन मूल्यों का ही परिणाम है कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी इन संघर्षों में भी शांति के लिए प्रयास करते दिखाई देते हैं। यह भारतीय जीवन मूल्यों के सामर्थ्य को दर्शाता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वर्ष 2020 से लागू नई शिक्षा नीति के माध्यम से पढ़ने और सीखने की प्रक्रिया को अधिक लचीला, सरल और रूचिपूर्ण बनाते हुए विद्यिार्थियों को विभिन्न संकायों के विषयों के अध्ययन की सुविधा प्रदान की गई है। अध्ययन प्रक्रिया को आयु के बंधन से मुक्त करते हुए क्रेडिट प्रदान करने जैसे नवाचार भी प्रदेश में किए गए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने एसोसिएशन ऑफ यूनिवर्सिटीज ऑफ एशिया एंड द पैसिफिक को मध्यप्रदेश में अपनी गतिविधियों के विस्तार के लिए आमंत्रित किया। वैश्विक स्तर की शिक्षा देश में ही उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध जागरण लेक सिटी यूनिवर्सिटी के चांसलर श्री हरिमोहन गुप्ता ने बताया कि 35 देशों में फैले एसोसिएशन ऑफ यूनिवर्सिटीज ऑफ एशिया एंड द पैसिफिक का सम्मेलन भारत में पहली बार हो रहा है। एसोसिएशन मध्यप्रदेश में उच्च शिक्षा और कौशल विकास पर केन्द्रित वैश्विक संस्थाओं की स्थापना कर विद्यार्थियों को वैश्विक स्तर की शिक्षा देश में ही उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। इस अवसर पर प्रमुख सचिव उच्च शिक्षा श्री अनुपम राजन, शिक्षाविद श्री अनूप स्वरूप और विभिन्न विश्वविद्यालयों के प्रतिनिधि तथा विषय-विशेषज्ञ उपस्थित थे।   recent visitors 63

मध्यप्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ और व्यापक बनाना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता: डॉ. मोहन यादव

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ और व्यापक बनाना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी का मानना है कि आत्मनिर्भर और सशक्त भारत की नींव स्वस्थ नागरिकों से ही सुदृढ़ होगी। प्रधानमंत्री श्री मोदी के विचार को साकार करने के लिए राज्य सरकार हर नागरिक को सुलभ और उन्नत चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। इस दिशा में 21 नवंबर को एक और इतिहास रचने की ओर प्रदेश अग्रसर है जब मुख्यमंत्री डॉ. यादव उज्जैन मेडिकल कॉलेज का भूमिपूजन करेंगे, जो प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को नए आयाम प्रदान करेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सिंहस्थ-2028 की आवश्यकताओं को दृष्टिगत रखते हुए प्रोजेक्ट को प्राथमिकता से पूर्ण किया जायेगा। इससे उज्जैन और आसपास के जिलों के मरीजों को उच्च गुणवत्ता वाली चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकेंगी । मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वर्ष 2003 तक प्रदेश में केवल 5 शासकीय मेडिकल कॉलेज थे, जो अब बढ़कर 17 हो चुके हैं। प्रदेश में एम.बी.बी.एस. सीटें भी 720 से बढ़कर 2,575 हो गई हैं। श्योपुर, सिंगरौली, मंडला और राजगढ़ में निर्माणाधीन मेडिकल कॉलेजों के साथ-साथ छतरपुर, दमोह और बुधनी में स्ववित्तीय अनुदान से मेडिकल कॉलेज स्थापित किए जा रहे हैं। साथ ही 12 अन्य जिलों में सार्वजनिक जनभागीदारी नीति के तहत मेडिकल कॉलेज खोलने की प्रक्रिया जारी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि 20 नए मेडिकल कॉलेजों की स्थापना से एम.बी.बी.एस. सीटों में 2,000 से अधिक की वृद्धि होगी। भोपाल और ग्वालियर में अस्पताल की बेड कैपेसिटी को 2,500 तक बढ़ाने के साथ-साथ इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर और रीवा में सुपरस्पेशलिटी अस्पताल संचालित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि जबलपुर में स्कूल ऑफ एक्सीलेंस इन पल्मोनरी मेडिसिन और इंदौर में स्कूल ऑफ एक्सीलेंस फॉर आई जैसी योजनाएं प्रदेश को चिकित्सा क्षेत्र में अग्रणी बना रही हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि नर्सिंग और पैरामेडिकल शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए 14 मेडिकल कॉलेजों में नर्सिंग कॉलेज स्थापित किए जा रहे हैं। वर्तमान में 24 शासकीय नर्सिंग कॉलेज संचालित हो रहे हैं, जो जल्द ही 37 हो जाएंगे। प्रदेश में 250 पैरामेडिकल कॉलेजों में लगभग 25,000 छात्र शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। इसके साथ ही, मध्यप्रदेश देश का एकमात्र राज्य है, जहां मेडिकल की पढ़ाई हिंदी में प्रारंभ की गई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को उन्नत चिकित्सा सुविधाओं से सुसज्जित किया जा रहा है, ताकि ये जिला अस्पतालों के समान उच्च गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान कर सकें। इसके साथ ही इंडियन पब्लिक हेल्थ स्टैंडर्ड (IPHS) के मानकों के अनुरूप 30,000 से अधिक चिकित्सकीय और सहायक चिकित्सकीय पदों पर भर्ती की जाएगी। उन्होंने कहा कि स्वस्थ नागरिकों से ही आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश का निर्माण संभव है। 592 करोड़ रुपये की लागत से होगा मेडिकल कॉलेज का निर्माण उज्जैन मेडिकल कॉलेज 14.97 एकड़ भूमि पर निर्मित किया जाएगा। निर्माण क्षेत्र 1 लाख 42 हज़ार 34 वर्ग मीटर प्रावधानित है। इसकी कुल लागत 592.3 करोड़ रुपए है। इसमें फायर सेफ्टी के लिए आधुनिक तकनीकों, ऊर्जा दक्षता के लिए एलईडी लाइटिंग, सौर ऊर्जा और ऊर्जा-कुशल एचवीएसी सिस्टम का उपयोग किया गया है। वर्षा जल संग्रहण और अपशिष्ट जल के पुन: उपयोग के साथ सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का भी प्रावधान किया गया है। मेडिकल कॉलेज में फुट ओवर ब्रिज, ग्रंथालय भवन, सर्विस ब्लॉक, एमजीपीएस ब्लॉक और ईएसएस ब्लॉक की सुविधा शामिल हैं। 550 बिस्तरों वाला आधुनिक शिक्षण अस्पताल उज्जैन मेडिकल कॉलेज शिक्षण अस्पताल की क्षमता 550 बेड की है। अस्पताल में 24×7 आपातकालीन सेवाओं, फार्मेसी, रेडियोलॉजी (CT, MRI, X-RAY, फ्लोरोस्कोपी, अल्ट्रासाउंड), जनरल एवं सुपर स्पेशलिटी ओपीडी जैसी सेवाओं से सुसज्जित है। अस्पताल में 550 आई.पी.डी. बिस्तर, ICU और CCU के लिए 70 बिस्तर, 11 मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर, 1 कैथ लैब और 2 एंडोस्कोपी यूनिट उपलब्ध हैं। इसके अलावा, परमाणु चिकित्सा विभाग और 2 रेडियोथेरेपी बंकर (ब्रैकीथेरेपी और सीटी सिम्युलेटर) जैसी उन्नत सुविधाएं भी प्रदान की गई हैं। डॉक्टरों, स्टाफ और जनता के लिए कैफेटेरिया की व्यवस्था भी है। निर्माण कार्य मध्यप्रदेश भवन विकास निगम द्वारा किया जायेगा। 100 एम.बी.बी.एस. सीट की प्रवेश क्षमता उज्जैन मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस छात्रों की प्रवेश क्षमता 100 प्रावधानित है। मेडिकल कॉलेज में 4 अत्याधुनिक लेक्चर थियेटर (प्रत्येक की क्षमता 180) और 2 परीक्षा हॉल (प्रत्येक की क्षमता 250) रहेगी। सेंट्रल लाइब्रेरी, शिक्षण और फैकल्टी क्षेत्र, प्रयोगशाला और कौशल प्रशिक्षण केंद्र के साथ प्रशासनिक भवन, सामान्य कक्ष और मनोरंजन सुविधाएं भी उपलब्ध होंगी। 380 नर्सिंग विद्यार्थियों के लिए छात्रावास सुविधा का प्रावधान है। इसमें स्टिल्ट पार्किंग, सामान्य कक्ष, मनोरंजन क्षेत्र, डायनिंग हॉल और किचन की सुविधाएं उपलब्ध हैं। यूजी और इंटर्न छात्र एवं छात्राओं के लिए छात्रावास उज्जैन मेडिकल कॉलेज में छात्रों के लिए 329 यूजी और 70 इंटर्न तथा छात्राओं के लिए 286 अंडरग्रेजुएट और 58 इंटर्न की क्षमता वाला छात्रावास रहेगा। इनमें स्टिल्ट पार्किंग, सामान्य कक्ष, मनोरंजन क्षेत्र और डायनिंग सुविधाएं रहेंगी। 145 विद्यार्थियों की क्षमता वाला आरडीएच छात्रावास जिम, डायनिंग हॉल और स्टिल्ट पार्किंग जैसी सुविधाओं से युक्त रहेगा।   recent visitors 62