सशक्त आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश की नींव है स्वस्थ नागरिक : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ और विस्तृत बनाना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी का मानना है कि आत्मनिर्भर और सशक्त भारत की नींव स्वस्थ नागरिकों से बनती है। राज्य सरकार का लक्ष्य है कि हर नागरिक, चाहे वह शहर में हो या दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में, उन्नत चिकित्सा सेवाओं तक आसानी से पहुंच सके। इसी उद्देश्य से राज्य के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को उन्नत चिकित्सा सुविधाओं से सुसज्जित किया जा रहा है, जिससे ये केंद्र जिला अस्पतालों के समान उच्च गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान कर सकें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार सभी नागरिकों को उन्नत स्वास्थ्य सुविधाएँ प्रदान करने और उन्हें स्वस्थ रखने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। स्वस्थ नागरिकों से ही आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश का निर्माण संभव है। राज्य सरकार का यह प्रयास है कि हर नागरिक को स्वास्थ्य सेवाएं मिलें और हर क्षेत्र में लोग पूरी ऊर्जा से समाज और देश के विकास में अपनी भूमिका निभा सकें। चिकित्सा शिक्षा का विस्तार और मैनपॉवर की बढ़ोतरी मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि राज्य सरकार प्रधानमंत्री मोदी के "स्वस्थ भारत सशक्त भारत" के दृष्टिकोण के तहत चिकित्सा शिक्षा का भी तेजी से विस्तार कर रही है। मध्यप्रदेश में वर्तमान में 17 सरकारी और स्वशासी मेडिकल कॉलेज संचालित हैं और नए मेडिकल कॉलेजों का निर्माण जारी है। हाल ही में सिवनी, नीमच, और मंदसौर में नए मेडिकल कॉलेजों का संचालन शुरू हुआ है और 8 अन्य मेडिकल कॉलेज निर्माणाधीन हैं। इसके अलावा, राज्य सरकार ने पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल के तहत 12 और मेडिकल कॉलेज खोलने की योजना बनाई है, जिससे प्रदेश में चिकित्सा विशेषज्ञता को बढ़ावा मिलेगा। 30 हज़ार से अधिक चिकित्सकीय, सहायक चिकित्सकीय पदों पर होगी भर्ती मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इंडियन पब्लिक हेल्थ स्टैंडर्ड (IPHS) के मानकों के अनुरूप राज्य में शीघ्र ही 30 हजार से अधिक चिकित्सकीय और सहायक चिकित्सकीय मैनपॉवर की भर्ती की जाएगी, जिससे स्वास्थ्य सेवा प्रदाय में और सुधार होगा। आधुनिक तकनीक और सेवाओं का समावेश मध्यप्रदेश के प्रमुख स्वास्थ्य केंद्रों में MRI, CT स्कैन, और PET CT जैसी आधुनिक उपकरणों की सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के लिए 42 प्रकार की एंटी-कैंसर दवाएं उपलब्ध कराई गई हैं, जिससे गंभीर मरीजों को समय पर उचित उपचार मिल सके। राज्य के सभी जिला और सिविल अस्पतालों में अब 132 प्रकार की जांच सेवाएं उपलब्ध हैं, जबकि सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में 80 प्रकार की जांच की सुविधा दी जा रही है। प्रदेश में 324 हब और 1,610 स्पोक स्थापित किए गए हैं, जहाँ प्रतिदिन 35 हजार से अधिक जांचें जिला स्तर पर और 32 हजार से अधिक जांचें हब और स्पोक पर हो रही हैं। इसी तरह सभी जिला अस्पतालों में अब डायलिसिस, CT स्कैन और डिजिटल एक्स-रे की सुविधाएं उपलब्ध हैं। मध्यप्रदेश का एमवाय (महाराजा यशवंतराव) अस्पताल इन्दौर देश का पहला सरकारी अस्पताल बन गया है, जहां ब्लड कैंसर से पीड़ित मरीजों के इलाज के लिए उन्नत सीएआर-टी थेरेपी शुरू की गई है। यह सुविधा राज्य के स्वास्थ्य ढांचे को सशक्त बनाने और उच्च-स्तरीय स्वास्थ्य सेवाओं को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। मुफ्त दवाओं और स्वास्थ्य सेवाओं में विस्तार मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य के शासकीय अस्पतालों में मुफ्त दवाओं की उपलब्धता में भी बड़ी वृद्धि की गई है। जिला अस्पतालों में 295 से बढ़ाकर 530 प्रकार की दवाएँ, सिविल अस्पतालों में 448, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में 373 और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में 299 प्रकार की दवाएँ मुफ्त उपलब्ध कराई जा रही हैं। मातृ और शिशु स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार मध्यप्रदेश सरकार मातृ और शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ बनाने के लिए भी आवश्यक कदम उठा रही है। राज्य में विशेष नवजात देखभाल इकाइयाँ (SNCU) और बाल गहन चिकित्सा इकाइयाँ (PICU) स्थापित की गई हैं, ताकि माताओं और नवजात शिशुओं को उच्च गुणवत्ता वाली देखभाल प्राप्त हो सके। हाई रिस्क प्रेगनेंसी के मामलों की समय पर पहचान कर आवश्यक चिकित्सकीय सेवा की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है। साथ ही सुरक्षित प्रसव के लिए बर्थ वेटिंग रूम का संचालन और किशोरी बालिकाओं एवं महिलाओं को आयरन फॉलिक एसिड सप्लीमेंट की सुविधा प्रदान की जा रही है। recent visitors 85

धार्मिक संस्थाएं, अस्पताल-स्कूल और कॉलेज निर्माण के लिए आगे आएं – मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि धार्मिक संस्थाएं, अस्पताल, स्कूल, कॉलेज, हॉस्पिटल और धर्मशाला आदि के निर्माण में आगे आएं, राज्य शासन की ओर से उन्हें हर संभव सहयोग उपलब्ध कराया जाएगा। देश के 7 पवित्रतम नगरों में से उज्जैन एक है, यहां सभी समाजों के लिए धर्मशाला, मठ, मंदिर आदि के निर्माण को राज्य शासन की ओर से प्रोत्साहन प्रदान किया जा रहा है। इसी क्रम में सिंहस्थ क्षेत्र में स्थाई निर्माण को प्रोत्साहन देने की नीति बनाई गई है, जिसके अंतर्गत महर्षि श्रृंग समाज उत्थान संस्थान ने उज्जैन में मंदिर और आश्रम निर्माण का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव उज्जैन में बनने जा रहे महर्षि श्रृंगी महाराज और माता शांता मंदिर और आश्रम के भूमि-पूजन कार्यक्रम को मुख्यमंत्री निवास स्थित समत्व भवन से वर्चुअली संबोधित कर रहे थे। उज्जैन में हुए कार्यक्रम में हैदराबाद से पधारे परम पूज्य महामंडलेश्वर श्री श्री 1008 प्रभु दास जी महाराज, पुष्कर राजस्थान के श्री तेजमल पंडया, नई दिल्ली के श्री विक्रांत पांडे सहित वरिष्ठ समाजसेवी तथा नागरिक उपस्थित थे।   recent visitors 64

क्षिप्रा शुद्धीकरण के साथ सम्पूर्ण उज्जैन का विकास सर्वोच्य प्राथमिकता में : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि सिंहस्थ-2028 में आने वाले श्रद्धालुओं के लिये विशेष व्यवस्थाऍ करने राज्य सरकार की टीम ने एकजुट होकर निरंतर कार्य कर रही है। राज्य स्तर पर टास्क फोर्स का गठन भी किया जा चुका है। सिंहस्थ- 2028 की व्यवस्थाओं के लिए वित्तीय वर्ष 2024-25 में 500 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। मांक्षिप्रा के शुद्धीकरण के लिए 599 करोड़ रूपये लागत की कान्ह-क्लोज डक्ट परियोजना का कार्य प्रगतिरत है। साथ ही उज्जैन में आवागमन के लिये चौतरफा सड़क, ब्रिज बनाकर फोर-लेन मार्ग भी बनाये जा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सिंहस्थ आवागमन और सौन्दर्यीकरण से संबंधित अनेक अधोसंरचनात्मक किसान के कार्य प्रगतिरत हैं। उज्जैन पहुँचने वाले श्रद्धालु, विशेष रूप से बुजुर्ग श्रद्धालुओं के लिये ऐसी व्यवस्था की जा रही है, जिससे वे कम समय में सहजता से क्षिप्रा के घाटों और श्रद्धा स्थलों तक पहुँच सकें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उज्जैन में साधु-संतों के लिये इस बार विशेष पहल कर हरिद्वार की तरह स्थायी धार्मिक नगरी और आश्रम बनाये जायेंगे। इसके लिये सभी 13 अखाड़ों के महामंडलेश्वर, संत-महंतों के लिये आवश्यक भूमि उपलब्ध कराई जायेगी। इन प्रयासों से धार्मिक पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सिंहस्थ-2028 के माध्यम से उज्जैन को विश्व पटल पर प्रमुखधार्मिक पर्यटन केन्द्र के रूप में पहचान दिलाने के समग्र प्रयास किये जा रहे है। आगामी सिंहस्थ को दृष्टिगत रखते हुए उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मन्दिर की पहुंच को और अधिक सुगम बनाने के लिये सदावल में हेलीपेड का निर्माण भी किया जायेगा। साथ ही उज्जैन की हवाई पट्टी को एयरपोर्ट बनाने की पहल भी की जा रही है। उज्जैन को जोड़ने वाले चारों ओर के मार्गों को फोरलेन किया जायेगा, जिससे जिले के ग्रामीण क्षेत्र मुख्य मार्गों से जुड़ेंगे। सिंहस्थ में आने वाले श्रद्धालुओं के साथ ही उज्जैन शहर और उज्जैन ग्रामीण के बिजली उपभोक्ताओं की सुविधा के लिये स्थाई प्रकृति के 62 करोड़ के कार्यों को मंजूरी दी गई है। इसमें आधुनिक बिजली ग्रिड, नवीन विद्युत लाइन, इंटर कनेक्शन और नवीन उपकेन्द्र बनाये जायेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि लोक निर्माण से लोक कल्याण के उद्देश्य से उज्जैन में 658 करोड़ से अधिक के विकास एवं निर्माण कार्यों का भूमि-पूजन हो चुका है। इनमें प्रमुख रूप से हरिफाटक-लालपुल-मुल्लापुरा फोरलेन मार्ग शंकराचार्य चौराहा से चंदूखेड़ी, 2 नग 2 लेन आरओबी और क्षिप्रा पर 2-लेन ब्रिज सहित फोरलेन मार्ग, उज्जैन बड़नगर बाईपास टू-लेन मार्ग निर्माण कार्य, बडावदा-कलसी-नागदा से दोत्रु मार्ग का निर्माण, नागदा गिद्धगढ़ विदखेड़ा मोकड़ी मार्ग, तपोभूमि से हामूखेड़ी मार्ग, रालामंडल-कांकरिया-चिराखान-लेकोडा़-झिरोलिया-बारोदा-हमीरखेड़ी-उमरिया मार्ग, लालपुर से चिंतामन गणेश मंदिर, बड़ापुल-रणजीत-हनुमान-मोजमखेड़ी मार्ग, वाकंणकर पुल से दाऊद खेड़ी, करोहन-नाईखेड़ी-पंचक्रोशी मार्ग, खाचरोद-बड़नगर-बायपास, सेदरी से बड़ावदा, मुरानाबाद से बेड़ावन्या, रतलाम खाचरोद का शेष भाग का मजबूतीकरण, सदावल हेलीपैड निर्माण, जहांगीरपुर से चामुंडा माता मार्ग, रूदाहेड़ा से गुनई-महिदपुर से काचरिया एवं महिदपुर से नागेश्वर तीर्थ, सुतारखेड़ा एप्रोच रोड-मीन रोड से सुतारखेड़ा एवं रूदाहेड़ा एप्रोच रोड और मक्सी-तराना-रूपाखेड़ी एवं कानीपुरा-तराना मार्ग, मास्टर माईंड स्कूल तराना से लिम्बादित मेन रोड का काम प्रारंभ किया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उज्जैन में महाकाल लोक विकसित होने के बाद उज्जैन वैश्विक स्तर पर पहचान बना चुका है। यहाँ आने वाले श्रृद्धालुओं की संख्या दिन-प्रतिदिन बढ़ रही है। इसके दृष्टिगत वर्ष 2028 में होने वाले सिंहस्थ के लिये अभी से कार्य प्रारंभ कर दिये है, जिससे यहाँ आने वाले श्रृद्धालु और नागरिकों को परेशानी का सामना न करना पड़े। recent visitors 72

मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अध्यक्षता में मंत्रि-परिषद के निर्णय, नवीन मेडिकल कॉलेज में प्राध्यापकों की भर्ती की आयु सीमा की गई 50 वर्ष

  भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंत्रि-परिषद की बैठक मंत्रालय में हुई। मंत्रि-परिषद द्वारा मध्यप्रदेश सिविल सेवा (महिलाओं की नियुक्ति के लिए विशेष उपबंध) नियम, 1997 में मुख्यमंत्री के आदेश दिनांक 13.09.2023 एवं इसके परिपालन में विभाग द्वारा जारी अधिसूचना 3 अक्टूबर, 2023 का अनुसमर्थन किया गया। इस निर्णय से महिला आरक्षण 35 प्रतिशत होगा। 254 नए उर्वरक विक्रय केंद्रो की स्थापना की स्वीकृति मंत्रि-परिषद द्वारा वर्ष 2024-25 में (खरीफ एवं रबी सीजन में) 254 नए उर्वरक विक्रय केन्द्र स्थापित करने पर मानव संसाधन पर होने वाली संभावित व्यय की वास्तविक राशि अधिकतम 1 करोड़ 72 लाख रूपये की सीमा तक की प्रतिपूर्ति राज्य शासन द्वारा किए जाने का निर्णय लिया गया। 660 मेगावॉट क्षमता की नवीन अल्ट्रा सुपर क्रिटिकल इकाई की स्थापना के लिए फिजिबिलिटी स्टडी मंत्रि-परिषद द्वारा म.प्र. पॉवर जनरेटिंग कंपनी लिमिटेड के सतपुड़ा ताप वि‌द्युत गृह, सारनी के विद्युत गृह क्रमांक 2 (410) मेगावाट) एवं विद्युत गृह क्रमांक 3 (420 मेगावाट) में स्थापित इकाइयों को रिटायर (डी-कमीशन) किये जाने का निर्णय लिया गया। उल्लेखनीय है कि म.प्र. पॉवर जनरेटिंग कंपनी लिमिटेड के सतपुड़ा ताप विद्युत गृह, सारनी के विद्युत गृह क्रमांक 2 में स्थित इकाई क्रमांक 6 एवं 7 (200 + 210 मेगावॉट) एवं विद्युत गृह क्रमांक 3 में स्थित इकाई क्रमांक 8 एवं 9 (2X210 मेगावॉट) द्वारा रूपांकित आयु पूर्ण कर ली गई हैं। ये इकाइयों लगभग 39 से 44 वर्षों से संचालन में हैं। इन इकाइयों की स्थिति एवं प्रदर्शन के दृष्टिगत म.प्र. पॉवर जनरेटिंग कंपनी लिमिटेड द्वारा इन इकाइयों को रिटायर (डी-कमीशन) किये जाने की चाही गई अनुमति मंत्रि-परिषद ने प्रदान की है। निर्णय अनुसार सतपुड़ा ताप विद्युत गृह, सारनी के विद्युत गृह क्रमांक 2 एवं 3 में स्थित इकाई क्रमांक 6 से 9 (कुल क्षमता 830 मेगावॉट) को 30 सितम्बर, 2024 से रिटायर (डी-कमीशन) किये जाने की अनुमति प्रदान की गई। रिटायर (डी-कमीशन) इकाइयों का डिस्पोजल ई-ऑक्शन के माध्यम से किया जायेगा। इन इकाईयों के स्थान पर 660 मेगावॉट क्षमता की नवीन अल्ट्रा सुपर क्रिटिकल इकाई (इकाई क्रमांक 13) की स्थापना के लिए म.प्र. पॉवर जनरेटिंग कंपनी लिमिटेड द्वारा फिजिबिलिटी स्टडी करायी जायेगी। आयु-सीमा में वृद्धि का निर्णय मंत्रि-परिषद द्वारा नवीन शासकीय चिकित्सा महावि‌द्यालयों में चिकित्सा शिक्षकों की कमी को दृष्टिगत रखते हुए सहायक प्राध्यापक के रिक्त पदों पर नियुक्ति के लिए अधिकतम आयु सीमा 40 वर्ष से बढ़ाकर 50 वर्ष करने की स्वीकृति प्रदान की गई है। सह चिकित्सीय पाठ्क्रमों की मान्यता म.प्र. सह चिकित्सीय परिषद अधिनियम, 2000 को निरस्त करने की कार्यवाही को लंबित रखते हुए शैक्षणिक सत्र 2023-24 एवं आगामी सत्रों की मान्यता प्रक्रिया, साथ ही सह-चिकित्सीय पाठ्यक्रम उत्तीर्ण कर्मियों के पंजीयन एवं सर्टिफिकेट पाठ्यक्रमों की परीक्षाओं का आयोजन पूर्व में प्रचलित म.प्र. सह चिकित्सीय परिषद अधिनियम, 2000 अंतर्गत् प्रचलित नियमों के अनुसार, पूर्व में विघटित मध्यप्रदेश सह चिकित्सीय परिषद को पुनर्जीवित करते हुए, पूर्ण किये जाने तथा राष्ट्रीय आयोग द्वारा अधिनियम अंतर्गत प्रावधानित विनियम (रेगुलेशन) जारी होने के उपरांत विनियम के अनुरुप मध्यप्रदेश अलाइड एण्ड हेल्थ केयर कौंसिल ‌द्वारा स्वशासी बोर्ड्स के गठन होने पर पुनर्जीवित मध्यप्रदेश सह चिकित्सीय परिषद स्वतः समाप्त हो जायेगी एवं मंत्रि-परिषद् के पूर्व में लिये गये निर्णय अनुसार मध्यप्रदेश सह चिकित्सीय परिषद अधिनियम 2000 को निरस्त करने की कार्यवाही की जाने की स्वीकृति मंत्रि-परिषद द्वारा दी गई। अन्य निर्णय मंत्रि-परिषद द्वारा भारत सरकार, सहकारिता मंत्रालय द्वारा लागू की गई केन्द्र प्रवर्तित परियोजना "Strengthening of Cooperatives through IT Interventions" अन्तर्गत प्रदेश के पंजीयक सहकारी संस्थाएँ कार्यालय के कम्प्यूटराईजेशन के लिए परियोजना की सैद्धांतिक स्वीकृति दी गयी। इस पर 3 करोड़ 68 लाख रूपये व्यय आयेगा, जिसकी 60 प्रतिशत राशि केन्द्र एवं 40 प्रतिशत राशि राज्य शासन द्वारा वहन की जायेगी।   recent visitors 65

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राज्य स्तरीय गोवर्धन पूजा समारोह को किया संबोधित, कहा- गायों की देखभाल गौ-शालाओं में होंगी

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश में गौ-पालन को बढ़ावा देकर किसानों और गौ-पालकों की आर्थिक सशक्तिकरण का कार्य किया जा रहा है। शहरों में कांजी हाऊस के स्थान पर गौ-वंश की देशभाल के लिए गौशालाएं प्रारंभ की जायेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश के 51 हजार से अधिक ग्रामों में दूध का उत्पादन बढ़ाते हुए इस क्षेत्र में मध्यप्रदेश को पूरे देश में प्रथम स्थान पर लाने का प्रयास है। इसके साथ ही अगली पशुगणना में प्रदेश पहले तीसरे स्थान से पहले स्थान पर लाने के के समस्त प्रयास भी किये जाएंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में गौ-वंश पालन पर क्रेडिट कार्ड देने की पहल की गई है। हमारे किसान भाई और पशुपालक दीपावली के बाद गोवर्धन पूजा करते हैं। प्रदेश में पहली बार शासन स्तर पर गोवर्धन पूजा के कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इसका उद्देश्य हमारी हजारों वर्ष पुरानी संस्कृति और गौ-माता के प्रति सम्मान की भावना को सशक्त करना है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शनिवार को रवींद्र भवन परिसर भोपाल में राज्य स्तरीय गोवर्धन पूजा समारोह को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उपस्थित नागरिकों को गोवर्धन पूजा की बधाई दी। प्रारंभ में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रवींद्र बहिरंग मंच पर गोवर्धन पूजा समारोह का दीप जलाकर शुभारंभ किया। दुग्ध सहकारिता क्षेत्र में लौह पुरूष सरदार पटेल के योगदान का किया स्मरण मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राष्ट्रीय डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड से अनुबंध कर प्रदेश में दुग्ध उत्पादन बढ़ाने की रणनीति तैयार की गई है। लौह पुरूष सरदार वल्लभभाई पटेल ने दुग्ध सहकारिता आंदोलन को गति दी थी। आज "अमूल" के उत्पाद देश-विदेश में लोकप्रिय हैं। मध्यप्रदेश में गुजरात पैटर्न पर दुग्ध सहकारिता क्षेत्र में किसानों और पशुपालकों की सहायता के लिए ठोस कदम उठाए गए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि दूध, घी और मक्खन के साथ गौ-काष्ठ का भी उपयोग हो रहा है। गोबर से खिलौने और कलाकृतियां तैयार की जा रही हैं। प्रदेश सरकार गौ-पालन को प्रोत्साहित करने के लिए गौ-शाला को प्रति गाय 20 रुपये के स्थान पर 40 रुपये के अनुदान का निर्णय ले चुकी है। जो पशुपालक 10 या उससे अधिक गायों का पालन करेंगे उन्हें भी विशेष अनुदान दिया जाएगा। प्रदेश में दुग्ध उत्पादन में वृद्धि के प्रयास किए जा रहे हैं। प्रदेश में वर्तमान में देश के कुल दुग्ध उत्पादन का 9 प्रतिशत उत्पादन हो रहा है, जिसे 20 प्रतिशत तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है। सभी गाँव में दुग्ध संघ के माध्यम से गतिविधियां बढ़ाई जाएंगी। प्रारंभ में 11 हजार गाँव में दुग्ध सहकारी समितियों के माध्यम से दुग्ध उत्पादन में वृद्धि का प्रयास है। प्रदेश में इस वर्ष गौ-वंश रक्षा पर्व मनाया जा रहा है। गौ-वध के दोषी को मिलेगा 7 वर्ष का सख्त कारावास मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि गौ-वंश से समृद्ध प्रदेश में गौ-माता के संरक्षण के लिये समुचित प्रावधान किये जा रहे है। गौ-वध को रोकने के लिये समुचित व्यवस्था की गई है। गौ-वध का दोषी पाये जाने पर 7 वर्ष की सख्त सजा देने का कानूनी प्रावधान है। प्रदेश है गौ-वंश में समृद्ध मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश गौ-वंश में समृद्ध है। प्रदेश में लगभग 1 करोड़ 39 लाख गायें हैं। वर्ष 2019 की पशु गणना के अनुसार मध्य प्रदेश तीसरे स्थान पर है। हम अगली पशुगणना में देश में प्रथम स्थान पर आने का प्रयास करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गौ-पालकों को प्रोत्साहन, गौ-वंश संरक्षण के सरकार के प्रयासों और योजनाओं की जानकारी दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में पशु चिकित्सा के लिये गौ-एंबुलेंस का संचालन भी किया जा रहा है। शहरों और ग्रामों में अर्थव्यवस्था में भी सहयोगी है गौ-पालन मुख्यमंत्री डॉ. ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के संकल्प को पूरा करने के लिए मध्यप्रदेश गौ-वंश संरक्षण सहित अन्य क्षेत्रों में कार्य कर रहा है। भारत विश्व में 5वीं बड़ी अर्थव्यवस्था है। शीघ्र ही भारत तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था होगा। ग्रामों में कृषि कार्य के साथ पशुपालन एवं गौ-पालन किसान की आर्थिक समृद्धि में सहयोगी है। शहरों में भी गौपालन से पशुपालक अपनी आय बढ़ा सकते हैं। मध्य प्रदेश इस क्षेत्र में निरंतर कार्य कर रहा है। पशुधन संरक्षण के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि आज राज्य स्तर पर गोवर्धन पूजा कार्यक्रम में जनप्रतिनिधि पूरे प्रदेश में कार्यक्रमों में हिस्सा ले रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि गोवर्धन पूजा हमारी संस्कृति की प्रतीक भी है, जिससे विश्व में भारत की पहचान है। मानवता का संरक्षण करती है गाय मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण और गोवर्धन पर्वत की पूजा को समर्पित इस पर्व से संबंधित यह मान्यता भी है कि भगवान श्रीकृष्ण ने वृंदावन क्षेत्र के नागरिकों को आपदाओं से बचाने के लिए गोवर्धन पर्वत उठाया था। यह घटना भगवान द्वारा उन भक्तों को सुरक्षा देने का भी प्रतीक है, जो उनकी शरण में आते हैं। गोवर्धन पूजा में अन्न का पर्वत बनाया जाता है, इसे अन्नकूट कहा जाता है। भगवान श्रीकृष्ण के गायों के प्रति प्रेम से ही उनका नाम गोपाल हुआ। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विश्व के हर देश में गौपालन देखने को मिलता है। उन्होंने कहा कि हमारे प्रदेश में मालवी गाय विशिष्ट है। गाय माँ के समान है, वह सृष्टि की जननी भी मानी गई है। शास्त्रों के अनुसार ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना के बाद सर्वप्रथम गाय को ही पृथ्वी पर भेजा था। गाय माँ लक्ष्मी का भी स्वरूप है और इसे कामधेनु भी माना जाता है। गाय के दूध में जो पोषक तत्व हैं, वह अन्य दुधारू पशुओं के दूध में नहीं है। इस तरह गाय कई रूपों में मानवता का संरक्षण करती है। शहरों में प्रारंभ होंगी बड़ी गौ-शालाएं मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि गौपालन एवं गौ संरक्षण के कार्यों को दृष्टिगत रखते हुए इंदौर, भोपाल, उज्जैन, ग्वालियर जैसे शहरों में जहाँ हजारों की संख्या में गौ-वंश है, बड़ी गौशालाएँ प्रारंभ की जायेगी। शहरों की गौशालाओं में 5 हजार से लेकर 10 हजार तक गौवंश को रखने की व्यवस्था होगी। राज्य सरकार ने वर्ष 2024-25 में पशुधन संरक्षण और पशुपालन गतिविधियों के लिए 590 करोड़ रूपए की राशि का प्रावधान किया … Read more

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा- अन्नदाताओं की खुशहाली और बेहतरी के लिये राज्य सरकार प्रतिबद्ध

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश के अन्नदाताओं की खुशहाली और बेहतरी के लिये नित नये आयाम स्थापित किये जा रहे हैं। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी का अन्नदाताओं के प्रति असीम स्नेह सरकार की योजनाओं में भी निरंतर दिखाई दे रहा है। प्रधानमंत्री श्री मोदी 29 अक्टूबर को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (वर्ष 2024-25 की द्वितीय किश्त अंतरित करेंगे। प्रदेश के 81 लाख से अधिक किसानों को 1624 करोड़ रुपये की सहायता राशि का अंतरण किया जायेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसानों को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के साथ राज्य सरकार भी मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना में किसानों को लाभान्वित कर रही है। इन दोनों योजनाओं में किसानों को प्रतिवर्ष 12000 रुपये का लाभ प्रदान किया जा रहा है। अब तक म.प्र. के किसानों के बैंक खातों में 41 हजार 200 करोड़ रुपये की राशि अतिरिक्त दी जा चुकी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कृषि एवं संबद्ध क्षेत्र के लिये वर्ष 2024-25 बजट में 66 हजार 605 करोड़ रुपये का प्रावधान करते हुए कृषि उत्पादकता को बढ़ावा देने के लिये शून्य प्रतिशत ब्याज दर पर कृषकों को अल्पावधि फसल ऋण दिये जाने की योजना को जारी रखा गया है। इसके लिये 600 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इससे लगभग 32 लाख से अधिक कृषक लाभान्वित होंगे। वर्ष 2024-25 में 23 हजार करोड़ रुपये के फसल ऋण वितरण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि फसल बीमा योजना के इतिहास में पहली बार प्रदेश में किसानों के लिये ऋण की अदायगी की अंतिम तिथि (28 मार्च) से पहले सरकार ने दावों का भुगतान किया और किसानों को अनावश्यक ब्याज भरने के दण्ड से बचाया। किसानों को समर्थन मूल्य पर उपार्जित गेहूँ पर प्रति क्विंटल 125 रुपये बोनस का भुगतान भी किया गया। रबी विपणन वर्ष 2024-25 में 6 लाख से अधिक किसानों से 48 लाख 35 हजार मीट्रिक टन से अधिक गेहूँ का समर्थन मूल्य पर उपार्जन किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री कृषक मित्र सूर्य योजना में वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिये घरेलू एवं कृषि उपभोक्ताओं को बिजली बिलों में राहत देने 24 हजार 420 करोड़ रुपये की सब्सिडी देने का निर्णय लिया गया है। अटल कृषि ज्योति योजना अंतर्गत 10 हॉर्स-पॉवर तक के किसानों को ऊर्जा प्रभार में सब्सिडी दी जा रही है। इस योजना में चालू वित्तीय वर्ष में 11 हजार 65 करोड़ रुपये का प्रावधान रखा गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में सोयाबीन का केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित समर्थन मूल्य पर उपार्जन किया जा रहा है। इसके लिए प्रदेश में 1400 केंद्र स्थापित किए गए हैं। समर्थन मूल्य पर खरीदी का कार्य ई-उपार्जन पोर्टल से किया जा रहा है। उपार्जित सोयाबीन के लिये किसानों को ऑनलाइन भुगतान की व्यवस्था की गई है। प्रदेश में सोयाबीन उपार्जन के लिए तीन लाख 44 हजार किसानों ने अपना पंजीयन कराया है। प्रदेश में दतिया, भिंड, कटनी, मंडला, बालाघाट, सीधी एवं सिंगरौली 7 जिलों को छोड़कर समस्त जिलों में सोयाबीन का उपार्जन किया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश सरकार ने "रानी दुर्गावती श्रीअन्न प्रोत्साहन योजना" प्रारंभ की है। इस योजना से मिलेट्स उत्पादक किसानों को लाभ मिलेगा। योजना में कोदो-कुटकी के उत्पादन पर किसानों को भुगतान किए गए न्यूनतम क्रय मूल्य के अतिरिक्त सहायता राशि के रूप में खाते में 1000 रुपए प्रति क्विंटल डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर स्कीम के तहत प्रदाय किए जाएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता है। राज्य में उर्वरकों की कोई कमी नहीं है। किसानों को आवश्यक मात्रा में उर्वरक मिल रहा है। प्रदेश में प्रतिदिन 5 रैक यूरिया, 2 रैक डीएपी एवं 2 रैक एनपीके की आ रही है। विगत वर्ष अक्टूबर 2023 में डीएपी + एनपीके 1.89 लाख मीट्रिक टन प्राप्त हुआ था, इस वर्ष माह अक्टूबर में अभी तक लगभग 2.70 लाख मीट्रिक टन प्राप्त हो गया है। प्रदेश में यूरिया 5.20 लाख मीट्रिक टन, डीएपी + एनपीके का लगभग 2.80 लाख मीट्रिक टन स्टॉक उपलब्ध है। प्रदेश के सभी ज़िलों में उर्वरक की पर्याप्त उपलब्धता है। माँग अनुसार उर्वरक प्रदाय किया जा रहा है।   recent visitors 66

कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में जलवायु परिवर्तन के लिए वैश्विक प्रयास: भारत की प्रतिबद्धता में राज्यों का योगदान पर विमर्श और राष्ट्रीय संगोष्ठी

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि पर्यावरण आज सर्वाधिक महत्वपूर्ण विषय है। वसुधा को बचाने का कर्तव्य हम सभी को निभाना है। भारत की पहचान दुनिया में प्रकृति और पर्यावरण को बचाने के संदर्भ में भी बनी है। प्रकृति और प्रगति में समन्वय आवश्यक है। प्रधानमंत्री श्री मोदी सारे विश्व में अपने सक्षम नेतृत्व से भारत की प्रतिष्ठा बढ़ा रहे हैं। पर्यावरण के प्रति उनकी चिंता इस बात से सिद्ध होती है कि वे वर्ष 2030 तक भारत द्वारा 500 गीगावाट नवकरणीय ऊर्जा के लक्ष्य को लेकर चल रहे हैं। निश्चित ही हम कार्बन उत्सर्जन में एक बिलियन टन की कमी लाने में सफल होंगे। पर्यावरण की दृष्टि से यह महत्वपूर्ण संकल्प है। इसकी पूर्ति के लिए राष्ट्रवासी भी सहयोग कर रहे हैं। मध्यप्रदेश नवकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में निरंतर कार्य कर रहा है। प्रधानमंत्री श्री मोदी के संकल्प के अनुसार सौर ऊर्जा उत्पादन में वृद्धि के लिए प्रदेश अधिक से अधिक योगदान देगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव सोमवार को कुशाभाऊ ठाकरे इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में "जलवायु परिवर्तन के लिए वैश्विक प्रयास: भारत की प्रतिबद्धता में राज्यों का योगदान" विषय पर आयोजित विमर्श सत्र एवं राष्ट्रीय संगोष्ठी को संबोधित कर रह थे। इसका आयोजन अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन और नीति विश्लेषण संस्थान (एग्पा) और मध्यप्रदेश विज्ञान और प्रौद्योगिकी परिषद ने नर्मदा समग्र संस्था पैरवी और सिकोइडिकोन संगठन के सहयोग से किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वर्तमान समय में दुनिया जिस दौर से गुजर रही है, उसमें हमारी भारतीय जीवन पद्धति, हमारी मान्यताओं और परमात्मा एवं प्रकृति से जुड़ने के हमारे मूल दृष्टिकोण का अपना महत्व सामने आता है। एक श्रेष्ठ जीवनशैली के लिए भारतीय जाने जाते हैं। खान-पान और जल की शुद्धता के लिए हम गंभीर हैं। मध्यप्रदेश पर परमात्मा की विशेष कृपा है। जहाँ हमारा देश मानवता प्रेमी है, वहीं पर्यावरण के प्रति प्रतिबद्धता के लिए भी भारत सक्रिय है। विश्व के कल्याण के लिए भारत के उदात्त भाव से सभी परिचित हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी विश्व के देशों के लिए आशा की किरण हैं। जहाँ रूस और यूक्रेन के युद्ध की परिस्थितियां सभी के सामने हैं, वहीं इजराइल जैसे राष्ट्र जो तकनीक के उपयोग और अस्मिता के संघर्ष के लिए जाने जाते हैं, भारत के लिए इन सभी राष्ट्रों का सम्मानजनक रूख है। स्वामी विवेकानंद जी ने कहा था कि 21वीं सदी भारत की होगी। आज प्रधानमंत्री श्री मोदी और भारत की सामर्थ्य एवं पर्यावरण प्रेमी होने के दृष्टिगत हमारी प्रतिष्ठा विश्व में बढ़ रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार ने नर्मदा नदी और उसके तटों की पर्यावरणीय संरक्षण के लिए आवश्यक निर्णय लिए हैं। मध्यप्रदेश नदियों का मायका है। सभी नदियों की स्वच्छता और हमारे ईको सिस्टम का संतुलन बनाए रखना हमारी प्राथमिकता है। हमारी सोन नदी, पुण्य सलिला गंगा को बलिष्ठ बनाती है। गंगा बेसिन के लिए यमुना के माध्यम से चंबल और क्षिप्रा भी यही भूमिका निभाती हैं। बेतवा भी यमुना जी में जाकर मिलती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारा विश्वास "जियो और जीने दो" में है। भोपाल के पास रातापानी टाइगर अभ्यारण्य है। भोपाल के पास सड़कों पर दिन में मनुष्य और रात्रि में टाइगर दिखाई देते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आशा व्यक्त की कि इस राष्ट्रीय संगोष्ठी और विमर्श-सत्र से पर्यावरण से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर महत्वपूर्ण निष्कर्ष सामने आएंगे। उन्होंने इस वैचारिक कार्यक्रम की सफलता की कामना की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दीप जलाकर विमर्श-सत्र का शुभारंभ किया। सत्र को नार्वे के पूर्व अंतर्राष्ट्रीय विकास और पर्यावरण मंत्री और यूएनडीपी के पूर्व कार्यकारी निदेशक श्री एरिक सोलहेम ने वर्चुअल रूप से संबोधित किया। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश बहुत सुंदर राज्य है। इसकी हेरिटेज देखने लायक है। मध्यप्रदेश में होने वाले जलवायु संरक्षण के कार्यों का वैश्विक महत्व होगा। एग्पा के सीईओ श्री लोकश शर्मा ने कहा कि मध्यप्रदेश ने गत दो दशक से प्रगति के अनेक आयाम छुए हैं। पर्यावरण के प्रति मध्यप्रदेश सरकार गंभीर है। आगामी माह अजरबैजान में संयुक्त राष्ट्र जलवायु सम्मेलन का आयोजन हो रहा है। इस परिप्रेक्ष्य में राज्य स्तरीय प्री-सीओपी विमर्श-सत्र का आयोजन महत्वपूर्ण है। भारत की पर्यावरण के प्रति प्रतिबद्धता के संबंध में राज्यों की भागीदारी के संबंध में यह अपनी तरह का प्रथम विमर्श कार्यक्रम है। सरकार के साथ समाज की भागीदारी बढ़ाने और पर्यावरण के लिए प्रहरी के रूप में कार्य करने वाले व्यक्तियों और संस्थाओं के साथ विचार-विमर्श के लिए इस विमर्श कार्यक्रम की रूपरेखा बनाई गई। कार्यक्रम को पैरवी संस्था के संचालक श्री अजय झा ने कहा कि सदी के अन्त तक तापमान 2.5 डिग्री तक बढ़ने की संभावना है। विज्ञान भारती, केरल के डॉ. विवेकानंद पई ने कहा कि भारत में कार्बन उत्सर्जन 1.8 टन पर केपिटा है, जो कि विश्व की एवरेज केपिटा पर 4.5 टन से कम है। सिकोईडीकोन की सचिव श्रीमती मंजूबाला जोशी ने कहा कि जलवायु परिवर्तन की विभीषका को रोकने के लिए सभी को मिलकर प्रयास करना होगा। भारतीय प्रशासनिक सेवा के सेवानिवृत्त अधिकारी श्री आर.एस. प्रसाद ने कहा कि जलवायु परिवर्तन से संबंधित सभी कार्यक्रम सेल्फ ड्रिबेन हो। क्लाइमेट जस्टिस जरूरी है। विज्ञान एवं प्रौद्योगिक परिषद के महानिदेशक डॉ. अनिल कोठारी ने आभार व्यक्त किया। recent visitors 72