खेल गतिविधियां जीवन में सकारात्मकता और ऊर्जा का संचार करती हैं: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि खेल गतिविधियां जीवन में सकारात्मकता और ऊर्जा का संचार करती हैं। भारतीय संस्कृति में खेलों की समृद्ध और उत्कृष्ट परम्परा रही है। नई शिक्षा नीति के माध्यम से खेल के आधार पर डिग्री प्राप्त करने और स्पोर्टस टीचर को असिस्टेंट प्रोफेसर से लेकर वाइस चांसलर तक बनने की व्यवस्था स्थापित की गई है। खेल, व्यक्ति की दक्षता, क्षमता और योग्यता के प्रकटीकरण के प्रभावी माध्यम हैं। राज्य शासन प्रत्येक स्तर पर खेलों को प्रोत्साहित करने के लिए प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने देश में सभी खेलों को प्रोत्साहित कर प्रतिभाओं को निखारने के लिए आवश्यक व्यवस्था स्थापित की है। राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में इसके परिणाम भी दिखाई दे रहे हैं। भोपाल में बेहतर क्रिकेट स्टेडियम विकसित करने की दिशा में प्रयास किए जाएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव भोपाल के खेल पत्रकार संघ द्वारा आयोजित 30 वें इंटर प्रेस क्रिकेट टूर्नामेंट-2025 के शुभारंभ कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ओल्ड केम्पियन ग्राउंड पर बल्लेबाजी कर टूर्नामेंट की शुरूआत की। इस अवसर पर खेल मंत्री श्री विश्वास सारंग, पूर्व विधायक श्री ध्रुव नारायण सिंह, खेल पत्रकार संघ के संरक्षण श्री मृगेंद्र सिंह सहित संघ के पदाधिकारी, मीडिया कर्मी एवं खेल प्रेमी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने टूर्नामेंट के सफल आयोजन के लिए शुभकामनाएं दीं।   recent visitors 91

हमारी गुरुकुल शिक्षा प्रणाली को अपना रहे हैं विकसित देश, हमें 21वीं सदी की जरूरतों के मुताबिक तैयार करना है विद्यार्थी: मुख्यमंत्री

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि अंधेरे से प्रकाश की ओर ले जाने वाला गुरु ही होता है। गुरु अपने विद्यार्थी में निहित अनंत संभावनाओं को पहचान कर इसका चारित्रिक एवं शैक्षणिक विकास करते हैं। हमारी पुरातन गुरुकुल परम्परा आज भी प्रासंगिक है। आज कई विकसित देश हमारी पुरानी गुरुकुल परम्परा को अपनाकर अपने बच्चों को शिक्षा दे रहे हैं। हमें भी पुन: उसी गुरुकुल परम्परा से जुड़ना होगा, तभी हमारा देश फिर से विश्व गुरु बन सकेगा। हम प्रदेश में क्लास के अंदर और क्लास के बाहर भी विद्यार्थियों को जीवन एवं नैतिक मूल्य तथा व्यावहारिक शिक्षा देकर उनके समग्र विकास की ओर बढ़ रहे हैं। मजबूत इरादों और शैक्षणिक गुणवत्ता में आमूल-चूल सुधार लाकर हम प्रदेश को शिक्षा के मामले में देश का एक मॉडल एजुकेशन स्टेट बनायेंगे। इसमें शिक्षकों की बड़ी अहम भूमिका है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव रविवार को कलेक्टर कार्यालय, उज्जैन के एनआईसी से वर्चुअली जुड़कर स्टार्स प्रोजेक्ट के तहत अंतर्राष्ट्रीय शैक्षणिक भ्रमण के लिए सिंगापुर जाने वाले चयनित शिक्षकों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि शिक्षक हमारे लिए सदैव पूजनीय हैं, हम विकसित भारत और विकसित मध्यप्रदेश के निर्माण में उनकी अनंत क्षमताओं और सुदीर्घ अनुभवों का प्रदेश के शैक्षणिक विकास एवं विस्तार में अधिकतम सदुपयोग करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि शैक्षणिक परिदृश्य में हमारा इतिहास समृद्ध रहा है। नालंदा, तक्षशिला, विक्रमशिला विश्वविद्यालयों एवं उज्जैन के सांदीपनी आश्रम सहित अन्य विश्वविख्यात शैक्षणिक संस्थाओं ने तत्कालीन समय में उच्चकोटि की शिक्षा देकर राष्ट्र को उपकृत किया। तत्समय गुरुओं में अपने विद्यार्थियों के कला-कौशल को पहचनाने की। एक दृष्टि होती थी, यही कारण था कि भगवान श्रीराम-लक्ष्मण और श्रीकृष्ण ने भी अपने गुरुओं से ही शिक्षा-दीक्षा ली। मुख्यमंत्री ने कहा कि हम आज के शिक्षकों में भी गुरु की वही दृष्टि विकसित करना चाहते हैं। सिंगापुर भ्रमण के लिए चयनित शिक्षक इस अवसर को भलीभांति समझें, पढ़ाने की नई-नई तकनीकें सीखें और लौटकर प्रदेश के विद्यार्थियों को उन तकनीकों का लाभ दिलाएं, जिससे वे अपने शैक्षणिक एवं चारित्रिक प्रदर्शन में अव्वल आएं। उन्होंने कहा कि चयनित शिक्षक विदेशी अध्ययन कराने की अच्छाइयों को सीखे, साथ ही अपने देश की अच्छाइयों को भी विश्व में बांटे, ताकि विविध शैक्षणिक संस्कृतियों एवं नवाचारों का आदान-प्रदान हो सके। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शिक्षकों की सक्रिय भागीदारी से ही विश्व, देश और प्रदेश की पहचान बनेगी। उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय शैक्षणिक भ्रमण (सिंगापुर जाने) के लिए चयनित प्रदेश के सभी शिक्षकों को अपनी ओर से सफल एवं सुखद शैक्षणिक यात्रा की स्नेहिल शुभकामनाएं देकर उनका उत्साहवर्धन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा की शुभकामनाओं के बाद स्कूल शिक्षा मंत्री श्री उदयप्रताप सिंह ने सुभाष उत्कृष्ट उ.मा.वि. भोपाल परिसर से शिक्षकों की विदेश यात्रा दल बस को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। स्कूल शिक्षा मंत्री श्री सिंह ने इस अवसर पर कहा कि हमारी सरकार ने प्रदेश के शैक्षणिक विकास के लिए कई नवाचार किए हैं। हम शिक्षा में गुणवत्ता सुधार के लिए बेहद संवेदनशील होकर प्रयासरत हैं। शिक्षकगण हमारी शिक्षा प्रणाली की धुरी हैं। इनके अध्यापन कौशल और आचरण से ही समाज को प्रेरणा मिलती है। विदेश अध्ययन के लिए चयनित सभी शिक्षक हमारे प्रदेश के मास्टर ट्रेनर्स बनेंगे। हम इनकी विशेषज्ञताओं और विशेषताओं दोनों का भरपूर इस्तेमाल राज्य के शैक्षणिक परिदृश्य के विकास में करेंगे। उन्होंने चयनित शिक्षकों और अधिकारियों से कहा कि वे इस एतिहासिक अवसर का भरपूर लाभ उठाएं। कम समय में ज्यादा सीखने का प्रयास करें, क्योंकि प्रदेश के विद्यार्थियों का भविष्य शिक्षकों के हाथों में ही है। शिक्षक जो भी नई विधाएं, नए कौशल सीखेंगे, हम उसका अधिकतम लाभ विद्यार्थियों को दिलायेंगे। कार्यक्रम में सचिव स्कूल शिक्षा डॉ. संजय गोयल ने प्रतिभागियों को उनकी शैक्षणिक यात्रा के उद्देश्यों और महत्व के बारे में बताकर इस परियोजना के लक्ष्यों को रेखांकित किया। कार्यक्रम में प्रभारी आयुक्त लोक शिक्षण श्रीमती मनीषा सेंतिया, संचालक राज्य शिक्षा केन्द्र श्री हरजिंदर सिंह सहित स्कूल शिक्षा विभाग एवं राज्य शिक्षा केन्द्र के सभी वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। क्या है स्टार्स परियोजना स्टार्स परियोजना (स्ट्रेंथनिंग टीचिंग-लर्निंग एण्ड रिजल्टस फॉर स्टेट्स प्रोजेक्ट) भारत सरकार की विश्व बैंक द्वारा वित्त पोषित परियोजना है। इस परियोजना के संचालन के लिए देश के कुल 6 राज्यों का चयन किया गया है। इन 6 राज्यों में मध्यप्रदेश को भी चुना गया है। स्टार्स परियोजना के अंतर्गत स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा प्रदेश के चयनित लोकसेवकों एवं शिक्षकों को वैश्विक शिक्षा प्रणाली, शिक्षा की गुणवत्ता और तकनीकी उन्नति के अवलोकन के लिए प्रिंसिपल्स एकेडमी, सिंगापुर में शैक्षणिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। यह एकेडमी सिंगापुर सरकार के इकॉनामिक डेवलपमेंट बोर्ड द्वारा स्थापित विश्वविख्यात संस्थान है। recent visitors 87

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अस्थिबाधित दिव्यांगजन को ई-साइकिल वितरित की, दिव्यांगजन की सेवा से प्राप्त अनुभव और अनुभूति अलौकिक

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि दिव्यांगजन की सेवा और कल्याण आंतरिक सुख का विषय है। उनकी सेवा से प्राप्त अनुभव और अनुभूति अलौकिक है। दिव्यांगजन के साथ समरसता के व्यवहार को प्रोत्साहित करने के लिए समाज में उनके प्रति विद्यमान दृष्टिदोष को दूर करना आवश्यक है। प्रत्येक दिव्यांग व्यक्ति में कोई न कोई प्रतिभा अवश्य होती है, उसे चिन्हित कर निखारने और प्रोत्साहित करने से दिव्यांगजन की ऊर्जा का उपयोग समाज हित में किया जा सकता है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की संवेदनशीलता के परिणामस्वरूप ही विकलांग जैसे कटु अनुभूति देने वाले शब्द को बदलकर दिव्यांग का सम्मानजनक संबोधन प्रदान किया गया। दिव्यांगता का सामना कर रहे व्यक्ति वास्तव में चुनौतियों को स्वीकार करने वाले सच्चे वीर हैं। उनकी सामर्थ्य को स्वीकारना और सम्मान देना समाज का दायित्व है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव अस्थि बाधित दिव्यांगजन को ई-साइकिल वितरित करने के बाद कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने समदृष्टि क्षमता विकास एवं अनुसंधान मंडल "सक्षम" की पहल पर भारत पेट्रोलियम कार्पोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) के सहयोग से संचालनालय सामाजिक न्याय विभाग के सभागृह में आयोजित कार्यक्रम में ई-साइकिल वितरित की। विश्व ब्रेल दिवस पर किया लुइस ब्रेल का स्मरण मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। उन्होंने विश्व ब्रेल दिवस (4 जनवरी) के अवसर पर ब्रेल लिपि विकसित करने वाले लुइस ब्रेल के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उनका स्मरण किया। इस अवसर पर दृष्टिबाधित बालिका कुमारी तान्या शर्मा ने सक्षम गान की भावपूर्ण प्रस्तुति दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कुमारी तान्या का पुष्प-गुच्छ भेंट कर अभिवादन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने समाज-कल्याण एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग द्वारा संचालित योजनाओं और कार्यक्रमों पर ब्रेल लिपि में विकसित पुस्तक का विमोचन किया और समाजसेवियों का शॉल, श्रीफल तथा प्रशस्ति पत्र भेंट कर सम्मान भी किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंदसौर की कुमारी अनामिका सोलंकी, खंडवा की श्रीमती रजनी दशोरे, झाबुआ की सुश्री उषा गढ़वा सहित श्री ओम तिवारी, श्री सुखदेव आदि को प्रतीक स्वरूप ई-साइकिल वितरित की। प्रदेश के कुल 47 अस्थि बाधित दिव्यांगजन को ई-साइकिल वितरित की। घर में व्हील चेयर और बाहर ट्राई साइकिल के रूप में उपयोग में आएगी ई-साइकिल मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि ब्रेल लिपि दृष्टि बाधित दिव्यांगजन के लिए यह बड़ी सौगात है। साथ ही कई देशों की सेनाओं द्वारा ब्रेल लिपि का उपयोग रात्रि में संदेशों के आदान-प्रदान के लिए भी किया जाता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस अवसर पर वितरित की जा रही ई-साइकिल की सराहना की। उन्होंने कहा कि इन साइकिलों का उपयोग घर में व्हीलचेयर के रूप में करने के साथ ही घर के बाहर आने-जाने के लिए ट्राई साइकिल के रूप में भी किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि दिव्यांगता से प्रभावित होने के बाद भी व्यक्तियों ने अपनी क्षमता और सामर्थ्य का उपयोग कर विभिन्न क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान दिए हैं। पौराणिक संदर्भ में अष्टावक्र, महान संगीतज्ञ स्व. रविंद्र जैन तथा धर्म आध्यात्म के क्षेत्र में स्वामी रामभद्राचार्य जी का उदाहरण विशेष रूप से उल्लेखनीय है। दिव्यांगजन के लिए समाज में समरसता पूर्ण वातावरण निर्मित करने को समर्पित है संस्था सक्षम कार्यक्रम में जानकारी दी गई कि "सक्षम"- समदृष्टि क्षमता विकास एवं अनुसंधान मंडल, दिव्यांगजन के सशक्तिकरण को समर्पित संस्था है, जिसकी स्थापना 2008 में नागपुर में हुई। दिव्यांग युवाओं-महिलाओं को रोजगार उपलब्ध कराने, उनके अधिकारों की रक्षा, खेल गतिविधियों में प्रोत्साहन, शोध तथा राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर पर सेमिनार एवं परिचर्चा के माध्यम से दिव्यांगजन के लिए समाज में समरसता पूर्ण वातावरण निर्मित करना सक्षम संस्था का उद्देश्य है।   recent visitors 103

मुख्यमंत्री ने लटेरी, विदिशा में किया 132 करोड़ के कार्यों का किया लोकार्पण और भूमि-पूजन

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत दुनिया में सर्वश्रेष्ठ देश बनने की ओर अग्रसर है। हमारी सरकार सभी वर्गों के कल्याण के लिए कार्य कर रही है। युवा, गरीब, किसान और महिलाएं हमारी विशेष प्राथमिकता है। मध्यप्रदेश तेज गति से देश का सर्वश्रेष्ठ राज्य बनने के लिए निरन्तर कार्य कर रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शनिवार को लटेरी (विदिशा) में विकास कार्यों के लोकार्पण एवं शिलान्यास कार्यक्रम में विशाल जन समुदाय को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने क्षेत्र के लिए 132 करोड़ रुपए से अधिक के विकास कार्यों का लोकार्पण/ शिलान्यास किया। इनमें 80 करोड़ 16 लाख रुपए के 54 विकास कार्यों का भूमि-पूजन और 51 करोड़ 96 लाख रुपए के 198 विकास कार्यों का लोकार्पण शामिल है। मुख्यमंत्री ने विभिन्न योजनाओं के हितग्राहियों को हित लाभ भी वितरित किए। कार्यक्रम में विदिशा जिले में 505 हेक्टेयर चरनोई की भूमि को अतिक्रमण मुक्त किए जाने पर एक लघु फिल्म का प्रदर्शन भी किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आधुनिक युग के भगीरथ हमारे प्रधानमंत्री श्री मोदी के प्रयासों से केन-बेतवा और पार्वती-कालीसिंध-चंबल लिंक परियोजनाओं से प्रदेश को दो बड़ी सिंचाई परियोजनाएं मिली है। इससे न केवल बुंदेलखंड अपितु मालवा और चंबल क्षेत्र में भी बड़े क्षेत्र में सिंचाई, पेयजल सुविधा मिलेगी। इस क्षेत्र के भी 360 गांव को जल उपलब्ध होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारा लक्ष्य है हर किसान के खेत में पानी पहुंचाना। हर खेत में पानी आने से किसान की जिंदगानी बदलेगी। कृषि उत्पादन में हम पंजाब, हरियाणा को भी पीछे छोड़ने वाले हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कृषि, पशुपालन, शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्योग, रोजगार आदि सभी क्षेत्रों में प्रदेश में तेज गति से विकास हो रहा है। हर गरीब को पक्का मकान दिलाने के लिए प्रधानमंत्री श्री मोदी संकल्पित हैं। आयुष्मान भारत योजना में 5 लाख रुपए तक का इलाज मुफ्त है। उद्योग और रोजगार बढ़ाने के लिए सरकार निरंतर कार्य कर रही है। उज्जैन, सागर, रीवा, जबलपुर और ग्वालियर में आयोजित इन्वेस्टर्स समिट में करोड़ों के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। युवा वर्ग के लिए सरकार शीघ्र ही एक लाख सरकारी और निजी क्षेत्र में लगभग 3 लाख पदों पर भर्ती करने जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि शिक्षा की महत्ता को हमेशा याद रखें। बच्चों को अच्छी शिक्षा दें, शिक्षा की सारी व्यवस्था सरकार कर रही है। प्रदेश के 55 जिलों में पीएम एक्सीलेंस स्कूल खोले जा रहे हैं। गरीबों को परिवहन की अच्छी सुविधा देने के लिए सरकार मध्यप्रदेश राज्य परिवहन को दोबारा प्रारंभ करने जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कृषि के साथ पशुपालन को भी सरकार बढ़ावा दे रही है। जो गाय पाले, वही गोपाल है तथा जहाँ गाय का कुल हो, वही गोकुल है। सरकार दुग्ध उत्पादन पर बोनस देने वाली है तथा 10 से अधिक गाय पालने पर अनुदान दिया जाएगा। प्रदेश में बड़ी संख्या में गौ-शालाएं बनाई जा रही हैं। प्रदेश की धरती पर जहां-जहां भगवान श्रीकृष्ण पधारे थे, उन सभी स्थलों को तीर्थ के रूप में विकसित किया जा रहा है। उज्जैन में संदीपनी आश्रम में भगवान श्रीकृष्ण ने शिक्षा ग्रहण की, जानापाव में उन्हें सुदर्शन चक्र मिला। कृष्ण और सुदामा की मित्रता का प्रसंग सुनाते हुए उन्होंने कहा कि सच्ची मित्रता वही है जब मित्र बगैर सामने आये मित्र की सहायता करे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने क्षेत्र में रेलवे लाइन के लिए विशेष प्रयास करने को आश्वस्त किया। उन्होंने आनंदपुर में शासकीय महाविद्यालय खोले जाने की घोषणा भी की। पशुपालन एवं डेयरी मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) एवं विदिशा जिले के प्रभारी मंत्री श्री लखन पटेल ने कहा कि सरकार के निरंतर प्रयासों से प्रदेश में सिंचाई का रकबा तेजी से बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री श्री मोदी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के प्रयासों से प्रदेश में देश की दो नदी जोड़ो परियोजनाएं प्रारंभ हुई हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव किसानों के मसीहा बनकर कार्य कर रहे हैं। हमारा संकल्प पूरे प्रदेश को सिंचित करना है। सांसद श्रीमती लता वानखेड़े ने भी सभा को संबोधित किया। विधायक श्री उमाकांत शर्मा ने क्षेत्र के विकास के लिए कई मांगे रखीं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उन्हें पूरा करने का आश्वासन दिया। कार्यक्रम में विधायक श्री मुकेश टंडन, श्री हरि सिंह सप्रे, श्री हरि सिंह रघुवंशी, श्री सूर्य प्रकाश मीणा, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती गीता कैलाश रघुवंशी, जनप्रतिनिधि, अधिकारी और बड़ी संख्या में जन समुदाय उपस्थित था।   recent visitors 134

जनता की शंकाओं को दूर कर सावधानी पूर्वक किया जायेगा कचरे का विनिष्टीकरण: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि यूनियन कार्बाइड के कचरे के विनिष्टीकरण के लिये सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशानुसार कार्रवाई की जा रही है। कचरे का निष्पादन जनता की शंकाओं को दूर कर सावधानी पूर्वक किया जायेगा। उन्होंने कहा कि जनता के सरोकार प्राथमिकता में सबसे ऊपर है, कचरे के विनिष्टीकरण की कार्रवाई सतत् निगरानी में की जायेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हादसे के 40 वर्ष बीतने के बाद भोपाल में रखा लगभग 337 मीट्रिक टन कचरे का हानिकारक प्रभाव खत्म हो गया है। उन्होंने बताया कि बचे हुए शेष कचरे में 60 प्रतिशत से अधिक केवल स्थानीय मिट्टी, 40 प्रतिशत में 7-नेपथॉल, रिएक्टर रेसिड्यूज और सेमी प्रोसेस्ड पेस्टीसाइड्स का अपशिष्ट है। इसमें मौजूद 7-नेपथॉल रेसीड्यूस मूलतः मिथाइल आइसो साइनेट एवं कीटनाशकों के बनने की प्रक्रिया का सह-उत्पाद होता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि इसका विषैला प्रभाव 25 साल में लगभग समाप्त हो जाता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गुरूवार को मुख्यमंत्री निवास में मीडिया से चर्चा में ये बातें कहीं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि कचरे के निपटान की प्रक्रिया का केन्द्र सरकार की विभिन्न संस्थाओं जैसे- नीरी (नेशनल इन्वॉयरमेंटल इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट), नागपुर, NGRI (नेशनल जियोफिजिकल रिसर्च इंस्टीटयूट) हैदराबाद, IICT (इंडीयन इंस्टीट्यूट ऑफ केमीकल टेक्नोलॉजी) तथा केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा समय-समय पर गहन परीक्षण किया गया है। उनके अध्ययन तथा सर्वोच्च न्यायालय को प्रस्तुत प्रतिवेदनों के आधार पर भारत सरकार के पर्यावरण मंत्रालय को मार्च, 2013 में दिये गये निर्देशानुसार केरल कोच्चि स्थित हिंदुस्तान इनसेक्टीसाइड लिमिटेड के 10 टन यूनियन कार्बाइड के समान कचरे का परिवहन कर पीथमपुर स्थित TSDF में ट्रायल रन केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की निगरानी में किया गया। सफल ट्रायल रन का प्रतिवेदन सर्वोच्च न्यायालय में प्रस्तुत किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि ट्रायल रन के निष्कर्षों के आधार पर सर्वोच्च न्यायालय ने अप्रैल, 2014 में यूसीआईएल के 10 मीट्रिक टन कचरे का एक और ट्रायल रन भारत सरकार, पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय नई दिल्ली की निगरानी में टीएसडीएफ पीथमपुर मे किये जाने के निर्देश दिये। सर्वोच्च न्यायालन ने इस ट्रायल रन की वीडियोग्राफी भी सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिये थे। निर्देशानुसार अगस्त, 2015 में ट्रायल रन के बाद केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा प्रायोगिक निपटान की समस्त रिपोर्ट सर्वोच्च न्यायालय में प्रस्तुत की गई। रिपोर्ट्स में यह स्पष्ट हुआ कि इस प्रकार के कचरे के निपटान से वातावरण को कोई नुकसान नही हुआ है। उच्चतम न्यायालय ने सभी रिपोर्ट के गहन परीक्षण के पश्चात ही यूसीआईएल के कचरे के निपटान की कार्यवाही को आगे बढ़ाने एवं उन्हें नष्ट करने का निर्देश जारी किया। मुख्य सचिव ने 3 बिन्दुओं पर कराई जांच कचरे के विनिष्टीकरण की कार्रवाई के संबंध में समय-समय पर सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिये जा रहे निर्देशों के अतिरिक्त मध्यप्रदेश के मुख्य सचिव ने विस्तृत रूप से तीन बिंदुओं को आधार बनाकर पृथक से जांच कराई। जांच के बिंदु :- आसपास के गांवों में स्वास्थ्य संबंधी परीक्षण, फसल की उत्पादकता पर प्रभाव और क्षेत्रीय जल स्त्रोतों की गुणवत्ता का परीक्षण थे। तीनों बिंदुओं के परीक्षण में यह पाया गया कि यूसीआईएल कचरे के निष्पादन से किसी भी प्रकार के नकारात्मक परिणाम परिलक्षित नहीं हुए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि कचरे के निपटान की प्रक्रिया को लेकर शासन पूरी तरह से संवेदनशील हैं। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, मध्यप्रदेश प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के साथ ही सभी संबंधित टीमों की सतत् निगरानी में विनिष्टीकरण की कार्रवाई की जाएगी।   recent visitors 89

किसानों को बिना कठिनाई के हो भुगतान : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल देश के कुल सोयाबीन उत्पादन का लगभग आधा उत्पादन मध्यप्रदेश में होता है। मध्यप्रदेश सम्पूर्ण देश में सोयाबीन उत्पादन में प्रथम स्थान पर है। किसानों के परिश्रम और किसानों के हित में शासन द्वारा की गई बेहतर व्यवस्थाओं से मध्यप्रदेश इस उपलब्धि को प्राप्त कर सका है। कृषि अर्थव्यवस्था को व्यापक पैदावार से महत्वपूर्ण योगदान मिलता है। खरीफ की फसलों में सर्वाधिक बोई जाने वाली फसल सोयाबीन ही है। प्रदेश में सोयाबीन का रकबा और उत्पादन बढ़ रहा है। गत वर्ष की तुलना में प्रदेश के सोयाबीन के रकबे में लगभग 2 प्रतिशत वृद्धि हुई है। वर्तमान में प्रदेश का सोयाबीन का रकबा 66 लाख हैक्टयर से अधिक है। प्रदेश में 31 दिसम्बर तक लगभग 6.5 से 7 लाख मीट्रिक टन तक सोयाबीन का उपार्जन पूर्ण हो जाने का अनुमान है। उल्लेखनीय है कि मध्यप्रदेश ने महाराष्ट्र और राजस्थान को पीछे छोड़कर सोयाबीन के सबसे बड़े उत्पादक राज्य बनने में सफलता प्राप्त की है। मध्यप्रदेश सरकार ने किसानों को सोयाबीन के लिए 4 हजार 892 रुपए की राशि प्रति क्विंटल न्यूनतम समर्थन मूल्य के रूप में देने की व्यवस्था की है। प्रदेश में सोयाबीन उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि को देखते हुए उपार्जन की आवश्यक व्यवस्थाएं की गई हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर किसानों से उपार्जित सोयाबीन के लिए राशि का भुगतान बिना कठिनाई के किया जा रहा है। सोयाबीन के भण्डारण और उपार्जित सोयाबीन की सुरक्षा के प्रबंध भी किए गए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के निर्देश हैं कि किसानों को उपार्जन की आधुनिक व्यवस्थाओं का लाभ दिलवाया जाए। प्रदेश में पहली बार सोयाबीन का समर्थन मूल्य पर उपार्जन किया जा रहा है। ई-उपार्जन पोर्टल का उपयोग भी किया जा रहा है। किसानों को ऑन लाइन राशि के भुगतान की व्यवस्था की गई है। भुगतान के मामले में ये हैं टॉप 10 जिले प्रदेश में लगभग दो लाख किसानों को 1957.1 करोड़ रूपए की राशि का भुगतान उपार्जन के रूप में अब तक किया जा चुका है। प्रदेश में भुगतान का प्रतिशत 70.41 है। राशि के भुगतान में नीमच जिला अग्रणी है, जहां शत-प्रतिशत किसानों को राशि दी जा चुकी है। नीमच सहित विदिशा,राजगढ़, नर्मदापुरम, आगर मालवा, शहडोल, अनूपपुर, जबलपुर, उमरिया और खरगौन ऐसे दस शीर्ष जिलों में शामिल हैं, जहां 75 प्रतिशत से अधिक किसानों को राशि का भुगतान किया जा चुका है। सोयाबीन के परिवहन का कार्य भी प्रदेश में 95 प्रतिशत हो चुका है। प्रदेश में मालवा अंचल में सर्वाधिक सोयाबीन उत्पादन होता है। किसानों के पंजीयन से लेकर, आवश्यक बारदाने की व्यवस्था, परिवहन,भण्डारण और राशि के भुगतान के कार्यों की राजधानी से लेकर जिलों तक नियमित समीक्षा भी की जा रही है। recent visitors 71

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा -भारत की सनातन परम्परा की रक्षा के लिए गुरू गोविंद सिंह ने अपने साहिबजादों को बलिदान कर दिया

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भारत की सनातन परम्परा की रक्षा के लिए गुरू गोविंद सिंह ने अपने साहिबजादों को बलिदान कर दिया, परंतु वे झुके नहीं। साहिबजादों द्वारा देश और धर्म के लिए बलिदान हो जाना उनके अवतारी स्वरूप से हमें अवगत कराता है। मुगलों द्वारा क्रूरता की पराकाष्ठा करते हुए अल्पायु बालकों को शहीद कर देना सदियों बाद भी हमें झकझोर देता है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने अमर बलिदानियों की पुण्य-स्मृतियों को वीर बाल दिवस के रूप में मनाने की परम्परा वर्ष 2022 से आरंभ की। वीर बलिदानियों की स्मृति को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए राज्य शासन द्वारा भी जिला स्तर पर कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं। कीर्तन से हुआ शौर्य, वीरता, बलिदान और करूणा का प्रकटीकरण मुख्यमंत्री डॉ. यादव भारत भवन में वीर बाल दिवस पर आयोजित साहिबजादों की शहादत गाथा कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर कीर्तन जत्थे द्वारा साहिबजादों की शहादत गाथा प्रस्तुत की गई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कीर्तन के माध्यम से अभिव्यक्त शौर्य, वीरता, बलिदान और करूणा की भावनाओं के संवेदनशील और प्रभावशाली प्रस्तुती की सराहना की। इस अवसर पर संस्कृति एवं पर्यटन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री धर्मेन्द्र सिंह लोधी, सांसद श्री वी.डी. शर्मा, श्री हितानंद शर्मा, श्री राहुल कोठारी, सुश्री नेहा बग्गा सहित जन-प्रतिनिधि उपस्थित थे। मात्र 6 और 9 वर्ष की आयु में साहिबजादों ने धर्म और मानवता की रक्षा के लिए किए प्राण न्यौछावर उल्लेखनीय है कि गुरू गोविंद सिंह जी के वीर पुत्रों के अद्वितीय बलिदान और साहस के प्रति सम्मान प्रकट करने के उद्देश्य से प्रतिवर्ष 26 दिसम्बर वीर बाल दिवस के रूप में मनाया जाता है। यह दिन गुरू जी के छोटे साहिबजादे जोरावर सिंह और साहिबजादे फतेह सिंह के बलिदान को समर्पित है। दोनों ही साहिबजादों को दीवार में जीवित चुनवा दिया गया था। धर्म और मानवता की रक्षा के लिए जब उन्होंने अपने प्राण न्यौछावर किए तब साहिबजादे जोरावर सिंह की आयु मात्र 9 वर्ष और साहिबजादे फतेह सिंह की आयु सिर्फ 6 वर्ष थी।   recent visitors 64