नेता प्रतिपक्ष चिंटू चौकसे की गिरफ्तारी पर बवाल, हीरानगर थाने के बाहर धरने पर बैठे कांग्रेसी

इंदौर इंदौर नगर निगम के विपक्षी नेता चिंटू चौकसे को हत्या के प्रयास के आरोप में गिरफ्तार किया गया है. यह कार्रवाई चौकसे और उनके परिवार के बीजेपी नेता कपिल पाठक के परिवार के बीच हुए झगड़े के बाद हुई. चिंटू चौकसेकी गिरफ्तारी के बाद कांग्रेस ने मध्य प्रदेश  सरकार पर अपने सदस्यों को गलत तरीके से निशाना बनाने का आरोप लगाया. अतिरिक्त पुलिस आयुक्त अमित सिंह ने बताया कि बीती शनिवार रात चौकसे और बीजेपी नेता कपिल पाठक के बच्चों के बीच झगड़ा हुआ था. उन्होंने बताया कि दोनों परिवारों के बीच झगड़ा हुआ, जिसमें पाठक के सिर पर गंभीर चोटें आईं और उसे अस्पताल ले जाया गया. पुलिस को दिए गए अपने बयान में पाठक ने चौकसे पर रॉड से हमला करने का आरोप लगाया. पुलिस अधिकारी ने बताया कि मेडिकल रिपोर्ट में भी डॉक्टर ने पाठक के सिर पर गहरे घाव की पुष्टि की है. उन्होंने बताया कि चौकसे के अलावा 7 अन्य लोगों पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 109 (हत्या का प्रयास) के तहत मामला दर्ज किया गया है. उन्होंने बताया कि चिंटू चौकसे और सुभाष यादव को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि अन्य – रोहन चौकसे, ईशान चौकसे, राधेश्याम चौकसे, गौरव चौधरी, सुमित ठक्कर, रवि प्रजापति और एक अज्ञात व्यक्ति फरार हैं. इस बीच, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने गिरफ्तारी की निंदा करते हुए इसे असंवैधानिक और राजनीतिक प्रतिशोध का नतीजा बताया. पटवारी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, "हमने सत्ता के इस दुरुपयोग को उठाने के लिए डीजीपी (पुलिस महानिदेशक) से मिलने की मांग की है." गिरफ्तारी के बाद कांग्रेस कार्यकर्ता इंदौर पुलिस कमिश्नर के कार्यालय के बाहर एकत्र हुए, जबकि चौकसे समर्थकों ने हीरानगर पुलिस स्टेशन पर विरोध प्रदर्शन किया. आगे की अराजकता को रोकने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया. मेडिकल रिपोर्ट का हवाला देते हुए बीजेपी समर्थकों ने दावा किया कि पाठक की शिकायत सही थी. recent visitors 41

गुजरात उपचुनाव: कांग्रेस ने AAP से गठबंधन से किया इनकार, अकेले लड़ेगी इलेक्शन

 विसावदर गुजरात की राजनीति में उपचुनावों के मद्देनजर हलचल तेज है. एक ओर देशभर में INDIA गठबंधन की बात हो रही है, वहीं गुजरात में कांग्रेस ने अलग राह चुन ली है. अब न कोई गठबंधन, न साझा रणनीति — कांग्रेस ने तय कर लिया है कि वह विसावदर (Visavadar) और कड़ी (Kadi) विधानसभा उपचुनावों में अकेले ही मैदान में उतरेगी. गुजरात प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष शक्तिसिंह गोहिल (Shaktisinh Gohil) ने शुक्रवार (18 अप्रैल) को यह ऐलान किया. न्यूज एजेंसी एएनआई के अनुसार उन्होंने बात करते हुए साफ किया कि यह निर्णय पार्टी ने सर्वसम्मति से लिया है. उन्होंने कहा, "गुजरात की जनता ने कभी तीसरे मोर्चे को समर्थन नहीं दिया. यहां लड़ाई हमेशा कांग्रेस और बीजेपी के बीच ही रही है." AAP के साथ चुनाव लड़ने से नुकसान- गोहिल गोहिल ने आप पर निशाना साधते हुए कहा, "पिछले चुनावों में आम आदमी पार्टी ने पूरी ताकत लगाई, बड़े नेता प्रचार में आए, लेकिन उन्हें महज 10 से 11 प्रतिशत वोट ही मिले. इससे कांग्रेस को नुकसान पहुंचा, और बीजेपी को फायदा हुआ." उन्होंने आगे कहा, "अगर बीजेपी को हराना है तो कांग्रेस ही मुख्य विपक्ष है. हम AAP से अपील करते हैं कि वे विसावदर और कड़ी सीटों पर अपने उम्मीदवार वापस लें. कांग्रेस इन दोनों सीटों पर अकेले चुनाव लड़ेगी." राज्य स्तर पर अगल, लेकिन राष्ट्र स्तर पर एक है INDIA- गोहिल हालांकि, गोहिल ने यह भी कहा कि यह निर्णय केवल राज्य स्तर तक सीमित है. "राष्ट्रीय स्तर पर हम INDIA गठबंधन का हिस्सा हैं और एकजुट हैं," उन्होंने कहा. गुजरात की ये दोनों सीटें- विसावदर (जिला जूनागढ़) और कड़ी (जिला मेहसाणा, अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित)- विभिन्न कारणों से रिक्त हुई हैं. विसावदर सीट दिसंबर 2023 में आम आदमी पार्टी के विधायक भूपेंद्र भयानी के इस्तीफे और बीजेपी में शामिल होने के कारण खाली हुई, जबकि कड़ी सीट फरवरी 2024 में बीजेपी विधायक कर्सन सोलंकी के निधन से खाली हो गई थी. उपचुनाव की तिथियों की घोषणा अभी चुनाव आयोग ने नहीं की है, लेकिन कांग्रेस ने पहले ही अपने इरादे साफ कर दिए हैं. यह घटनाक्रम 8-9 अप्रैल को गुजरात में हुए कांग्रेस के AICC सत्र के बाद सामने आया है, जहां पार्टी ने आगामी चुनावों में जीत का संकल्प लिया था और सरदार पटेल व महात्मा गांधी की विरासत पर अपनी दावेदारी दोहराई थी. recent visitors 50

मंच टूटने के बाद एमपी कांग्रेस ने कार्यक्रमों को लेकर जो गाइडलाइन बनाई

भोपाल भोपाल में पिछले महीने यानि 10 मार्च को रंगमहल चौराहे पर किसान कांग्रेस द्वारा आयोजित विधानसभा घेराव के कार्यक्रम का मंच टूट गया था। इस घटना में कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष राजीव सिंह, महेन्द्र सिंह चौहान, महेन्द्र जोशी सहित आधा दर्जन नेता गंभीर घायल हुए थे। कांग्रेस ने पार्टी के सभी विधायकों, सांसदों, जिला अध्यक्षों, प्रदेश पदाधिकारियों, जिला प्रभारी, सह प्रभारी, संगठन मंत्रियों और ब्लॉक अध्यक्षों के साथ पूर्व सांसद, पूर्व विधायकों को पार्टी के कार्यक्रमों की मंच व्यवस्था, स्वागत, भाषण, वाहन व्यवस्था और बैकड्रॉप की गाइडलाइन भेजी है। जिला प्रभारियों और सह प्रभारियों पर इसे पालन कराने की जिम्मेदारी दी गई है। दिल्ली से मंजूरी मिली, भोपाल में चर्चा बाकी एमपी कांग्रेस ने कार्यक्रमों को लेकर जो गाइडलाइन बनाई है, उसकी दिल्ली में ऑल इंडिया कांग्रेस कमीटी (एआईसीसी) से सैद्धांतिक सहमति मिल गई है। प्रदेश स्तर पर 20 अप्रैल को होने वाली बैठक में सहमति के बाद इसे जारी कर दिया जाएगा। प्रदेश के जिन नेताओं पदाधिकारियों को यह गाइडलाइन भेजी गई है, उनसे यह कहा गया है कि यदि कोई सुझाव हो तो 19 अप्रैल तक भेज दें ताकि जरूरी सुझावों को शामिल करते हुए इसे फाइनल मंजूरी मिल सके। कार्यक्रमों के पहले की तैयारियां     कार्यक्रमों में महात्मा गांधी, डॉ. भीमराव अंबेडकर की फोटो अनिवार्यतः: रखवाई जाएं। और अतिथियों द्वारा सूत की माला से माल्यार्पण किया जाए।     कार्यक्रम का शुभारंभ वंदे मातरम् के गायन से किया जाए।     कार्यक्रम के समापन में जन-गण-मन अनिवार्य रूप से कराया जाए।     मंच संचालक द्वारा सभी को इस संबंध में कार्यक्रम के दौरान इन बातों को बार-बार दोहराया जाए। ताकि राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान के दौरान अनुशासन का पालन हो। जिला स्तर के कार्यक्रम के लिए प्रोटोकॉल जिला स्तरीय मंच- जिला स्तर के संगठन के ऐसे कार्यक्रम जिसमें बडे़ नेताओं, प्रदेश अध्यक्ष, नेता प्रतिपक्ष, प्रदेश प्रभारी शामिल हों। उस कार्यक्रम में सिर्फ 12 बाय 12 फीट और 3 फीट ऊंचाई का मंच वक्ताओं के लिए बनाया जाएगा, जिसमें बोलने के लिए बीचों बीच डायस रखी जाएगी। इस मंच पर बैकड्रॉप में 16 बाय 16 फीट का होर्डिंग लगाया जाएगा। यानि मंच पर कोई नेता नहीं बैठेगा। नाम बुलाने पर नेता डायस पर जाकर स्पीच देंगे और नीचे कार्यकर्ताओं के साथ बैठेंगे। recent visitors 46

पार्टी संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत और सक्रिय बनाने की दिशा में पार्टी ने बड़े कदम उठाने शुरू कर दिए

जयपुर  गुजरात में हाल ही में संपन्न हुए कांग्रेस के राष्ट्रीय अधिवेशन (Congress National Adhiveshan) के बाद संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत और सक्रिय बनाने की दिशा में पार्टी ने बड़े कदम उठाने शुरू कर दिए हैं. राजस्थान इस दिशा में सबसे पहला मॉडल स्टेट बना है. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा (Govind Singh Dotasra) के निर्देश पर 58 हजार से अधिक मंडल, ब्लॉक, जिला और बूथ पदाधिकारियों का डिजिटल डाटा तैयार कर लिया गया है. कौन पदाधिकारी सक्रिय है, कौन निष्क्रिय, और किस स्तर पर कौन-कौन सी संगठनात्मक गतिविधियां चल रही हैं, इससे पूरी डिटेल ऑनलाइन हो गई है. यह डाटा अब सीधे AICC और प्रदेश नेतृत्व की निगरानी में रहेगा और निष्क्रिय नेताओं की पहचान कर उनके स्थान पर नए ऊर्जावान कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी देने की प्रक्रिया जल्द शुरू हो सकती है. निष्क्रिय नेताओं की उलटी गिनती शुरू इस डिजिटल प्लेटफॉर्म की मदद से पार्टी उन नेताओं की लिस्ट तैयार कर रही है जो वर्षों से पदों पर जमे हैं, लेकिन संगठनात्मक रूप से निष्क्रिय बने हुए हैं. ये वह चेहरे हैं जिन पर अब तक पार्टी के पास निगरानी की कोई सटीक व्यवस्था नहीं थी, लेकिन अब एक क्लिक में पता चलेगा कि किसने कितनी बैठकें अटेंड कीं, कितने कार्यकर्ता जोड़े और संगठन के लिए जमीनी स्तर पर कितना काम किया. 'परफॉर्मेंस ही प्रमोशन का आधार बनेगा' राजस्थान कांग्रेस का यह डिजिटलाइजेशन मॉडल अब राष्ट्रीय अधिवेशन के बाद पूरे देश में लागू किया जा सकता है. अधिवेशन में “संगठन निर्माण” को लेकर जिस विचार को बल दिया गया था, वह अब धरातल पर उतरता नजर आ रहा है. डोटासरा ने कहा, यह कदम केवल डेटा एंट्री नहीं, बल्कि कांग्रेस संगठन की रीब्रांडिंग है, जहां परफॉर्मेंस ही प्रमोशन का आधार बनेगा. एक क्लिक में प्रदेश का संगठनात्मक ब्लूप्रिंट इस डिजिटलीकरण के बाद कार्यकर्ताओं की ट्रैकिंग अब आसान होगी. मंडल, ब्लॉक और बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं की उपस्थिति, सक्रियता और सहभागिता का ऑनलाइन रिकॉर्ड तैयार किया जा सकता है. प्रशिक्षण शिविरों, बैठकों और अभियानों में भागीदारी का डिजिटल विश्लेषण होगा. निष्क्रिय पदाधिकारियों की तत्काल पहचान और रिपोर्टिंग हो सकेगी. एक क्लिक में पूरे प्रदेश का संगठनात्मक ब्लूप्रिंट सामने आ जाएगा. संगठन में व्यापक फेरबदल की तैयारी सूत्रों के मुताबिक, इस डिजिटल डाटा के आधार पर जल्द ही संगठन में व्यापक फेरबदल की तैयारी है. कई वर्षों से पदों पर जमे नेताओं को हटाकर युवाओं, महिलाओं और सक्रिय कार्यकर्ताओं को आगे लाने की योजना बनाई जा रही है. इस पूरी प्रक्रिया का डाटा कांग्रेस की वेबसाइट पर अपलोड किया जाएगा और राष्ट्रीय नेतृत्व इसे सीधा देख सकेगा. इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि संगठन के किसी भी स्तर पर निष्क्रियता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. recent visitors 51

राष्ट्रीय अधिवेशन के बाद कांग्रेस की बड़ी सर्जरी, ब्लॉकों में नए पदाधिकारी होंगे नियुक्त

उज्जैन  कांग्रेस में संगठनात्मक स्तर पर जिले में बड़े फेरबदल की तैयारी है। इसमें ब्लॉकों में नए पदाधिकारी नियुक्त करने सहित ग्रामीण जिलाध्यक्ष बदला जा सकता है। संभावना है कि इस बार पार्टी युवा, निर्विवादित और किसी ग्रुप विशेष का न हो, संगठन समर्पित ऐसे नेता को जिले की कमान सौंप सकती है। शहर सहित जिले में कांग्रेस लगातार चुनाव हो रहे हैं। इसमें नगर निगम, विधानसभा और लोकसभा चुनाव भी शामिल है। कोर्ट के आदेश के बाद हाल ही में हुए जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में तो कांग्रेस अपना समर्थित प्रत्याशी खड़ा नहीं कर पाई थी। ऐसे में संगठन में फेरबदल की लगातार अटकलें जारी हैं। अब संभावना जताई जा रही है कि गुजरात में पार्टी के बैठक का असर पार्टी में विभिन्न पदों पर सर्जरी के रूप में देखने को मिलेगा। इसमें उज्जैन जिले में भी विभिन्न पदों पर बदलाव की तैयारी है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, शहर अध्यक्ष पद पर परिवर्तन नहीं होगा लेकिन जिलाध्यक्ष का चेहरा बदलना लगभग तय है। इसके पीछे अपेक्षित परिणाम नहीं मिलने के साथ ही वर्तमान अध्यक्ष कमल पटेल का कार्यकाल पहले ही पूर्ण होना मुख्य कारण है। कांग्रेस के जिला प्रभारी अमित शर्मा ने बताया कि जिले के संगठनात्मक स्तर पर कई बदलाव होंगे। ऐसे कार्यकर्ता जो लंबे समय से पार्टी के लिए समर्पित भाव से कार्य कर रहे हैं, उन्हें नई व महत्वपूर्ण जिमेदारियां दी जाएगी। युवा, उर्जावान लोगों को अवसर दिया जाएगा। शर्मा के अनुसार, नई नियुक्तियों को लेकर प्रक्रिया अंतिम चरण में हैं। अब नए ब्लॉक अध्यक्षों की नियुक्ति शीघ्र होगी शहर व जिले में नए ब्लॉक स्तर पर भी बदलाव होंगे। लगभग सभी ब्लॉकों में नए अध्यक्ष नियुक्त करने की तैयारी है। अप्रेल अंत या मई की शुरुआत में यह परिवर्तन देखे जा सकते हैं। recent visitors 42

संगठन के सशक्तीकरण के लिए कांग्रेस अब नई टीम को मैदान में उतार रही, अब जिला इकाइयों के अध्यक्ष बदले जाएंगे

भोपाल  संगठन के सशक्तीकरण के लिए कांग्रेस अब नई टीम को मैदान में उतार रही है। इसके तहत प्रदेश कांग्रेस में परिवर्तन के बाद अब जिला इकाइयों के अध्यक्ष बदले जाएंगे। अगले माह के अंत तक यह प्रक्रिया पूरी होगी। इसमें उन अध्यक्षों के स्थान पर पहले नई नियुक्तियां होंगी, जहां बरसों से एक ही व्यक्ति अध्यक्ष है। इसमें देवास, सतना, उज्जैन, उमरिया शामिल हैं। पार्टी ने तय किया है कि सहमति बनाकर नए लोगों को अवसर दिया जाएगा। आधे से अधिक पदाधिकारी 50 वर्ष से कम आयु के बनाए जाएंगे। कमल नाथ के समय के अधिकांश जिलाध्यक्ष     अधिकतर जिलाध्यक्ष तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष कमल नाथ के समय नियुक्त किए गए थे। कांग्रेस ने वर्ष 2025 को संगठन वर्ष के रूप में मनाने का निर्णय लिया है। इसमें संगठन को मजबूत बनाने के लिए नई टीम बनाई जा रही है।     नए चेहरों को अवसर दिया जा रहा है। चुनाव से लेकर बूथ प्रबंधन तक के लिए अलग-अलग समितियां गठित की गई हैं। अब जिला इकाइयों में आगामी चुनाव की तैयारियों को ध्यान में रखते हुए परिवर्तन किया जा रहा है।     पार्टी पदाधिकारियों का कहना है कि राष्ट्रीय स्तर पर भी नए लोगों को मौका दिया जा रहा है। ऐसा ही मध्य प्रदेश में भी आम सहमति बनाकर किया जाएगा। नई नियुक्तियां इसी को ध्यान में रखकर की जाएंगी। अहमदाबाद में आज से राष्ट्रीय अधिवेशन मंगलवार और बुधवार को गुजरात के अहमदाबाद में होने वाले पार्टी के राष्ट्रीय अधिवेशन में जिला अध्यक्षों की भूमिका बढ़ाने के प्रस्ताव पर मुहर लग जाएगी। इसके बाद प्रदेश में परिवर्तन किया जाएगा। प्रदेश अध्यक्ष कह चुके हैं कि मई अंत तक आवश्यकता के अनुसार जिला अध्यक्ष बदले जाएंगे। जिला हो या फिर ब्लाक इकाई, परिवर्तन का आधार केवल समयावधि नहीं बल्कि संगठन की स्थिति भी बनेगी। recent visitors 53

मध्य प्रदेश कांग्रेस में कमजोर प्रदर्शन वाले जिलाध्यक्ष हटाए जाएंगे, अहमदाबाद अधिवेशन पर सबकी नजर

भोपाल  मध्य प्रदेश कांग्रेस में जल्द ही बड़े बदलाव होने वाले हैं। पार्टी 50% से ज्यादा जिला अध्यक्षों को बदलने की तैयारी कर रही है। यह फैसला पिछले चुनावों में कांग्रेस के खराब प्रदर्शन को देखते हुए लिया गया है। नए अध्यक्षों की घोषणा अहमदाबाद में होने वाले कांग्रेस के राष्ट्रीय अधिवेशन के बाद होने की संभावना है। इस बदलाव का मकसद पार्टी संगठन को मजबूत करना है ताकि आने वाले चुनावों में बेहतर प्रदर्शन किया जा सके। 10 से 12 साल से बने हैं जिलाध्यक्ष पार्टी सूत्रों का कहना है कि प्रदेश अध्यक्ष ने इस लिस्ट को फाइनल कर लिया है। 8-9 अप्रैल को अहमदाबाद में होने वाले राष्ट्रीय अधिवेशन के बाद इसकी घोषणा हो सकती है। कई जिलों में अध्यक्ष 10 से 12 साल से पद पर बने हुए हैं। पार्टी सूत्रों के अनुसार, कई जिलों में अध्यक्ष वरिष्ठ नेता कमलनाथ के कार्यकाल में बने थे। अब प्रदेश अध्यक्ष पटवारी अपनी टीम बनाने की तैयारी में हैं। लंबे समय से पद पर बने हैं ये लोग ग्वालियर शहर के अध्यक्ष देवेंद्र शर्मा, उज्जैन ग्रामीण के अध्यक्ष कमल पटेल और शहडोल के जिला अध्यक्ष सुभाष गुप्ता 2018 से पद पर हैं। सतना के शहर अध्यक्ष मकसूद अहमद लगभग 12 साल से और ग्रामीण अध्यक्ष दिलीप मिश्रा 10 साल से पद पर हैं। नीमच के अध्यक्ष अनिल चौरसिया 7 साल से और विश्वनाथ ओकटे 4 सालों से पद पर हैं। खंडवा, रायसेन जैसे कई जिलों में कई सालों से जिला अध्यक्ष ही नहीं हैं। राहुल गांधी से हुई थी चर्चा 3 अप्रैल को राहुल गांधी के साथ हुई चर्चा में जिला अध्यक्षों ने नियुक्तियों और टिकट की प्रक्रिया में अधिकार मांगे थे। राहुल ने कहा था कि उन्हें पार्षद से लेकर लोकसभा में टिकट प्रक्रिया में शामिल करने का प्रस्ताव बनेगा। साथ ही पार्टी संगठन को मजबूत करने की जिम्मेदारी भी लेनी होगी। इसका मतलब है कि जिला अध्यक्षों को टिकट बंटवारे में भी अपनी बात रखने का मौका मिलेगा। अहमदाबाद के बाद एमपी में पार्टी को मजबूत करेगी कांग्रेस पीसीसी मीडिया विभाग के चेयरमैन मुकेश नायक ने कहा कि अहमदाबाद के राष्ट्रीय अधिवेशन के बाद कांग्रेस मध्य प्रदेश में संगठन को मजबूत करेगी। इसके बाद प्रदेश में अधिक प्रभावी भूमिका में सरकार के सामने आएगी। उनका कहना है कि पार्टी संगठन को मजबूत करके सरकार को टक्कर देने के लिए तैयार है। नए लोगों को भी मिलेगा मौका बदलाव में उन जिला अध्यक्षों को हटाया जाएगा जो कई सालों से पद पर हैं। साथ ही उन अध्यक्षों को भी हटाया जाएगा जिनके क्षेत्र में कांग्रेस का प्रदर्शन चुनावों में कमजोर रहा है। पार्टी का मानना है कि नए लोगों को मौका देने से संगठन में नई ऊर्जा आएगी। फाइनल हुई लिस्ट पार्टी सूत्रों की मानें तो प्रदेश अध्यक्ष इस लिस्ट को फाइनल कर चुके हैं। अहमदाबाद में होने वाले राष्ट्रीय अधिवेशन के बाद घोषणा होने की संभावना है। इसका मतलब है कि जल्द ही नए जिला अध्यक्षों के नामों का ऐलान हो सकता है। कई जिलों में अध्यक्ष काफी लंबे समय से पद पर हैं। कोई 10 साल से तो कोई 12 साल से अध्यक्ष बना हुआ है। अब पार्टी नए चेहरों को मौका देना चाहती है। recent visitors 39