बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में 10वें हाथी की मौत, दिनभर जांच करती रही टीमें; जांच एजेंसियों ने डेरा जमाया

10 elephants arrived one by one in bandhavgarh Tiger Reserve उमरिया । बांधवगढ़ नेशनल पार्क में गुरुवार को दो और हाथियों ने दम तोड़ दिया। दोपहर में 9वें हाथी और शाम को दसवें हाथी की मौत हुई। मामले में एसटीएफ ने डॉग स्क्वॉड की मदद से 7 खेतों और 7 घरों की तलाशी ली है। उमरिया जिले का बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में मंगलवार को चार हाथियों की मौत हो गई। बुधवार को सुबह खबर आई कि तीन और हाथियों ने दम तोड़ दिया है, फिर बुधवार रात को एक गुरुवार को सुबह एक और शाम को एक और हाथी ने दम तोड़ दिया। इस तरह से मरने वाले हाथियों की संख्या कुल 10 हो चुकी है। कई स्तर पर जांच जारी, हाथियों के शवों का किया जा रहा परीक्षण हाथियों की मौत के बाद राज्य से लेकर केंद्र तक हड़कंप मचा हुआ है। हर कोई सकते में है कि आखिर अचानक इतने हाथियों की मौत कैसे हो गई। ऐसा क्या हुआ जिससे एक-एक करके दस हाथियों ने दम तोड़ दिया। मौत की जांच के लिए केंद्र और राज्य की वाइल्डलाइफ एजेंसी की टीम भी बुधवार को बांधवगढ़ पहुंची है। मौत की सही वजह का पता लगाने के लिए हाथियों के शवों का परीक्षण किया जा रहा है। recent visitors 185

ओरछा में आज से दीपावली उत्सव की शुरुआत: देवउठनी ग्यारस तक गूंजेगा बुंदेली नृत्य और संगीत

Diwali festival begins in Orchha from today: Bundeli dance and music will resonate till Devuthani Gyaras (कमलेश  ),भोपाल। मध्य प्रदेश की धार्मिक नगरी ओरछा में आज से परंपरागत दीपावली उत्सव की भव्य शुरुआत हो रही है। श्री रामराजा सरकार की नगरी माने जाने वाले ओरछा में हर साल दीपावली के मौके पर बुंदेलखंड के करीब 150 गांवों की टोलियां नृत्य और गायन के साथ भगवान के दर्शन करने पहुंचती हैं। इस अनोखे उत्सव के आकर्षण में सिर्फ स्थानीय लोग ही नहीं, बल्कि यहां आए पर्यटक भी रंग जाते हैं और बुंदेली रंग में रंगने को मजबूर हो जाते हैं। नृत्य और गायन का विशेष प्रदर्शन दीपावली से शुरू होकर देवउठनी ग्यारस तक चलने वाले इस 11-दिवसीय उत्सव में, बुंदेली टोलियां अपने अनूठे वेशभूषा और नृत्य-संगीत के साथ गांव-गांव में घूमती हैं। इन टोलियों में कलाकार छोटे-छोटे कांच के टुकड़ों से सजाए मोटे ऊनी कपड़ों में सजे रहते हैं, जो पारंपरिक कला और संस्कृति को प्रदर्शित करते हैं। इनकी नृत्य शैली और साज-बाज की ध्वनियां, जो नगड़िया और बुंदेली गायन से सजी होती हैं, भगवान राम के प्रति उनकी असीम श्रद्धा को उजागर करती हैं।  एक अनूठी सांस्कृतिक परंपरा बुंदेलखंड का दीपावली नृत्य अपनी अनोखी वेशभूषा, लोकगीतों, और सजीव संगीत के कारण विश्वभर में पहचान बना चुका है। जैसे मथुरा-बरसाने की होली और मैसूर का दशहरा प्रसिद्ध हैं, वैसे ही ओरछा की यह अनूठी परंपरा बुंदेली दीपावली नृत्य के लिए जानी जाती है। लोग भगवान के प्रति अपनी आस्था को प्रकट करने के लिए सालभर इस खास नृत्य का इंतजार करते हैं।  घर-घर से विदाई और देवउठनी ग्यारस पर वापसी हर गांव से दीपावली की टोलियां उत्साह और श्रद्धा के साथ ओरछा के लिए रवाना होती हैं। इनका स्वागत लोग अपने घरों के द्वारों पर करते हैं और नृत्य की धुनों पर झूमते हैं।  लोगों का कहना हैं कि रामराजा सरकार के दरबार में गायन के बाद देवउठनी ग्यारस पर ही यह टोलियां अपने गांव लौटती हैं। 11 दिनों तक यह समूह ओरछा में नृत्य और संगीत के माध्यम से इस पावन परंपरा को जीवंत रखते हैं। धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहर का यह अनूठा उत्सव ओरछा का यह दीपावली उत्सव न केवल श्रद्धालुओं के लिए आस्था का प्रतीक है बल्कि पर्यटकों के लिए भी एक विशेष आकर्षण है। भगवान रामराजा सरकार के प्रति असीम श्रद्धा से भरा यह आयोजन बुंदेलखंड की अनमोल सांस्कृतिक धरोहर और उसकी विरासत को दुनिया के सामने लाता है।  हर साल की तरह इस बार भी हजारों लोग इस पावन धरोहर का हिस्सा बनने ओरछा में इकट्ठा होंगे, जहां दीपों की जगमगाहट और नृत्य के रसमय प्रदर्शन से आस्था की यह रात और भी खास बन जाएगी। recent visitors 288

भारत-चीन सीमा पर दिवाली की मिठास: सैनिकों का एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर दोस्ती का इजहार

Sweetness of Diwali on India-China border: Soldiers express friendship by feeding sweets to each other नई दिल्ली। दिवाली के शुभ अवसर पर भारत और चीन के सैनिकों ने सीमा पर एक अनूठा उत्सव मनाते हुए एक-दूसरे को मिठाई खिलाई। देपसांग और डेमचोक में कई महीनों से जारी तनाव के बीच, दोनों देशों के सैनिकों के पीछे हटने की प्रक्रिया हाल ही में पूरी हुई है। यह कदम सीमा पर शांति और स्थिरता बनाए रखने की दिशा में एक सकारात्मक संकेत है। सैनिकों के पीछे हटने की प्रक्रिया और भविष्य की बातचीत बुधवार को दोनों देशों के सैनिकों के पीछे हटने की प्रक्रिया पूरी होने के बाद, आज दिवाली के मौके पर मिठाई बांटने का यह समारोह दोनों देशों के रिश्तों में गर्माहट और विश्वास को बढ़ाने का प्रतीक माना जा रहा है। सीमा पर स्थिति को नियंत्रित करने और आगे की पेट्रोलिंग को लेकर जल्द ही ग्राउंड कमांडर स्तर पर बातचीत भी होनी है, जिसमें ब्रिगेडियर और उससे निचले स्तर के अधिकारी शामिल होंगे।  विदेश मंत्री का बयान और तनाव कम करने की प्रक्रिया भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 27 अक्टूबर को कहा था कि सैनिकों की वापसी पहला कदम है और इसके बाद का कदम तनाव कम करना होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि दोनों देशों के बीच तनाव तब कम हो सकता है, जब भारत को पूरा विश्वास हो कि चीन भी इस दिशा में समान प्रतिबद्धता रखता है। तनाव कम करने के बाद, सीमा प्रबंधन को लेकर गहन चर्चा की जाएगी ताकि सीमा पर स्थिरता बनी रहे। सीमावर्ती क्षेत्र में शांति की दिशा में एक नई पहल इस दिवाली पर मिठाई बाँटने की परंपरा न केवल सैनिकों के बीच सौहार्द और सद्भावना बढ़ाने का संकेत है, बल्कि यह भविष्य में सीमा पर तनाव को कम करने के प्रयासों का भी हिस्सा है। भारत और चीन के बीच विश्वास को बढ़ावा देने वाले ऐसे छोटे कदम सीमा पर स्थिरता बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण हैं। दिवाली के इस उल्लास भरे माहौल में सीमा पर मिठाई का आदान-प्रदान दोनों देशों के संबंधों में सकारात्मकता का संकेत है। यह कदम सीमा पर शांति और सौहार्द बनाए रखने के साथ दोनों देशों के रिश्तों को नई दिशा देने में सहायक सिद्ध हो सकता है। recent visitors 153

जनगणना 2025: 30 नए सवालों जानें और राजनीतिक समीकरणों के साथ होगी जनगणना

Census 2025: Know 30 new questions and census will be done with political equations केंद्र सरकार ने देश में जनगणना कराने की पूरी तैयारी कर ली है। यह प्रक्रिया अगले साल से शुरू होकर एक साल में पूरी होगी और 2026 में इसके आंकड़े सार्वजनिक किए जाएंगे। इस जनगणना में एक महत्वपूर्ण बदलाव यह है कि इस बार सर्वे में सम्प्रदाय की जानकारी भी पूछी जाएगी, जिससे देश के विभिन्न सम्प्रदायों की जनसंख्या के आधार पर योजनाएं बनाई जा सकेंगी। जनगणना में कुल 30 सवाल शामिल होंगे, जो पिछली 2011 की जनगणना में पूछे गए 29 सवालों से एक अधिक है। देरी के कारण और नई समय-सीमायह जनगणना 2021 में ही होनी थी, लेकिन कोरोना महामारी के चलते इसे स्थगित करना पड़ा। इसके बाद लोकसभा चुनावों के चलते इसे और आगे बढ़ाया गया। अब सरकार ने इस पर तेजी से कदम बढ़ा दिए हैं, क्योंकि जनगणना के आंकड़ों के आधार पर ही लोकसभा और विधानसभा सीटों का परिसीमन किया जाएगा, जो 50 वर्षों से रुका हुआ है। संप्रदाय आधारित सवालों का राजनीतिक महत्वइस बार जनगणना में शामिल किए गए सम्प्रदाय आधारित सवाल विशेष चर्चा का विषय हैं। जनगणना में कबीरपंथी, रविदासी, दलित बौद्ध और अन्य सम्प्रदायों के बारे में पूछा जाएगा। इसके पीछे उद्देश्य केवल आंकड़े इकट्ठा करना नहीं है, बल्कि इन आंकड़ों के आधार पर सरकारी योजनाओं को बेहतर बनाना और समाज में राजनीतिक समीकरणों को समझना है। विशेषज्ञों का मानना है कि सम्प्रदाय आधारित आंकड़े राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण हो सकते हैं, क्योंकि यह राजनीतिक दलों को इन सम्प्रदायों के आधार पर नीतियां बनाने और समर्थन प्राप्त करने में सहायता कर सकते हैं। परिसीमन और महिला आरक्षण2029 में लोकसभा सीटों में वृद्धि और महिला आरक्षण की संभावनाओं के चलते यह जनगणना और भी महत्वपूर्ण हो गई है। परिसीमन के आधार पर सीटों के पुनर्गठन से भारत के जनसांख्यिकीय बदलावों का सीधा असर चुनावी सीटों पर पड़ेगा, जो विभिन्न राज्यों के राजनीतिक परिदृश्य को भी प्रभावित करेगा। जाति जनगणना पर चुप्पीहालांकि जाति जनगणना पर अभी भी स्थिति स्पष्ट नहीं है, लेकिन सूत्रों के अनुसार सम्प्रदाय की जानकारी पूछे जाने की तैयारी चल रही है। इससे राजनीतिक लाभ के साथ-साथ योजनाओं के क्रियान्वयन में भी सहयोग मिलेगा। जनगणना के आंकड़ों के आधार पर समाज के विभिन्न वर्गों की आवश्यकताओं और उनकी जनसंख्या के अनुपात को समझने में सहायता मिलेगी, जिससे विकास कार्यों में पारदर्शिता आएगी। आगामी जनगणना न केवल देश की जनसांख्यिकी को समझने का एक साधन होगी, बल्कि इसके माध्यम से राजनीतिक दलों को नई योजनाएं और विकास की दिशा तय करने का आधार मिलेगा। इस बार जनगणना के व्यापक परिणाम, भारतीय राजनीति और समाज दोनों पर गहरे असर डाल सकते हैं। इस बार जानकारी में लोगों से उनका संप्रदाय भी पूछा जाएगा। कबीरपंथी, रविदासी, दलित बौद्ध समेत देश के अलग-अलग राज्यों में कई संप्रदाय हैं। ऐसे में संप्रदाय भी राजनीति का एक बड़ा आधार हो सकता है। इस तरह 30 सवाल जनगणना में पूछे जाएंगे। ये हैं वो सवाल जिनका जवाब हर घर से लिया जाएगा (i) एक तरफ से दूरी।(ii) यात्रा का माध्यम। (a) क्या भारत में ही पलायन किया?(b) किस समय पलायन किया? (a) बेटे कितने ?(b) बेटियां कितनी? जन्म लेने वाले कितने बच्चे जीवित? (a) बेटे कितने ?(b) बेटियां कितनी? recent visitors 136

धनतेरस पर PM मोदी करेंगे एमपी में तीन मेडिकल कॉलेजों का उद्घाटन, किसानों को मिलेगी 1624 करोड़ की कल्याण निधि

PM Modi will inaugurate three medical colleges in MP on Dhanteras, farmers will get welfare fund of Rs 1624 crore मंदसौर। धनतेरस के अवसर पर मध्य प्रदेश सरकार द्वारा आयोजित विशेष कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वर्चुअल माध्यम से शामिल होंगे और प्रदेश के तीन नए मेडिकल कॉलेजों का शुभारंभ करेंगे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सहित कई मंत्री भी उपस्थित रहेंगे। कार्यक्रम का मुख्य आयोजन मंदसौर में रखा गया है। इन तीनों नए मेडिकल कॉलेजों में मंदसौर, नीमच और सिवनी का मेडिकल कॉलेज शामिल है। इन कॉलेजों का निर्माण पूर्ण हो चुका है, और इसी सत्र से छात्रों का प्रवेश भी आरंभ हो गया है। प्रधानमंत्री के वर्चुअल उद्घाटन के साथ ही ये तीनों मेडिकल कॉलेज आधिकारिक रूप से कार्यरत हो जाएंगे, जिससे क्षेत्र के छात्रों को चिकित्सा शिक्षा के नए अवसर मिलेंगे। किसान कल्याण निधि की सौगात इस मौके पर 80 लाख किसानों को मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना के अंतर्गत 1624 करोड़ रुपये की राशि सीधे उनके खातों में स्थानांतरित की जाएगी। किसान कल्याण निधि के इस वितरण को लेकर मुख्य कार्यक्रम मंदसौर में आयोजित किया गया है, जिससे किसानों में काफी उत्साह है। आयुर्वेदिक चिकित्सा अधिकारियों को नियुक्ति पत्र कार्यक्रम में 512 आयुर्वेदिक चिकित्सा अधिकारियों को भी नियुक्ति पत्र वितरित किए जाएंगे, जो राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं को और सुदृढ़ करेंगे। इसके साथ ही मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मंदसौर के लिए कुछ अतिरिक्त घोषणाएं भी कर सकते हैं, जिससे क्षेत्र के विकास को और गति मिलेगी। मध्य प्रदेश में स्वास्थ्य और कृषि क्षेत्र के लिए ये योजनाएं प्रदेश के नागरिकों और किसानों के लिए दीपावली पर विशेष उपहार के रूप में हैं, जो राज्य के विकास और कल्याण में अहम भूमिका निभाएंगी। recent visitors 138

ED की बड़ी कार्रवाई, IAS और उत्पाद विभाग के अधिकारियों पर छापेमारी

Big ED action in Jharkhand amidst assembly elections, raids on IAS and excise department officials रांची। झारखंड में विधानसभा चुनाव के बीच प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए राज्य के कई वरिष्ठ अधिकारियों पर शिकंजा कसा है। मंगलवार सुबह ED ने झारखंड के वरिष्ठ IAS अधिकारी विनय चौबे, उत्पाद विभाग के संयुक्त सचिव गजेंद्र सिंह और उनके करीबी रिश्तेदारों एवं संबंधित अधिकारियों के ठिकानों पर छापेमारी की। यह छापेमारी कथित शराब घोटाले से जुड़े मामले में की गई है। छापेमारी का मकसद और प्रमुख स्थान हालांकि, ED ने किन-किन स्थानों पर छापेमारी की है, इसकी विस्तृत जानकारी अभी सामने नहीं आई है। बताया जा रहा है कि इस कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य शराब घोटाले से जुड़े कागजात, संपत्तियों और लेनदेन के सबूत जुटाना है। इस छापेमारी में कई आर्थिक दस्तावेज और बैंक रिकॉर्ड्स की भी जाँच की जा रही है। मामला और प्राथमिकी यह मामला उस समय प्रकाश में आया था जब झारखंड के विकास कुमार ने छत्तीसगढ़ के रायपुर में शराब घोटाले की साजिश और आबकारी नीति में हेरफेर को लेकर शिकायत दर्ज कराई थी। इसके आधार पर रायपुर में प्राथमिकी दर्ज की गई। आरोप है कि यह घोटाला रायपुर में बनाई गई आबकारी नीति में बदलाव के जरिए किया गया, और इसके तहत राज्य में शराब वितरण को लेकर बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताएँ हुई हैं। पिछली छापेमारियाँ यह पहली बार नहीं है जब ED ने इस मामले में छापेमारी की है। बीते साल 23 अगस्त को भी ED ने राज्य के वित्त मंत्री रामेश्वर उरांव, उनके बेटे रोहित उरांव और शराब कारोबारी योगेंद्र तिवारी के रांची, देवघर, दुमका और कोलकाता स्थित 32 ठिकानों पर छापेमारी की थी। इस कार्रवाई में कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और संपत्तियों के रिकार्ड जब्त किए गए थे, जिससे घोटाले की जड़ तक पहुँचने में मदद मिली। चुनावी माहौल और ED का एक्शन चुनाव के बीच इस कार्रवाई से सियासी गलियारों में हलचल मच गई है। झारखंड में शराब घोटाले को लेकर विपक्षी दल पहले से ही सरकार पर हमलावर हैं, और ED की यह ताजा कार्रवाई चुनावी माहौल में एक बड़ा मुद्दा बन सकती है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि चुनावों के दौरान इस तरह की कार्रवाई से सत्तारूढ़ दल पर दबाव बढ़ सकता  इस मामले में ED की छापेमारी से झारखंड में शराब घोटाले की सच्चाई सामने आने की उम्मीदें बढ़ गई हैं। आगामी दिनों में ED की ओर से और भी बड़े खुलासे होने की संभावना है। वहीं, चुनावी माहौल में इस कार्रवाई के क्या असर होते हैं, यह देखना दिलचस्प होगा। recent visitors 158

आयुष्मान भारत में बुजुर्गों को राहत: 70+ उम्र के लोगों को मुफ्त चिकित्सा सेवाएं

Relief to the elderly in Ayushman Bharat: Free medical services to people aged 70+ नई दिल्ली। आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आयुष्मान भारत योजना का विस्तार करते हुए 70 वर्ष और उससे अधिक उम्र के बुजुर्गों को इस योजना के दायरे में शामिल किया है। अब देश के लगभग 6 करोड़ बुजुर्ग बिना किसी शर्त के सरकारी और निजी अस्पतालों में हर साल 5 लाख रुपए तक का मुफ्त इलाज करा सकेंगे। इस योजना का लाभ लेने के लिए इनकम, पेंशन, बैंक बैलेंस, जमीन या किसी पुरानी बीमारी जैसी किसी भी आधार पर कोई पाबंदी नहीं होगी। आयुष्मान योजना के तहत विस्तारित लाभ इस योजना में मरीजों के अस्पताल में भर्ती होने से पहले और बाद का खर्च, सभी प्रकार की जांच, ऑपरेशन और दवाइयों का खर्च भी कवर होता है। किसी भी पुरानी बीमारी का इलाज भी इस योजना के तहत किया जा सकता है। खास बात यह है कि बुजुर्ग भी अब सरकारी और चुनिंदा निजी अस्पतालों में मुफ्त इलाज पा सकेंगे, जिससे उनकी आर्थिक सुरक्षा और स्वास्थ्य संबंधी आवश्यकताओं को पूरा किया जा सकेगा। योजना का मौजूदा लाभ और विस्तार आयुष्मान भारत योजना के तहत पहले ही 35 करोड़ से अधिक लोग लाभान्वित हो रहे हैं, और अब बुजुर्गों को शामिल करने के बाद यह संख्या 40 करोड़ के करीब पहुँच जाएगी। यह योजना दुनिया की सबसे बड़ी स्वास्थ्य बीमा योजना मानी जाती है, जो हर साल भारत के गरीब तबके को 5 लाख रुपए तक की मुफ्त स्वास्थ्य सेवा प्रदान करती है। इस योजना की शुरुआत केंद्र सरकार ने 2017 में की थी और इसे राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति के अंतर्गत लागू किया गया था। बुजुर्गों के लिए राहत और आर्थिक सुरक्षा बुजुर्गों की सेहत और उनकी चिकित्सा आवश्यकताओं को देखते हुए इस योजना का विस्तार बेहद लाभदायक साबित होगा। इलाज में लगने वाले महंगे खर्च और गंभीर बीमारियों के इलाज का बोझ बुजुर्गों पर नहीं पड़ेगा, जिससे वे आर्थिक रूप से सुरक्षित रह सकेंगे और उनकी देखभाल का जिम्मा सरकार उठाएगी। आयुष्मान भारत योजना में बुजुर्गों का समावेश एक महत्वपूर्ण और संवेदनशील कदम है। इससे न केवल उनकी आर्थिक सुरक्षा में मदद मिलेगी, बल्कि उन्हें गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं का भी लाभ मिलेगा। यह योजना स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक बड़ी क्रांति है और इससे करोड़ों बुजुर्गों को जीवन के इस चरण में चिकित्सा राहत मिलेगी। recent visitors 177