स्टाफ की भारी कमी से जूझ रहा आबकारी महकमा, हर दिन बहती है 1400 लीटर अवैध शराब, फिर भी 900 से ज्यादा पद खाली

स्टाफ की भारी कमी से जूझ रहा आबकारी महकमा, हर दिन बहती है 1400 लीटर अवैध शराब, फिर भी 900 से ज्यादा पद खाली The excise department is grappling with a severe staff shortage, with 1,400 liters of illicit liquor being transported daily, yet over 900 posts remain vacant. सागर में हुई जहरीली शराब की त्रासदी के बाद मध्य प्रदेश के आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। राज्य में हर दिन औसतन 1,400 लीटर अवैध शराब जब्त होने के बावजूद, महकमा भारी स्टाफ की कमी से जूझ रहा है। राज्य में सैकड़ों पद खाली पड़े हैं, जिससे अवैध शराब के कारोबार पर पूरी तरह लगाम कसना एक बड़ी चुनौती बन गया है। विशेष संवाददाता : राम मेहरा भोपाल। एमपी में हर दिन औसतन लगभग 1,400 लीटर अवैध देसी शराब जब्त की जा रही है, लेकिन इसके बावजूद आबकारी प्रवर्तन मशीनरी भारी मैनपावर की कमी से जूझ रही है। सागर में हाल ही में हुई दर्दनाक जहरीली शराब त्रासदी, जिसमें कम से कम 22 लोगों की जान चली गई, के बाद इस प्रशासनिक लाचारी और मैदानी अमले की कमी पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। हर दिन हो रही है हजारों लीटर अवैध शराब की जब्ती आबकारी विभाग के रिकॉर्ड से चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान दिसंबर तक कुल 3,74,639 लीटर अवैध देसी शराब जब्त की गई, जिसका दैनिक औसत लगभग 1,388 लीटर बनता है। खास बात यह है कि जब्ती का यह पैमाना ऐसे समय में दर्ज किया गया है जब अवैध डिस्टिलेशन, अवैध कब्जे, तस्करी और अवैध बिक्री के तहत दर्ज किए जाने वाले आबकारी अधिनियम के मामलों की संख्या पिछले पांच वर्षों में अपने सबसे निचले स्तर पर आ गई थी। कागजों पर सख्ती और महकमे में भारी खालीपन एक तरफ जहां अवैध शराब का कारोबार धड़ल्ले से चल रहा है, वहीं दूसरी तरफ आबकारी विभाग खुद अंदरूनी रूप से कर्मचारियों और अधिकारियों के भारी संकट का सामना कर रहा है। महकमे के पास जमीनी स्तर पर काम करने के लिए पर्याप्त अमला ही नहीं बचा है। मध्य प्रदेश में हर दिन औसतन करीब 1,400 लीटर अवैध देसी शराब की जा रही है जब्त। सागर में जहरीली शराब पीने से कम से कम 22 लोगों की हो चुकी है दर्दनाक मौत। आबकारी विभाग के क्लास I और II के आधे से ज्यादा पद खाली पड़े हैं। क्लास III के 1,877 स्वीकृत पदों में से 704 पद अभी भी रिक्त चल रहे हैं। सरकार का दावा है कि नई भर्तियों की प्रक्रिया जारी है, लेकिन ट्रेनिंग और प्रक्रिया में समय लगेगा। पड़ोसी राज्यों तक फैले हैं अवैध शराब के जाल के तार मध्य प्रदेश की आबकारी व्यवस्था लगातार पड़ोसी राज्यों में हो रही त्रासदियों के बाद से ही रडार पर बनी हुई है। हाल ही में गुजरात के भावनगर में एक बड़ी जहरीली शराब की घटना सामने आई थी, जिसमें 12 से अधिक लोगों की मौत हो गई थी। गुजरात पुलिस की जांच में यह खुलासा हुआ था कि इस कांड के दो मुख्य आरोपी मध्य प्रदेश के रहने वाले थे और वे ही अवैध जहरीली शराब बनाने के लिए आवश्यक कैमिकल की प्रोक्योरमेंट (खरीद-फरोख्त) में सीधे तौर पर शामिल थे। recent visitors 17

मध्य प्रदेश आबकारी विभाग में  72 करोड़ का घोटाला ईडी दफ्तर में आरोपियों से पूछताछ जारी 

Rs 72 crore scam in Madhya Pradesh Excise Department, interrogation of accused continues in ED office  इन्दौर । करीब 72 करोड़ के आबकारी घोटाले में 2 आरोपियों को गिरफ्तार कर रिमांड पर लेने के बाद प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच तेज हो गई है। अधिकारियों ने घोटाले में आरोपी तीन ठेकेदारों से पूछताछ की। साथ ही आबकारी विभाग के विवादास्पद वरिष्ठ अधिकारी को बुलाकर घंटों पूछताछ की गई। कई दस्तावेज के बारे में भी जानकारी ली गई। 72 करोड़ की धोखाधड़ी रावजी बाजार थाने में दर्ज केस के आधार पर ईडी के अधिकारियों ने दो आरोपी राजू दशवंत व अंश त्रिवेदी को गिरफ्तार कर रिमांड पर लिया है। इन्हें बुधवार को कोर्ट में पेश किया जाएगा। इस बीच रावजी बाजार के केस में आरोपी रहे अभिषेक शर्मा, बलराम व जितेंद्र शिवरामे को भी तलब कर पूछताछ की बात सामने आई है। आबकारी विभाग में जमा होने वाली रसीदों में फर्जीवाडा कर 72 करोड़ की धोखाधड़ी की थी। तत्कालीन सहायक आबकारी अधिकारी संजीव दुबे के कार्यकाल में यह घोटाला सामने आया था। पुलिस केस दर्ज होने के बाद कई ठेकेदार व कर्मचारियों पर केस दर्ज हुआ, लेकिन अधिकारियों की भूमिका तय नहीं हो पाई। अफसर का छूटा पसीना ईडी ने तत्कालीन बड़े अधिकारी को तलब किया। उनसे घोटाले के समय की प्रक्रिया नहीं करने को लेकर पूछताछ की व दस्तावेज भी लिए। पूछताछ के दौरान अधिकारी के पसीने छूट गए। अन्य जानकारियों के साथ उन्हें बुलाने की बात कहीं जा रही है। लंबी पूछताछ के बाद अधिकारी को गिरफ्तारी का डर सता रहा है और वे बचने के प्रयास में लग गए हैं। घोटाले के मास्टरमाइंड जांच के दौरान आरोपी राजू दशवंत व अंश त्रिवेदी के बारे में पता चला कि ये ही घोटाले के मास्टरमाइंड थे। इस समय दोनों उदयपुर में शराब कारोबार में जुड़े थे। वहां भी विला बनाकर किराए पर देने की बात भी सामने आई है। आरोपियों की संपत्ति का भी ईडी ने पता लगाया है जिसके आधार पर जल्द अटैच करने की भी संभावना व्यक्त की जा रही है। recent visitors 204

आबकारी विभाग में वसूली करने वाला अधिकारी बना ‘अपराधी ,ईडी की जांच में हुआ खुलासा

The excise department’s recovery officer became a ‘criminal’, revealed in ED investigation भोपाल ! मध्य प्रदेश के आबकारी विभाग में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच में पता चला है कि जिस अधिकारी ने 2015 के 38 करोड़ रुपये के फर्जी चालान घोटाले में से 23 करोड़ रुपये की वसूली विभाग को कराई थी, उसी को विभाग ने ‘अपराधी’ घोषित कर दिया है। वहीं, पिछले 10 सालों में विभाग का कोई अन्य अधिकारी 23 रुपये भी वसूल नहीं कर सका है.साल 2015 में उजागर हुए फर्जी चालान घोटाले में शराब ठेकेदार बैंक और ट्रेजरी के साथ-साथ विभाग को 10 हजार रुपये का चालान जमा करते थे, लेकिन उसमें दो-तीन शून्य बढ़ाकर लाखों रुपये दिखाते थे। इस गोरखधंधे में बैंककर्मी, आबकारी विभाग के बाबू और ट्रेजरी अधिकारियों की मिलीभगत सामने आई थी.तत्कालीन आबकारी अधिकारी संजीव दुबे ने इस घोटाले का खुलासा करते हुए 11 ठेकेदारों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी और उनसे 23 करोड़ रुपये की वसूली कर सरकारी खजाने में जमा कराए थे। लेकिन अब उसी अधिकारी को विभाग ने दोषी ठहराते हुए इंदौर से हटाकर मुख्यालय में अटैच कर दिया है। जबकि इस दौरान पदस्थ रहे अन्य अकाउंटेंट, एडीओ सहित कई अधिकारियों को क्लीन चिट दे दी गई है.ईडी की हालिया छापेमारी में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। जांच एजेंसी को बड़ी संख्या में शराब ठेकेदारों द्वारा नकद रकम जमा कराने के सबूत मिले हैं। इस पूरे मामले में कई आबकारी अधिकारियों और शराब ठेकेदारों की संदिग्ध भूमिका भी सामने आई है। दिलचस्प बात यह है कि जिस संजीव दुबे को विभाग ने दोषी माना, उसके खिलाफ ईडी को कोई भी सबूत नहीं मिला, क्योंकि उन्होंने तो घोटाले का पता चलने पर तुरंत वसूली कर विभाग के खाते में जमा कराई थी। वहीं, इंदौर में लंबे समय तक पदस्थ रहे अन्य कई अधिकारी विभाग के खाते में एक रुपया भी जमा नहीं करा सके, जिससे शराब ठेकेदारों और अधिकारियों के बीच सांठगांठ की आशंका गहरा गई है. recent visitors 101

आबकारी विभाग की बड़ी कार्रवाई, 2 करोड़ की शराब पर चलाया रोड रोलर

छतरपुर  आबकारी विभाग द्वारा शहर के महोबा रोड पर स्थित विभागीय वेयर हाउस के बाहर एक्सपायर हो चुकी 1.81 करोड़ कीमत की बियर और शराब का विनष्टीकरण कराया गया। शराब की बोतलों को मैदान में बिछाने के बाद उसके ऊपर रोड रोलर चलाया गया। जिला आबकारी अधिकारी बी.आर. वैद्य ने बताया कि शासन के नियमानुसार समय-समय पर विभाग द्वारा एक्सपायर शराब का विनष्टीकरण कराया जाता है। आज लगभग 4800 पेटी शराब को नष्ट कराया गया है, जिसमें बियर सहित अन्य ब्रांड की शराब शामिल है। उन्होंने बताया कि नष्ट कराई गई बियर पिछले 6 माह से रखी हुई थी जिसका विक्रय नहीं हो सका। चूंकि बियर को 6 माह की अवधि के बाद सेवन के योग्य नहीं माना जाता, इसलिए इसे नष्ट करने का प्रावधान है। इसके अलावा अन्य ब्रांड की शराब भी एक्सपायर हो चुकी थी। विभाग ने संबंधित कपंनियों से संपर्क किया था। कुछ कंपनियों ने शराब की बोतलें वापिस मांगी थी जिनके लिए शराब की बोतलों को खाली कराया गया है, शेष शराब की बोतलों को मैदान में बिछाकर रोड रोलर से नष्ट करा दिया गया है। कार्रवाई के दौरान कलेक्टर के प्रतिनिधि के रूप में एसडीएम अखिल राठौर सहित अन्य प्रशासनकि अधिकारी और विभागीय अमला मौजूद रहा।   recent visitors 65

आबकारी विभाग को इस बार 12500 करोड़ रुपए का रेवेन्यू मिलना तय

भोपाल आबकारी विभाग द्वारा इस साल अपनाई जा रही शराब दुकानों की नीलामी की प्रक्रिया से लगभग 26% अधिक रेवेन्यू मिला है। रविवार को बिडिंग से मिली दुकानों की नीलामी राशि की तुलना ई टेंडर में आई बोलियों से की गई। रिन्युअल और लाटरी के बाद बची दुकानों की नीलामी के लिए इस बार आबकारी विभाग ने नया फार्मूला तय किया था। ई टेंडर से बोलियां मांगी ई थी। साथ ही एक अन्य विकल्प में ई टेंडर के साथ बिडिंग करके बोली बढ़ाने का विकल्प था, जो शनिवार को हुआ था। इन मूल्यों की तुलना आज सिर्फ ई-टेंडर वाली बोलियों से की गई। जो भी अधिक मूल्य था, उस पर नीलामी कर दी गई। भोपाल, अनूपपुर और बुरहानपुर जैसे शहरों में रिजर्व प्राइस से काफी अधिक रेवेन्यू मिला। रिन्युअल में 5737 करोड़ तो लाटरी की प्रक्रिया में 1572 करोड़ रेवेन्यू मिला था। अभी जो समूह बचे हुए हैं, उनसे लगभग 4700 करोड़ रुपए रेवन्यू मिलना है। 3 जिलों में नीलामी नहीं जबलपुर में 4, राजगढ़ में 2 तो दमोह में 1 समूह ही बना था। इस वजह से नीलामी की प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकी, इसलिए अब जबलपुर में 29, राजगढ़ में 5 तो दमोह में 7 समूह बना दिए गए हैं ताकि छोटे ठेकेदार भी नीलामी में भाग ले सकें। 10 मार्च से दोबारा यही प्रक्रिया दोहराई जाएगी। 13 को बिडिंग और ई-टेंडर एक साथ फाइनल कर लिए जाएंगे। इस साल नीलामी में लगभग 17 हजार करोड़ रेवन्यू मिलने की उम्मीद है।   recent visitors 73

8 ठेकों का लाइसेंस किया आबकारी विभाग ने निरस्त

धमतरी. जिला आबकारी अधिकारी प्रभाकर मिश्रा ने बताया कि जिले में 27 शराब दुकानों में से 23 शराब दुकानों में आहते खोले गए। 3 स्थानों के शराब दुकान मगरलोड एफएल, अजुर्नी प्रीमियम, सोरिद नवागांव में जगह नहीं होने के कारण अहाता नहीं खोला गया है। जबकि छाती शराब दुकान के अहाता के लिए कोई आवेदन नहीं आया। भखारा कंपोजिट, कुरूद कंपोजिट, कुरूद एफएल, दानीटोला एफएल, धमतरी मेन एफएल तथा रावां, दानीटोला, आमदी कंपोजिट के लाइसेंस को निरस्त किया गया है। ठेकेदारों द्वारा निर्धारित समय पर बकाया राशि जमा नहीं किया गया था। recent visitors 98