प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जनजातीय समाज व जनजातीय क्षेत्रों के लिए विभिन्न योजनाएं संचालित की हैं – मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि मध्यप्रदेश के मंडला जिले के रामनगर में आयोजित आदि उत्सव का कार्यक्रम जनजातीय समाज के लिए गौरव की बात है। आदि उत्सव कार्यक्रम में जनजातीय समाज के रीति-रिवाज, परंपरा, संस्कृति, इतिहास इत्यादि के बारे में जानकारी दी जाती है, इसलिए संपूर्ण जनजातीय समाज आदि उत्सव के महाकुम्भ में उपस्थित हुआ है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय रविवार को रामनगर में आयोजित आदि उत्सव कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री साय के आगमन पर उनका फूलमालाओं, लोकगीत व लोकनृत्य कर भव्य स्वागत किया गया, इस अवसर पर गोंडवाना ध्वजारोहण भी किया गया। इस अवसर पर केन्द्रीय जनजातीय मंत्री जुएल ओराम, राष्ट्रीय अनुसूचित जनजातीय आयोग के अध्यक्ष अंतर सिंह आर्य, मध्यप्रदेश शासन की लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री श्रीमती संपतिया उइके, उत्तर प्रदेश सरकार के राज्यमंत्री समाज कल्याण अनु.जा. एवं जन. कल्याण संजीव गौंड़, सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते, लोकसभा सांसद कांकेर भोजराज नाग सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।     छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि उन्हें आदि उत्सव कार्यक्रम के महाकुंभ में शामिल होने का अवसर मिला है। आदि उत्सव कार्यक्रम में पहुंचने से पहले जनजातीय समाज के चौगान स्थित मढ़िया में पूजा-अर्चना कर प्रदेश की जनता के लिए सुख-समृद्धि की कामना करते हुए आशीर्वाद लिया। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश राज्य, छत्तीसगढ़ राज्य का बड़ा भाई है इसलिए मध्यप्रदेश में आने पर उन्हें बहुत प्रसन्नता होती है। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल में छत्तीसगढ़ राज्य का गठन हुआ था। छत्तीसगढ़ राज्य बने अब 25 वर्ष पूर्ण हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि रामनगर मंडला में आदि उत्सव कार्यक्रम का शुभारंभ केन्द्रीय मंत्री जुएल ओराम के द्वारा किया गया था। आदि उत्सव कार्यक्रम आयोजित करने से जनजातीय समाज की संस्कृति, रीति-रिवाज, परंपरा और इतिहास को जानने का अवसर मिलेगा। उन्होंने कहा कि गोंड़वाना की इस धरा में रानी दुर्गावती और राजा शंकरशाह व कुंवर रघुनाथशाह ने मातृभूमि की रक्षा करते हुए अपने प्राण न्यौछावर किए हैं। हमारे इन महापुरूषों की वीरगाथाओं से आने वाली पीढ़ी को अवगत कराना जरूरी है। उन्होंने कहा कि भारतवर्ष में जनजातीय समाज के 11 करोड़ लोग निवास करते हैं। जनजातीय समाज के विकास और उत्थान के लिए भारत सरकार के द्वारा जनजातीय मंत्रालय का गठन किया गया है। उन्होंने कहा कि यशस्वी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को जनजातीय समाज के विकास व उत्थान की गहरी चिंता है। प्रधानमंत्री प्रतिवर्ष जनजातीय क्षेत्रों के लिए करोड़ों रूपए का बजट आवंटित कराते हैं।     छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सबका साथ सबका विकास के नारा के साथ काम करते हुए 2047 तक विकसित भारत बनाने का संकल्प लिया है। उन्होंने कहा कि पर्यटन को बढ़ावा दिया जायेगा और नक्सलवाद को समाप्त किया जायेगा। डबल इंजन की सरकार का लाभ प्रदेशवासियों को मिल रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भगवान बिरसामुंडा के जन्मदिन 15 नवंबर को जनजातीय गौरव दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया है। उन्होंने धरती आबा योजना प्रारंभ कर जनजातीय समाज व जनजातीय क्षेत्रों को विकास के पथ पर जोड़ रहे हैं। प्रधानमंत्री जनमन आवास योजना के माध्यम से पिछड़ी जनजातीय परिवारों के लिए पक्के मकान बनाए जा रहे हैं। जनजातीय समाज व जनजातीय क्षेत्रों के लिए बिजली, सड़क और पानी को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। recent visitors 41

मुख्यमंत्री ने कहा कि जीवन में सच्चाई, न्याय और कर्तव्यनिष्ठा ही मनुष्य की सबसे बड़ी पूंजी है और यही मूल्य हमारे समाज और राष्ट्र को मजबूत बनाते

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय  राजधानी रायपुर के मेडिकल कॉलेज स्थित अटल बिहारी वाजपेयी सभागार में आयोजित चित्रगुप्त प्राकट्य उत्सव में शामिल हुए। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। मुख्यमंत्री साय ने चित्रगुप्त आयोजन समिति के पदाधिकारियों एवं कायस्थ समाज के सदस्यों को प्राकट्य उत्सव के सफल आयोजन के लिए बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। कार्यक्रम में चित्रांश महोत्सव स्मारिका सहित बच्चों की सीख एवं ग़ज़ल-मुक्तक संग्रह पुस्तिका का विमोचन किया गया। कायस्थ समाज के प्रतिभावान छात्रों और विभिन्न विधाओं में उत्कृष्ट कार्य करने वालों का सम्मान किया गया। मुख्यमंत्री साय ने इस मौके पर कहा कि भगवान चित्रगुप्त न्याय और कर्म के देवता हैं और उनका संदेश साफ है—जो जैसा करेगा, वैसा फल पाएगा। उन्होंने कहा कि जीवन में सच्चाई, न्याय और कर्तव्यनिष्ठा ही मनुष्य की सबसे बड़ी पूंजी है और यही मूल्य हमारे समाज और राष्ट्र को मजबूत बनाते हैं। मुख्यमंत्री ने कायस्थ समाज के इतिहास को गौरवशाली बताते हुए कहा कि इस समाज ने शिक्षा, लेखन, प्रशासन, न्याय और संस्कृति जैसे क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार समाज के सभी वर्गों के सम्मान और विकास के लिए संकल्पित है और सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण और जनकल्याण के कार्य उनकी प्राथमिकता में हैं। मुख्यमंत्री ने भगवान चित्रगुप्त के आशीर्वाद की कामना करते हुए कहा कि उनका आशीष हमें सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता रहे। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने आयोजक मंडल को भव्य आयोजन के लिए बधाई देते हुए कहा कि इस आयोजन से न केवल हमारी सांस्कृतिक चेतना को नई ऊर्जा मिलेगी, बल्कि इससे नई पीढ़ी अपने गौरवशाली इतिहास से भी परिचित होगी। कायस्थ समाज के सदस्यों का देश की आज़ादी की लड़ाई में महत्वपूर्ण योगदान रहा, साथ ही कला, साहित्य, संगीत सहित विभिन्न विधाओं में भी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उन्होंने समाज की महान विभूतियों को याद किया। इस मौके पर कार्यक्रम के संयोजक एवं छत्तीसगढ़ राज्य नागरिक आपूर्ति निगम के अध्यक्ष संजय श्रीवास्तव ने भी संबोधित करते हुए समाज की गतिविधियों से अवगत कराया।इस मौके पर आयोजन समिति के पदाधिकारी एवं कायस्थ समाज के गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित थे। recent visitors 69

राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों एवं प्राध्यापकों के साथ श्री धनखड़ का हुआ परस्पर संवाद

किसान के खेत से निकलता है विकसित भारत का रास्ता : उप राष्ट्रपति धनखड़ राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों एवं प्राध्यापकों के साथ हुआ परस्पर संवाद कार्यक्रम राज्यपाल पटेल, मुख्यमंत्री डॉ. यादव एवं केन्द्रीय मंत्री सिंधिया भी कार्यक्रम में हुए शामिल ग्वालियर उप राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने कहा है कि विकसित भारत का रास्ता किसान के खेत से निकलता है। इसलिए कृषि के क्षेत्र में काम कर रही संस्थाओं और कृषि विद्यार्थियों की जिम्मेदारी है कि वे किसानों के जीवन में बदलाव एवं खुशहाली लाने में अपना योगदान दें। प्रयास ऐसे हों कि किसान केवल फसल उत्पादक बनकर ही न रहें, अपितु वे एग्री-प्रीनियर (कृषि उद्यमी) बनें। उप राष्ट्रपति धनखड़ रविवार को ग्वालियर के राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों एवं प्राध्यापकों के परस्पर संवाद कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कृषि विद्यार्थियों का आह्वान किया कि वे तकनीक और अनुसंधान का इस्तेमाल कर कृषि क्षेत्र में बदलाव के प्रबंधक बनें। संवाद कार्यक्रम में राज्यपाल मंगुभाई पटेल, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, केन्द्रीय संचार एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, उप राष्ट्रपति की धर्मपत्नी डॉ. सुदेश धनखड़ और विश्वविद्यालय के कुलगुरू प्रो. अरविंद कुमार शुक्ला मंचासीन थे। इस अवसर पर जिले के प्रभारी एवं जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट भी विशेष रूप से उपस्थित रहे। उप राष्ट्रपति धनखड़ ने कहा कि भारतीय संस्कृति किसानों के कल्याण का संदेश देती है। वर्तमान दौर में किसानों के महत्व को प्रतिपादित करते हुए भारत के पूर्व प्रधानमंत्री स्व. लाल बहादुर शास्त्री ने "जय जवान–जय किसान" का नारा दिया था। पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेयी ने "जय जवान–जय किसान के साथ जय विज्ञान" जोड़ा और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने "जय जवान–जय किसान–जय विज्ञान में जय अनुसंधान" को शामिल किया है। उन्होंने कहा कि कृषि विद्यार्थी विज्ञान और अनुसंधान के केन्द्र बिंदु होते हैं। इसलिए विद्यार्थी इस कसौटी पर खरे उतरकर किसानों के कल्याण के लिए काम करें। उप राष्ट्रपति धनखड़ ने कहा कि किसानों को अपनी उपज तत्काल न बेचनी पड़े, इसके लिये पोस्ट हार्वेस्ट मैनेजमेंट को बढ़ावा दें और वेयर हाउस एवं कोल्ड स्टोर स्थापित कर किसानों को भण्डारण के लिए प्रेरित करें। धनखड़ ने कहा कि किसान अपनी परेशानी व्यक्त करें, उससे पहले ही हमें अंदाजा लगा लेना चाहिए कि किसान क्या चाहते हैं। उप राष्ट्रपति धनखड़ ने कहा कि खुशी की बात है कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में केन्द्र सरकार किसानों के हित में काम कर रही है और उनके लिये सकारात्मक नीतियां बनाई हैं। सरकार ने सहकारिता को भी कृषि में अध्याय के रूप में जोड़ा है। पीएम किसान सम्मान निधि योजना के तहत किसानों के खाते में सीधे धनराशि पहुँच रही है। उप राष्ट्रपति धनखड़ ने राजमाता विजयाराजे सिंधिया एवं समाजसेवी दत्तोपंत ठेंगड़ी के सुकृत्यों को याद करते हुए कहा कि सुखद संयोग है कि ग्वालियर के कृषि विश्वविद्यालय का नाम राजमाता विजयाराजे सिंधिया एवं सभागार का नाम दत्तोपंत ठेंगड़ी जी के नाम पर है। इसलिये यह विश्वविद्यालय दो ऐसी महान आत्माओं का संगम है जो राष्ट्रवाद और समाज के कल्याण के लिये समर्पित रहीं। विश्वविद्यालय के विद्यार्थी यह संकल्प लें कि इन विभूतियों के आदर्शों पर चलकर हम सदैव राष्ट्र हित को सर्वोपर्य रखेंगे। मध्यप्रदेश में गौ-संरक्षण के क्षेत्र में हो रहे प्रयासों को सराहा उप राष्ट्रपति धनखड़ ने मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा गौवंश के संरक्षण के उद्देश्य से गौशालाओं को दिए जा रहे प्रोत्साहन की प्रशंसा की। साथ ही कार्यक्रम में मौजूद मुख्यमंत्री डॉ. यादव से राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय की गौशाला के विस्तार में सहयोग के लिये कहा। कृषि विश्वविद्यालय अनुसंधान की परिपाटियों को विश्व स्तरीय बनाएँ : राज्यपाल पटेल राज्यपाल पटेल ने कहा कि मानव सभ्यता के उद्भव और विकास में कृषि की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। हमारे देश की लगभग 65 प्रतिशत आबादी के लिये कृषि आज भी आजीविका की जीवन रेखा बनी हुई है। प्रधानमंत्री मोदी दूरदृष्टि दृष्टिकोंण के साथ किसानों को समृद्ध व सशक्त बनाकर विकसित भारत बनाने के लिये लगातार काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कृषि विकास और परिवर्तन के केन्द्र बिंदु विश्वविद्यालयों को अध्ययन व अनुसंधान की मौजूदा परिपाटियों को विश्व स्तरीय बनाना होगा। साथ ही तेजी से बदलती जलवायु को ध्यान में रखकर नई तकनीकों के द्वारा खाद्य सुरक्षा को मजबूत करना होगा। राज्यपाल पटेल ने विश्वविद्यालयों से सामूहिक रूप से कृषि क्षेत्र में नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा देकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का आह्वान किया। कृषि और पशुपालन के क्षेत्र में हो रहे कार्य प्रदेश की अर्थव्यवस्था बदलेंगे : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश में कृषि और पशुपालन के कार्य प्रदेश की अर्थ व्यवस्था बदलने का कार्य करेंगे। लगभग दो वर्ष पूर्व मध्यप्रदेश का कृषि क्षेत्र 45 लाख हेक्टेयर था जो आज की स्थिति में 55 लाख हो गया है। प्रदेश में एक करोड़ हेक्टेयर कृषि क्षेत्र निर्मित करने का राज्य सरकार का संकल्प है। कृषि क्षेत्र के विकास के लिए सिंचाई का महत्वपूर्ण योगदान है, इस नाते निरंतर प्रयास भी किए जा रहे हैं। प्रदेश में नर्मदा और अन्य नदियों के जल से सिंचाई का कार्य हो ही रहा है। विश्व की प्रथम नदी जोड़ो परियोजना केन-बेतवा मंजूरी के बाद पार्वती काली सिंध चंबल परियोजना को भी स्वीकृति प्राप्त हुई है। वर्षों से यह परियोजनाएं लंबित थीं। आने वाले समय में प्रदेश में बुंदेलखण्ड, चंबल और मालवा क्षेत्र में सिंचाई सुविधाओं का उल्लेखनीय विकास होगा। इन परियोजनाओं से मध्यप्रदेश का नक्शा बदलेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अनेक राष्ट्रों में कम क्षेत्र में अधिक अनाज उत्पादन का कार्य हो रहा है। मध्यप्रदेश में जहां उच्च शिक्षा में विद्यार्थियों को कृषि संकाय के महत्व से अवगत करवाकर आवश्यक अध्ययन और अनुसंधान की व्यवस्थाएं की जा रही हैं वहीं लाभकारी फसलों के उत्पादन को महत्व दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कृषि के सहयोगी पशुपालन को बढ़ावा देने के लिए अनेक प्राथमिकताएं निर्धारित की गई हैं। जो भी व्यक्ति गोपालन करता है वह गोपाल है और हमारा घर-घर गोकुल है। राज्य सरकार ने 25 से अधिक गाय पालने पर 25 प्रतिशत की अनुदान राशि प्रदान करने और गोपालकों से दूध खरीदने का संकल्प लिया है। गौशालाओं को भूमि प्रदान करने की पहल … Read more

प्रदेशव्यापी सुशासन तिहार का तीसरा चरण मुख्यमंत्री साय के नेतृत्व में आज से होगा शुरू

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेशव्यापी सुशासन तिहार के तीसरे चरण का शुभारम्भ 5 मई से होगा। इसको लेकर शासन-प्रशासन द्वारा सभी तैयारियां पूरी कर ली गई है। सुशासन तिहार का तीसरा चरण 31 मई तक चलेगा। इस दौरान प्रत्येक जिले की 08 से 15 ग्राम पंचायतों के मध्य समाधान शिविर आयोजित किए जाएंगे, जिनमें आवेदकों को उनके आवेदनों की स्थिति की जानकारी दी जाएगी। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय एवं अन्य  मंत्रीगण कुछ समाधान शिविरों में  शामिल होंगे तथा आवेदकों से भेंट कर उनकी समस्याओं के निराकरण के बारे में जानकारी प्राप्त करेंगे। तीसरे चरण में मुख्यमंत्री स्वयं हेलीकॉप्टर से औचक रूप से किसी भी गांव में पहुँचकर लोगों से मुलाकात करेंगे और चौपाल लगाकर गांव के विकास और वहां पर पदस्थ मैदानी अमले की कार्यशैली के बारे में लोगों से जानकारी लेंगे। मुख्यमंत्री  साय इस दौरान शासकीय योजनाओं के क्रियान्वयन, निर्माण एवं विकास कार्याें की जमीनी हकीकत का भी मुआयना करेंगे।   यहां यह उल्लेखनीय है कि राज्य में शासन-प्रशासन को संवेदनशील, जनोन्मुखी और पारदर्शी बनाने के साथ ही जन समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा सुशासन तिहार-2025 का आयोजन किया जा रहा है। सुशासन तिहार के प्रथम चरण का शुभारंभ 08 अप्रैल को हुआ था। इसके तहत 11 अप्रैल तक प्रदेश की जनता से ग्राम पंचायतों और शहरी वार्डाें में शिविर लगाकर समस्याओं और मांगों के संबंध में आवेदन लिए गए। आम जनता अपने आवेदनों को सहजता से शासन-प्रशासन तक पहुंचा सके, इसके लिए ग्राम पंचायत से लेकर जिला मुख्यालयों तक प्रमुख स्थानों पर समाधान पेटियां रखी गई, जिसमें लोग अपने आवेदन डाल सके। ऑनलाईन आवेदन लेने की व्यवस्था भी सुनिश्चित की गई।   सुशासन तिहार के पहले चरण में प्रदेश की जनता से करीब 40 लाख से अधिक आवेदन-पत्र प्राप्त हुए थे। इनमें मांग, समस्या और शासकीय योजनाओं से संबंधित आवेदन शामिल थे। जिला प्रशासन द्वारा समर्पित प्रयासों से इन आवेदनों को विभागवार वर्गीकृत कर सुराज अभियान के पोर्टल पर अपलोड किया गया है, और निराकरण की प्रक्रिया पारदर्शिता के साथ जारी है। संबंधित आवेदनों की स्थिति की जानकारी भी हितग्राहियों को समयबद्ध रूप से दी जा रही है। तीसरे चरण में शासन की प्राथमिकता आम जनता को जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी देना है। समाधान शिविरों में हितग्राहियों को योजनाओं के आवेदन प्रपत्र प्रदान किए जाएंगे और पात्रता के अनुसार योजना से लाभ दिलाने की कार्यवाही भी की जाएगी। समाधान शिविरों में ग्रामीणों को योजनाओं का लाभ उठाने के लिए प्रेरित एवं प्रोत्साहित भी किया जाएगा। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने स्पष्ट किया है कि सुशासन तिहार का मूल उद्देश्य प्रशासन को जनता के द्वार तक ले जाना है। उन्होंने कहा, हमारा संकल्प है कि राज्य के हर नागरिक तक शासन की योजनाओं का लाभ पहुँचे और कोई भी पात्र हितग्राही वंचित न रहे। सुशासन तिहार मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की जनहित के प्रति प्रतिबद्धता का जीवंत उदाहरण बन गया है। यह अभियान केवल आवेदन संग्रह या समस्या निराकरण का माध्यम नहीं है, बल्कि यह राज्य के शासन-प्रशासन और जनता के बीच सेतु बन गया है। recent visitors 57

जन-जागरण से जल-संरक्षण का ऐतिहासिक जन-अभियान: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि "जल स्रोतों का संरक्षण केवल प्रशासन का कार्य नहीं, यह प्रत्येक नागरिक की सांस्कृतिक और नैतिक जिम्मेदारी है।" जल संकट आज वैश्विक चिंता का विषय है और भारत जैसे कृषि प्रधान देश में यह विषय और भी अधिक गंभीर हो जाता है। मध्यप्रदेश सरकार ने ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ के माध्यम से इस चुनौती को अवसर में बदलने की प्रेरणास्पद पहल की है। जल-संरक्षण केवल अभियान नहीं, अपितु पर्यावरणीय पुनरुत्थान और सांस्कृतिक चेतना का समवेत संगम है। जन-भागीदारी से जल संरचनाओं को नवजीवन मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में 30 अप्रैल से प्रारंभ किया गया “जल गंगा संवर्धन’’ अभियान एक बहु-स्तरीय आयोजन है। इसका उद्देश्य राज्य के जल स्रोतों जैसे नदियों, तालाबों, झीलों, पुराने कुओं, बावड़ियों और जल-धाराओं को पुनर्जीवित करना और उन्हें सतत रूप से संरक्षित करना है। यह अभियान सरकारी योजना से आगे बढ़कर अब जन-आंदोलन का स्वरूप ले चुका है। अभियान का मुख्य उद्देश्य प्रदेश की नदियों, तालाबों, झीलों, पुराने कुओं, बावड़ियों और जल-धाराओं को सहेज कर उन्हें पुनर्जीवन देना है। इन जल स्रोतों की गाद निकासी, सफाई, सीमांकन और पुनर्जीवन की कार्य-योजना बनाई गई है, जिसमें जन-भागीदारी से श्रमदान भी किया जा रहा है। ग्राम पंचायतों से लेकर नगर निगमों तक लोग स्वयं आगे आकर जल स्रोतों की सफाई कर रहे हैं। नदियों के किनारे विशेष रूप से देशी प्रजातियों के पौधों का रोपण कर जल-स्तर बढ़ाने और मृदा क्षरण को रोकने का कार्य किया जा रहा है। शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में रूफ वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम को अनिवार्य किया जा रहा है। स्कूल और कॉलेजों में जल-संरक्षण पर जन-जागरण अभियान, रैलियाँ, निबंध प्रतियोगिताएँ, जल संवाद और ‘जल प्रहरी’ जैसी अवधारणाओं का क्रियान्वयन किया जा रहा है। ड्रोन से सर्वेक्षण, वैज्ञानिक तरीके से जलग्रहण क्षेत्र की मैपिंग, भू-जल पुनर्भरण तकनीकों का उपयोग आदि भी अभियान का हिस्सा हैं। इस अभियान के अंतर्गत प्रदेश के प्रत्येक जिले में हज़ारों जल स्रोतों की सफाई की जा रही है। अभियान में राजनीतिक और प्रशासनिक नेतृत्व के साथ ही जन-प्रतिनिधियों, अधिकारियों, शिक्षकों, स्वयं-सेवकों, एनजीओ और आम नागरिकों की सामूहिक सहभागिता और सक्रियता ने अभियान को जन-अभियान बना दिया है। ‘जल दीप यात्रा’, ‘जल संकल्प’ कार्यक्रमों और धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजनों के माध्यम से जल-संरक्षण का संदेश जन-जन तक पहुँचाया जा रहा है। इस कार्य में म.प्र. जन-अभियान परिषद भी सक्रिय भूमिका निभा रही है। जल गंगा संवर्धन अभियान में हजारों जल स्रोत पुनर्जीवित होने लगे हैं। वर्षाकाल में इसके प्रभावी परिणाम देखने को मिलेंगे। अनेक स्थानों पर भूजल स्तर में सुधार के संकेतों के साथ ही जलग्रहण क्षेत्रों में बढ़ती हरियाली और मिट्टी में नमी का स्तर सकारात्मक परिवर्तन लायेगा। अभियान से समाज में सकारात्मक मनोवृत्ति का विकास भी हुआ है। अभियान अंतर्गत संचालित गतिविधियों से जन-मानस में जल-संरक्षण के लिए नई चेतना और व्यवहार में बदलाव देखा जा रहा है। अभियान के अंतर्गत स्थायी जल प्रबंधन संरचनाओं जैसे चेक डैम, परकोलेशन टैंक, जल पुनर्भरण, कुएं-बावड़ी आदि के पुनरुद्धार की योजना बनाई जा रही हैं। अभियान के सफल संचालन और जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन के लिए डिजिटल मॉनिटरिंग और मूल्यांकन प्रणाली विकसित की गई है। सभी गतिविधियों की जीआईएस आधारित ट्रैकिंग और इंपैक्ट वैल्युएशन से परिणामों की निगरानी और पारदर्शिता सुनिश्चित की जा रही है। अभियान को स्थायी जन-आंदोलन बनाने के लिए राज्य सरकार इसे एक समयबद्ध आयोजन मात्र न मानते हुए जन-सहयोग से सतत अभियान के रूप में विकसित कर रही है। जल गंगा संवर्धन अभियान मध्यप्रदेश के जल संसाधनों का संरक्षण करने की दिशा में एक दूरदर्शी पहल है। साथ ही यह सामाजिक चेतना, सांस्कृतिक मूल्य और नागरिक कर्त्तव्यों को जोड़ने वाला एक व्यापक अभियान भी है। जन-भागीदारी से जन्मा यह अभियान भविष्य की पीढ़ियों को सुरक्षित, समृद्ध और जल-सम्पन्न मध्यप्रदेश देने की ओर एक सशक्त कदम है। recent visitors 61

MP कांग्रेस ने पहली बार अलग से बनाया चुनाव प्रबंधन विभाग, संगठन को मजबूत करने में जुटी

भोपाल एमपी कांग्रेस ने पहली बार चुनाव के इतने पहले चुनाव प्रबंधन विभाग का अलग से गठन है। विभाग का प्रभार पूर्व मंत्री और कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष प्रियव्रत सिंह को दिया गया है। वहीं संगठन का प्रभार पूर्व मंत्री सुखदेव पांसे को दिया गया है। मध्य प्रदेश कांग्रेस संगठन को मजबूत करने में जुटी हुई है। इसे लेकर तरह-तरह के प्रयोग किया जा रहे हैं और अलग-अलग व्यक्तियों को दायित्व दिए जा रहे हैं। विधानसभा चुनाव के करीब साढ़े तीन साल पहले कांग्रेस ने पहली बार चुनाव प्रबंधन विभाग का अलग से गठन किया है। काग्रेस के प्रदेश संगठन प्रभारी डॉ. संजय कावले ने बताया कि इससे पहले चुनाव के समय चुनाव प्रबंधन कमेटी बनाई जाती थी। पहली बार इस तरह का प्रयोग किया गया है। इस विभाग का प्रभार पूर्व मंत्री प्रियव्रत सिंह को दिया गया है। पूर्व मंत्री सुखदेव पांसे को मिली जिम्मेदारी वही संगठन प्रभारी मे भी बदलाव किया गया गया है। पूर्व मंत्री प्रियव्रत सिंह की जगह पूर्व मंत्री सुखदेव पांसे को प्रभार सौंप गया है। दरसअल चार महीने पहले एमपी कांग्रेस के संगठन में दो-दो प्रभारी नियुक्त किए गए थे। पूर्व मंत्री प्रियव्रत सिंह और प्रदेश महामंत्री संजय कामले को संगठन का प्रभारी बनाया गया था। चार महीने में ही प्रियव्रत सिंह की जगह संगठन का प्रभार पूर्व मंत्री सुखदेव पांसे को दिया गया है। कांग्रेस की चुनाव प्रबंधन समिति 1-  प्रियव्रत सिंह- प्रभारी 2-  गौरव रघुवंशी- अध्यक्ष 3-  गोरकी बैरागी- सदस्य 4- मृणाल पंत- सदस्य 5- शैलेन्द्र पटेल- सदस्य 6- मयंक तेनगुरिया- सदस्य पंचायत और वार्ड समितियों का होगा गठन एमपी कांग्रेस द्वारा गठित चुनाव प्रबंधन विभाग अब निचले स्तर के संगठन पर काम करेगा। यानि हर विधानसभा में चुनाव प्रबंधन का प्रभारी नियुक्त किया जाएगा। इसके बाद पंचायत और वार्ड समितियों का गठन होगा। इन समितियों के गठन में इस बात का ध्यान रखा जाएगा कि चुनावी लिहाज से पंचायत और वार्ड समिति के सदस्य कितने कैपेबल हैं। recent visitors 58

शहर की अलग-अलग अवैध काॅलोनी में 565 प्लाॅट भूमाफिया ने बेचे है, होगी एफआईआर

इंदौर इंदौर में प्रशासन ने अवैध काॅलोनी काटने वालों के खिलाफ एक्शन लेने की तैयारी की है। शहर की अलग-अलग अवैध काॅलोनी में 565 प्लाॅट भूमाफिया ने बेचे है। इस तरह के 19 लोगों पर प्रशासन प्रकरण दर्ज कराने की तैयारी कर रहा है। इंदौर में 16 हेक्टेयर जमीन पर विकसित हो रही थी काॅलोनी। इससे पहले भी प्रशासन 38 लोगों के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर चुका है। शहर के मास्टर प्लान में ग्रीन बेल्ट की जगह पर अवैध काॅलोनियां काटकर प्लाॅट बेचने का काम लंबे समय से जारी है। लोग भी सस्ते प्लाॅटों के चक्कर में नोटरियों पर प्लाॅट खरीद लेेते है, लेकिन वहां नक्शे मंजूर नहीं होते और न ही मूलभूत सुविधाएं मिलती है। अफसरों ने शहर में 19 भूमाफिया को चिन्हित किया जो काॅलोनियों में प्लाॅट बेच रहे है। उनके खिलाफ अलग-अलग थानों में शिकायत होगी। इससे पहले प्रशासन अवैध काॅलोनाइजरों के खिलाफ रासुका के तहत भी एक्शन ले चुका है। पार्षद ने रुकवाया निर्माण सांईकृपा काॅलोनी में एक होस्टल का निर्माण हो रहा था। इसकी शिकायत रहवासियों ने पार्षद संगीता जोशी को की थी। रहवासियों का कहना है कि क्षेत्र मेें आवासीय प्लाॅटों पर होस्टल व होटल खोले जा रहे है। इसके बाद पार्षद ने मौके पर जाकर अवैध निर्माण रुकवाया और नगर निगम के अफसरों से कहा कि वे काॅलोनी में देखे कि कहां पर व्यावसायिक निर्माण हो रहा है। रहवासी केके झा ने बताया कि  वार्ड 36 और 37 में इस तरह के अवैध निर्माण बड़े पैमाने पर हो रहे है।  recent visitors 57