मुख्यमंत्री साय बोले – छत्तीसगढ़ स्वास्थ्य सेवा प्रदायगी में रच रहा नए प्रतिमान

एक वर्ष में सर्वाधिक स्वास्थ्य संस्थाओं को मिली राष्ट्रीय गुणवत्ता पहचान रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा स्वास्थ्य सेवा प्रदायगी के क्षेत्र में नए प्रतिमान स्थापित किए जा रहे हैं। राज्य में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के प्रति हमारी प्रतिबद्धता और सेवा भावना का परिणाम है कि राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक (NQAS) प्रमाण पत्र प्राप्त करने वाले शासकीय अस्पतालों की संख्या में ऐतिहासिक वृद्धि हुई है। मुख्यमंत्री साय ने बताया कि वर्ष 2024-25 में 427 से अधिक शासकीय स्वास्थ्य संस्थानों ने राष्ट्रीय गुणवत्ता प्रमाणन हासिल किया है, जो पूर्व वर्षों की तुलना में सबसे अधिक है। यह प्रदेश की स्वास्थ्य प्रणाली में आए अभूतपूर्व सुधार और सेवा के अंतिम छोर तक पहुँच सुनिश्चित करने का प्रमाण है। मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल तथा स्वास्थ्य विभाग की पूरी टीम को उनकी समर्पित कार्यशैली और दूरदर्शी प्रयासों के लिए बधाई दी। उन्होंने विशेष रूप से सुदूर अंचलों तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएँ पहुँचाने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। उन्होंने सुकमा जिले के घोर नक्सल प्रभावित क्षेत्र ‘चिंतागुफा’ प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र की उपलब्धि का उल्लेख करते हुए कहा कि जो क्षेत्र कभी चुनौतियों का प्रतीक रहा, आज वहाँ का स्वास्थ्य केन्द्र राष्ट्रीय स्तर पर अपनी सेवा गुणवत्ता के लिए सम्मानित हुआ है। चिंतागुफा स्वास्थ्य केंद्र को 28 नवंबर 2024 को भारत सरकार के राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन प्रमाण पत्र से सम्मानित किया गया है। स्वास्थ्य मंत्री जायसवाल ने कहा कि प्रदेश में कुल 436 शासकीय अस्पतालों एवं स्वास्थ्य केन्द्रों को गुणवत्ता प्रमाणन मिल चुका है, वहीं 644 अन्य संस्थानों का मूल्यांकन प्रक्रियाधीन है। यह दर्शाता है कि छत्तीसगढ़ सरकार स्वास्थ्य सुविधाओं को सुसंगत, भरोसेमंद और उत्कृष्ट बनाने के लिए लगातार प्रतिबद्ध है। उल्लेखनीय है कि राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक (NQAS) प्रमाणन केवल उन्हीं अस्पतालों को प्रदान किया जाता है, जो उपलब्ध सेवाओं, मरीज अधिकारों, इनपुट गुणवत्ता, क्लिनिकल सर्विसेज, इन्फेक्शन कंट्रोल और  गुणवत्ता प्रबंधन जैसे सख्त मानकों पर खरे उतरते हैं। विशेषज्ञों की टीम द्वारा गहन मूल्यांकन के बाद ही यह प्रमाणन प्रदान किया जाता है। मुख्यमंत्री साय ने विश्वास जताया कि सरकार की सतत पहल और समर्पित टीम वर्क के जरिए छत्तीसगढ़ शीघ्र ही देश के अग्रणी स्वास्थ्य सेवा प्रदायक राज्यों में शामिल होगा। recent visitors 30

KKR ने DC को 14 रन से हराया, डुप्लेसिस ने 62 रन बनाए; नरेन को तीन विकेट

नई दिल्ली  इंडियन प्रीमियर लीग 2025 (IPL 2025)के 48वें मैच में मंगलवार (29 अप्रैल) को कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) ने दिल्ली कैपिटल्स (DC) को 14 रन से हराया। कोलकाता नाइट राइडर्स ने दिल्ली के अरुण जेटली स्टेडियम में 8 साल बाद जीत दर्ज की। इससे पहले वह 2017 में जीती थी। दिल्ली ने टॉस जीतकर गेंदबाजी का फैसला किया। कोलकाता नाइट राइडर्स ने 20 ओवर में 9 विकेट पर 204 रन बनाए। दिल्ली कैपिटल्स ने 20 ओवर में 9 विकेट पर 190 रन बनाए। कोलकाता के लिए अंगकृष रघुवंशी और रिंकू सिंह ने अच्छी पारी खेली। दिल्ली के लिए मिचेल स्टार्क ने 3 विकेट लिए। दिल्ली कैपिटल्स के लिए फाफ डुप्लेसिस ने बेहतरीन अर्धशतक जड़ा। चोट के बाद अक्षर पटेल ने शानदार पारी खेली। विपराज निगम ने भी शानदार पारी खेली। कोलकाता के लिए सुनील नरेन ने 3 और वरुण चक्रवर्ती ने 2 विकेट लिए। दिल्ली कैपिटल्स 9 मैच में 12 अंक के साथ तीसरे नंबर पर है। उसे 2 मई को सनराइजर्स हैदराबाद से भिड़ना है। कोलकाता नाइट राइडर्स के 10 मैच में 9 अंक हो गए हैं। वह 7वें नंबर पर है। उसे 1 मई को मुंबई इंडियंस से भिड़ना है। लक्ष्य का पीछा करने उतरी दिल्ली की शुरुआत झटके के साथ हुई थी। अनुकूल रॉय ने पहले ही ओवर में अभिषेक पोरेल को रसेल के हाथों कैच आउट कराया। वह सिर्फ चार रन बना सके। इसके बाद तीसरे और चौथे नंबर पर आए करुण नायर 15 और केएल राहुल सात रन बना पाए। चौथे विकेट के लिए फाफ डुप्लेसिस को कप्तान अक्षर पटेल का साथ मिला। दोनों के बीच 42 गेंदों में 76 रनों की साझेदारी हुई। नरेन ने अक्षर को अपना शिकार बनाया। वह चार चौके और तीन छक्के की मदद से 43 रन बनाकर आउट हुए। वहीं, फाफ डुप्लेसिस ने 31 गेंदों में इस सत्र का अपना दूसरा पचासा पूरा किया। वह 45 गेंदों में 62 रन बनाकर पवेलियन लौटे। दिल्ली के लिए विप्रज निगम ने 38 रन बनाए। हालांकि, वह अपनी टीम को जीत नहीं दिला सके। उनके अलावा ट्रिस्टन स्टब्स ने एक रन, आशुतोष शर्मा ने सात रन और मिचेल स्टार्क खाता खोले बगैर आउट हो गए। वहीं, दुष्मंथा चमीरा और कुलदीप यादव क्रमश: दो और एक रन बनाकर नाबाद रहे। recent visitors 56

इंदौर और भोपाल के महानगर बनने का रास्ता साफ,5-5 शहरों को मिलाया जायेगा

भोपाल इंदौर और भोपाल के महानगर बनने का रास्ता साफ हो गया है। सरकार ने मप्र मेट्रोपॉलिटन प्लानिंग एंड डेवलपमेंट एक्ट 2025 का ड्राफ्ट तैयार करने की नगरीय प्रशासन एवं आवास विभाग को मंजूरी दे दी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मेट्रोपॉलिटन एरिया के गठन के प्रस्ताव पर समीक्षा बैठक हुई। नगरीय आवास एवं विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव संजय शुक्ला ने प्रेजेंटेशन में बताया कि इंदौर मेट्रोपॉलिटन एरिया के प्रथम चरण का काम पूरा हो चुका है। भोपाल मेट्रोपॉलिटन एरिया के लिए कंसल्टेंट की नियुक्ति के लिए टेंडर प्रक्रिया जारी कर दी गई है। दोनों शहरों के विकास का जिम्मा मेट्रोपॉलिटन डेवलपमेंट अथॉरिटी का होगा। पढ़िए इंदौर-भोपाल मेट्रोपॉलिटन एरिया में कौन-कौन से क्षेत्र आएंगे और इसका स्वरूप क्या होगा? 5 जिलों के 1756 गांव होंगे शामिल इंदौर मेट्रोपॉलिटन एरिया में पांच जिले इंदौर, देवास, उज्जैन, धार और शाजापुर को शामिल किया गया है। कुल क्षेत्रफल करीब 9 हजार वर्ग किमी का होगा। इस एरिया की आबादी 55 लाख के करीब होगी। इंदौर मेट्रोपॉलिटन एरिया को डेवलप करने का काम तेजी से हो रहा है। इंदौर विकास प्राधिकरण( आईडीए) को नोडल एजेंसी बनाया है। आईडीए ने डेवलपमेंट प्लान तैयार करने के लिए कंसल्टेंट की नियुक्त कर ली है। मेट्रोपॉलिटन एरिया को 4 चरणों में डेवलप किया जाना है, जिसमें इंसेप्शन, सिचुएशन एनालिसिस, रीजनल एवं इन्वेस्टमेंट प्लान और डीपीआर शामिल है। इसके पहले चरण यानी इंसेप्शन का काम पूरा हो चुका है यानी ये तय हो गया है कि मेट्रोपॉलिटन एरिया का कुल क्षेत्रफल कितना होगा? इनमें कौन-कौन से जिले शामिल होंगे, तहसील और गांवों की संख्या कितनी होगी? अब सिचुएशन एनालिसिस का ड्राफ्ट तैयार किया जाएगा यानी इसमें शामिल जिलों की अलग-अलग तहसील, निकायों का डेटा, वहां की जनसंख्या, स्थापित उद्योग, क्षेत्र की विशेषता की स्टडी होगी। इसके बाद वहां की भौगोलिक, आर्थिक, धार्मिक-सामाजिक स्थिति का आकलन होगा। कहां कौन सी इंडस्ट्री है, किस तरह की जरूरतें हैं, इसका भी खाका तैयार होगा। इसके बाद रीजनल एवं इन्वेस्टमेंट प्लान बनेगा, जिसमें ये देखा जाएगा कि मेट्रोपॉलिटन एरिया का समान रूप से विकास हो सके। इसके बाद डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट जारी की जाएगी। 7863 वर्ग किमी के एरिया में बनेगी इंदौर मेट्रोपॉलिटन सिटी सीएम डॉ. मोहन यादव की पहल पर इंदौर और भोपाल को महानगरों के रूप में विकसित किया जा रहा है। इंदौर मेट्रोपॉलिटन सिटी में इंदौर के अलावा उज्जैन, देवास और धार जिले को भी मिलाया जाएगा। मेट्रोपॉलिटन सिटी में पूरा इंदौर शामिल होगा जबकि उज्जैन, देवास और धार का कुछ हिस्सा भी इसमें जोड़ा जाएगा। इंदौर में इसके लिए कंसल्टेंट की नियुक्ति की जा चुकी है। सीएम डॉ. मोहन यादव ने भोपाल-इंदौर को मेट्रोपॉलिटन सिटी बनाने की घोषणा की और तुरंत ही इसपर अमल करने के निर्देश देकर प्लान बनवाए। इंदौर महानगर की कवायद तेजी से चल रही है। कुल 7863 वर्ग किमी का एरिया निर्धारित किया इंदौर नगर निगम के अधिकारियों के अनुसार इंदौर मेट्रोपॉलिटन सिटी के लिए प्रशासन ने योजना तैयार कर ली है। इसके लिए कुल 7863 वर्ग किमी का एरिया निर्धारित किया है। इंदौर मेट्रोपॉलिटन सिटी में 19 निकाय शामिल किए जाएंगे। अगले दो ढाई दशकों में विकास का खाका तैयार करने के लिए डेढ दर्जन से ज्यादा विभागों से रिपोर्ट तलब ​की गई है। इसी तरह भोपाल मेट्रोपॉलिटन सिटी भी विकसित की जाएगी जिसमें भोपाल के साथ ही सीहोर, रायसेन, विदिशा, राजगढ़ जिलों के हिस्सों को मिलाया जाएगा। भोपाल मेट्रोपॉलिटन के लिए प्रारंभिक योजना में भोपाल की 59 ग्राम पंचायतें और रायसेन जिले के मंडीदीप की 9 ग्राम पंचायतें शामिल की गई थीं। अब इनमें कई नए एरिया जुड़ेंगे। खाका फाइनल होने के बाद भोपाल मेट्रोपॉलिटन अथॉरिटी बनाई जाएगी। केंद्र सरकार व राज्य सरकार के बीच एमओयू होगा। अवंतिका मेट्रोपॉलिटन रीजन नाम संभावित समीक्षा बैठक में इस बात पर भी विचार किया गया कि दोनों महानगरों का नाम क्या होगा? इंदौर मेट्रोपॉलिटन एरिया के लिए तीन नामों का विकल्प रखा गया है।     इंदौर-उज्जैन महानगरीय क्षेत्र     मालवा महानगरीय क्षेत्र     अवंतिका महानगरीय क्षेत्र सूत्र बताते हैं कि बैठक में तीसरे विकल्प यानी अवंतिका महानगरीय क्षेत्र पर सैद्धांतिक सहमति बनी है। हालांकि, अंतिम फैसला मेट्रोपॉलिटन एक्ट बनने के बाद लिया जाएगा। इंदौर में तेजी से काम की वजह इंदौर मेट्रोपॉलिटन के तेजी से हो रहे काम की वजह है सिंहस्थ 2028। दरअसल, इंदौर का जो एरिया तय हुआ है उसमें दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर (DMIC) को जोड़ा गया है। सरकार की कोशिश है कि इससे उद्योगों और व्यापार को नई गति मिले। इससे देवास, पीथमपुर, उज्जैन और बदनावर जैसे क्षेत्रों में औद्योगिक निवेश को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही इंदौर, देवास और अन्य शहरों को मजबूत सड़क, रेल और हवाई मार्गों से जोड़ा जाएगा, जिससे सिंहस्थ में आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर कनेक्टिविटी मिल सके।   भोपाल के लिए जून में कंसल्टेंट की नियुक्ति भोपाल मेट्रोपॉलिटन एरिया में भोपाल- सीहोर- रायसेन-विदिशा और राजगढ़ जिले के ब्यावरा को शामिल किया गया है। भोपाल विकास प्राधिकरण को मेट्रोपॉलिटन रीजन डेवलप करने के लिए नोडल एजेंसी बनाया गया है। हालांकि अभी तय नहीं है कि इन जिलों का कितना क्षेत्रफल भोपाल मेट्रोपॉलिटन एरिया में शामिल होगा। साल 2022 में शिवराज सरकार ने भोपाल में मेट्रो रेल प्रोजेक्ट को मंडीदीप तक विस्तार करने के लिए मेट्रोपॉलिटन एरिया के प्रस्ताव को कैबिनेट में मंजूरी दी थी। उस वक्त भोपाल मेट्रोपॉलिटन का प्रांरभिक एरिया डिफाइन किया था, जिसमें भोपाल की 59 ग्राम पंचायतें और मंडीदीप निवेश क्षेत्र (रायसेन) की 9 ग्राम पंचायतें शामिल की गई थी। समीक्षा बैठक में बताया गया कि कंसल्टेंट की नियुक्ति के लिए टेंडर जारी किया गया है, जो जून में ओपन होगा। भोजपाल महानगरीय क्षेत्र हो सकता है नाम इंदौर की तरह भोपाल मेट्रोपॉलिटन एरिया के लिए भी तीन नाम सुझाए गए हैं…     भोपाल महानगरीय क्षेत्र     मध्य प्रदेश राज्य राजधानी क्षेत्र     भोजपाल महानगरीय क्षेत्र recent visitors 32

MP में कर्मचारियों का बढ़ाकर 55 % हुआ, अगली सैलरी बढ़कर कितनी आएगी, जाने संभावित सैलरी क्या होगी

भोपाल  मध्य प्रदेश सरकार ने रविवार को कर्मचारियों का डीए 50 प्रतिशत से बढ़ाकर 55 प्रतिशत कर दिया है. इस भारी बढ़त के साथ सरकारी कर्मचारियों में खुशी की लहर है. वहीं अब कर्मचारी ये गणित जानने में लगे हुए हैं कि उनकी अगली सैलरी बढ़कर कितनी आएगी? इस आर्टिकल में जानें डीए 55 प्रतिशत होने के बाद आपकी संभावित सैलरी क्या हो सकती है? पहले जानें क्या होता है DA? नई सैलरी का गणित जानने से पहले बता दें कि DA को अंग्रेजी में डियरनेस अलाउंस कहते हैं. इसका मतलब होता है महंगाई भत्ता. सरकारी कर्मचारियों की सैलरी में महंगाई भत्ता एक जीवनयापन भत्ता है, जो महंगाई को देखते हुए दिया जाता है. महंगाई भत्ता महंगाई के असर को कम करने कि लिए दिया जाता है. डीए यानी महंगाई भत्ता कर्मचारी के मूल वेतन से कैल्क्युलेट किया जाता है. DA के बाद वेतन कैसे कैल्क्युलेट किया जाता है? उदाहरण के तौर पर किसी कर्मचारी की बेसिक सैलरी अगर 15 हजार रु है, और डीए 50 प्रतिशत है तो उसका डीए 15000 का 50 प्रतिशत यानी 7500 रु होगा. वहीं कर्मचारी का सकल वेतन या ग्रॉस सैलरी 15000+7500 = 22,500 रु होगी. हालांकि, ग्रॉस सैलरी में डीए के अलावा कई अन्य तरह के भत्ते भी जोड़े जाते हैं. ये भत्ते व्यक्ति के ग्रेड पे और अन्य फैक्टर्स को देखते हुए दिए जाते हैं. इसमें HRA यानी हाउस रेंट अलाउंस, ट्रेवल अलाउंस समेत कई तरह के भत्ते जोड़े जाते हैं, जिससे आखिर में ग्रॉस सैलरी कैल्क्युलेट की जाती है. इसके बाद पीएफ व अन्य टैक्स काटने के बाद नेट सैलरी बनती है, जो कर्मचारी के खाते में क्रेडिट होती है. 55 प्रतिशत DA बढ़ने के बाद कितनी होगी नई सैलरी? मान लीजिए कि आपका मूल वेतन 25,000 रु है. वहीं, अबतक 50 प्रतिशत के हिसाब से 12,500 रु महंगाई भत्ता दिया जा रहा था. ऐसे में जनवरी 2025 के बाद 5 प्रतिशत डीए बढ़ने से कुल डीए 25,000 रु का 55 प्रतिशत यानी 13,750 रु होगा. यानी हर महीने 1250 रु की बढ़ोत्तरी. एरियर में एकसाथ ये राशि मिलने से कर्मचारियों को काफी राहत मिलेगी. हालांकि, जुलाई 2024 से दिसंबर 2024 तक 3 प्रतिशत के हिसाब से डीए जोड़ा जाएगा. वहीं जनवरी 2025 के बाद 2 प्रतिशत के हिसाब से. डीए बढ़ने के बाद कर्मचारियों की सैलरी में बढ़त ग्रेड पे के हिसाब से भी होगी. यानी जितनी ज्यादा बेसिक सैलरी होगी डीए और वेतन उतना बढ़ेगा. 5 किश्तों में सरकार देगी डीए की राशि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कर्मचारियों का महंगाई भत्ता बढ़ाने की घोषणा करते हुए कहा है कि सभी शासकीय कर्मचारियों को 1 जुलाई 2024 से 3% और 1 जनवरी 2025 से 2% महंगाई भत्ता दिया जाएगा. ऐसे में कर्मचारियों की सैलरी में महंगाई भत्ता जिस तारीख से लागू होगा उसे पांच समान किश्तों में दिया जाएगा. कर्मचारियों को कब मिलेगी बढ़ी हुई सैलरी? मुख्यमंत्री डॉ यादव ने कहा, '' प्रदेश के सभी कर्मचारियों को केंद्र के समान ही 55% महंगाई भत्ता दिया जाएगा. महंगाई भत्ते में वृद्धि के फल स्वरुप एरियर राशि का भुगतान पांच समान किस्तों में जून 2025 से अक्टूबर 2025 तक दिया जाएगा.'' recent visitors 39

ATM से पैसे निकालने वालों को बड़ा झटका! HDFC, PNB और IndusInd Bank ने जारी किए नए चार्ज

नई दिल्ली अगर आपकी एटीएम से बार-बार पैसे निकालने की आदत है तो इसे तुरंत बदल दें। अगर ऐसा नहीं करते हैं तो एक मई से आपको बड़ा नुकसान होने लगेगा। दरअसल, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने एटीएम से पैसे निकालने के नियमों में कुछ बदलाव किए हैं। ये नए नियम पूरे देश में 1 मई 2025 से लागू होंगे। रिजर्व बैंक का कहना है कि इन बदलावों का मकसद एटीएम इस्तेमाल करने पर लगने वाले चार्ज को लेकर पारदर्शिता लाना है। इससे बैंकों को भी एटीएम नेटवर्क चलाने में आसानी होगी। दरअसल, हर बैंक अपने हर ग्राहक को एटीएम से पैसे निकालने की एक लिमिट तक फ्री सुविधा देता है। इसमें अपने बैंक के एटीएम और दूसरे बैंकों के एटीएम दोनों शामिल हैं। फ्री लिमिट के बाद बैंक चार्ज लेना शुरू करता है। एक मई से इस चार्ज में बढ़ोतरी हो रही है। फ्री लिमिट के बाद एटीएम ट्रांजैक्शन पर हर बार 1 मई के बाद प्रति ट्रांजैक्शन अधिकतम 23 रुपये का शुल्क देना होगा। इस पर टैक्स अलग से लगेगा। अभी तक यह शुल्क 21 रुपये तक था। फ्री ट्रांजेक्शन लिमिट क्या होगी? आरबीआई ने साफ कर दिया है कि अब भी मेट्रो शहरों में हर महीने 3 फ्री ट्रांजेक्शन मिलेंगे और नॉन-मेट्रो शहरों में 5 फ्री ट्रांजेक्शन की सुविधा रहेगी। यह लिमिट फाइनेंशियल जैसे कैश निकालने और नॉन-फाइनेंशियल जैसे बैलेंस चेक, मिनी स्टेटमेंट, पिन चेंज आदि दोनों ट्रांजेक्शन पर लागू होगी। फ्री लिमिट के बाद कितना चार्ज लगेगा? अगर आप फ्री लिमिट से ज्यादा ट्रांजेक्शन करते हैं तो अब हर अतिरिक्त ट्रांजेक्शन पर 23 रुपये (प्लस टैक्स) देने होंगे। ये नियम सभी एटीएम पर लागू होगा। बैंक क्या कह रहे हैं? HDFC Bank ने बताया है कि 1 मई से अपने एटीएम से कैश निकालने पर फ्री लिमिट से ज्यादा ट्रांजेक्शन पर 23 रुपये + टैक्स लगेगा। वहीं बैलेंस चेक, मिनी स्टेटमेंट और पिन चेंज जैसे नॉन-फाइनेंशियल ट्रांजेक्शन फ्री रहेंगे। PNB ने कहा है कि अन्य बैंकों के एटीएम पर फ्री लिमिट के बाद फाइनेंशियल ट्रांजेक्शन पर 23 रुपये और नॉन-फाइनेंशियल ट्रांजेक्शन पर 11 रुपये (जीएसटी अलग) का चार्ज लगेगा। ये बदलाव 9 मई 2025 से लागू होगा। IndusInd Bank ने भी जानकारी दी है कि उनके सेविंग्स, सैलरी, एनआर और करंट अकाउंट होल्डर्स को 1 मई 2025 से फ्री लिमिट के बाद गैर-IndusInd एटीएम से निकासी पर 23 रुपये प्रति ट्रांजेक्शन देना होगा। ग्राहकों के लिए सलाह ग्राहकों को सलाह दी गई है कि वे अपने एटीएम ट्रांजेक्शन पर नजर रखें, खासकर जब दूसरे बैंक के एटीएम का इस्तेमाल कर रहे हों। ज्यादा शुल्क से बचने के लिए कोशिश करें कि ज्यादा से ज्यादा अपने बैंक के एटीएम का ही इस्तेमाल करें या डिजिटल पेमेंट का सहारा लें। कितनी बार है फ्री सुविधा     मेट्रो शहरों जैसे दिल्ली, मुंबई आदि में ग्राहक महीने में तीन बार मुफ्त में एटीएम इस्तेमाल कर सकते हैं।     नॉन-मेट्रो शहरों में यह लिमिट पांच बार है। गैर-मेट्रो शहर वे होते हैं जो मेट्रो शहरों जितने बड़े नहीं होते।     यह लिमिट पैसे निकालने और दूसरी तरह के ट्रांजैक्शन, दोनों के लिए है। इसका मतलब है कि आप महीने में तीन या पांच बार ही मुफ्त में पैसे निकाल सकते हैं या बैलेंस चेक कर सकते हैं। कुछ बैंक के अलग हैं नियम कुछ बैंकों ने अधिकतम ट्रांजैक्शन में छूट दी है। इसमें एचडीएफसी बैंक भी शामिल है। एचडीएफसी बैंक के ग्राहकों पर एचडीएफसी के एटीएम से पैसे निकालने पर ही चार्ज लगेगा। बैलेंस चेक करना, मिनी स्टेटमेंट निकालना और पिन बदलना मुफ्त होगा। अगर आप किसी दूसरे बैंक के एटीएम से पैसे निकालते हैं तो पैसे निकालने के साथ-साथ बैलेंस चेक करने, मिनी स्टेटमेंट निकालने और पिन बदलने पर भी चार्ज लगेगा। होम नेटवर्क के बाहर का ATM पड़ेगा महंगा हर महीने की पहली तारीख को देश में कई नियमों में बदलाव होता है और अगले महीने की पहली तारीख यानी 1 मई से भी कई बदलाव (Rule Change From 1st May) लागू होने जा रहे हैं. इसमें एटीएम से पैसे निकालने पर लगे वाले चार्ज से जुड़ा नियम भी शामिल हैं. जी हां, होम बैंक नेटवर्क के बाहर अगर किसी एटीएम मशीन से कोई भी ट्रांजैक्शन किया जाता है, या फिर बैलेंस चेक किया जाता है, तो यूजर को अब पहले से ज्यादा चार्ज देना पड़ेगा. अभी भी ऐसे एटीएम का उपयोग करने वाले चार्ज अप्लाई है और 1 मई से ये और भी बढ़ने वाला है. अब इतना बढ़ने वाला है खर्च केंद्रीय बैंक (RBI) ने बीते दिनों भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) के प्रस्ताव के आधार पर फीस बढ़ाने की अनुमति दी थी. रिपोर्ट की मानें तो अब तक अगर ग्राहक अपने होम बैंक के ATM के बजाय किसी दूसरे नेटवर्क के बैंक एटीएम से पैसे निकालते थे, तो उन्हें हर ट्रांजैक्शन पर 17 रुपये चार्ज देना होता था, जो 1 मई से बढ़कर 19 रुपये हो जाएगा. इसके अलावा अगर किसी दूसरे बैंक के ATM से बैलेंस चेक करते थे, तो इस पर 6 रुपये का शुल्क लगता था, जिसे अब बढ़ाकर 7 रुपये कर दिया जाएगा. व्हाइट लेवल ATM ऑपरेटर्स की थी मांग ATM Transaction Fee Hike की मांग लगातार व्हाइट-लेबल एटीएम ऑपरेटर्स के द्वारा की जा रही थी. उनका तर्क था कि बढ़ती परिचालन लागतों को देखते हुए पुरानी फीस कम है. NPCI के प्रस्ताव को आरबीआी की मंजूरी के बाद अब छोटे बैंकों पर दबाव ज्यादा बढ़ने की आशंका है. दरअसल, वे अपने सीमित इंफ्रास्ट्रक्चर के कारण दूसरे बैंकों के एटीएम नेटवर्क पर बहुत ज्यादा निर्भर हैं. ये जान लेना जरूरी है कि बढ़ी हुई इंटरचेंज फीस, वह राशि होती है जो एक बैंक दूसरे बैंक को तब देता है, जब उसका कोई ग्राहक दूसरे बैंक के एटीएम का इस्तेमाल पैसों की निकासी के लिए करता है. गौरतलब है कि 'व्हाइट लेबल एटीएम' सरकारी और प्राइवेट बैंकों के एटीएम की तरह काम करते हैं. इसे बैंक की बजाय निजी या गैर- बैंकिंग वित्तीय कंपनियां (NBFC) लगाती हैं. इनसे आप डेबिट (Debit Card) और क्रेडिट कार्ट (Credit Card) के जरिए कैश विद्ड्ऱॉल, बैलेंस चेक या उन सभी सुविधाओं का उपयोग कर सकते हैं, जो अन्य एटीएम में मिलती हैं. क्या है बैंकों की … Read more

चेन्नई के कई इलाको में महिलाओं की सुरक्षा में तैनात होंगे ‘रेड बटन रोबोटिक सीओपी’, 200 जगहों पर लगाने की व्यवस्था

चेन्नई  महिलाओं और आम लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए चेन्नई पुलिस कई नई पहल कर रही है. इसी सिलसिले में अब शहर के विभिन्न इलाकों में 'रेड बटन रोबोटिक सीओपी' नामक रोबोटिक पुलिस मशीनें लगाई जा रही है. पुलिस ने कहा है कि इससे महिलाएं किसी भी समय हिम्मत के साथ बाहर निकल सकती हैं. महिलाओं और लड़कियों के खिलाफ हिंसा और यौन अपराध की घटनाएं आज के समय में आम बात हो गई है. सिर्फ यौन उत्पीड़न और बलात्कार ही नहीं, बल्कि प्यार से इनकार करने पर हत्या, तेजाब फेंकने जैसे अपराध भी हो रहे हैं. इस वजह से ज्यादातर लड़कियां और उनके माता-पिता डर के साये में रहते हैं. पुलिस अधिकारियों ने बताया कि ऐसी स्थिति में चेन्नई पुलिस ने आपातकालीन पुलिस सहायता के लिए 'रेड बटन रोबोटिक कॉप' नामक सुरक्षा रोबोटिक मशीनें लगाने की कवायद शुरू की है. ये उन जगहों पर काम आएंगी जहां महिलाएं और बच्चे बड़ी संख्या में इकट्ठा होते हैं. उन इलाकों में जहां अपराध की घटनाएं होती हैं. पहले चरण में चेन्नई में 200 जगहों पर इन्हें लगाने की व्यवस्था की गई है. रेड बटन – रोबोटिक कॉप नामक यह पुलिस मशीन कई मीटर की दूरी से 360 डिग्री पर 24 घंटे स्थिति की निगरानी और नियंत्रण कर सकती है. यह न केवल होने वाली घटनाओं का वीडियो रिकॉर्ड करता है, बल्कि आवाजें भी रिकॉर्ड करता है. इसी तरह अगर कोई भी व्यक्ति, चाहे वह महिला ही क्यों न हो, खतरे में है तो उसे बस इस मशीन पर बटन दबाना होगा. इससे इमरजेंसी कॉल अलार्म बजेगा. इससे आस-पास की पुलिस तुरंत इलाके में आ जाएगी. इसके अलावा इस मशीन में खतरे में फंसे लोगों और पुलिस के साथ संवाद करने की सुविधा भी है. इसमें माइक्रोफोन सुविधा और जीपीएस सुविधा सहित अत्याधुनिक सुविधाएं भी हैं. इस मशीन पर लाल बटन दबाने से खतरे में पड़े व्यक्ति या उसकी ओर से कोई दूसरा व्यक्ति तुरंत पुलिस को सूचना भेज देगा. खास बात यह है कि यह तेज आवाज करके अलार्म बजाएगा. इससे आस-पास के लोग भी मदद के लिए आ सकते हैं. इस डिवाइस में ऐसी सुविधाएं हैं जिससे खतरे में फंसे लोग सीधे वीडियो कॉल के जरिए पुलिस कंट्रोल रूम से संपर्क कर सकते हैं. गश्त कर रही पुलिस घटनास्थल पर क्या हो रहा है इस पर नजर रख सकती है. तुरंत जाकर कार्रवाई कर सकती है और कैमरे में रिकॉर्ड की गई फुटेज के आधार पर जांच शुरू कर सकती है. रेड बटन-रोबोटी कॉप डिवाइस में 24 घंटे इंटरनेट की सुविधा होगी. चेन्नई पुलिस आयुक्त के आदेश पर 12 पुलिस जिलों के 4 पुलिस जोन में 50-50 स्थानों पर पुलिस रेड बटन-रोबोटी पुलिस डिवाइस लगाने के लिए उपयुक्त स्थानों की पहचान करने के लिए फील्ड सर्वे किया गया है. इसके अनुसार जून से चेन्नई में रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, शॉपिंग मॉल, पूजा स्थल, शैक्षणिक संस्थान, कारखाने, आईटी कंपनियां, पार्क, अस्पताल आदि सहित आम लोगों के आने-जाने वाले क्षेत्रों में इन आयरन पुलिसकर्मियों को बड़ी संख्या में तैनात किया जाएगा.   recent visitors 43

MP पुलिस में भर्ती के रूल बदलेंगे, आरक्षक और उपनिरीक्षक के पदों पर भर्ती के लिए अलग बोर्ड

 भोपाल मध्य प्रदेश पुलिस में आरक्षक, उपनिरीक्षक सहित तृतीय श्रेणी के अन्य पदों पर भर्ती के लिए अलग से भर्ती बोर्ड बनेगा। इसका लाभ यह होगा कि भर्ती प्रक्रिया जल्दी पूरी हो सकेगी। अभी कर्मचारी चयन मंडल से भर्ती की जा रही, जिसमें पूरी प्रक्रिया में लगभग दो वर्ष लग रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शनिवार को पुलिस मुख्यालय में बैठक के दौरान डीजीपी कैलाश मकवाणा को इसके लिए प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजने के लिए कहा है। कैबिनेट से स्वीकृति के बाद बोर्ड बनाया जाएगा। बैठक में मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि पिछड़ी जनजाति बैगा, सहरिया आदि के युवाओं को पुलिस में भर्ती की विशेष योजना बनाएं। पुलिस बल की कमी दूर करने के लिए बोर्ड बनाने की बात बता दें कि पुलिस मुख्यालय की चयन शाखा के अधिकारी लंबे समय से भर्ती बोर्ड बनाने का सुझाव सरकार को दे रहे थे, पर गृह विभाग ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। शनिवार को बैठक में कानून-व्यवस्था की समीक्षा के दौरान पुलिस बल की कमी दूर करने के लिए मुख्यमंत्री ने बोर्ड बनाने की बात कही। दरअसल, कर्मचारी चयन मंडल के पास कई परीक्षाओं का दबाव होने के कारण पहले तो लगभग छह माह भर्ती प्रक्रिया में ही देरी हो जाती है। इसके बाद भर्ती प्रारंभ होने पर परीक्षा आयोजित करने में लगभग एक वर्ष लग रहे हैं। कारण, एक बार में पुलिस आरक्षकों के छह हजार या इससे अधिक पदों पर भर्ती हो रही है। पुलिस मुख्यालय ने प्रतिवर्ष भर्ती का निर्णय लिया है, क्योंकि अभी लगभग 20 हजार पद रिक्त हैं। 500 एसआई और 7,500 पुलिस आरक्षकों के पदों पर होनी है भर्ती राज्य शासन ने पुलिस मुख्यालय को पुलिस आरक्षकों के 7,500 और उप निरीक्षकों के 500 पदों पर भर्ती की स्वीकृति दी है। इन पदों को भरने के लिए कर्मचारी चयन मंडल को प्रस्ताव भी पुलिस मुख्यालय भेज चुका है। मंडल ने इस वर्ष के अंत तक इन पदों के लिए परिणाम जारी करने का लक्ष्य रखा है, लेकिन अभ्यर्थियों की संख्या एक लाख से अधिक रहती है, जिससे इस वर्ष चयन हो पाना मुश्किल है। ऐसे में अगर भर्ती प्रक्रिया प्रारंभ होने के पहले बोर्ड का गठन हो जाता है तो इन पदों को भी इसके माध्यम से भरना आसान हो जाएगा। इसके अतिरिक्त सरकार सिंहस्थ को देखते हुए प्रति वर्ष आरक्षकों की भर्ती करने की तैयारी में है। बोर्ड बनने से भर्ती जल्दी हो सकेगी। एमपी पुलिस में निकलेगी कांस्टेबल के 7000 और SI के 500 पदों पर भर्ती एमपी पुलिस में कांस्टेबल के 7000 और सब इंस्पेक्टर के 500 पदों पर भर्ती प्रक्रिया जल्द ही शुरू होगी। मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल करीब साढ़े 7 हजार पदों पर ऑनलाइन आवेदन लेगा। प्रदेश के लाखों युवाओं को इस भर्ती का लंबे समय से इंतजार है। अंतिम बार 2017 में सब इंस्पेक्टर के पदों पर भर्ती निकाली गई थी। कांस्टेबल और एसआई भर्ती की रूल बुक तैयारी होने के बाद विज्ञप्तियां esb.mp.gov.in पर जारी होंगी और यहीं से अभ्यर्थी ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। एमपी पुलिस एसआई भर्ती लंबे समय से न निकलने के चलते लाखों अभ्यर्थी ओवरएज हो गए हैं। ऐसे में अधिकतम आयु सीमा में छूट देने की मांग भी की जा रही है। समाचार पत्र दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक पुलिस मुख्यालय ने एमपी ईएसबी को भर्ती को लेकर अधियाचना भेज दी है। कर्मचारी चयन मंडल के डायरेक्टर साकेत मालवीय ने बताया कि ईएसबी और पुलिस मुख्यालय मिलकर इसके लिए रूल बुक तैयार कर रहे हैं। 10 दिन में रूल बुक बनकर तैयार होने की संभावना है। सब इंस्पेक्टर भर्ती के नियम बदले गृह विभाग ने इस बार सब इंस्पेक्टर पदों के भर्ती नियमों में भी बदलाव किया है जिसमें एसआई रेडियो, आयुध व फोटो /फिंगर प्रिंट भी शामिल हैं। इन पदों के लिए 36 की बजाय 38 साल की उम्र तक परीक्षा दे पाएंगे। प्रीलिम्स परीक्षा दो घंटे की होगी जिसमें कुल 100 अंक के मल्टीपल चॉइस सवाल आएंगे। नेगेटिव मार्किंग नहीं होगी। मेन्स एग्जाम में दो प्रश्न पत्र होंगे। प्रत्येक प्रश्न पत्र में दो सेक्शन होंगे। हर सेक्शन 150 अंकों का होगा। इस तरह कुल 600 अंक होंगे। सभी प्रश्न मल्टीपल चॉइस वाले होंगे। शारीरिक दक्षता परीक्षा 100 अंकों की होगी जिसमें दौड़, कूद और गोला फेंक होंगे। 800 मीटर की दौड़ के 40 अंक, लंबी कूद के लिए 30 अंक और गोला फेंक के लिए 30 अंक रहेंगे। इंटरव्यू 50 अंको का होगा। recent visitors 44