भारत की जल Strike से Pakistan की हुई हालत पतली, बाढ़ या सूखा… दोनों से पाकिस्तान में हाहाकार मचना फाइनल

नई दिल्ली पहलगाम हमले के बाद भारत-पाकिस्तान के रिश्तों में तनाव गहरा गया है. भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ बड़ा कूटनीतिक कदम उठाया है और 1960 की ऐतिहासिक सिंधु जल संधि को सस्पेंड कर दिया है. भारत की मार से पाकिस्तान अंदर तक हिल गया है और नेता गीदड़भभकी देने लगे हैं. सिंधु जल संधि सस्पेंड होने के बाद पाकिस्तान पर संकट के बादल हैं. बाढ़ या सूखा… दोनों से पाकिस्तान में हाहाकार मचना तय है. हालात कुछ ऐसे हैं कि PAK को खुद पता नहीं है कि आगे क्या होने वाला है? दरअसल, जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले में 26 लोगों की जान चली गई है. हमले की जिम्मेदारी आतंकी संगठन द रेसिस्टेंस फ्रंट (टीआरएफ) ने ली है, जिसे पाकिस्तान स्थित प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा का सहयोगी माना जाता है. भारत भी साफ कर चुका है कि 'सीमा पार आतंकवाद' की जड़ें मिट्टी में मिला दी जाएंगी. भारत ने पाकिस्तान को सबक सिखाने के लिए बड़े फैसले लिए हैं. भारत ने पाकिस्तान को कर दिया सूचित भारत ने पाकिस्तान को एक आधिकारिक पत्र के जरिए सूचित किया है कि सिंधु जल संधि को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जा रहा है. पत्र में भारत ने यह स्पष्ट किया कि पाकिस्तान द्वारा निरंतर हो रहे सीमा-पार आतंकवाद के चलते यह निर्णय लिया गया है. क्या है सिंधु जल संधि? साल 1960 में भारत और पाकिस्तान के बीच वर्ल्ड बैंक की मध्यस्थता में जल बंटवारा हुआ था. संधि के तहत भारत को रावी, ब्यास और सतलुज नदियों पर पूर्ण नियंत्रण दिया गया था. जबकि पाकिस्तान को सिंधु, झेलम और चेनाब नदी पर अधिकार दिया गया था, जो जम्मू-कश्मीर से होकर बहती हैं. सवाल उठ रहा है कि जल-बंटवारे के समझौते के निलंबन से पाकिस्तान पर क्या असर पड़ेगा? अब क्या बदलेगा? 1. इंडस जल आयुक्तों की बैठकें बंद अब दोनों देशों के जल आयुक्तों की सालाना बैठकें नहीं होंगी, जिससे संवाद और विवाद निपटाने के रास्ते बंद हो जाएंगे. दरअसल, संधि के तहत दोनों देशों के दो आयुक्तों को साल में एक बार बारी-बारी से मिलने की व्यवस्था दी गई थी. भारत द्वारा संधि को निलंबित करने के बाद अब ऐसी कोई बैठक नहीं होगी. 2. जल संबंधी आंकड़े नहीं मिलेंगे भारत अब पाकिस्तान को नदियों का प्रवाह, बाढ़ की चेतावनी और ग्लेशियर पिघलने की जानकारी नहीं देगा. इससे पाकिस्तान में बाढ़ या सूखे की संभावना बढ़ सकती है. संधि के तहत भारत, पाकिस्तान को समय पर हाइड्रोलॉजिकल डेटा सर्कुलेट करता आ रहा था. इसमें बाढ़ की चेतावनी जारी की जाती थी. नदी के प्रवाह को साझा करना और ग्लेशियर पिघलने के पैटर्न पर अलर्ट दिया जाता था. अब पाकिस्तान को सिंधु नदी और उसकी सहायक नदियों के जल स्तर के बारे में जानकारी की कमी के कारण संभावित सूखे या बाढ़ का खतरा है. 3. परियोजनाओं के बारे में नहीं मिलेगी जानकारी भारत अब पश्चिमी नदियों पर अपने जलविद्युत परियोजनाओं को बिना पाकिस्तान से सलाह-मशविरा किए आगे बढ़ा सकेगा. यानी दोनों देशों के बीच सूचना का प्रवाह रुक जाएगा. इस संधि ने पाकिस्तान को पश्चिमी नदियों पर भारतीय जलविद्युत परियोजनाओं के डिजाइन को चिह्नित करने का अधिकार दिया था. 4. पाकिस्तानी आयुक्त को जम्मू-कश्मीर में प्रवेश नहीं पाकिस्तान के सिंधु जल आयुक्त अब भारतीय क्षेत्रों का निरीक्षण नहीं कर सकेंगे, जिससे उन्हें भारतीय परियोजनाओं की जानकारी नहीं मिलेगी. इससे पहले पाकिस्तान के आयुक्त पश्चिमी नदियों और भारतीय जलविद्युत परियोजनाओं की स्थिति या रिपोर्ट लेने के लिए जम्मू-कश्मीर का दौरा करते आ रहे थे. 5. वार्षिक रिपोर्ट का प्रकाशन नहीं अब स्थायी सिंधु आयोग (Permanent Indus Commission) कोई रिपोर्ट प्रकाशित नहीं करेगा, जिससे पाकिस्तान की सिंचाई और कृषि योजनाएं प्रभावित होंगी. सिंधु जल संधि के अनुसार, स्थायी सिंधु आयोग (PIC), सिंधु प्रणाली के बंटवारे का प्रबंधन करने के लिए द्विपक्षीय निकाय है. इसे नदियों के साझा उपयोग पर वार्षिक रिपोर्ट प्रकाशित करनी होती है. लेकिन भारत द्वारा समझौते को सस्पेंड किए जाने के कारण वार्षिक रिपोर्ट प्रकाशित नहीं की जाएगी, जिससे पाकिस्तान की सिंचाई और कृषि प्रणालियों के लिए जोखिम पैदा होगा. पाकिस्तान पर क्या असर पड़ेगा? पाकिस्तान पहले से ही वित्तीय और राजनीतिक उथल-पुथल से जूझ रहा है. इस फैसले से उस पर दूरगामी असर पड़ने वाला है. पाकिस्तान कृषि के लिए सिंधु नदी पर बहुत ज्यादा निर्भर है, जो इसकी अर्थव्यवस्था की रीढ़ है. पाकिस्तान की 90% सिंचाई प्रणाली सिंधु नदी पर आधारित है. जल आपूर्ति में किसी भी प्रकार का व्यवधान उसके कृषि उत्पादन और खाद्य सुरक्षा को खतरे में डाल सकता है. पश्चिमी नदियों से पानी की आपूर्ति में कोई भी व्यवधान या भविष्य में व्यवधान पाकिस्तान में पानी की कमी को बढ़ा सकती है. फसल की पैदावार को कम कर सकती हैं और घरेलू अशांति को बढ़ावा दे सकती हैं. खासकर पहले से ही पानी की कमी से जूझ रहे पंजाब और सिंध जैसे प्रांतों में हालात बदतर हो सकते हैं. कृषि उत्पादन के अलावा बिजली आपूर्ति पर भी भारी असर पड़ेगा. पहले से ही पानी की कमी के कारण पाकिस्तान सालाना लगभग 19 मिलियन टन कोयला आयात करता है, लेकिन आगे कोयला आयात का वित्तीय बोझ और बढ़ सकता है. आज पाकिस्तान की जीडीपी का 60 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा कर्ज में डूबा हुआ है. पाकिस्‍तान के बिलबिलाने की वजह समझ‍िए जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत सरकार ने सिंधु जल संधि (IWT) को निलंबित करने का फैसला किया है। इस फैसले से पाकिस्तान की कृषि अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ सकता है। यही कारण है क‍ि वह ब‍िलब‍िला गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे जल डेटा साझाकरण में रुकावट, फसल के मौसम में पानी की कमी और कृषि क्षेत्र को भारी नुकसान हो सकता है। हालांकि, इसका दीर्घकालिक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि भारत पश्चिमी नदियों के पानी का पूरा इस्‍तेमाल करने के लिए कितने समय में बुनियादी ढांचा विकसित कर पाता है। इसमें एक दशक या उससे अधिक समय लग सकता है। सिंधु जल संधि 1960 में हुई थी। भारत और पाकिस्तान के बीच पानी के बंटवारे को लेकर यह एक महत्वपूर्ण समझौता है। इस संधि के अनुसार, पूर्वी नदियां – सतलज, ब्यास और रावी – भारत को दी गईं। वहीं, पश्चिमी … Read more

मुख्यमंत्री यादव की स्वीकृति मिलते ही वित्त विभाग ने कर्मचारियों के महंगाई भत्ते बढ़ाने की प्रक्रिया की शुरू

भोपाल राज्य कर्मचारियों को जल्द ही सरकार की ओर से तोहफा मिलने वाला है। इन कर्मचारियों का 5 प्रतिशत महंगाई भत्ता ( Dearness Allowance ) बढ़ाने की कवायद चल रही है। आपको बता दें कि, इसका लाभ प्रदेश के 7 लाख अधिकारी और कर्मचारियों को मिलेगा।  आपको बता दें कि, मध्य प्रदेश वित्त विभाग की ओर से महंगाई भत्ता बढ़ाने की प्रक्रिया को शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से इसपर स्वीकृति मिलते ही इस एकमुश्त बढ़ोतरी को लागू कर दिया जाएगा। मौजूदा समय में राज्य के कर्मचारियों को 50 फीसदी महंगाई भत्ता मिल रहा है और ये नई बढ़ोतरी उनके आर्थिक स्थिति में सुधार लाने में मददगार साबित होगी।  कर्मचारियों का कहना है कि प्रदेश कार्यरत प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों का महंगाई भत्ता 55 प्रतिशत प्रदान करने के आदेश जारी हो गए है। मगर प्रदेश में ही कार्यरत कर्मचारी 50 फीसदी महंगाई भत्ता एवं राहत प्राप्त कर रहे हैं। जबकि महंगाई सबके लिए बराबर है। तृतीय कर्मचारी संघ के महामंत्री उमाशंकर तिवारी ने कहा कि केंद्र सरकार के द्वारा कर्मचारियों को 55 प्रतिशत महंगाई भत्ता और महंगाई राहत प्रदान की जा रही है। प्रदेश में कार्यरत भारतीय प्रशासनिक सेवा वन सेवा पुलिस सेवा के अधिकारियों को भी 55 प्रतिशत डीए और डीआर दी गई है, लेकिन प्रदेश के कर्मचारियों को महंगाई भत्ता और महंगाई रात से वंचित रखा गया है। सरकार ने बचा लिए 900 करोड़ रुपए आगे तिवारी ने बताया कि प्रदेश सरकार के द्वारा कई बार घोषणा की गई है कि केंद्र दर और तिथि से ही महंगाई भत्ता प्रदेश के कर्मचारियों प्रदान किया जाएगा, लेकिन जब ज्यादा समय जाता है तो सरकार पिछला बकाया नहीं दे पाती है। सरकार ने महंगाी भत्ता न देकर लगभग 900 करोड़ बचा लिए। वाहन और दिव्यांग भत्ता बढ़ाने के आदेश नहीं हुए जारी     प्रदेश सरकार ने लंबे समय बाद कर्मचारियों के वर्षों से लंबित विभिन्न भत्ते बढ़ाने का निर्णय लिया है। कुछ भत्तों में वृद्धि के आदेश भी जारी हो गए पर सामान्य प्रशासन विभाग ने वाहन और दिव्यांग भत्ते में वृद्धि के अभी तक आदेश जारी नहीं किए हैं।     जबकि, वित्त विभाग ने आदेश का प्रारूप तक उपलब्ध करा दिया है। सूत्रों का कहना है कि अब अगले सप्ताह दोनों भत्तों में वृद्धि के आदेश जारी करने की तैयारी हो गई है।   इस प्रकार की जाएगी नई बढ़ोतरी बढ़ोतरी का प्रतिशत : नई बढ़ोतरी 5 फीसदी की जाएगी। लाभार्थियों की संख्या : लगभग 7 लाख राज्य कर्मचारी और अधिकारियों का इसका फायदा मिलेगा। तारीख : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा हरी झंडी मिलने के बाद एकमुश्त ये वृद्धि लागू कर दी जाएगी। recent visitors 39

पहलगाम हमले के बाद भी नहीं टूटी हिम्मत, लोगों में उत्साह, सरकार से हथियार देने की कर रहे मांग

भोपाल जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में आतंकी हमले के बावजूद, भोपाल के लोग अमरनाथ यात्रा के लिए उत्साहित हैं। वे बड़ी संख्या में रजिस्ट्रेशन करा रहे हैं। युवाओं में यात्रा को लेकर खास उत्साह है। कुछ युवा सरकार से हथियार देने की मांग कर रहे हैं ताकि वे अपनी सुरक्षा कर सकें। वहीं, कुछ का कहना है कि उन्हें सरकार और सेना पर भरोसा है। उन्हें विश्वास है कि बाबा महादेव की कृपा से सब ठीक रहेगा।ई गम और गुस्से का माहौल देश में गम और गुस्से का माहौल है। लेकिन भोपाल के लोगों का हौसला अमरनाथ यात्रा पर जाने के लिए अभी भी बुलंद है। भोपाल से जम्मू तक रजिस्ट्रेशन सेंटरों पर लोगों की भीड़ उमड़ रही है। रजिस्ट्रेशन कराने वाले श्रद्धालु कह रहे हैं कि आतंकियों ने निर्दोष लोगों पर हमला किया लेकिन इससे डरने की कोई बात नहीं है। वे कहते हैं कि जैसे हर साल यात्रा होती है, वैसे ही इस साल भी होगी। उन्हें भारतीय सेना, PM मोदी और सरकार पर पूरा भरोसा है। सरकार से हथियार देने की मांग कुछ श्रद्धालु बहुत उत्साहित दिख रहे हैं। उनका कहना है कि वे निहत्थे यात्रा पर नहीं जाना चाहते। वे चाहते हैं कि उन्हें हथियार दिए जाएं। ताकि जरूरत पड़ने पर वे सेना का साथ दे सकें। उनका मानना है कि अगर वे सशस्त्र रहेंगे तो कोई उन पर हमला करने की हिम्मत नहीं करेगा। एक श्रद्धालु ने कहा, 'हमें सरकार हथियार दे दे ताकि अपनी सुरक्षा स्वयं कर सकेंगे।' एक और श्रद्धालु ने कहा, 'उन्हें सरकार और सेना पर भरोसा है और बाबा महादेव की कृपा से सब कुशल रहेगा।' इस हमले के बाद इतना परिवर्तन     अब लोग जत्थों में यात्रा की प्लानिंग कर रहे हैं। इसके साथ बाबा बर्फानी समिति व अमरनाथ सेवा समिति के पदाधिकारियों का दावा है कि उनका भंडारा निश्चित समय पर निर्धारित स्थान पर लगेगा।     श्रद्धालु अब और उत्साह के साथ खाद्य सामग्री का दान कर रहे हैं। मोहना निवासी विवेक शर्मा का कहना है कि पहली बार अमरनाथ यात्रा पर जाने की प्लानिंग की थी। पहले परिवार के एक-दो लोग भी साथ जा रहे थे।     पहलगाम हुए आतंकी हमले के बाद अब उनका विचार अकेले ही जाने का है। कोशिश है कि अब किसी जत्थे के साथ यात्रा के लिए जायें। क्योंकि पूर्व यात्रा कर चुके श्रद्धालु को भौगोलिक स्थिति के साथ सुरक्षा इंतजामों की जानकारी होती है।     प्रोफेसर डॉ. संजय पांडे ने बताया कि हमले के बाद से युवा यात्रा के लिए अधिक जानकारी ले रहे हैं और बाबा बर्फानी के दर्शनों के लिए उत्साह दिखा रहे हैं। पहली बार यात्रा पर जाने वाले उनसे जरूर सवाल कर रहे हैं कि.यात्रा के दौरान किस तरीके की सुरक्षा व्यवस्था होती है।     जो पूर्व में यात्रा कर चुके हैं, उन्हें पता है कि हर यात्री पर सेना के जवान की नजर होती है और सुरक्षा मापदंड अपनाते हुए यात्रा कराई जाती है। उन्होंने बताया कि 500 से अधिक यात्रियों का जत्था ले जाने की योजना थी। अब तक 150 लोगों के रजिस्ट्रेशन हो चुके हैं।     उनका जत्था दो जुलाई को अमरनाथ यात्रा के लिए रवाना होना हैं, अगर रजिस्ट्रेशन में कोई परेशानी आई, तो एक-दो दिन कार्यक्रम आगे पीछे हो सकता है। भंडारे की तैयारियां शुरू कर दी है शुक्रवार से दानदाताओं ने खाद्य सामग्री देने का सिलसिला शुरू कर दिया है। लोगों के उत्साह में कोई कमी नजर नहीं आ रही है। नया बाजार स्थित पंजाब नेशनल बैंक में ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन किये जा रहे हैं। गुरुवार को 170 लोगों ने रजिस्ट्रेशन कराया है। बैंक कर्मचारी पप्पू वर्मा ने बताया कि आतंकी हमले के बाद लोग पहलगाम से यात्रा शुरू करने के लिए अधिक रजिस्ट्रेशन करा रहे हैं, क्योंकि यहां से यात्रा ज्यादा सुगम है। हर दिन हो रहे 200 तक रजिस्ट्रेशन भोपाल में जम्मू-कश्मीर बैंक में अमरनाथ यात्रा के लिए रजिस्ट्रेशन हो रहा है। यह केंद्र सुबह 10 बजे से दोपहर 3:30 बजे तक खुला रहता है। यहां हर दिन लगभग 100 से 200 लोग रजिस्ट्रेशन करा रहे हैं। इससे पता चलता है कि आतंक के डर के बावजूद लोगों की श्रद्धा और साहस कम नहीं हुआ है। recent visitors 39

उच्च शिक्षा विभाग का बड़ा फैसला: संविधान की पढ़ाई अनिवार्य, विभाग ने जारी की अधिसूचना

भोपाल मध्यप्रदेश उच्च शिक्षा विभाग ने स्नातकोत्तर (Post Graduation) के सभी विद्यार्थियों के लिए संविधान (Constitution), मानवीय मूल्य (Human Values) और नैतिक शिक्षा (Ethics Education) की पढ़ाई जरूरी कर दी गई है। पहले यह विषय केवल आर्ट डिपार्टमेंट के छात्रों तक सीमित था। लेकिन अब विज्ञान, गणित और वाणिज्य (Science, Mathematics and Commerce) सहित सभी डिपार्टमेंट के विद्यार्थियों को इसे पढ़ना जरूरी कर दिया गया है। उच्च शिक्षा विभाग ने इसकी अधिसूचना जारी करते हुए इसे सत्र 2025-26 से लागू करने का निर्णय लिया है। बता दें कि नई अधिसूचना के बाद विज्ञान, गणित और वाणिज्य संकाय वालों को भी संविधान का पाठ पढ़ना होगा. संविधान, मानवीय मूल्य और नैतिक शिक्षा को वैल्यू एडेड पाठ्यक्रम के तौर पर एक अलग प्रश्न पत्र में शामिल किया जा रहा है. अधिकारियों की मानें तो विस्तृत संविधान का कितना हिस्सा और उसका कौन सा प्रविधान पढ़ाया जाएगा यह अध्ययन मंडल बाद में तय करेगा. अध्ययन मंडल इन तीनों विषयों को मिलाकर कर एक पाठ्यक्रम तैयार करेगा. संविधान का सिलेबस कैसे लागू होगा     यह नया वैल्यू एडेड सिलेबस (Value-Added Course) पोस्टग्रेजुएट के दूसरे या चौथे सेमेस्टर में पढ़ाया जाएगा। अगर कोई छात्र एक वर्ष का पीजी प्रोग्राम कर रहा है , तो उसे दूसरे सेमेस्टर में यह सिलेबस पढ़ाया जाएगा, जबकि दो वर्षीय कार्यक्रम करने वाले छात्रों को इसे चौथे सेमेस्टर में पढ़ाया जाएगा।     सिलेबस दो क्रेडिट डिजिट्स का होगा और इसमें पास होना अनिवार्य किया गया है। विषय की ब्रॉड आउटलाइन और पाठ्यविषय अध्ययन मंडल (Curriculum Study Board) के तहत तय किया जाएगा। तीनों विषयों को मिलाकर एक पाठ्यक्रम तैयार होगा अधिकारियों का कहना है कि विस्तृत संविधान का कितना हिस्सा और उसका कौन सा प्रविधान पढ़ाया जाएगा यह अध्ययन मंडल बाद में तय करेगा। अध्ययन मंडल इन तीनों विषयों को मिलाकर कर एक पाठ्यक्रम तैयार करेगा। इस अधिसूचना के अनुसार स्नातकोत्तर चार सेमेस्टर का होगा। संविधान वाले वैल्यू एडेड विषय को दूसरे अथवा चौथे सेमेस्टर में पढ़ाया जाएगा। ऐसा इसलिए कि अगर कोई विद्यार्थी एक वर्ष का स्नातकोत्तर करता है तो उसे भी यह पढ़ा दिया जाए। दो वर्ष पढ़ाई का विकल्प चुनने वालों को यह चौथे सेमेस्टर में पढ़ाया जाएगा। यह पाठ्यक्रम दो क्रेडिट अंक का होगा, जिसमें विद्यार्थियों के लिए उत्तीर्ण होना अनिवार्य होगा। पीजी में मूल्यांकन प्रणाली में भी बदलाव स्नातकोत्तर कक्षाओं में मूल्यांकन प्रणाली बदली जाएगी। अब 60 प्रतिशत अंक लिखित परीक्षा और 40 प्रतिशत आंतरिक मूल्यांकन से मिलेंगे। दोनों में न्यूनतम 40 प्रतिशत अंक पाना जरूरी होगा। प्रोजेक्ट, सेमिनार या लघु शोध प्रबंध में फेल होने पर दो सेमेस्टर में दोबारा मौका मिलेगा। अभी तक 85 प्रतिशत अंक मुख्य परीक्षा और 15 प्रतिशत आंतरिक मूल्यांकन पर मिलते थे। अप्रैजल सिस्टम में भी बदलाव नई सिस्टम के मुताबिक, पोस्टग्रेजुएट स्तर पर अब कुल डिजिट्स में से 60% अंक लिखित परीक्षा (Written Examination) और 40% अंक आंतरिक मूल्यांकन (Internal Assessment) के आधार पर दिए जाएंगे। दोनों में न्यूनतम 40 प्रतिशत अंक अर्जित करना अनिवार्य होगा। इसके अतिरिक्त, अगर कोई छात्र प्रोजेक्ट, सेमिनार या डिसर्टेशन में असफल होता है, तो उसे दो सेमेस्टरों के भीतर फिर से अवसर मिलेगा। कर्रेंटली रेटेड 85% मुख्य परीक्षा और 15% आंतरिक मूल्यांकन के आधार पर किया जाता है। इसका उद्देश्य केया है अपर मुख्य सचिव, उच्च शिक्षा विभाग अनुपम राजन के मुताबिक, इस फैसले का उद्देश्य विद्यार्थियों को संविधान की व्यापक जानकारी देना और उनमें ह्यूमन वैल्यूज और नैतिक शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। इससे सभी फैकल्टीज के छात्रों में समान रूप से संवैधानिक समझ और सामाजिक जिम्मेदारी का विकास होगा। क्या है हमारा भारतीय संविधान भारतीय संविधान (Indian Constitution) हमारे देश का सबसे बड़ा कानून है, जो यह बताता है कि देश कैसे चलेगा। इसमें लिखा है कि, सरकार कैसे काम करेगी और हर नागरिक के क्या अधिकार और कर्तव्य हैं। हमारा संविधान 26 नवंबर 1949 को बनकर तैयार हुआ और 26 जनवरी 1950 से लागू हुआ। इसमें लोकतंत्र, समानता, आजादी और धर्मनिरपेक्षता जैसे बड़े सिद्धांतों को जगह दी गई है। इसमें सरकार के तीन हिस्से — संसद, सरकार और अदालत — के काम भी बताए गए हैं। यह दुनिया का सबसे बड़ा लिखित संविधान है, जो सबको बराबरी का हक देता है। recent visitors 35

सभी गेहूं खरीदी केंद्रों पर शीतल पेय पदार्थ भी किसानों को उपलब्ध कराए जा रहे

भोपाल मध्य प्रदेश में इस समय गेहू खरीदी की जा रही है, उपार्जन केंद्रों पर किसानों से सरकार के प्रतिनिधि गेहूं खरीद रहे हैं, अब तक सरकार ने 6 लाख से अधिक किसानों से 56 लाख मीट्रिक टन से अधिक गेहूं खरीद लिया है और अभी तक लगभग 4000 करोड़ रुपये का भुगतान भी किसानों को किया जा चुका है। खरीदी केंद्रों पर किसानों के लिए बेहतर व्यवस्थाएं की गई हैं जिससे उन्हें कोई परेशानी ना ही इतना ही नहीं  किसानों का स्वागत भी वेलकम ड्रिंक्स से किया जा रहा है। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने बताया है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP)  पर मध्य प्रदेश में अभी तक 6 लाख 44 हजार 878 किसानों से 56 लाख 85 हजार 477 मीट्रिक टन गेहूं का उपार्जन किया जा चुका है। उन्होंने बताया कि किसानों को उपार्जित गेहूं का भुगतान भी लगातार किया जा रहा है। अभी तक लगभग 4000 करोड़ रुपये का भुगतान किसानों को किया जा चुका है। खाद्य मंत्री ने बताया कि गेहूं  का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2425 रुपये है और मध्य प्रदेश सरकार द्वारा 175 रुपये प्रति क्विंटल इस पर बोनस दिया जा रहा है। इस तरह से गेहूं की खरीदी 2600 रुपये प्रति क्विंटल की दर से की जा रही है। किसान गेहूं उपार्जन के लिये 30 अप्रैल तक स्लाट बुक करा सकते हैं। प्रदेश के कई जिलों में लू जैसे हालात प्रदेश में गर्मी बहुत तेज पड़ रही है, कई जिलों में लू जैसे हालत हैं मौसम विभाग ने अलर्ट जारी किये हैं मौसम को देखते हुए गेहूं उपार्जन केंद्रों पर सरकार के निर्देश पर किसानों के लिए ठंडा पानी, कूलर, छायादार बैठने की जगह की व्यवस्था सहित अन्य व्यवस्था दी जा रही हैं, ग्वालियर जिले में तो किसानों का विशेष ध्यान रखा जा रहा है। किसानों का स्वागत नींबू की शिकंजी, ओआरएस व शरबत से ग्वालियर में बढ़ते हुए तापमान को ध्यान में रखकर जिले के उपार्जन केंद्रों पर किसानों और हम्मालों को शीतल जल के साथ-साथ वैलकम ड्रिंक के रूप में नींबू की शिकंजी, ओआरएस व शरबत जैसे पेय पदार्थ उपलब्ध कराए जा रहे हैं। शुक्रवार को हरि लीला विपणन संस्था घाटीगाँव द्वारा संचालित उपार्जन केंद्र  एवं मोहना स्थित खरीदी केंद्र पर किसानों व हम्माल भाईयों को शरबत पिलाया गया। उपार्जन केंद्रों पर हुए स्वागत व अच्छी व्यवस्थायें पाए जाने पर किसानों ने सरकार के प्रति धन्यवाद जताया। उपार्जन केंद्रों पर किसानों का विशेष ध्यान कलेक्टर रुचिका चौहान ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि किसानों को उपार्जन केंद्र पर अपनी उपज बेचने में कोई दिक्कत नहीं आनी चाहिए। सभी केंद्रों पर शीतल पेयजल व छाया सहित अन्य बुनियादी सुविधायें भी पुख्ता रहें। इसी कड़ी में अत्यधिक गर्मी को ध्यान में रखकर सभी खरीदी केंद्रों पर ओआरएस की व्यवस्था की गई है। साथ ही सुविधा के अनुसार अन्य शीतल पेय पदार्थ भी किसानों को उपलब्ध कराए जा रहे हैं। अब तक की गई गेहूं खरीदी शासन द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी के मुताबिक प्रदेश में अभी तक सीहोर में 6 लाख 9 हजार 192 मीट्रिक टन , उज्जैन में 5 लाख 98 हजार 610, विदिशा में 4 लाख 63 हजार 658, रायसेन में 4 लाख 63 हजार 338, शाजापुर में 3 लाख 26 हजार 19, भोपाल में 3 लाख 12 हजार 598, राजगढ़ में 3 लाख 01 हजार 900, देवास में 2 लाख 64 हजार 84, नर्मदापुरम में 2 लाख 61 हजार 47, इंदौर में 2 लाख 16 हजार 494, सागर में 1 लाख 97 हजार 658, आगर मालवा में 1 लाख 64 हजार 280, सिवनी में 1 लाख 57 हजार 254, मंदसौर में 1 लाख 44 हजार 379, हरदा में 1 लाख 3 हजार 663, रतलाम में 86 हजार 565, दमोह में 85 हजार 705, नरसिंहपुर में 74 हजार 855 मीट्रिक टन गेहूं की खरीदी की जा चुकी है। इन जिलों में भी जारी है गेहूं उपार्जन इसी तरह श्योपुर में 50 हजार 190 मीट्रिक टन, दतिया में 46 हजार 310, शिवपुरी में 42 हजार 812, खण्डवा में 40 हजार 149, छतरपुर में 36 हजार 501, ग्वालियर में 35 हजार 229, कटनी में 34 हजार 48, गुना में 33 हजार 200, रीवा में 31 हजार 689, जबलपुर में 30 हजार 940, अशोकनगर में 30 हजार 876, नीमच में 30 हजार 241, पन्ना में 29 हजार 433, मण्डला में 29 हजार 340, भिण्ड में 26 हजार 204, बैतूल में 21 हजार 442, झाबुआ में 21 हजार 195, मैहर में 19 हजार 643, छिन्दवाड़ा में 17 हजार 896, मुरैना में 15 हजार 60, टीकमगढ़ में 8 हजार 628, शहडोल में 2 हजार 943, खरगौन में 2595, निवाड़ी में 1557, सिंगरौली में 1370, उमरिया में 1360, डिण्डोरी में 1254, मऊगंज में 1227, सीधी 874, बालाघाट में 636, अनूपपुर में 463 अलीराजपुर 214 और पांढुर्णा में 44 मीट्रिक टन गेहूं का उपार्जन किया जा चुका है। recent visitors 76

ग्वालियर के सभी गेहूं खरीदी केंद्रों पर शीतल पेय पदार्थ भी किसानों को उपलब्ध कराए जा रहे

भोपाल मध्य प्रदेश में इस समय गेहू खरीदी की जा रही है, उपार्जन केंद्रों पर किसानों से सरकार के प्रतिनिधि गेहूं खरीद रहे हैं, अब तक सरकार ने 6 लाख से अधिक किसानों से 56 लाख मीट्रिक टन से अधिक गेहूं खरीद लिया है और अभी तक लगभग 4000 करोड़ रुपये का भुगतान भी किसानों को किया जा चुका है। खरीदी केंद्रों पर किसानों के लिए बेहतर व्यवस्थाएं की गई हैं जिससे उन्हें कोई परेशानी ना ही इतना ही नहीं  किसानों का स्वागत भी वेलकम ड्रिंक्स से किया जा रहा है। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने बताया है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP)  पर मध्य प्रदेश में अभी तक 6 लाख 44 हजार 878 किसानों से 56 लाख 85 हजार 477 मीट्रिक टन गेहूं का उपार्जन किया जा चुका है। उन्होंने बताया कि किसानों को उपार्जित गेहूं का भुगतान भी लगातार किया जा रहा है। अभी तक लगभग 4000 करोड़ रुपये का भुगतान किसानों को किया जा चुका है। खाद्य मंत्री ने बताया कि गेहूं  का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2425 रुपये है और मध्य प्रदेश सरकार द्वारा 175 रुपये प्रति क्विंटल इस पर बोनस दिया जा रहा है। इस तरह से गेहूं की खरीदी 2600 रुपये प्रति क्विंटल की दर से की जा रही है। किसान गेहूं उपार्जन के लिये 30 अप्रैल तक स्लाट बुक करा सकते हैं। प्रदेश के कई जिलों में लू जैसे हालात प्रदेश में गर्मी बहुत तेज पड़ रही है, कई जिलों में लू जैसे हालत हैं मौसम विभाग ने अलर्ट जारी किये हैं मौसम को देखते हुए गेहूं उपार्जन केंद्रों पर सरकार के निर्देश पर किसानों के लिए ठंडा पानी, कूलर, छायादार बैठने की जगह की व्यवस्था सहित अन्य व्यवस्था दी जा रही हैं, ग्वालियर जिले में तो किसानों का विशेष ध्यान रखा जा रहा है। किसानों का स्वागत नींबू की शिकंजी, ओआरएस व शरबत से ग्वालियर में बढ़ते हुए तापमान को ध्यान में रखकर जिले के उपार्जन केंद्रों पर किसानों और हम्मालों को शीतल जल के साथ-साथ वैलकम ड्रिंक के रूप में नींबू की शिकंजी, ओआरएस व शरबत जैसे पेय पदार्थ उपलब्ध कराए जा रहे हैं। शुक्रवार को हरि लीला विपणन संस्था घाटीगाँव द्वारा संचालित उपार्जन केंद्र  एवं मोहना स्थित खरीदी केंद्र पर किसानों व हम्माल भाईयों को शरबत पिलाया गया। उपार्जन केंद्रों पर हुए स्वागत व अच्छी व्यवस्थायें पाए जाने पर किसानों ने सरकार के प्रति धन्यवाद जताया। उपार्जन केंद्रों पर किसानों का विशेष ध्यान कलेक्टर रुचिका चौहान ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि किसानों को उपार्जन केंद्र पर अपनी उपज बेचने में कोई दिक्कत नहीं आनी चाहिए। सभी केंद्रों पर शीतल पेयजल व छाया सहित अन्य बुनियादी सुविधायें भी पुख्ता रहें। इसी कड़ी में अत्यधिक गर्मी को ध्यान में रखकर सभी खरीदी केंद्रों पर ओआरएस की व्यवस्था की गई है। साथ ही सुविधा के अनुसार अन्य शीतल पेय पदार्थ भी किसानों को उपलब्ध कराए जा रहे हैं। अब तक की गई गेहूं खरीदी शासन द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी के मुताबिक प्रदेश में अभी तक सीहोर में 6 लाख 9 हजार 192 मीट्रिक टन , उज्जैन में 5 लाख 98 हजार 610, विदिशा में 4 लाख 63 हजार 658, रायसेन में 4 लाख 63 हजार 338, शाजापुर में 3 लाख 26 हजार 19, भोपाल में 3 लाख 12 हजार 598, राजगढ़ में 3 लाख 01 हजार 900, देवास में 2 लाख 64 हजार 84, नर्मदापुरम में 2 लाख 61 हजार 47, इंदौर में 2 लाख 16 हजार 494, सागर में 1 लाख 97 हजार 658, आगर मालवा में 1 लाख 64 हजार 280, सिवनी में 1 लाख 57 हजार 254, मंदसौर में 1 लाख 44 हजार 379, हरदा में 1 लाख 3 हजार 663, रतलाम में 86 हजार 565, दमोह में 85 हजार 705, नरसिंहपुर में 74 हजार 855 मीट्रिक टन गेहूं की खरीदी की जा चुकी है। इन जिलों में भी जारी है गेहूं उपार्जन इसी तरह श्योपुर में 50 हजार 190 मीट्रिक टन, दतिया में 46 हजार 310, शिवपुरी में 42 हजार 812, खण्डवा में 40 हजार 149, छतरपुर में 36 हजार 501, ग्वालियर में 35 हजार 229, कटनी में 34 हजार 48, गुना में 33 हजार 200, रीवा में 31 हजार 689, जबलपुर में 30 हजार 940, अशोकनगर में 30 हजार 876, नीमच में 30 हजार 241, पन्ना में 29 हजार 433, मण्डला में 29 हजार 340, भिण्ड में 26 हजार 204, बैतूल में 21 हजार 442, झाबुआ में 21 हजार 195, मैहर में 19 हजार 643, छिन्दवाड़ा में 17 हजार 896, मुरैना में 15 हजार 60, टीकमगढ़ में 8 हजार 628, शहडोल में 2 हजार 943, खरगौन में 2595, निवाड़ी में 1557, सिंगरौली में 1370, उमरिया में 1360, डिण्डोरी में 1254, मऊगंज में 1227, सीधी 874, बालाघाट में 636, अनूपपुर में 463 अलीराजपुर 214 और पांढुर्णा में 44 मीट्रिक टन गेहूं का उपार्जन किया जा चुका है। recent visitors 77

बुरहानपुर में शिवराज सिंह चौहान ने कहा- ताप्ती मेगा रिचार्ज परियोजना के लिए जल्द महाराष्ट्र सरकार से होगा एमओयू

बुरहानपुर मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र की जल समृद्धि में नया अध्याय लिखने वाली ताप्ती मेगा रिचार्ज परियोजना के लिए जल्द ही महाराष्ट्र सरकार से मप्र सरकार का एमओयू साइन होगा। इस परियोजना के पूर्ण होने पर दोनों राज्यों के भूमिगत जल स्तर और सिंचाई क्षमता में वृद्धि होगी। यह जानकारी शनिवार शाम अल्प प्रवास पर बुरहानपुर पहुंचे मुख्यमंत्री मोहन यादव ने दी है। उनके साथ केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और प्रदेश की जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट भी मौजूद थे। मुख्यमंत्री और पूर्व मुख्यमंत्री जलगांव से हेलिकाप्टर द्वारा शाम करीब पांच बजे शहर के रेणुका मार्ग स्थित विवाह घर पहुंचे थे। वे नेपानगर विधायक मंजू दादू की बहन अंजलि और रोहित के विवाह समारोह में शामिल हुए और दोनों को नव दांपत्य जीवन की बधाई व आशीर्वाद दिया। हेलिपैड में सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल, नेपानगर विधायक मंजू दादू, पूर्व विधायक सुमित्रा कास्डेकर सहित भाजपा पदाधिकारियों ने उनकी अगवानी की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि मुझे संतोष है कि स्व. राजेंद्र दादू के सपने को साकार करने का कार्य विधायक मंजू दादू और उनके परिवार कर रहा है। recent visitors 53