मोहन भागवत ने कहा- भारत की शास्त्रार्थ परंपरा सत्य को सहमति से स्थापित करती है, पड़ोसियों को तंग नहीं करते

नई दिल्ली राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने कहा कि भारत की शास्त्रार्थ परंपरा सत्य को सहमति से स्थापित करती है। हिंदू मैनिफेस्टो इसी उद्देश्य से प्रस्तावित है, जो व्यापक चर्चा और सहमति के लिए प्रमाणित पुस्तक है। यह विश्व को नया रास्ता देने का भारत का कर्तव्य है, क्योंकि 2000 वर्षों के आस्तिक, नास्तिक और जड़वादी प्रयोग असफल रहे। भौतिक सुख बढ़ा, लेकिन असमानता और पर्यावरण हानि भी बढ़ी। एक कार्यक्रम में भागवत ने कहा कि भारत की प्राचीन दृष्टि पर आधारित जीवन व्यवस्था स्थापित होनी चाहिए। पुस्तक में आठ सूत्र पूर्ण हैं, लेकिन भाष्य काल और परिस्थिति के अनुसार बदलते हैं। पिछले 1500 वर्षों से नया शास्त्र नहीं आया, जिसके कारण जाति व्यवस्था जैसे दोष समाज में आए। वेदों का सही भाष्य आज आवश्यक है। शास्त्रों में अस्पृश्यता या जाति का कोई स्थान नहीं, जैसा उडुपी के संत समाज ने भी कहा। आततायियों को सबक सिखाना भी हमारा धर्म: भागवत उन्होंने जोर दिया कि अहिंसा हमारा स्वभाव है, लेकिन आततायियों को सबक सिखाना भी धर्म है। पड़ोसियों को तंग नहीं करते, लेकिन उपद्रव करने वालों को दंड देना राजा का कर्तव्य है। भ्रष्टाचारियों को छोड़ना उचित नहीं, क्योंकि धर्म में अर्थ और काम को मर्यादा में रखना जरूरी है। धर्म को केवल कर्मकांड तक सीमित नहीं करना चाहिए; यह सत्य, करुणा और सुचिता है। हिंदू समाज को अपने धर्म को समझने की जरूरत: भागवत हिंदू समाज को अपने धर्म को समझने की जरूरत है। हिंदू मैनिफेस्टो शास्त्रार्थ के माध्यम से शुद्ध परंपरा को सामने लाएगा और कालानुरूप स्वरूप स्थापित करेगा। यह पुस्तक विश्व कल्याण के लिए है, और इसका व्यापक प्रचार-प्रसार होना चाहिए। recent visitors 44

मुख्यमंत्री साय बोले- सुशासन तिहार में प्राप्त आवेदनों का सर्वोच्च प्राथमिकता से करें निराकरण

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज अपने निवास कार्यालय में राजस्व विभाग के कार्यों की गहन समीक्षा करते हुए आम नागरिकों को राजस्व सेवाओं का त्वरित और सहज लाभ उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री साय ने फौती–नामांतरण की प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरतने और समय-सीमा में कार्य पूर्ण करने के निर्देश देते हुए कहा कि विधिक वारिसान के पक्ष में फौती नामांतरण समय पर सुनिश्चित किया जाए। कलेक्टरों को निर्देशित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि तय समय सीमा में नामांतरण न होने पर संबंधित पटवारियों की जवाबदेही तय करते हुए कठोर कार्यवाही करें। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि आरबीसी 6-4 के अंतर्गत पीड़ित परिवारों को तात्कालिक सहायता उपलब्ध कराना सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने इसके लिए विभिन्न विभागों के बीच प्रभावी समन्वय स्थापित करते हुए कार्यवाही में विलंब न हो, यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए, ताकि प्रभावित परिवारों को लंबे समय तक भटकना न पड़े। उन्होंने अधिकारियों को इसकी सतत निगरानी करने के निर्देश भी दिए। मुख्यमंत्री साय ने स्पष्ट किया कि राजस्व विभाग का सीधा संबंध आम जनता से है, अतः मैदानी अमले की लापरवाही शासन की छवि पर प्रतिकूल प्रभाव डालती है। उन्होंने सुशासन तिहार के दौरान प्राप्त आवेदनों के निराकरण को सर्वोच्च प्राथमिकता पर रखने और सभी आवेदनों का त्वरित समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि राजस्व न्यायालय का संचालन सप्ताह में न्यूनतम दो दिन अनिवार्य रूप से किया जाए और दो पेशी में ही प्रकरणों का निराकरण हो। अति आवश्यक परिस्थितियों को छोड़कर पेशी की तिथि बढ़ाने से बचा जाए। मुख्यमंत्री साय ने ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल तकनीक का अधिकतम उपयोग कर डायवर्सन प्रक्रिया को सरल और सहज बनाने पर भी बल दिया। उन्होंने अविवादित नामांतरण और बंटवारे के मामलों में अनावश्यक विलंब करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के विरुद्ध कार्रवाई के निर्देश दिए। डिजिटल क्रॉप सर्वे की समीक्षा करते हुए उन्होंने राजस्व, कृषि, खाद्य तथा इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी विभागों की संयुक्त टीम गठित कर भूमि और फसल से संबंधित सटीक जानकारी एकत्रित करने के निर्देश दिए। राजस्व सचिव अविनाश चंपावत ने विभागीय कार्यों और गतिविधियों की प्रगति की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि भूमि अभिलेखों का कंप्यूटरीकरण, पंजीयन का डिजिटलीकरण तथा मॉडर्न रिकॉर्ड रूम का कार्य पूर्णता की ओर है। साथ ही उन्होंने  राजस्व न्यायालय प्रबंधन प्रणाली के डिजिटलीकरण, किसान पंजीयन, डिजिटल क्रॉप सर्वे और जियो-रेफरेंसिंग कार्यों की प्रगति से भी अवगत कराया। श्री चंपावत ने यह भी बताया कि मुख्यमंत्री साय के पूर्व निर्देशों के अनुरूप जिलों में लंबे समय से एक ही स्थान पर पदस्थ पटवारियों का स्थानांतरण नियमित रूप से किया जा रहा है। राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा ने समीक्षा बैठक में कहा कि शासन द्वारा निर्धारित नियमों के अनुरूप ही जमीन की खरीदी-बिक्री सुनिश्चित की जाए और राजस्व न्यायालयों में लंबित प्रकरणों का समयबद्ध निराकरण कर भू-धारकों को शीघ्र राहत दी जाए। इस अवसर पर मुख्य सचिव अमिताभ जैन, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव पी. दयानंद, राहुल भगत, डॉ. बसवराजू, चिप्स के सीईओ प्रभात मलिक तथा राजस्व विभाग के वरिष्ठ अधिकारीगण उपस्थित थे। "राजस्व विभाग का कार्य सीधे आम जनता से जुड़ा हुआ है, इसलिए विभागीय कार्यों में पारदर्शिता, त्वरित निष्पादन और समयबद्धता अत्यंत आवश्यक है। आम नागरिकों को राजस्व सेवाओं का त्वरित और सहज लाभ मिले, इसके लिए सुशासन तिहार में प्राप्त आवेदनों का सर्वोच्च प्राथमिकता से निराकरण किया जाए। फौती–नामांतरण सहित सभी राजस्व प्रकरणों में अनावश्यक विलंब न हो, पीड़ित परिवारों को समय पर सहायता मिले, और राजस्व न्यायालयों का संचालन सप्ताह में न्यूनतम दो दिन नियमित रूप से किया जाए। मैदानी अमले की लापरवाही शासन की छवि को प्रभावित करती है, इसलिए अविवादित नामांतरण,  बंटवारे सहित अन्य राजस्व मामलों के निराकरण में अनावश्यक देरी करने वालों पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल तकनीक का अधिकतम उपयोग कर डायवर्सन प्रक्रिया का सरलीकरण किया जाए।" मुख्यमंत्री विष्णु देव साय "शासन द्वारा निर्धारित नियमों के अनुरूप ही जमीन की खरीदी-बिक्री सुनिश्चित की जाए। राजस्व न्यायालयों में लंबित प्रकरणों का समयबद्ध निराकरण कर भू-धारकों को शीघ्र राहत प्रदान करें। आम नागरिकों को न्याय और सुविधा देना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।" राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा   recent visitors 31

उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा विभाग की समीक्षा की

भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा है कि प्रदेश सरकार, स्वास्थ्य सेवाओं को जनसामान्य के लिए सुलभ, उच्च गुणवत्ता युक्त और व्यापक बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। वरिष्ठ चिकित्सकों के अनुभव, आधुनिक मेडिकल कॉलेजों का सुदृढ़ आधार और समय पर नियुक्ति की प्रक्रिया से प्रदेश के नागरिकों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकेंगी। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने भोपाल स्थित निवास कार्यालय में स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग से जुड़े विभिन्न विषयों की गहन समीक्षा की। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने प्रदेश में वरिष्ठ विषय विशेषज्ञ चिकित्सकों के अनुभव का लाभ उठाने के उद्देश्य से, उन्हें 70 वर्ष की आयु तक संविदा सेवा देने के लिये प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए। प्रस्ताव कैबिनेट अनुमोदन के लिए शीघ्र प्रस्तुत किया जाएगा। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि अनुभवी चिकित्सकों की सेवाएं प्रदेश के चिकित्सा संस्थानों की गुणवत्ता में वृद्धि करेंगी साथ ही यह निर्णय चिकित्सकों की कमी की पूर्ति करने में भी सहायक होगा। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने रीवा और इंदौर के मेडिकल कॉलेजों के उन्नयन का विस्तृत प्रस्ताव शीघ्र तैयार करने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि इसके लिए कॉलेजों का अधोसंरचना विकास , अत्याधुनिक उपकरणों की व्यवस्था अन्य आवश्यक कार्य भी समय से पूर्ण किए जाएँ। शुक्ल ने मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग के माध्यम से मेडिकल ऑफिसर और विशेषज्ञ चिकित्सकों की भर्ती प्रक्रिया समय-सीमा के भीतर पूर्ण करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से कहा कि एमपीपीएससी के साथ नियमित संपर्क में रहते हुए सभी आवश्यक औपचारिकताओं को तत्काल प्राथमिकता से पूरा किया जाए ताकि स्वास्थ्य सेवाओं को और सुदृढ़ किया जा सके। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने निर्देश दिए कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा संचालित ऑनलाइन ट्रांसफर पोर्टल (ई-एचआरएमएस) की तैयारी पूर्ण कर ली जाए। पोर्टल को उपयोगकर्ता के अनुकूल बनाते हुए स्थानांतरण प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से संपन्न करने के निर्देश दिए गए। उन्होंने कहा कि कार्मिकों के स्थानांतरण में पारदर्शिता और त्वरित निर्णय से विभागीय कार्य में गति आएगी और सेवाओं में सुधार होगा। प्रमुख सचिव लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा संदीप यादव, मिशन संचालक एनएचएम डॉ. सलोनी सिडाना उपस्थित रहे। recent visitors 36

कैलाश मानसरोवर यात्रा जून से अगस्त तक आयोजित होगी, सरकार ने यात्रा में जोखिम की जिम्मेदारी खुद लेने की सलाह दी

 नई दिल्ली जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में पर्यटकों पर हुए आतंकी हमले से लोगों के बीच आक्रोश का माहौल है. इस हमले में 26 पर्यटकों की मौत हो गई और कई लोग घायल हुए. इस बीच विदेश मंत्रालय ने जानकारी दी है कि इस साल भी कैलाश मानसरोवर यात्रा का आयोजन होगा. जून से अगस्त तक इसका आयोजन किया जाएगा. यह यात्रा बीते पांच सालों से बंद थी. विदेश मंत्रालय ने क्या जानकारी दी? विदेश मंत्रालय ने बताया कि इस साल जून से अगस्त 2025 के बीच कैलाश मानसरोवर यात्रा का आयोजन होगा. इच्छुक यात्रा कैलाश यात्रा की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर आवेदन कर सकते हैं. इस साल यात्रा उत्तराखंड के लिपुलेख दर्रे और सिक्किम के नाथु ला दर्रे से होगी. पांच और दस बैंचों का संचालन किया जाएगा. प्रत्येक बैच में 50 यात्री शामिल होंगे. यात्रियों का चयन आवेदकों रैंडम सलेक्शन से कंप्यूटर द्वारा संचालित होगा. इसमें जेंडर बैलेंस का भी ध्यान रखा जाएगा. कैलाश मानसरोवर यात्रा को लेकर चीन के साथ बनी सहमति गलवान घाटी में भारत-चीन के साथ हुए संघर्ष के बाद अब दोनों देश के बीच रिश्ते सुधर रहे हैं. भारत और चीन के बीच संवाद के बाद कैलाश मानसरोवर यात्रा को फिर से शुरू करने का निर्णय लिया गया. कोरोना महामारी के दौरान यात्रा पर ब्रेक लग गई थी. जिसके बाद सीमा पर दोनों देशों के बीच तनाव पैदा हुआ. हालांकि, भारत ने इस मुद्दे को लगातार चीन के साथ कूटनीतिक स्तर पर उठाया. 2019 के बाद यह पहली बार है जब मानसरोवर यात्रा फिर से शुरू होगी. बीते साल, अक्टूबर (2024) में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच मुलाकात हुई थी. जिसके बाद सीमा तनाव घटा और यात्रा की दिशा में प्रगति हुई. यात्रा के लिए सरकार की एडवाइजरी विदेश मंत्रालय ने जारी बयान में इसकी जानकारी दी है। इस साल यात्रा करने वाले लोगों के लिए दो रास्ते हैं। उत्तराखंड राज्य में लिपुलेख पास से 5 जत्थे जाएंगे। हर जत्थे में 50 यात्री होंगे। सिक्किम राज्य में नाथू ला पास से 10 जत्थे जाएंगे। यहां भी हर जत्थे में 50 यात्री होंगे। कुल मिलाकर, यात्रा में शामिल होने वाले लोगों के लिए सरकार ने इंतज़ाम कर दिया है। यात्रा के लिए सरकार की एडवाइजरी इस यात्रा में प्रतिकूल हालात, अत्यंत खराब मौसम में ऊबड़-खाबड़ भू-भाग से होते हुए 19,500 फुट तक की चढ़ाई चढ़नी होती है और यह उन लोगों के लिए जोखिम भरा हो सकता है जो शारीरिक और मेडिकली तंदुरुस्त नहीं हैं। सरकार का कहना है कि किसी भी प्राकृतिक आपदा के कारण अथवा किसी भी अन्य कारण से किसी यात्री की मृत्यु अथवा उसके जख्मी होने अथवा उसकी संपत्ति के खोने अथवा क्षतिग्रस्त होने के लिए किसी भी तरह से वो जिम्मेदार नहीं होगी। जोखिम की जिम्मेदारी खुद लें-सरकार तीर्थयात्री यह यात्रा पूरी तरह से अपनी इच्छा शक्ति के बल पर तथा खर्च, जोखिम और परिणामों से अवगत होकर करते हैं। किसी तीर्थयात्री की सीमा पार मृत्यु हो जाने पर सरकार की उसके पार्थिव शरीर को दाह-संस्कार के लिए भारत लाने की किसी तरह की बाध्यता नहीं होगी। लिहाजा मृत्यु के मामले में चीन में पार्थिव शरीर के अंतिम संस्कार के लिए सभी तीर्थ यात्रियों को एक सहमति प्रपत्र पर हस्ताक्षर करना होता है। यह सभी जानकारी विदेश मंत्रालय की वेबसाइट पर दी गई है। कहां से शुरू होगी यात्रा यह यात्रा उत्तराखंड, दिल्ली और सिक्किम राज्य की सरकारों और भारत तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के सहयोग से आयोजित की जाती है। कुमाऊं मंडल विकास निगम (केएमवीएन) और सिक्किम पर्यटन विकास निगम (एसटीडीसी) और उनके संबद्ध संगठन भारत में यात्रियों के हर जत्थे के लिए सम्भारगत सहायता और सुविधाएं मुहैया कराते हैं। दिल्ली हार्ट एवं लंग इंस्टीट्यूट (डीएचएलआई) इस यात्रा के लिए आवेदकों के स्वास्थ्य स्तरों के निर्धारण के लिए चिकित्सा जांच करता है।   recent visitors 40

मुख्यमंत्री कॉन्क्लेव में जारी करेंगे 4 नई टेक-पॉलिसीज के लिए गाइडलाइन्स

 इंदौर मध्यप्रदेश को टेक्नोलॉजी और डिजिटल नवाचार का केन्द्र बनाने के उद्देश्य से आयोजित  ‘एमपी टेक ग्रोथ कॉन्क्लेव 2025’ का शुभारंभ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 27 अप्रैल को इंदौर के ‘ब्रिलिएंट कन्वेंशन सेंटर’  में करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उम्मीद जताई है कि कॉन्क्लेव देश-दुनिया के टेक दिग्गजों के लिए निवेश का स्वर्णिम अवसर सिद्ध होगा। राज्य के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग का ये कॉन्क्लेव आयोजन जीआईएस-भोपाल में आए निवेश प्रस्तावों को मूर्त रूप देने का महत्वपूर्ण प्रयास है। ‘एमपी टेक ग्रोथ कॉन्क्लेव’ प्रदेश का पहला पूर्णतः सेक्टर आधारित टेक-कॉन्क्लेव होगा, जो हाल ही में आयोजित जीआईएस-भोपाल में आये निवेश प्रस्तावों को धरातल पर साकार करने का मंच बनेगा। कार्यक्रम में Google, Microsoft, NVIDIA जैसी बिग-टेक कंपनियों सहित 300 से अधिक तकनीकी विशेषज्ञ, उद्योगपति, नीति निर्माता और निवेशक शामिल होंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव इस अवसर पर प्रदेश की चार नई तकनीकी नीतियों –GCC नीति, ड्रोन नीति, सेमीकंडक्टर नीति एवं AVGC-XR नीति की गाइडलाइन्स जारी करेंगे।यह नीतियां नवाचार, अनुसंधान और निर्माण को प्रोत्साहित कर प्रदेश में क्षेत्रीय स्तर तक तकनीकी उद्य्मिता और क्षमताओं को नई ऊँचाइयाँ देंगी। कॉन्क्लेव के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. यादव नए IT पार्क, स्किल डेवलपमेंट सेंटर्स और स्टार्ट-अप इन्क्यूबेटरों का भूमि-पूजन करेंगे। मुख्यमंत्री कॉन्क्लेव में ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ और इन्क्यूबेशन हब का शुभारंभ करेंगे, प्रमुख निवेशकों के साथ एमओयू और आवंटन-पत्रों पर हस्ताक्षर करेंगे और इंवेस्टमेंट फैसिलिटेशन पोर्टल का शुभारंभ करेंगे। इस पोर्टल से निवेशकों को प्रोजेक्ट्स की रियल-टाइम ट्रैकिंग और एकल खिड़की की सुविधा मिलेगी। कॉन्क्लेव में सेक्टर-स्पेसिफिक राउंड टेबल मीटिंग्स, सूचना प्रौद्योगिकी सलाहकार बोर्ड से वीसी संवाद और मुख्यमंत्री की टेक-लीडर्स के साथ वन-टू-वन बैठकें भी कॉन्क्लेव का हिस्सा होंगी। ‘एमपी टेक ग्रोथ कॉन्क्लेव 2025’ मध्यप्रदेश को भविष्य के डिजिटल भारत में अग्रणी बनाने और जीआईएस-भोपाल की निवेश प्रतिबद्धताओं को साकार करने की दिशा में एक निर्णायक पहल सिद्ध होगी।   recent visitors 30

पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने हिंदू समुदाय से अपील कि है कि जनसंख्या वृद्धि पर भी जोर दिया जाए

छतरपुर मध्यप्रदेश के छतरपुर जिले में स्थित बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र शास्त्री शुक्रवार को गुरुग्राम पहुंचे थे। जहां पहुंचकर उन्होंने सेक्टर 43 के एक निजी ग्रुप में हनुमान मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम में हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने कहा कि सबने पहलगाम देख लिया। पंडित धीरेंद्र शास्त्री बोले- मेरे हिंदुओ…पहलगाम में तो देख लिया धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि मेरे हिंदुओं, तुमने पहलगाम में तो देख ही लिया, उन्होंने ना ये पूछा की तुम तमिल बोलते हो, गुजराती बोलते हो, मराठी बोलते या पंजाबी बोलते हो, ये नहीं पूछा। उन्होंने ये भी नहीं पूछा कि तुम गुजरात के हो, मध्य प्रदेश, बिहार के हो या कहां के हो, उन्होंने सिर्फ ये पूछा की मुसलमान हो, कलमा पढ़ते हो, जवाब नहीं दिया तो मार दिया। हम बस यहीं कहेंगे, हिंदू एक रहेगा, कोई बाल बांका नहीं कर पाएगा। आगे शास्त्री ने कहा कि अभी तक हम चिल्लाते रहे पदयात्राओं में तो लोग हमारा मजाक बनाते थे कि बाबा निकला है भेदभाव मिटाने, बाबा निकला है जात-पात मिटाने, देख लो हिंदुओं। उन्होंने जाती नहीं पूछी- उन्होंने सिर्फ धर्म पूछा, तुम किस धर्म के हो। हिंदुओं अभी भी तुम क्षेत्रवाद, भाषावाद में बंटे रहोगे, एक दिन ऐसा आएगा, तुम्हारी दिल्ली में तुम्हें मारा जाएगा। अगर तुम एक रहोगे, तो कोई तुम्हारा बाल बांका नहीं कर पाएगा। बागेश्वर ने बताया हिंदू राष्ट्र का मतलब धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि हम तो चाहते हैं कि भारत हिंदू राष्ट्र हो और इसलिए हो जब हिंदू राष्ट्र होगा तो गैर वाले आने के पहले भी विचार करेंगे। इतने लोगों की जिंदगी बर्बाद हो गई। जरा विचार करना हंसता खेलता परिवार उजड़ गया। कुछ लोगों के घर बसने से पहले ही परिवार बिखर गया। किस बात पर, सिर्फ इस बात पर कि वह हिंदू थे। ये दुर्भाग्य है हमारा और तुम्हारा। हमने तो अपने आप को बहुत कोस रहे हैं उस दिन से। हिंदुस्तान में रहकर भी जहां 80 प्रतिशत हिंदू हैं, वहां हिंदू होना गुनाह है। ये दुर्भाग्य है। हिंदुओं का हिंदुस्तान में होना दुर्भाग्य हो गया, क्यों? क्योंकि तुम बंटे हो। क्यों? क्योंकि तुम एकजुट नहीं हों, क्यों? क्योंकि तुम बहुत डरपोक हो, क्यों, क्योंकि तुमने शास्त्र भी छोड़ दिए और शस्त्र भी छोड़ दिए। जिस दिन तुम दोनों लेकर चलने लगोगे, तुम्हारा कोई बाल भी बांका नहीं कर पाएग। ‘कुछ लोगों को बड़ा मजा आ रहा है’ बागेश्वर बाबा ने आगे अभी भी भारत के कुछ लोगों को बड़ा मजा आ रहा है, अंदर ही अंदर बहुत खुश है। हिंदुओं पहलगाम की घटना के बाद हमने प्रण ले लिया, कि देश के कोने-कोने में पदयात्रा करके हिंदुओं को एकजुट करेंगे। दिल्ली से वृंदावन, हम अपने लिए थोड़े ही लड़ रहे है… अपने लिए थोड़े ही चिल्ला रहे है। हम अपने लिए ही थोड़े 18-18 घंटे मेहनत कर रहे हैं। हमारा तो क्या ही फायदा होगा। मगर, हिंदुओं ये तो पहलगाम की बात है, अभी भी पश्चिम बंगाल में देख लो, मुर्शिदाबाद में, हिंदू पलायन कर रहा है, और देश का एक भी मुसलमान नहीं बोल रहा है। ये दुर्भाग्य है, इसलिए एक ही उपाय है, हम हिंदुओं को भय त्याग कर एक होना पड़ेगा। भारत को हिंदू राष्ट्र बनाकर क्या करोगे? धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि अब आप पूछोगे की एक होकर करेंगे क्या? भारत को हिंदू राष्ट्र बनाएंगे। भारत को हिंदू राष्ट्र बनाकर क्या करोगे? भारत को हिंदू राष्ट्र बनाकर गाय को राष्ट्र माता बनाएंगे। भारत को हिंदू राष्ट्र बनाएंगे जिस दिन, उस दिन शास्त्र और शस्त्र दोनों की शिक्षा दी जाएगी। भारत को हिंदू राष्ट्र बनाकर करोगे क्या? रामचरित मानस को राष्ट्रीय ग्रंथ का दर्जा दिया जाएगा। भारत को हिंदू राष्ट्र बनाकर होगा क्या? राम के होने का सबूत नहीं मांगा जाएगा। और जो मांगेगा, वो भारत में होने का अधिकारी नहीं होगा। भारत अगर हिंदू राष्ट्र होगा तो कृष्ण जन्म भूमि के लिए कोर्ट में जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। अपने ही ठाकुर जी है। हां, कानून हाथ में नहीं लेंगे, प्रार्थना करेंगे, कि हमारे साक्ष्य है, यहां प्रभु प्रकट भए, तो बार-बार केस लड़ने की जरूरत क्या है, राम मंदिर का जीत ही गए है, इस पर भी जज साहब फैसला सुना दीजिए। भारत अगर हिंदू राष्ट्र बनेगा, एक प्रार्थना हम कर ले, हमें पक्का भरोसा है, जिस दिन भारत हिंदू राष्ट्र होगा, उस हिंदू होना अपराध नहीं, गौरव की बात होगी। भारत अगर हिंदू राष्ट्र होगा तो दंड प्रणाली वेदोप्त पद्धति से होगी, शास्त्रोप्त पद्धति से होगी। वंदे मातरम नहीं बोलने वाले- पंचर पुत्र धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि वंदेमातरम नहीं बोलने वालों और देश के खिलाफ हिंसा करने वालों पर निशाना साधते हुए कहा कि भारत का खाते हो, भारत की जमीन पर रहते हो, लेकिन भारत के लोगों को गोली मारते हो। ऐसे लोगों को जवाब देना होगा। उन्होंने आतंकवादियों को ‘पंचर पुत्र’ बताया। जनसंख्या वृद्धि पर दें ध्यान बाबा ने हिंदू समुदाय से अपील कि है कि जनसंख्या वृद्धि पर भी जोर दिया जाए। उन्होंने कहा कि हर हिंदू परिवार को चार बच्चे पैदा करने चाहिए। दो बच्चे कारोबार और परिवार को बढ़ाएंगे, और दो बच्चे हिंदू राष्ट्र के निर्माण के लिए समर्पित होंगे। उन्होंने मजाकिया लहजे में निशाना साधते हुए कहा कि वे तो क्रिकेट टीम बना रहे हैं, 11 खिलाड़ी और एक अंपायर, यानी 12 बच्चे। हम भी पीछे नहीं रह सकते। मैं हिंदू राष्ट्र बना दूंगा… बागेश्वर बाबा ने कहा कि तुम मेरा साथ दो, मैं तुम्हें हिंदू राष्ट्र दूंगा। उनके इस बयान ने सभा में मौजूद लोगों में जोश भर दिया, और ‘जय श्री राम’ के नारों से पूरा पंडाल गूंज उठा। उन्होंने हिंदू युवाओं से शास्त्रों के साथ-साथ आत्मरक्षा के लिए शस्त्र प्रशिक्षण लेने की भी अपील की। recent visitors 28

भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध किसी भी समय शुरू हो सकता है, रूस का आपात अलर्ट, हालात बेहद नाजुक

नई दिल्ली कश्मीर के पहलगाम में हाल ही में हुए भीषण आतंकवादी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव चरम पर पहुँच गया है। इस स्थिति को देखते हुए रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने रूस के नागरिकों और अधिकारियों को विशेष दिशा-निर्देश जारी किए हैं। पुतिन ने अपने नागरिकों से एहतियात बरतने और भारत-पाकिस्तान के बीच संभावित संघर्ष की स्थिति में सतर्क रहने को कहा है। रूस के विदेश मंत्रालय ने भी मास्को से एक आपात संदेश जारी करते हुए कहा है कि भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध "किसी भी समय" शुरू हो सकता है। मास्को ने दोनों देशों से संयम बरतने की अपील की है लेकिन साथ ही यह भी चेताया है कि हालात बेहद नाजुक हैं और किसी भी छोटे घटनाक्रम से बड़ा टकराव छिड़ सकता है। रूसी विदेश मंत्रालय ने 25 अप्रैल को अपने नागरिकों को पाकिस्तान की यात्रा से दूर रहने की सख्त सलाह दी है। आमतौर पर रूस इस तरह की चेतावनियां बहुत कम जारी करता है, जिससे इस कदम को सामान्य नहीं माना जा रहा। विश्लेषकों का मानना है कि रूस की खुफिया एजेंसियों को दक्षिण एशिया में किसी बड़े टकराव की आशंका है। रूस के बयान में भारत-पाकिस्तान के बीच "तेज होते तनाव" और "युद्ध जैसी भाषा" का उल्लेख किया गया है। पाकिस्तान स्थित रूसी दूतावास ने भी अपने नागरिकों को स्थिति के सामान्य होने तक पाकिस्तान यात्रा न करने की सलाह दी है। च रूस ने अपने राजनयिकों को भी सतर्क रहने का आदेश दिया है और कहा है कि दक्षिण एशिया में तैनात सभी रूसी मिशन स्थिति पर नजर बनाए रखें। रूसी राष्ट्रपति पुतिन का यह कदम वैश्विक मंच पर भारत के प्रति समर्थन का संकेत माना जा रहा है, जबकि पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार अलग-थलग पड़ता दिख रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर स्थिति नहीं संभाली गई, तो भारत और पाकिस्तान के बीच सीमित युद्ध या बड़ा सैन्य संघर्ष हो सकता है, जिसके वैश्विक प्रभाव भी होंगे। बता दें कि कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए आतंकवादी हमले में 25 भारतीय और एक नेपाली नागरिक की मौत हो गई थी। इसके बाद भारत सरकार ने पाकिस्तान के खिलाफ कई सख्त कूटनीतिक कदम उठाए, जिसमें अटारी सीमा पर इंटीग्रेटेड चेक पोस्ट बंद करना, सार्क वीज़ा छूट योजना (SVES) को पाकिस्तानी नागरिकों के लिए निलंबित करना, और सिंधु जल संधि को रोकने की प्रक्रिया शुरू करना शामिल है।   recent visitors 29