हाईकोर्ट ने सरकार ने मांगा जवाब,डकैत नहीं, फिर भी ग्वालियर-चंबल में डकैती एक्ट में 1000 से ज्यादा FIR

The High Court has asked the government to respond, stating that there are no dacoits, yet over 1,000 FIRs have been filed under the Dacoity Act in Gwalior-Chambal region. प्रतिनिधि: संतोष सिंह तोमर  ग्वालियर। जिस कानून को कभी ग्वालियर-चंबल के बीहड़ों में डकैतों के आतंक से निपटने के लिए बनाया गया था, उसकी आज की जरूरत पर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने ही सवाल उठा दिया है। पूर्व गृह मंत्री डॉ. गोविंद सिंह की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने सरकार से पूछा है कि जब प्रदेश में अब कोई सूचीबद्ध डकैत गिरोह सक्रिय नहीं है, तो मध्य प्रदेश डकैती एवं व्यपहरण प्रभावित क्षेत्र अधिनियम, 1981 को खत्म क्यों न कर दिया जाए। याचिका में दावा किया गया है कि वर्ष 2020 से 2026 के बीच ग्वालियर-चंबल संभाग के ग्वालियर, शिवपुरी, दतिया, भिंड, मुरैना और श्योपुर जिलों में इस विशेष कानून के तहत एक हजार से अधिक एफआईआर दर्ज की गईं। याचिकाकर्ता का आरोप है कि कई मामलों में सामान्य विवाद, जमीन-जायदाद के झगड़े और मारपीट जैसी घटनाओं में भी इस कानून की कठोर धाराएं जोड़ दी जाती हैं। हाई कोर्ट में उठा सवाल- जब डकैत गिरोह नहीं तो कानून क्यों? याचिका में कहा गया है कि 2020 से 2026 के बीच विधानसभा में तत्कालीन गृह मंत्री तीन अलग-अलग मौकों पर यह जानकारी दे चुके हैं कि प्रदेश में कोई सूचीबद्ध डकैत गिरोह सक्रिय नहीं है। इसके बावजूद इसी अवधि में ग्वालियर-चंबल के छह जिलों में इस कानून के तहत बड़ी संख्या में एफआईआर दर्ज होने का दावा किया गया है। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव शर्मा ने कोर्ट के समक्ष तर्क दिया कि जिस विशेष परिस्थिति से निपटने के लिए 1981 में यह कानून बनाया गया था, वह स्थिति अब समाप्त हो चुकी है। इसके बावजूद कानून का इस्तेमाल जारी रहना नागरिकों के समानता और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के मौलिक अधिकारों से जुड़े सवाल खड़े करता है। धारा 11 और 13 पर क्यों है आपत्ति? याचिका में अधिनियम की धारा 11 और 13 के इस्तेमाल पर विशेष आपत्ति जताई गई है। धारा 11 के तहत गिरफ्तारी के बाद हिरासत से जुड़े विशेष प्रावधान हैं और ऐसे मामलों में अग्रिम जमानत का प्रावधान नहीं है। धारा 13 दोषसिद्धि की स्थिति में न्यूनतम सजा का प्रावधान करती है, जो तीन वर्ष से कम नहीं हो सकती। याचिकाकर्ता का आरोप है कि आपसी रंजिश, जमीन विवाद या सामान्य मारपीट जैसे मामलों में भी इन धाराओं को जोड़ने से आरोपितों के लिए कानूनी राहत हासिल करना मुश्किल हो जाता है। खासतौर पर ग्रामीणों, किसानों और युवाओं के खिलाफ इसके इस्तेमाल को लेकर सवाल उठाए गए हैं। 1981 में क्यों बनाया गया था कानून? यह विशेष कानून वर्ष 1981 में उस दौर में लागू किया गया था, जब ग्वालियर-चंबल के बीहड़ों के अलावा सतना और पन्ना के जंगलों में डकैत गिरोह सक्रिय थे। अपहरण, डकैती और सामूहिक हत्याओं जैसी गंभीर वारदातों से निपटने के लिए सामान्य कानूनों से अलग कठोर प्रावधान किए गए थे। अब याचिका में यही सवाल उठाया गया है कि जब वह परिस्थितियां बदल चुकी हैं और प्रदेश में कोई सूचीबद्ध डकैत गिरोह सक्रिय नहीं है, तो इस विशेष कानून को बनाए रखने का औचित्य क्या है। सरकार से चार सप्ताह में जवाब हाई कोर्ट ने मामले में गृह विभाग के प्रमुख सचिव, पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) और ग्वालियर, शिवपुरी, दतिया, भिंड, मुरैना व श्योपुर के पुलिस अधीक्षकों को कारण बताओ नोटिस जारी किए हैं। सभी से चार सप्ताह में जवाब मांगा गया है। सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से शासकीय अधिवक्ता धर्मेंद्र शर्मा ने बताया कि इस अधिनियम के तहत दर्ज मामलों की सुनवाई विशेष न्यायालय में होती है। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि पिछले कई वर्षों से जंगल या बीहड़ क्षेत्र में कोई सूचीबद्ध डकैत गिरोह सक्रिय नहीं है। recent visitors 32

विमान दुर्घटना के दिवंगत यात्रियों की आत्मा की शांति के लिए भगवान चक्रधर से की प्रार्थना

विमान दुर्घटना के दिवंगत यात्रियों की आत्मा की शांति के लिए भगवान चक्रधर से की प्रार्थना

Prayers were offered to Lord Chakradhar for the peace of the souls of the deceased passengers of the plane crash ग्वालियर। श्री सनातन धर्म मंडल में आज अहमदाबाद में हुई एयर इंडिया की भीषण दुर्घटना में दिवंगत यात्रियों की आत्मा की शांति हेतु भगवान श्री चक्रधर के चरणों में प्रार्थना की गई। मण्डल के अध्यक्ष विजय गोयल, प्रधानमंत्री रमेश चंद्र गोयल लल्ला, कोषाध्यक्ष राकेश बंसल, धर्म मंत्री रविन्द्र चौबे ने कहा कि अहमदाबाद में घटित भीषण हृदयविदारक विमान हादसे से सभी स्तब्ध, निःशब्द और दुखित है। ऐसे हादसों पर विश्लेषण से ज्यादा विलाप स्वीकार्य होता है। आधुनिकीकरण और वैज्ञानिक अनुसंधान भी ईश्वरीय प्राकृतिक प्रकोप के आगे निस्सहाय साबित हुए। ईश्वर मृतको को सद्गति और परिजनों को संबल प्रदान करें। ऐसे दुःखद घटनाक्रम पर अभिव्यक्ति के लिए शब्द एवं भाव भी अपर्याप्त हो जाते है। मृत्यु शाश्वत सत्य है परंतु इस तरह जाना या जाते हुए अपनों को देखना अकल्पनीय है। गोयल ने कहा कि सनातन धर्म मंडल परिवार की संवेदनाएं इस दुख की घड़ी में सभी पीड़ित परिवारों के साथ हैं। recent visitors 108

सभी गेहूं खरीदी केंद्रों पर शीतल पेय पदार्थ भी किसानों को उपलब्ध कराए जा रहे

भोपाल मध्य प्रदेश में इस समय गेहू खरीदी की जा रही है, उपार्जन केंद्रों पर किसानों से सरकार के प्रतिनिधि गेहूं खरीद रहे हैं, अब तक सरकार ने 6 लाख से अधिक किसानों से 56 लाख मीट्रिक टन से अधिक गेहूं खरीद लिया है और अभी तक लगभग 4000 करोड़ रुपये का भुगतान भी किसानों को किया जा चुका है। खरीदी केंद्रों पर किसानों के लिए बेहतर व्यवस्थाएं की गई हैं जिससे उन्हें कोई परेशानी ना ही इतना ही नहीं  किसानों का स्वागत भी वेलकम ड्रिंक्स से किया जा रहा है। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने बताया है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP)  पर मध्य प्रदेश में अभी तक 6 लाख 44 हजार 878 किसानों से 56 लाख 85 हजार 477 मीट्रिक टन गेहूं का उपार्जन किया जा चुका है। उन्होंने बताया कि किसानों को उपार्जित गेहूं का भुगतान भी लगातार किया जा रहा है। अभी तक लगभग 4000 करोड़ रुपये का भुगतान किसानों को किया जा चुका है। खाद्य मंत्री ने बताया कि गेहूं  का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2425 रुपये है और मध्य प्रदेश सरकार द्वारा 175 रुपये प्रति क्विंटल इस पर बोनस दिया जा रहा है। इस तरह से गेहूं की खरीदी 2600 रुपये प्रति क्विंटल की दर से की जा रही है। किसान गेहूं उपार्जन के लिये 30 अप्रैल तक स्लाट बुक करा सकते हैं। प्रदेश के कई जिलों में लू जैसे हालात प्रदेश में गर्मी बहुत तेज पड़ रही है, कई जिलों में लू जैसे हालत हैं मौसम विभाग ने अलर्ट जारी किये हैं मौसम को देखते हुए गेहूं उपार्जन केंद्रों पर सरकार के निर्देश पर किसानों के लिए ठंडा पानी, कूलर, छायादार बैठने की जगह की व्यवस्था सहित अन्य व्यवस्था दी जा रही हैं, ग्वालियर जिले में तो किसानों का विशेष ध्यान रखा जा रहा है। किसानों का स्वागत नींबू की शिकंजी, ओआरएस व शरबत से ग्वालियर में बढ़ते हुए तापमान को ध्यान में रखकर जिले के उपार्जन केंद्रों पर किसानों और हम्मालों को शीतल जल के साथ-साथ वैलकम ड्रिंक के रूप में नींबू की शिकंजी, ओआरएस व शरबत जैसे पेय पदार्थ उपलब्ध कराए जा रहे हैं। शुक्रवार को हरि लीला विपणन संस्था घाटीगाँव द्वारा संचालित उपार्जन केंद्र  एवं मोहना स्थित खरीदी केंद्र पर किसानों व हम्माल भाईयों को शरबत पिलाया गया। उपार्जन केंद्रों पर हुए स्वागत व अच्छी व्यवस्थायें पाए जाने पर किसानों ने सरकार के प्रति धन्यवाद जताया। उपार्जन केंद्रों पर किसानों का विशेष ध्यान कलेक्टर रुचिका चौहान ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि किसानों को उपार्जन केंद्र पर अपनी उपज बेचने में कोई दिक्कत नहीं आनी चाहिए। सभी केंद्रों पर शीतल पेयजल व छाया सहित अन्य बुनियादी सुविधायें भी पुख्ता रहें। इसी कड़ी में अत्यधिक गर्मी को ध्यान में रखकर सभी खरीदी केंद्रों पर ओआरएस की व्यवस्था की गई है। साथ ही सुविधा के अनुसार अन्य शीतल पेय पदार्थ भी किसानों को उपलब्ध कराए जा रहे हैं। अब तक की गई गेहूं खरीदी शासन द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी के मुताबिक प्रदेश में अभी तक सीहोर में 6 लाख 9 हजार 192 मीट्रिक टन , उज्जैन में 5 लाख 98 हजार 610, विदिशा में 4 लाख 63 हजार 658, रायसेन में 4 लाख 63 हजार 338, शाजापुर में 3 लाख 26 हजार 19, भोपाल में 3 लाख 12 हजार 598, राजगढ़ में 3 लाख 01 हजार 900, देवास में 2 लाख 64 हजार 84, नर्मदापुरम में 2 लाख 61 हजार 47, इंदौर में 2 लाख 16 हजार 494, सागर में 1 लाख 97 हजार 658, आगर मालवा में 1 लाख 64 हजार 280, सिवनी में 1 लाख 57 हजार 254, मंदसौर में 1 लाख 44 हजार 379, हरदा में 1 लाख 3 हजार 663, रतलाम में 86 हजार 565, दमोह में 85 हजार 705, नरसिंहपुर में 74 हजार 855 मीट्रिक टन गेहूं की खरीदी की जा चुकी है। इन जिलों में भी जारी है गेहूं उपार्जन इसी तरह श्योपुर में 50 हजार 190 मीट्रिक टन, दतिया में 46 हजार 310, शिवपुरी में 42 हजार 812, खण्डवा में 40 हजार 149, छतरपुर में 36 हजार 501, ग्वालियर में 35 हजार 229, कटनी में 34 हजार 48, गुना में 33 हजार 200, रीवा में 31 हजार 689, जबलपुर में 30 हजार 940, अशोकनगर में 30 हजार 876, नीमच में 30 हजार 241, पन्ना में 29 हजार 433, मण्डला में 29 हजार 340, भिण्ड में 26 हजार 204, बैतूल में 21 हजार 442, झाबुआ में 21 हजार 195, मैहर में 19 हजार 643, छिन्दवाड़ा में 17 हजार 896, मुरैना में 15 हजार 60, टीकमगढ़ में 8 हजार 628, शहडोल में 2 हजार 943, खरगौन में 2595, निवाड़ी में 1557, सिंगरौली में 1370, उमरिया में 1360, डिण्डोरी में 1254, मऊगंज में 1227, सीधी 874, बालाघाट में 636, अनूपपुर में 463 अलीराजपुर 214 और पांढुर्णा में 44 मीट्रिक टन गेहूं का उपार्जन किया जा चुका है। recent visitors 90

प्रदेश में चिकनगुनिया का खौफ बरकरार, दिन में 142 मरीज हो चुके शिकार

शहर में चिकनगुनिया बेकाबू हो रहा है। मरीजों की संया लगातार बढ़ती जा रही है। शहर में एक साथ चिकनगुनिया के मरीज बढ़ने के बाद इसके वैरिएंट का पता लगाने के लिए जीआरएमसी के माइक्रो बायोलॉजी विभाग द्वारा 20 सैंपल पुणे भेजे हैं। इन वैरिएंट के माध्यम से पता चलेगा कि आखिर यह कैसे एक साथ बढ़े। ग्वालियर ! चिकनगुनिया(Chikungunya Alert) के मरीजों की भरमार के चलते यह संया 142 तक पहुंच गई है। चिकनगुनिया के सबसे ज्यादा मरीज वार्ड 19 के पुष्कर कॉलोनी में सामने आए हैं। इसमें छह दिनों में ही 55 तक मरीज पहुंच गए हैं। इसके बावजूद भी आसपास के क्षेत्रों में भी मरीजों को चिकनगुनिया की समस्या बनी हुई है। पिछले चार दिनों से लगातार स्वास्थ्य विभाग की टीम यहां पर मरीजों की जांच कर रही है, जिससे ज्यादातर मरीजों को समय पर उपचार भी मिलने लगा है। वहीं चिकनगुनिया की रोकथाम के लिए पुष्कर कॉलोनी के पार्क में शनिवार को निशुल्क होयोपैथिक चिकित्सा शिविर का आयोजन किया जाएगा। यह शिविार दोपहर 2 बजे से शाम 4.30 बजे तक लगेगा। शुक्रवार को 74 सैंपल की जांच में 17 लोगों को चिकनगुनिया की पुष्टि हुई है। इसमें वार्ड 55 में रहने वाले 4 वर्षीय बच्चे के साथ वार्ड 19 के नाना नगर में रहने वाले 63 वर्षीय व्यक्ति को भी चिकनगुनिया(Chikungunya Alert) की पुष्टि हुई है। इसके साथ ही तारागंज, साईं कॉलोनी, मामा का बाजार, लोहा मंडी, आपागंज, गोले का मंदिर, ज्योति नगर, काशीपुरा मुरार, धर्मवीर पेट्रोल पंप के पास , सुरेश नगर, कोटेश्वर आदि क्षेत्र में मरीज सामने आए। दिसंबर के महीने में डेंगू के मरीजों की संया न के बराबर आ गई है। वहीं चिकनगुनिया(Chikungunya Alert) ने पैर पसार रखे हैं। हालात यह हो गए कि दिसंबर के छह दिन में डेंगू के मरीज घटकर सिर्फ 15 आए हैं।डॉ अजयपाल सिंह, मेडिसिन विभाग जीआरएमसी, इन दिनों डेंगू के मरीज काफी कम हो गए है। वहीं चिकनगुनिया तेजी से फैल रहा है। इसमें बुखार के साथ दर्द काफी परेशान कर रहा है। हालात यह हैं कि बच्चे 15 दिन में तो बुजुर्ग को दो से तीन महीने तक का समय लग रहा है। इस समय चिकनगुनिया से पीड़ित ओपीडी में भी ज्यादा पहुंच रहे हैं। recent visitors 131

‘पीले-पीले ओ मोरे राजा…’, शराब के लिए भिड़ गए दोस्त, बीच सड़क चले लात-घूंसे

‘Pile-Pile O More Raja…’, friends fought over liquor, kicked and punched in the middle of the road, ग्वालियर। आपने एक गाना ‘पीले-पीले ओ मोरे राजा, पीले-पीले ओर मोरे जानी, यार की यारी है निभानी…”, जरूर सुना होगा। इस गाने में जाम छलकाते हुए दो दोस्त झूमते रहते हैं। लेकिन मध्य प्रदेश के ग्वालियर में शराब का एक पैग, यारों के बीच मारपीट की वजह बन गया। हालात यह हो गए कि बीच सड़क पर लात-घूंसे चलने लगे। मामला फूल बाग स्थित शराब दुकान के बाहर का है। जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है। दोस्त का पैग पीने पर चले लात-घूंसेदरअसल, इन दिनों शादियों का सीजन चल रहा है। ऐसे में दावत उड़ाने से पहले जमकर शराब के जाम भी छलकाए जा रहे हैं। ऐसी ही एक शादी में शामिल होने से पहले आधा दर्जन से अधिक दोस्तों ने शराब खरीदी और फिर दुकान के पास ही खड़े होकर जाम छलकाए। इस दौरान उनमें से एक ने ‘पीले-पीले ओ मोरे राजा…’ फिल्मी गाना लगाकर जमकर शराब पी। तभी एक दोस्त ने नशे में धुत हो चुके दूसरे दोस्त के ग्लास में भरा हुआ पैग पी लिया। यह देखकर उसका शराबी दोस्त आग-बबूला हो गया और साथी से मारपीट शुरू कर दी। देखते ही देखते विवाद दो गुटों में तब्दील हो गया और एक-दूसरे पर लात-घूंसे बरसाने लगे। खुलेआम शराबखोरी की तस्वीर हुई उजागर वायरल वीडियो को देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि शराब के नशे में युवक इतने धुत हो चुके थे कि ठीक से चल भी नहीं पा रहे थे। बहरहाल, इस घटना के बाद एक बार फिर शराब दुकानों के पास खुलेआम शराबखोरी की काली तस्वीर उजागर हुई है। recent visitors 316