मध्यप्रदेश में गेहूं की MSP पर खरीदी जारी, सीहोर ने नया रिकॉर्ड बनाया, अभी तक 5 लाख 29 हजार 482 टन की हुई खरीदी

 सीहोर   समर्थन मूल्य केंद्रों पर इस साल किसानों की गेहूं बेचने की होड़ लगी हुई है। एक माह की खरीदी में ही इस बार सीहोर ने नया रिकॉर्ड बना दिया है। पिछले साल पूरे सीजन में 5 लाख 6 हजार 40 टन गेहूं खरीदा गया था। इस बार सिर्फ एक महीने में 5 लाख 29 हजार 482 टन की खरीदी हो चुकी है। इस तरह सीहोर प्रदेश में सबसे आगे निकल गया है, जबकि उज्जैन 4 लाख 68 हजार टन के साथ दूसरे नंबर पर है। इस सीजन में किसान बड़ी संख्या में समर्थन मूल्य पर गेहूं बेचने आ रहे हैं। इस बार मौसम अनुकूल रहा। फसल की बुवाई से लेकर कटाई तक बारिश ने साथ दिया। कटाई के समय मौसम साफ रहा। इससे फसल की निकासी में कोई रुकावट नहीं आई। किसानों को उपज का भुगतान भी 3 से 7 दिन में मिल रहा है। साथ ही 175 रुपये प्रति क्विंटल बोनस भी मिल रहा है। इसके अलावा खुले बाजार और मंडी में गेहूं के दाम कम है। इसके कारण किसान अपनी उपज समर्थन मूल्य केंद्रों पर ले जा रहे हैं। समर्थन केंद्रों पर किसानों की उपज बेचने भीड़ कम होने का नाम नहीं ले रही है। जिले में 820 करोड़ रुपये का हो चुका भुगतान इस सीजन में 15 मार्च से खरीदी शुरू हुई थी। 15 अप्रैल तक 5 लाख 29 हजार टन गेहूं खरीदा जा चुका है। पिछले साल खरीदी 20 मार्च से शुरू होकर 31 मई तक चली थी। इस बार 5 मई तक ही खरीदी होनी है। यानी कुल 51 दिन का समय मिलेगा। इसके बावजूद अगले 20 दिन में 1.25 लाख से 1.50 लाख टन गेहूं और खरीदे जाने की उम्मीद है। अब तक जिले में 4 लाख 22 हजार टन गेहूं की खरीदी हो चुकी है। किसानों को 820 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है। पूरे सीजन में अब तक 1376 करोड़ की खरीदी हो चुकी है। इसमें से 1203 करोड़ के ईपीओ जनरेट हो चुके हैं। किसानों के खातों में 1192 करोड़ रुपये पहुंच चुके हैं। 61 हजार 296 किसान बेच चुके अपनी उपज इस बार 88 हजार 292 किसानों ने पंजीयन कराया है। इनमें से 61 हजार 296 किसान अब तक अपनी उपज बेच चुके हैं। जिले में 240 खरीदी केंद्र बनाए गए हैं। शुरुआत में ही 140 केंद्रों पर खरीदी शुरू कर दी गई थी। पिछले साल की तुलना में इस बार खरीदी 5 दिन पहले शुरू हुई। मंडी में इस बार गेहूं के भाव कम हैं। मिल क्वालिटी गेहूं 200 से 300 रुपए प्रति क्विंटल कम दाम में बिक रहा है। जबकि समर्थन मूल्य पर ज्यादा दाम मिल मिल रहे रहे हैं। इसलिए किसान मंडी की बजाय खरीदी केंद्रों पर गेहूं बेच रहे हैं। भुगतान की व्यवस्था भी बेहतर हुई है। पिछले साल 10 से 15 दिन में भुगतान होता था। इस बार 3 से 7 दिन में पैसा मिल रहा है। यही वजह है कि इस बार खरीदी में रिकॉर्ड बना है। गेहूं खरीदी में सीहोर नंबर 1 इस संबंध में जिला खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के आकाश चंदेल ने बताया कि गेहूं खरीदी में सीजन में अभी तक सीहोर नंबर वन पर है। इस साल अभी तक 5 लाख 29 हजार मेट्रिक टन गेहूं की खरीदी हो चुकी है।   recent visitors 40

मुखिया मोहन यादव ने लिखा कि गर्मी का मौसम,अपनों के साथ,लस्सी का स्वाद…

नीमच गर्मी का मौसम हो और ठंडी-ठंडी लस्सी मिल जाए तो क्या ही कहने। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने आज नीमच में भाजपा कार्यकर्ताओं के साथ एक दुकान पर लस्सी का स्वाद लिया। इसका वीडियो खुद सीएम ने अपने एक्स हैंडल पर डाला है। आज मोहन यादव सीआरपीएफ के स्थापना दिवस के मौके पर नीमच आए थे। यहां उन्होंने इस अवसर पर आयोजित एक खास कार्यक्रम में भाग लिया। मोहन यादव के अलावा देश के गृह मंत्री अमित शाह भी थे। मध्य प्रदेश के मुखिया मोहन यादव ने लिखा कि गर्मी का मौसम,अपनों के साथ,लस्सी का स्वाद…आज नीमच प्रवास के दौरान कार्यकर्ता बंधुओं के साथ लस्सी का आनंद लिया। इसके साथ उन्होंने अपने आधिकारिक एक्स हैंडल पर एक 46 सेकेंड का वीडियो भी डाला है। मोहन यादव के इस वीडियो पर लोगों ने भी अलग-अलग कॉमेंट किए हैं। एक एक्स यूजर ने लिखा कि बहुत बढ़िया आपका व्यवहार बड़ा सरल स्वभाव का है। दूसरे ने लिखा कि आप की ड्रेस तथा जैकेट एकदम से मैचिंग है..शॉप की अम्बिएंस के साथ।आप का चाहने वाला बिहार से। इससे पहले आज नीमच में 86वें केंद्रीय रिजर्व पुलिस फोर्स के स्थापना दिवस पर कार्यक्रम आयोजि हुआ था। इसमें केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी शिरकत की थी। मोहन यादव ने सीआरपीएफ जवानों के सम्मान में लिखा कि CRPF के जवानों के हौसले ने हृदय को गर्व से भर दिया…नीमच की धरती पर 86वें केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल दिवस परेड समारोह में शामिल होकर हमारे वीर जवानों के अदम्य साहस,समर्पण और राष्ट्रभक्ति को नमन किया। recent visitors 35

दिग्विजय सिंह ने स्वीकार ही किया कि बाबरी मस्जिद कांड के बाद दंगा फसाद उन्हीं ने कराया:मंत्री सारंग

भोपाल खेल एवं सहकारिता मंत्री विश्वास सारंग ने पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह का एक वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किया, जिसमें दिग्विजय सिंह बाबरी मस्जिद के गिरने के बाद हुए दंगे के बारे में बात कर रहे थे। 1 मिनट 12 सेकेंड के वीडियो में पूर्व सीएम कह रहे हैं ऐसे अनेक मेरे पास उदाहरण हैं, जब बाबरी मस्जिद शहीद हुई थी उस समय मैं प्रदेश कांग्रेस का अध्यक्ष था, भोपाल शहर में 1947 में भी दंगा नहीं हुआ लेकिन बाबरी मस्जिद गिरने पर दंगा हुआ। लगभग दो हफ्ते तक मैंने प्रदेश कांग्रेस कमेटी के दफ्तर में रात बिताई। मैं घर नहीं जाता था। लेकिन हमने दंगा फसाद होने में पूरी कोशिश की। पूर्व मुख्यमंत्री ने बाबरी मस्जिद के संदर्भ में आगे कहा कि भोपाल में एक काजी कैम्प है, जहां सलामत सिद्दीकी नामक पार्षद ने उन्हें बताया था कि पुलिस की वर्दी में लोग रात के समय उनके घर आए थे। गोलीबारी होती है, और गरीब के बच्चे मारे जाते हैं बुधवार को शाजापुर में नेशनल हेराल्ड मामले को लेकर हुए प्रदर्शन में शामिल होने पहुंचे दिग्विजय सिंह ने शाजापुर शहर के चोबदारवाड़ी में मुस्लिम समुदाय के सद्भावना सम्मेलन में भाग लिया। इस दौरान उन्होंने कहा, "कई बार शिकायत करने के बाद भी पुलिस प्रकरण दर्ज नहीं करती है, वहीं दूसरी तरफ झूठी शिकायतें दर्ज की जाती हैं। जब लोगों पर अत्याचार बढ़ जाता है, तो गुस्से के कारण विवाद की स्थिति उत्पन्न होती है।" दिग्विजय ने आगे कहा, "दंगे में गरीबों के बच्चे शामिल होते हैं, बड़े नेताओं के बच्चे नहीं। पुलिस के डंडे चलते हैं, गोलीबारी होती है, और गरीब के बच्चे मारे जाते हैं।" कांग्रेस ने इस देश में दंगा फसाद कराने का काम किया इस वीडियो को शेयर करते हुए खेल मंत्री विश्वास सारंग ने कहा, "दिग्विजय सिंह ने स्वीकार ही किया कि बाबरी मस्जिद कांड के बाद दंगा फसाद उन्हीं ने कराया। वह स्वयं कह रहे हैं कि बाबरी मस्जिद शहीद हुई और उसके बाद कांग्रेस अध्यक्ष रहते हुए दंगा फसाद कराया।" सारंग ने आगे कहा, "यह बयान साफ करता है कि कांग्रेस ने इस देश में दंगा फसाद कराने का काम किया है। दिग्विजय सिंह ने खुद कबूल किया है कि दंगे उन्होंने कराए थे।" दिग्विजय बोले- बयान तोड़-मरोड़ कर पेश किया पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने अपने बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनका बयान तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया है और बीजेपी इसे गलत तरीके से प्रचारित कर रही है। उन्होंने कहा, "मैंने कहा था कि जब प्रदेश में सांप्रदायिक तनाव था, तब मैंने 15 दिन कांग्रेस के पीसीसी दफ्तर में रहकर हिंदू और मुस्लिम समाज के बीच समन्वय की कोशिश की थी ताकि दंगा-फसाद न हो।" साथ ही दिग्विजय ने बाबरी मस्जिद के गिरने को लेकर कहा, "अगर आप जबरन किसी धार्मिक स्थल को गिराएंगे, तो लोग क्या कहेंगे? जो सच है, वही बोला।" recent visitors 41

सुप्रीम कोर्ट ने नए वक्फ कानून पर फिलहाल रोक से इनकार किया, वक्फ परिषद और बोर्डों में कोई नियुक्ति नहीं

नई दिल्ली  नए वक्फ कानून के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने लगातार दूसरे दिन सुनवाई हुई। इस दौरान सर्वोच्च अदालत ने वक्फ कानून पर फिलहाल स्टे नहीं लगाया है। सुप्रीम कोर्ट ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के इस बयान को रिकॉर्ड में लिया कि केंद्र सात दिनों के भीतर जवाब देगा। शीर्ष अदालत ने कहा कि सॉलिसिटर जनरल ने कोर्ट को आश्वासन दिया कि काउंसिल और बोर्ड को कोई नियुक्ति नहीं की जाएगी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सॉलिसिटर जनरल ने आश्वासन दिया कि अगली सुनवाई की तारीख तक, वक्फ, जिसमें पहले से पंजीकृत या अधिसूचना के माध्यम से घोषित वक्फ शामिल हैं। उनको न तो डीनोटिफाई किया जाएगा और न ही कलेक्टर को बदला जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि केंद्र को सात दिनों के भीतर जवाब दाखिल करना चाहिए। वक्फ कानून पर SC ने नहीं लगाई रोक वक्फ संशोधन अधिनियम पर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर एडवोकेट बरुण कुमार सिन्हा ने कहा, 'सुप्रीम कोर्ट ने वक्फ कानून पर रोक नहीं लगाई है। भारत के सॉलिसिटर जनरल ने कहा है कि नए संशोधन अधिनियम के तहत परिषद या बोर्ड में कोई नियुक्ति नहीं की जाएगी। सुप्रीम कोर्ट ने आदेश में लिखा है कि सरकार अगली तारीख तक उन संपत्तियों (वक्फ-बाय-यूजर) को डी-नोटिफाई नहीं करेगी जो रजिस्टर्ड और गजटेड हैं। हालांकि, सरकार अन्य संपत्तियों पर कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र है। ओवैसी बोले- हम इस एक्ट को असंवैधानिक मानते हैं अधिवक्ता बरुण सिन्हा ने आगे कहा कि केंद्र ने कोर्ट से कहा कि आप संसद की ओर से पारित कानून पर रोक नहीं लगा सकते और केंद्र रोजाना सुनवाई के लिए तैयार है। इस मुद्दे को अब 5 मई के लिए लिस्ट किया गया है और उसी दिन सुनवाई शुरू होगी। वहीं सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई पर एआईएमआईएम चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने रिएक्ट किया। उन्होंने कहा कि हम इस एक्ट को असंवैधानिक मानते हैं। 'इस एक्ट के खिलाफ कानूनी लड़ाई जारी रहेगी' ओवैसी ने आगे कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने भी कहा है कि सेंट्रल वक्फ काउंसिल और स्टेट वक्फ काउंसिल का गठन नहीं किया जाएगा। 'वक्फ बाय यूजर' को हटाया नहीं जा सकता। जेपीसी की चर्चा के दौरान मैंने सरकार की ओर से प्रस्तावित सभी संशोधनों का विरोध करते हुए एक रिपोर्ट दी थी और बिल पर बहस के दौरान मैंने बिल को असंवैधानिक बताया था। इस एक्ट के खिलाफ हमारी कानूनी लड़ाई जारी रहेगी। वक्फ कानून पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी बड़ी बातें     सुप्रीम कोर्ट ने वक्फ कानून की संवैधानिक वैधता के खिलाफ दायर याचिकाओं पर जवाब देने के लिए केंद्र सरकार को सात दिन का समय दिया।     सर्वोंच्च अदालत ने कहा कि इस बीच केंद्रीय वक्फ परिषद और बोर्डों में कोई नियुक्ति नहीं होनी चाहिए।     केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट से एक सप्ताह का समय मांगा था, जिसके बाद अदालत ने उन्हें वक्त दिया।     शीर्ष कोर्ट ने कहा कि मामले में इतनी सारी याचिकाओं पर विचार करना असंभव, केवल पांच पर ही सुनवाई होगी।     याचिकाओं पर सुनवाई के दूसरे दिन प्रधान न्यायाधीश संजीव खन्ना ने कहा कि अगर किसी वक्फ संपत्ति का रजिस्ट्रेशन 1995 के अधिनियम के तहत हुआ है तो उन संपत्तियों को नहीं छेड़ा जा सकता।     केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को आश्वासन दिया कि वह अगली सुनवाई तक 'वक्फ बाय डीड' और 'वक्फ बाय यूजर' को गैर-अधिसूचित नहीं करेगा।     सुनवाई के बाद उच्चतम न्यायालय ने वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 की वैधता के खिलाफ याचिकाओं पर सुनवाई के लिए पांच मई की तारीख तय की। सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम आदेश में और क्या-क्या कहा?     सुप्रीम कोर्ट ने अपने अंतरिम आदेश में कहा कि वक्फ बाय यूजर में बदलाव नहीं किया जाएगा। सात दिनों में सरकार जवाब दाखिल करें।     जवाब तक वक्फ संपत्ति की स्थिति नहीं बदलेगी। अगली सुनवाई तक यथास्थिति बनी रहेगी।     सरकार फिलहाल कोई नियुक्ति नहीं होगी। ना कोई नया बोर्ड बनेगा, ना काउंसिल बनेगी।     एसजी तुषार मेहता ने आश्वासन दिया है कि अगली सुनवाई तक संशोधित कानून के तहत कोई नियुक्ति या बोर्ड नहीं गठित किया जाएगा।     केंद्र सरकार ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट अंतरिम आदेश जारी करने से पहले विचार करे कि इसका परिणाम क्या होगा। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार की इस दलील को ठुकरा दिया।     एसजी तुषार मेहता ने आश्वासन दिया है कि अगली सुनवाई तक संशोधित कानून के तहत कोई नियुक्ति या बोर्ड नहीं गठित किया जाएगा।     सीजेआई संजीव खन्ना ने कहा कि सुनवाई के दौरान एसजी तुषार मेहता ने कहा कि प्रतिवादी सरकार 7 दिनों के भीतर एक संक्षिप्त जवाब दाखिल करना चाहते हैं और आश्वासन दिया कि अगली तारीख तक 2025 अधिनियम के तहत बोर्ड और परिषदों में कोई नियुक्ति नहीं होगी।     उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि अधिसूचना या राजपत्रित द्वारा पहले से घोषित उपयोगकर्ता द्वारा वक्फ सहित वक्फ की स्थिति में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा।     जवाब 7 दिनों के भीतर दाखिल किया जाना चाहिए। उस पर प्रतिउत्तर अगले 5 दिनों के भीतर दाखिल किया जाना चाहिए।     सीजेआई ने कहा कि अगली सुनवाई से केवल 5 रिट याचिकाकर्ता ही न्यायालय में उपस्थित होंगे। हम यहां केवल 5 ही चाहते हैं। आप 5 का चयन करें। अन्य को या तो आवेदन के रूप में माना जाएगा या निपटाया जाएगा। हम नाम का उल्लेख नहीं करेंगे। अब इसे कहा जाएगा- इन री: वक्फ संशोधन अधिनियम मामला   recent visitors 34

यूपी के मजदूरों के भरोसे तमिलनाडु की इंडस्ट्री, आज पूरी दुनिया की इकॉनमी सस्ते श्रम के भरोसे ही : अन्नामलाई

 चेन्नई तमिलनाडु की डीएमके सरकार नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत तीन भाषा नीति, जनसंख्या के आधार पर परिसीमन आदि का विरोध कर रही है. तमिलनाडु सीएम स्टालिन ने बीते दिनों अपने एक बयान में कहा था कि दक्षिणी राज्यों को जनसंख्या नियंत्रित करने के लिए दंडित नहीं किया जाना चाहिए. उनका आरोप रहा है कि अगर परिसीमन जनसंख्या के आधार पर हुआ तो इससे दक्षिणी राज्यों में लोकसभा की सीटें घट जाएंगी और संसद में उनका राजनीतिक प्रतिनिधित्व घटेगा. अब तो तमिलनाडु के मुख्यमंत्री ने स्वायत्तता का राग अलापना भी शुरू किया है. दरअसल स्टालिन ही नहीं दक्षिण के राज्यों को यूपी से बहुत दिक्कत रही है. पिछले महीने तो स्टालिन ने यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ तक को निशाने पर ले लिया. दरअसल तमिलनाडु में हिंदी विरोध के पीछे एक अहसास यह है कि यह पिछड़े और गरीब लोगों की भाषा है. अगर ऐसा नहीं होता तो विदेशी भाषा होते हुए भी अंग्रेजी को क्यों सम्मान मिलता? पर उल्लेखनीय यह भी है कि तमिलनाडु के बीजेपी नेता और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अन्नामलाई को हिंदी और हिंदी भाषी प्रदेशों से कोई दिक्कत नहीं है. वो अपने राज्य में ही तर्क देकर यह बताते हैं कि जब से केंद्र में बीजेपी की सरकार बन गई है तब से दक्षिण के राज्यों को केंद्र से मिलने वाले अनुदान में आनुपातिक बढ़ोतरी हुई है. इतना ही नहीं वो दक्षिण के राज्यों विशेषकर तमिलनाडु को आगाह करते हैं कि यूपी को जगाओ मत ,अगर यह राज्य जग गया तो दक्षिण की छुट्टी हो जाएगी.  योगी को क्यों निशाने पर लिया स्टालिन ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में लिखा कि 'तमिलनाडु की भाषा नीति और निष्पक्ष परिसीमन की मांग आज पूरे देश में गूंज रही है. भाजपा इससे परेशान है, जो उनके नेताओं के इंटरव्यू से पता चलता है. अब माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हमें नफरत पर भाषण देना चाहते हैं? हमें बख्श दीजिए. ये तो राजनीतिक कॉमेडी हो गई.' इसके बाद स्टालिन ने योगी आदित्यनाथ के आरोपों पर सफाई देते हुए कहा कि 'हम किसी भाषा का विरोध नहीं कर रहे हैं बल्कि हम थोपने और अंधराष्ट्रीयता का विरोध कर रहे हैं. यह वोट बैंक की राजनीति नहीं है बल्कि ये न्याय और स्वाभिमान की लड़ाई है. दरअसल योगी ने तमिलनाडु में भाषा नीति और परिसीमन के विरोध को लेकर बयान दिया था. योगी आदित्यनाथ ने भाषा विवाद को छोटी राजनीतिक सोच करार दिया. उन्होंने कहा कि स्टालिन धर्म और भाषा के आधार पर बांटने की कोशिश कर रहे हैं क्योंकि उनका वोटबैंक खिसक रहा है. योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भाषा को लोगों को एकजुट करना चाहिए न कि बांटना चाहिए. उन्होंने लोगों को भी बांटने वाली राजनीति से सावधान रहने की सलाह दी थी. अन्नामलाई के तर्क अन्नामलाई पिछले साल एक उत्तर भारत बनाम दक्षिण भारत को लेकर हुए एक डिबेट में तर्कों की झड़ी लगा दी थी. वो बताते हैं कि केंद्र से मिलने वाली राज्यों की मदद के बंटवारे का जो फार्मूला इंदिरा गांधी के समय लाया गया उसमें जनसंख्या का आधार 50 प्रतिशत रखा गया. अन्नामलाई समझाते हैं कि अगर 100 रुपये केंद्र को राज्यों को बांटने थे उसमें स 50 रुपये का आधार जनसंख्या होने के चलते उत्तर के राज्यों को फायदा मिलता था. बाद में जनसंख्या का बेस और बढ़ा. पर आज बीजेपी के राज में यह कम होकर केवल 15 परसेंट हो गया है. यानि केंद्र सरकार से मिलने वाली राशि के बंटवारे का फायदा अब अधिक जनसंख्या वाले राज्यों को नहीं मिलता है. इसके साथ ही 45 परसेंट आधार अमीर और गरीब राज्यों के लिए बराबर हो गया है. इसी तरह 15 प्रतिशत वेटेज वित्तीय सेक्टर में अच्छा प्रदर्शन करने वाले राज्यों के लिया रखा गया है.15 प्रतिशत का वेटेज विदेशी निवेश को आकर्षित करने के लिए रखा गया है. इसके साथ ही 10 प्रतिशत का वेटेज इकोलॉजी को दिया गया है. 15 प्रतिशत भौगोलिक एरिया को वेटेज मिल रहा है.  अन्नामलाई के कहने का मतलब साफ है कि उपरोक्त आधारों का अगर विश्वेषण करें तो साफ पता चलता है कि दक्षिण के राज्यों के हितों का ध्यान उत्तर से ज्यादा रखा गया है. जनसंख्या के आधार को कहां 60 प्रतिशत से नीचे लाकर 15 प्रतिशत कर दिया गया. गुड गवर्ननेंस के नाम पर कोई फायदा नहीं होता था पर आज इसके नाम पर 15 प्रतिशत का लाभ होता है. अन्ना मलाई इस बात के लिए स्टालिन और अन्य नेताओं की आलोचना करते हैं कि वे देश और राज्य को चलाने के लिए जिस फार्मूले की बात कर रहे हैं वो न्यायपूर्ण नहीं है. वो उदाहरण देते हैं कि तमिलनाडु में 34 परसेंट रेवेन्यू 4 जिलों से आता है. क्या राज्य के कुल रेवेन्यू का 34 प्रतिशत इन चार जिलों को ही मिलना चाहिए? अन्नामलाई कहते हैं कि इस तरह से देश नहीं चल सकता है. यूपी के मजदूरों के भरोसे तमिलनाडु की इंडस्ट्री अन्ना मलाई बताते हैं कि तमिलनाडु में यूपी के 25 लाख रजिस्टर्ड मजदूर हैं. अगर अनऑफिशियल को भी जोड़ लिया जाए तो करीब 40 लाख लेबर यूपी के तमिलनाडु में हैं. अन्ना कहते हैं कि कल्पना करिए अगर योगी आदित्यनाथ और नीतीश कुमार कहें कि इतने सस्ता श्रम क्यों आपको उपलब्ध कराएं तो तमिलनाडु क्या कर लेगा? आज पूरी दुनिया की इकॉनमी सस्ते श्रम के भरोसे ही है. वास्तव में अगर यूपी और बिहार की ओर से यह मांग रख दी जाए कि उनके राज्य के लोगों को एक निश्चित रकम जरूर मिलना चाहिए अन्यथा उनके जाने पर रोक लगा दी जाएगी . कल को योगी और नीतीश कुमार अगर यह मांग करें कि हर मजदूर के नाम 10 हजार रुपये उनके राज्य को चाहिए तो हम क्या इनकार कर पाएंगे?  पर देश ऐसे नहीं चलता है. अन्ना मलाई कहते हैं कि याद करिए जब कोविड के समय मजदूरों को वापस बुलाने के लिए तमिलनाडु के इतिहास में पहली बार हिंदी में प्रेस रिलीज जारी किया गया था. 4- वास्तव में यूपी की तरक्की हैरान करने वाली है अन्नामलाई कहते हैं कि जिस तरह कहा जाता है कि चीन सो रहा है उसे मत छेड़ो, उसी तरह यूपी सो रहा उसे जगाओगे तो … Read more

उज्जैन में सिंहस्थ 2028 के लिए अभी से तैयारी शुरू, भीड़ प्रबंधन और स्वच्छ जल में स्नान कराना प्रशासन के लिए भी बड़ी चुनौती

उज्जैन  भगवान महाकाल की नगरी उज्जैन में शिप्रा नदी किनारे वर्ष 2028 में लगने वाले महाकुंभ सिंहस्थ की तारीख शासन ने घोषित कर दी है। सिंहस्थ मेला अधिकारी आशीष सिंह ने बताया कि इस बार सिंहस्थ दो माह का होगा। 27 मार्च से 27 मई तक लगेगा। नौ अप्रैल से आठ मई तक तीन अमृत स्नान और सात स्नान पर्व होंगे। गत सिंहस्थ एक माह का था। उज्जैन में हर 12 वर्ष के अंतराल पर महाकुंभ सिंहस्थ लगता है, जिसमें दुनियाभर से साधु-संत और श्रद्धालु शिप्रा नदी में स्नान करने आते हैं और धर्म, संस्कृति का प्रचार-प्रसार करते हैं। इस बार के महाकुंभ में 14 करोड़ श्रद्धालुओं के आने का अनुमान सरकार ने लगाया है। सिंहस्थ में अब 35 महीने का समय शेष रह गया है और स्थिति यह है कि सड़क, पुल, बिजली सहित अधिकांश प्रोजेक्ट कागजों में ही सिमटे पड़े हैं। आगे चलकर हो सकती है बड़ी मुसीबत प्रमुख बात यह है कि सालभर में सिंहस्थ मद के केवल दो काम ही धरातल पर प्रारंभ हो पाए हैं। विभागीय मद के अधिकांश प्रोजेक्ट सक्षम स्वीकृति और ठेकेदार चयन प्रक्रिया में ही उलझा रखे हैं। यह विशुद्ध रूप से अफसरों की उदासीनता एवं लापरवाही का प्रमाण है, जो समय रहते काम प्रारंभ और समाप्त न होने से आगे चलकर बड़ी मुसीबत खड़ी कर सकती है। श्रद्धालुओं के लिए होगी व्यवस्थाएं एक रिपोर्ट के अनुसार सिंहस्थ की महत्ता और विशालता को ध्यान में रख श्रद्धालुओं के लिए व्यापक व्यवस्थाएं करने को 11 विभाग 15751 करोड़ रुपये के 102 कार्य की योजना प्रस्तावित हैं, जिनमें 5133 करोड़ रुपये से 75 कार्य इस वर्ष सिंहस्थ मद से कराने की अनुशंसा संभागीय समिति ने की है। ध्यान देने वाली बात यह है कि प्रदेश बजट में सिंहस्थ मद दो हजार करोड़ का ही रखा गया है। प्रश्न उठता है कि भविष्य में मद बढ़ाया जाएगा या कुछ कार्यों की छंटनी होगी। सबसे बड़ी चुनौती भीड़ प्रबंधन और स्वच्छ जल में स्नान सिंहस्थ कराने में सबसे बड़ी चुनौती भीड़ प्रबंधन और स्वच्छ जल में श्रद्धालुओं को स्नान कराने की है। भीड़ प्रबंधन तभी संभव है जब शहर की आंतरिक सड़कें चौड़ी, पुलों का दोहरीकरण और शिप्रा नदी पर घाट की लंबाई बढ़े। ये तीनों ही काम करने में यहां का प्रशासन पिछड़ा है। ट्रैफिक नियंत्रण के लिए बनी रोप-वे, फ्रीगंज समानांतर रेलवे ओवर ब्रिज सरिकी अनेक विभागीय योजना सक्षम स्वीकृति के बाद भी धरातल पर शुरू न हो सकी है। सरकार को प्रारंभिक तौर पर अनुमान है कि सिंहस्थ में 14 करोड़ से अधिक श्रद्धालु उज्जैन आ सकते हैं। ऐसे में इनके लिए व्यवस्था करना भी आसान काम नहीं है। ऐसे में प्रशासन ने अनुमान के आधार पर कुम्भ मेले के दौरान कुछ महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं। जिनको कुंभ के दौरान लागू किया जाएगा। कुंभ में होंगी ये व्यवस्थाएं कुंभ मेले के दौरान मेला क्षेत्र में प्रतिदिन 16 हजार से ज्यादा सफाईकर्मी स्वच्छता की व्यवस्था संभालेंगे। साथ ही श्रृद्धालुओं की सुविधा के लिए 50 हजार शौचालय का निर्माण भी किया जाएगा। आने वाले श्रद्धालुओं के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए 500 अस्थाई अस्पताल और कैम्प लगाने का भी निर्णय लिया गया है। सिंहस्थ में लगेंगे इतने सफाईकर्मी बताया जा रहा है कि उज्जैन में सड़क और अन्य क्षेत्रों को मिलाकर 11 हजार 220 सफाईकर्मियों की आवश्यकता होगी। कचरा संग्रहण के लिए लगभग 5 हजार सफाईकर्मियों की जरूरत पड़ेगी। कुल मिलाकर 16 हजार 220 सफाई कर्मियों की आवश्यकता सिंहस्थ में होगी। सिंहस्थ में आ सकते हैं 14 करोड़ श्रद्धालु सिंहस्थ में 14 करोड़ से अधिक श्रद्धालु आ सकते हैं। ऐसे में हर दिन सिंहस्थ मेला क्षेत्र में 740 टन कचरा उत्पन्न होने का अनुमान है। इसे नियंत्रित करने के लिए 50 हजार बायो-टॉयलेट बनाए जाएंगे। सिंहस्थ कुम्भ मेले में 500 अस्थाई अस्पताल और कैम्प लगाए जाएंगे। स्वास्थ्य सुविधाओं को सिंहस्थ मेला क्षेत्र के अनुसार 6 जोन में बांटा जाएगा। वहीं, स्वास्थ्य सेवाओं का डिजीटल रिकॉर्ड मेंटेन किया जाएगा। डॉक्टर और पेरामेडिकल स्टॉफ की ट्रेनिंग होगी। इसके साथ ही सुरक्षा के मद्देनजर पर्याप्त सुरक्षाबलों को तैनात किया जाएगा। recent visitors 41

सरला मिश्रा केस की फाइल 28 साल बाद फिर खुलेगी, पुलिस की खात्मा रिपोर्ट खारिज, दिग्विजय सिंह की बढ़ सकती हैं मुश्किलें? जानें मामला

भोपाल मध्य प्रदेश के राजनीतिक इतिहास के सबसे चर्चित मामलों में से एक कांग्रेस नेत्री सरला मिश्रा की मौत का मामला 28 साल बाद फिर से खुलने जा रहा है. 1997 में भोपाल स्थित सरकारी आवास में जलने से उनकी मौत हो गई थी. इस मामले में सरला मिश्रा के भाई ने एमपी के पूर्व मुख्यमंत्री और राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह पर गंभीर आरोप लगाए हैं. ऐसे में उनकी मुश्किलें बढ़ सकती हैं. भोपाल कोर्ट के आदेश के बाद सरला मिश्रा की मौत का मामला फिर से खुलने जा रहा है.  अनुराग ने कहा, सियासी अदावत में बहन की हत्या हुई। सरला की मौत की जांच पर शुरू से अंगुलियां उठती रही हैं। आरोप लगे कि भोपाल की टीटी नगर पुलिस की हत्या को आत्महत्या बताया। पीएम करने वाले डॉक्टर पर आरोप लगे। अब अनुराग ने कहा, उम्मीद है, अब न्याय मिलेगा। जांच के नाम पर कागजी घोड़े : पुलिस ने 7 मार्च 1997 को बयान लिया। एक अन्य बयान 15 फरवरी 2010 को लिया। जांच के आदेश के कोर्ट ने लिखा- पुलिस ने जांच न कर कागजी घोड़े दौड़ाए। सरला जल रही थी, दरवाजे खुले थे: जांच में कहा गया था, जब साक्षी राजीव दुबे घटनास्थल पर पहुंचे तो सरला जल रही है। मकान के दरवाजे खुले थे। कोर्ट ने लिखा है, यह असंभव है। सरला के भाई ने दिग्विजय सिंह पर गंभीर आरोप लगाए इस मामले में सरला के भाई ने दिग्विजय सिंह पर गंभीर आरोप लगाए हैं। भोपाल का बहुचर्चित कांड सरला मिश्रा सुर्खियों में रहा है। सरला के भाई अनुराग मिश्रा का कहना है कि उनकी बहन सरला मिश्रा 14 फरवरी 1997 को संदिग्ध अवस्था में जली हुई पाई गई थीं। इस मामले में आत्महत्या का मामला दर्ज किया गया था पुलिस ने उस समय इस मामले में आत्महत्या का मामला दर्ज किया था, जबकि वो मामला हत्या का था। इसी मामले में दिग्विजय सिंह के भाई लक्ष्मण सिंह का नाम भी सामने आया था। ऐसे आरोप थे कि सरला की हत्या राजनीतिक साजिश के तहत की गई थी। जब सरला मिश्रा का 1997 को निधन हुआ था, तब मध्य प्रदेश में कांग्रेस सरकार थी और दिग्विजय सिंह मुख्यमंत्री थे। सरला मिश्रा की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई थी सरला मिश्रा की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के मामले में भोपाल के टीटी नगर थाने की ओर से पेश खात्मा रिपोर्ट को न्यायालय ने नामंजूर कर दिया है। सरला के भाई अनुराग मिश्रा की आपत्तियों के आधार पर न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी पलक राय ने टीटी नगर पुलिस को मामले की पुन: जांच कर आरोप-पत्र संबंधित न्यायालय में पेश करने का आदेश दिया है। मामला करीब 28 वर्ष पुराना है। 14 फरवरी 1997 को सरला मिश्रा भोपाल के साउथ टीटी नगर स्थित सरकारी आवास में संदिग्ध परिस्थितियों में जल गई थीं। उन्हें इलाज के लिए पहले हमीदिया अस्पताल में भर्ती कराया गया था। बाद में सफदरजंग अस्पताल, नई दिल्ली ले जाया गया था, जहां 19 फरवरी 1997 को उनकी मौत हो गई। कोर्ट ने कहा- पुलिस जांच में कई गंभीर खामियां भोपाल कोर्ट की न्यायाधीश पलक राय ने अपने आदेश में कहा कि मृतका के मृत्यु पूर्व बयान की मेडिकल पुष्टि नहीं की गई। बयान के समर्थन में जो कागज के टुकड़े मिले, उनकी भी स्वतंत्र जांच नहीं कराई गई। घटनास्थल से कोई फिंगरप्रिंट भी नहीं लिया गया। परिवार ने इसे हत्या बताया था और कुछ नेताओं पर आरोप भी लगाए थे। साल 2000 में पुलिस ने केस की फाइल बंद कर दी थी। खात्मा रिपोर्ट अगले 19 वर्ष तक कोर्ट में पेश नहीं की गई। फरवरी 2025 में हाईकोर्ट ने आदेश दिए कि पहले खात्मा रिपोर्ट में बयान दर्ज हों और फिर कार्रवाई की जाए। इसके बाद भोपाल कोर्ट में सुनवाई चली और अनुराग के बयान दर्ज हुए। भाई ने कहा- हत्या हुई, पुलिस ने माना सुसाइड अनुराग मिश्रा ने बताया- सरला दीदी मेरी सगी बड़ी बहन थी। हम शुरू से कहते आ रहे हैं कि उनकी हत्या हुई है। पुलिस ने संदिग्ध स्थिति में जला मानकर 309 में केस दर्ज कर लिया और कहा था कि इन्होंने आत्महत्या की है। हम उसी समय के जांच अधिकारी से कहते रहे कि इसमें हत्या हुई है। हमनें लिखकर दिया फिर भी उसकी जांच नहीं हुई। घटना स्थल पर सबसे पहले मेरे माता-पिता पहुंचे थे। उन्हें घटना वाले मकान से बाहर करके ताला लगा दिया था। पुलिस ने माता-पिता और मेरी एक और सगी बड़ी बहन के बयान नहीं लिए। जलते हुए कोई कैसे फोन कर सकता है? अनुराग कहते हैं दीदी के पड़ोसी राजीव दुबे का बयान था कि सरला का मेरे घर फोन आया था कि मैं जल रही हूं। आप आकर मुझे बचाओ। उसी समय तत्कालीन मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के निवास से राजीव दुबे और योगीराज शर्मा को फोन पहुंचता है कि सरला मिश्रा का इलाज कराओ। ये दोनों दो घंटे तक उनको लेकर बैठे रहे। अस्पताल लेकर क्यों नहीं गए? डॉ. योगीराज शर्मा का पुलिस रिकॉर्ड में बयान है कि जब मैं घटना वाले घर पहुंचा तो मकान धुला और पोछा हुआ था। उसकी पुलिस ने जांच क्यों नहीं की। लैंडलाइन फोन की जांच और जब्ती क्यों नहीं की अनुराग मिश्रा ने कहा- बहन के लैंडलाइन की कॉल डिटेल, वह फोन जब्त क्यों नहीं किया? डॉ. सत्पथी ने सारी बातें लिख दीं लेकिन, टेलीफोन का जिक्र ही नहीं किया। पुलिस डायरी में जैसा लिखा कि तत्कालीन एसपी के मौखिक आदेश पर डॉ. सत्पथी घटना की फोरेंसिक जांच के लिए पहुंच गए थे। ये क्यों नहीं बताया कि मौखिक आदेश में क्या कहा गया था। क्या रिपोर्ट बनाना है? बेड पर मिले कागज की जांच क्यों नहीं की भाई का आरोप है कि घटना के बाद हर्ष शर्मा पहुंचे थे उन्होंने अभिमत दिया था कि सरला मिश्रा के बेड पर एक कागज मिला था। उसकी राइटिंग की जांच इसलिए नहीं की क्योंकि मृत्यु पूर्व बयानों में हस्ताक्षर अलग हो जाते। इसलिए पुलिस ने उनके अभिमत को भी नहीं माना। उस समय विधानसभा सत्र में भाजपा के विधायकों ने इस मामले को उठाया था और सीबीआई जांच की मांग की। उसके बाद हम हाईकोर्ट भी गए। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट जबलपुर में एक रिट याचिका … Read more