प्रदेश के प्रत्येक विकासखंड में हो आईटीआई, मुख्यमंत्री ने की तकनीकी शिक्षा, कौशल एवं रोजगार विभाग की समीक्षा

ग्लोबल स्किल पार्क की सभी सीटें भरी जाएं : मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रदेश में विद्यमान उद्योगों की मांग के अनुरूप कौशल प्रशिक्षण की व्यवस्था करें सुनिश्चित: मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रदेश के प्रत्येक विकासखंड में हो आईटीआई, मुख्यमंत्री ने की तकनीकी शिक्षा, कौशल एवं रोजगार विभाग की समीक्षा युवाओं के व्यवहारिक प्रशिक्षण और अनुभव के लिए तकनीकी विशेषज्ञता वाले विश्वविद्यालयों और निजी औद्योगिक इकाईयों को शैक्षणिक संस्थाओं से जोड़ें मुख्यमंत्री ने की तकनीकी शिक्षा, कौशल एवं रोजगार विभाग की समीक्षा भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि ग्लोबल स्किल पार्क की ब्रांड वैल्यू को स्थापित करते हुए यहाँ की सभी सीटें भरना सुनिश्चित किया जाएं। स्किल पार्क में संचालित सभी तकनीकी पाठ्यक्रमों, उनकी उपयोगिता और रोजगारपरक क्षमता पर केंद्रित प्रचार-प्रसार अभियान का संचालन व्यापक स्तर पर किया जाए। प्रदेश में विद्यमान उद्योगों की मांग के अनुरूप कौशल प्रशिक्षण की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए और युवाओं को प्रशिक्षण उपलब्ध कराने में निजी क्षेत्र का भी सहयोग लिया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश के हर विकासखंड में आईटीआई की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आईटीआई और पॉलिटेक्निक के विद्यार्थियों को प्रशिक्षण उपलब्ध कराने के लिए स्थानीय स्तर पर विद्यमान औद्योगिक इकाइयों के समन्वय से गतिविधियां संचालित की जाएं। इससे युवाओं के लिए स्थानीय स्तर पर रोजगार की उपलब्धता सुनिश्चित होगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने तकनीकी शिक्षा, कौशल एवं रोजगार विभाग की समीक्षा में यह निर्देश दिए। समत्व भवन (मुख्यमंत्री निवास) में हुई बैठक में तकनीकी शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार, कौशल विकास एवं रोजगार राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गौतम टेटवाल, मुख्य सचिव अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव डॉ. राजेश राजौरा तथा अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि युवाओं को स्वरोजगार, उद्यमिता और रोजगार के लिए प्रशिक्षित करने में तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास और रोजगार विभाग की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने विभाग में संचालित योजनाओं और कार्यक्रमों की प्रगति के प्रति असंतोष व्यक्त किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि युवाओं के कौशल विकास और उनके लिए रोजगारपरक कार्यक्रमों के लक्ष्य और समय-सीमा निर्धारित कर परिणाममूलक गतिविधियां संचालित की जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जर्मन और जापानी भाषाओं में दक्ष व्यक्तियों के लिए रोजगार के पर्याप्त अवसर उपलब्ध हैं। उन्होंने निर्देशित किया कि जिन भी भाषाओं में रोजगार के अवसरों की अधिक संभावना है, उनके प्रशिक्षण की प्रदेश में उचित व्यवस्था की जाए। उन्होंने तकनीकी रूप से दक्ष विश्वविद्यालयों और निजी क्षेत्र के औद्योगिक इकाइयों को जोड़ते हुए युवाओं को व्यवहारिक प्रशिक्षण उपलब्ध कराने के लिए प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इससे प्रदेश के उद्योगों को उनकी आवश्यकता के अनुरूप कुशल और दक्ष मानव संसाधन उपलब्ध होंगे तथा युवाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार मिल सकेगा। बैठक में कौशल विकास नीति, रोजगार कार्यालयों और कौशल विकास के विलय, स्थानीय एवं परम्परागत पद्धतियों की पहचान के लिए आरंभ श्रुति कार्यक्रम की भी समीक्षा की गई।   recent visitors 30

पीएम मोदी ने वक्फ बोर्ड ऐक्ट बनने को लेकर कहा कि इससे पसमांदा मुस्लिमों, महिलाओं और गरीबों के हित में काम होगा

नई दिल्ली पीएम नरेंद्र मोदी ने वक्फ बोर्ड ऐक्ट बनने को लेकर कहा कि इससे पसमांदा मुस्लिमों, महिलाओं और गरीबों के हित में काम होगा। उन्होंने कहा कि देश अब तक तुष्टिकरण की राजनीति से चलाया आया और उसका हमें खामियाजा भी भुगतना पड़ा। पीएम मोदी ने कहा कि तुष्टिकरण की राजनीति कोई नहीं है। इसका बीज स्वतंत्रता संग्राम के समय ही बो दिया गया था। उन्होंने न्यूज 18 के राइजिंग भारत समिट में हिस्सा लेते हुए कहा, ‘भारत कई देशों के साथ ही आजाद हुआ था, लेकिन किसकी स्वतंत्रता की शर्त विभाजन थी। भारत के साथ ही ऐसा क्यों हुआ। ऐसा इसलिए क्योंकि उस समय राष्ट्र हित से ऊपर सत्ता का मोह हो गया। विभाजन सभी मुस्लिमों का काम नहीं था बल्कि कांग्रेस समर्थित कट्टरपंथियों का काम था।’ उन्होंने कहा कि इसी तुष्टिकरण की राजनीति का शिकार तो पसमांदा मुस्लिम हुए और महिलाएं भी हैं। कांग्रेस ने इसे वोटबैंक की राजनीति का हथियार बना लिया। 2013 में वक्फ बोर्ड में किया गया संशोधन कट्टरपंथियों और भूमाफियाओं को खुश करने का कानून था। वक्फ कानून ने संविधान को भी कमतर कर दिया। हाल यह हो गया कि भूमाफियाओं के हौसले बुलंद हो गए। केरल में ईसाई समुदाय के लोगों की जमीनों पर दावा, हरियाणा में गुरुद्वारों की जमीन पर विवाद हो गया। इसके अलावा उन्होंने कर्नाटक का भी एक मामला बताया। मंदिर, चर्च, गुरुद्वारा, खेत और सरकारी जमीन हो, किसी को यह भरोसा नहीं रह गया था कि उनकी जमीन उनकी ही रहेगी। बस एक नोटिस आता था और लोग अपने ही घर के कागज ढूंढने लग जाते थे। आखिर यह कैसा कानून था, जिसने डर पैदा किया था। अब एक शानदार कानून बना है। यह देश और मुस्लिम समाज के हित में है। इससे वक्फ की पवित्र भावना की भी रक्षा होगी। इसके अलावा गरीब, पसमांदा मुस्लिम और उनके बच्चों के हित सुरक्षित रहेंगे। वक्फ पर हुई डिबेट दूसरी सबसे लंबी बहस थी। इसे सदन में दोबारा लाने से पहले जेपीसी की 38 बैठकें हुई थीं। यह दिखाता है कि भारत में लोकतंत्र कितना प्रभावी है। पीएम मोदी ने कहा कि वक्फ बोर्ड की ताकत इतनी थी कि हर कोई डरा रहता था कि कब नोटिस न आ जाए। नोटिस आया नहीं कि लोग कानूनी लड़ाई में उलझ जाते थे। वह भी उस जमीन के लिए जो उनकी अपनी हुआ करती थी। उन्होंने कहा कि हमने वक्फ बोर्ड ऐक्ट लाकर न्याय किया है और इससे सारी विसंगतियां दूर हो जाएंगी। recent visitors 35

राजनीतिक कार्यकर्ताओं को अपने लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए दंडित नहीं किया जाएगा-उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा

धमतरी : राज्य शासन द्वारा राजनीतिक प्रकरणों की वापसीःलोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण निर्णय धमतरी जिले के 2प्रकरण को लिया गया वापस राजनीतिक कार्यकर्ताओं को अपने लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए दंडित नहीं किया जाएगा-उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा मंत्री परिषद की बैठक में अब तक कुल 103 प्रकरण लिए गए वापस राज्य के 16 जिलों के 41 प्रकरण न्यायालय द्वारा हुए वापस धमतरी छत्तीसगढ़ सरकार ने लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा और निष्पक्ष शासन की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए विभिन्न जिलों में दर्ज 103 गैर-गंभीर राजनीतिक प्रकरणों की वापसी का निर्णय लिया है। गृह विभाग द्वारा जिलों से प्राप्त रिपोर्ट और विस्तृत समीक्षा के बाद मंत्रीमंडलीय उपसमिति की अनुशंसा पर यह फैसला लिया गया। न्यायालय से विधिवत स्वीकृति मिलने के पश्चात 41 प्रकरणों में अभियुक्तों को राहत प्रदान की गई और संबंधित पुलिस रिकॉर्ड से उनके नाम हटा दिए गए। धमतरी जिले के 2 प्रकरण को वापस लिया गया है। आरोपीगण द्वारा ग्राम बाजारकुर्रीडीह में धान खरीदी केंद्र खोलने एवं कुकरेल से बिरझुरी तक डामरीकरण सड़क निर्माण की मांग को लेकर चक्काजाम एवं आवागमन बाधित करने के कारण अनीता ध्रुव, राज बाई ध्रुव, देवकी ध्रुव, वामन साहू, अजय यादव, मोहनदास मानिकपुरी, सुखराम साहू, चिंताराम ध्रुव, रोमन साहू, संतोष यादव, राजेंद्र साहू, भुनेश ध्रुव, सत्यवान मरकाम, मीनेश ध्रुव, भगवान सिंह सिंहा और नरेंद्र चंद्राकर के खिलाफ अपराध क्रमांक 40/22 पंजीबद्ध किया गया था। न्यायालय द्वारा दिनांक 28 फरवरी 2025 को प्रकरण वापस लिया गया।वहीं अनुराम चंद्राकर और विजय मोटवानी द्वारा शासकीय कार्य में बाधा डालने के कारण अपराध क्रमांक 467/22 पंजीबद्ध किया था, जिसे न्यायालय द्वारा 27 फरवरी 2025 को वापस लिया गया।      उपमुख्यमंत्री एवं गृहमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय जी की सरकार सुशासन की सरकार है। हमारी सरकार में किसी भी निर्दोष के साथ गलत नहीं होने दिया जाएगा। लोकतंत्र में हर नागरिक को अपनी बात रखने और शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करने का अधिकार है। उन्होंने कहा कि पिछली सरकार में कई ऐसे राजनीतिक प्रकरण दर्ज किए गए थे, जो केवल लोकतांत्रिक अधिकारों के प्रयोग का हिस्सा थे। हमारी सरकार की नीति हमेशा यही रही है कि राजनीतिक कारणों से किसी भी निर्दोष व्यक्ति को झूठे मुकदमों में न फंसाया जाए। इसलिए हमारी सरकार ने निष्पक्षता के साथ इन मामलों की समीक्षा कर ऐसे सभी गैर-गंभीर मामलों को वापस लेने का निर्णय लिया है। उपमुख्यमंत्री एवं गृहमंत्री शर्मा ने आगे कहा कि हमारी सरकार जनता के प्रति जवाबदेह है और किसी भी नागरिक के संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन नहीं होने दिया जाएगा। यह निर्णय न केवल न्यायसंगत है बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी है। विपक्ष की तुष्टिकरण और दमनकारी नीतियों के विपरीत, हमारी सरकार पारदर्शिता, निष्पक्षता और सुशासन में विश्वास रखती है। उपमुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि जो प्रकरण कानून-व्यवस्था को प्रभावित करने वाले या हिंसक गतिविधियों से जुड़े हुए थे, उनकी समीक्षा अलग प्रक्रिया के तहत की गई है। लेकिन जिन मामलों में केवल राजनीतिक विरोध या लोकतांत्रिक आंदोलन हुआ था और किसी प्रकार की हिंसा नहीं हुई थी, उन्हें न्यायालय से स्वीकृति प्राप्त कर वापस लिया गया है। हमारी सरकार की मंशा स्पष्ट है हम जनता के हक की रक्षा करेंगे, लोकतंत्र की भावना को मजबूत करेंगे और राजनीतिक द्वेष के आधार पर लिए गए निर्णयों को सुधारेंगे। छत्तीसगढ़ सरकार जनता की सरकार है और हम किसी भी निर्दोष व्यक्ति पर बेवजह कानूनी बोझ नहीं डालने देंगे।       राजनीतिक प्रकरणों की वापसी एक विस्तृत और कानूनी प्रक्रिया के तहत की जाती है। सबसे पहले राज्य शासन द्वारा सभी जिलों में दर्ज राजनीतिक प्रकरणों की समीक्षा की जाती है। गृह विभाग द्वारा संबंधित जिलों से प्राप्त रिपोर्ट के आधार पर यह तय किया जाता है कि कौन-से मामले गंभीर प्रकृति के नहीं हैं और जिनमें हिंसक घटनाएं शामिल नहीं हैं। इसके बाद मंत्रिमंडलीय उपसमिति की अनुशंसा उपरांत, प्रकरण को मंत्रिपरिषद में अनुमोदन के लिए प्रस्तुत किया जाता है। अनुमोदन प्राप्त होने के बाद न्यायालय में प्रकरण वापसी का आवेदन प्रस्तुत किया जाता है। न्यायालय द्वारा इस मामले की विधिवत समीक्षा के उपरांत अभियुक्तों को राहत प्रदान करने की अनुमति दी जाती है। न्यायालय की स्वीकृति प्राप्त होने के बाद संबंधित पुलिस रिकॉर्ड से अभियुक्तों के नाम हटा दिए जाते हैं और उन्हें विधिवत मुक्ति प्रमाणपत्र प्रदान किया जाता है। शासन स्तर पर इस निर्णय को लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा और सौहार्दपूर्ण वातावरण बनाए रखने के उद्देश्य से लिया गया है, ताकि आम नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों का सम्मान हो और राजनीतिक गतिविधियों के कारण उत्पन्न कानूनी समस्याओं का समाधान किया जा सके। recent visitors 25

मुख्यमंत्री साय ने निर्देश दिए कि सभी जिलों में चरणबद्ध तरीके से कार्यशालाओं और सेमिनारों का आयोजन किया जाए

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज मंत्रालय महानदी भवन, नवा रायपुर में गृह विभाग  के कार्यो की समीक्षा की। मुख्यमंत्री साय ने भारत सरकार द्वारा लागू किए गए नए आपराधिक कानून भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के प्रभावी क्रियान्वयन को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ये कानून न केवल न्याय प्रणाली में सुधार लाने वाले हैं, बल्कि अपराधियों में भय और आम जनता में विश्वास उत्पन्न करने में सहायक होंगे।        मुख्यमंत्री साय ने कहा कि इन कानूनों की प्रभावी समझ और व्यावहारिक प्रशिक्षण पुलिस बल, अभियोजन अधिकारी एवं अन्य संबंधित कर्मियों के लिए आवश्यक है। उन्होंने निर्देश दिए कि सभी जिलों में चरणबद्ध तरीके से कार्यशालाओं और सेमिनारों का आयोजन किया जाए, जिनमें केस स्टडी और मॉक ट्रायल के माध्यम से प्रशिक्षण दिया जाए।         बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने अपराध अनुसंधान प्रणाली को अधिक प्रभावी, वैज्ञानिक और प्रमाणिक बनाने पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि आपराधिक प्रकरणों में केवल गिरफ्तारी ही नहीं, बल्कि सटीक और पुख्ता साक्ष्य के आधार पर विवेचना पूरी की जाए ताकि अभियुक्तों को सजा दिलाई जा सके। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि विवेचना अधिकारियों को आधुनिक अनुसंधान तकनीकों, डिजिटल फॉरेंसिक, सीसीटीएनएस प्रणाली और वैज्ञानिक उपकरणों के उपयोग में दक्ष किया जाए। पीड़ितों को समय पर न्याय दिलाना राज्य सरकार की प्राथमिकता है और इसके लिए अनुसंधान प्रक्रिया में पारदर्शिता, तत्परता और तकनीकी दक्षता अनिवार्य है। मुख्यमंत्री साय ने साइबर अपराधों की बढ़ती चुनौती को देखते हुए  साइबर सेल को तकनीकी रूप से सक्षम बनाने तथा जनता को साइबर जागरूकता से जोड़ने के लिए अभियान चलाने के निर्देश भी दिए।       इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा, मुख्य सचिव अमिताभ जैन, अपर मुख्य सचिव मनोज पिंगुआ, पुलिस महानिदेशक अरुण देव गौतम, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह,सचिव राहुल भगत के अलावा वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। recent visitors 24

मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से नौ संकल्पों के पालन का किया आहवान

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा दिए गए नौ संकल्पों से निश्चित ही नई ऊर्जा के स्त्रोत बनेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेशवासियों से नौ संकल्पों के पालन का आहवान किया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने नई दिल्ली के विज्ञान भवन में नवकार महामंत्र दिवस पर समारोह का शुभारंभ करते हुए नवकार मंत्र के महत्व को रेखांकित किया और मंत्र को एकीकृत ऊर्जा का प्रवाह बताया। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि नवकार महामंत्र नई पीढ़ी के लिए ज्ञान और दिशा के स्त्रोत के रूप में कार्य कर सकता है। प्रधानमंत्री मोदी ने सामूहिक नवकार मंत्र के जाप के बाद सभी से नौ संकल्प लेने का आग्रह किया। ये है नौ संकल्प पहला संकल्प – जल संरक्षण, दूसरा संकल्प – एक पेड़ मां के नाम, तीसरा संकल्प – स्वच्छता का मिशन, चौथा संकल्प – वोकल फॉर लोकल, पांचवाँ संकल्प – देश दर्शन, छठा संकल्प – नैचुरल फार्मिंग को अपनाना, सातवाँ संकल्प – हेल्दी लाइफ स्टाइल को अपनाना, आठवाँ संकल्प – योग और खेल को जीवन में लाना और नौवाँ संकल्प – गरीबों की सहायता का संकल्प है।   recent visitors 37

राज्यपाल डेका ने 660 विद्यार्थियों को स्नातक, स्नातकोत्तर उपधि वितरित, 17 को पीएच.डी की उपाधि से सम्मानित किया

रायपुर राज्यपाल रमेन डेका आज एमिटी विश्वविद्यालय के तीसरे दीक्षांत समारोह में बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए। उन्होंने इस अवसर पर कहा कि आज की दुनिया की प्रगति में ज्ञान और कौशल की प्रमुख भूमिका है। उच्च शिक्षा संस्थानों को विचारकों, नेताओं और नवप्रवर्तकों की अगली पीढ़ी को आकार देने में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।     रायपुर के पं. दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में आयोजित दीक्षांत समारोह में राज्यपाल डेका ने विश्वविद्यालय के मेधावी विद्यार्थियों को विभिन्न पुरूस्कार एवं 18 मेधावी विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक, 15 को रजत पदक और 6 को कांस्य पदक प्रदान किए गए। समारोह में वर्ष 2024 बैच के 660 विद्यार्थियों को स्नातक एवं स्नातकोत्तर की उपाधियां वितरित की गई। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन के वैज्ञानिक डॉ. वी.के. दास और उद्योगपति एस.एन. स्वामी को डॉक्टरेट की मानद उपाधि सहित 16 विद्यार्थियों को विभिन्न विषयों में पी.एच.डी की उपाधि प्रदान की गई।       इस अवसर पर राज्यपाल ने कहा कि यह दिन सभी स्नातक विद्यार्थियों के लिए वर्षों की कड़ी मेहनत, समर्पण और दृढ़ता का प्रतीक है। यह न केवल आपके लिए बल्कि आपके परिवारों, शिक्षकों और मार्गदर्शकों के लिए भी गर्व का क्षण है।     उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ लंबे समय से ज्ञान, परंपरा और उत्कृष्टता की भूमि रही है। वे स्वयं यह जानकर चकित हैं कि छत्तीसगढ़ का इतिहास रामायण काल से भी पुराना है। इस राज्य ने विज्ञान, साहित्य, संगीत, लोक कला, सिनेमा, खेल और राजनीति में बहुत योगदान दिया है। इसकी एक मजबूत शैक्षणिक, संस्कृति, शिक्षा और अनुसंधान के प्रति गहरी प्रतिबद्धता है।     डेका ने कहा कि भारत विकास और परिवर्तन के एक नए युग की दहलीज पर खड़ा है। प्रौद्योगिकी, उद्योग, कृषि, स्वास्थ्य सेवा और डिजिटल बुनियादी ढांचे में प्रगति के साथ, हमारा देश एक वैश्विक नेता बनने के लिए तैयार है और 5 ट्रिलियन अर्थव्यवस्था बनने के लिए अग्रसर है।     डेका ने विद्यार्थियों से आव्हान किया कि वे नवाचार के बारे में सोचें और उसे अपनाए। भविष्य उन लोगों का है जो हिम्मत करते हैं। सपने देखें और उन सपनों को हासिल करने के लिए अथक परिश्रम करें। भारत को उद्यमियों, शोधकर्ताओं और दूरदर्शी लोगों की जरूरत है, जो नए विचारों और समाधानों के साथ देश को आगे बढ़ा सकें। डेका ने कहा कि भारत हमेशा से बौद्धिक और वैज्ञानिक उपलब्धियों का देश रहा है। नालंदा और तक्षशिला के प्राचीन विश्वविद्यालयों से लेकर आधुनिक शोध संस्थानों तक, हमारा देश हमेशा ज्ञान सृजन में सबसे आगे रहा है। हमारे महान भारतीय विद्वानों ने गणित, विज्ञान, चिकित्सा और दर्शन के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।     जीवन एक यात्रा है। आप अपने जीवन में आगे बढ़ते रहें और अच्छा करने की कोशिश करें। उन्होंने कहा कि  आप सभी आजीवन सीखने, नैतिक नेतृत्व और समाज की सेवा के लिए प्रतिबद्ध हो। शिक्षा केवल व्यक्तिगत सफलता के लिए नहीं है; यह राष्ट्र और दुनिया के प्रति एक जिम्मेदारी है।     डेका ने कहा कि शिक्षा को व्यवसाय नहीं बनाना चाहिए बल्कि यह जीवन की उन्नति का मार्ग है। वे स्वयं शासकीय एवं निजी विश्वविद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता बेहतर करने के लिए प्रयास करते रहेंगें। इस अवसर पर डेका ने ‘एक पेड़ मां के नाम‘ पर पौधा लगाया।     समारोह में विश्वविद्यालय के संस्थापक अध्यक्ष डॉ. अशोक के .चौहान, अध्यक्ष डॉ. असीम के. चैहान, कुलाधिपति डब्लू सेल्वमूर्ति, कुलपति डॉ. पीयूष कांत पाण्डे, रजिस्ट्रार, फैकल्टी मेंम्बर्स, डीन, प्राध्यापक, छात्र-छात्राएं एवं उनके परिजन बड़ी संख्या में  उपस्थित थे। recent visitors 31

एक दुकान से ही किताब-यूनिफॉर्म खरीदने को मजबूर किया तो… आपकी एक कॉल पर दौड़ी आएगी कलेक्टर की टीम

भोपाल  राजधानी भोपाल में अधिकांश परिजनों को 1 हजार की किताबें 4 हजार रुपये तक में खरीदने को मजबूर होना पड़ा है। मजबूरी में यह खरीदी भी कर ली गई लेकिन भोपाल जिला प्रशासन की नींद तब नहीं टूटी। अब जब अधिकांश खरीदी बिक्री हो चुकी है, तब जाकर भोपाल कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने टीम बनाई है। कलेक्टर के आदेश में क्या कलेक्टर ने आदेश में लिखा है कि भोपाल के प्राइवेट स्कूलों ने यदि पुस्तक खरीदी करने के लिए और यूनिफॉर्म के लिए पालकों पर दबाव डाला तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी। पालकों को कोई समस्या न हो इसके लिए कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने कुछ अफसरों को मिलाकर एक टीम बनाई है। परिजन चाहें तो नंबर्स पर कॉल कर सकते हैं, जिस पर टीम तत्काल कार्रवाई करेगी। ज्यादातर पेरेंट्स की खरीदी हुई पूरी रोचक बात यह है कि ज्यादातर पालक इस समय तक अपने बच्चों के लिए पुस्तकें और यूनिफॉर्म खरीद चुके हैं। ऐसे में उनकी प्रतिक्रियाएं भी सामने आ रही हैं। इस मामले पर परिजनों का कहना है कि आपने हुजूर बड़ी देर कर दी। कई परिजनों का कहना है कि कलेक्टर ने यह आदेश देरी से लागू किया है। वे पहले ही पुस्तकें और यूनिफॉर्म खरीद चुके हैं। इसके लिए उन्होंने 20 से लेकर 25 हजार रुपये तक खर्च किये हैं। टीम में यह अफसर शामिल भोपाल कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने जो टीम बनाई है, उसमें संबंधित क्षेत्र के एसडीएम, तहसीलदार के अलावा अन्य कर्मचारी भी रखे गए हैं। अगर किसी परिजन की शिकायत मिलती है तो यह टीमें मौके पर जाएंगी और समय-समय पर दुकानों का निरीक्षण भी करेंगी। विभाग का मानना है कि अभिभावकों को एनसीईआरटी या सीबीएसई की तरफ से अनुमोदित पुस्तकों के बजाय निजी प्रकाशकों से पुस्तकें खरीदने के लिए मजबूर करने से लागत बढ़ जाती है। बार-बार स्कूल यूनिफॉर्म बदलने से अभिभावकों पर अनावश्यक वित्तीय बोझ पड़ता है। कुछ स्कूलों में यूनिफॉर्म पर खास लोगो लगाना अनिवार्य कर दिया जाता है, जिससे अभिभावकों को उन्हें निर्धारित विक्रेताओं से ऊंची कीमतों पर खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ता है। छात्रों को पानी ले जाने के लिए मजबूर करना भी विभाग के संज्ञान में आया है। स्कूलों में पेयजल उपलब्ध कराने के लिए नियमों के बावजूद बच्चों को स्कूल के जल स्रोतों से पीने की अनुमति देने के बजाय बोतलें मगवाई जाती हैं। स्कूल से संबंधित अतिरिक्त पुस्तकें और अन्य सामान जैसे पानी की बोतलें ले जाने से स्कूल बैग का वजन काफी बढ़ जाता है। इससे बच्चों को परेशानी होती है। राज्य के सभी डीईओ और डीईईओ को निर्देश दिया जाता है कि वे अपने अधिकार क्षेत्र में इन नियमों का सख्ती से अनुपालन सुनिश्चित करें। किसी भी स्कूल को छात्रों और अभिभावकों पर अनावश्यक वित्तीय बोझ नहीं डालना चाहिए, जिससे उन्हें अनावश्यक किताबें, यूनिफॉर्म और पानी की बोतलें जैसी अन्य चीजें खरीदने के लिए मजबूर होना पड़े। इन मानदंडों का उल्लंघन करने वाले किसी भी स्कूल के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की जानी चाहिए। शिक्षा मंत्रालय की तरफ से निर्धारित बैग का वजन कक्षा बैग का वजन 1 व 2 -1.5 किग्रा 3 से 5-2-3 किग्रा 6 व 7-4 किग्रा 8 व 9- 4.5 किग्रा 10-10.5 किग्रा ये दिए निर्देश – विद्यालय किसी भी व्यक्ति, व्यक्तियों के समूह अथवा एसोसिएशन को लाभ पहुंचाने के लिए संचालित नहीं किया जाएगा। – मान्यता प्राप्त विद्यालय में बेसिक शिक्षा परिषद से निर्धारित पाठ्यक्रम या पाठ्य पुस्तकों से भिन्न पाठ्यक्रम में न तो शिक्षा दी जाएगी और न ही पाठ्य पुस्तकों का उपयोग किया जाएगा। – विद्यालय के भवनों और परिसरों को किसी भी दशा में व्यावसायिक एवं आवासीय उद्देश्यों के लिए दिन और रात में प्रयोग नहीं किया जाएगा। – अशासकीय प्राथमिक और जूनियर हाईस्कूल के संदर्भ में निर्गत शासनादेश 26 सितंबर 2023 में प्रावधानों का अनुपालन करें। नियमों और शासनादेश के उल्लंघन की शिकायत प्राप्त होने पर मान्यता प्रत्याहरण की कार्रवाई की जाएगी। recent visitors 25