रोमांचक मैच में जीती लखनऊ, मुंबई की तीसरी हार, सूर्यकुमार की कोशिश गई बेकार

 लखनऊ  इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) 2025 के मैच नंबर-16 में लखनऊ सुपर जायंट्स (LSG) का सामना मुंबई इंडियंस (MI) से हुआ. 5 अप्रैल (शुक्रवार) को लखनऊ के भारत रत्न श्री अटल बिहारी वाजपेयी इकाना क्रिकेट स्टेडियम में खेले गए इस मुकाबले में लखनऊ सुपर जायंट्स ने 12 रनों से रोमांचक जीत हासिल की. मुकाबले में मुंबई इंडियंस को जीत के लिए 204 रनों का टारगेट मिला था, लेकिन वो 20 ओवर में 5 विकेट पर 191 रन ही बना सकी. आवेश-शार्दुल ने की शानदार गेंदबाजी देखा जाए तो इस मुकाबले के आखिरी ओवर में मुंबई को जीत के लिए 22 रन बनाने थे, लेकिन तेज गेंदबाज आवेश खान ने मुंबई के मंसूबों पर पानी फेर दिया. आवेश ने उस ओवर में सिर्फ 9 रन दिए और हार्दिक पंड्या को परेशान करके रखा. उससे पहले पारी का 19वां ओवर शार्दुल ठाकुर ने डाला था, जिसमें केवल सात रन बने थे. वो ओवर मैच का टर्निंग पॉइंट रहा. मुंबई इंडियंस की मौजूदा सीजन में यह चार मैचों में तीसरी हार रही. वहीं लखनऊ की इतने ही मैचों में ये दूसरी जीत रही. ऐसा रहा मैच का आखिरी ओवर पहली गेंद- 6 रन (हार्दिक पंड्या) दूसरी गेंद- 2 रन (हार्दिक पंड्या) तीसरी गेंद- 0 रन (हार्दिक पंड्या) चौथी गेंद- 0 रन (हार्दिक पंड्या) पांचवीं गेंद- 1 रन (हार्दिक पंड्या) छठी गेंद- 0 रन (मिचेल सेंटनर)  छह गेंद पर चाहिए 22 रन तिलक वर्मा रिटायर होकर पवेलियन लौट गए हैं। तिलक ने 23 गेंदों पर 25 रन बनाए। मुंबई और लखनऊ के बीच मैच रोमांचक मोड़ पर पहुंच गया है और मुंबई को जीत के लिए छह गेंदों पर 22 रनों की जरूरत है। सूर्यकुमार यादव आउट आवेश खान ने सूर्यकुमार यादव को आउट कर मुंबई इंडियंस को चौथा झटका दिया है। सूर्यकुमार अच्छी बल्लेबाजी कर रहे थे और अर्धशतक लगा चुके थे, लेकिन वह 43 गेंदों पर नौ चौकों और एक छक्के की मदद से 67 रन बनाकर आउट हुए।  सूर्यकुमार का पचासा सूर्यकुमार यादव ने लखनऊ सुपर जाएंट्स के खिलाफ 31 गेंदों पर अर्धशतक जड़ दिया है। सूर्यकुमार ने नमन धीर के साथ मिलकर तीसरे विकेट के लिए अच्छी साझेदारी निभाई और अब अर्धशतक लगाकर टीम की उम्मीदें बनाई रखी है। मुंबई ने 14 ओवर की समाप्ति के बाद तीन विकेट पर 133 रन बना लिए हैं। अब उसे जीत के लिए 36 गेंदों पर 71 रन बनाने हैं।  टारगेट का पीछा करते हुए मुंबई इंडियंस की शुरुआत अच्छी नहीं रही और उसने 17 रनों के स्कोर तक 2 विकेट खो दिए. पहले इंग्लिश खिलाड़ी विल जैक्स (5) को आकाश दीप ने आउट किया. फिर दूसरे ओपनर रियान रिकेल्टन (10) को शार्दुल ठाकुर ने पवेलियन रवाना किया. दो विकेट गिरने के बाद नमन धीर और सूर्यकुमार यादव ने मिलकर पारी को मोमेंटम प्रदान किया. नमन और सूर्यकुमार के बीच तीसरे विकेट के लिए 69 रनों की पार्टनरशिप हुई. नमन धीर 24 बॉल पर 46 रन बनाकर आउट हुए, जिसमें 4 चौके और तीन छक्के शामिल रहे. नमन को स्पिनर दिग्वेश सिंह राठी ने बोल्ड किया. नमन धीर के आउट होने के बाद सूर्यकुमार यादव और 'इम्पैक्ट सब' तिलक वर्मा के बीच चौथे विकेट के लिए 66 रनों की पार्टनरशिप हुई. सूर्यकुमार यादव ने 43 गेंदों पर 67 रन बनाए, जिसमें 9 चौके के अलावा एक सिक्स शामिल रहा. आवेश खान ने सूर्यकुमार यादव को आउट करके इस साझेदारी को तोड़ा. सूर्या के आउट होने के बाद तिलक वर्मा और हार्दिक पंड्या से मुंबई को तूफानी बैटिंग की उम्मीद थी. हालांकि तिलक वर्मा बिल्कुल लय में नहीं दिखे, ऐसे में उन्होंने 19वें ओवर में रिटायर्ड आउट होने का फैसला किया. तिलक ने 24 गेंदों पर 25 रन बनाए. इसके बाद आखिरी ओवर में हार्दिक पंड्या ने पूरी कोशिश की, लेकिन वो मैच को मुंबई के कब्जे में नहीं कर पाए. हार्दिक ने 16 बॉल पर नाबाद 28 रन बनाए, जिसमें दो चौके के अलावा एक सिक्स शामिल रहा. recent visitors 50

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि दान धर्म और परोपकार दाऊ अग्रवाल समाज के स्वभाव में है

रायपुर  दाऊ अमृष कुमार लक्ष्मेश्वर दयाल, छत्तीसगढ़ी अग्रवाल भवन पुरानी बस्ती के लोकार्पण समारोह, छत्तीसगढ़ में दान की अनोखी परंपरा स्थापित करने वाले दानदाताओं के वंशजों और छत्तीसगढ़ी अग्रवाल समाज के केंद्रीय पदाधिकारी के शपथ ग्रहण समारोह मैं पहुंचे प्रदेश के मुखिया मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि दान धर्म और परोपकार दाऊ अग्रवाल समाज के स्वभाव में है। कोरोना काल में जब सब अपने घरों से निकल नहीं पा रहे थे तब छत्तीसगढ़ी अग्रवाल समाज ने सबके भोजन की, विश्वास की और मुस्कान की चिंता की इस समाज ने धर्म शिक्षा स्वास्थ्य शुद्ध पेयजल जैसे विभिन्न आयाम में दान किया। यह अनुकरणीय है।  कोई सोच भी नहीं सकता था ऐसा दान दाऊ कल्याण सिंह अग्रवाल ने किया है। 1728 एकड़ जमीन कृषि विश्वविद्यालय को दान अद्भुत है। अस्पताल का निर्माण आज भी लोगों को लाभ पहुंचा रहा है और एम्स की जमीन दाऊजी की दूर दृष्टि को साबित करती है। ऐसे दाऊजी को नमन है।  लोगों को संबोधित करते हुए रायपुर दक्षिण विधायक सुनील सोनी ने कहा कि आज का कार्यक्रम एक समाज के दायरे में बंद कार्यक्रम नहीं है आज के कार्यक्रम में शहर को शिक्षा स्वास्थ्य संस्कृति धर्म शादी के क्षेत्र में आगे बढ़ाने वाले व दान करने वालों का सम्मान किया जा रहा है कहीं ना कहीं उसकी इस दान के पीछे दाऊ कल्याण सिंह अग्रवाल जी की प्रेरणा है। और यह परंपरा लगातार आगे बढ़े ऐसा इस आयोजन का उद्देश्य है।   इस पूरे आयोजन में रायपुर उत्तर विधायक पुरंदर मिश्रा महापौर मीनल चौबे व नान  अध्यक्ष संजय श्रीवास्तव भाजपा प्रवक्ता नालिनेश ठोकने भी उपस्थित थे। ।  कार्यक्रम के आयोजक छत्तीसगढ़ी अग्रवाल समाज की केंद्रीय अध्यक्ष दाऊ अनुराग अग्रवाल ने बताया कि दानशीलता दिवस का उद्देश्य आज की युवा पीढ़ी जो आभासी दुनिया में जी रही है उन्हें उनके पूर्वजों के योगदान से अवगत कराना है। पूर्वजों ने दान की जो परंपरा रखी थी वर्तमान पीढ़ी उसे बहुत आगे अच्छे से आगे बढ़ा रही है भविष्य की पीढ़ी भी उससे प्रेरणा ले इसलिए ऐसे आयोजन निरंतर किए जाएंगे। अनुराग अग्रवाल ने बताया कि रायपुर अब महानगर हो गया है महानगर के लोगों को यह पता लगे की रायपुर के निर्माण में अग्रवाल समाज, मराठी समाज, ब्राह्मण समाज, बंगाली समाज, सिंधी समाज, सिख समाज सब समाजों ने मिलकर बिना भेदभाव के योगदान दिया है इसलिए यह आयोजन किया गया है।   छत्तीसगढ़ी दाऊ अग्रवाल समाज की तरफ से केंद्रीय अध्यक्ष अनुराग अग्रवाल ने मुख्यमंत्री जी से दानवीर दाऊ कल्याण सिंह अग्रवाल के नाम से राज्य अलंकरण प्रारंभ करने की मांग रखी है। क्योंकि प्रथम मंत्रालय दो कल्याण सिंह मंत्रालय था अतः नया रायपुर में किसी चौराहे या सड़क का नाम दाऊ कल्याण सिंह के नाम से रखने की मांग भी की गई है।   छत्तीसगढ़ी अग्रवाल समाज की अध्यक्ष पद पर  दाऊ अनुराग अग्रवाल सचिव पद पर दाऊ  डॉ जेपी अग्रवाल, कोषाध्यक्ष पद पर  दाऊ अजय अग्रवाल, कार्यकारी अध्यक्ष पद पर दाऊ अजय दानी, उपाध्यक्ष पद पर दाऊ श्याम अग्रवाल, दाऊ गजेंद्र अग्रवाल, दाऊ डॉ राजेश अग्रवाल, श्रीमती सीता अग्रवाल, सह सचिव पद पर दाऊ यशवंत अग्रवाल, दाऊ संतोष अग्रवाल, दाऊ केशव मुरारी अग्रवाल,श्रीमती निहारिका अग्रवाल, महिला प्रतिनिधि के पद पर श्रीमती विंध्य अग्रवाल और युवा प्रतिनिधि के तौर पर दाऊ आशीष अग्रवाल ने मुख्यमंत्री के द्वारा महाराज अग्रसेन के नाम से शपथ ली।   कार्यक्रम आभार प्रदर्शन केंद्रीय सचिव डॉक्टर दाऊ जेपी अग्रवाल ने किया। recent visitors 28

8 साल बाद 50 लाख किसानों से जुड़ी समितियों के होंगे चुनाव, चुनाव 1 मई से 7 सितंबर 2025 तक पांच चरणों में होंगे

भोपाल मध्य प्रदेश में 50 लाख से अधिक किसानों की सदस्यता वाली प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों (पीएसीएस) के चुनाव आठ वर्ष के लंबे अंतराल के बाद अब होने जा रहे हैं। हाई कोर्ट के सख्त निर्देशों के बाद राज्य सरकार ने इन चुनावों को प्राथमिकता दी है। महाधिवक्ता कार्यालय ने इसे अति आवश्यक बताते हुए पांच चरणों में चुनाव कराने का फैसला किया है, जो एक मई से सात सितंबर 2025 के बीच संपन्न होंगे। यह चुनाव गैर दलीय आधार पर होंगे, लेकिन कांग्रेस और भाजपा ने अपनी-अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं।   हाई कोर्ट के निर्देशों ने बढ़ाया दबाव प्रदेश में प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों के चुनाव आखिरी बार 2013 में हुए थे, जिनका कार्यकाल 2018 में समाप्त हुआ। नियमानुसार छह माह पहले चुनाव प्रक्रिया शुरू हो जानी चाहिए थी, लेकिन विधानसभा चुनाव, किसान कर्ज माफी और अन्य कारणों से यह लगातार टलता रहा। कांग्रेस और शिवराज सरकारों के कार्यकाल में भी यह प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ी। इस बीच, वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर प्रशासकों की नियुक्ति की गई, लेकिन सहकारी अधिनियम के अनुसार यह व्यवस्था अधिकतम एक साल तक ही वैध थी। चुनाव न होने से असंतोष बढ़ा और हाई कोर्ट की जबलपुर व ग्वालियर खंडपीठ में कई याचिकाएं दायर हुईं। मार्च में महाधिवक्ता कार्यालय ने सुनवाई के दौरान मुख्य सचिव और सहकारिता विभाग को सुझाव दिया कि चुनाव जल्द कराना जरूरी है। इसके बाद राज्य सहकारी निर्वाचन प्राधिकारी ने कार्यक्रम घोषित किया। पुनर्गठन के बाद पहले चरण में चुनाव चुनाव कार्यक्रम के तहत पहले चरण में उन समितियों को शामिल किया जाएगा, जो पुनर्गठित हो चुकी हैं। भारत सरकार के सहकारिता क्षेत्र के विस्तार के निर्देशों के कारण पहले पुनर्गठन पर जोर दिया गया, लेकिन अब हाई कोर्ट के दबाव में प्रक्रिया तेज की गई है। निर्वाचन प्राधिकारी ने स्पष्ट किया कि सभी चरणों में व्यवस्थित ढंग से मतदान होगा। सबसे पहले रजिस्ट्रीकरण व निर्वाचन अधिकारी को सदस्यता सूची सौंपी जाएगी, जिसके बाद दावा-आपत्ति का निराकरण कर अंतिम सूची जारी होगी। महिलाओं के लिए संचालक मंडल में पद आरक्षित होंगे। आमसभा की सूचना के साथ नामांकन और चुनाव प्रक्रिया पूरी की जाएगी। कांग्रेस-भाजपा का दखल भले ही सहकारिता चुनाव गैर दलीय आधार पर होते हों, लेकिन राजनीतिक दलों की इसमें गहरी दिलचस्पी रहती है। कांग्रेस ने पूर्व मंत्रियों भगवान सिंह यादव और अरुण यादव के नेतृत्व में एक समिति बनाई है, जो चुनावी रणनीति तैयार कर रही है। वहीं, भाजपा का सहकारिता प्रकोष्ठ भी अपने समर्थकों को अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और अन्य संस्थाओं में प्रतिनिधि बनाने के लिए सक्रिय है। दोनों दल गांव स्तर से लेकर राज्य स्तर तक सहकारी संस्थाओं में प्रभाव बढ़ाने की कोशिश में जुटे हैं। चुनाव की प्रक्रिया चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता के लिए कई कदम उठाए जाएंगे। सदस्यता सूची प्रकाशन के बाद विशेष साधारण सम्मेलन बुलाकर अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और प्रतिनिधियों का चयन होगा। पांच चरणों का कार्यक्रम इस प्रकार है: पहला चरण (1 मई-23 जून), दूसरा चरण (13 मई-4 जुलाई), तीसरा चरण (23 जून-22 अगस्त), चौथा चरण (5 जुलाई-31 अगस्त), और पांचवां चरण (14 जुलाई-7 सितंबर)। यह प्रक्रिया समितियों के पुनर्गठन और किसानों की सहभागिता को ध्यान में रखकर तैयार की गई है। recent visitors 23

बस्तर में सुरक्षाबल के जवानों की लगातार कार्रवाई से नक्सली संगठन खौफ, शाह की रणनीति का दिखा असर

रायपुर  छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के खिलाफ लगातार एक्शन हो रहे हैं। सुरक्षाबल के जवान नक्सलियों के गढ़ माने जाने वाले अबूझमाड़ में घुसकर कार्रवाई कर रहे हैं। जिसके बाद नक्सली खौफ में आ गए हैं। ऐसे में नक्सली संगठन की तरफ से शांति की पहल का एक लेटर जारी किया गया है। शांति की पहल को लेकर दावा किया जा रहा है कि नक्सली संगठन अब कमजोर हो गए हैं। केंद्र सरकार भी नक्सलवाद के खात्मे के लिए लगातार सपोर्ट कर रही है। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह लगातार नक्सलवाद के खिलाफ रणनीति बना रहे हैं और उसकी मॉनिटरिंग कर रहे हैं। अमित शाह के डेडलाइन क्या है? छत्तीसगढ़ में नक्सवाद के खात्मे की कमान खुद केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने अपने हाथों में ले रखी है। अमित शाह लगातार नक्सल विरोधी अभियानों की समीक्षा कर रहे हैं और रणनीति भी बना रहे हैं। अमित शाह ने नक्सलवाद के खात्मे के लिए एक डेडलाइन तक की है। शाह ने 31 मार्च 2026 तक देश से नक्सलवाद को खत्म करने की डेट तय की है। यह डेडलाइन तय होने के बाद सुरक्षाबल के जवान ताबड़तोड़ एक्शन कर रहे हैं। सेना की पहुंच उन इलाकों में हो गई है जहां कभी नक्सलियों की बिना इजाजत के कोई बाहरी व्यक्ति कदम नहीं रख सकता था। गृहमंत्री ने दिया है दो टूक जवाब नक्सली संगठन का एक लेटर सामने आया है। इस लेटर में उन्होंने कहा कि सरकार को युद्ध विराम की घोषणा करनी चाहिए। वह शांति से वार्तालाप करना चाहते हैं। हालांकि उन्होंने उसके लिए शर्त रखी है कि सरकार सेना की कार्रवाई रोके। नए इलाकों में बनाए गए कैंप को हटा दिया जाए। नक्सलियों की शर्त पर राज्य के गृहमंत्री विजय शर्मा दो दो टूक जवाब दे चुके हैं कि नक्सली संगठन हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौटें उन्होंने कहा कि किसी भी शर्त पर बातचीत नहीं होगी। क्यों शांति चाहते हैं नक्सली नक्सलियों की शांति पहल को लेकर बस्तर के रहने वाले वरिष्ठ साहित्यकार रजीव रंजन ने नवभारत टाइम्स डॉट कॉम को बताया कि- ऐसा पहली बार हुआ है जब नक्सली इतने कमजोर हैं। जिस तरह से 2024 में नक्सलियों के खिलाफ ऑपरेशन हुए उसके बाद इस साल की शुरुआत में जवानों ने माओवादियों के बड़े कैडर को मार गिराया हो उससे वह खौफ में आ गए हैं। उन्होंने कहा कि यह शांति पहल नक्सलियों का एक ट्रैप है। इस ट्रैप का फायदा उठाकर वह अपने लिए समय की मांग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह खुद को और अपने संगठन के टॉप लीडरों की बचाने की नक्सलियों की एक साजिश है। इस साजिश के जरिए नक्सली सरकार को शांतिवार्ता में उलझाकर जवानों की कार्रवाई रोकना चाहते हैं। वह जिस युद्ध विराम की बात कर रहे हैं वह खुद उन्हें करना चाहिए। सरेंडर करके सरकार की जो पुनर्वास नीति है उसका लाभ उठाना चाहिए। हथियारों और लीडरों की कमी उन्होंने कहा कि सुरक्षाबल के जवानों ने अबूझमाड के उन इलाकों में कैंप स्थापित कर लिए हैं जिन्हें नक्सली अपना सबसे सुरक्षित ठिकाना मानते थे। नक्सलियों के खिलाफ जवान लगातार कार्रवाई ही नहीं कर रहे हैं उनके हथियार और विस्फोटकों को भी जब्त कर रहे हैं जिससे संगठन के पास आधुनिक हथियारों की भी कमी हो गई है। ऐसे में वह शांति का ट्रैप बिछाने की कोशिश में हैं। वह अपने टॉप लीडरों को सुरक्षित स्थानों में पहुंचाना चाहते हैं। पहली बार ऐसा एक्शन उन्होंने कहा कि इससे पहले हम बस्तर में देखते थे कि सरकार और जवान शांति के लिए पहल करते थे। लेकिन इस बार उल्टा है। जवान और सरकार ताबड़तोड़ कार्रवाई कर रहे हैं और नक्सली शांति की बात कर रहे हैं। वह भारी दबाव में हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को शांति पहल करनी चाहिए लेकिन बस्तर में जवानों की कार्रवाई तब तक नहीं ठहरनी चहिए जब तक की नक्सलवाद पूरी तरह से घुटने नहीं टेक देता है। recent visitors 53

बागेश्वर धाम में भारत का पहला हिन्दूग्राम, हिंदू गांव में मकानों की नहीं हो सकेगी खरीद-फरोख्त, गैर-हिंदुओं का प्रवेश वर्जित रहेगा

छतरपुर मध्य प्रदेश के छतरपुर में बागेश्वर धाम पीठ के प्रमुख धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने 2 अप्रैल को हिंदू गांव की आधारशिला रखी. इसके साथ ही बागेश्वर धाम के निकट देश के पहले हिंदू गांव के निर्माण की तैयारियां आधिकारिक रूप से शुरू हो गई हैं, जो दो साल में बनकर तैयार हो जाएगा. इस गांव में रहने वालों की जीवनशैली वैदिक संस्कृति पर आधारित होगी. ​देश के पहले हिंदू गांव के स्थापना समारोह में धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री उर्फ बाबा बागेश्वर ने कहा कि हिंदू राष्ट्र की संकल्पना हिंदू घरों, हिंदू गांवों, हिंदू जिलों और हिंदू राज्यों की स्थापना के बाद ही पूरी होगी. योजना के अनुसार इस गांव में 1,000 परिवार रहेंगे और इसे बागेश्वर धाम परिसर में विकसित किया जाएगा. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा कि बागेश्वर धाम जनसेवा समिति हिंदू और सनातन धर्म के अनुयायियों वाले इस गांव के लिए भूमि उपलब्ध कराएगी और इसे दोबारा बेचा या खरीदा नहीं जा सकेगा. बाबा बागेश्वर ने कहा, 'इस भूमि पर भवन बनाए जाएंगे तथा वहां रहने वाले लोगों के लिए कुछ बुनियादी शर्तें तय की जाएंगी. महत्वपूर्ण बात यह है कि इस गांव में गैर-हिंदुओं का प्रवेश वर्जित रहेगा. हालांकि, सनातन धर्म में आस्था रखने वालों का स्वागत है. हिंदू गांव में घर एग्रीमेंट के आधार पर उपलब्ध कराए जाएंगे.' हिंदू गांव में मकानों की नहीं हो सकेगी खरीद-फरोख्त उन्होंने बताया कि हिंदू गांव की आधारशिला रखे जाने के पहले ही दिन दो व्यक्तियों ने अपनी सहमति दे दी है तथा भवन अधिग्रहण के लिए कागजी कार्रवाई पूरी कर ली है. बाबा बागेश्वर ने कहा कि हिंदू गांव में लोग जिस मकान में रहेंगे उसकी खरीद-फरोख्त का हक उन्हें नहीं मिलेगा. इसके पीछे की वजह यह है कि विधर्मी लोभ-लालच देकर किसी भी स्तर पर जाकर किसी भी कीमत पर मकान खरीदने के प्रयास करते हैं. अक्सर ऐसा देखने में भी आता है कि लालच में आकर लोग धर्मविरोधी ताकतों के सामने खुद को सरेंडर कर देते हैं. इसलिए बागेश्वर धाम का हिंदू ग्राम क्रय-विक्रय से प्रतिबंधित रहेगा. जहां सनातन मूल्य नहीं, वहां पीढ़ियां खराब हो जाती हैं इससे पहले धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने एक वीडियो संदेश जारी किया था, जिसमें उन्होंने कहा था कि हिंदू राष्ट्र बनाने से पहले हर घर और हर गांव में हिंदू धर्मावलंबी बनाने का काम शुरू होगा. यह अभियान इसी महीने शुरू होगा. इस अभियान के लिए बागेश्वर धाम से टीमें रवाना हो चुकी हैं. उन्होंने कहा, 'जहां बारिश नहीं होती, वहां फसलें खराब हो जाती हैं. इसी तरह, जहां सनातन मूल्य मौजूद नहीं हैं, वहां पीढ़ियां खराब हो जाती हैं. हम धर्मनिष्ठ हिंदू बनाने के लिए काम करेंगे. प्रत्येक ग्राम पंचायत में एक प्रधान नियुक्त किया जाएगा.' धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा कि इस वीडियो के माध्यम से देश में नई क्रांति खड़ी होने वाली है. हम उसकी घोषणा सार्वजनिक रूप से कर रहे हैं. उन्होंने कहा, 'हम कट्टर हिंदू बनाने का काम करेंगे. सभी ग्राम पंचायतों में एक-एक प्रभारी होगा, जो एक मंडल प्रभारी से जुड़ा होगा. 10 गांवों का एक मंडल बनाया जाएगा, यह जिला अध्यक्ष से जुड़ा होगा. सभी प्रभारियों को तीन-चार महीने में बागेश्वर धाम आकर बात करनी होगी. मंडल जहां काम कर रहे हैं, वहां कथाएं भी होंगी.'   recent visitors 44

UPI के बढ़ते चलन ने घटाई ATM की मांग, ग्रामीण इलाकों पर सबसे ज्यादा असर

मुंबई डिजिटल युग के इस दौर में, एक तरफ जहां कैशलेस ट्रांजेक्शन अपना तेजी से स्थान बना रही है और लोगों की रोमर्रा की जिंदगी को आसान बना रही है। वहीं दूसरी तरफ लोग अब कैश के साथ ही साथ एटीएम का प्रयोग कम कर रहे हैं। इस बदलाव के पीछे सबसे प्रमुख कारण UPI पेमेंट्स का उभार है। UPI यानी यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस के माध्यम से लेन-देन आसान और तेज हो गया है, जिससे कैश निकासी की आवश्यकता में कमी आई है। देश में डिजिटल पेमेंट का चलन तेजी से बढ़ रहा है। जिसके चलते एटीएम के इस्तेमाल में गिरावट आई है। इससे जुड़ी हुई आरबीआई ने रिपोर्ट भी पब्लिश की है। भारत में ATM की संख्या में लगातार हो रही गिरावट RBI के ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार,देश में एटीएम की संख्या में भारी कमी आई है। भारत में ATM की संख्या सितंबर 2023 में 219,000 से घटकर सितंबर 2024 में 215,000 हो गई है। यह गिरावट मुख्य रूप से ऑफ-साइट ATM में कमी के कारण हुई है। ये ATM सितंबर 2022 में 97,072 से गिरकर सितंबर 2024 में 87,638 तक पहुंच गए। ATM की संख्या में कमी के कारण वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने लोकसभा में बताया कि सरकारी बैंकों ने एटीएम बंद करने के लिए कई कारण बताए हैं। इनमें बैंकों का एकीकरण, एटीएम का कम इस्तेमाल, व्यावसायिक लाभ की कमी और एटीएम का स्थानांतरण शामिल हैं। बैंकर्स का कहना है कि डिजिटल भुगतान के बढ़ते चलन और यूपीआई के उभरने से नकदी का उपयोग कम हुआ है, जिससे एटीएम का संचालन अव्यावहारिक हो गया है। UPI का बढ़ता दबदबा पिछले नौ वर्षों में डिजिटल भुगतान और वित्तीय समावेशन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। जन धन योजना, मोबाइल इंटरनेट और यूपीआई के प्रसार ने इस बदलाव को बढ़ावा दिया है। पिछले पांच वर्षों में यूपीआई लेनदेन में 25 गुना वृद्धि हुई है। वित्त वर्ष 2018-19 में जहां 535 करोड़ यूपीआई लेनदेन हुए, वहीं 2023-24 में यह बढ़कर 13,113 करोड़ हो गए। इस वित्त वर्ष (सितंबर तक) यूपीआई के जरिए 122 लाख करोड़ रुपए के 8,566 करोड़ से अधिक ट्रांजैक्शन दर्ज हुए हैं। डिजिटल इंडिया की ओर बढ़ता कदम उपभोक्ता अब सब्जियों से लेकर ऑटो सवारी और महंगी खरीदारी तक के लिए यूपीआई का उपयोग कर रहे हैं। इस डिजिटल क्रांति ने भारत को नकदी से डिजिटल भुगतान की ओर तेजी से बढ़ाया है। क्यों कम हो रहे ATM मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, देश में पिछले काफी समय से डिजिटल पेमेंट पर जोर दिया जा रहा है। डिजिटल पेमेंट करना लोगों को काफी आसान भी लगता है, इसलिए कम समय में ही यह पूरे देश में काफी लोकप्रिय हो गया है। बैंकों के घटती एटीएम की संख्या में काफी बड़ा रोल यूपीआई का भी है। पिछले कुछ समय से एटीएम के पॉपुलैरिटी में काफी कमी आई है। लोगों तक एटीएम की पहुंच अभी भी कम है, रिपोर्ट्स के अनुसार, देश में प्रति 100,000 लोगों पर केवल 15 एटीएम हैं। RBI के नियमों का असर देश में नकदी अभी भी भारत की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। वित्त वर्ष 22 में 89% लेन-देन और सकल घरेलू उत्पाद का 12% हिस्सा नगद लेन देन का ही था। लेकिन एटीएम लेन-देन और इंटरचेंज शुल्क पर RBI के नियमों ने ATM पर अपना गहरा असर डाला है। इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, यह बदलाव डिजिटल भुगतान विशेष रूप से यूपीआई की बढ़ती लोकप्रियता और डिजिटल परिवर्तन पर रणनीतिक ध्यान केंद्रित करने से प्रेरित है। आइए सबसे पहले (Automated Teller Machine- ATM) के इतिहास पर एक नजर डालते हैं: भारत में पहला एटीएम साल 1987 में HSBC ने मुंबई में लगाया था. उसके अगले 10 वर्षों में यानी 1997 तक देश में करीब 1500 एटीएम खुले. अगर दुनिया में पहला ATM की बात करें तो 27 जून 1967 को लंदन के एनफील्ड में एक कैश मशीन का उपयोग किया गया था, जिसे दुनिया की पहली एटीएम के रूप में मान्यता प्राप्त है. इस ATM को बार्कलेज बैंक ने शुरू किया था. 80 के दशक के दौरान दुनिया के कई बड़े देशों में ATM मुख्यधारा में शामिल हो गए थे. इसके बाद साल 1997 में इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (IBA) ने 'स्वधन' नामक से पहला ज्वाइंट ATM नेटवर्क शुरू किया, जिसे इंडिया स्विच कंपनी (ISC) ने संचालित किया. हालांकि, यह 2003 में बंद हो गया. उसके बाद 2004 में नेशनल फाइनेंशियल स्विच (NFS) की स्थापना हुई, जो आज भारत का सबसे बड़ा ATM नेटवर्क है, जिसे नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) संचालित करता है. आज भारत में कुल इतने ATM जनवरी 2022 तक, NFS नेटवर्क के तहत भारत में 2,55,000 से अधिक ATM थे, जिसमें नकदी जमा मशीनें और रिसाइक्लर शामिल थे. रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) और NPCI के आंकड़ों के आधार पर 2023 तक भारत में लगभग 2,60,000 से 2,70,000 ATM होने का अनुमान था. फिलहाल भारत में लगभग 2.8 से 3 लाख ATM होने की संभावना है. फिलहाल देश में एक लाख लोगों पर 15 ATM हैं.  ATM की संख्या और प्रभाव के आधार पर SBI सबसे बड़ा ऑपरेटर है, लेकिन कैश मैनेजमेंट में CMS का दबदबा है. भारत में अब तक कितने ATM बंद हो चुके हैं… RBI के आंकड़ों के अनुसार, भारत में ATM की संख्या सितंबर 2023 में 2,19,000 थी, जो सितंबर 2024 में घटकर 2,15,000 हो गई.  इसका मतलब ये है कि इस अवधि में करीब 4 हजार ATM बंद हुए. यही नहीं, साल 2017 के बाद से ही ATM की संख्या में बढ़ोतरी धीमी हो गई, और साल-दर-साल इसका दायरा बढ़ता गया है. खासकर 2022 के बाद से ऑफ-साइट ATM (बैंक परिसर से बाहर स्थित) की संख्या में लगातार गिरावट आई है. यह डिजिटल भुगतान (जैसे UPI) के बढ़ते उपयोग, ATM संचालन की उच्च लागत, और बैंक शाखाओं के विलय के कारण हो रहा है. क्यों बंद हो रहे हैं ATM? यानी सबकुछ ग्राहकों पर निर्भर करता है, अगर ATM का खूब उपयोग होगा तो फिर कारोबार घाटे में नहीं चलेगा, वहीं अगर एक ATM महीने में 300-500 लेनदेन करता है, तो यह घाटे में भी जा सकता है. ये कड़वा सच है, देश में ATM का उपयोग तेजी … Read more

खुशखबरी! दिल्लीवालों का इंतजार खत्म होने जा रहा, आज से दिल्ली में आयुष्मान भारत योजना लागू

नई दिल्ली खुशखबरी! दिल्लीवालों का इंतजार खत्म होने जा रहा है। आज यानी शनिवार से दिल्ली में आयुष्मान भारत योजना लागू हो सकती है। दिल्ली सरकार ने इसकी तैयारी कर ली है। जानकारी के मुताबिक पहले चरण में एक लाख लोगों का दिल्ली में आयुष्मान कार्ड बनेगा। इसके बाद तेजी से इस योजना को आगे बढ़ाते हुए सभी पात्र दिल्ली वालों को इसमें शामिल कर लिया जाएगा। आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के लिए केंद्र और दिल्ली सरकार के बीच समझौते पत्र (MOU) साइन होने वाले हैं। इसके बाद 10 अप्रैल तक कम से कम 1 लाख लोगों के आयुष्मान कार्ड बनाने का लक्ष्य है। बीजेपी ने दिल्ली में विधानसभा चुनावों से पहले ही ऐलान किया था कि सत्ता में आने के बाद इस योजना को लागू किया जाएगा। आयुष्मान योजना के तहत दिल्ली में 5 लाख + 5 लाख यानी 10 लाख रुपये का मेडिकल कवर मिलेगा। सबसे पहले किसके बनेंगे आयुष्मान कार्ड केंद्र सरकार की आयुष्मान योजना गरीब व जरूरतमंद लोगों को बेहतर इलाज देने के लिए है। दिल्ली में भी इस योजना का लाभ इन्हीं लोगों को मिलेगा। जानकारी के मुताबिक जिन लोगों के पास अंत्योदय अन्न योजना (AAY) कार्ड है, उन्हीं के कार्ड पहले बनाए जाएंगे। इसके बाद बीपीएल कार्डधारकों के नंबर आएंगे। माना जा रहा है कि शुरुआत में एक लाख अंत्योदय कार्डधारकों को इस योजना का लाभ होने वाला है। आयुष्मान योजना के लिए बजट दिल्ली में आयुष्मान योजना लागू करने के लिए दिल्ली सरकार ने 2144 करोड़ रुपये का बजट पास किया हुआ है। आयुष्मान कार्ड बनवाने पर अन्य राज्यों में 5 लाख रुपये तक का मेडिकल कवर मिलता है। दिल्ली में यह मेडिकल कवर 10 लाख रुपये है। इसमें से 7 लाख का खर्च दिल्ली सरकार वहन करेगी। दिल्ली में कितनी तरह के राशन कार्ड दिल्ली में वर्तमान में दो तरह के राशन कार्ड बनते हैं। पहला: Priority Category या बीपीएल कार्ड, जो गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले लोगों के बनते हैं। इन्हें PR कार्ड भी कहा जाता है। दूसरा अंत्योदय अन्न कार्ड यानी AAY कार्ड। ये कैटेगरी गरीबी रेखा के मामले में सबसे निचले पायदान पर मानी जाती है। इन्हें प्रति परिवार 35 किलो राशन हर महीने दिया जाता है। द‍िल्‍ली में क‍ितने AAY राशन कार्ड द‍िल्‍ली में 72,77,995 राशन कार्ड को मंजूरी म‍िली हुई है। केंद्र सरकार द्वारा तय संख्या के अनुसार दिल्ली में 1,56,800 AAY राशन कार्ड को मंजूरी मिली हुई है। ये कार्ड Poorest of Poor वर्ग में आने वाले सबसे गरीब वर्ग का ही बनता है। टाइम्स ऑफ इंडिया की एक खबर के मुताबिक जनवरी, 2025 में दिल्ली में AAY राशन कार्ड की संख्या महज 66,532 ही थी। अंत्योदय अन्न योजना राशन कार्ड के अंतर्गत प्रति परिवार 2 रुपये किलो के हिसाब से 25 किलो गेहूं और 3 रुपये प्रति किलो के हिसाब से 10 किलो चावल मिलता है। इसके अलावा 13.50 रुपये किलो के हिसाब से 6 किलो चीनी मिलती है। recent visitors 52