मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश की 2500 छोटी-बड़ी औद्योगिक इकाइयों को अंतरित की 1778 करोड़ रुपए की उद्योग प्रोत्साहन राशि

दूर कर दी हैं, हमने सारी बाधाएं आप उद्योग लगाएं, सरकार करेगी मदद: मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विश्वास पर खरी उतरी प्रदेश सरकार जीआईएस में मिले 30 लाख करोड़ के निवेश मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश की 2500 छोटी-बड़ी औद्योगिक इकाइयों को अंतरित की 1778 करोड़ रुपए की उद्योग प्रोत्साहन राशि जीआईएस के बाद निवेशकों को प्रोत्साहित करने की अगली कड़ी औद्योगिक ईकाइयों का भूमि-पूजन और उन्हें प्रोत्साहन राशि भेजना, अब जिला स्तर पर सेक्टर आधारित इंडस्ट्री कॉन्क्लेव की होगी शुरुआत, 27 अप्रैल को इंदौर में पहली आईटी सेक्टर कॉन्क्लेव भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि आज मध्यप्रदेश एक नई उड़ान पर है। सरकार की रीति-नीति से निवेशकों में विश्वास का माहौल बना है। प्रदेश में उद्यमी, उद्योगपति, व्यापारी, व्यवसायी सब उत्साहित हैं। हम उद्यमशीलता को बढ़ाने के लिए एक नई धारा, एक नई ऊर्जा और प्रतिबद्धता के साथ आगे बढ़ रहे हैं। प्रदेश में बिजनेस को सहज बनाने के लिए हमने सारी बाधाएं, सारी रूकावटें दूर कर दी हैं। आप बस उद्योग लगाएं, हमारी सरकार उद्योग लगाने से लेकर इसे संचालित करने तक आपकी हर जरूरी मदद करेगी, प्रोत्साहन इन्सेटिव देगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंगलवार को औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग की ओर से एक निजी होटल में आयोजित उद्योग निवेश सब्सिडी के वितरण समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश में स्थापित करीब 2500 सूक्ष्म, लघु और मध्यम श्रेणी की औद्योगिक इकाइयों को 1075 करोड़ और छोटे-बड़े (वृहद श्रेणी के) उद्योगों को करीब 703 करोड़ रूपए, इस प्रकार कुल 1778 करोड़ रुपए की उद्योग निवेश सब्सिडी हस्तांतरित की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रिमोट दबाकर सिंगल क्लिक से डायरेक्ट बेनेफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के जरिए सब्सिड़ी राशि उद्यमियों (निवेशकों) के बैंक खाते में ट्रांसफर की। उन्होंने कहा कि प्रदेश में उद्यमियों का बढ़ता हौसला ही हमारी पूंजी है। जीआईएस से हमें बहुत अच्छा प्रतिसाद मिला है। मध्यप्रदेश में हर निवेशक का स्वागत है, सम्मान है। हमने छोटे-बड़े सभी उद्योगों को प्रोत्साहन दिया है, नए वित्त वर्ष के सालाना राज्य बजट में भी हमने सबका ध्यान रखा है। उन्होंने कहा कि बीते साल हमने 5 हजार 260 करोड़ की उद्योग निवेश सब्सिडी राशि पूरी पारदर्शिता के साथ डीबीटी के जरिए ही निवेशकों के खातों में हस्तांतरित की। यह सिलसिला आगे भी जारी रहेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश में औद्योगिक विकास को नई ऊंचाई प्रदान करने के लिए राज्य सरकार ने नवीन औद्योगिक नीति बनाई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में भोपाल में ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट 2025 का सफल आयोजन हुआ, जिसमें 30 लाख 77 हजार करोड़ से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। सरकार ने संभागीय स्तर पर औद्योगिक इकाइयों का भूमि-पूजन और लोकार्पण प्रारंभ कर दिया है। राज्य सरकार द्वारा औद्योगिक इकाइयों का भूमि-पूजन और उन्हें प्रोत्साहन राशि ट्रांसफर करना, जीआईएस के बाद निवेशकों को प्रोत्साहित करने की अगली कड़ी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सरकार ने प्रदेश में पहली बार निवेश की संभावनाओं को तलाशा और संभागीय स्तर पर आयोजित की गई 7 रीजनल इन्वेस्टर्स समिट ने नई ऊंचाइयां प्राप्त कीं। प्रदेश में निवेश एवं उद्योगों के विकास में देश-दुनिया के उद्योगपतियों ने उत्साह दिखाया। प्रधानमंत्री मोदी ने जीआईएस के उद्घाटन-सत्र में उद्योगपतियों और व्यापारियों को निवेश के मंत्र दिए। उन्होंने कहा था कि अपार संभावनाओं वाले मध्यप्रदेश में निवेश का यही समय सही है। जीआईएस के सफल आयोजन पर उद्योग विभाग और निवेशकों का अभिनंदन करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जीआईएस में प्राप्त निवेश का आंकड़ा देखा जाए तो राज्य सरकार और निवेशक दोनों ही प्रधानमंत्री मोदी के विश्वास पर खरे उतरे हैं। उद्योगों को प्रोत्साहन प्रदान करने के लिए डीबीटी से राशि भेजी जा रही है। सरकार छोटे-बड़े निवेशक और उद्योगपतियों में भेदभाव नहीं करती है। सरकार हर एक को उद्योग प्रोत्साहन राशि प्रदान कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के विकसित भारत@2047 के संकल्प के अनुरूप मध्यप्रदेश सरकार ने भी 5 साल में राज्य का बजट दोगुना करने का लक्ष्य रखा है। वर्ष 2025-26 के लिए सरकार ने 4 लाख 21 हजार करोड़ रुपए का बजट पेश किया है। इसमें औद्योगिक विकास के लिए बजट राशि में डेढ़ गुना की वृद्धि की गई है। राज्य सरकार ने वर्ष 2025 को उद्योग वर्ष के रूप में घोषित किया है। पूरे साल औद्योगिक विकास की गतिविधियां प्रदेशभर में संचालित की जाएंगी। 27 अप्रैल को इंदौर में होगी आईटी सेक्टर की कॉन्क्लेव मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जीआईएस और आरआईसी के सफल आयोजन के बाद अब प्रदेशभर में जिला स्तर पर सेक्टर आधारित इंडस्ट्री कॉन्क्लेव की शुरुआत की जा रही है। ऐसी पहली आईटी सेक्टर की कॉन्क्लेव आगामी 27 अप्रैल को इंदौर में आयोजित की जाएगी। राज्य सरकार प्रदेश के अंदर औद्योगिक गतिविधियां संचालित करेगी, साथ ही रोड-शो के माध्यम से प्रदेश के बाहर से भी निवेशकों को आकर्षित किया जाएगा। मध्यप्रदेश के सभी 10 संभागों में उद्योगों के लोकार्पण और भूमि-पूजन की शुरुआत चंबल के भिंड से हो चुकी है। इसके बाद उज्जैन में 27 इकाइयों का दूसरा भूमि-पूजन कार्यक्रम किया गया है। हमारी सरकार उद्योग-व्यापार को नई दिशा प्रदान करने के लिए अंतरराष्ट्रीय बिजनेस कंसल्टेंट समेत क्षेत्र के विशेषज्ञों से सलाह ले रही है। प्रदेश में औद्योगिक विकास का यह सिलसिला निरंतर जारी रहेगा। सबका साथ सबका विकास ही डबल इंजन सरकार की परिकल्पना: मंत्री सारंग खेल एवं युवा कल्याण तथा सहकारिता मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश में नई औद्योगिक क्रांति की शुरुआत हुई है। प्रदेश हर क्षेत्र में विकास के नए आयाम को छूने की ओर बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव जो कहते हैं, वो करके दिखाते हैं। राष्ट्र के साथ प्रदेश की अर्थव्यवस्था में तेजी आ रही है। सबका साथ-सबका विकास और राष्ट्र निर्माण का संकल्प यही डबल इंजन सरकार की परिकल्पना है। ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के सफल आयोजन से मध्यप्रदेश के विकास का एक नया मार्ग प्रशस्त हुआ है। उद्योग स्थापित करने और उन्हें बेहतर ढंग से चलाने के लिए हमारी सरकार पूरी मदद दे रही है। 31 मार्च 2025 तक … Read more

पंजाब किंग्स ने लखनऊ सुपर जायंट्स को घर में 8 विकेट से हार दिया , प्लेयर ऑफ द मैच प्रभसिमरन सिंह बने

लखनऊ इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) 2025 के मैच नंबर-13 में पंजाब की टीम ने लखनऊ सुपर जायंट्स (LSG) को 8 विकेट से करारी शिकस्त दी. इस मुकाबले में टॉस जीतकर पंजाब की टीम ने पहले गेंदबाजी करने का फैसला लिया था. पहले बल्लेबाजी करते हुए लखनऊ की टीम ने 7 विकेट खोकर 171 रन बनाए थे. बदोनी और अब्दुल समद ने शानदार बल्लेबाजी की थी. इसके जवाब में उतरी पंजाब की शुरुआत अच्छी नहीं रही. लेकिन प्रभसिमरन, अय्यर और नेहाल के ताबड़तोड़ अंदाज के दम पर पंजाब ने 17वें ओवर में ही जीत हासिल की. उन्होंने लखनऊ को 8 विकेट से हराया. अय्यर ने छक्के से अपना अर्धशतक पूरा किया और अपनी टीम को जीत दिलाई. यह मैच लखनऊ के अटल बिहारी वाजपेयी इकाना क्रिकेट स्टेडियम में खेला गया. ऐसे रही लखनऊ की पारी पहले बल्लेबाजी करने उतरी लखनऊ की टीम की शुरुआत ही बेहद खराब रही. पहले ही ओवर की चौथी गेंद पर मिचेल मार्श अपना विकेट गंवा बैठे. इसके बाद चौथे ओवर में मारक्रम भी 28 रन बनाकर आउट हो गए. अगले ही ओवर में पंत को मैक्सवेल ने शिकार बना लिया. वो केवल 2 रन ही बना सके. इसके बाद पूरन ने कुछ अच्छे शॉट लगाए और 44 रन की पारी खेली लेकिन चहल ने उन्हें अपना शिकार बनाया. वहीं, 16वें ओवर में डेविड मिलर भी आउट हो गए. इसके बाद मिलर और बदोनी ने शानदार बल्लेबाजी की. बदोनी ने 41 और समद ने 27 रनों की पारी खेली. जिसके दम पर लखनऊ ने 20 ओवर में 7 विकेट खोकर 171 रन बनाए. पंजाब ने ऐसे किया चेज 172 रनों के जवाब में उतरी पंजाब की शुरुआत धमाकेदार रही. प्रियांश आर्या भले ही 8 रन बनाकर तीसरे ही ओवर में आउट हो गए. लेकिन प्रभसिमरन सिंह ने अपना  आक्रामक अंदाज नहीं छोड़ा. प्रभसिमरन ने 34 गेंद में 69 रनों की ताबड़तोड़ पारी खेलकर लखनऊ से ये मैच छीन लिया. वहीं, श्रेयस अय्यर ने सधी हुई बल्लेबाजी की. अय्यर ने नाबाद 52 रन बनाए. वहीं, नेहाल ने भी 43 रनों की पारी खेली.  इसकी बदौलत पंजाब ने 3.5 ओवर शेष रहते ही ये मुकाबला 8 विकेट से जीत लिया. प्रभसिमरन सिंह बने मैच के हीरो लखनऊ से जीत के लिए मिले 172 रनों के टारगेट का पीछा करने के लिए पंजाब की ओर से प्रभसिमरन सिंह और प्रियांश आर्य ने पारी की शुरुआत की. आर्य 8 रन बनाकर चलते बने लेकिन सिंह ने धमाकेदार पारी खेलते हुए अर्धशतक लगाया. उन्होंने 23 बॉल में 6 चौके और 3 छक्कों के साथ अपना अर्धशतक पूरा किया. प्रभसिमरन ने 34 बॉल में 9 चौके और 3 छक्कों के साथ 69 रनों की पारी खेली. 27 करोड़ की कीमत वाले ऋषभ पंत फिर फ्लॉप! सबसे महंगे खिलाड़ी सबसे फीका प्रदर्शन बता दें कि ऋषभ पंत को लखनऊ की टीम ने 27 करोड़ की मोटी रकम देकर अपनी टीम मे शामिल किया था. लेकिन पंत की बल्लेबाजी ने फैंस को निराश ही किया है. अबतक खेले तीन मैच में पंत के बल्ले से कुल 17 रन ही निकले हैं. ऐसा रहा है प्रदर्शन लखनऊ ने इस सीजन का आगाज दिल्ली कैपिटल्स के साथ खेले गए मुकाबले से किया था. अपने इस पहले मैच में ऋषभ पंत खाता भी नहीं खोल सके थे. कुलदीप यादव ने उन्हें अपना शिकार बनाया था. वहीं, दूसरे मैच में भी पंत केवल 15 रन बना सके थे. हर्षल पटेल ने उन्हें आउट किया था. तीसरे मैच में जब टीम अपने होमग्राउंड पर खेल रही थी तो पंत से एक बड़ी पारी की उम्मीद थी. लेकिन पंत केवल 2 रन बनाकर मैक्सवेल का शिकार हो गए. वो ऐसे समय पर अपना विकेट गंवाकर गए जब लखनऊ पावरप्ले में ही दो विकेट गंवा चुकी थी. यह मुकाबला आईपीएल इतिहास के सबसे महंगे (ऋषभ पंत) और दूसरे सबसे महंगे खिलाड़ी (श्रेयस अय्यर) के बीच है. ऋषभ पंत को आईपीएल 2025 की मेगा नीलामी में एलएसजी ने 27 करोड़ रुपये में खरीदा था, जबकि श्रेयस अय्यर 26.75 करोड़ रुपये में पंजाब किंग्स के साथ जुड़े. recent visitors 34

MP के रीवा शहर में बनेगा कैंसर अस्पताल, अब मरीजों को नहीं जाना होगा भोपाल

रीवा मध्य प्रदेश को जल्द ही एक और कैंसर अस्पताल की सौगात मिलने वाली है, इस बात की जानकारी डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ला ने दी है. उन्होंने बताया कि कैंसर अस्पताल के लिए तैयारियां शुरू हो गई हैं, एक से डेढ़ साल के बीच ही अस्पताल बनकर तैयार हो जाएगा, वहीं अस्पताल के लिए मशीनों के एडवांस में ऑर्डर भी दे दिए गए हैं. यह कैंसर अस्पताल में विंध्य अंचल में खुलेगा ऐसे में अब यहां के मरीजों को भोपाल या इंदौर जाने की जरुरत नहीं होगी, क्योंकि उन्हें उनके ही घर में कैंसर का इलाज मिलना शुरू हो जाएगा.  कैंसर एक खतरनाक और जानलेवा बीमारी है। यह जिसे भी हो जाए उसके परिवार को तबाह करके रख देती है। समय पर यदि इसका इलाज ना मिले, तो यह धीरे-धीरे शरीर को नुकसान पहुंचा कर उसकी जान ले सकती है। कैंसर का नाम सुनते ही लोगों की हक्की-बक्की गुम हो जाती है। कैंसर का इलाज काफी महंगा भी है, लेकिन कुछ ऐसे भी संस्थान है, जहां फ्री में या फिर बहुत ही कम पैसे में इसका इलाज कराया जाता है। जो लोग कैंसर से पीड़ित हो जाते हैं, उन्हें जीवन भर डॉक्टर की निगरानी में रहना पड़ता है। इसी कड़ी में मध्य प्रदेश के रीवावासियों के लिए खुशखबरी है। बता दें कि जिले में कैंसर अस्पताल बनाने का कार्य शुरू कर दिया गया है। उम्मीद है कि आने वाले 1 से डेढ़ साल में यहां कैंसर अस्पताल बनकर तैयार हो जाएगा। स्थानीय लोगों को फायदा मीडिया रिपोर्ट से मिली जानकारी के अनुसार, यहां निर्माणाधीन कैंसर अस्पताल के लिए मशीनों के एडवांस आर्डर भी दे दिए गए हैं। जिसकी जानकारी खुद मध्य प्रदेश के डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल ने दी है। उन्होंने बताया कि काफी लंबे समय से इस प्रोजेक्ट पर विचार किया जा रहा था, जिसे ध्यान में रखते हुए इस अस्पताल को बनाने का निर्णय लिया गया। जिसमें पहले 200 बेड की व्यवस्था की जाएगी। इस अस्पताल के बनने से स्थानीय लोगों को काफी राहत मिलेगी। मिलेगा बेहतर इलाज रीवा के लोगों को इलाज के लिए टाटा मेमोरियल या फिर भोपाल एम्स जाना पड़ता था, लेकिन रीवा में ही कैंसर अस्पताल बनने के बाद उनकी यह परेशानी दूर हो जाएगी। यहां उन्हें बेहतर इलाज मिल पाएगा। करोड़ों की लागत से बन रहे इस अस्पताल में मरीज को बहुत सारी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएगी। कैंसर की अस्पताल में 20 से 25 करोड़ की लागत की कई मशीन लगाई जाएगी। जिसकी मदद से पहले स्टेज में ही कैंसर का पता लगाया जाएगा। साथ ही इसका इलाज भी शुरू कर दिया जाएगा। एक से डेढ़ साल में बनेगा अस्पताल के बनने से रीवा के लोगों को अब इलाज के टाटा मेमोरियल और भोपाल एम्स नहीं जाना पड़ेगा। रीवा में ही उन्हें बेहतर इलाज हो पाएगा, अगले एक से डेढ़ साल में कैंसर अस्पताल बनकर तैयार हो जाएगा। करोड़ों रुपयाें की मशीनों से होगा इलाज बता दें कि, कैंसर के इलाज के लिए कुछ महत्वपूर्ण मशीनों की जरूरत होती है। जिनमें लीनियर एक्सीलरेटर, कोबाल्ट मशीन, पेट स्कैन समेत ब्रेकीथेरेपी मशीन भी शामिल है। अकेले लीनियर एक्सीलरेटर मशीन की कीमत 50 से 60 करोड़ रुपए की है। recent visitors 37

भारतीय महासागर के मध्य से ही पूरे चीन को भारतीय नौसेना की पहुंच आएगा,म इस कदम से

नईदिल्ली भविष्य में भारतीय नौसेना की नई अरिहंत-क्लास न्यूक्लियर-पावर्ड बैलिस्टिक मिसाइल सबमरीन S-4 में खतरनाक K-5 मिसाइल लगाई जाएगी. Indian Navy में K Series की कई मिसाइलें तैनात हैं. कुछ पनडुब्बियों में तो कुछ युद्धपोतों में. इस मिसाइल से चीन-पाकिस्तान की हालत खराब हो जाएगी. हिंद महासागर से दागी गई तो ऑस्ट्रेलिया, अफ्रीका, चीन, रूस, मिडिल ईस्ट, यूरोप सब रेंज में आएंगे. पनडुब्बी से छोड़ी जाने वाली यह मिसाइल 5 से 6 हजार किलोमीटर तक मार कर सकेगी. यानी समंदर में रहकर पूरे देश की सुरक्षा कर पाएगी. अगली मिसाइल जो भारतीय नौसेना की पनडुब्बियों में लग सकती है, वो है K सीरीज की परमाणु बैलिस्टिक मिसाइल K-5. यह सबमरीन लॉन्च्ड बैलिस्टिक मिसाइल (SLBM) है. इस मिसाइल को देश में ही डेवलप किया गया है. इसमें 2000 kg वजनी वॉरहेड लगा सकते हैं. वह पारंपरिक हो या फिर परमाणु हो. इसकी रेंज फिलहाल 5 से 6 हजार km बताई जा रही है. लेकिन हल्के वॉरहेड के साथ यह 8 से 9 हजार किलोमीटर तक मार कर सकती है. इसे भारतीय रक्षा एवं विकास संगठन बना रहा है. अगर इस मिसाइल को भारतीय समुद्री क्षेत्र (Indian Ocean Region – IOR) में मौजूद पनडुब्बी से लॉन्च किया जाए तो चीन और पाकिस्तान के कई प्रमुख शहर किसी भी मिनट खत्म हो सकते हैं. इसे फिलहाल अरिहंत क्लास सबमरीन और एस-5 क्लास सबमरीन में लगाया गया है. भविष्य में बाकी पनडुब्बियों में भी लगाया जा सकता है. कई टारगेट पर हमला भी कर सकेगी K-5 बैलिस्टिक मिसाइल में राडार को धोखा देने की तकनीक और काउंटरमेजर्स भी लगाए जाने की उम्मीद है, ताकि दुश्मन को यह पता ही न चले कि मिसाइल कब और कहां से आ रही है. इसके अलावा इसमें MIRV तकनीक भी लगाई जा सकती है, ताकि एक ही बार में कई जगहों पर निशाना लगाया जा सके.  फिलहाल K-4 सीरीज की मिसाइलें भारत के पास फिलहाल K-4 सबमरीन लॉन्च्ड बैलिस्टिक मिसाइलों का जखीरा है. जिनकी रेंज 750 से 3500 km है. लेकिन जब नौसेना नई पनडुब्बियां बना रही है, तो उसे नई मिसाइलों की भी जरूरत होगी. ऐसे में K-5 और K-6 SLBM मिसाइलों की जरूरत है. ताकि ज्यादा रेंज तक हमला किया जा सके. इसके अलावा Agni-5 सीरीज की SLBM इस्तेमाल की जा सकती है. अग्नि-5 मिसाइल की ताकत को पूरी दुनिया जानती है. साथ ही चीन और पाकिस्तान तो खौफ खाते हैं. क्योंकि इसकी रेंज में पूरा पाकिस्तान और आधा चीन आता है. लेकिन के-सीरीज की एडवांस मिसाइलों को शामिल किया जा सकता है. अग्नि-5 SLBM की ताकत यह एक अंतरमहाद्वीपीय परमाणु बैलिस्टिक मिसाइल है. जिसकी रेंज 7 से 8 हजार किलोमीटर है. इसमें एक साथ कई वॉरहेड लगा सकते हैं. यानी यह MIRV तकनीक से लैस है. एक ही मिसाइल से पांच टारगेट्स को हिट किया जा सकता है. इसमें 400 किलोग्राम वजनी परमाणु या पारंपरिक हथियार लगा सकते हैं. इसकी अधिकतम गति 30 हजार किलोमीटर प्रतिघंटा से ज्यादा है.   K-6 मिसाइल भी दमदार यह मिसाइल अभी बनाई जा रही है. 39 फीट लंबी इस मिसाइल में 3 हजार किलोग्राम वजनी परमाणु हथियार लगा सकते हैं. इससे कई टारगेट्स पर निशाना लगाया जा सकता है. इसकी रेंज 8 से 12 हजार किलोमीटर होगी. इसे एस-5 सबमरीन में लगाने की योजना है.     recent visitors 47

वक्फ संशोधन बिल लोकसभा में आज पेश होगा, सरकार के सामने विपक्षी दलों ने रख दी ये मांग

 नई दिल्ली  वक्फ संशोधन विधेयक आज बुधवार को लोकसभा में पेश किया जाएगा। जानकारी के मुताबिक दोपहर 12 बजे विधेयक पेश किए जाने की उम्मीद है। बिजनेस एडवाइजरी कमेटी की बैठक में विधेयक को पेश करने की जानकारी दी गई। विपक्ष ने बिल पर 12 घंटे चर्चा की मांग की। जबकि सरकार ने आठ घंटे का समय दिया है। इस बीच भारतीय जनता पार्टी (BJP) अपने सभी सांसदों को तीन लाइन का व्हिप भी जारी करेगी। पार्टी के सभी सांसदों को सदन में मौजूद रहना होगा। विपक्ष ने किया बैठक से वॉकआउट सरकार के रुख से नाराज होकर विपक्षी दलों के सदस्यों ने बिजनेस एडवाइजरी कमेटी की बैठक से वॉकआउट कर दिया था । विपक्ष का आरोप था कि सरकार ने उनके किसी भी मुद्दे पर चर्चा नहीं की। कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने कहा कि हमने बिजनेस एडवाइजरी कमेटी से वॉकआउट किया क्योंकि सरकार अपना अजेंडा थोप रही है। उन्होंने कहा कि सरकार विपक्ष की बात नहीं सुन रही है। वक्फ बिल पर 8 घंटे चर्चा होगी। जरूरत के मुताबिक समय बढ़ाया जा सकता है। हर पार्टी को अपनी बात रखने अधिकार है। हम बिल पर चर्चा कराना चाहते हैं। हमने इस मुद्दे पर सभी दलों से व्यापक चर्चा की है। वक्फ बिल पर व्यापक चर्चा की मांग विपक्षी दलों के सदस्यों ने कहा कि हमने वक्फ पर व्यापक चर्चा की। मणिपुर में राष्ट्रपति शासन पर चर्चा की बात कही। वोटर कार्ड को आधार से जोड़ने को लेकर मुद्दा रखा। हालांकि, सरकार ने किसी भी मुद्दे पर विपक्ष की बात नहीं मानी। विपक्ष का कहना है कि हाउस सरकार की मनमर्जी से चल रहा है। विपक्ष को कोई जगह नहीं दी जा रही है। यह हाउस सिर्फ रूलिंग पार्टी का नहीं जनता का है। टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी ने कहा कि हम लागातर वोटर कार्ड की बात कर रहे हैं। हमारी मांग नहीं मानी। उन्होंने कहा कि दूसरे मुद्दे थे। ये किसी पर भी चर्चा नहीं करने दे रहे। अभी तक नहीं मिलीं विधेयक की प्रतियां: बीजद सांसद बीजू जनता दल (बीजद) के सांसद सस्मित पात्रा ने कहा, "जहां तक ​​विधेयक की बारीकियों का सवाल है तो इसकी प्रतियां अभी तक वितरित नहीं की गई हैं। इस विधेयक पर बीजद की गंभीर चिंताएं हैं। उन्होंने कहा कि चिंता यह नहीं है कि जेपीसी की बैठक हुई, बल्कि यह है कि विपक्ष की आवाज पर विचार किया गया है या नहीं। उन्होंने कहा कि अब अगर दो दिन लोकसभा में ही चर्चा होगी तो राज्यसभा के लिए समय बचेगा क्या. किरेन रिजिजू ने कहा कि इतना अच्छा बिल हमलोग लेकर आए हैं, रिकॉर्ड में दर्ज होगा कि किसने समर्थन किया और किसने विरोध. उन्होंने ये भी कहा कि कल ही चर्चा होगी, जवाब होगी और लोकसभा से इसे पारित कराना है. किरेन रिजिजू ने कहा कि हम हाथ जोड़कर विनती करते हैं, बिल पर बोलने के लिए कुछ नहीं है तो बहाना मत बनाइए. खुलकर बोलिए. उन्होंने ये भी कहा कि चर्चा का समय बढ़ाया जा सकता है लेकिन बिल उसी दिन पारित कराना है. किरेन रिजिजू ने कहा कि बहुत से मुस्लिम भी इस बिल के समर्थन में हैं. जेपीसी में इतनी चर्चा हो चुकी है. इस बिल को लेकर भ्रम फैलाया जा रहा है. विपक्ष ने किया बैठक से वॉकआउट विपक्ष ने बिजनेस एडवाइजरी कमेटी की बैठक से वॉकआउट कर दिया. सरकार की ओर से पहले चार से छह घंटे चर्चा का प्रस्ताव रखा गया था. विपक्षी दलों के नेता वक्फ बिल पर कम से कम 12 घंटे चर्चा की मांग कर रहे थे. सरकार की ओर से दो ही दिन का समय बचा होने की बात कहते हुए दो दिन तक चर्चा जारी रखने में असमर्थता जता दी. इसके बाद विपक्षी सदस्यों ने बिजनेस एडवाइजरी कमेटी की बैठक से वॉकआउट कर दिया. बाद में आठ घंटे चर्चा की बात पर सहमति बनी और सरकार की ओर से ये भी कहा गया कि चर्चा का समय और बढ़ाया भी जा सकता है. सांसदों को उत्तेजित न होने के निर्देश वक्फ बिल को लेकर फूंक-फूंक कर कदम रख रही सरकार नहीं चाहती कि कोई भी सदस्य उत्तेजित होकर ऐसा कुछ बोल जाए जिससे विपक्ष को हंगामा करने का कोई अवसर मिले और सदन की कार्यवाही हंगामे की भेंट चढ़ जााए. इसलिए सभी सदस्यों से कहा गया है कि जिन्हें भी इस बिल पर चर्चा में शामिल होने का मौका मिले, वे अपनी बात मर्यादित तरीके से प्रमुख बिंदुओं पर फोकस करके रखें. बोलते समय उत्तेजित न हों. बीजेपी ने सहयोगी दलों से भी अपने सभी सदस्यों की मौजूदगी सदन में सुनिश्चित करने के लिए कहा है.   recent visitors 42

संघ-भाजपा में तालमेल से जुड़े सुखद संकेत, नागपुर में हुआ संघ-भाजपा का महासंगम

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का रविवार को नागपुर स्थित आरएसएस मुख्यालय का दौरा बहु प्रतिक्षित था. पिछले साल बीजेपी और संघ के बीच तनावपूर्ण संबंधों के बाद इस यात्रा पर पूरे देश की निगाहें थीं. हालांकि जिस तरह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले कुछ समय में आरएसएस की तारीफों की पुल बांधे हैं उससे पहले से स्पष्ट था कि संघ और बीजेपी के बीच में अब कोई कटुता नहीं रह गई है. हेडगेवार स्मृति मंदिर जो आरएसएस के पहले दो सरसंघचालकों के.बी. हेडगेवार और एम.एस. गोलवलकर की स्मृति में बना है, वहां मोदी का जाना खुद संघ के लोगों के लिए अप्रत्याशित रहा. इसे भाजपा और आरएसएस के बीच संबंधों को सुधारने और एकता प्रदर्शित करने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है. पर मोदी नागपुर में डॉ. आंबेडकर से संबंधित पवित्र दीक्षाभूमि जाना नहीं भूले. ये वही जगह है जहां डॉ. आंबेडकर ने बौद्ध धर्म अपनाया था. आइये मोदी की इस यात्रा के राजनीतिक पहलुओं की चर्चा करते हैं. 1-समझना होगा प्रयागराज महाकुंभ के बाद नागपुर के घटनाक्रम को प्रयागराज में कुंभ हर 12 साल पर लगता रहा है. पर इस बार जिस तरह की भीड़ उमड़ी और जिस तरह का उत्साह पूरे देश में देखने को मिला वह अभूतपूर्व था. इसके पीछे हिंदुत्व की उभार से इनकार नहीं किया जा सकता है. पूरा उत्तर भारत कुंभ के दौरान चोक हो गया था. करीब 65 करोड़ लोग अगर कुंभ पहुंचे तो इसका मतलब है कि देश में रहने वाला हर दूसरा आदमी कुंभ आया. जात-पात से परे जाकर हिंदुओं ने संगम स्‍नान किया. यह एक हिंदू पुनर्जागरण जैसी चीज थी. जाहिर है कि इसके पीछे संघ की दशकों की मेहनत थी. इतना ही नहीं संघ के कार्यकर्ताओं ने इस आयोजन को सफल बनाने के लिए जबरदस्त मेहनत की थी. कुंभ की व्यवस्था केवल सरकारी अधिकारियों के वश की बात नहीं थी. शायद यही कारण है कि पीएम मोदी ने अपनी नागपुर दौरे में  स्वयंसेवकों के प्रयागराज के महाकुंभ मेले में निभाई गई भूमिका के लिए सराहना की. और इससे यह भी साबित हो रहा है कि बीजेपी के कोर एजेंडे में संघ की भूमिका महत्वपूर्ण हो रही है. क्‍योंकि, मोदी की खा‍स बात यह है कि वह हवा के रुख को बखूबी पहचानते हैं. और संघ भी यह समझ रहा है कि हिंदुत्‍व की बहती हवा में वह भाजपा से अलग खड़ा नहीं रह सकता. 2-क्‍या संदेश है संघ के लिए आम तौर पर ऐसी चर्चा चल रही थी बीजेपी और आरएसएस में एक दूरी आ गई है. साल 2024 के लोकसभा चुनावों में भाजपा के खराब प्रदर्शन के बाद संघ प्रमुख मोहन भागवत की कुछ टिप्पणियों को पार्टी नेतृत्व और प्रधानमंत्री मोदी की सीधी आलोचना के रूप में भी देखा गया था. माना जा रहा था कि बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा का एक बयान संघ को बहुत नागवार लगा था. जिसके बाद संघ लोकसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टो को सपोर्ट देने से पीछे हट गया था. लोकसभा चुनाव से पहले, भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने द इंडियन एक्सप्रेस से कहा था कि भाजपा अब उस दौर से आगे निकल चुकी है जब उसे संघ की जरूरत थी, और अब वह सक्षम है तथा अपने फैसले खुद लेती है. इसके बाद बीजेपी और संघ के बीच कुछ दूरियां देखने को मिलीं. पर हरियाणा,  महाराष्ट्र और दिल्ली विधानसभा चुनावों की जीत में आरएसएस की बहुत बड़ी भूमिका निकल कर सामने आई. देखने को यह भी मिला कि जो आरएसएस पहले पर्दे के पीछे से बीजेपी के लिए काम करती थी अब वो खुलकर अपने कार्यों के बारे में मीडिया को भी बताने लगी थी. जैसे हरियाणा विधानसभा और दिल्ली विधानसभा चुनावों में संघ की पूरी स्ट्रैटजी अखबारों में छपने लगी. पर असली खेल महाकुंभ के बाद हुआ है. महाकुंभ में जिस तरह पूरे देश से हिंदू उमड़े हैं वह एक तरीके से हिंदुओं का पुनर्जागरण ही है. जाहिर है कि इसके पीछे कहीं न कहीं आरएसएस की बरसों से चल रही साधना है. मोदी की यात्रा से यह साफ हो गया है कि संघ अब केवल वैचारिक और सांस्कृतिक संस्था ही नहीं है.  बीजेपी में उसकी भूमिका ऊपर उठ चुकी है.  3-क्‍या संदेश है भाजपा के लिए भाजपा के नेताओं ने पूर्व में बहुत सावधानी बरतते हुए सरकार और संघ के बीच एक क्लीयर रेखा खींच दी थी. पर नरेंद्र मोदी कई मौकों पर संघ की तारीफ करने में नहीं चूकते हैं. इसके बारे में कहा जाता है कि खुद नरेंद्र मोदी आरएसएस के प्रचारक रहे हैं इसलिए उन्हें किसी प्रकार की हिचक नहीं होती है. इसके पहले पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी इस तरह की तारीफ से बचते रहे.अभी कुछ दिन पहले मोदी ने एक पॉडकास्ट में अपने जीवन को सही मार्गदर्शन देने के लिए संघ का आभार जताया था.  प्रधानमंत्री ने आरएसएस की तारीफ नागपुर में भी आरएसएस को एक ऐसे संगठन के रूप में संदर्भित किया जिसने समर्पण और सेवा के उच्चतम सिद्धांतों को कायम रखा. मोदी ने संघ की राष्ट्र निर्माण और विकास में रचनात्मक भूमिका को रेखांकित करके अपनी 2047 तक विकसित भारत की योजनाओं में संघ की भूमिका के महत्व को भी दर्शाया. जाहिर है कि बीजेपी में बनने वाले नए अध्यक्ष और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उत्तराधिकारी को ढूंढने और उसे तैयार करने की भूमिका में संघ की अब महत्वपूर्ण भूमिका होने वाली है. 4-क्‍या संदेश है हिंदू एकता के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संघ मुख्यालय के दौरे के साथ ही डॉ. भीमराव आंबेडकर के जीवन से संबंधित दीक्षाभूमि का भी दौरा कर राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की है. आरएसएस पर हिंदू धर्म का एक तबका आरोप लगाता रहा है कि संघ अभी भी वर्ण व्यवस्था का पोषक है. संघ का कोई प्रमुख दलित या पिछड़ी जाति का शख्स नहीं बन सका. पर पीएम मोदी ने अपनी छवि एक पिछड़े नेता ओर दलितों के शुभचिंतक के रूप में बना ली है. शायद यही कारण है कि प्रधानमंत्री ने संघ मुख्यालय में दिये गये अपने संबोधन में भी बाबा साहेब को याद किया और भारतीय संविधान की भरपूर प्रशंसा की.बीजेपी और संघ दोनों के लिए दलितों के बीच पैठ बनाना आज पहली प्राथमिकता है. दीक्षाभूमि वही जगह है जहां आंबेडकर ने 1956 में अपने हजारों अनुयायियों के साथ बौद्ध धर्म अपनाया था. मोदी … Read more

म्यांमार जैसे भूकंप का खतरा भारत में भी नकारा नहीं जा सकता: IIT कानपुर

कानपुर  म्यांमार और बैंकॉक में जबर्दस्त नुकसान पहुंचाने वाले भूकंप की जड़ सगाइन फॉल्ट है। इस फॉल्ट को इंटरनेट पर मैप के जरिए आसानी से देखा जा सकता है। आईआईटी कानपुर के अर्थ साइंसेज विभाग के प्रोफेसर जावेद मलिक ने कहा कि सागइन फॉल्ट बेहद खतरनाक है। सिलिगुड़ी में गंगा-बंगाल फॉल्ट है। इन दोनों फॉल्ट के बीच कई अन्य फॉल्टलाइंस हैं। ऐसे में इस आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता है कि एक फॉल्ट की सक्रियता किसी दूसरे फॉल्ट को ट्रिगर न कर दे। जिससे भारत को भी खतरा है। लंबे समय से भूकंपों पर शोध कर रहे प्रो. जावेद मलिक के अनुसार, यह फॉल्ट अराकान से अंडमान और सुमात्रा तक फैले शियर जोन का हिस्सा है। इसकी भूकंपीय आवृत्ति 150-200 साल है और इसकी सक्रियता दूसरी फॉल्टलाइनों को ट्रिगर कर सकती है। हमें बड़े भूकंपों की प्रतीक्षा नहीं करनी चाहिए। हिमालय में कई सक्रिय फॉल्टलाइंस हैं। सभी लोगों ने फ्रंटल हिस्सों पर काम किया है। फॉल्टलाइन ऊपर भी हैं। भारत की तरफ भी इशारा प्रो. मलिक ने कहा कि हम सिर्फ प्लेटबाउंड्री के आसपास ही भूकंप न देखें। ऊपर भी सेस्मिक गतिविधियां जारी हैं। पूर्वोत्तर और कश्मीर सेस्मिक जोन-5 में हैं। इस जोन में हमें ज्यादा रिसर्च की जरूरत है। गंगा-बंगाल फॉल्ट बेहद महत्वपूर्ण है। इसमें भी सगाइन फॉल्ट जैसी हलचल है। शायद म्यांमार का भूकंप भारत के लिए इशारा हैं। गंगा बंगाल और सगाइन फॉल्ट के बीच डॉकी, कोपली, डिबरूचौतांग फॉल्ट जोन भी हैं। गंगा-बंगाल फॉल्ट भी सतह पर दिखता है। पूरा हिस्सा दबाव में प्रो. मलिक ने कहा कि आप ये नहीं कह सकते हैं कि सगाइन और गंगा बंगाल के बीच कुछ नहीं चल रहा। एक पूरा हिस्सा दबाव में है। वहां लगातार ऊर्जा एकत्रित हो रही है। इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है कि एक भूकंप दूसरे भूकंप को ट्रिगर नहीं करेगा। इसे ‘ट्रिगर स्ट्रेस’ कहते हैं। यहां ये देखना होगा कि क्या ऐसी गतिविधियां उत्तर से दक्षिण की तरफ बढ़ी हैं। आईआईटी कानपुर के वैज्ञानिक ने कहा कि 2004 में सुमात्रा, अंडमान में एक भूकंप आया था। इस क्षेत्र के दक्षिण में 2005 में भूकंप आया था। अब ऊपर की तरफ भूकंप आने लगे हैं। ट्रिगर होने की आशंका हमेशा बनी रहती है।   recent visitors 46