आ चुकी है दुनिया में मंदी…, रिच डैड पुअर डैड के लेखक रॉबर्ट कियोसाकी ने दी चेतावनी

नई दिल्‍ली. जाने-माने लेखक रॉबर्ट कियोसाकी ने एक बार फिर दुनिया में आर्थिक मंदी की चेतावनी दी है। कियोसाकी 'रिच डैड पुअर डैड' किताब के लेखक हैं। उन्‍होंने कहा है कि दुनिया पहले से ही मंदी में है। उन्होंने यह बात सोशल मीडिया प्‍लेटफॉर्म 'एक्‍स' पर एक पोस्ट में कही। कियोसाकी 2012 में 'रिच डैड्स प्रोफेसी' लिखने के बाद से ही लोगों को चेतावनी दे रहे हैं। उन्होंने लोगों को सीखने और बदलाव करने के लिए प्रोत्साहित किया। साथ ही वित्तीय सलाहकारों से सावधान रहने को कहा। क‍ियोसाकी ने क‍िया लोगों का आगाह रॉबर्ट कियोसाकी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्‍स पर लिखा, 'क्या दुनिया मंदी में है? मेरा जवाब है, हां।' उन्होंने कहा कि वह 2012 से ही लोगों को आगाह करने की कोशिश कर रहे हैं। कियोसाकी ने लोगों से पूछा, 'क्या सीखने और बदलाव करने में बहुत देर हो चुकी है?' उन्होंने खुद ही जवाब दिया, 'नहीं। आपके पास समय है और समय हमेशा आपके लिए एक संपत्ति है।' कियोसाकी ने FOMO यानी 'फियर ऑफ मिसिंग आउट' (किसी चीज से छूट जाने का डर) की तुलना FOMM यानी 'फियर ऑफ मेकिंग मिस्टेक्स' (गलती करने का डर) से की। उन्होंने कहा कि स्कूल FOMM का डर पैदा करते हैं। उन्होंने लोगों को यूट्यूब जैसे प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करके खुद को शिक्षित करने के लिए प्रोत्साहित किया। साथ ही, उन्होंने भ्रामक वित्तीय सलाहकारों से सावधान रहने की चेतावनी दी। उन्होंने कहा, 'सबसे अच्छी और सबसे खराब शिक्षा मुफ्त है।' कियोसाकी ने आगे कहा, 'तथ्य यह है कि दुनिया मंदी में है। तथ्य यह है कि महंगाई बढ़ रही है। बेरोजगारी भी बढ़ रही है।' उन्होंने पाठकों से सोचने के लिए कहा, 'क्या यह मंदी आपको अमीर बनाएगी या गरीब? यह चुनाव आपका है और आपकी शिक्षा का चुनाव मुफ्त हो सकता है।' उन्होंने अंत में कहा, 'ध्यान रखें और इस मंदी को अपने जीवन की सबसे अच्छी चीज बनाएं। यह शक्ति केवल आपके पास है।' कियोसाकी के इन विचारों से दुनिया भर में मंदी को लेकर चिंता और बढ़ गई है। मुश्‍क‍िल दौर से गुजर रही है दुनिया की अर्थव्‍यवस्‍था जे.पी. मॉर्गन के मुख्य वैश्विक अर्थशास्त्री ब्रूस कासमैन ने अमेरिका में मंदी की आशंका को बढ़ा दिया है। उन्होंने कहा कि 'व्यवसाय-विरोधी नीतियां' इस खतरे को और बढ़ा सकती हैं। कासमैन ने यह भी चेतावनी दी कि अगर शासन पर भरोसा कम होता रहा तो अमेरिका में निवेश पर बुरा असर पड़ सकता है। गोल्डमैन सैक्स और मॉर्गन स्टेनली दोनों ने ही 2025 के लिए अमेरिका के GDP विकास के अनुमान को कम कर दिया है। उनका अनुमान है कि यह 1.5% से 1.7% के बीच रहेगा। इसका मतलब है कि अमेरिका की अर्थव्यवस्था धीमी गति से बढ़ेगी। कियोसाकी की चेतावनी और अर्थशास्त्रियों के बदलते अनुमानों से पता चलता है कि दुनिया की अर्थव्यवस्था मुश्किल दौर से गुजर रही है। लोगों को अपनी वित्तीय स्थिति को लेकर सावधान रहने और सोच-समझकर फैसले लेने की जरूरत है। कियोसाकी का कहना है कि सही शिक्षा और तैयारी से लोग इस मंदी का सामना कर सकते हैं और इससे लाभ भी उठा सकते हैं। recent visitors 56

जेलेंस्की के खिलाफ रूसी राष्ट्रपति के बयान पर भड़के ट्रंप, मॉस्को को दे डाली बड़ी धमकी

वॉशिंगटन यूक्रेन के राष्ट्र्पति वोलोदिमिर जेलेंस्की को लेकर पुतिन की टिप्पणी पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भड़क गए हैं। ट्रंप ने रविवार को कहा कि वह जेलेंस्की की आलोचना से बहुत नाराज हैं। इसके साथ ही ट्रंप ने धमकी दी कि अगर रूसी राष्ट्रपति युद्ध विराम के लिए सहमत नहीं होते हैं तो वे मॉस्को के तेल निर्यात पर टैरिफ लगा देंगे। एनबीसी न्यूज के साथ फोन पर दिए एक इंटरव्यू में ट्रंप ने 50% टैरिफ लगाने की बात कही, जो रूसी तेल खरीदने वाले देशों को प्रभावित करेगा। उन्होंने यूक्रेन में जंग न रोकने के लिए रूस को जिम्मेदार ठहराने की बात कही। उन्होंने कहा, 'अगर रूस और मैं यूक्रेन में खून-खराबे को रोकने के लिए कोई समझौता करने में असमर्थ हैं और अगर मुझे लगता है कि यह रूस की गलती थी, जो कि शायद न हो- तो मैं रूस से आने वाले सभी तेल पर सेकेंडरी टैरिफ लगाने जा रहा हूं।' पुतिन को लेकर ट्रंप की टिप्पणी रूसी नेता को लेकर उनके पिछले रुख से अलग है। जेलेंस्की को हटाने की मांग पर भड़के ट्रंप पुतिन को लेकर ट्रंप का गुस्सा तब आया, जब रूसी राष्ट्रपति ने यूक्रेन में जेलेंस्की को हटाकर एक नई सरकार बनाने की मांग की। एनबीसी के साथ फोन पर ट्रंप ने कहा, 'यह सही जगह पर नहीं जा रहा है।' इसके पहले ट्रंप ने जेलेंस्की को लेकर निराशा जाहिर की थी और उन्हें तानाशाह तक कह दिया था। लेकिन अब वह रूस के खिलाफ सीधे बोल रहे हैं। ट्रंप ने कहा, मैं बहुत गुस्सा था, नाराज था, जब पुतिन ने जेलेंस्की की विश्वसनीयता पर सवाल उठाना शुरू कर दिया, क्योंकि यह सही जगह पर नहीं जा रहा था, आप समझते हैं?' रूस की अर्थव्यवस्था को धमकी अमेरिकी राष्ट्रपति ने रूस की अर्थव्यवस्था को झटका देने की चेतावनी दी और कहा कि सभी रूस तेल पर टैरिफ 25 फीसदी से बढ़ाकर 50 फीसदी किया जा सकता है। इसका मतलब यह होगा कि अगर आप रूस से तेल खरीदते हैं तो अमेरिका में व्यापार नहीं कर सकते। हालांकि, ट्रंप ने दोनों नेताओं के बीच सुलह का भी संकेत दिया और कहा, 'पुतिन जानते हैं कि मैं गुस्से में हूं, लेकिन गुस्सा जल्दी खत्म हो जाता है, अगर वह सही काम करते हैं।' क्या कह रहे विश्लेषक अब ऐसे में सवाल उठता है कि अगर रूस ने यूक्रेन युद्ध विराम समझौते पर अपनी सहमति नहीं दी और ट्रंप ने रूसी तेल निर्यात पर 25 से 50 फीसदी की टैरिफ लगाया तो किन-किन देशों को इसका नुकसान उठाना पड़ सकता है। इसके जवाब में विश्लेषकों और अधिकारियों का कहना है कि अगर डोनाल्ड ट्रम्प रूसी तेल खरीदने वाले देशों के खिलाफ 25-50% टैरिफ लगाते हैं, तो चीन और भारत इससे सबसे ज्यादा प्रभावित हो सकते हैं। दरअसल, 2022 में यूक्रेन और रूस के बीच युद्ध छिड़ने के बाद अमेरिका समेत तमाम पश्चिमी देशों ने रूस पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगा दिए थे। उसके तेल खरीदने पर भी बैन लगा दिया गया था लेकिन भारत और चीन के अलावा कुछ और देशों ने रूस से तेल खरीदना चालू रखा। ऐसे में अमेरिका द्वारा सीधे खरीददारों पर सेकंडरी टैरिफ लगाने से न केवल पुतिन की तेल राजस्व तक पहुंच कम हो सकती है बल्कि जो देश इसका उल्लंघन करेंगे उन्हें भी आर्थिक बोझ का सामना करना पड़ सकता है। रूस के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों में शामिल न होने के बावजूद, चीन इसका उल्लंघन करने के बारे में सावधान रहा है, क्योंकि उसे सेकंडरी टैरिफ का डर सताता रहा है। उदाहरण के लिए, कुछ चीनी बैंकों ने अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग प्रणाली से प्रतिबंधित होने के डर से रूसी कंपनियों के साथ लेन-देन कम कर दिया है। चीन को भारत ने छोड़ा पीछे मल्टीनेशनल इन्वेस्टमेंट बैंक और वित्तीय सेवा उपलब्ध कराने वाली कंपनी UBS के विश्लेषक जियोवानी स्टानोवो ने द गार्डियन से कहा, "जैसा कि ट्रम्प ने वेनेजुएला के तेल के मामले में किया है, वैसा ही रूस के मामले में खरीदारों को लक्षित करने के लिए कर सकते हैं। इस कदम से चीन और भारत प्रभावित हो सकता है। हालांकि, हमें यह देखना होगा कि आने वाले दिनों में क्या घोषणा होती है। बता दें कि भारत चीन को पीछे छोड़ते हुए समुद्री रूसी कच्चे तेल का सबसे बड़ा खरीदार बन गया है। भारत-चीन के अलावा और किन देशों पर असर 2024 में भारत के कुल कच्चे तेल के आयात का लगभग 35% रूसी कच्चा तेल था। यूक्रेन युद्ध की शुरुआत से ही भारत रूसी तेल खरीदता रहा है लेकिन अब अमेरिकी टैरिफ की चिंता होने लगी है। भारत और चीन के अलावा तुर्किए भी रूसी तेल का बड़ा खरीदार है। इसके अलावा बुल्गारिया,इंडोनेशिया, दक्षिण कोरिया, स्लोवाकिया, हंगरी भी रूसी तेल खरीदने में आगे रहा है। पाकिस्तान ने भी रूस से कच्चा तेल खरीदने के लिए डील किया है। recent visitors 63

मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा है कि कुछ लोग वक्फ बिल को लेकर गुमराह कर रहे हैं

नई दिल्ली संसद के मौजूदा बजट सत्र में वक्फ बिल संसोधन पेश होना है। माना जा रहा है कि केंद्र सरकार 2 अप्रैल को इसे लोकसभा में पेश कर सकती है। इससे पहले केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री और अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने वक्फ बिल का विरोध करने वालों को आड़े हाथों लिया है और कहा है कि इस बिल का विरोध वही लोग कर रहे हैं, जो वक्फ की करोड़ों की संपत्तियों पर कब्जा कर बैठे हुए हैं। ANI से बातचीत में रिजिजू ने कहा कि इसका इसका विरोध करने वाले लोग शक्तिशाली हैं और वे भोले-भाले लोगों को गुमराह कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि विधेयक की आलोचना करना हर किसी का अधिकार है, लेकिन उस आलोचना का कुछ सार होना चाहिए। रिजिजू ने कहा, "वे कौन लोग हैं जो इस विधेयक का विरोध कर रहे हैं? कुछ ताकतवर लोग हैं जिन्होंने वक्फ संपत्तियों पर अतिक्रमण कर रखा है। वे लोगों को गुमराह कर रहे हैं। वे कह रहे हैं कि विधेयक असंवैधानिक है। आलोचना करना हर किसी का अधिकार है, लेकिन आलोचना में कुछ सार होना चाहिए।" केरल कैथोलिक बिशप काउंसिल (केसीबीसी) द्वारा वक्फ संशोधन विधेयक को समर्थन देने और राज्य के सांसदों से भी ऐसा करने का अनुरोध करने वाले पत्र के बारे में रिजिजू ने कहा कि धार्मिक आधार पर कई संगठन केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित इस विधेयक का समर्थन कर रहे हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि वक्फ संशोधन विधेयक गरीब मुसलमानों, बच्चों और महिलाओं के हित में है। उन्होंने कहा कि यह वक्फ बोर्ड के तहत संपत्तियों के प्रबंधन के मामले में जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करेगा। केरल के बिशप कर रहे वक्फ का समर्थन रिजिजू ने कहा, "केरल कैथोलिक बिशप काउंसिल द्वारा भेजा गया अनुरोध पत्र सभी के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। विभिन्न समुदायों के कई संगठन वक्फ (संशोधन) विधेयक का समर्थन कर रहे हैं। हमें यह समझना चाहिए कि विधेयक मूल रूप से गरीब मुसलमानों, बच्चों और महिलाओं के हित में है और यह भी सुनिश्चित करता है कि वक्फ की संपत्तियों का प्रबंधन पारदर्शी और जवाबदेह तरीके से हो।सरकार आम लोगों का कल्याण सुनिश्चित करना चाहता है।" केरल भाजपा अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने सोमवार को कहा कि केरल कैथोलिक बिशप काउंसिल (केसीबीसी) सहित कई ईसाई संगठन केंद्र द्वारा प्रस्तावित वक्फ संशोधन विधेयक का समर्थन कर रहे हैं, क्योंकि मुनंबम उपनगर में गरीब परिवारों ने दावा किया है कि वे वक्फ बोर्ड द्वारा अपनी जमीन जब्त किए जाने के खतरे में जी रहे हैं। उन्होंने राज्य के सांसदों से "तुष्टिकरण की राजनीति" में शामिल होने के बजाय लोगों की सहायता करने का आग्रह किया। सैकड़ों गरीबों को सता रहा वक्फ का खौफ चंद्रशेखर ने भी कहा, "केरल कैथोलिक बिशप काउंसिल और कई अन्य ईसाई संगठन केरल के सांसदों से वक्फ (संशोधन) विधेयक पर अपना रुख अपनाने और इसके पक्ष में मतदान करने के लिए कह रहे हैं क्योंकि केरल में, कोचीन के पास मुनंबम नामक स्थान पर, सैकड़ों गरीब परिवारों को वक्फ द्वारा उनकी जमीन जब्त किए जाने का खतरा है।" भूमि जब्त किए जाने के खतरे के खिलाफ वर्षों से किए जा रहे आंदोलन पर प्रकाश डालते हुए, भाजपा नेता ने केरल के सांसदों से "तुष्टिकरण की राजनीति" में शामिल होने के बजाय मुसीबत में फंसे लोगों की सहायता करने के अपने कर्तव्यों को पूरा करने का आग्रह किया। जनहित में फैसला लें कांग्रेस सांसद: चंद्रशेखर उन्होंने कहा, "यह एक ऐसा मुद्दा है जिसके लिए वे महीनों और सालों से आंदोलन कर रहे हैं और अब समय आ गया है कि केरल के सांसद अपना कर्तव्य निभाएं, जो कि मुसीबत में फंसे लोगों की मदद करना, लोगों की मदद करना और उनकी समस्याओं का समाधान करना है, न कि केवल तुष्टीकरण की राजनीति करना। आज एक महत्वपूर्ण दिन है। कांग्रेस सांसदों को एक स्टैंड लेना चाहिए और फैसला लेना चाहिए। वक्फ (संशोधन) विधेयक किसी समुदाय के खिलाफ नहीं है। यह भारत के संवैधानिक मूल्यों के साथ कानून को जोड़ने के बारे में है।" recent visitors 42

RSS नेता भैयाजी जोशी बोले- जिसकी आस्था है, वो जाएगा औरंगजेब की कब्र पर

नागपुर मुगल शासक औरंगजेब की कब्र को हटाने की कुछ दक्षिणपंथी संगठनों की मांग के बीच, वरिष्ठ आरएसएस नेता सुरेश ‘भैयाजी’ जोशी ने सोमवार को कहा कि इस विषय को अनावश्यक रूप से उठाया जा रहा है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के नेता ने नागपुर में एक कार्यक्रम के दौरान मीडिया से बात करते हुए कहा, ‘जिनकी श्रद्धा है वो उस कब्र पर जाएंगे। उन्होंने कहा, ‘औरंगजेब की कब्र का विषय अनावश्यक उठाया गया है। उसकी मृत्यु यहां हुई तो उसकी कब्र यहां बनी हुई है। जिनकी श्रद्धा है वो जाएंगे। अनावश्यक उठाया गया विषय' उन्होंने कहा, 'औरंगजेब की कब्र का विषय अनावश्यक उठाया गया है. उसकी मृत्यु यहां हुई तो उसकी कब्र यहां बनी हुई है. जिनकी श्रद्धा है वो जाएंगे.' दरअसल महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे ने रविवार को औरंगजेब की कब्र को लेकर सांप्रदायिक तनाव भड़काने के प्रयासों की निंदा की और कहा कि 'इतिहास को जाति और धर्म के चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए.' 'जिनकी आस्था है, वो जाएंगे' उन्होंने कहा, 'बीजापुर सल्तनत के सेनापति अफजल खान को प्रतापगढ़ किले के पास दफनाया गया था और छत्रपति शिवाजी महाराज की अनुमति के बिना ऐसा नहीं किया जा सकता था.' राज ठाकरे की टिप्पणियों और मुगल शासक की कब्र के मुद्दे के बारे में पूछे जाने पर जोशी ने कहा, 'औरंगजेब की कब्र का विषय अनावश्यक रूप से उठाया गया है. उसकी मृत्यु यहीं (भारत में) हुई थी, इसलिए उसकी कब्र यहीं बनाई गई है. जिनकी आस्था है, वे जाएंगे.' 'यह भारत की उदारता का प्रतीक' पूर्व आरएसएस महासचिव ने कहा, 'हमारे पास छत्रपति शिवाजी महाराज का आदर्श (रोल मॉडल) है. उन्होंने अफजल खान की कब्र बनवाई थी. यह भारत की उदारता और समावेशिता का प्रतीक है. कब्र बनी रहेगी, जो भी जाना चाहेगा, जाएगा.' 'हमें पानी और पेड़ों की नहीं, कब्र की चिंता है' मुंबई के शिवाजी पार्क में वार्षिक गुड़ी पड़वा रैली को संबोधित करते हुए राज ठाकरे ने भ्रामक ऐतिहासिक नैरेटिव और व्हाट्सएप संदेशों के प्रति आगाह किया और इस बात पर जोर दिया कि इतिहास का अध्ययन सोशल मीडिया के बजाय विश्वसनीय स्रोतों से किया जाना चाहिए. राज ठाकरे ने छत्रपति संभाजीनगर जिले में औरंगजेब की कब्र पर विवाद पैदा करने के राजनीतिक प्रयासों की आलोचना की. इस कारण नागपुर में हिंसा हुई. राज ठाकरे ने ऐसी बहसों की प्रासंगिकता पर सवाल उठाते हुए कहा, 'हमें पानी के स्रोतों और पेड़ों की चिंता नहीं है, लेकिन हमें औरंगजेब की कब्र की चिंता है?' उन्होंने विभाजनकारी राजनीति का शिकार होने के खिलाफ चेतावनी देते हुए कहा, 'लोगों को इतिहास के नाम पर लड़ाया जा रहा है और राजनेता संघर्ष को बढ़ावा देने के लिए इन मुद्दों का फायदा उठाते हैं.' 'औरंगजेब शिवाजी नामक एक विचार को मारना चाहता था' ठाकरे ने इस बात पर जोर दिया कि मुगल शासक औरंगजेब ने मराठों से लड़ते हुए महाराष्ट्र में 27 साल बिताए, छत्रपति शिवाजी महाराज की विरासत को कुचलने की कोशिश की लेकिन आखिरकार असफल रहा. उन्होंने कहा, 'औरंगजेब शिवाजी नामक एक विचार को मारना चाहता था.' राज ठाकरे ने कहा कि शिवाजी महाराज के निधन के बावजूद, औरंगजेब उनकी विचारधारा को मिटाने के असफल प्रयास में महाराष्ट्र में रहा. उन्होंने दर्शकों को याद दिलाया कि शिवाजी के बेटे संभाजी महाराज ने आगरा से भागने पर औरंगजेब के बेटे को शरण भी दी थी. recent visitors 41

मध्य प्रदेश में तेज बारिश और ओले के साथ हो सकती है अप्रैल की शुरुआत, जानें-कैसा रहेगा एमपी में अगले कुछ दिनों तक मौसम

भोपाल  मौसम विभाग  ने मध्य प्रदेश में तेजी से मौसम में बदलाव को लेकर चेतावनी जारी की है. भीषण गर्मी से कई जिलों में लोगों को राहत मिल सकती हैं. मौसम विभाग की मानें, तो अप्रैल के शुरुआती दो दिनों में मध्य प्रदेश में ओले-बारिश (Hail and Rain) और आंधी का स्ट्रॉन्ग सिस्टम एक्टिव हो रहा है. इस वजह से प्रदेश के ज्यादातर जिलों में इसका असर देखने को मिलेगा. सोमवार को रतलाम, मंदसौर, अलीराजपुर और बड़वानी में हल्की बारिश और बादल छाए रहें. इसके साथ ही, कल से दो दिन बूंदाबादी देखने को मिल सकती है. एमपी के इन जिलों में दो दिन तक बारिश मौसम विभाग की मानें, तो 1 अप्रैल से एमपी के कुल 9 जिलों में एक या दो दिनों तक बादल-बूंदाबांदी और आंधी-ओले का दौर चल सकता है. नर्मदापुरम और बैतूल जिले में 1 अप्रैल को ओले गिरने का अनुमान जताया गया है. इसके अलावा, बुरहानपुर, खंडवा, खरगोन, बड़वानी, धार, अनूपपुर और डिंडोरी में ओले गिर सकते हैं. इसलिए बदल रहा प्रदेश का मौसम सीनियर मौसम वैज्ञानिक डॉ. दिव्या ई. सुरेंद्रन ने बताया कि अप्रैल की शुरुआत तेज गर्मी की बजाय ओले, बारिश, गरज-चमक और आंधी के साथ हो सकती है। कहीं-कहीं आंधी की रफ्तार 40 से 50 किमी प्रतिघंटा तक रह सकती है। उन्होंने बताया कि 24 घंटे के बाद मध्य महाराष्ट्र और कोंकण क्षेत्र में साइक्लोनिक सर्कुलेशन सिस्टम एक्टिव होने की संभावना है। जिसके पठारी क्षेत्र में ट्रफ के कारण अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से नमी आनी शुरू हो जाएगी, जिससे प्रदेश में भी मौसम बदला रहेगा। अगले 4 दिन ऐसा रहेगा मौसम 31 मार्च: मंदसौर, रतलाम, अलीराजपुर, बड़वानी में बादल छाए रहेंगे। यहां हल्की बूंदाबांदी भी हो सकती है। भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, उज्जैन, जबलपुर में तेज धूप खिलेगी। 1 अप्रैल: नर्मदापुरम, बैतूल, बुरहानपुर और खंडवा में बारिश के साथ ओले गिर सकते हैं। हरदा, खरगोन, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा में तेज आंधी और गरज-चमक की स्थिति रहेगी। यहां हवा की रफ्तार 40 से 50 किमी प्रतिघंटा तक रह सकती है। भोपाल, विदिशा, रायसेन, सीहोर, बड़वानी, अलीराजपुर, झाबुआ, देवास, मंदसौर, नरसिंहपुर और सागर में 30 से 40 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार से आंधी चलेगी। 2 अप्रैल: नर्मदापुरम, बैतूल, बुरहानपुर, खंडवा, खरगोन, बड़वानी, धार, अनूपपुर, डिंडोरी और बालाघाट में ओले गिरने का अलर्ट है। हरदा-शिवपुरी समेत विदिशा, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, अलीराजपुर, झाबुआ, इंदौर, रतलाम, उज्जैन, देवास, शाजापुर, आगर-मालवा, मंदसौर, नीमच, ग्वालियर, दतिया, भिंड, श्योपुर, सिंगरौली, सीधी, शहडोल, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, सिवनी, मंडला, सागर और पांढुर्णा में तेज आंधी चलेगी। 3 अप्रैल: बैतूल में ओले गिर सकते हैं। खंडवा, गुना, अशोकनगर, शिवपुरी, ग्वालियर, अनूपपुर, शहडोल, उमरिया, डिंडोरी, छिंदवाड़ा, बालाघाट, पांढुर्णा में 40 से 50किमी प्रतिघंटा की रफ्तार से आंधी चलेगी। भोपाल, विदिशा, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, नर्मदापुरम, हरदा, बुरहानपुर, खरगोन, बड़वानी, देवास, आगर-मालवा, दतिया, भिंड, मुरैना, श्योपुर, सिंगरौली, सीधी, कटनी, जबलपुर, नरसिंहपुर, सिवनी, मंडला, सागर, टीकमगढ़, निवाड़ी में 30 से 40 किमी की रफ्तार से आंधी चलेगी। प्रदेश में मंडल रहा सबसे गर्म रविवार को मंडला में सबसे ज्यादा 39 डिग्री दर्ज किया गया। बैतूल में 38.5 डिग्री, धार में 38.4 डिग्री, नरसिंहपुर में 38.2 डिग्री, मलाजखंड (बालाघाट) में 38 डिग्री, खरगोन में 37.8 डिग्री, छिंदवाड़ा में 37.5 डिग्री, नर्मदापुरम, खजुराहो-सिवनी में 37 डिग्री दर्ज किया गया। बड़े शहरों की बात करें तो भोपाल में 35.8 डिग्री, इंदौर में 36.8 डिग्री, ग्वालियर में 35.3 डिग्री, उज्जैन में 36.8 डिग्री और जबलपुर में 35.8 डिग्री दर्ज किया गया। मंडला में 39 डिग्री पारा, भोपाल, इंदौर-ग्वालियर में भी गर्मी बढ़ी दो दिन की राहत के बाद रविवार को दिन के तापमान में बढ़ोतरी देखने को मिली। मौसम विभाग के अनुसार, मंडला में सबसे ज्यादा 39 डिग्री दर्ज किया गया। बैतूल में 38.5 डिग्री, धार में 38.4 डिग्री, नरसिंहपुर में 38.2 डिग्री, मलाजखंड (बालाघाट) में 38 डिग्री, खरगोन में 37.8 डिग्री, छिंदवाड़ा में 37.5 डिग्री, नर्मदापुरम, खजुराहो-सिवनी में 37 डिग्री दर्ज किया गया। बड़े शहरों की बात करें तो भोपाल में 35.8 डिग्री, इंदौर में 36.8 डिग्री, ग्वालियर में 35.3 डिग्री, उज्जैन में 36.8 डिग्री और जबलपुर में 35.8 डिग्री दर्ज किया गया। अप्रैल में चलेगी लू अप्रैल में लू का असर रह सकता है। मालवा-निमाड़ यानी इंदौर और उज्जैन संभाग के जिलों में लू का असर रहने की संभावना ज्यादा है। इनमें रतलाम, उज्जैन, खरगोन, खंडवा, धार आदि शामिल हैं। मौसम विभाग के अनुसार, सामान्यतः दिन का तापमान 40 डिग्री से अधिक या सामान्य से 4.6 डिग्री तक अधिक हो तो हीट वेव यानी लू की स्थिति मानी जाती है। अप्रैल-मई में हीट वेव का असर ज्यादा बता दें कि मार्च से गर्मी के सीजन की शुरुआत हो जाती है। अगले 4 महीने तेज गर्मी पड़ेगी। मौसम विभाग ने मार्च से मई तक 15 से 20 दिन हीट वेव चलने का अनुमान जताया है। अप्रैल-मई में हीट वेव का असर ज्यादा हो सकता है। इस कारण 30 से 35 दिन तक गर्म हवा चल सकती है। MP के 5 बड़े शहरों में मार्च में मौसम का ऐसा ट्रेंड… भोपाल में दिन में तेज गर्मी के साथ बारिश भोपाल में मार्च महीने में दिन में तेज गर्मी पड़ने के साथ बारिश का ट्रेंड भी है। मौसम विभाग के अनुसार, मार्च महीने में गर्मी के सीजन की शुरुआत हो जाती है। इसके चलते दिन-रात के तापमान में बढ़ोतरी होने लगती है। आंकड़ों पर नजर डालें तो 30 मार्च 2021 को अधिकतम तापमान रिकॉर्ड 41 डिग्री पहुंच चुका है। वहीं, 45 साल पहले 9 मार्च 1979 की रात में पारा 6.1 डिग्री दर्ज किया गया था। साल 2014 से 2023 के बीच दो बार ही अधिकतम तापमान 36 डिग्री के आसपास रहा। बाकी सालों में पारा 38 से 41 डिग्री सेल्सियस के बीच रहा है। इंदौर में 41.1 डिग्री तक पहुंच चुका पारा इंदौर में मार्च से गर्मी का असर तेज होने लगता है। यहां दिन का पारा 41.1 डिग्री तक पहुंच चुका है, जो 28 मार्च 1892 को दर्ज किया गया था। 4 मार्च 1898 को रात में पारा 5 डिग्री सेल्सियस तक रहा था। 24 घंटे में करीब एक इंच बारिश होने का रिकॉर्ड है, जबकि पूरे महीने में दो इंच पानी गिर चुका है। मौसम विभाग के अनुसार, मार्च में 2 से 3 दिन बारिश होती है। कभी-कभी … Read more

मंत्रि-परिषद से अनुमोदन उपरांत अमल में लाया जायेगा : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश के ग्रामीण, शहरी और इंटरसिटी परिवहन व्यवस्था को सुदृढ़ बनाया जाएगा। इसके लिए मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा प्रारंभ की जाएगी। योजना का प्रस्ताव तैयार कर लिया गया है। सबके साथ विस्तृत विचार-विमर्श, सुझाव एवं सहमति के बाद शीघ्र ही इस योजना प्रस्ताव को अनुमोदन के लिये मंत्रि-परिषद की बैठक में लाया जायेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव सोमवार को मुख्यमंत्री निवास स्थित समत्व भवन में नवीन परिवहन सेवा (मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा) के संबंध में प्रारंभिक चर्चा के लिए आयोजित एक उच्च स्तरीय बैठक को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में परिवहन सेवाओं को और बेहतर बनाया जाएगा। ग्रामीण क्षेत्रों में विशेषकर प्रदेश के सभी जनजातीय क्षेत्रों में सुगम यात्री परिवहन के लिए सरकार हर जरूरी प्रयास करेगी। पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद पटेल, नगरीय विकास एवं प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, मुख्य सचिव अनुराग जैन ने बैठक में वर्चुअली सहभागिता की। समत्व में हुई बैठक में स्कूल शिक्षा एवं परिवहन मंत्री उदय प्रताप सिंह, अपर मुख्य सचिव मुख्यमंत्री कार्यालय डॉ. राजेश राजौरा, अपर मुख्य सचिव नगरीय विकास एवं प्रशासन संजय कुमार शुक्ल, सचिव परिवहन मनीष सिंह, सचिव मुख्यमंत्री सिबी चक्रवर्ती एवं संचालक जनसम्पर्क अंशुल गुप्ता सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश की यात्री परिवहन संबंधी भावी आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर इस नवीन योजना के सभी पक्षों पर गहनता से अध्ययन करें, जिससे यात्रियों को इसका अधिकतम लाभ मिल सके। सचिव परिवहन मनीष सिंह ने नवीन परिवहन सेवा योजना की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि नई परिवहन योजना में प्रदेश में यात्री बसों के संचालन की त्रि-स्तरीय मॉनिटरिंग की जाएगी। इसके लिए प्रदेश मुख्यालय स्तर पर एक राज्यस्तरीय होल्डिंग कंपनी गठित की जाएगी। प्रदेश के सात बड़े संभागों (भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर, उज्जैन, सागर एवं रीवा) में 7 क्षेत्रीय सहायक कंपनियां भी गठित की जाएगी। इसी उद्देश्य से प्रदेश के सभी जिलों में जिला स्तरीय यात्री परिवहन समिति गठित भी की जायेंगी। यह सभी बॉडीज यात्री परिवहन को बेहतर बनाने, यात्री किराया तय करने, रूट चार्ट तैयार करने में समन्वय और यात्रियों को योजना का अधिकतम लाभ दिलाने के लिए अनुश्रवण एवं मार्गदर्शन करेगी। बताया गया कि सात क्षेत्रीय सहायक कंपनियों की आय अर्जन के स्रोत निर्माण के लिए भी इस योजना में विशेष इंतजाम किए जाएंगे। नवीन योजना में सरकार अनुबंधित बसों को प्राथमिकता से परमिट देगी। इन बसों पर प्रभावी नियंत्रण सरकार का ही होगा। नवीन योजना में यात्रियों एवं बस ऑपरेटर्स के लिए ऐप और कंपनी की मॉनिटरिंग के लिए एक डैशबोर्ड भी होगा नवीन परिवहन सेवा के संचालन के लिए प्रदेश के सात बड़े संभागों में यात्री बसों की आवश्यकता और जरूरी संख्या के लिए सर्वे कराये जा रहे हैं। सर्वे के परिणाम जल्द ही प्राप्त हो जायेंगे। सर्वे के फीडबैक के आधार पर सरकार इस योजना के क्रियान्वयन की दिशा में आगे बढ़ेगी। बताया गया की नवीन परिवहन योजना का सबसे अधिक लाभ यात्रियों को होगा। बस ऑपरेटर्स को भी बेहतर माहौल और उन्हें कन्टीन्यू बिजनेस देने का प्रावधान भी इस नवीन परिवहन सेवा योजना में की गई है, जिससे आपरेटर्स की बस सेवाएं बाधित न हो और यात्रियों को भी कोई परेशानी न हो।   recent visitors 44

नए वित्तीय वर्ष में अधोसंरचना क्षेत्र में सरकार सर्वाधिक खर्च करेगी, कर्ज चुकाने, ब्याज के लिए 58 हजार करोड़

भोपाल मध्यप्रदेश राज्य में अब बजट का सूखा समाप्त होने वाला है। सरकारी महकमों को खर्चे के लिए एक अप्रेल से रकम मिल जाएगी। ऐसा इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने 4.21 लाख करोड़ के बजट को मंजूरी दे दी है। हाल ही में समाप्त हुए बजट सत्र में सदन से यह बजट पारित करवाकर राज्य सरकार ने राजभवन भेजा था। नया वित्तीय वर्ष शुरू होने के साथ ही विभागों में खर्चों पर लगी रोक भी हट जाएगी। MP में 4.21 लाख करोड़ के बजट को मिली हरीझंडी मध्यप्रदेश में अब बजट का सूखा समाप्त होने वाला है। सरकारी महकमों को खर्चे के लिए एक अप्रैल से रकम मिल जाएगी। ऐसा इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने 4.21 लाख करोड़ के बजट को मंजूरी दे दी है। हाल ही में समाप्त हुए बजट सत्र में सदन से यह बजट पारित करवाकर राज्य सरकार ने राजभवन भेजा था। नया वित्तीय वर्ष शुरू होने के साथ ही विभागों में खर्चों पर लगी रोक भी हट जाएगी। नए वित्तीय वर्ष में अधोसंरचना क्षेत्र में सरकार सर्वाधिक खर्च करेगी। अधोसंरचना क्षेत्र में 70515 करोड़ रुपए इस बार खर्च करने की तैयारी है। अधोसंरचना पर ज्यादा नए वित्तीय वर्ष में अधोसंरचना क्षेत्र में सरकार सर्वाधिक खर्च करेगी। अधोसंरचना क्षेत्र में 70515 करोड़ रुपए इस बार खर्च करने की तैयारी है। जबकि कृषि क्षेत्र में 39207 करोड़ रुपए, सामाजिक स्वास्थ्य एवं महिला विकास विकास के लिए 50333 करोड़ रुपए की व्यवस्था सरकार ने की है। नगरीय एवं ग्रामीण विकास के लिए यह राशि 51074 करोड़ रुपए है। कर्ज चुकाने, ब्याज के लिए 58 हजार करोड़ कर्ज का बोझ कम करने के लिए भी सरकार ने व्यवस्था की है। इस बजट में कर्ज चुकान और ब्याज भुगतान के लिए 58 हजार करोड़ रुपए की व्यवस्था की गई है। इसमें ब्याज भुगतान के लिए 28636 करोड़ रुपए एवं कर्ज भुगतान के लिए 29980 करोड़ रुपए का प्रावधान है। यही नहीं पेंशन भुगतान के लिए 28961 करोड़ रुपए की व्यवस्था इस बजट में है। recent visitors 42