प्रदेश में वर्षा जल की बूंद-बूंद बचाने का जल गंगा संवर्धन महा अभियान गुड़ी पड़वा के दिन आज से शुरू होने जा रहा है

भोपाल प्रदेश में वर्षा जल की बूंद-बूंद बचाने का "जल गंगा संवर्धन" महा अभियान गुड़ी पड़वा के दिन आज से से शुरू होने जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन स्थित क्षिप्रा तट पर वरुण (जल देवता) पूजन और जलाभिषेक के साथ "जल गंगा संवर्धन अभियान" का विधिवत शुभारंभ करेंगे। यह प्रदेशव्यापी अभियान ग्रीष्म ऋतु में 30 जून तक 90 दिन से अधिक समय तक लगातार चलेगा। इस दौरान मुख्यमंत्री डॉ. यादव हर दिन एक छोटी-बड़ी जल संरचना को लोकार्पित करेंगे। जल संरक्षण के इस अभियान से प्रदेश में भूजल स्तर में सुधार आएगा। पानी की बूंद-बूंद बचाएं, तभी हमारी सांसें बचेंगी। मध्यप्रदेश सरकार जन, जल, जंगल, जमीन और वन्य प्राणियों के संरक्षण के लिए संकल्पित है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी का जल संरक्षण अभियान देशभर में एक व्यापक जन-आंदोलन बना है। राज्य सरकार भी 'खेत का पानी खेत में-गांव का पानी गांव में' के सिद्धांत पर जल संरक्षण की दिशा में अभियान चला रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि "जल गंगा संवर्धन अभियान" में जल संरक्षण को प्रोत्साहित करने के लिए वर्षा जल संचयन, जल स्रोतों का पुनर्जीवन और जल संरक्षण तकनीकों को अपनाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। प्रदेश सरकार का यह अभियान जल संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी संबंधित विभागों को निर्देश दिए हैं कि वे जल संरक्षण से जुड़ी योजनाओं को प्राथमिकता देकर अधिक से अधिक लोगों को अभियान से जोड़ें। उन्होंने कहा कि "जल गंगा संवर्धन अभियान", प्रदेश में जल की प्रचुर उपलब्धता और भावी पीढ़ियों के लिए जल सुरक्षा सुनिश्चित करने में मील का पत्थर सिद्ध होगा। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के प्रदेशव्यापी जल संवर्धन अभियान में जल संसाधन, नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण, पर्यावरण विभाग, नगरीय विकास एवं आवास, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, स्कूल शिक्षा, उद्यानिकी एवं कृषि सहित 12 से अधिक अन्य विभाग साथ मिलकर जल संरचनाओं के जीर्णोद्धार के कार्य करेंगे। अभियान की थीम 'जन सहभागिता से जल स्त्रोतों का संवर्धन एवं संरक्षण' रखी गई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जल संचय की विभिन्न गतिविधियां संचालित करने जैसे – पौध-रोपण, जल स्रोतों का पुनर्जीवन, ग्रामीण क्षेत्रों में जल संरक्षण जागरूकता कार्यक्रम चलाने, स्कूलों में बच्चों को जल संरक्षण के प्रति जागरूक करने, ग्रामीण क्षेत्रों में तालाब, नदियों पर छोटे बांध निर्माण एवं नदियों के संरक्षण के लिए जलधारा के आसपास फलदार पौधों के रोपण और जैविक खेती को प्रोत्साहित करने, ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के प्रमुख चौराहों पर प्याऊ की व्यवस्था करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने प्रदेश के सभी नागरिकों से भी अपील की है कि वे जल संरक्षण की दिशा में सक्रिय योगदान दें और प्रदेश में अभियान के दौरान इसे एक को जन-आंदोलन बनाएं। "जल गंगा संवर्धन अभियान" में होंगे महत्वपूर्ण कार्य     पंचायत स्तर पर तालाबों के निर्माण, वन्य जीवों के लिए वन क्षेत्र और प्राणी उद्यानों में जल संरचनाओं के पुनर्विकास के कार्य किये जायेंगे।     अभियान के 90 दिनों में प्रदेश की 90 लघु एवं मध्यम सिंचाई परियोजनाओं का लोकार्पण होगा।     नदियों में जलीय जीवों को पुनर्स्थापित किया जाएगा।     लघु एवं सीमांत किसानों के लिए 50 हजार नए खेत-तालाब बनाए जाएंगे।     ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं धार्मिक महत्व के तालाबों, जल स्त्रोतों एवं देवालयों में कार्य किए जाएंगे।     पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग 1000 नए तालाबों का निर्माण करेगा।     प्रदेश की 50 से अधिक नदियों के वॉटर शेड क्षेत्र में जल संरक्षण एवं संवर्धन के कार्य होंगे।     नदियों की जल धाराओं को जीवित रखने के लिए गेबियन संरचना, ट्रेंच, पौध-रोपण, चेकडैम और तालाब निर्माण पर जोर दिया जायेगा।     नर्मदा परिक्रमा पथ का चिन्हांकन कर जल संरक्षण एवं पौध-रोपण की कार्य योजना तैयार होगी।     ग्रामीण क्षेत्रों में पानी चौपाल आयोजित होंगी। स्थानीय लोगों को जल संरचनाओं के रख-रखाव की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी।     प्रत्येक गांव से महिला-पुरुष का चयन कर प्रदेश में लगभग 1 लाख जलदूत तैयार किए जाएंगे।     सीवेज का गंदा पानी जल स्त्रोतों में न मिले, इसके लिए सोक पिट निर्माण को प्रोत्साहित किया जाएगा।     नहरों के संरक्षण, जलाशयों से रिसाव रोकने, तालाबों की पिचिंग, बैराज मरम्मत कार्य होंगे।     नगरीय विकास एवं आवास विभाग जल संरचनाओं के संवर्धन का कार्य करेगा।     नहरों को मार्क कर विलेज-मेप पर "शासकीय नहर" के रूप में अंकित किया जाएगा।     बांध तथा नहरों को अतिक्रमण मुक्त कराया जाएगा। करीब 40 हजार किलोमीटर लंबी नहर प्रणाली का सफाई कार्य होगा।     फ्लशबार की मरम्मत और स्लूस-वैल की सफाई कार्य भी होंगे।     सदानीरा फिल्म समारोह, जल सम्मेलन, प्रदेश की जल परंपराओं पर आख्यान, चित्र प्रदर्शनी समेत विभिन्न आयोजन किये जायेंगे।   recent visitors 61

मप्र के छतरपुर में राजीनामा न करने पर फायरिंग, एक मौत और आधा दर्जन घायल

छतरपुर। जिले के एक गांव में आपसी रंजिश को लेकर दो पक्षों में फायरिंग की वारदात हो गई। इस फायरिंग में एक व्यक्ति की गोली लगने से मौत हो गई और लगभग आधा दर्जन लोग घायल है। घायलों को उपचारार्थ अस्पताल में भर्ती कराया गया है। फायरिंग की सूचना पर पुलिस गांव पहुंची और घायलों को अस्पताल भिजवाकर मामले की जांच में जुट गई है। दरअसल घटना महाराजपुर थाना क्षेत्र के खिरवा गांव की है। दोपहर में चबूतरे को लेकर दोनों पक्षों में मामूली विवाद हुआ था। विवाद सुलह होने के बाद देर रात फिर फायरिंग की बड़ी घटना हो गई जिससे भुज्जन पाल 40 वर्ष की मौत हो गई है। घायल पक्ष का आरोप है कि 307 के मामले में मृतक पक्ष पर आरोपी पक्ष आपसी राजीनामा का दबाब बना रहा था। इसी बात को लेकर की आधा दर्जन लोगों ने फायरिंग कर दी। 100 डायल के जरिए घायलों को जिला अस्पताल छतरपुर पहुंचाया गया। घटना की जानकारी लगते ही देर रात काग्रेस के पूर्व विधायक नीरज दीक्षित भी अस्पताल पहुंचे। उन्होंने घायलों के समुचित इलाज के लिए डॉक्टरों से चर्चा। जानकारी घायल सज्जन पटेल ने दी। recent visitors 118

एलन मस्क के खिलाफ अमेरिका में फूंक दी टेस्ला की कई कारें

वाशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के खास एलन मस्क की मुसीबतें इन दिनों जा रही है। अमेरिका की सरकार में दक्षता विभाग के प्रमुख का पद संभाल रहे मस्क के खिलाफ दुनियाभर में प्रदर्शन तेज हो गए हैं। शनिवार को हजारों लोगों ने सड़क कर उतरकर मस्क के खिलाफ नारे लगाए। इस दौरान लोगों ने टेस्ला की कारों की भी निशाना बनाया। लोगों ने टेस्ला की कई कारें को आग के हवाले कर दिया। वहीं अमेरिका के अलावा ब्रिटेन और जर्मनी जैसे देशों में भी लोग मस्क के प्रति नाराजगी कर रहे हैं। जानकारी के मुताबिक लोग DOGE प्रमुख के रूप में मस्क की नीतियों का विरोध करने के लिए यह कदम उठा रहे हैं। लोगों का कहना है कि मस्क ने इस विभाग के तहत काम कर लोगों की संवेदनशील जानकारी हासिल की है और सरकारी खर्च में कटौती करने का हवाला देते हुए एजेंसियों को बंद करने कर दिया है। इससे हजारों लोगों की नौकरी एक झटके में छीन गई है और लाखों लोग प्रभावित हुए हैं। टेस्ला के शोरूम को बनाया निशाना एलन मस्क के इन कदमों को लेकर लोग बेहद नाराज हैं और इसीलिए वे मस्क की संपत्ति को निशाना बना रहे हैं। दुनिया के सबसे अमीर शख्स एलन मस्क की अनुमानित 340 बिलियन डॉलर की संपत्ति में सबसे बड़ा हिस्सा टेस्ला कंपनी के शेयर हैं। शनिवार को अमेरिका मेंटेस्ला के सभी 277 शोरूम और सेंटर पर लोगों की भीड़ टूट पड़ी। टेक्सास, न्यूजर्सी, मैसाचुसेट्स, कनेक्टिकट, न्यूयॉर्क, मिनेसोटा और अमेरिका के कई अन्य हिस्सों में टेस्ला डीलरशिप के बाहर सैकड़ों प्रदर्शनकारियों ने प्रदर्शन किया। नारे लगाते दिखे लोग प्रदर्शन से जुड़े कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं, जिनमें लोग 'टेस्ला को जलाओ, लोकतंत्र बचाओ', 'अमेरिका को मस्क से मुक्त करो', 'नाजी कारें न खरीदें' जैसे पोस्टर लिए नजर आ रहे हैं। शिकागो के एक शोरूम के बाहर कई दर्जन लोगों ने "एलन मस्क को जाना होगा!" जैसे नारे लगाए हैं। वहीं ब्रिटेन में भी प्रदर्शनकारियों ने मस्क के फैसले के विरोध में 'नाजी कार न खरीदें', 'दिवालिया एलन' जैसे नारे लगाए। कुछ प्रदर्शनकारियों ने कथित तौर पर टेस्ला की कारों को आग लगा दी। मस्क को मिला है राष्ट्रपति का साथ बता दें कि अमेरिका में इससे पहले भी टेस्ला की गाड़ियों को निशाना बनाया गया है। मस्क ने कहा है कि वे हमलों से स्तब्ध हैं और यह पागलपन तुरंत रुकना चाहिए। वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी एलन मस्क का साथ देते दिखे हैं। उन्होंने कहा है कि टेस्ला की गाड़ियों पर हमले करने वालों के खिलाफ सख्त एक्शन लिया जाएगा और उन्हें 20 साल तक के लिए जेल भेज दिया जाएगा। recent visitors 46

PM मोदी आज 30 मार्च को दिखाएंगे हरी झंडी, मिलेगी ये सुविधाएं

बिलासपुर  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज  30 मार्च को बिलासपुर का दौरा करने वाले हैं। वे यहां एक घंटे के लिए रहेंगे। इस दौरान वे जनसभा को भी संबोधित करेंगे। इसे लेकर सुरक्षा एजेंसियों ने तैयारियां कर ली हैं। सभा के लिए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। बिना जांच के किसी को भी प्रवेश नहीं मिलेगा। लोगों को सभास्थल पर पहुंचने के लिए घर से दो से तीन घंटे पहले निकलने की हिदायत दी जा रही है। सुरक्षा व्यवस्था के लिए प्रदेश भर से करीब 3 हजार जवान बिलासपुर पहुंचे हैं। बिलासपुर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सभा को लेकर तैयारियां जोरों पर हैं। शासन-प्रशासन ने पूरी ताकत लगा दी है। कार्यक्रम की तैयारी अंतिम चरण में है। सभास्थल और आसपास के इलाकों की सुरक्षा पर खास ध्यान दिया जा रहा है। सीएम से लेकर कलेक्टर तक सब अलर्ट मोड पर गुरुवार को कलेक्टर अवनीश शरण ने एक मीटिंग की। उन्होंने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को तैयारियों और सुरक्षा व्यवस्था की जानकारी दी। कलेक्टर ने बताया कि लोगों के बैठने और वाहन पार्किंग के लिए खास इंतजाम किए गए हैं। इससे गर्मी में लोगों को सभास्थल तक आने के लिए ज्यादा दूर पैदल नहीं चलना पड़ेगा। सुरक्षा की पुख्ता व्यवस्था सुरक्षा के लिए स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप के अफसर भी बिलासपुर पहुंच गए हैं। उन्होंने कलेक्ट्रेट में देर शाम जिला और पुलिस प्रशासन के अफसरों के साथ मीटिंग की। मीटिंग में सुरक्षा व्यवस्था पर चर्चा की गई। सभास्थल पर पीने के पानी की व्यवस्था भी की गई है। प्रशासन इस बात का ध्यान रख रहा है कि लोगों को गर्मी में किसी तरह की परेशानी न हो। नेत्रालय का शिलान्यास और सोलर डिफेंस एंड एयरोस्पेस लिमिटेड की सुविधा का उद्घाटन करेंगे. वहीं छत्तीसगढ़ में बिलासपुर में 33,700 करोड़ रुपए की लागत वाली कई विकास परियोजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन करेंगे. पीएम के इस दौरे पर छत्तीसगढ़ में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 3 लाख लाभार्थियों का गृह प्रवेश भी होगा. पीएम मोदी 30 मार्च को हिंदू नववर्ष की शुरुआत के अवसर पर नागपुर के रेशिमबाग स्थित ‘स्मृति मंदिर’ में आरएसएस के संस्थापकों को श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे. आरएसएस के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार और आरएसएस के द्वितीय सरसंघचालक एम. एस. गोलवलकर के स्मारक स्मृति मंदिर में स्थित हैं. इसके साथ ही वह दीक्षाभूमि में डॉ. बीआर आंबेडकर को श्रद्धांजलि देंगे, जहां वो 1956 में अपने हजारों अनुयायियों के साथ बौद्ध धर्म अपनाया था. पीएम मोदी का महाराष्ट में कार्यक्रम पीएम मोदी 30 मार्च को सुबह करीब 9 बजे नागपुर में स्मृति मंदिर में दर्शन करेंगे और उसके बाद दीक्षाभूमि जाएंगे. इसके बाद वह सुबह करीब 10 बजे नागपुर में माधव नेत्रालय प्रीमियम सेंटर की आधारशिला रखेंगे. यह माधव नेत्रालय नेत्र संस्थान और अनुसंधान केंद्र का एक नया विस्तार भवन है. इसकी स्थापना गुरुजी माधवराव सदाशिवराव गोलवलकर की स्मृति में की गई थी. इस योजना के तहत 250 बिस्तरों वाला अस्पताल, 14 ओपीडी और 14 मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर स्थापित किए जाएंगे. वहीं, पीएम मोदी एक जनसभा को भी संबोधित करेंगे. इसके बाद पीएम मोदी दोपहर करीब 12:30 बजे नागपुर में सोलर डिफेंस एंड एयरोस्पेस लिमिटेड की गोला-बारूद सुविधा का दौरा करेंगे. जहां वह यूएवी के लिए लोइटरिंग म्यूनिशन टेस्टिंग रेंज और रनवे सुविधा काउद्घाटन करेंगे. यह 1250 मीटर लंबी और 25 मीटर चौड़ी हवाई पट्टी है. यह लोइटरिंग म्यूनिशन और अन्य युद्ध सामग्री का परीक्षण करने के लिए लाइव म्यूनिशन और वारहेड परीक्षण सुविधा है. छत्तीसगढ़ में एक के बाद एक कई कार्यक्रम पीएम मोदी महाराष्ट्र के बाद सीधे छत्तीसगढ़ के बिलासपुर के लिए रवाना होंगे. जहां वह दोपहर करीब 3:30 बजे कई विकास परियोजनाओं का आधारशिला रखेंगे ,साथ ही 33,700 करोड़ रुपए से अधिक की लागत वाली कई परियोजनाओं को राष्ट्र को समर्पित करेंगे. वे बिलासपुर जिले में स्थित एनटीपीसी की सीपत सुपर थर्मल पावर परियोजना चरण-III (1x800MW) की आधारशिला रखेंगे, जिसकी लागत 9,790 करोड़ रुपए से अधिक है. पीएम छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत उत्पादन कंपनी लिमिटेड (CSPGCL) की पहली सुपर क्रिटिकल थर्मल पावर परियोजना (2X660MW) की शुरूआत करेंगे. इसकी लागत 15,800 करोड़ रुपय से अधिक है. इसके अलावा वह पश्चिमी क्षेत्र विस्तार योजना (WRES) के तहत 560 करोड़ से अधिक की लागत वाली पावरग्रिड की तीन विद्युत पारेषण परियोजनाओं को भी राष्ट्र को समर्पित करेंगे. इसके बाद पीएम मोदी वहां ओयजित एक रेली को भी संबोधित करेंगे. इस दौरान धानमंत्री आवास योजना – ग्रामीण (PAMY-G) के तहत 3 लाख लाभार्थियों का गृह प्रवेश होगा. पीएम मोदी इस योजना के तहत कुछ लाभार्थियों को चाबियां सौंपेंगे. इसके अलवा प्रधानमंत्री छत्तीसगढ़ के 29 जिलों में 130 पीएम श्री स्कूल समर्पित करेंगे. छत्तीसगढ़ को पीएम मोदी देंगे ये सौगात     कोरिया, सूरजपुर, बलरामपुर और सरगुजा जिलों में भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) की सिटी गैस वितरण (CGD) परियोजना की आधारशिला रखेंगे.     हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) की 540 किलोमीटर लंबी विशाख-रायपुर पाइपलाइन (VRPL) परियोजना की आधारशिला रखेंगे, जिसकी लागत 2210 करोड़ रुपये से अधिक होगी.     विशेष रूप से छत्तीसगढ़ के आदिवासी और औद्योगिक क्षेत्रों में कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने के लिए कई रेल और सड़क परियोजनाओं के विकास पर विशेष ध्यान दिया जाएगा.     पीएम 108 किलोमीटर की कुल लंबाई वाली सात रेलवे परियोजनाओं की आधारशिला रखेंगे. 2,690 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली 111 किलोमीटर की कुल लंबाई वाली तीन रेलवे परियोजनाओं को राष्ट्र को समर्पित करेंगे.     एनएच-930 (37 किमी) के झलमला से शेरपार खंड और एनएच-43 (75 किमी) के अंबिकापुर-पत्थलगांव खंड को पक्के कंधे के साथ 2 लेन में उन्नत करने के लिए राष्ट्र को समर्पित करेंगे.     एनएच-130डी (47.5 किमी) के कोंडागांव-नारायणपुर खंड को पक्के कंधे के साथ 2 लेन में उन्नत करने की आधारशिला भी रखेंगे.   recent visitors 34

भोपाल में 14% तो इंदौर में 30% तक जमीन की दरें बढ़ाने का प्रस्ताव केंद्रीय मूल्यांकन बोर्ड को भेजा

भोपाल एमपी में इस बार नई कलेक्टर गाइडलाइन (MP New Collector Guideline) में फिर से औसतन 8 से 10 फीसदी दरें बढ़ाने की तैयारी है। भोपाल में औसतन 14% तो इंदौर में 30% तक दरें बढ़ाने का प्रस्ताव केंद्रीय मूल्यांकन बोर्ड को भेजा है। बोर्ड बैठक में मंजूरी मिलने के बाद नई गाइडलाइन 1 अप्रेल से लागू होगी। 2024-25 की गाइडलाइन में भी औसतन 7% वृद्धि की गई थी। एक ओर जहां गाइडलाइन बढ़ रही है, वहीं इसके साथ अदृश्य तरीके से लागू होने वाले उपबंधों पर न तो आपत्तियां बुलाई जा रही हैं और न ही बरसों से कोई बदलाव हुआ है। इससे कृषि भूमि की रजिस्ट्री दोगुनी तो फ्लैट की रजिस्ट्री डेढ़ गुनी तक महंगी हो (Expensive Property in MP) रही है। स्टांप शुल्क प्रदेश में सबसे ज्यादा है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा- गाइडलाइन वैज्ञानिक तरीके से तय हों – सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने शुक्रवार को एमपी सड़क विकास निगम बनाम विंसेंट डेनियल प्रकरण में सुनवाई करते हुए कहा, सर्किल या गाइडलाइन रेट्स को वैज्ञानिक, विशेषज्ञ-आधारित और वास्तविक बाजार मूल्य को प्रतिबिंबित करने वाली पद्धति से तय करना चाहिए। यह कृत्रिम रूप से बढ़ी हुई नहीं होनी चाहिए। – क्रेडाई भोपाल (CREDAI Bhopal) के अध्यक्ष मनोज मीक ने बताया, क्रेडाई यह बात बरसों से कह रहा है। शीर्ष कोर्ट की यह टिप्पणी हमारी मांग की वैधानिक पुष्टि है। सुधार करना चाहिए। रजिस्ट्री महंगी हो रही है गाइडलाइन बढ़ने और साथ लागू होने वाले उपबंधों से रजिस्ट्री महंगी हो रही है। हम हर बार आपत्ति करते हैं, सुनवाई नहीं होती। सरकार वैज्ञानिक तरीके से दरें बढ़ाएं। धीरेश खरे, प्रदेश अध्यक्ष क्रेडाई अभी सॉफ्टवेयर से आ रही है सभी जिलों की गाइडलाइन अभी सॉफ्टवेयर से सभी जिलों की गाइडलाइन आ रही है। केंद्रीय मूल्यांकन बोर्ड जल्द रेट्स पर फैसला लेगा। जिलों की मूल्यांकन समितियां सर्वे व साल भर में हुई रजिस्ट्री के विश्लेषण के आधार पर तय होते हैं। अमित तोमर, महानिरीक्षक पंजीयन recent visitors 36

चीन अब बच्चे पैदा करने के लिए महिलाएं खरीद रहा , इतने रुपए में हो रहा सौदा

बीजिंग चीन की मैरिज रेट में भारी गिरावट आई है और 2024 में देशभर में 61 लाख शादियां की रजिस्टर्ड हुईं जो पिछले साल 77 लाख से कम हैं. इस गिरावट ने की वजह से ही एक्सपर्ट शादी की कानूनी उम्र 22 से घटाकर 18 करने की सिफारिश कर रहे हैं. चीन में मैरिज रेट में गिरावट कई फैक्टर्स की वजह से आई है, इनमें बढ़ता आर्थिक दबाव, शादी के प्रति सोच में बदलाव और शिक्षा का बढ़ता स्तर शामिल है. शादी नहीं करना चाहते युवा खास तौर पर चीन की शहरी महिलाए खुद को ऐसी पारिवारिक जिम्मेदारियों में नहीं झोंकना चाहतीं, जो शादी और बच्चे पैदा करने जैसे जीवन के अहम पड़ावों को महत्व देती हैं. रहन-सहन के बढ़ते खर्च की वजह से भी कई युवा शादी का आर्थिक बोझ उठाने के लिए तैयार नहीं हैं. साथ ही चीन लंबे समय से लैंगिक असंतुलन से जूझ रहा है, जिसकी वजह देश की 'वन चाइल्ड पॉलिसी' और लड़कों को वरीयता देने की विरासत को माना जाता है. साल 2000 के दशक की शुरुआत में जब यह असंतुलन अपने चरम पर था, तब चीन का जन्म के समय लिंग अनुपात हर 100 लड़कियों पर 121 लड़कों तक पहुंच गया था. कुछ प्रांतों में तो यह अनुपात 100 लड़कियों पर 130 लड़के का था. लैंगिक असंतुलन खास तौर पर 1980 के दशक में पैदा हुए लोगों ने साफ देखा है. यह 1980 के दशक के मध्य से अल्ट्रासाउंड तकनीक के इस्तेमाल के कारण हुआ, जिसने माता-पिता को यह सुविधा दी कि अगर उनका बच्चा लड़की है तो वे गर्भपात करा सकते हैं. बचे हुए पुरुषों का क्या होगा? चीन में अविवाहित पुरुष कथित तौर पर 'बचे हुए पुरुषों का युग' (चीनी में शेंगनान शिदाई) का हिस्सा बन गए हैं. यह एक इंटरनेट शब्द है जो मोटे तौर पर 2020 और 2050 के बीच के दौर के लिए इस्तेमाल होता है, जब अनुमान है कि 30 मिलियन से 50 मिलियन चीनी पुरुष शादी के लिए दुल्हन खोजने में असमर्थ होंगे. पहेली यह है कि इनमें से कई 'बचे हुए' पुरुष शादी करना चाहते हैं और पत्नी की तलाश में बेताब हैं, लेकिन जीवनसाथी पाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं. घरेलू जीवनसाथी न मिलने पर कुछ चीनी पुरुष विदेशी दुल्हनों को खरीदने की ओर मुड़ गए हैं. इन दुल्हनों की बढ़ती मांग खास तौर पर ग्रामीण इलाकों में गैरकानूनी शादियों को बढ़ावा दे रही है. इसमें बच्चों और महिलाओं की शादियां शामिल हैं, जिन्हें मुख्य रूप से दक्षिण-पूर्व एशिया के पड़ोसी देशों से चीन में तस्करी करके लाया गया है. म्यांमार से चीन में दुल्हन की तस्करी पर 2019 में जारी ह्यूमन राइट्स वॉच की रिपोर्ट के मुताबिक दोनों तरफ की कानून प्रवर्तन एजेंसियों की नाकामी ने ऐसा माहौल तैयार कर दिया है, जिसमें तस्कर फल-फूल रहे हैं. चीनी सरकार ने अब इस कारोबार पर नकेल कसने की ठान ली है. मार्च 2024 में चीन के सार्वजनिक सुरक्षा मंत्रालय ने महिलाओं और बच्चों की अंतरराष्ट्रीय तस्करी के खिलाफ़ एक अभियान शुरू किया, जिसमें इन अपराधों को खत्म करने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाने की अपील की गई है. 'खरीदी गई' विदेशी दुल्हनें ऐसी शादियां अक्सर अनौपचारिक नेटवर्क या व्यवसायिक एजेंसियों के जरिए कराई जाती हैं जो कि चीन की स्टेट काउंसिल के हिसाब से गैरकानूनी हैं. ह्यूमन राइट्स वॉच का कहना है कि पड़ोसी देशों में महिलाओं और लड़कियों को आमतौर पर दलाल धोखा देते हैं और चीन में अच्छी सैलरी वाली नौकरी का वादा करके लाते हैं. चीन पहुंचने के बाद वे खुद को दलालों की दया पर छोड़ देती हैं और उन्हें चीनी पुरुषों को 3,000 अमेरिकी डॉलर (करीब 2.5 लाख रुपये) से 13,000 अमेरिकी डॉलर (करीब 11 लाख रुपये) के बीच बेचा जाता है. चीन में सीमा पार से आईं लड़कियों की शादी के आंकड़े जुटा पाना चुनौतीपूर्ण है क्योंकि ये गतिविधियां सीक्रेट तरीके से होती हैं. लेकिन ब्रिटेन के सरकारी विभाग के सबसे हालिया डेटा से पता चलता है कि वियतनामी मानव-तस्करी के 75 फीसदी पीड़ितों को चीन में तस्करी करके लाया गया था, जिनमें से 90 प्रतिशत मामले महिलाओं और बच्चों के थे. साल 2022 की अवॉर्ड विनिंग डॉक्यूमेंट्री द वूमन फ्रॉम म्यांमार, तस्करी की गई म्यांमार की एक महिला की कहानी है, जिसे चीन में शादी के लिए बेच दिया गया था. यह फिल्म तस्करी की गईं दुल्हनों के सामने आने वाली चुनौतियों को दर्शाती है. महिलाओं पर जुल्म की कहानी यह न सिर्फ उन महिलाओं के साथ होने वाली जबरदस्ती और बुरे बर्ताव को दिखाती है, बल्कि एक ऐसी व्यवस्था में अस्तित्व के लिए उनके संघर्ष को भी दर्शाती है जो उन्हें प्रोडक्ट की तरह देखती है. डॉक्यूमेंट्री में दिखाई गई तस्करी की शिकार महिला लैरी ने बताया कि बच्चे पैदा करने की उसकी क्षमता ही उसका अस्तित्व तय करती है. चीनी अधिकारी लगातार विदेश से खरीदी गई दुल्हनों से जुड़े घोटालों के बारे में चेतावनी देते रहते हैं. उदाहरण के लिए नवंबर 2024 में दो लोगों पर क्रॉस-बॉर्डर मैचमेकिंग प्लान में शामिल होने के आरोप में मुकदमा चलाया गया था. चीनी पुरुषों को 'किफायती' विदेशी पत्नियों के वादे के साथ विदेश में बेहद महंगे मैरिज टूरिज्म में फंसाया गया है. ऐसे भी मामले सामने आए हैं, जहां शादी के पूरे इंतेजाम होने से पहले ही दुल्हनें बड़ी रकम लेकर फरार हो गईं. देश के आर्थिक विकास के मामले में लेबर फोर्स बेशक अहम है. लेकिन चीनी पीपुल्स पॉलिटिकल कंसल्टेटिव कॉन्फ्रेंस के सदस्य जस्टिन लिन यिफू के अनुसार जो चीज अधिक मायने रखती है वह है इफेक्टिव लेबर. चीन ने अपनी बूढ़ी होती आबादी से जुड़ी भविष्य की चुनौतियों की आशंका में हाल के वर्षों में शिक्षा में अपने निवेश को लगातार बढ़ाया है. लेकिन इसके बावजूद इससे भी बड़ी चिंता बड़ी संख्या में बचे हुए पुरुषों की है, क्योंकि इससे सामाजिक स्थिरता को गंभीर खतरा हो सकता है. अब बच्चे पैदा करने के लिए महिलाएं खरीद रहा चीन, इतने रुपए में हो रहा सौदा चीन के लोगों में शादी न करवाने का चलन जोरो पर चल रहा है। वहां लोग अपना अधिकतर समय अपने कामकाज में ही लगा रहे है। जिसकों लेकर सरकार परेशान है। वहीं, दूसरी तरफ, शादी के लिए विदेशी दुल्हनों की … Read more

बलूचिस्तान जल रहा, पाकिस्तान के लिए अब नियंत्रण बनाना काफी मुश्किल, विद्रोहियों ने कई शहरों पर किया कब्जा

इस्लामाबाद  बलूचिस्तान जल रहा है और पाकिस्तान के लिए अब नियंत्रण बनाना काफी मुश्किल हो गया है। बलूचिस्तान के पाकिस्तान से टूटकर एक अलग मुल्क बनना अब तय होता जा रहा है। सिर्फ वक्त की बात है और ऐसा इसलिए क्योंकि पाकिस्तान की सरकारों ने सालों से बलूचों के साथ जो किया है और अभी भी बलूचों के साथ जो किया जा रहा है, उसने बलूचिस्तान के टूटने का रास्ता बना दिया है। बलूच विद्रोहियों से कैसे निपटा जाए, पाकिस्तान में इसपर बहस की जा रही है। कई लोग सरकार से कठोर बनने के लिए कह रहे हैं तो कुछ लोग बलूचों से बात करने की वकालत कर रहे हैं। डॉन में छपी एक एनालिसिसि रिपोर्ट में पत्रकार मुहम्मद आमिर राणा ने कुछ वजहों का जिक्र किया है। उन्होंने जो कुछ लिखा है, उसके आधार पर विश्लेषण करने से यही पता लगता है कि बलूचिस्तान का आज नहीं तो कल, टूटना तय है। उन्होंने लिखा है कि आतंकवाद विरोधी (COIN) अभियानों के लिए ग्लोबल प्रैक्टिस के मुताबिक आतंकवाद के खतरों से निपटने के लिए सबसे पहले उसे स्वीकार किया जाना चाहिए। मुहम्मद आमिर राणा ने लिखा है कि "पाकिस्तान के तथाकथित बुद्धिजीवी अपने रिसर्च से सरकार को गलत तथ्य बताते हैं, सरकारें गलत तथ्य जानना चाहती है, और पाकिस्तान की मानसिकता ही यही रही है कि विद्रोह को हराने का एकमात्र रास्ता उसे कुचलना है। विद्रोह को कुचलना ही एकमात्र जीत की कुंजी है।" बहुत भयानक गलती कर रहा पाकिस्तान? मुहम्मद आमिर राणा ने कहा है कि RAND कॉपरेशन ने COIN थ्योरी के जरिए दूसरे विश्वयुद्ध के हाद से 2010 तक 71 विद्रोहों को लेकर रिसर्च किया गया है, जिसमें किसी विद्रोह को कुचलकर जीत हासिल करने की थ्योरी को खारिज कर दिया गया है। इसमें कहा गया है कि हर विद्रोह अपने आप में अलग होता है और 24 में से 17 विद्रोह के खिलाफ कठोर नीति फेल हुई है। जबकि ज्यादातर सरकारें विद्रोह के खिलाफ कठोर रणनीति अपनाने पर ही जोर देती हैं। 286 पन्नों के COIN रिपोर्ट में बताया गया है कि किसी विद्रोह को आप कुचलकर नहीं जीत सकते हैं। डॉन के मुताबिक पाकिस्तान में बलूच विद्रोह का सबसे ताजा दौर साल 2003 में शुरू हुआ जब पाकिस्तानी सेना के एक सीनियर अधिकारी ने बलूचिस्तान में एक बलूच महिला के साथ क्रूर बलात्कार किया। इसके बाद से बलूचों का विद्रोह आज तक खत्म करने में सरकार नाकाम रही है। उस दौरान बलूच नेता नवाब अकबर बुगती और तत्कालीन सेना प्रमुख जनरल परवेज मुशर्रफ के बीच गतिरोध तब और बढ़ गया, जब 2005 में कोहलू के पास मुशर्रफ पर रॉकेट से हमला किया गया। 26 अगस्त 2006 को कोहलू के पास एक गुफा में बुगती की पाकिस्तानी सेना ने उस वक्त हत्या कर दी, जब राष्ट्रपति जनरल मुशर्रफ ने ही उन्हें मिलने के लिए इस्लामाबाद बुलाया था और वो उनसे मिलने के लिए बाहर निकले थे। वह सुई से इस्लामाबाद के लिए रवाना होने वाले थे, तभी उनकी हत्या कर दी गई और उसके बाद से बलूचिस्तान का उजाड़ और विशाल इलाका नर्क में तब्दील हो गया है। ये साल 2000 के बाद बलूच विद्रोहियों के साथ किया गया सबसे बड़ा धोखा था। बलूच विद्रोहियों से निपटने में क्यों नाकाम रहा पाकिस्तान? मुहम्मद आमिर राणा ने कहा है कि लेकिन पाकिस्तान में सामूहिक दंड देने पर यकीन किया जाता है, बंदूक की गोली से इंसाफ किया जाता है, महिलाओं से जबरदस्ती की जाती है, दमन को बढ़ावा दिया जाता है और भ्रष्टाचार सबसे आगे रहता है। जबकि पाकिस्तान में विद्रोहियों के पास बाहरी समर्थन होता है, जिसकी वजह से हर अभियान फेल होता है। बलूचिस्तान अभियान भी फेल हो रहा है। उन्होंने कहा कि अगर पाकिस्तान ने आतंकवाद विरोधी अभियान के बाद विकास और शासन सुधारों को प्राथमिकता दी होती तो बलूचिस्तान में हालात अलग हो सकते थे। रिसर्च में पाया गया है कि विद्रोह को शांत करने के 36 मामले इसलिए फेल हुए क्योंकि सैन्य सफलता के बाद सरकार की वैधता स्थापित नहीं की गई और शिकायतों का समाधान नहीं किया गया। इसके अलावा लोकतंत्र को कुचल दिया गया और लोकतांत्रिक शासन नहीं अपनाया गया। और पाकिस्तान भी यही कर रहा है। recent visitors 56