जल गंगा संवर्धन अभियान :पंचायत एवं ग्रामीण विकास, जल संसाधन सहित 12 से अधिक विभागों की अभियान में होगी सहभागिता

प्रधानमंत्री मोदी का जल संरक्षण अभियान अब मध्यप्रदेश में बनेगा जन आंदोलन : मुख्यमंत्री डॉ. यादव 30 मार्च से होगा प्रारंभ होकर 30 जून तक चलेगा "जल गंगा संवर्धन अभियान" पंचायत एवं ग्रामीण विकास, जल संसाधन सहित 12 से अधिक विभागों की अभियान में होगी सहभागिता पानीदार प्रदेश बनने की ओर बढ़ता देश का हृदय प्रदेश मुख्यमंत्री डॉ. यादव उज्जैन के क्षिप्रा तट से करेंगे प्रदेशव्यापी जल संरक्षण अभियान की शुरुआत अभियान में तैयार किए जाएंगे 1 लाख जलदूत मुख्यमंत्री हर दिन एक जल संरचना का लोकार्पण करेंगे तीन माह लगातार चलेगा अभियान भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की दूरदर्शी सोच के साथ मध्यप्रदेश में वर्षा जल की बूंद-बूंद बचाने का "जल गंगा संवर्धन" महा अभियान गुड़ी पड़वा के दिन 30 मार्च से शुरू होने जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन स्थित क्षिप्रा तट पर वरुण (जल देवता) पूजन और जलाभिषेक के साथ "जल गंगा संवर्धन अभियान" का विधिवत शुभारंभ करेंगे। यह प्रदेशव्यापी अभियान ग्रीष्म ऋतु में 30 जून तक 90 दिन से अधिक समय तक लगातार चलेगा। इस दौरान मुख्यमंत्री डॉ. यादव हर दिन एक छोटी-बड़ी जल संरचना को लोकार्पित करेंगे। उन्होंने कहा है कि जल संरक्षण के इस अभियान से प्रदेश में भूजल स्तर में सुधार आएगा। पानी की बूंद-बूंद बचाएं, तभी हमारी सांसें बचेंगी। मध्यप्रदेश सरकार जन, जल, जंगल, जमीन और वन्य प्राणियों के संरक्षण के लिए संकल्पित है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का जल संरक्षण अभियान देशभर में एक व्यापक जन-आंदोलन बना है। राज्य सरकार भी 'खेत का पानी खेत में-गांव का पानी गांव में' के सिद्धांत पर जल संरक्षण की दिशा में अभियान चला रही है। पानी दे, गुरुबाणी दे। जल बिन सब सूना है। जो सबको जीवन दे, वो है जल। जल ही जीवन है। इससे हम आज सुरक्षित है, इसी से हमारा कल भी सुरक्षित है। जल बचाना हम सबकी जिम्मेदारी है। जल संरक्षण के लिए सिर्फ सरकार ही नहीं, समाज को भी आगे आना होगा। इसी मंशा से मध्यप्रदेश सरकार जल गंगा जल संवर्धन महा अभियान प्रारंभ करने जा रही है। हमारी धरा के कुल जल का केवल एक छोटा हिस्सा ही पीने योग्य स्वच्छ जल के रूप में उपलब्ध है। पृथ्वी के कुल जल का लगभग 97 प्रतिशत महासागरों में खारा जल है, जो पीने योग्य नहीं है। शेष 3 प्रतिशत मीठा जल है, लेकिन इसमें से भी अधिकांश हिमखंडों और बर्फ की चोटियों में जमा है। सिर्फ 0.5 प्रतिशत से भी कम पानी झीलों, नदियों और भूजल के रूप में उपलब्ध है, जिसे हम उपयोग कर सकते हैं। पृथ्वी पर स्वच्छ और पीने योग्य पानी की मात्रा बहुत ही सीमित है और इसे संरक्षित करना बेहद ज़रूरी है। इसीलिए मध्यप्रदेश सरकार ने जल बचाने के लिए कदम बढ़ाये हैं। जल बचाने लिए मील का पत्थर सिद्ध होगा अभियान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि "जल गंगा संवर्धन अभियान" में जल संरक्षण को प्रोत्साहित करने के लिए वर्षा जल संचयन, जल स्रोतों का पुनर्जीवन और जल संरक्षण तकनीकों को अपनाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। प्रदेश सरकार का यह अभियान जल संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी संबंधित विभागों को निर्देश दिए हैं कि वे जल संरक्षण से जुड़ी योजनाओं को प्राथमिकता देकर अधिक से अधिक लोगों को अभियान से जोड़ें। उन्होंने कहा कि "जल गंगा संवर्धन अभियान", प्रदेश में जल संकट को खत्म करने और भावी पीढ़ियों के लिए जल सुरक्षा सुनिश्चित करने में मील का पत्थर सिद्ध होगा। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के प्रदेशव्यापी जल संवर्धन अभियान में जल संसाधन, नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण, पर्यावरण विभाग, नगरीय विकास एवं आवास, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, स्कूल शिक्षा, उद्यानिकी एवं कृषि सहित 12 से अधिक अन्य विभाग एवं प्राधिकरण साथ मिलकर जल संरचनाओं के जीर्णोद्धार के कार्य करेंगे। अभियान की थीम 'जन सहभागिता से जल स्त्रोतों का संवर्धन एवं संरक्षण' रखी गई है। नागरिकों के सहयोग से जल संरक्षण अभियान बनेगा जन-आंदोलन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जल संचय की विभिन्न गतिविधियां संचालित करने जैसे – पौध-रोपण, जल स्रोतों का पुनर्जीवन, ग्रामीण क्षेत्रों में जल संरक्षण जागरूकता कार्यक्रम चलाने, स्कूलों में बच्चों को जल संरक्षण के प्रति जागरूक करने, ग्रामीण क्षेत्रों में तालाब, नदियों पर छोटे बांध निर्माण एवं नदियों के संरक्षण के लिए जलधारा के आसपास फलदार पौधों के रोपण और जैविक खेती को प्रोत्साहित करने, ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के प्रमुख चौराहों पर प्याऊ की व्यवस्था करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने प्रदेश के सभी नागरिकों से भी अपील की है कि वे जल संरक्षण की दिशा में सक्रिय योगदान दें और प्रदेश में अभियान के दौरान इसे एक को जन-आंदोलन बनाएं। "जल गंगा संवर्धन अभियान" में होंगे कई महत्वपूर्ण कार्य     पंचायत स्तर पर तालाबों के निर्माण, वन्य जीवों के लिए वन क्षेत्र और प्राणी उद्यानों में जल संरचनाओं के पुनर्विकास के कार्य किये जायेंगे।     अभियान के 90 दिनों में प्रदेश की 90 लघु एवं मध्यम सिंचाई परियोजनाओं का लोकार्पण होगा।     नदियों में जलीय जीवों को पुनर्स्थापित करने की संभावनाएं तलाशेंगे।     लघु एवं सीमांत किसानों के लिए 50 हजार नए खेत-तालाब बनाए जाएंगे।     ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं धार्मिक महत्व के तालाबों, जल स्त्रोतों एवं देवालयों में कार्य किए जाएंगे।     पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग 1000 नए तालाबों का निर्माण करेगा।     प्रदेश की 50 से अधिक नदियों के वॉटर शेड क्षेत्र में जल संरक्षण एवं संवर्धन के कार्य होंगे।     नदियों की जल धाराओं को जीवित रखने के लिए गेबियन संरचना, ट्रेंच, पौध-रोपण, चेकडैम और तालाब निर्माण पर जोर दिया जायेगा।     नर्मदा परिक्रमा पथ का चिन्हांकन कर जल संरक्षण एवं पौध-रोपण की कार्य योजना तैयार होगी।     ग्रामीण क्षेत्रों में पानी चौपाल आयोजित होंगी। स्थानीय लोगों को जल संरचनाओं के रख-रखाव की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी।     प्रत्येक गांव से 2 से 3 महिला-पुरुष का चयन कर प्रदेश में 1 लाख जलदूत तैयार किए जाएंगे।     सीवेज का गंदा पानी जल स्त्रोतों में न मिले, इसके लिए सोख पिट निर्माण को प्रोत्साहित किया जाएगा।     नहरों के संरक्षण, जलाशयों से रिसाव रोकने, तालाबों की पिचिंग, बैराज मरम्मत कार्य होंगे।     नगरीय विकास एवं आवास विभाग 54 जल संरचनाओं के संवर्धन का कार्य करेगा।     नहरों को मार्क … Read more

सिंगरौली में भूकंप के हल्के झटके महसूस किए गए, रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता 3.5 मापी गई

 सिंगरौली  मध्य प्रदेश में गुरुवार को सिंगरौली जिले में भूकंप के हल्के झटके महसूस किए गए। रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता 3.5 मापी गई। झटके इतने हल्के थे कि कई लोगों को यह महसूस नहीं हुए, हालांकि कुछ लोग अपने घरों से बाहर निकल आए। भूकंप 10 किलोमीटर की गहराई पर था।हालांकि कई स्थानों पर लोग अपने घरों से बाहर निकल आए। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र ने बताया कि भूकंप का केंद्र जमीन से 10 किलोमीटर की गहराई में था। सिंगरौली और आसपास के जिलों में काफी लोगों ने भूकंप के झटके को महसूस किया तो कुछ को धरती की कंपन का अहसास नहीं हुआ। जिन लोगों को भूकंप महसूस हुआ वे तुरंत घरों से बाहर निकल आए। लोग एक दूसरे से भूकंप की चर्चा करने लगे। प्रशासन को कहीं से किसी तरह के नुकसान की सूचना नहीं मिली है। रिक्टर स्केल पर 3.5 तीव्रता वाले भूकंपों को हल्के दर्जे में गिना जाता है। इतनी तीव्रता के भूकंप में नुकसान की आशंका ना के बराबर होती है। हालांकि, हल्के से हल्का भूकंप भी लोगों को डरा जरूर देता है। क्यों आता है भूकंप? दरअसल, पृथ्वी की चार प्रमुख परतें हैं, जिसे इनर कोर, आउटर कोर, मेंटल और क्रस्ट कहते हैं। जानकारी के अनुसार, पृथ्वी के नीचे मौजूद प्लेट्स घूमती रहती हैं, जिसके आपस में टकराने पर पृथ्वी की सतह के नीचे कंपन शुरू होता है। जब ये प्लेट्स अपनी जगह से खिसकती हैं तो भूकंप के झटके महसूस किए जाते हैं। इस जगह पर सबसे ज्यादा भूकंप का असर रहता है। हालांकि, भूकंप की तीव्रता अगर ज्यादा होती है तो इसके झटके काफी दूर तक महसूस किए जाते हैं। भूकंप के दौरान क्या करें?     भूकंप के दौरान जितना संभव हो उतना सुरक्षित रहें। इस बात को लेकर सावधान रहे कि भूकंप कितनी तीव्रता के साथ आ सकता है। इसकी पूर्व-चेतावनी देने वाले भूकंप के झटके होते हैं और बाद में बड़ा भूकंप भी आ सकता है।     धीरे-धीरे कुछ कदमों तक की हलचल करें, जिससे पास में किसी सुरक्षित स्थान पर पहुंच सकें और भूकंप के झटकों के रुकने पर घर में तब तक रहें जब तक कि आपको यह सुनिश्चित हो जाएं कि बाहर निकलना सुरक्षित है।   recent visitors 58

साल की पहली तिमाही के दौरान हाउसिंग रियल एस्टेट का बाजार सुस्त हो गया

नई दिल्ली बीते कुछ साल में मकानों की कीमत (House Price) आसमान को छूने को बेताब है। इधर, जियो-पोलिटिकल टेंशन और शेयर बाजार में गिरावट के बीच निवेशकों का सेंटिमेंट बिगड़ गया है। तभी तो इस साल की पहली तिमाही के दौरान हाउसिंग रियल एस्टेट का बाजार सुस्त हो गया है। तभी तो इस दौरान मकानों की बिक्री में 28 फीसदी की गिरावट आई है। रिपोर्ट से हुआ है खुलासा रियल एस्टेट कंसल्टेंट एनारॉक (Anarock) का कहना है कि आवासीय संपत्तियों की आसमान छूती कीमतों और भू-राजनीतिक तनावों के कारण Q1, 2025 में भारतीय आवास बाजार की तेजी धीमी हो गई है। उसकी वजह से घरों की बिक्री में कमी आ रही है। इसकी एक रिपोर्ट के मुताबिक इस साल जनवरी से मार्च के दौरान करीब 93,280 यूनिट्स की बिक्री हुई है। पिछले साल इसी समय में 1,30,170 यूनिट्स की बिक्री हुई थी। इस हिसाब से इस साल 28% की गिरावट दिख रही है। दिल्ली एनसीआर में बिक्री 20 फीसदी घटी दिल्ली-NCR में बिक्री 20% तक घटी है। यहां इस साल पहली तिमाही के दौरान करीब 12,520 यूनिट्स की बिक्री हुई है। जबकि पिछले साल इसी दौरान 15,650 यूनिट्स की बिक्री हुई थी। मुंबई महानगर क्षेत्र (MMR) में आवासीय संपत्तियों की बिक्री 26% तक गिरी है। वहां इस साल करीब 31,610 यूनिट्स की बिक्री हुई है, जबकि पिछले साल 42,920 यूनिट्स की बिक्री हुई थी। मकानों (इकाइयों में) की बिक्री में साल-दर-साल % परिवर्तन   शहरों के नाम Q1-2025 Q1-2024 % परिवर्तन (Q1-2024 बनाम Q1-2025) एनसीआर 12,520 15,650 -20% एमएमआर 31,610 42,920 -26% बैंगलोर 15,000 17,790 -16% पुणे 16,100 22,990 -30% हैदराबाद 10,100 19,660 -49% चेन्नई 4,050 5,510 -26% कोलकाता 3,900 5,650 -31% कुल 93,280 1,30,170 -28% स्रोत: एनारॉक रिसर्च   बेंगलुरु-हैदराबाद में भी घटी बिक्री इस अविध के दौरान बेंगलुरु में मकानों की बिक्री 16% तक गिरी है। वहां इस साल की करीब 15,000 यूनिट्स की बिक्री होने की संभावना है, जबकि पिछले साल 17,790 यूनिट्स की बिक्री हुई थी। पुणे में बिक्री 30% तक गिर सकती है। यहां 16,100 यूनिट्स की बिक्री होने का अनुमान है, जबकि पिछले साल 22,990 यूनिट्स की बिक्री हुई थी। हैदराबाद में घरों की बिक्री 49% तक गिर सकती है। यहां 10,100 यूनिट्स की बिक्री होने की संभावना है, जबकि पिछले साल 19,660 यूनिट्स की बिक्री हुई थी। चेन्नई में बिक्री 26% तक गिर सकती है। यहां 4,050 यूनिट्स की बिक्री होने का अनुमान है, जबकि पिछले साल 5,510 यूनिट्स की बिक्री हुई थी। कोलकाता में आवासीय संपत्तियों की बिक्री इस साल जनवरी-मार्च में 31% तक कम हो सकती है। यहां 3,900 यूनिट्स की बिक्री होने का अनुमान है, जबकि पिछले साल इसी समय में 5,650 यूनिट्स की बिक्री हुई थी। अर्थव्यवस्था ठीक तब भी गिरावट एनारॉक के चेयरमैन अनुज पुरी का कहना है कि भारत का समग्र आर्थिक परिदृश्य इस समय सकारात्मक बना हुआ है। GDP विकास दर वैश्विक स्तर पर सबसे अधिक रहने और मुद्रास्फीति भी नियंत्रण में रहने का अनुमान है। लेकिन, तब भी मकानों की बिक्री में गिरावट आ रही है। उन्होंने कहा "हालांकि, मकानों की बढ़ती कीमतों और वैश्विक तनावों जैसे चल रहे भू-राजनीतिक तनाव और एक कमजोर वैश्विक अर्थव्यवस्था ने भारत के आवासीय बाजार की गतिविधि पर असर डाला है। इन कारकों का असर Q1 2025 में आवास बाजार पर पड़ा है।" recent visitors 47

मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा फिर हुई शुरू रामेश्वरम रवाना हुए 800 यात्री, सीएम ने दिखाई हरी झंडी

रायपुर छत्तीसगढ़ में छह साल बाद आज फिर से मुख्यमंत्री तीर्थ योजना की शुरुआत हुई. मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने भारत गौरव ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रायपुर रेलवे स्टेशन से रवाना किया. इस ट्रेन में छत्तीसगढ़ से 800 यात्री तीर्थ यात्रा के लिए रवाना रवाना हुए हैं. इस योजना के तहत दर्शनार्थियों को मदुरई, तिरुपति और रामेश्वरम के दर्शन कराए जाएंगे. ट्रेन में सफर के दौरान यात्रियों के लिए खाने-पीने के साथ ही चिकित्सा सुविधा भी उपलब्ध है. इस दौरान सीएम साय ने कार्यक्रम को संबोधितक करते हुए उनके सुखद याात्रा की कामना की है. सीएम साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ के लिए आज बड़ा ही ऐतिहासिक और गौरव का दिन है. मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा का आज पुनः शुभारंभ कर रहे हैं. आज हम लोग फिर से मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना की शुरुआत कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि बीजेपी की सरकार में इस योजना की शुरुआत डॉ. रमन सिंह ने की थी. बीच में यह योजना बंद हो गई थी, लेकिन इसे फिर शुरुकर दिया है. उन्होंने कहा कि हमारा जो वादा था, उसे पूरा करने का काम कर रहे हैं. इनकी यात्रा सुखमय हो. हम एक और मोदी की गारंटी का काम पूरा कर रहे हैं. सर्वसुविधा युक्त ट्रेन में यात्रियों के साथ 20 अधिकारी भी मौजूद सीएम साय ने आगे कहा कि रामलला दर्शन योजना की भी हमने शुरुआत की है. इसमें 22 हजार से ज्यादा लोग दर्शन कर आ चुके हैं. बुजुर्गों को तीर्थयात्रा की इच्छा होती है, लेकिन वे आर्थिक समस्या की वजह से जा नहीं पाते. सरकार ऐसे लोगों का पूरा ध्यान रख रही है. तीर्थयात्रियों को किसी तरह की तकलीफ नहीं होगी. तीर्थयात्रियों की देख रेख के लिए 20 अधिकारी भी साथ जा रहे हैं. वहीं तीर्थ यात्रा के लिए रवाना हुए यात्रियों में भारी उत्साह भी देखने को मिला. यात्रियों ने इस योजना को फिर से शुरू करने के लिए साय सरकार का धन्यवाद भी किया है. recent visitors 41

मुख्यमंत्री ने की राष्ट्रीय वैज्ञानिक सम्मेलन में वर्चुअल भागीदारी

स्पेस पॉलिसी के निर्माण और प्रदेश में इसरो के केंद्र के लिए होंगे प्रयास : मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत विज्ञान प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में कर रहा नेतृत्व मुख्यमंत्री ने की राष्ट्रीय वैज्ञानिक सम्मेलन में वर्चुअल भागीदारी भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रकृति के अनेक रहस्य सुलझाने की क्षमता विज्ञान में हैं। आज विज्ञान और प्रौद्योगिकी के अनुप्रयोग से अनेक क्षेत्रों में बड़े परिवर्तन हो रहे हैं। फार्मिंग से लेकर फायनेंस तक मैन्यूफैक्चरिंग से लेकर मेडिसिन तक और एजुकेशन से लेकर कम्यूनिकेशन तक प्रत्येक क्षेत्र का स्वरूप परिवर्तित हो रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में गत एक दशक में भारत ने विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में तीव्र प्रगति की है। राष्ट्र में एक नई ऊर्जा और शक्ति का संचार हुआ है। मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत की विजनरी नीति का ही परिणाम है कि भारत डिफेंस और अन्तरिक्ष के क्षेत्र में निरंतर आगे बढ़ रहा है। भारत इस क्षेत्र में गलोबल लीडर बन रहा है। मध्यप्रदेश शासन द्वारा शीघ्र ही स्पेस पॉलिसी बनाई जाएगी। प्रदेश में इसरो के केंद्र की शुरूआत के लिए भी मंथन प्रारंभ किया गया है। हाल ही में जीआईएस के दौरान विज्ञान और प्रौद्योगिकी के उपयोग पर केंद्रित 4 नीतियों को लागू करने की पहल इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गुरूवार को उज्जैन में हो रहे राष्ट्रीय वैज्ञानिक सम्मेलन/ विज्ञान उत्सव और चालीसवें मध्यप्रदेश युवा वैज्ञानिक सम्मेलन का समत्व भवन (मुख्यमंत्री निवास) से वर्चुअल रूप से शुभारंभ करते हुए यह बात कही। यह सम्मेलन कालिदास अकादमी परिसर उज्जैन में हो रहा है। कार्यक्रम में कौशल विकास एवं रोजगार राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार गौतम टेटवाल भी वर्चुअल रूप से शामिल हुए। मध्यप्रदेश को बनाएंगे टेक्नालॉजी और इनोवेशन हब मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में विभिन्न क्षेत्रों में विज्ञान का उपयोग बढ़ाया जाएगा। प्रदेश को टेक्नालॉजी और इनोवेशन हब बनाया जाएगा। हाल ही में इसरो ने स्पेस डॉकिंग एक्सपेरिमेंट अर्थात स्पैडेक्स सैटेलाइट की सफल लॉन्चिंग करते हुए इतिहास रच दिया है। इसके लिए इसरो की टीम बधाई की पात्र है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वैज्ञानिक समाज और विज्ञान प्रौद्योगिकी से जुड़े संस्थानों के सहयोग से मध्यप्रदेश में इसरो की तरह एक केंद्र के विकास पर भी विचार किया जाएगा। वर्तमान में दक्षिण भारत ही ऐसी गतिविधियों का प्रमुख केंद्र है। उत्तर और मध्य भारत में इस तरह के केंद्र का अभाव है। प्रदेश में चिकित्सा और अन्य क्षेत्रों में भी विज्ञान का प्रयोग बढ़ रहा है। विशेष रूप से कृषि क्षेत्र में ड्रोन का उपयोग हो रहा है। मध्यप्रदेश में ड्रोन के माध्यम से राजस्व के क्षेत्र में भी नक्शे बनाने की शुरूआत की गई है। रायसेन से राष्ट्रीय स्तर पर शहरी बस्तियों के भूमि सर्वेक्षण का पायलेट प्रोजेक्ट शुरू हुआ। प्रदेश के अन्य शहरों में भी जमीन,भूखण्ड और बस्तियों का डिजिटल नक्शा बनाने की पहल हुई है। इससे संपत्ति के स्वामित्व के रिकार्ड्स रखना आसान होगा। अनेक क्षेत्रों में विज्ञान का उपयोग कार्यों को आसान बना रहा है। उज्जैन है काल गणना का केंद्र, चार नई नीतियों के माध्यम से विज्ञान प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में आगे बढ़ेंगे मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारी सनातन संस्कृति भी विज्ञान आधारित है। हम अनेक शुभ कार्य नवग्रह पूजन से प्रारंभ करते हैं। विक्रम संवत 2082 आ रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सम्राट विक्रमादित्य के काल से लेकर अब तक उज्जैन के इतिहास,कला, संस्कृति और अध्यात्म के साथ ही विज्ञान के केंद्र होने का उल्लेख करते हुए कहा कि हम सभी उज्जैन को काल गणना के केंद्र के रूप में जानते हैं। इस संबंध में भी निरंतर अनुसंधान हो रहा है। हम नूतन का स्वागत करते हुए पुरातन परम्पराओं को भी साथ रखते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि युवा वैज्ञानिक सम्मेलन और राष्ट्रीय वैज्ञानिक सम्मेलन की थीम "विकास की बात विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार एक साथ"प्रासंगिक है। प्राचीन भारतीय विज्ञान परम्परा पर आधारित विभिन्न सत्रों का आयोजन सराहनीय है, जिसमें लगभग 300 शोधार्थी और युवा वैज्ञानिक 17 विषयों पर शोध पत्र प्रस्तुत कर रहे हैं। प्रौद्योगिकी और नवाचार आज की आवश्यकता है। हाल ही में सम्पन्न ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में आईटी विभाग के माध्यम से 4 महत्वपूर्ण नीतियां मध्यप्रदेश ड्रोन सवंर्धन और उद्योग नीति-2025, मध्यप्रदेश एनीमेशन, विजुअल एफैक्टस, गैमिंग कामिक्स और विस्तारित रियलिटी (एवीजीसी- एक्सआर) नीति-2025, मध्यप्रदेश सेमी कंडक्टर नीति-2025 और मध्यप्रदेश वैश्विक क्षमता केंद्र (जीसीसी)नीति-2025 घोषित की गई हैं। वैज्ञानिक सम्मेलन में स्पेस पॉलिसी बनाने का सुझाव आया है। इस नाते मध्यप्रदेश की स्पेस पॉलिसी तैयार की जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सम्मेलन के सभी प्रतिभागियों को भागीदारी के लिए बधाई दी। राष्ट्रीय सुदूर संवेदन केंद्र हैदराबाद के निदेशक डॉ. प्रकाश चौहान ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव वैज्ञानिक सोच रखते हैं, जिस तरह देश डिफेंस प्रोडक्शन, स्पेस और बॉयो टेक्नालॉजी के क्षेत्र में आगे बढ़ रहा है, मध्यप्रदेश भी इन क्षेत्रों में प्रयासरत है। प्रधानमंत्री मोदी ने स्पेस पॉलिसी-2023 लाने का कार्य किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ऐसे चंद मुख्यमंत्रियों में शामिल हैं जो इस क्षेत्र में नवाचार के लिए उत्साहित हैं। युवाओं को कौशल प्रशिक्षण के लिए शीघ्र ही मेपकास्ट के सहयोग से अनुबंध किया जाएगा। कृषि बीमा योजना जैसे कार्य स्पेस टेक्नोलॉजी के माध्यम से हो रहे हैं। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद के महानिदेशक डॉ. अनिल कोठारी ने कहा कि प्रदेश में इस तरह के वैज्ञानिक सम्मेलन अन्य स्थानों पर भी किए जाएंगे। देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के कुलगुरु राकेश सिंघई, विक्रमादित्य शोध पीठ के निदेशक और मुख्यमंत्री के सांस्कृतिक सलाहकार श्रीराम तिवारी, विक्रम विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. अर्पण भारद्वाज, विज्ञान भारती के राष्ट्रीय महासचिव विवेकानंद पई,भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय के रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन के एमेरिट्स वैज्ञानिक सुधीर मिश्रा और महानिदेशक, भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान, भोपाल प्रो. गोवर्धन दास, निदेशक नेशनल इनोवेशन फाउन्डेशन डॉ. अरविन्द रानाडे, प्रमुख सेंटर फॉर क्रिएटिव लर्निंग, प्रोफेसर, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, गांधीनगर प्रो. मनीष जैन भी सम्मेलन में शामिल हुए। समत्म भवन से मध्यप्रदेश हिन्दी ग्रंथ अकादमी के संचालक अशोक कड़ेल और अपर मुख्य सचिव सूचना प्रौद्योगिकी संजय दुबे भी सम्मेलन के इस सत्र में उपस्थित हुए।   recent visitors 43

हॉक फोर्स और एसएसयू में कई पदों पर भर्ती की तैयारी, 300 पद व विशेष सहयोगी दस्ते में 800 पदों पर होगी भर्ती

बालाघाट नक्सलियों के सफाए के लिए पुलिस अपनी रणनीति और संख्या बल को मजबूत करने में जुटी है। नक्सल प्रभावित लांजी और बैहर में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक से लेकर अनुविभागीय पुलिस अधिकारी की कमान भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी संभालेंगे। अभी यहां युवा अधिकारियों की तैनाती की गई है। पुलिस अधीक्षक नगेंद्र सिंह का कहना है कि युवा आईपीएस को नक्सल आपरेशन की कमान देकर उनके कौशल, सूझबूझ और ऊर्जा का उपयोग किया जा रहा है। बल संख्या को मजबूत करते हुए जल्द ही हॉक फोर्स के 300 पद और विशेष सहयोगी दस्ता(एसएसयू) के करीब 800 पदों पर भर्ती की तैयारी है। छत्तीसगढ़ में मुठभेड़ के बाद गश्त तेज ये बड़े और अहम फैसले ‘मिशन 2026’ को ध्यान में रखते हुए लिए गए हैं। 20 मार्च को छत्तीसगढ़ में हुईं दो अलग-अलग मुठभेड़ में 30 नक्सलियों को मार गिराने के बाद यहां पुलिस ने अपनी गश्त और तेज कर दी है। छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र के सीमावर्ती क्षेत्रों से लगे करीब 12 कैंप के 700 से अधिक जवान दिन-रात गश्त कर रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, छत्तीसगढ़ के सीमावर्ती इलाकों में पुलिस को नक्सलियों की गतिविधि से जुड़े इनपुट भी मिले हैं, जिससे पुलिस पहले से ज्यादा सतर्क है। मिशन 2026 के लिए बढ़ा रहे पद दिसंबर 2022 में नक्सल उन्मूल अभियान के तहत पुलिस ने तीन जिलों के क्षेत्रीय युवक-युवतियों का विशेष सहयोगी दस्ता बनाया था। तब बालाघाट में विशेष सहयोगी दस्ता के 80, मंडला में 30 और डिंडौरी में 40 पदों पर युवाओं की अस्थाई भर्ती की गई थी। मिशन 2026 को देखते हुए बालाघाट पुलिस इन पदों को बढ़ाने जा रही है। युवा आईपीएस अधिकारियों को मौका     मिशन 2026 को देखते हुए मुख्यालय स्तर से हॉक फोर्स और पुलिस के कई पदों पर युवा आईपीएस अधिकारियों को मौका दिया गया है। हॉक फोर्स के 300 और एसएसयू के 800 पदों पर भर्ती की तैयारी है। हमारी कोशिश है कि युवा पुलिस अधिकारियों के कौशल, उनकी सूझबूझ और ऊर्जा का सही उपयोग हो। – नगेंद्र सिंह, पुलिस अधीक्षक, बालाघाट   वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित जिलों की संख्या घटकर हुई '38 वामपंथी उग्रवाद (एलडब्ल्यूई) के खतरे से समग्र रूप से निपटने के लिए, भारत सरकार (जीओआई) ने 2015 में 'एलडब्ल्यूई से निपटने के लिए राष्ट्रीय नीति और कार्य योजना' को मंजूरी दी थी। इस नीति में सुरक्षा संबंधी उपायों, विकास हस्तक्षेपों, स्थानीय समुदायों के अधिकारों और हकों को सुनिश्चित करने आदि से जुड़ी एक बहुआयामी रणनीति की परिकल्पना की गई है। नीति के दृढ़ कार्यान्वयन के परिणामस्वरूप हिंसा और भौगोलिक विस्तार में लगातार कमी आई है। वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित जिलों की संख्या में भी भारी गिरावट आई है। अप्रैल 2018 तक वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित जिलों की संख्या 126 से घटकर 90 रह गई है, जुलाई 2021 तक यह संख्या 70 और फिर अप्रैल 2024 तक 38 रह गई है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 31 मार्च 2026 तक देश में वामपंथी उग्रवाद को पूरी तरह से समाप्त करने की घोषणा की है। केंद्रीय गृह मंत्रालय में राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने बुधवार को राज्यसभा में पूछे गए एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह बात कही है। उन्होंने बताया, वामपंथी उग्रवादियों (एलडब्ल्यूई) द्वारा हिंसा की घटनाएं जो 2010 में अपने उच्चतम स्तर 1936 पर पहुंच गई थीं, 2024 में घटकर 374 रह गई हैं। यानी 81 प्रतिशत की कमी आई है। इस अवधि के दौरान कुल मौतों (नागरिक + सुरक्षा बल) की संख्या भी 85 प्रतिशत घटकर 2010 में 1005 से 2024 में 150 हो गई है। पिछले 06 वर्षों के दौरान, वामपंथी उग्रवादियों द्वारा हिंसा की घटनाएं जो 2019 में 501 थीं, 2024 में घटकर 374 हो गई हैं, यानी 25 प्रतिशत की कमी। इस अवधि के दौरान कुल मौतों (नागरिक + सुरक्षा बल) की संख्या भी 26 प्रतिशत घटकर 2019 में 202 से 2024 में 150 हो गई है। वर्ष 2022 और 2023 में हिंसा में वृद्धि वामपंथी उग्रवादियों के खिलाफ बढ़े हुए अभियानों के कारण है, क्योंकि सुरक्षा बलों ने सीपीआई (माओवादी) के मुख्य क्षेत्रों में प्रवेश करना शुरू कर दिया है। सुरक्षा के मोर्चे पर, भारत सरकार (जीओआई) वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित राज्यों को केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बटालियन, राज्य पुलिस बलों के आधुनिकीकरण के लिए प्रशिक्षण और धन, उपकरण और हथियार, खुफिया जानकारी साझा करना, किलेबंद पुलिस स्टेशनों का निर्माण आदि प्रदान करके क्षमता निर्माण के लिए सहायता करती है। सुरक्षा संबंधी व्यय (एसआरई) योजना के तहत सुरक्षा बलों की परिचालन और प्रशिक्षण आवश्यकताओं से संबंधित आवर्ती व्यय, आत्मसमर्पण करने वाले वामपंथी उग्रवादियों के पुनर्वास के लिए राज्यों द्वारा किए गए व्यय, सामुदायिक पुलिसिंग, ग्राम रक्षा समितियों और प्रचार सामग्री आदि के लिए सहायता प्रदान की जाती है। इस योजना के तहत 2014-15 से 2024-25 के दौरान 3260.37 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं। विशेष अवसंरचना योजना के तहत विशेष खुफिया शाखाओं, विशेष बलों, जिला पुलिस को मजबूत करने और फोर्टिफाइड पुलिस स्टेशनों (एफपीएस) के निर्माण के लिए धनराशि प्रदान की जाती है। एसआईएस के तहत 1741 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं। इस योजना के तहत पहले से निर्मित 400 एफपीएस के अलावा 226 एफपीएस का निर्माण किया गया है। इसके अलावा, वामपंथी उग्रवाद प्रबंधन के लिए केंद्रीय एजेंसियों को सहायता (एसीएएलडब्ल्यूईएम) योजना के तहत वामपंथी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों में हेलीकॉप्टरों और सुरक्षा शिविरों में महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे के लिए 2014-15 से 2024-25 की अवधि के दौरान केंद्रीय एजेंसियों को 1120.32 करोड़ रुपये दिए गए हैं। विकास के मोर्चे पर, प्रमुख योजनाओं के अलावा, भारत सरकार ने वामपंथी उग्रवाद प्रभावित राज्यों में कई विशिष्ट पहल की हैं, जिसमें सड़क नेटवर्क के विस्तार, दूरसंचार संपर्क में सुधार, कौशल और वित्तीय समावेशन पर विशेष जोर दिया गया है। सड़क संपर्क के विस्तार के लिए 14,618 किलोमीटर सड़कें बनाई गई हैं। वामपंथी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों में दूरसंचार संपर्क में सुधार के लिए 7,768 टावर लगाए गए हैं। कौशल विकास के संबंध में 46 औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) और 49 कौशल विकास केंद्र (एसडीसी) चालू किए गए हैं। आदिवासी क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के लिए 178 एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय (ईएमआरएस) चालू किए गए हैं। वित्तीय समावेशन के लिए, डाक विभाग ने वामपंथी उग्रवाद प्रभावित जिलों में बैंकिंग सेवाओं के साथ 5731 … Read more

एमपी सरकार नया टैक्स नहीं लगाएगी। जनता की आय बढ़ाने के हरसंभव प्रयास किए जाएंगे: सीएम यादव

भोपाल  एमपी सरकार नया टैक्स नहीं लगाएगी। जनता की आय बढ़ाने के हरसंभव प्रयास किए जाएंगे। सीएम डॉ. मोहन यादव ने यह बात एक निजी कार्यक्रम में कही। उन्होंने कहा, सरकार अपने संसाधनों का हर संभव अधिक से अधिक उपयोग करेगी और जनता को सरकारी योजनाओं के माध्यम से सशक्त बनाया जाएगा, ताकि वे सरकार के जरिए स्वयं की आय बढ़ा सके। सरकार इस काम में जो मदद कर सकती है, वे सभी मदद पहुंचाई जाएगी। जानकारी के लिए बता दें कि जीआइएस की सफलता को लेकर सीएम का सम्मान किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यह भी कहा कि भोपाल की प्राकृतिक संपदा और इसके पुरा-इतिहास के संवर्धन में कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी। भोपाल को एक सुंदर मेट्रोपॉलिटन सिटी बनाएंगे। भोजपुर मंदिर रोड पर ‘भोज द्वार’ और इंदौर-उज्जैन मार्ग पर विक्रमादित्य के सुशासन के प्रतीक स्वरूप ‘विक्रम द्वार’ बनाए जाएंगे। भारत को विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनाने में मध्यप्रदेश पीछे नहीं रहेगा। उन्होंने कहा कि हम विरासत से विकास की ओर बढ़ रहे हैं। अगले 5 साल में हम प्रदेश का सालाना बजट दोगुना कर देंगे। कोई नया टैक्स नहीं लगाएंगे बल्कि नागरिकों की आय बढ़ाकर अपने बजट को बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जीआईएस में विश्व से उद्योगपति भोपाल आए। भोपाल आकर उन सभी को आनंद आ गया, क्योंकि यहां की झीलें, तालाब और यहां की संस्कृति जीवंत हैं, यही हमारी पूंजी है। उन्होंने कहा कि भोपाल देश का एकमात्र राजधानी क्षेत्र है जहाँ मानव और बाघों के सह-अस्तित्व का अनोखा और अद्वितीय उदाहरण विद्यमान है। recent visitors 30