चैंपियंस ट्रॉफी से पाकिस्तान को 800 करोड़ नुकसान, खिलाड़ियों की सैलरी काटने पर मजबूर PCB

लाहौर  पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (पीसीबी) चैंपियंस ट्रॉफी 2025 की मेजबानी के बाद भारी आर्थिक नुकसान से जूझ रहा है। टूर्नामेंट में पाकिस्तान टीम का प्रदर्शन भी निराशाजनक रहा। लगभग 869 करोड़ रुपये खर्च करने के बावजूद पीसीबी को सिर्फ 52 करोड़ रुपये की ही कमाई हुई, जिससे उसे 739 करोड़ रुपये का घाटा हुआ। इस नुकसान की भरपाई के लिए PCB ने घरेलू खिलाड़ियों की मैच फीस में भारी कटौती की है। पाकिस्तान को तगड़ा झटका चैंपियंस ट्रॉफी 2025 पाकिस्तान के लिए दोहरी मार साबित हुई। एक तो मेजबान होने के बावजूद पाकिस्तानी टीम ग्रुप स्टेज से ही बाहर हो गई। दूसरा, टूर्नामेंट के आयोजन में भारी खर्च के बाद भी PCB को अपेक्षित लाभ नहीं हुआ, बल्कि भारी नुकसान उठाना पड़ा। इससे PCB की आर्थिक स्थिति बेहद खराब हो गई है। PCB ने टूर्नामेंट के लिए स्टेडियमों के नवीनीकरण, आयोजन और अन्य तैयारियों पर कुल 869 करोड़ रुपये खर्च किए। नाकामी का उदाहरण बना चैंपियंस ट्रॉफी पाकिस्तान को पहले मुकाबले में न्यूजीलैंड और दूसरे मैच में भारत ने हराया. बांग्लादेश के खिलाफ ग्रुप का आखिरी मैच रावलपिंडी में बारिश के कारण धुल गया. उसने इस टू्र्नामेंट के लिए करोड़ों रुपये खर्च किए थे, लेकिन टीम के शर्मनाक प्रदर्शन सबको निराश कर दिया. चैंपियंस ट्रॉफी पाकिस्तान के लिए अरबों रुपये की बर्बादी साबित हुई. यह वित्तीय और लॉजिस्टिक नाकामी का उदाहरण बन गया. लाहौर के गद्दाफी स्टेडियम में न्यूजीलैंड के खिलाफ अपने एकमात्र घरेलू मैच के लिए पीसीबी ने करीब 100 मिलियन डॉलर खर्च कर दिया. करोड़ों रुपये का नुकसान स्टेडियमों के नवीनीकरण पर ही लगभग 560 करोड़ रुपये खर्च हुए, जो उनके मूल बजट के आधे से भी ज्यादा थे। बाकी 347 करोड़ रुपये टूर्नामेंट की अन्य तैयारियों पर खर्च किए गए। हालांकि, मेजबानी फीस और टिकटों की बिक्री से PCB को केवल 52 करोड़ रुपये की ही आमदनी हुई। इस प्रकार, PCB को कुल 739 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। पाकिस्तान में 29 साल बाद किसी बड़े अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट टूर्नामेंट का आयोजन हुआ था। PCB को उम्मीद थी कि इस टूर्नामेंट से उसे अच्छी कमाई होगी। लेकिन, नतीजा इसके उलट निकला। टूर्नामेंट से होने वाले नुकसान ने PCB की आर्थिक स्थिति को और कमजोर कर दिया है। इससे PCB को घरेलू खिलाड़ियों की मैच फीस में भारी कटौती करने का फैसला लेना पड़ा है। खिलाड़ियों के पैसे कटेंगे पीसीबी के इस फैसले से घरेलू खिलाड़ी काफी निराश हैं। टीम XI के खिलाड़ियों की फीस में 90 प्रतिशत की कटौती की गई है। रिजर्व खिलाड़ियों को तो पिछली फीस की तुलना में सिर्फ 12.50 प्रतिशत राशि ही मिल रही है। यह कटौती खिलाड़ियों के लिए बड़ा झटका है। चैंपियंस ट्रॉफी के आयोजन में हुए भारी नुकसान के बाद पीसीबी की आर्थिक स्थिति चिंताजनक हो गई है। इससे PCB के आगे के कार्यक्रमों पर भी असर पड़ सकता है। यह देखना होगा कि पीसीबी इस मुश्किल से कैसे निपटता है और अपनी आर्थिक स्थिति को कैसे सुधारता है। इस घटना ने पीसीबी के लिए एक बड़ी सीख छोड़ दी है। भविष्य में ऐसे आयोजनों के लिए बेहतर वित्तीय योजना बनाने की आवश्यकता है। साथ ही, टीम के प्रदर्शन पर भी ध्यान देना होगा ताकि दर्शकों की संख्या बढ़े और राजस्व में वृद्धि हो। इस पूरे घटनाक्रम ने पाकिस्तान क्रिकेट के भविष्य पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आने वाले समय में पीसीबी के लिए चुनौतियों कम नहीं होंगी। उसे अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे। साथ ही, टीम के प्रदर्शन में सुधार लाना भी जरूरी होगा। तभी पाकिस्तान क्रिकेट फिर से अपनी पुरानी शान हासिल कर पाएगा। यह समय PCB के लिए आत्ममंथन करने का है। बगैर मैच जीते 5 दिन में बाहर हुई थी पाकिस्तानी टीम यह पीसीबी के कुल बजट का 50 प्रतिशत ज्यादा है. 40 मिलियन डॉलर (करीब 347 करोड़ भारतीय रुपये) टूर्नामेंट की तैयारी में खर्च किए. इतना कुल खर्च करने के बाद पीसीबी को करीब 52 करोड़ रुपये का ही फायदा हुआ है. ऐसे में उसे टूर्नामेंट में करीब 85% नुकसान झेलना पड़ा. पाकिस्तान क्रिकेट टीम ने अपने घर में हुए इस चैम्पियंस ट्रॉफी में शर्मनाक प्रदर्शन किया था. यह टीम बगैर कोई मैच जीते 5 दिन में ही बाहर हो गई थी. टीम ग्रुप स्टेज से आगे नहीं बढ़ सकी. पाकिस्तान को न्यूजीलैंड और भारत ने हराया, जबकि बांग्लादेश के खिलाफ मैच बारिश से धुल गया था. recent visitors 58

19 माओवादियों ने हिंसा का रास्ता छोड़ किया आत्मसमर्पण

बीजापुर छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में पुलिस को नक्सल उन्मूलन अभियान में बड़ी सफलता मिली है. सरकार की महत्वपूर्ण पुनर्वास नीति और “नियद नेल्लानार” योजना से प्रभावित होकर 19 नक्सलियों ने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण किया है. इनमें से 10 नक्सलियों पर कुल 29 लाख रुपये का इनाम घोषित था. 2025 में अब तक 84 नक्सलियों ने छोड़ा हिंसा का रास्ता इस आत्मसमर्पण के साथ ही वर्ष 2025 में अब तक कुल 84 नक्सलियों ने पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण किया है. इसके अलावा अब तक 137 नक्सली गिरफ्तार किए गए हैं और 56 माओवादियों को अलग-अलग मुठभेड़ में सुरक्षाबल के जवानों ने मार गिराया गया है. आत्मसमर्पण करने वाले सभी 19 नक्सली पूर्व में फायरिंग, आईईडी ब्लास्ट, आगजनी जैसे अन्य नक्सली घटनाओं में शामिल थे. प्रत्येक नक्सली को मिली 25-25 हजार रुपये की सहायता राशि इन सभी नक्सलियों ने सीआरपीएफ डीआईजी देवेन्द्र सिंह नेगी, पुलिस अधीक्षक डॉ. जितेन्द्र यादव, एएसपी मयंक गुर्जर (आईपीएस), डीएसपी शरद जायसवाल और अन्य अधिकारियों के समक्ष आत्मसमर्पण किया है. पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण करने वाले सभी माओवादियों को अधिकारियों ने 25-25 हजार रुपये नगद राशि प्रदान किया गया. recent visitors 35

Neja Mela : संभल जिला प्रशासन ने साफ कह दिया कि वह लुटेरों के नाम पर मेले का आयोजन नहीं होने देगा

 संभल यूपी के संभल जिले में सैयद सालार मसूद गाजी के नाम पर लगने वाले 'नेजा मेले' का आयोजन अब नहीं होगा. 'नेजा मेला' कमेटी के लोग अनुमति मांगने एडिशनल एसपी श्रीशचंद्र के पास पहुंचे थे, लेकिन एडिशनल एसपी ने कमेटी को दो टूक मना कर दिया. साथ ही नसीहत देते हुए कहा कि सोमनाथ मंदिर को लूटने वाले, भारत में लूटमार व कत्लेआम मचाने वाले की याद में किसी भी मेले का आयोजन नहीं होना चाहिए. उन्होंने कहा कि एक लुटेरे के नाम पर मेले का आयोजन करके आप लोग अभी तक अपराध करते रहे हैं, लेकिन अब ऐसा नहीं चलेगा. आपको बता दें कि सैयद सालार मसूद गाजी विदेशी आक्रांता महमूद गजनवी का भांजा और सेनापति था.  गजनवी ने 1000 से 1027 ईस्वी के बीच भारत पर 17 बार हमला किया था. इस दौरान उसने हिंदुओं की आस्था के प्रतीक सोमनाथ मंदिर सहित कई बड़े मंदिरों पर भी आक्रमण किया था. संभल पुलिस की 'नेजा मेला' कमेटी को दो टूक संभल के एसएसपी श्रीशचंद्र ने 'नेजा मेला' कमेटी के लोगों से कहा कि सोमनाथ मंदिर को लूटने वाले, लुटेरे-हत्यारे की याद में किसी भी मेले का जिले में नहीं होगा. जो कोई व्यक्ति हत्यारे और लुटेरे के साथ रहेगा वह देश के साथ अपराध कर रहा है. आप लोग लुटेरे के नाम पर मेले का आयोजन करके अपराध करते रहे हैं. जिसने इस लुटेरे के नाम पर मेले का आयोजन किया वह व्यक्ति भी फिर देशद्रोही है. एसएसपी ने कहा कि 'नेजा मेला' एक बुरी कुरीति थी. किसी भी लुटेरे के नाम पर मेले का आयोजन किया जाना पूरी तरह से गलत है.  कानून व्यवस्था के चलते इजाजत नहीं दी जा रही है. मेला लगाने की कोई अनुमति नहीं है. अगर कोई नियम तोड़ेगा तो उसपर एक्शन लिया जाएगा. संभल में होली के बाद सैयद सालार मसूद गाजी की याद में 'नेजा मेला' लगाया जाता था. इस आयोजन को लेकर पहले भी आपत्ति जताई गई थी. अब संभल जिला प्रशासन ने साफ कह दिया है कि वह लुटेरों के नाम पर मेले का आयोजन नहीं होने देगा. इस साल संभल में सैयद सालार मसूद गाजी की याद में आयोजित होने वाला 'नेजा मेला' नहीं लगेगा. इससे पहले 'नेजा कमेटी' के पदाधिकारियों ने एसडीएम डॉ. बंदना मिश्रा से मुलाकात की थी. पदाधिकारियों ने उनसे मेले के आयोजन की अनुमति मांगी थी, लेकिन तब भी एसडीएम ने साफ कर दिया था कि 'नेजा मेले' के नाम पर कोई अनुमति नहीं दी जाएगी. वहीं, पदाधिकारियों ने तर्क दिया कि 'नेजा मेला' सदियों पुरानी परंपरा है और इसे उसी स्वरूप में आयोजित किया जाना चाहिए. लेकिन प्रशासन ने स्पष्ट किया कि सामाजिक सौहार्द बनाए रखने के लिए अनुमति नहीं दी जाएगी. नेजा मेला क्यों लगाया जाता है संभल में हजारों सालों से चला आ रहे नेजा मेले का इतिहास उस समय का है जब महाराजा पृथ्वीराज चौहान की राजधानी संभल हुआ करती थी। धार्मिक नगर नेजा कमेटी संभल के अध्यक्ष शाहिद मसूदी ने निजा मेला क्यों मनाया जाता है इसके संबंध में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पृथ्वीराज चौहान की राजधानी संभल हुआ करती थी और उस समय संभल में हजरत शेख पचासे मियां रहमतुल्लाह अलैह का परिवार रहा करता था। उनकी बेटी बहुत खूबसूरत थी, पृथ्वीराज चौहान के बेटे का दिल हजरत शेख पचासे मियां की बेटी पर आ गया। पैगाम पाकर आने का लिया फैसला पिता ने बेटी को सारा माजरा बताया तो बेटी ने कुछ वक्त लेने की बात कही और एक पैगाम अफगानिस्तान में सय्यद सालार मसूद गाजी रहमतुल्ला अलैह को भेजा और मदद की ख्वाहिश जाहिर की। सय्यद सालार मसूद गाजी रहमतुल्लाह अलैह ने पैगाम पाकर संभल आने का फैसला किया। उसने यहां पृथ्वीराज चौहान को जंग में पराजित किया। इस जंग में शहीद हुए उसके साथियों के आज भी मजार संभल में हैं, जहां मेला लगाया जाता है।  नेजा मेले की खास परंपरा, यहां सजकर बैठतीं हैं दुल्हनें संभल में सैयद सलार मसूद गाजी की याद में लगने वाले नेजा मेला पर खास परम्परा के तहत दुल्हनें सजकर बैठीं और घर परिवार व मौहल्ले की महिलाओं ने उनके साज श्रंगार की सराहना कर उन्हें ईनाम दिया। नेजा मेला पर हर साल वह दुल्हनें सजकर बैठती हैं जिनकी शादी पिछले एक साल के दौरान हुई होती है। दुल्हन उसी तरह सजती संवरती है जैसे वह शादी के वक्त सजती संवरती है। शहर के मौहल्ला चौधरी सराय सहित कई मौहल्लों में दुल्हनें सजकर बैठीं। पहले बहुत ज्यादा संख्या में दुल्हनों के सजने की परम्परा था मगर अब बदले वक्त में कुछ संगठन इस पुरानी प्रथा का विरोध करने लगे हैं।   recent visitors 38

रेलवे ने डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने कैश काउंटर किए बंद, यात्री परेशान, टिकट काउंटरों में लंबी लाईनें

रायपुर   दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे जोन के अधिकारियों ने आरक्षण केंद्र और अनारक्षित टिकट केंद्र में कई कैश काउंटर बंद कर डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने का अभियान शुरू किया है. इसका नतीजा ये हो रहा है कि टिकट काउंटरों में लंबी लाईने लगी हुई है और वो यात्री परेशान हो रहे है जिनके पास डिजिटल पेमेंट का कोई ऑपशन नहीं है. रायपुर रेलवे स्टेशन के अनारक्षित टिकट काउंटर के लंबी लाईन में खड़े रहने के बाद जब आप काउंटर पर टिकट लेने पहुंचेंगे तो पता चलेगा कि उक्त काउंटर सिर्फ डिजिटल पेमेंट के लिए ही है, इसके बाद आपको पुनः उस लाईन में लगना होगा जहां कैश में टिकट उपलब्ध होगी. संभव है कि ऐसे में या तो यात्री बिना टिकट ट्रेन में सफर करने को मजबूर होंगे या टिकट के चक्कर में यात्रियों की ट्रेनें ही छूट जाएगी. कई टिकट काउंटर बंद मिले होली (Holi) से घर जाने वाले यात्रियों की संख्या बढ़ने के वजह से सोमवार को अनारक्षित टिकट काउंटरों ( unreserved ticket counter ) में यात्रियों की लंबी लाईने देखने को मिली. टिकट लेने के लिए यात्रियों को आधे घंटे से अधिक की वेटिंग मिली, ऐसी स्थिति में भी रेलवे ने कई टिकट काउंटरों को बंद ही रहा. यहां टिकट काउंटर नंबर 6, 7, 8 और 3 और 2 नंबर काउंटर बंद मिले. यानी कुल 5 टिकट काउंटर रायपुर रेलवे स्टेशन में बंद पड़े है. इसके अलावा टिकट काउंटर नंबर 5 सिर्फ डिजिटल पेमेंट (Digital Payment) से टिकट लेने वाले यात्रियों के लिए खुला मिला, काउंटर नंबर 4 में कैश और ऑन लाइन दोनो पेमेंट मोड की सुविधा मिली. वहीं 1 नंबर काउंटर केवल महिलाओं के लिए रिजवर्ड है, लेकिन उन्हें यहां भी सिर्फ ऑन लाईन पेमेंट में ही टिकटें दी जा रही थी. इसका मतलब ये है कि सिर्फ एक टिकट काउंटर में यात्रियों को कैश में टिकटें उपलब्ध है, हालांकि यहां 2 एटीवीएम (ATVM) मशीनें भी शुरू मिली जहां यात्री टिकट ले सकते है. आरक्षण केंद्र का भी यही हाल, तत्काल टिकटें लेने के लिए यात्री हो रहे परेशान आरक्षण केंद्र में टिकटें लेने जाने वाले यात्रियों का भी यही हाल है. यहां भी कई काउंटरों में कैश लेन-देन बंद कर दिया गया है. इसका सबसे ज्यादा नुकसान उन यात्रियों को हो रहा है जो तत्काल टिकटें लेने आरक्षण केंद्र पहुंच रहे है. क्योंकि डिजिटल पेमेंट के प्रोसेस में 30 से 50 सैकेंड का वक्त लग ही जाता है. ऐसे में 1-2 नंबर पर खड़े यात्रियों को ही टिकटें मिल पाती है और 3 के पहुंचते तक टिकटें खत्म हो जाती है. इसके अलावा यहां वो भी यात्री परेशान हो रहे है जिनके पास केवल कैश ही मौजूद है. Raipur Parcel Office में कैश बंद अब यदि आपको पार्सल ऑफिस में बुकिंग के लिए जाना है तो जेब में कैश रखकर जाने से आपका सामान यहां बुकिंग नहीं होगा. क्योंकि यहां कैश काउंटर (Cash Counter) में कैश लेन-देन पूरे तरीके से बंद कर दिया गया है. यानी आपे पास कैश होते हुए भी आपका पार्सल यहां बुकिंग नहीं होगा या तो अपना पार्सल बुकिंग करने के लिए आपको दलालों से संपर्क करना पड़ेगा. लंबी लाईन से बचना है तो डाउनलोड करे ये APP रेलवे अधिकारियों का कहना है कि यात्री UTS App के माध्यम से आसानी से टिकट बुक कर सकते है और लंबी लाईनों से छुटकारा पा सकते है. भारतीय रेलवे (Indian Railway) का UTS (Unreserved Ticketing System) मोबाइल ऐप आपकी यात्रा को सरल और सुविधाजनक बना सकता है. इस ऐप के जरिए आप बिना किसी परेशानी के अनरिजर्व्ड, प्लेटफॉर्म और सीजन टिकट बुक कर सकते हैं. यह ऐप खासकर उन यात्रियों के लिए फायदेमंद है जो रोज ट्रेन से यात्रा करते हैं या जिन्हें अचानक यात्रा करनी होती है. ऐप का उपयोग करने के लिए, यात्रियों को पहले अपना मोबाइल नंबर और पासवर्ड से रिजिस्टर करना होता है. इसके के बाद, आप इस ऐप का उपयोग टिकट बुक करने, टिकट की उपलब्धता देखने, और ट्रेन के समय की जानकारी प्राप्त करने के लिए कर सकते हैं. यदि जरूरत हो तो टिकट को कैंसिल भी किया जा सकता है. यहां हम आपको इस आप से जुड़ी हर जानकारी देने जा रहे हैं. UTS ऐप क्या है और कैसे काम करता है? अनरिज़र्व टिकटिंग सिस्टम (UTS) एक मोबाइल एप्लिकेशन है जिसे 2014 में रेलवे सूचना प्रणाली केंद्र (CRIS) द्वारा लॉन्च किया गया था, जो भारतीय रेलवे का एक सहायक संगठन है. इस ऐप के माध्यम से यात्री अनरिज़र्व ट्रेन टिकट जनरेट या कैंसिल कर सकते हैं, सीज़नल टिकट बुक कर सकते हैं, पास को  रिन्यू कर सकरते हैं, और प्लेटफॉर्म टिकट खरीद सकते हैं. यह उन यात्रियों के लिए फायदेमंद है जो अक्सर यात्रा करते हैं और अचानक कहीं जाने की आवश्यकता होती है. UTS ऐप को Android और iOS प्लेटफार्म दोनों के लिए संबंधित ऐप स्टोर्स से मुफ्त में डाउनलोड किया जा सकता है. UTS  App से कितने तरह की ट्रेन टिकट बुकिंग कर सकते हैं?     यात्री UTS Android मोबाइल टिकटिंग ऐप का उपयोग करके पांच तरह के ट्रेन टिकट बुक कर सकते हैं:     सामान्य टिकट बुकिंग (Normal Ticket Booking)     क्विक टिकट बुकिंग (Quick Ticket Booking)     प्लेटफॉर्म  टिकट बुकिंग (Platform Ticket Booking)     सीज़नल टिकट बुकिंग/रिन्यूअल (Season Ticket Booking/Renewal)     QR बुकिंग (QR Booking) UTS ऐप पर रजिस्ट्रेशन करने का प्रोसेस     Google Play या Apple iOS पर UTS मोबाइल एप्लिकेशन सर्च करें और इसे डाउनलोड करें.     ऐप पर रजिस्ट्रेशन करने के लिए अपना फोन नंबर, नाम, लिंग, और जन्म तिथि दर्ज करें.     एक पासवर्ड जनरेटर उपलब्ध होगा. UTS ऐप के लिए एक याद पहने वाला मजबूत  पासवर्ड बनाएं.     अब UTS मोबाइल ऐप की टर्म और कंडीशन से सहमत हों.     रजिस्ट्रर बटन पर क्लिक करें.     टिकट बुक करने के लिए, अपना यूज़र आईडी और पासवर्ड दर्ज करें.     ट्रेन टिकट बुक करने के लिए इन स्टेप्स को फॉलो करें:     सबसे पहले, पेपरलेस या पेपर टिकट का चयन करें.     “Depart from” (जहां से यात्रा शुरू होगी) और “Going to” (जहां जाना है) स्टेशन चुनें.     “Next” पर क्लिक करें और फिर “Get Fare” पर क्लिक करें.     “Book ticket” बटन दबाएं … Read more

470 किमी लंबे इलाके में बहने वाली सिंध नदी कई जगहों पर सूखकर गड्ढों में तब्दील हो गई

विदिशा एमपी की एक बड़ी नदी सूख गई है। 470 किमी लंबे इलाके में बहने वाली यह नदी कई जगहों पर सूखकर गड्ढों में तब्दील हो गई है वहीं कुछ जगहों पर नदी पोखरनुमा बन गई है जहां बहुत कम पानी बचा है। नदी की दुर्दशा से इसके किनारों की बसाहटों में हाहाकार सा मच गया है। एमपी के विदिशा जिले से निकलकर यूपी के जालौन में यमुना से मिलनेवाली सिंध नदी का यह बुरा हाल हुआ है। भीषण गर्मी के कारण मार्च में ही सिंध नदी के सूख जाने से कई गांवों में पीने के पानी का संकट गहरा गया है।  सिंध नदी विदिशा जिले के सिरोंज तहसील के नैनवास कला स्थित ताल से निकलती है जोकि यमुना की सहायक नदी है। यह नदी एमपी के गुना, अशोकनगर, शिवपुरी, दतिया, ग्वालियर और भिंड जिलों से होकर बहती है उत्तरप्रदेश के जालौन जिले में यमुना नदी में मिलती है। इस प्रकार मालवा के पठार से उत्तर-उत्तर-पूर्व की ओर बहती हुई चंबल और यमुना के संगम के ठीक बाद यमुना में समाती है। जब हर तरफ नदियों के प्रदूषित हो जाने से लोग चिंतित हैं तब सिंध नदी एक खुशनुमा एहसास कराती रही है। यह नदी देश की सबसे साफ सुथरी नदियों में शामिल है, बहुतायत में अब भी लोग सिंध के पानी का उपयोग पीने के लिए करते हैं। यही कारण है कि सिंध नदी का सूख जाना लाखों लोगों के लिए चिंता का कारण बन गया है।  अशोकनगर में​ सिंध में पानी ही नहीं बचा है। जिले के अंतिम छोर पर पीलीघटा में नदी का दृश्य, सूखती सिंध की हालत के बारे में बहुत कुछ कह रहा है। यहां नदी के सूख जाने से पोखर बन गए हैं। इन हिस्सों में मवेशी अपनी प्यास बुझाने जाते हैं। अब इन पोखरों पर भी सकंट मंडरा गया है। इनमें भी आसपास के किसानों ने पाइप डाल रखे हैं और मोटर पंप से पानी खींचा जा रहा है। सिंध की कुल 470 किलोमीटर (290 मील) की लंबाई में से 461 किलोमीटर (286 मील) मध्यप्रदेश में और महज 9 किलोमीटर (5.6 मील) उत्तर प्रदेश में हैं। सिंध के सूखने से इसके किनारों पर रहनेवालों के लिए पेयजल का संकट गहरा रहा है। दतिया जिले के सेंवढ़ा तहसील के किसान और मल्लाह समुदाय के लोग अब भी सिंध नदी का पानी पीते हैं। पूरे इलाके में होनेवाली शादियों या धार्मिक कार्यक्रमों के लिए लोग सिंध का पानी ही सीधे इस्तेमाल करते हैं। नदी से टैंक में पानी स्टोर कर पेयजल के रूप मे इसका उपयोग करते हैं। सिंध किनारे स्थित खमरौली गांव के लोग कहते हैं कि यह दूसरी नदियों के पानी से कई गुना स्वच्छ है। बरसात के दिनों को छोड़ कर हम हर मौसम में सिंध का पानी पीते हैं। सिंध नदी के स्वच्छ होने की पुष्टि कई सरकारी मानकों से भी होती है। इस नदी के कम प्रदूषित होने की सबसे बड़ी वजह मानव और औद्योगिक गतिविधियों का कम होना है। सिंध के किनारे पर एक भी बड़ी आबादी वाला शहर नहीं है। ग्वालियर जिले का डबरा सबसे बड़ा शहर है जिसकी आबादी 2011 की जनगणना के अनुसार महज 2.37 लाख थी। मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने गंगा बेसिन में जिन 19 प्रमुख औद्योगिक इकाइयों को प्रदूषण के खतरे के मद्देनजर चिह्नित किया है उसमें एक भी सिंध नदी के तट पर नहीं है। इसके तट पर अधिकांश छोटे शहर या कस्बे हैं जहां बड़े उद्योग या कल-कारखाने नहीं हैं। सिंध किनारे के गांवों में मुख्यत: खेती और पशुपालन किया जाता है। सीमित संसाधन व कम जरूरत के कारण सिंध स्वच्छ बनी रही लेकिन इसके सूखने से चिंता व्याप्त हो गई है। recent visitors 35

MP में औद्योगिक विकास और निवेशकों को बढ़ावा देने, नगरों के सुव्यवस्थित विकास के लिए दो मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र बनाने की कवायद शुरू

भोपाल  मध्यप्रदेश में औद्योगिक विकास और निवेशकों को बढ़ावा देने के साथ-साथ नगरों के सुव्यवस्थित विकास के लिए दो मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र बनाने की कवायद शुरू हो गई है। पहला मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र इंदौर-उज्जैन-देवास और धार को मिलाकर और दूसरा मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र भोपाल-सीहोर, रायसेन-विदिशा-ब्यावरा (राजगढ़) को मिलाकर विकसित किया जाएगा।  केंद्र के विजन के मुताबिक राज्य के प्रमुख संभाग मुख्यालय ग्वालियर, सागर, रीवा, जबलपुर, नर्मदापुरम और शहडोल को रीजनल इकोनॉमिक ग्रोथ हब के रूप में विकसित करने की तैयारी है। सरकार का यह प्रयास अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के साथ-साथ रोजगार, व्यापार और निवेश के नये अवसरों को भी बढ़ावा देने के लिए किया जा रहा है। सुविधाओं में होगा सुधार जानकारी के तहत इंदौर मेट्रोपॉलिटन सिटी में इंदौर का 100 प्रतिशत क्षेत्र शामिल किया जाएगा, जबकि उज्जैन का 44 प्रतिशत धार और नागदा का भी कुछ हिस्सा इसमें जोड़ा जाएगा। इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य औद्योगिक और शहरी विकास को संगठित तरीके से आगे बढ़ाना है, जिससे आधारभूत सुविधाओं में सुधार हो और निवेशकों को आकर्षित किया जा सके।   बनेंगी पांच नई तहसीलें, सभी 8 तहसीलों के होंगे अपने भवन भोपाल वासियों को जमीन से लेकर राजस्व के मामले को निपटाने के लिए अब दूर नहीं जाना होगा। जिला पुनर्गठन के प्रशासनिक प्रस्ताव पर शासन जल्द ही अंतिम मुहर लगाएगा। जिला प्रशासन द्वारा भेजे प्रस्ताव में शासन की ओर से मांगी गई आपत्तियों पर एसडीएम और तहसीलदार को 15 दिन में जवाब देना है। नीति के तहत भोपाल में पांच नई तहसीलों का गठन होगा। मौजूदा तीन तहसीलों के साथ पांच नई तहसीलों(Five New Tehsil) के साथ फिर कुल संख्या आठ हो जाएगी। इससे लोगों को अपने आवास क्षेत्र में ही तहसील कार्यालय में कार्य करवाना आसान हो जाएगा। 10 बदलाव प्रस्तावित ● मौजूदा उपनगर ही नई तहसील बनेंगे। बैरागढ़, कोलार, भेल गोविंदपुरा, पुराना शहर व नया शहर, नर्मदापुरम रोड की नई तहसील होंगी। ● नई तहसीलें दूरी व क्षेत्रफल के अनुसार अलग से नजूल क्षेत्र तय करेंगे। ● शहरी और ग्रामीण क्षेत्र का नक्शा अलग किया जाएगा। ● जिला-तहसील क्षेत्रों को नगर निगम के वार्ड से भी जोड़ा जाएगा। ● तहसील व नजूल में तहसील अधिकारियों व कर्मचारियों की संख्या बढ़ेगी। ● शहरी क्षेत्र की तहसीलों में आबादी चार लाख के भीतर तय की जाएगी। इसलिए जरूरी पुनर्गठन अभी जिले में कोलार, हुजूर व बैरसिया तहसील हैं। आठ नजूल क्षेत्र हैं। इनके एसडीएम है। कोलार, बैरसिया को छोडकऱ बाकी में तहसील(Five New Tehsil) कार्यालय अन्य क्षेत्रों में हैं। एमपी नगर नजूल कोलार तहसील में है तो बैरागढ़, हुजूर, ओल्ड सिटी नजूल पुराने शहर में कलेक्ट्रेट में है। गोविंदपुरा भी पुराने शहर के कलेक्टे्रट में है। हुजूर तहसील में शहर व ग्रामीण का 70 फीसदी क्षेत्र है जिससे काम कठिन होता है। जिले के पुनर्गठन की प्रक्रिया की जा रही है। लोगों की सुविधा की दृष्टि से बेहतर योजना तय की जा रही है। इससे सबको लाभ होगा। – कौशलेंद्र विक्रमसिंह, कलेक्टर recent visitors 35

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान और बिल गेट्स, सोशल मीडिया अकाउंट एक्स और इंस्टाग्राम पर शेयर कीं तस्वीरें

भोपाल/ नई दिल्ली  केंद्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान (Union Minister Shivraj Singh Chauhan) ने माइक्रोसॉफ्ट के को-फाउंडर तथा गेट्स फाउंडेशन के सह-संस्थापक बिल गेट्स (Bill Gates) से मुलाकात की। वे दिल्ली में कृषि भवन (Krishi Bhawan Delhi) में आयोजित एक बैठक में शामिल हुए। बैठक में इन मुद्दों पर हुई चर्चा इस बैठक में शिवराज सिंह चौहान ने कृषि, खाद्य सुरक्षा, महिला सशक्तिकरण, तकनीकी नवाचार और ग्रामीण विकास से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा की। चौहान ने भारत और गेट्स फाउंडेशन के बीच साझेदारी को गहरा करने की संभावनाओं पर जोर दिया। उनका पूरा फोकस डिजिटल कृषि, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, बायोटेक्नोलॉजी और जलवायु अनुकूलित कृषि तकनीकों के क्षेत्रों पर रहा। इस दौरान उन्होंने कहा कि, प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हमारा आजीविका मिशन महिला सशक्तिकरण का आंदोलन बन गया है, जिसने महिलाओं की जिंदगी बदल दी है। बिल गेट्स ने की कृषि अनुसंधान की तारीफ बिल गेट्स ने इस दौरान भारत में हो रहे कृषि अनुसंधान की सराहना की। प्रशंसा करते हुए उन्होंने कहा कि इससे पूरी दुनिया को बहुत फायदा हो सकता है। उन्होंने भारत की नेतृत्व क्षमता और नवाचार को वैश्विक प्रगति के लिए महत्वपूर्ण बताया। शिवराज सिंह चौहान ने ‘वसुधैव कुटुंबकम’ के सिद्धांत पर चलते हुए वैश्विक कल्याण के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दोहराया। उन्होंने आशा जताई कि गेट्स फाउंडेशन और अन्य वैश्विक साझेदारों के साथ मिलकर हम नवाचार, तकनीक और समावेशी विकास को बढ़ावा देकर भूखरहित, सशक्त और आत्मनिर्भर विश्व का निर्माण करेंगे। बैठक में कृषि पैदावार बढ़ाने, डिजिटल कृषि विस्तार प्रणाली, प्रिसीजन एग्रीकल्चर, पोषण सुरक्षा, समावेशी आजीविका कार्यक्रम, उन्नत पशु वैक्सीन, कृषि और ग्रामीण विकास में वैश्विक सहयोग को बढ़ाने के उपायों पर भी विस्तृत चर्चा की गई। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे को सहयोग करने के प्रति आश्वस्त किया। शिवराज सिंह चौहान ने किया ट्वीट, इंस्टा पर शेयर किया वीडियो बता दें कि केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बिल गेट्स के साथ महत्वपूर्ण बैठक को लेकर अपने सोशल मीडिया अकाउंट एक्स और इंस्टाग्राम पर भी भी शेयर किया। इस पोस्ट में शिवराज ने लिखा कि…     बिल गेट्स फाउंडेशन द्वारा विश्व के कई देशों में कृषि और ग्रामीण विकास सहित विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य किया जा रहा है।     आज डिजिटल कृषि में सहयोग, ICAR के साथ अनुसंधान एवं विकास में सहयोग की संभावनाएँ, ग्रामीण विकास में सहयोग के साथ ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंसी सहित… pic.twitter.com/YpgaetiOC6     — Shivraj Singh Chouhan (@ChouhanShivraj) March 17, 2025 ‘आज कृषि भवन, नई दिल्ली में गेट्स फाउंडेशन के सह-संस्थापक श्री बिल गेट्स से मुलाकात की। हमने कृषि, खाद्य सुरक्षा, महिला सशक्तिकरण, तकनीकी नवाचार और ग्रामीण विकास से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा की। भारत और गेट्स फाउंडेशन के बीच साझेदारी को गहरा करने की असीम संभावनाएं हैं, विशेषकर डिजिटल कृषि, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, बायोटेक्नोलॉजी एवं जलवायु अनुकूलित कृषि तकनीकों के क्षेत्र में। हम नवाचार, तकनीक और समावेशी विकास को बढ़ावा देकर भूखरहित, सशक्त और आत्मनिर्भर विश्व के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध हैं।’ recent visitors 49