राज्य सरकार ने इस गंभीर समस्या से निपटने के लिए मुफ्त कैंसर वैक्सीनेशन प्रोग्राम लागू करने का फैसला लिया

मुंबई महाराष्ट्र की फडणवीस सरकार ने सेहत के मोर्चे पर बड़ा कदम उठाते हुए 0-14 साल की लड़कियों को मुफ्त कैंसर वैक्सीन देने का ऐलान किया है। राज्य के स्वास्थ्य मंत्री प्रकाश आबिटकर ने शनिवार को इसकी जानकारी देते हुए कहा कि बदलती जीवनशैली के चलते कैंसर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, और अब यह बीमारी हर उम्र के लोगों को अपनी चपेट में ले रही है। आबिटकर ने बताया कि राज्य सरकार ने इस गंभीर समस्या से निपटने के लिए मुफ्त कैंसर वैक्सीनेशन प्रोग्राम लागू करने का फैसला लिया है। रिपोर्ट के मुताबिक, आबिटकर कहा, "हमने उपमुख्यमंत्री और वित्त मंत्री अजित पवार से अनुरोध किया था कि 0-14 साल की लड़कियों को मुफ्त में कैंसर वैक्सीन उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने इसे मंजूरी दे दी है और जल्द ही सरकार इसे लागू करेगी।" बताया जा रहा है कि कैंसर के मामलों में बढ़ोतरी के पीछे सिर्फ धूम्रपान या अन्य नशे की लत ही जिम्मेदार नहीं है, बल्कि खान-पान और बदलती जीवनशैली भी एक बड़ा कारण बन रही है। खासकर बच्चों में कैंसर के बढ़ते मामलों को देखते हुए यह योजना अहम मानी जा रही है। बर्ड फ्लू पर भी अलर्ट इसी बीच राज्य सरकार ने विदर्भ में बर्ड फ्लू के खतरे को लेकर भी सख्ती बरतनी शुरू कर दी है। वहां कौवों में एवियन इंफ्लूएंजा (बर्ड फ्लू) की पुष्टि हुई है, हालांकि इंसानों में इसके संक्रमण की कोई पुष्टि नहीं हुई है। आबिटकर ने बताया कि संदिग्ध मरीज के नमूने जांच के लिए नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी भेजे गए हैं। उन्होंने कहा, "सावधानी के तौर पर हमने प्रभावित इलाकों में चिकन की दुकानों को अस्थायी रूप से बंद कर दिया है, ताकि संक्रमण को फैलने से रोका जा सके।" चिकन खाने को लेकर किया गया सतर्क इससे पहले पुणे में गुइलेन-बैरे सिंड्रोम (जीबीएस) के मामले सामने आने के बाद उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने लोगों से अधपका चिकन खाने से बचने की अपील की थी। हालांकि, इस बीमारी और चिकन के बीच किसी स्पष्ट संबंध की पुष्टि नहीं हुई है, फिर भी सरकार ने ऐहतियात बरतने की सलाह दी है। recent visitors 56

दो संभागों में गर्मी बढ़ रही है तो रात में तापमान में गिरावट, इस बीच कहीं पर हल्‍की बारिश का भी अनुमान

भोपाल मध्‍य प्रदेश में इन दिनों मिला जुला मौसम देखने को मिल रहा है। जहां दिन में गर्मी बढ़ रही है तो रात में तापमान में गिरावट आ जाती है। इस बीच कहीं पर हल्‍की बारिश का भी अनुमान है। अलग-अलग स्थानों पर सक्रिय मौसम प्रणालियों के प्रभाव से प्रदेश में दिन और रात के तापमान में बढ़ोतरी होने लगी है। इसी क्रम में फरवरी माह के अंतिम दिन गुरुवार को पूरे प्रदेश में दिन और रात के तापमान में काफी बढ़ोतरी दर्ज की गई। जबलपुर में 19 वर्ष बाद तो इंदौर में छह वर्ष बाद फरवरी में इतनी गर्मी पड़ी है। भोपाल एवं ग्वालियर भी दो वर्ष बाद फरवरी इतना गर्म रहा। मौसम विज्ञानियों के अनुसार शनिवार को ग्वालियर-चंबल संभाग में कहीं-कहीं वर्षा हो सकती है। मौसम विज्ञान केंद्र के विज्ञानी अभिलाष श्रीवास्तव ने बताया कि वर्तमान में पश्चिमी विक्षोभ पाकिस्तान के आसपास द्रोणिका के रूप में बना हुआ है। इसके प्रभाव से उत्तर-पश्चिमी राजस्थान और उससे लगे पाकिस्तान पर बना प्रेरित चक्रवात अब और मजबूत होकर कम दबाव के क्षेत्र में परिवर्तित हो गया है। कम दबाव के क्षेत्र से महाराष्ट्र तक एक द्रोणिका बनी हुई है, जो गुजरात से होकर जा रही है। मौसम विभाग का यह है अनुमान मौसम विशेषज्ञ अजय शुक्ला ने बताया कि हवाओं का रुख दक्षिणी एवं दक्षिण-पश्चिमी बना हुआ है। इस वजह से दिन और रात के तापमान में बढ़ोतरी होने लगी है इसी क्रम में शुक्रवार को जबलपुर में अधिकतम तापमान 34.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। इससे अधिक तापमान 35.8 डिग्री सेल्सियस वर्ष 2006 में दर्ज किया गया था। वहीं, इंदौर में वर्ष 2019 के फरवरी माह के सर्वाधिक तापमान के बराबर 35 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। भोपाल में अधिकतम तापमान 34.3 डिग्री और ग्वालियर में अधिकतम तापमान 33.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। इससे अधिक तापमान दोनों नगरों में वर्ष 2023 में 35.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था।   recent visitors 39

मजबूत आर्थिक प्रदर्शन 2047 तक उन्नत अर्थव्यवस्था बनने की भारत की महत्वाकांक्षा को साकार करने के लिए महत्वपूर्ण: IMF

संयुक्त राष्ट्र भारत की विवेकपूर्ण नीतियों की सराहना करते हुए अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के कार्यकारी बोर्ड ने कहा है कि देश का मजबूत आर्थिक प्रदर्शन 2047 तक विकसित अर्थव्यवस्था बनने के लिए महत्वपूर्ण सुधारों को अपनाने में मदद कर सकता है. आईएमएफ द्वारा जारी की गई रिपोर्ट में कहा गया, "भारत का मजबूत आर्थिक प्रदर्शन 2047 तक विकसित अर्थव्यवस्था का दर्जा हासिल करने के लिए जरूरी अहम और चुनौतीपूर्ण संरचनात्मक सुधारों को लागू करने में मदद कर सकता है." प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लिए आजादी के सौ साल पूरे होने की समय सीमा तय की है. रिपोर्ट में आईएमएफ के कार्यकारी निदेशकों ने भारतीय अधिकारियों की विवेकपूर्ण व्यापक आर्थिक नीतियों और सुधारों की सराहना की, जिन्होंने भारत की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने और एक बार फिर सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बनाने में योगदान दिया है. रिपोर्ट में बताया गया कि भारत के वित्तीय क्षेत्र का स्वास्थ्य, मजबूत कॉरपोरेट बैलेंसशीट और अच्छा डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर दर्शाता है कि देश की वृद्धि दर मध्यम अवधि में तेज रहेगी. साथ ही जनकल्याण की योजनाएं भी जारी रहेंगी. रिपोर्ट में इस बात पर जोर दिया गया कि भू-आर्थिक विखंडन और धीमी घरेलू मांग से उत्पन्न प्रतिकूल परिस्थितियों का सामना करते हुए, व्यापक आर्थिक स्थिरता बनाए रखने के लिए उचित नीतियां जारी रखना आवश्यक है. इसके अलावा, रिपोर्ट में भारत द्वारा हाल ही में घटाए गए टैरिफ का भी स्वागत किया गया है. इससे देश की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ेगी. पिछले महीने पेश किए गए बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने ऑटोमोबाइल से लेकर शराब तक कई प्रकार के आयात पर टैरिफ कम कर दिया था. "महिला भागीदारी को लेबर फोर्स में बढ़ाना चाहिए" आईएमएफ के कार्यकारी बोर्ड ने कहा कि संरचनात्मक सुधार देश में उच्च-गुणवत्ता की नौकरियां पैदा करने और निवेश के लिए काफी जरूरी हैं. रिपोर्ट में आगे कहा गया कि भारत को लेबर मार्केट सुधारों को लागू करने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए और महिला भागीदारी को लेबर फोर्स में बढ़ाना चाहिए. recent visitors 68

भोपाल में ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में 5.8 लाख करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए, जानें इंदौर-ग्वालियर का हाल

भोपाल  ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट (GIS) में मध्य प्रदेश को ₹26.61 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव मिले। यह समिट दो दिन चला। भोपाल को सबसे ज़्यादा ₹5.8 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव मिले। इंदौर और उज्जैन को लगभग ₹4.7 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव मिले। अडानी ग्रुप, टोरेंट पावर, रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड और अवाडा एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड जैसी बड़ी कंपनियों ने निवेश का वादा किया। ये निवेश रिन्यूएबल एनर्जी, हॉस्पिटैलिटी, माइनिंग, फ़ूड प्रोसेसिंग, IT, डेटा सेंटर और अर्बन डेवलपमेंट जैसे कई क्षेत्रों में होंगे। भोपाल संभाग में सबसे अधिक दिलचस्पी भोपाल और आसपास के इलाकों में ग्रीन एनर्जी, एविएशन, हॉस्पिटैलिटी प्रोजेक्ट्स, हेल्थकेयर, एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस और अर्बन डेवलपमेंट में निवेश की खास रुचि दिखाई गई। NHAI ने इंदौर-भोपाल-जबलपुर ग्रीनफील्ड हाई-स्पीड कॉरिडोर बनाने की योजना का ऐलान किया। इस प्रोजेक्ट में ₹1.3 लाख करोड़ का निवेश होगा। इसके लिए मध्य प्रदेश सरकार के साथ MoU साइन हुआ है। यह MoU जमीन अधिग्रहण और स्थानीय सहायता के लिए है। केन्स टेक्नोलॉजी ने भोपाल के IT पार्क में SMT मैन्युफैक्चरिंग के लिए ₹352 करोड़ निवेश करने का वादा किया है। इससे करीब 1,650 नौकरियां पैदा होंगी। InAvia Aviation Consultants GmbH और MP सिविल एविएशन के बीच ₹500 करोड़ के निवेश से भोपाल में मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहाल यूनिट बनाने के लिए MoU साइन हुआ। प्रधान एयर के साथ एक और MoU हुआ। इसके तहत ₹150 करोड़ के निवेश से मध्य प्रदेश में उज्जैन एयर नाम की एक छोटी इंट्रा-स्टेट एयरलाइन शुरू होगी। नीतियां कर रहीं आकर्षित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मास्युटिकल एजुकेशन एंड रिसर्च भोपाल में अपनी एक सुविधा स्थापित करेगा। इससे क्षेत्र के शैक्षणिक और अनुसंधान परिदृश्य को और समृद्ध करेगा। MPIDC के मैनेजिंग डायरेक्टर चंद्रमौली शुक्ला ने हमारे सहयोगी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया से कहा कि हर सेक्टर पर केंद्रित नई नीतियों से प्रमुख निवेश प्रस्तावों को आकर्षित करने में मदद मिली है। आकर्षक नीतियों और राज्य में भूमि की उपलब्धता के कारण लगभग हर क्षेत्र ने शिखर सम्मेलन में निवेश प्रस्ताव प्राप्त किए हैं। इंदौर क्षेत्र में बहुत सारी पूछताछ हुई थी। शिखर सम्मेलन के दौरान विनिर्माण, नवीकरणीय ऊर्जा, खनन और शहरी विकास ने अधिकतम निवेश के इरादे हासिल किए हैं। यानी हर सेक्टर के लिए नई नीतियां बनाई गई हैं। इससे निवेशकों को आकर्षित करने में मदद मिली है। राज्य में अच्छी नीतियां और ज़मीन उपलब्ध होने के कारण लगभग हर क्षेत्र को निवेश प्रस्ताव मिले हैं। इंदौर क्षेत्र में निवेशकों ने काफी पूछताछ की। सबसे ज़्यादा निवेश मैन्युफैक्चरिंग, रिन्यूएबल एनर्जी, माइनिंग और अर्बन डेवलपमेंट में आए हैं। इंदौर में भी दिलचस्पी इंदौर क्षेत्र ने ₹4.76 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव आकर्षित किए। इंदौर में टोरेंट पावर और अक्षत ग्रीनटेक प्राइवेट लिमिटेड ने बड़े निवेश का वादा किया है। हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में, इंडो यूरोपियन रिसर्च एंड हेल्थकेयर प्राइवेट लिमिटेड, रुसान फार्मा लिमिटेड, अल्फा लैबोरेटरीज लिमिटेड और मयंक वेलफेयर सोसाइटी इंडेक्स सिटी हॉस्पिटल ने निवेश की प्रतिबद्धता जताई है। यह समिट मध्य प्रदेश के विकास के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे राज्य में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। सरकार को उम्मीद है कि इन प्रस्तावों से लाखों नौकरियां पैदा होंगी। यह समिट राज्य के विकास के लिए एक गेम चेंजर साबित हो सकता है संभाग- निवेश की प्रस्तावित राशि     भोपाल – 5 लाख 82 हजार 93 करोड़     उज्जैन- 4 लाख 77 हजार 506 करोड़     शहडोल – 1 लाख 58 हजार 402 करोड़     जबलपुर – 1 लाख 6 हजार 970 करोड़     रीवा – 68 हजार 475 करोड़     इंदौर– 4 लाख 76 हजार 245 करोड़     नर्मदापुरम– 2 लाख 93 हजार 522 करोड़     सागर – 53 हजार 657 करोड़     चंबल – 52 हजार 92 करोड़     ग्वालियर – 27 हजार 363 करोड़     कुल- 22 लाख 96 हजार 325 करोड़ रुपए गौरतलब है कि एमपी में निवेशकों को लुभाने के लिए ग्लोबल इन्वेस्टर समिट से पहले रीजनल समिट आयोजित किए गए थे। रीजनल समिट के जरिए सरकार की कोशिश की थी कि हर क्षेत्र में विकास हो। उसका भी प्रभाव देखने को मिला है। recent visitors 59

प्रदेश की कोई भी नदी सूखी नहीं रहेगी, सोनार नदी को नर्मदा से जोड़ने के लिए जल्द ही सर्वे शुरू होगा: सीएम मोहन यादव

सागर मध्यप्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में जल संकट खत्म करने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने ऐलान किया कि प्रदेश की कोई भी नदी सूखी नहीं रहेगी। सोनार नदी को नर्मदा से जोड़ने के लिए जल्द ही सर्वे शुरू होगा, जिससे इस क्षेत्र के किसानों को जबरदस्त फायदा मिलेगा। इसके अलावा, सागर-दमोह मार्ग को अपग्रेड करने और अन्य विकास कार्यों की भी घोषणा की गई। 6-7 साल में बदल जाएगी बुंदेलखंड की तस्वीर- सीएम मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जल, सड़क, शिक्षा और कृषि से जुड़े कई बड़े ऐलान किए। उन्होंने कहा कि नर्मदा-सोनार लिंक परियोजना इस क्षेत्र के जल संकट को खत्म कर देगी। सर्वे पूरा होते ही आगे का काम शुरू होगा, जिससे बुंदेलखंड की धरती पहले से भी ज्यादा उपजाऊ बन जाएगी। सीएम ने कहा कि केन-बेतवा लिंक परियोजना से आने वाले 6-7 साल में बुंदेलखंड की तस्वीर पूरी तरह बदल जाएगी। इस प्रोजेक्ट के जरिए हर खेत तक पानी पहुंचेगा, जिससे फसल उत्पादन दोगुना होगा। उन्होंने किसानों से आग्रह किया कि वे अपनी जमीन न बेचें, क्योंकि जल्द ही बुंदेलखंड की मिट्टी पंजाब-हरियाणा से भी बेहतर होगी। सड़कों का भी होगा कायाकल्प गढ़ाकोटा रहली-देवरी मार्ग और सागर-दमोह मार्ग को अपग्रेड करने की भी घोषणा हुई। सागर-गढ़ाकोटा रोड को फोर लेन बनाया जाएगा, जिससे क्षेत्र की कनेक्टिविटी और मजबूत होगी। किसानों और गौपालकों को राहत किसानों के लिए फूड प्रोसेसिंग यूनिट लगाने पर सरकार 40% सब्सिडी देगी। वहीं, दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के लिए नई योजना लाई जा रही है, जिससे दूध उत्पादकों को बोनस मिलेगा। गेहूं के लिए सरकार 2600 रुपए प्रति क्विंटल की दर से खरीदी करेगी, जो अगले साल बढ़कर 2700 रुपए से ऊपर पहुंच जाएगी।  बुंदेलखंड को मिलेगा नर्मदा का आंचल, सुनार से होगा मिलन प्रदेश की जीवन-दायिनी मां नर्मदा अब अपने आंचल से सागर जिले को भी नया जीवन देगी। नर्मदा नदी को केसली-रहली से बहने वाली सुनार नदी से जोडऩे का काम शुरू करने की मंजूरी मिल चुकी है। नर्मदा व सुनार नदी के संगम से सागर जिले सहित दमोह, कटनी व रायसेन जिले को भी फायदा होगा। जिला योजना समिति ने दी सैद्धांतिक मंजूरी विशेषकर सूखे की आग में झुलस रहे बुंदेलखंड के इस क्षेत्र को नर्मदा की बूंदों से राहत मिलेगी। बुधवार को जिला योजना समिति ने इस काम को शुरू करने की भी सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। सागर संभाग में पहले से ही केन-बेतवा लिंक परियोजना और बीना नदी परियोजना को केंद्र सरकार की मंजूरी मिल चुकी है। फिलहाल, नर्मदा व सोनार नदी को जोडऩे के लिए जल संसाधन विभाग को डीपीआर की जिम्मेदारी दी गई है। 2 हजार 994 करोड़ की बनी है डीपीआर वर्ष 2020 तक हर खेत को पानी पहुंचाने के लिए प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई परियोजना के तहत बुंदेलखंड के सभी जिले में कार्ययोजना बनाई जा रही है। इनमें सागर संभाग के पांचों जिले छतरपुर, टीकमगढ़, दमोह, पन्ना, सागर सहित दतिया जिले की कार्ययोजना बनाई जा रही है। सागर जिले में इस परियोजना के तहत 2 हजार 994 करोड़ रुपए की डीपीआर तैयार की गई है। जिसमें पहले से चल रही सिंचाई परियोजनाओं के साथ-साथ जिले के सभी 11 ब्लॉकों में नई सिंचाई परियोजनाओं, तालाब निर्माण, जलाशय निर्माण को भी शामिल किया गया है। 30 किमी दूर है नर्मदा केसली टड़ा के पास बरांझ नदी दक्षिण की तरफ नर्मदा नदी से मिलती है, जिसकी दूरी लगभग 30 किमी है। सुनार को बरांझ नदी से लिंक करके भी नर्मदा का पानी लाया जा सकता है। हालांकि जल संसाधन विभाग को सुनार व नर्मदा नदी जोडऩे के लिए सभी संभावनाओं पर काम करने के निर्देश दिए गए हैं। सुकून देती सुनार जलसंकट के इस दौर में जहां लोग बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं। वहीं रहली की सुनार नदी लबालब भरी है। जलसंकट को देखते हुए प्रदेश के पंचायत मंत्री गोपाल भार्गव ने समनापुर स्थित बांध के गेट खुलवा दिए थे। जो 6 मार्च से 6 अप्रैल तक खुले रहे। नदी में पानी आने के बाद भोपाल स्थित लैब में इसका परीक्षण करवाया गया। जांच रिपोर्ट आने के बाद रहली में पानी की सप्लाई के लिए 13 अप्रैल को वॉटर प्लांट का भी शुभारंभ कर दिया गया है। फैक्ट फाइल नर्मदा नदी लंबाई     1,312 किमी मध्यप्रदेश में    1.077 किमी गुजरात में    161 किमी मप्र-महाराष्ट्र की सीमा पर    74 किमी मप्र के अमरकंटक, मंडला, जबलपुर, नरसिंहपुर, बरमान, होशंगाबाद, बड़वानी, ओंकालेश्वर, बड़वाह, महेश्वर और गुजरात के राजपिपला, धरमपुरी व भरूच शहर व आसपास से बहती है। सुनार नदी लंबाई 155 किमी सागर जिले के केसली, रहली-गढ़कोटा होते हुए दमोह जिले के हटा से कटनी के पास केन नदी में मिलती है। recent visitors 64

चीन के वैज्ञानिकों ने खोजा थोरियम का विशाल भंडार, 60000 साल तक खत्म हो सकती है बिजली की टेंशन

बीजिंग चीन के हाथ ऐसा अकूत खजाना हाथ लगा है जिससे उसकी ऊर्जा जरूरतें हमेशा के लिए पूरी हो सकती हैं। चीन के एक राष्ट्रीय सर्वे में चीन के पास थोरियम के अथाह भंडार का पता चला है। साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट ने एक विशेषज्ञ के हवाले से अपनी रिपोर्ट में बताया है कि यह रेडियोधर्मी धातु अकेले वैश्विक ऊर्जा उत्पादन में क्रांति ला सकती है, जिससे जीवाश्वम ईंधन पर दुनिया भर की निर्भरता खत्म हो सकती है। चीन के पास पहले ही बड़ा थोरियम भंडार मौजूद है। हालांकि, 2020 में किए गए सर्वे की क्लासीफाइड रिपोर्ट के अनुसार, यह वास्तव में पिछले अनुमानों से कई गुना अधिक हो सकते हैं। भारत के पास सबसे बड़ा भंडार जनवरी में चीनी पत्रिका जियोलॉजिकल रिव्यू में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, इनर मंगोलिया में एक लौह अयस्क साइट से केवल पांच साल के खनन अपशिष्ट में इतना थोरियम है कि अमेरिका की घरेलू ऊर्जा मांगों को 1000 से अधिक वर्षों तक पूरा कर सकता है। खास बात ये है कि भारत के पास भी थोरियम का बहुत बड़ा भंडार है। रिपोर्टों के अनुसार, वर्तमान में भारत का थोरियम भंडार दुनिया में सबसे बड़ा है। भारत के परमाणु ऊर्जा विभाग ने देश में उपलब्ध थोरियम के विशाल भंडार को दीर्घकालिक विकल्प के रूप में इस्तेमाल की योजना बनाई है। कुछ विशेषज्ञों के अनुमान के अनुसार, पूरी तरह से दोहन किए जाने पर बायन ओबो खनन परिसर दस लाख टन थोरियम पैदा कर सकता है, जो चीन को 60,000 वर्षों तक ईंधन देने के लिए पर्याप्त है। बीजिंग स्थित एक भूविज्ञानी ने नाम न बताने की शर्त पर साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट को बताया कि यह पता चला है कि अंतहीन ऊर्जा स्रोत हमारे पैरों के ठीक नीचे हैं। क्या है थोरियम? थोरियम एक चांदी के रंग की धातु है जिसका नाम पुराने स्कैंडिनेवियन देवता थोर के नाम पर रखा गया है। यह यूरेनियम की तुलना में 200 गुना अधिक ऊर्जा पैदा करता है। यूरेनियम रिएक्टरों के विपरीत थोरियम मोल्टेन-साल्ट रिएक्टर (TMSR) छोटे होते हैं। पिघल नहीं सकते और उन्हें पानी से ठंडा करने की आवश्यकता भी नहीं होती है। इसके अलावा वे रेडियोधर्मी अपशिष्ट भी कम मात्रा में छोड़ते हैं। पिछले साल चीन ने गोबी के रेगिस्तान में दुनिया के पहले TMSR पावर प्लांट के निर्माण को मंजूरी दी थी। 10 मेगावाट बिजली पैदा करने की क्षमता वाला यह पायलट प्रोजेक्ट 2029 तक शुरू होने की उम्मीद है। अभी राह आसान नहीं सर्वेक्षण के अनुसार, पूरे चीन में 233 थोरियम समृद्ध क्षेत्रों की पहचान की गई है, जो पांच प्रमुख बेल्टों में स्थित हैं। हालांकि, उम्मीद के बावजूद बाधाएं बनी हुई हैं। दुर्लभ मृदा अयस्कों से थोरियम को अलग करने के लिए भारी मात्रा में एसिड और ऊर्जा की आवश्यकता होती है। 1 ग्राम थोरियम को शुद्ध करने के लिए लगभग सैकड़ों टन अपशिष्ट जल की जरूरत होती है।   recent visitors 82

थिएटर में विज्ञापन दिखाए जा सकते , लेकिन दर्शकों को उन्हें देखने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए: हाईकोर्ट

ग्वालियर  मध्य प्रदेश ग्वालियर खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान निर्देश दिया कि नियमों में संशोधन कर हर सिनेमा टिकट पर फिल्म का शो टाइम स्पष्ट रूप से अंकित किया जाए। कोर्ट ने यह भी कहा कि थिएटर में विज्ञापन दिखाए जा सकते हैं, लेकिन दर्शकों को उन्हें देखने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के इस निर्देश के बाद अब दर्शकों को शो शुरू होने का सही समय पता चल सकेगा। इसके साथ ही सिनेमाघरों द्वारा जबरन दिखाए जा रहे विज्ञापनों से छुटकारा मिलेगा। फिल्म की जगह लंबे विज्ञापन दिखने पर उपभोक्ता आयोग ने PVR Cinemas को जिम्मेदार ठहराया पीवीआर सिनेमा के खिलाफ एक मामले में बैंगलोर जिला उपभोक्ता आयोग ने कहा कि घोषित समय पर फिल्म की स्क्रीनिंग शुरू नहीं करना और फिल्म की वास्तविक शुरुआत से पहले लगभग 25 मिनट तक कामर्शियल विज्ञापन दिखाना एक अनुचित व्यापार व्यवहार है। आयोग ने कहा “नए युग में समय को धन माना जाता है, प्रत्येक का समय बहुत कीमती होता है, किसी को भी दूसरों के समय और धन से लाभ प्राप्त करने का अधिकार नहीं है। 25-30 थियेटर में खाली बैठकर थियेटर जो भी टेलीकास्ट होता है उसे देखने के लिए कम नहीं है। व्यस्त लोगों के लिए अनावश्यक विज्ञापन देखना बहुत कठिन है," यह देखते हुए कि फिल्में देखना, जो अन्यथा लोगों को आराम करने में मदद करता है, शिकायतकर्ता के लिए तनावपूर्ण नहीं होना चाहिए था, आयोग ने पीवीआर सिनेमा को शिकायतकर्ता को उसके द्वारा किए गए नुकसान की भरपाई करने के लिए उत्तरदायी ठहराया। पूरा मामला: शिकायतकर्ता ने बेंगलुरु के पीवीआर सिनेमा में फिल्म 'सैम बहादुर' के तीन टिकट बुक किए और इसके लिए खुद और अपने परिवार ने 825.66 रुपये दिए। उन्होंने bookmyshow.com पर टिकट बुक किए थे। फिल्म शाम 4:05 बजे शुरू होने वाली थी और फिल्म की अवधि 2 घंटे 25 मिनट थी। शिकायतकर्ता ने फिल्म के समय के अनुसार अपना शेड्यूल तय किया ताकि वह उसी के अनुसार अपने काम की योजना बना सके। उन्हें शाम 6:30 बजे काम पर लौटना था, हालांकि, थिएटर में शाम 4:28 बजे शो शुरू होने के कारण यह संभव नहीं था। शिकायतकर्ता के अनुसार, फिल्मों के विज्ञापन और ट्रेलर काफी समय से स्क्रीन पर दिखाए गए थे और फिल्म अंततः शाम 4:30 बजे खेली गई थी, जबकि शिकायतकर्ता और उसका परिवार शाम 4:05 बजे से थिएटर में बैठे थे। इससे व्यथित होकर शिकायतकर्ता ने जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग, बंगलौर का दरवाजा खटखटाया और पीवीआर सिनेमा (विपरीत पार्टी नंबर 1) और बिग ट्री एंटरटेनमेंट प्राइवेट लिमिटेड (विपरीत पार्टी नंबर 2) को टिकटों में उल्लिखित शो टाइम के बाद विज्ञापन चलाने से रोकने और रोकने का निर्देश देने की मांग की। शिकायतकर्ता के तर्क: शिकायतकर्ता के वकील ने प्रस्तुत किया कि शिकायतकर्ता को नुकसान का सामना करना पड़ा था जिसकी गणना पैसे के संदर्भ में नहीं की जा सकती है। यह दावा किया गया था कि ऐसे समय में फिल्म चलाना जो निर्धारित समय से परे था, विरोधी पक्षों द्वारा सेवा में कमी के बराबर था। यह कहते हुए कि इसने शिकायतकर्ता का कीमती समय बर्बाद किया, वकील ने तर्क दिया कि समय को दर्शकों को गलत तरीके से बताया गया था और टिकट के लिए भुगतान करने के बाद भी, शिकायतकर्ता का समय विज्ञापनों को चलाने में बर्बाद किया गया था, जिसके कारण वह निर्दिष्ट समय पर काम पर लौटने में सक्षम नहीं था। PVR Cinemas के तर्क: पीवीआर आइनॉक्स लिमिटेड (विपरीत पार्टी नंबर 3) के वकील ने कहा कि चूंकि यह मेनस्ट्रीम, गोल्ड क्लास सिनेमा और डायरेक्टर्स कट सहित विभिन्न प्रारूपों में फिल्म प्रदर्शन के व्यवसाय में लगी हुई है, इसलिए इसे विभिन्न मुद्दों के बारे में लोगों को शिक्षित करने के लिए लघु फिल्मों और वृत्तचित्रों के रूप में कुछ लोक सेवा घोषणा (पीएसए) को प्रदर्शित करना होगा। यह प्रस्तुत किया गया था कि ये वीडियो तब दिखाए जाते हैं जब दर्शक शो शुरू होने से पहले थिएटर के अंदर बैठे होते हैं। इसके अलावा, पीवीआर सिनेमाज और पीवीआर आईनॉक्स लिमिटेड द्वारा यह इनकार किया गया था कि फिल्म का समय 2 घंटे और 25 मिनट था, जिसमें कहा गया था कि वास्तविक फिल्म का समय 2 घंटे और 30 मिनट था। वकील ने कहा कि इस अवधि के अनुसार, शिकायतकर्ता तार्किक रूप से इसे 6:30 बजे काम करने के लिए नहीं बना सकता था और इस प्रकार शिकायत खारिज करने योग्य थी। आयोग का निर्णय: आयोग ने पाया कि शिकायतकर्ता मुख्य रूप से थिएटर में 25 मिनट तक लगातार प्रसारित कामर्शियल विज्ञापनों से प्रभावित था। शिकायतकर्ता द्वारा पेश किए गए सबूतों के अवलोकन पर, यह देखा गया कि दिखाए गए 17 विज्ञापनों में से केवल दो ही दिशानिर्देशों के अनुसार सार्वजनिक सेवा घोषणाएं थीं। आयोग को इस सवाल का जवाब देना था कि क्या विज्ञापन की अवधि 25-30 मिनट के लिए आवश्यक थी या नहीं और क्या थिएटर प्रबंधन ने फिल्म शुरू होने से पहले सार्वजनिक सेवा जागरूकता प्रदर्शित करने के लिए सूचना और प्रसारण मंत्रालय के दिशानिर्देशों का पालन किया था। आयोग ने कहा कि विरोधी पक्षों ने सरकार के आदेश का उल्लंघन किया है, जिसके अनुसार थिएटर केंद्र सरकार और राज्य सरकार की सार्वजनिक सेवा घोषणाओं और कल्याणकारी योजनाओं के 10 मिनट खेल सकते हैं। इसके अलावा, यह माना गया कि थिएटर मालिकों को टिकटों में उल्लिखित समय पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता थी और वर्तमान मामले में, फिल्म को शाम 4:05 बजे शुरू होना चाहिए था जैसा कि शिकायतकर्ता द्वारा खरीदे गए टिकटों में उल्लेख किया गया था। यह कहा गया था कि विज्ञापन थिएटर अधिकारियों द्वारा शाम 4:05 बजे से पहले प्रसारित किए जाने चाहिए थे, न कि उसके बाद। यह देखा गया कि कामर्शियल विज्ञापन प्रदर्शित करने के लिए निर्धारित समय से परे शो खेलना अन्यायपूर्ण और अनुचित है क्योंकि दर्शकों को शो शुरू होने से पहले लंबी अवधि के लिए विज्ञापन देखने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता है। आयोग ने आगे कहा कि शिकायतकर्ता ने इस मुद्दे को अच्छे कारण के साथ उठाया क्योंकि जिस दिन थिएटर में फिल्म दिखाई जानी थी, उस दिन कई लोगों को इसी मुद्दे का सामना करना पड़ा होगा। आयोग ने हालांकि कहा कि चूंकि … Read more