MP को जल्द मिलेगा पहला फ्लोटिंग रोड, सफर बनेगा सुहाना ! रायसेन-सागर के बीच 9 किमी लंबा सेमी ऐलिवेटेड कॉरिडोर अंतिम चरण में

रायसेन मध्यप्रदेश के रायसेन में पहले फ्लोटिंग रोड के निर्माण को जल्द पूरा होने वाला है। ये बेगमगंज (रायसेन) से राहतगढ़ (सागर) को जोड़ने वाला मार्ग जल्द ही प्रदेश के प्रमुख मार्गों में गिना जाएगा, जहां 9 किमी लंबा सेमी ऐलिवेटेड कॉरिडोर बन रहा है। यह कॉरिडोर केवल सफर को आसान नहीं बनाएगा, बल्कि पर्यटकों के लिए भी एक रोमांचक अनुभव लेकर आएगा। जंगलों और पहाड़ियों से घिरे इस क्षेत्र में अब सड़क यात्रा किसी टूरिस्ट डेस्टिनेशन से कम नहीं होगी।  डूब क्षेत्र में तकनीक का कमाल, 120 करोड़ की लागत से बन रहा फ्लोटिंग रोड मढ़िया बांध के कारण रायसेन-सागर रोड का एक हिस्सा डूब में आ रहा था। इसी समस्या को हल करने के लिए MPRDC (मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम) ने 120 करोड़ रुपए की लागत से फ्लोटिंग रोड और चार बड़े फ्लाईओवर का निर्माण शुरू किया। यह सेमी ऐलिवेटेड कॉरिडोर बांध के पानी के ऊपर से गुजरेगा, जिससे यात्रियों को एक अनोखा सफर मिलेगा और इलाके की कनेक्टिविटी भी बरकरार रहेगी। टूरिज्म को मिलेगा बड़ा बूस्ट, बनेगा नया सेल्फी प्वाइंट! राहतगढ़ पहले से ही अपने खूबसूरत झरने और प्राकृतिक नजारों के लिए प्रसिद्ध है। अब जब यह नई सड़क जंगल, पहाड़ियों और डैम के बीच से गुजरेगी, तो यह इलाका पर्यटन का नया केंद्र बन सकता है।  सेल्फी प्वाइंट और व्यूइंग डेक बनाने की योजना  पर्यटकों के लिए फूड कोर्ट और रेस्ट एरिया विकसित किए जाएंगे  स्थानीय लोगों को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे परियोजना से प्रभावित गांवों की स्थिति इस प्रोजेक्ट के चलते रायसेन जिले के 14 गांव पूरी तरह और 42 गांव आंशिक रूप से डूब क्षेत्र में आएंगे। प्रशासन ने प्रभावित ग्रामीणों के पुनर्वास और मुआवजे के लिए योजना बनाई है, जिससे किसी को नुकसान न हो। पर्यटन को मिलेगा नया जीवन राहतगढ़ का वॉटरफॉल पहले से ही इस क्षेत्र का बड़ा आकर्षण रहा है, जहां मानसून के दौरान हजारों पर्यटक पहुंचते हैं। अब जब यह नया कॉरिडोर जंगल, पहाड़ियों और डैम के पानी के बीच से होकर गुजरेगा, तो यह जगह और भी शानदार दिखेगी। यहां पर्यटकों के लिए सेल्फी प्वाइंट और अन्य सुविधाएं विकसित करने की भी योजना बनाई जा रही है। परियोजना के कारण क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर खुलेंगे। कॉरिडोर के आसपास पर्यटन केंद्र और व्यावसायिक गतिविधियां बढ़ने की संभावना है, जिससे स्थानीय लोगों को फायदा होगा। डूब क्षेत्र में आने वाले गांवों की स्थिति इस परियोजना के कारण रायसेन जिले के 14 गांव पूरी तरह और 42 गांव आंशिक रूप से डूब क्षेत्र में आएंगे। इनमें चंदामाऊ और ककरुआ बरामद गढ़ी पूरी तरह से जलमग्न होंगे। हालांकि, प्रशासन ने प्रभावित किसानों और ग्रामीणों के लिए मुआवजा योजना तैयार की है, जिसका वितरण जल्द शुरू किया जाएगा। जल्द पूरा होगा निर्माण कार्य कॉरिडोर और लाई ओवर ब्रिज का निर्माण कार्य अपने अंतिम चरण में है। एमपीआरडीसी के जीएम सोनल सिन्हा के अनुसार, ठेकेदार को मई तक कार्य पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं और इसकी सतत समीक्षा हो रही है। प्रयास यही है कि बारिश से पहले कार्य पूरा हो जाए, जिससे आगामी मानसून में यह क्षेत्र पर्यटकों के स्वागत के लिए तैयार हो सके। बारिश से पहले पूरा होगा निर्माण, जल्द खुलेगा ट्रैफिक के लिए MPRDC के जीएम सोनल सिन्हा के अनुसार, ठेकेदार को मई 2025 तक निर्माण कार्य पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। कोशिश यह है कि मानसून से पहले यह शानदार सड़क चालू हो जाए, ताकि पर्यटक और स्थानीय लोग इसका पूरा लाभ उठा सकें। फ्लोटिंग रोड: सफर नहीं, एक अनोखा अनुभव! मध्यप्रदेश में यह अपनी तरह की पहली सड़क होगी, जहां सफर करते हुए लोग महसूस करेंगे कि वे पानी के ऊपर चल रहे हैं। यह सिर्फ एक इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि प्रदेश के पर्यटन और विकास की नई पहचान बनने जा रहा है। अब सफर सिर्फ मंजिल तक पहुंचने के लिए नहीं, बल्कि उसे जीने के लिए होगा! recent visitors 77

मुख्यमंत्री ने बालाघाट में 326 करोड़ 60 लाख रूपये के 117 विकास कार्यों का किया भूमि-पूजन और लोकार्पण

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बालाघाट के किसान सम्मेलन में किसानों को अभूतपूर्व सौगात देते हुए कहा कि अब प्रदेश में धान उत्पादक किसानों को 4 हजार रूपये प्रति हेक्टेयर अतिरिक्त लाभ दिया जायेगा। उन्होंने कहा कि गेहूँ उत्पादक किसानों को भी प्रति क्विंटल 175 रूपये अतिरिक्त बोनस राशि दी जायेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मूल्य संवर्धन योजना (प्राइस सपोर्ट स्कीम) अंतर्गत वर्ष 2024 में 6.69 लाख किसानों द्वारा 12.2 लाख हेक्टेयर रकबे में उत्पादित धान का विक्रय किया गया है। धान उत्पादक किसानों को मुख्यमंत्री कृषक प्रोन्नति योजना में प्रति हेक्टेयर 4000 रूपये का लाभ मिलेगा। इससे प्रदेश के किसानों को 488 करोड़ रूपये का अतिरिक्त लाभ होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि गेहूँ उत्पादक किसानों को भी समर्थन मूल्य 2425 रूपये के अतिरिक्त 175 रूपये प्रति क्विंटल की बोनस राशि दी जायेगी। इस प्रकार गेहूँ के उपार्जन पर प्रति क्विंटल 2600 रूपये की राशि मिलेगी। इस वर्ष प्रदेश में 80 लाख मीट्रिक टन गेहूँ उपार्जन अनुमानित है। प्रदेश के किसानों को 175 रूपये प्रति क्विंटल बोनस के रूप में मिलने से लगभग 1400 करोड़ रूपये की अतिरिक्त राशि का लाभ होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सरकार सभी वर्गों के कल्याण के लिए संकल्पबद्ध होकर निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में एक लाख सरकारी पदों पर भर्ती की जा रही है। आने वाले 5 वर्षों में 2 लाख 70 हजार पदों पर विभिन्न सेक्टर में रोजगार उपलब्ध कराए जाएंगे। हमारी सरकार वर्ष 2028 तक सरकार 70 प्रतिशत युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्धता पूर्वक कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सभी वर्गों के कल्याण के लिए प्रदेश में चल रही योजनाएं यथावत चलती रहेगी। कोई भी योजना बंद नहीं होगी। उन्होंने कहा कि हमारा प्रयास है कि प्रदेश सभी क्षेत्रों में लगातार नंबर वन पर बना रहे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किसान सम्मेलन में सभी को विकास का संकल्प भी दिलाया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सम्मेलन में प्रदर्शनी का अवलोकन किया। उन्होंने 1412 दिव्यांगजनों और 1040 वरिष्ठ नागरिकों को सहायक उपकरण वितरित करने के साथ अन्य विभिन्न योजनाओं के हितग्राहियों को हितलाभ वितरित किये। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व और मार्गदर्शन में निरंतर आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में देश की अर्थव्यवस्था 11वें नंबर से 5वें नंबर पर आ गई है और अब हम चौथे नंबर पर आने के लिए अग्रसर है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सबसे तेज गति से विकास करने वाला देश भारत है, और यह प्रसन्नता की बात है कि वर्तमान में सर्वाधिक जीएसडीपी ग्रोथ रेट 13 प्रतिशत मध्यप्रदेश की है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्थानीय कलेक्टर को निर्देशित किया कि प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी और ग्रामीण का लाभ सभी पात्र हितग्राहियों को दिलाना सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि कोई भी व्यक्ति पक्के मकान के बगैर नहीं रहेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बालाघाट के खिलाड़ियों को महत्वपूर्ण सौगात देते हुए हॉकी के एस्ट्रो टर्फ का लोकार्पण किया। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश के लिए गर्व की बात है कि प्रदेश के खिलाड़ी राष्ट्रीय ही नहीं अन्तर्राष्ट्रीय स्तर भी पर देश का नाम रोशन कर रहे हैं। पदक प्राप्त करने वाले मध्यप्रदेश के खिलाड़ियों का होना हमें गौरवान्वित करता है। उन्होंने उत्तराखंड में हुए राष्ट्रीय खेलों में मध्यप्रदेश के तीसरे स्थान पर रहने पर हार्दिक प्रसन्नता जताई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारे प्रदेश के युवा जिस भी क्षेत्र में कार्य करना चाहते हैं, सरकार उन्हें आगे बढ़ने के समुचित अवसर प्रदान करेगी। सरकार प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में बदलाव लाने के लिए हर क्षेत्र में विकास करने के लिए तत्पर है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बालाघाट को खनिजों का सम्राट जिला बताते हुए कहा कि यह प्राकृतिक और खनिज संपदा से समृद्ध जिला है। तांबा और मैंगनीज यहाँ भरपूर मात्रा में उपलब्ध है। चिन्नोर के चावल की खुशबू सभी ओर व्याप्त है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि गृह मंत्री श्री अमित शाह के नेतृत्व में देश में नक्सलवाद के उन्मूलन का कार्य चल रहा है। हम गृह मंत्री श्री शाह के मार्गदर्शन में नक्सलवाद के पैर किसी भी कीमत पर जमने प्रदेश में नहीं देंगे। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद के समूल नाश के लिए कठोरतम कार्रवाई की जाएगी। यह संभव नहीं हो सकेगा कि नक्सलवादी किसी और प्रदेश से आकर मध्यप्रदेश में रह पाएं। पुलिस प्रशासन को इसके लिए सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। आज हुए लोकार्पण और भूमि-पूजन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बालाघाट जिले में 326 करोड़ 60 लाख रुपये से अधिक की लागत के कुल 117 विकास कार्यों का लोकार्पण और भूमि-पूजन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 264 करोड़ रुपये से अधिक की लागत के 78 विकास कार्यों का लोकार्पण किया इनमें 145 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से बालाघाट, बिरसा, वारासिवनी, मलाजखंड, लालबर्रा में सीएम राइज़ स्कूल, 53 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से बालाघाट के बैहर, पसरवाडा खैरलांजी में विभिन्न स्कूलों का उन्नयन एवं छात्रावासों के निर्माण कार्य, 10 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से विभिन्न मार्गों और पुलों के निर्माण कार्य, 9 करोड़ 30 लाख रुपये की लागत से वारासिवनी-खंडवा मार्ग पर पुल एवं 7 करोड़ 26 लाख रुपये की लागत से अमर शहीद चंद्रशेखर आज़ाद हॉकी एस्ट्रो टर्फ का लोकार्पण किया। उन्होंने 5 करोड़ 60 लाख रुपये की लागत से बालाघाट के विभिन्न क्षेत्रों में निर्मित किए गए आंगनबाड़ी केन्द्रों का भी लोकार्पण किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 62 करोड़ रुपये की लागत से 39 विकास कार्यों का भूमि-पूजन भी किया। इनमें 24 करोड़ की लागत से वारासिवनी में 50 बिस्तरीय स्वास्थ्य केन्द्र, 9 करोड़ 12 लाख रुपये की लागत से लामता में नवगठित तहसील कार्यालय, 8 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से खरपड़िया से शिवनहेटी कटंगी मार्ग पर पुल निर्माण, 3 करोड़ रुपये की लागत से सर्व शिक्षा अभियान के अंतर्गत स्कूलों में विकास कार्यों, लगभग 2 करोड़ की लागत से कटंगझरी, लमता, डोंरिया, बेलगांव, साडरा में प्राथमिक शाला निर्माण का भूमि-पूजन किया। स्थानीय सांसद श्रीमती पारधी ने अपने उदबोधन में मुख्यमंत्री डॉ. यादव का जिलेवासियों को अभूतपूर्व सौगातें प्रदान करने के लिये आभार माना। उन्होंने … Read more

मीडिया इवेंट में पीएम मोदी ने कहा- दुनिया 21वीं सदी के भारत को देख रही, पहले बैक ऑफिस के रूप में देखा जाता था

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को कहा कि भारत दुनिया की नई फैक्ट्री और अनंत इनोवेशन की भूमि के रूप में उभर रहा है। देश की राजधानी में एक मीडिया इवेंट में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि दुनिया 21वीं सदी के भारत को देख रही है और सीखना एवं समझना चाहती है कि कैसे देश सेमीकंडक्टर से लेकर एयरक्राफ्ट कैरियर मैन्युफैक्चर कर रहा है। भारत को पहले बैक ऑफिस के रूप में देखा जाता था, लेकिन अब भारत दुनिया की नई फैक्ट्री के रूप में उभर रहा है। हमारा देश केवल वर्कफोर्स नहीं रहा है, बल्कि वर्ल्ड फोर्स बन गया है। उन्होंने आगे कहा कि देश जो एक समय काफी सारे उत्पादों का आयात करता था, अब बड़ा निर्यातक बन गया है। भारत द्वारा हल्दी से लेकर कॉफी और मिलेट्स से लेकर मखाना तक का निर्यात किया जा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी के मुताबिक, देश के मोबाइल फोन, डिफेंस, इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादों और दवाइयों को वैश्विक स्तर पर मान्यता मिल रही है। उन्होंने कहा, "भारत न केवल दुनिया को उत्पाद उपलब्ध करा रहा है बल्कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में एक विश्वसनीय भागीदार भी बन रहा है।" प्रधानमंत्री मोदी ने आगे बताया, "वर्षों की कड़ी मेहनत और व्यवस्थित नीतिगत निर्णयों के कारण भारत अब कई वैश्विक पहलों का नेतृत्व कर रहा है।" इसमें फ्रांस में हालिया एआई एक्शन शिखर सम्मेलन शामिल है, जहां भारत सह-मेजबान था और अब इसकी मेजबानी भी करेगा। उन्होंने आगे कहा कि देश ने अपनी अध्यक्षता के दौरान सफल जी-20 शिखर सम्मेलन में भारत-मध्य पूर्व-यूरोप कॉरिडोर को एक नए आर्थिक मार्ग के रूप में पेश किया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत किफायती, सुलभ और आसानी से अपनाए जाने वाले सॉल्यूशंस भी बना रहा है। इसमें सुरक्षित और कम लागत वाला डिजिटल पेमेंट सिस्टम यूपीआई (यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस) और घातक कोविड-19 महामारी के दौरान टीके शामिल हैं। इसके अलावा प्रधानमंत्री ने भारत के ऑटोमोबाइल, स्पेस और उभरते हुए सेक्टर जैसे एआई के बारे में भी बताया। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, "भारत अगले 25 वर्षों में एक विकसित राष्ट्र बनने की तरफ तेजी से बढ़ रहा है।" recent visitors 72

मुख्यमंत्री ने कहा- मध्यप्रदेश टैक्सटाइल और परिधान उद्योग के कारण एक प्रमुख औद्योगिक केंद्र के रूप में उभर रहा

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश अपने समृद्ध टैक्सटाइल और परिधान उद्योग के कारण एक प्रमुख औद्योगिक केंद्र के रूप में उभर रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि प्रदेश की कृषि समृद्धि, पारंपरिक बुनकर समुदायों की उत्कृष्ट कला, आधुनिक औद्योगिक आधार और निवेशक-अनुकूल नीतियाँ राज्य में टैक्सटाइल सेक्टर को सशक्त बना रही हैं। जीआईएस-जीआईएस-भोपाल का शुभारंभ करते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मध्यप्रदेश को देश की 'कॉटन कैपिटल' घोषित करते हुए कहा कि मध्यप्रदेश देश का सबसे बड़ा कपास उत्पादक राज्य है। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने राज्य की प्रसिद्ध चंदेरी और माहेश्वरी साड़ियों, बाघ प्रिंट, छीपा हैंड-ब्लॉक प्रिंट और बटिक प्रिंट की प्रशंसा की। उन्होंने यह भी बताया कि देश के सात बड़े टैक्सटाइल पार्कों में से एक मध्यप्रदेश में स्थापित किया जा रहा है। भोपाल में राज्य सरकार के प्रयासों से देश-विदेश के निवेशकों ने रुचि दिखाई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस बात पर प्रसन्नता व्यक्त की है कि मध्यप्रदेश भारत के टैक्सटाइल और एपैरल हब के रूप में स्थापित हो रहा है। जीआईएस भोपाल में टैक्सटाइल निवेश को बढ़ावा ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट भोपाल में टैक्सटाइल उद्योग में निवेश को बड़े पैमाने पर बढ़ावा मिला। प्रदेश में एमएसएमई क्षेत्र के लिए 21 हजार करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव में अधिकांश टैक्सटाइल उद्योग को प्राप्त है। इससे युवाओं के लिये 1.3 लाख से अधिक रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे। उद्योग और निवेश संवर्धन विभाग के अंतर्गत 8,616 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित हुआ है। वर्तमान में मध्यप्रदेश में 60 से अधिक बड़ी टैक्सटाइल मिलें संचालित हैं। साथ ही इंदौर के रेडीमेड गारमेंट और अपैरल क्लस्टर में 1,200 से अधिक इकाइयां उत्पादन कर रही हैं। पीएम मित्र पार्क: रोजगार और औद्योगिकीकरण को बढ़ावा मध्यप्रदेश के धार जिले में बन रहा पीएम मित्र पार्क देश का सबसे बड़ा टैक्सटाइल पार्क है। इसमें एक लाख से अधिक प्रत्यक्ष और दो लाख से अधिक अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित होंगे। पीएम-मित्र पार्क प्रदेश को टैक्सटाइल उद्योग में नये सिरे से स्थापित करेगा। मध्यप्रदेश टैक्सटाइल क्षेत्र: महत्वपूर्ण तथ्य मध्यप्रदेश में भारत के 43% जैविक कपास का उत्पादन होता है। विश्व में प्रदेश के कपास उत्पादन का योगदान 24% है। प्रदेश में कपास का उत्पादन 31 हजार 700 मीट्रिक टन प्रतिवर्ष है। इसलिए इसे कॉटन कैपिटल कहा गया है। मलबरी सिल्क को मिलाकर 200 मीट्रिक टन सिल्क का उत्पादन होता है। नवीन टैक्सटाइल नीति-2025 से उद्योगों को मिल रहा प्रोत्साहन मध्यप्रदेश सरकार ने टैक्सटाइल उद्योग के लिए नई नीति लागू की है, जिसमें निवेशकों को कई वित्तीय और गैर वित्तीय प्रोत्साहन प्रदान किए जा रहे हैं। नीतिगत प्रावधानों में प्लांट और मशीनरी में किए गए निवेश पर 10 से 40% तक की राशि निवेश संवर्द्धन सहायता के रूप में उद्यमियों को दी जाएगी। इस पर 5 से 7% तक ब्याज अनुदान भी 5 वर्ष तक दिया जाएगा। इकाइयों में बिजली, पानी और सड़क अधोसंरचना निर्माण के के लिए 1 करोड़ रुपये तक की सहायता दी जाएगी। साथ ही इकाइयों के परिसर में कचरा प्रबंधन प्रणाली के लिए 1 करोड़ रुपये तक की ग्रीन इंडस्ट्रियलाइजेशन सब्सिडी भी दी जाएगी। एपैरल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट खोलने पर 50 लाख रुपये तक की सब्सिडी दी जाएगी। पहली बार 5 लाख रुपये तक के पेटेंट शुल्क की 100% वापसी, पेटेंट मिल जाने पर दी जाएगी, साथ ही पेटेंट प्रक्रिया में भी सरकार आवश्यक सहायता करेगी। प्रधानमंत्री मोदी के 5एफ-विजन को मध्यप्रदेश ने दिया मूर्त रूप प्रधानमंत्री श्री मोदी ने जीआईएस-भोपाल में टैक्सटाइल एवं गारमेंट सेक्टर के विकास के लिए "5-एफ विजन'' फार्म, फाइबर, फैक्ट्री, फैशन और फॉरेन का मंत्र देते हुए कहा कि देश और विशेष रूप से मध्यप्रदेश में उत्पाद मूल्य श्रृंखला के सभी तत्व मौजूद हैं। इनमें फार्म के अंतर्गत आपूर्ति श्रृंखला सुनिश्चित करने के लिए कपास और रेशम किसानों से कच्चे माल के उत्पादकों को जोड़ना। ‘फाइबर’ में फाइबर निर्माण और प्र-संस्करण इकाइयों का प्रदर्शन सुधारना, जो उद्योग में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। जबकि, ‘फैक्ट्री’ के तहत प्रदेश के वस्त्र निर्माण और औद्योगिक उत्पादन पारिस्थितिकी तंत्र को उजागर करना शामिल है। ‘फैशन’ में परिधान डिजाइन, ब्रांडिंग और वस्त्र उद्योग के रचनात्मक पहलुओं पर ध्यान केंद्रित करना और ‘फॉरेन’ में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को मजबूत कर निर्यात अवसरों को बढ़ावा देना आता है। मध्यप्रदेश ने विजन को साकार करते हुए कार्य करना प्रारंभ कर दिया है। टैक्सटाइल सेक्टर में पूर्व में प्राप्त हो चुका है 3,513 करोड़ रुपए का निवेश प्रदेश सरकार की नई टैक्सटाइल नीति से प्रदेश को पीएलआई योजना के अंतर्गत 3,513 करोड़ रुपये का निवेश प्राप्त हो चुका है, जो देश में सर्वाधिक है। इसके अतिरिक्त राज्य में स्थापित मेगा टैक्सटाइल पार्कों के माध्यम से ब्यावरा और नीमच में बड़े निवेश आ रहे हैं। मध्यप्रदेश टैक्सटाइल उद्योग के क्षेत्र में अपनी ऐतिहासिक समृद्धि को बनाए रखते हुए आधुनिक औद्योगिकीकरण की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। निवेशकों के अनुकूल नीतियों, टैक्सटाइल पार्कों, और विशेष आर्थिक पैकेजों के माध्यम से राज्य न केवल भारतीय बल्कि वैश्विक बाजार में अपनी एक अलग पहचान बना रहा है।   recent visitors 79

सेना का हथियार बना डीआरडीई में तैयार हुआ ऑटोमैटिक केमिकल एजेंट डिटेक्टर अलार्म, DRDE को 223 यूनिट का ऑर्डर

ग्वालियर ग्वालियर में स्थित देश के रक्षा संस्थान DRDO की DRDE लैब ने रक्षा क्षेत्र में एक बड़ा कदम बढ़ाया है। आगामी समय में न्यूक्लियर, जैविक और रासायनिक युद्ध का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। इस तरह के युद्ध का खतरा होने पर अलर्ट करने और अधिक से अधिक बचाव के लिए ग्वालियर के साइंटिस्ट डॉ. सुशील बाथम की टीम ने 'ACADA' (ऑटोमेटिक केमिकल एजेंट डिटेक्टर और अलार्म) विकसित किया है। ये उपरकण आयन मोबिलिटी स्पेक्ट्रोमेट्री के सिद्धांत पर काम करता है। यह डिवाइस 'ACADA' हवा में घुले केमिकल के बारीक कणों को भी कैच कर ऑडियो और वीडियो रूप में अलर्ट जारी करेगा। भारत इस डिवाइस को स्वदेशी तकनीक से विकसित करने वाला दुनिया का चौथा देश बन गया है। आपको बता दें हाल ही में भारतीय सेना और वायु सेना ने 'ACADA' की 223 यूनिट की खरीद के लिए ऑर्डर दिया है। यह डील लगभग 80 करोड़ रुपये में हुई है। आत्मनिर्भर भारत और स्वदेशी रूप से डिजाइन, विकसित और निर्मित नीति की दिशा में डीआरडीई, ग्वालियर का बड़ा योगदान सामने आया है। DRDE के साइंटिस्ट सुशील बाथम द्वारा विकसित स्वचालित रासायनिक युद्ध डिटेक्टर (ACADA) ऑटोमेटिक केमिकल एजेंट डिटेक्टर और अलार्म सेना में शामिल होने जा रहा है। रासायनिक हमले की स्थिति में जानमाल की हानि कम करने के लिए इसकी तत्काल पहचान आवश्यक है। डिटेक्टर-अलार्म में 80% से ज्यादा स्वदेशी कम्पोनेंट्स इस्तेमाल DRDE के साइंटिस्ट सुशील बाथम द्वारा विकसित स्वचलित रासायनिक युद्ध डिटेक्टर (ACADA) ऑटोमैटिक केमिकल एजेंट डिटेक्टर और अलार्म सेना में शामिल होने जा रहा है। रासायनिक हमले की स्थिति में जानमाल की हानि कम करने के लिए इसकी तत्काल पहचान जरूरी है। रासायनिक हमले की पहचान करने में ACADA अहम भूमिका निभाते हैं। अब तक भारतीय सशस्त्र बलों और अन्य सुरक्षा एजेंसियों को इन डिटेक्टर को दुनिया भर में उपलब्ध तीन निर्माताओं (अमेरिका-जर्मनी) से आयात करना पड़ता था। स्वदेश में बने डिटेक्टर और अलार्म में 80% से ज्यादा स्वदेशी कम्पोनेंट्स इस्तेमाल हुए हैं। अलार्म में 80 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी घटक का इस्तेमाल रासायनिक हमले की पहचान करने में ACADA एक महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। अब तक भारतीय सशस्त्र बलों और अन्य सुरक्षा एजेंसियों को इन डिटेक्टर को दुनिया भर में उपलब्ध तीन निर्माताओं (अमेरिका-जर्मनी) से आयात करना पड़ता था। स्वदेश में बने डिटेक्टर और अलार्म में 80 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी घटक इस्तेमाल हुए हैं। ग्वालियर DRDE के अधिकारियों ने बताया कि भारत दुनिया में ऐसा चौथा देश है, जिसके पास इस तरह की प्रौद्योगिकी है। स्वदेशी रूप से विकसित किए गए अकाड़ा से जहां देश की सेनाओं और सुरक्षा बलों के अल्पकालिक एवं दीर्घकालिक आवश्यकताओं की पूर्ति होगी। वहीं इसका लंबे समय तक इस्तेमाल, बेहतर रख-रखाव, स्पेयर पार्ट्स/एक्सेसरीज की आपूर्ति आदि सुनिश्चित हो सकेगी। स्वदेशी रूप से विकसित किया गया यह उत्पाद आई-डीडीएम, 'मेक इन इंडिया' और 'आत्म निर्भर भारत' मिशन की दिशा में एक लंबी छलांग है। 2015 में कामयाबी मिली बता दें 'अकाडा' को विकसित करने वाले साइंटिस्ट डॉ. सुशील बाथम मूल रूप से ग्वालियर के रहने वाले हैं। उन्होंने 2010 में 'अकाडा' को विकसित करने पर फोकस किया था। साल 2015 में उनको कामयाबी मिली। डिवाइस बनाने में 25 से 30 लाख रुपये का खर्च आया है। काम के प्रति साइंटिस्ट डॉ. सुशील बाथम की लगन का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि दिसंबर 2022 में वह अपने प्रोजेक्ट के चलते बेंगलुरु में थे। उसी समय परिवार में गमी हो गई थी। ऐसे में वह अंत्येष्टि कार्यक्रम में नहीं आ सके थे। बाद में सिर्फ कुछ घंटों के लिए आए और वापस प्रोजेक्ट पर काम करने चले गए। डिटेक्टर-अलार्म में 80% से ज्यादा स्वदेशी कम्पोनेंट्स इस्तेमाल DRDE के साइंटिस्ट सुशील बाथम द्वारा विकसित स्वचलित रासायनिक युद्ध डिटेक्टर (ACADA) ऑटोमैटिक केमिकल एजेंट डिटेक्टर और अलार्म सेना में शामिल होने जा रहा है। रासायनिक हमले की स्थिति में जानमाल की हानि कम करने के लिए इसकी तत्काल पहचान जरूरी है। रासायनिक हमले की पहचान करने में ACADA अहम भूमिका निभाते हैं। अब तक भारतीय सशस्त्र बलों और अन्य सुरक्षा एजेंसियों को इन डिटेक्टर को दुनिया भर में उपलब्ध तीन निर्माताओं (अमेरिका-जर्मनी) से आयात करना पड़ता था। स्वदेश में बने डिटेक्टर और अलार्म में 80% से ज्यादा स्वदेशी कम्पोनेंट्स इस्तेमाल हुए हैं। भारत, दुनिया का चौथा देश जिसके पास इस तरह की तकनीक ग्वालियर DRDE के निदेशक डॉ. मनमोहन परीडा ने बताया कि भारत दुनिया में ऐसा चौथा देश है, जिसके पास इस तरह की तकनीक है। स्वदेशी रूप से विकसित किए गए ACADA से जहां देश की सेनाओं और सुरक्षा बलों की अल्पकालिक एवं दीर्घकालिक जरूरतें पूरी होंगी, वहीं इसका लंबे समय तक इस्तेमाल, बेहतर रखरखाव, स्पेयर पार्ट्स/एक्सेसरीज की आपूर्ति भी सुनिश्चित हो सकेगी। स्वदेशी रूप से विकसित किया गया यह उत्पाद आई-डीडीएम, 'मेक इन इंडिया' और 'आत्म निर्भर भारत' मिशन की दिशा में एक लंबी छलांग है। डॉ. बाथम का 2010 से ACADA को विकसित करने पर फोकस ACADA को विकसित करने वाले साइंटिस्ट डॉ. सुशील बाथम मूल रूप से ग्वालियर के रहने वाले हैं। उन्होंने 2010 में इसे विकसित करने पर फोकस किया था। साल 2015 में उन्हें ये कामयाबी मिली। डिवाइस बनाने में 25 से 30 लाख रुपए का खर्च आया है। काम के प्रति साइंटिस्ट डॉ. सुशील बाथम की लगन का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि दिसंबर 2022 में वह अपने प्रोजेक्ट के चलते बेंगलुरु में थे। उसी समय परिवार में गमी हो गई थी। ऐसे में वह अंत्येष्टि कार्यक्रम में नहीं आ सके। बाद में सिर्फ कुछ घंटों के लिए आए और वापस अपने प्रोजेक्ट पर लग गए।   recent visitors 39

इंदौर में आज से दुकानों पर दूध की बिक्री 62 रुपये प्रति लीटरऔर बंदी का दूध 60 रुपये प्रति लीटर से मिलेगा

 इंदौर एक मार्च शनिवार से इंदौर शहर में दूध के दाम में दो रुपये प्रति लीटर की वृद्धि हो गई है। शहर में दूध व्यापारी संगठनों ने दाम बढ़ाने की घोषणा की है। इंदौर दूध विक्रेता संघ और मप्र दुग्ध व्यवसायी संघ ने घोषणा की है कि एक मार्च से दुकानों पर दूध की बिक्री 62 रुपये प्रति लीटर के दाम पर और बंदी का दूध 60 रुपये प्रति लीटर के हिसाब से मिलेगा। बंदी के दूध में सेवा शुल्क अलग से लिया जाएगा। मार्च से लागू ये दूध के दाम अगस्त तक प्रभावी होंगे। इंदौर दूध विक्रेता संघ के अध्यक्ष भारत मथुरावाला के अनुसार दूध के दाम बढ़ाने से विक्रेताओं को कोई लाभ नहीं होगा। गर्मी में चारे, पशु आहार की कमी होती है और दाम बढ़ते हैं। दूध की लागत बढ़ने के साथ किसानों के हित में दाम बढ़ाना आवश्यक है। बढ़े दामों का पैसा भी किसान के पास जाएगा। मूल्य वृद्धि के पीछे कारण इंदौर दूध विक्रेता संघ के अध्यक्ष भारत मथुरावाला ने नवभारत टाइम्स को बताया कि इस मूल्य वृद्धि से विक्रेताओं को कोई अतिरिक्त लाभ नहीं होगा। गर्मी के मौसम में चारे और पशु आहार की कीमतें बढ़ने से दूध उत्पादन की लागत में वृद्धि होती है। इसके चलते किसानों को उनकी लागत निकालने और मुनाफा के लिए दूध की कीमतें बढ़ाना आवश्यक हो जाता है। संघ के अनुसार, दूध के दामों में की गई यह बढ़ोतरी पूरी तरह से किसानों के हित में है और इसका सीधा लाभ उन्हें ही मिलेगा। साल में दो बार होती है कीमतों में वृद्धि इंदौर में दूध के दाम साल में दो बार बढाए – घटाए जाते हैं। गर्मी के मौसम में जब पशु आहार महंगा होता है और दूध का उत्पादन कम हो जाता है, तब कीमतों में बढ़ोतरी देखने को मिलती है। वहीं, बारिश और सर्दियों के मौसम में चारे की उपलब्धता बढ़ने और दूध उत्पादन में इजाफा होने के कारण कीमतों में गिरावट आती है। पिछले वर्षों में भी यही ट्रेंड देखा गया है, जब गर्मियों में दाम बढ़ाए गए और सर्दियों में उन्हें कम किया गया। पिछले वर्षों में दूध के दामों का बदलाव बीते पांच वर्षों में इंदौर में दूध की कीमतों में कई बार बदलाव हुआ है। मार्च 2024 में दूध के दामों में 4 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि हुई थी, जबकि सितंबर में इन्हें 2 रुपये प्रति लीटर कम कर दिया गया था। इसी तरह, हर साल बाजार की स्थिति और उत्पादन लागत के आधार पर दूध की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखा जाता है। recent visitors 44

सरकार ने मिसिंग क्रेडिट की राशि अभिदाताओं के खातों में जमा करने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया: उप मुख्यमंत्री देवड़ा

भोपाल उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने कहा कि सरकार ने कर्मचारियों के हित में महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए मिसिंग क्रेडिट की राशि अभिदाताओं के खातों में जमा करने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। अब अशंदायी पेंशन योजना (NPS) में मिसिंग क्रेडिट की राशि अभिदाता के खातों में जमा किये जायेगें। उप मुख्यमंत्री देवड़ा ने बताया है कि अभिदाताओं के खातों में मिसिंग क्रेडिट की राशि जमा करने के लिये 15 मार्च 2025 तक विशेष अभियान चलेगा। इस संबंध में विभागीय स्तर पर निर्देश भी जारी कर दिये गये हैं। राज्य शासन के अधीन सिविल सेवा के पदों पर एक जनवरी 2005 को या उसके बाद नियुक्त होने वाले शासकीय सेवकों पर अंशदायी पेंशन योजना (एनपीएस) लागू है। इसमें शासकीय सेवकों के वेतन से कर्मचारी अंशदान एवं शासकीय अंशदान संबंधित के परमानेंट रिटायरमेंट अकाउंट नम्बर (प्रान) में जमा किया जाता है। ऐसे शासकीय कर्मचारी, जो प्रतिनियुक्ति पर पदस्थ हैं और उनके अंशदान उनके प्रान में जमा नहीं हुए है, ऐसे प्रकरणों में मिसिंग क्रेडिट (गुमसुदा कटौत्री) की समस्या होती है। गुमशुदा कटौत्री की समस्या के समाधान के लिए संचालनालय कोष एवं लेखा ‌द्वारा आईएफएमआईएस में सुविधा विकसित की गयी है। ऐसे शासकीय सेवक, जो प्रतिनियुक्ति पर पदस्थ है, उनके अंशदान के चालानों का विवरण कोषालय अधिकारी द्वारा आईएफएमआईएस में भरा जायेगा एवं रिफण्ड देयक तैयार कर अंशदान जमा करने की कार्यवाही की जाएगी। वरिष्ठ कोषालय अधिकारी वल्लभ भवन राजीव सिंह पवैया ने बताया कि वल्लभ कोषालय द्वारा जो भी प्रतिनियुक्ति पर पदस्थ शासकीय सेवक जिनके ‌द्वारा चालान भारतीय स्टेट बैंक की टी.टी.नगर, जहांगीराबाद,एम.पी.नगर, पंचानन, एवं बरखेड़ी की शाखाओं में जमा किये जायेगे उनका चालान का सत्यापन बल्लभ भवन कोषालय सतपुड़ा भवन द्वारा किया जायेगा। इसके साथ ही प्रतिनियुक्ति पर पदस्थ शासकीय सेवक जिनके ‌द्वारा चालान स्टेट बैंक शाखा विन्ध्याचल, शिवाजी नगर, एच.ई.टी. एस.एम.ई. गोविन्दपुरा, महावीर नगर, हबीबगंज शाखा में जमा किए गये है, वह शासकीय सेवक विन्ध्याचल कोषालय, विन्ध्याचल भवन में उपस्थित होकर चालान का सत्यापन करा सकते हैं।   recent visitors 38