आने वाले दिनों में मध्यप्रदेश और ज्यादा चमकेगाम, मोहन सरकार राज्य को मिनी मुंबई इंदौर का रूप देगी

भोपाल आने वाले दिनों में मध्यप्रदेश और ज्यादा चमकेगा। प्रदेश की मोहन सरकार पूरे राज्य को मिनी मुंबई इंदौर का रूप देगी। जबकि, इंदौर को दिल्ली-मुंबई तर्ज पर विकसित किया जाएगा। इतना ही नहीं, मेट्रोपॉलिटन कॉन्सेप्ट के आधार पर कई जिलों को आपस में जोड़कर और बड़ा किया जाएगा। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव अब इस योजना पर फोकस कर रहे हैं। उन्होंने राजधानी भोपाल में आयोजित वैश्विक सम्मेलन ग्लोबल इंवेस्टर्स समिट-2025 में इस योजना पर चर्चा की। जीआईएस के दूसरे दिन यानी 25 फरवरी को 'अनलॉकिंग लैंड वैल्यू इन सिटीज' सेशन आयोजित किया गया। इस सेशन में शहरों के विकास पर मंथन किया गया। इस सेशन में हरियाणा के पूर्व सीएम और वर्तमान केंद्रीय मंत्री मनोहरलाल खट्टर एवं प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय भी मौजूद रहे। सेशन में सीएम मोहन यादव ने कहा कि हमारी सरकार बनने के बाद हमने कई सेक्टर में काम करने का संकल्प लिया। हमने रीजनल इंडस्ट्रीज कॉन्क्लेव और इंवेस्टर समिट की। इस दौरान प्रदेश में रोजगार, उद्योग और निवेश का वातावरण बनाने का प्रयास किया। यह प्रयोग बहुत अच्छा रहा। इनकी वजह से हमें कई तरह के लाभ मिले। इन्हीं सबके बीच हमें पता चला कि राज्य के छोटे से छोटे स्थान पर भी इंवेस्टर समिट हो सकती है। इससे हमारा कॉन्फिडेंस बढ़ा। हमें पता चला कि नर्मदापुरम जैसी छोटी जगह पर भी निवेश की उम्मीदें हैं। जगह छोटी पर फायदा बड़ा सीएम यादव ने कहा कि कुछ समय पहले हम रिन्यूएबल एनर्जी के उपकरण निर्माण उद्योग के भूमि पूजन के लिए नर्मदापुरम के मुहासा-बाबई गए थे। यहां जब हम औद्योगिक केंद्र का भूमि पूजन कर रहे थे, तो उस वक्त 200 एकड़ जमीन थी। हमारा कार्यक्रम चालू ही था कि 400 एकड़ और जमीन की मांग आ गई। इस तरह जमीन की 800 एकड़ हो गई। हमने जब इस मांग को पूरा किया, तो पता चला कि 800 एकड़ जमीन की और मांग आ गई। यही छोटी-छोटी जगहों पर इंवेस्टर समिट करने का फायदा है। इस तरह बसाएंगे महानगर     मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि इंदौर को दिल्ली-मुंबई की तरह बनाना है और बाकी प्रदेश को इंदौर की तरह बनाना है। ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट ने निवेश का और काम करने का माहौल बना दिया है।     हम मेट्रोपॉलिटन कॉन्सेप्ट के आधार पर आसपास के जिलों को जोड़ेंगे। भविष्य में इंदौर-उज्जैन-देवास-शाजापुर-पीथमपुर (धार) को जोड़कर इंडस्ट्रियल सेंटर की कल्पना की है।     इस तरह सब मिलाकर लगभग 8000 किलोमीटर का पूरा क्षेत्र मिलाने की योजना है। मेट्रोपॉलिटन की कल्पना में मामले को कानूनी पेंच में उलझाने की बजाए एक आउट लाइन तय की है।     रोड-रेलवे-बिजली-पानी-सीवर लाइन जैसी सुविधाएं मुहैया कराएंगे।     इस तरह 25 सालों में इस क्षेत्र को महानगर के रूप में विकसित करेंगे। इसी तरह भोपाल-सीहोर-विदिशा-रायसेन-नर्मदापुरम का एक हिस्सा मिलाए जाने की कल्पना है। एमपी का चहुंओर विकास होगा- मंत्री विजयवर्गीय नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि जिस तरह प्रदेश में निवेश हो रहा है उससे लग रहा है कि राज्य अग्रणी होगा। शहरीकरण देश की जरूरत है। 2047 तक हमारी जनसंख्या बढ़ेगी। चूंकि, हमें कल का प्रदेश बनाना है, इसलिए उस पर चिंतन करना जरूरी है। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव के नेतृत्व में सिर्फ दो दिन में 18 नई पॉलिसियों को मंजूरी दी गई। इन पॉलिसियों से प्रदेश का चहुंओर विकास होगा। recent visitors 66

मध्य प्रदेश में NHAI 5 वर्षों में 60,000 करोड़ का कार्य करेगा, 40,000 करोड़ के कार्य 5 वर्षों में

भोपाल  मध्य प्रदेश सड़क विकास निगम और राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के बीच हाई स्पीड कॉरिडोर और एक्सप्रेस-वे के निर्बाध निर्माण को सुनिश्चित करने का उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण समझौता मोओयू हस्ताक्षर हुए हैं. यह एक लाख करोड़ का मोओयू है जो कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मौजूदगी हस्ताक्षर किया गया है. मध्य प्रदेश के लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह के मुताबिक मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मौजूदगी में NHAI 5 वर्षों में लगभग 60,000 करोड़ का कार्य करेगा. प्रयास यह होगा कि शेष 40,000 करोड़ के कार्य भी इन 5 वर्षों में आरंभ हो जाए. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जीएसआई का जो सफल आयोजन हुआ है, उसमें NHAI और मध्य प्रदेश सड़क विकास निगम के एमओयू का भी अध्याय जुड़ गया है. इस एमओयू के कारण 2037 तक होने वाले निर्माण कार्य आगामी 5 साल में ही हो जाएंगे. मध्य प्रदेश इस प्रकार के कार्य में देश का पहला राज्य बन गया है. सड़क पर दिखेगा MOU का असर लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने यह दावा किया है कि इस समझौते का असर सड़क पर दिखेगा. राष्ट्रीय राजमार्ग और एक्सप्रेस हाईवे के विकास के लिए एक लाख करोड़ का निवेश किया जाएगा, जिसमें लगभग 4010 किलोमीटर की सड़क का निर्माण होगा. इस समझौते के अंतर्गत हाई स्पीड कॉरिडोर, एक्सेस कंट्रोल, सिक्स लेन, एग्जैक्टिंग रोड के अलावा विकास के द्वार खुलेंगे. इन राज मार्गों दिखेगा असर लोक निर्माण मंत्री के मुताबिक भोपाल जबलपुर ग्रीन फील्ड हाई स्पीड कॉरिडोर, प्रयागराज- जबलपुर- नागपुर एक्सप्रेस वे, लखनादौन-रायपुर एक्सप्रेस, आगरा-ग्वालियर राष्ट्रीय राजमार्ग, उज्जैन-झालावाड़ राष्ट्रीय राजमार्ग, इंदौर रिंग रोड, जबलपुर-दमोह राष्ट्रीय राजमार्ग, सतना-चित्रकूट राष्ट्रीय राजमार्ग, रीवा-सिद्धि राष्ट्रीय राज्य मार्ग और ग्वालियर शहर के पश्चिमी छोर पर फोरलेन बाईपास सहित कई महत्वपूर्ण सड़क परियोजना का विकास किया जाएगा. recent visitors 55

20 फ़रवरी से 31 मार्च तक संचालित है ‘निरोगी काया अभियान’: उप मुख्यमंत्री शुक्ल

30 वर्ष से अधिक आयु के सभी नागरिक अभियान का अवश्य लें लाभ : उप मुख्यमंत्री शुक्ल जन-प्रतिनिधियों, समाज सेवियों और आमजन से सहभागिता की अपील की : उप मुख्यमंत्री शुक्ल 20 फ़रवरी से 31 मार्च तक संचालित है ‘निरोगी काया अभियान’: उप मुख्यमंत्री शुक्ल डायबिटीज, ब्लड प्रेशर और फैटी लिवर जैसी असंक्रामक बीमारियों (एनसीडी) की हो रही है निःशुल्क जांच भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि मध्यप्रदेश में केंद्र सरकार के मार्गदर्शन और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा के नेतृत्व में 20 फरवरी से 31 मार्च 2025 तक ‘निरोगी काया अभियान’ संचालित किया जा रहा है। इस महाभियान के तहत प्रदेश में 12 हज़ार से अधिक स्वास्थ्य केंद्रों, जन आरोग्य मंदिरों, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र और मुख्यमंत्री संजीवनी क्लीनिकों में 30 वर्ष से अधिक आयु के नागरिकों की मधुमेह (डायबिटीज), रक्तचाप (ब्लड प्रेशर) और फैटी लिवर जैसी प्रमुख असंक्रामक बीमारियों (एनसीडी) की निःशुल्क जांच की जा रही है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने आमजनों, जन-प्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों और स्थानीय प्रशासन से इस अभियान को सफल बनाने में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि सभी लोग अपने आसपास के नागरिकों को स्वास्थ्य परीक्षण के लिए प्रेरित करें, अभियान की मॉनिटरिंग करें और जरूरतमंद लोगों को स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँचाने में सहायता करें। उन्होंने सभी नागरिकों से अनुरोध किया कि वे अपने नजदीकी जन आरोग्य मंदिर, संजीवनी क्लिनिक या स्वास्थ्य केंद्र पर पहुँचकर अपनी निःशुल्क जांच अवश्य करवाएँ। स्वास्थ्य केंद्रों की सेवाएँ रविवार को छोड़कर सप्ताह में 6 दिन उपलब्ध हैं। अतः सभी नागरिकों से अनुरोध है कि अपना और अपने परिवार का स्वास्थ्य परीक्षण अवश्य कराएँ और गंभीर बीमारियों से बचाव करें। समय पर जांच से रोगों के जटिल होने से पूर्व ही सहजता से होता है पूर्ण उपचार उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि अभियान का मुख्य उद्देश्य लोगों को असंक्रामक बीमारियों की रोकथाम और समय पर पहचान के प्रति जागरूक करना है। अक्सर यह देखा गया है कि मधुमेह, उच्च रक्तचाप और फैटी लिवर जैसी बीमारियाँ आरंभिक अवस्था में लक्षणहीन होती हैं, जिससे लोग इन्हें पहचान नहीं पाते और समय पर इलाज नहीं हो पाता। यह समस्या खासकर ग्रामीण और सुदूर इलाकों में अधिक देखने को मिलती है। ऐसे में जब बीमारी बढ़ जाती है, तो मरीजों को गंभीर स्वास्थ्य जटिलताओं का सामना करना पड़ता है। इस अभियान के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि प्रदेश के हर व्यक्ति तक आवश्यक स्वास्थ्य जांच और उपचार सेवाएँ पहुंचें। अब तक 8 लाख नागरिकों की हो चुकी है निःशुल्क जांच उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि निरोगी काया अभियान के तहत अब तक 6 लाख लोगों की मधुमेह और रक्तचाप की जांच पूरी की जा चुकी है, जबकि 2 लाख लोगों की फैटी लिवर की जांच हो चुकी है। यह आँकड़े इस अभियान की सफलता को दर्शाते हैं और इस बात को प्रमाणित करते हैं कि नागरिकों में स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता तेजी से बढ़ रही है।   recent visitors 65

निवेशकों और मेहमानों ने जोन में स्थानीय व्यंजनों का अतिथियों ने उठाया लुत्फ

भोपाल ग्लोबल इंवेस्टर्स समिट-2025 में आए विदेशी और स्वदेशी निवेशकों के लिये मानव संग्रहालय परिसर में "एक जिला-एक उत्पाद" जोन बनाया गया। यह जोन एक जिला-एक उत्पाद योजना में प्रदेश के अलग-अलग जिलों से चयनित उत्पादों के परिचय और निवेश को आकर्षित करने के लिये बनाया गया। समिट में मध्यप्रदेश के एक जिला-एक उत्पाद योजना में स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बाजार उपलब्ध कराने की दृष्टि से "वन ड्रिस्ट्रिक-वन प्रोडक्ट विलेज" की वृहद प्रदर्शनी भी लगाई गई। जीआईएस में शामिल विदेशी निवेशकों और मेहमानों के लिये यह जोन विशेष आकर्षण का केन्द्र रहा। निवेशकों ने ओडीओपी जोन में अलग-अलग जिलों के चयनित उत्पादों को देखा, समझा और सराहा। ओडीओपी जोन में दिखी प्रदेश की रंग-बिरंगी लोक संस्कृति की झलक मानव संग्रहालय परिसर के स्थित ओडीओपी जोन में विदेशी निवेशकों और मेहमानों को प्रदेश की रंग-बिरंगी लोक संस्कृति की झलक दिखाई गई। बुंदेलखंड के बधाई, बैतूल के कोरकू समुदाय का गडली सुसुन नृत्य, बांसूरी की मधुर तान, ढोल और झुंझुरी की थाप ने पूरे माहौल को आनंदित कर दिया। प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से आए लोक कलाकारों ने रंग-बिरंगे परिधानों से सजकर लोक नृत्य की प्रस्तुतियां दी। ओडीओपी जोन देखने आए निवेशकों और मेहमानों ने लोक कलाकारों का तालियों से उत्साहवर्धन किया और सेल्फी भी खिंचवाई। आतिथियों ने स्थानीय उत्पादों को सराहा, व्यंजनों का उठाया लुत्फ ओडीओपी जोन में प्रदेश के विभिन्न जिलों के विशिष्ट उत्पाद जैसे ग्वालियर सैंड स्टोन, बुरहानपुर केले के प्रोडक्ट, बैतूल मैटल की सजावट सामग्री, शिवपुरी जैकेट, सीहोर लकड़ी के खिलौने आदि उत्पादों का अवलोकन किया। सभी ने उत्पादों की गुणवत्ता और रचनात्मकता की सराहना की। मेहमानों ने बुंदेली, मालवी और परम्परागत जनजातीय व्यंजनों का लुत्फ उठाया। ओडीओपी में शामिल है 52 जिलों के विशिष्ट उत्पाद ओडीओपी योजना के अंतर्गत किसी क्षेत्र विशेष के विशेष उत्पादों को उनके भौगोलिक, जैविकीय, प्राकृतिक या उत्पादन की विशेषताओं के कारण शामिल किया जाता है। योजना में ऐसे उत्पादों का चयन कर उनके संरक्षण और संवर्द्धन के विशेष सरकारी प्रयास किये जाते है। इस समय मध्यप्रदेश के 52 जिलों में ओडीओपी योजना संचालित है, जिनमें हरी सब्जी, मोटे अनाज, क्राफ्टकला हथकरघा, हस्तशिल्प, उपकरण आदि शामिल है। अब तक प्रदेश के 19 उत्पादों को मिला है जीआई टैग प्रदेश सरकार द्वारा स्थानीय कलाकारों और उत्पादों को विशेष प्रोत्साहन दिया जा रहा है। प्रदेश के अलग-अलग जिलों के 19 विशिष्ट उत्पादों को अब तक जीओ-ग्राफिकल इंडीकेशन्स (जीआई) टैग प्रदान किये गये है। इसमें चंदेरी साड़ी, बाग प्रिंट, नागपुरी संतरा, रतलामी सेंव, कड़कनाथ मुर्गा, चिन्नौर चावल, बुटिक प्रिंट, स्टोन क्राफ्ट, लेदर टॉय, बेल मेटल वेअर, महेश्वरी साड़ी, महोबा देशवारी पान, मुरैना गजक, सुंदरजा आम, शरबती गेहूँ, गोंड पेंटिंग, रॉट आयरन क्राफ्ट, हेन्डमेड कारपेट, वारासिवनी की हेंडलूम साड़ी शामिल है। इनमें से 7 उत्पाद ओडीओपी योजना में भी शामिल है।   recent visitors 71

अमेरिका ने यूक्रेन का समर्थन करने से किया इनकार

न्यूयॉर्क अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को यूक्रेन युद्ध पर एक नया रुख अपनाया, जब वॉशिंगटन ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में यूक्रेन पर आक्रमण की निंदा करने वाले प्रस्ताव के खिलाफ मतदान किया। यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद ये पहली बार है जब अमेरिका ने संयुक्त राष्ट्र के अंदर कीव को समर्थन देने से इनकार कर दिया। संघर्ष के तीन साल पूरे होने पर यूरोपीय समर्थन वाले प्रस्ताव को महासभा ने 93 वोटों के साथ स्वीकार कर लिया। लेकिन अमेरिका के प्रस्ताव का विरोध करने की चर्चा सबसे ज्यादा है, जो ट्रंप के नेतृत्व में वॉशिंगटन की विदेश नीति में बड़े बदलाव को दर्शाता है। प्रस्ताव के खिलाफ 18 सदस्य देशों ने मतदान किया, जबकि 65 सदस्यों ने इसमें हिस्सा नहीं लिया। वॉशिंगटन ने मतदान के दौरान मॉस्को और रूस के सहयोगियों उत्तर कोरिया और सूडान जैसे देशों का साथ दिया। नए पारित प्रस्ताव में युद्ध में कमी लाने, शत्रुता को शीघ्र समाप्त करने और यूक्रेन के विरुद्ध युद्ध का शांतिपूर्ण समाधान करने का आह्वान किया गया है, जिसमें संयुक्त राष्ट्र चार्टर और अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप नागरिक आबादी समेत भारी विनाश और मानवीय पीड़ा शामिल है। भारत ने लिया किसका पक्ष ? यह प्रस्ताव यूक्रेन के लिए जीत के रूप में सामने आया है, लेकिन यह कीव के कम होते समर्थन को भी दिखाता है। इसे पिछले प्रस्तावों की तुलना में बहुत कम समर्थन मिला है। वहीं, भारत ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के मसौदा प्रस्ताव पर मतदान में हिस्सा नहीं लिया। भारत उन 65 संयुक्त राष्ट्र सदस्य देशों में शामिल था, जिन्होंने प्रस्ताव पर मतदान से परहेज किया। अमेरिका ने पेश किया अलग प्रस्ताव इस बीच अमेरिका ने भी एक प्रतिद्वंद्वी प्रस्ताव तैयार किया, जिसे संयुक्त राष्ट्र में रूसी राजदूत ने सही दिशा में एक कदम कहा था। लेकिन वॉशिंगटन के सहयोगी फ्रांस ने अमेरिकी पाठ में संशोधन पेश किया और महासभा को बताया कि पेरिस, ब्रिटेन समेत अन्य यूरोपीय देशों के साथ मौजूदा स्वरूप में इसका समर्थन नहीं कर पाएगा। अपने ही पाठ से पीछे हटा अमेरिका इन देशों ने अमेरिकी पाठ को फिर से लिखने के लिए दबाव डाला। इन परिवर्तनों ने यूक्रेन की क्षेत्रीय अखंडता के प्रति प्रतिबद्धता की भी पुष्टि की, जिसे अमेरिकी पाठ से हटा दिया गया था। अमेरिकी प्रस्ताव में इतना अधिक संशोधन किया गया कि वॉशिंगटन ने आखिरकार अपने खुद के पाठ पर मतदान से परहेज किया, जबकि सभा ने इसे पास कर दिया। recent visitors 78

ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के दौरान कुल 30 लाख 77 हज़ार करोड़ रूपए के MOUs किए गए: अमित शाह

भोपाल केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने आज मध्य प्रदेश के भोपाल में दो दिवसीय ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के समापन सत्र को संबोधित किया। इस अवसर पर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। अपने संबोधन में केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह जी ने कहा कि इस दो दिवसीय ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के दौरान कुल 30 लाख 77 हज़ार करोड़ रूपए के MOUs किए गए। उन्होंने कहा कि इनमें से कई MOUs ज़मीन पर उतरेंगे और एक बड़ी इंडस्ट्री के साथ-साथ सहायक उद्योगों को भी मध्य प्रदेश में स्थापित करने में राज्य सरकार को मदद करेंगे। श्री शाह ने कहा कि दो दिवसीय समिट में 200 से अधिक भारतीय कंपनियां, 200 से अधिक वैश्विक सीईओ, 20 से अधिक यूनिकॉर्न संस्थापक और 50 से अधिक देशों के प्रतिनिधि मध्य प्रदेश में निवेश करने और यहां के माहौल को देखने आए हैं। उन्होंने कहा कि इस बार मध्य प्रदेश ने एक नए प्रयोग के तहत हर क्षेत्र का अलग-अलग इन्वेस्टमेंट समिट कर पूरे मध्य प्रदेश का समविकास करने का प्रयास किया है, जो आने वाले दिनों में कई राज्यों को दिशा दिखाएगा। श्री अमित शाह ने कहा कि इस समिट में मध्य प्रदेश ने विकास के लिए अपने industrial potential, sectoral potential और global potential को भी एक्सप्लोर करने के सारे रास्ते खोलने का प्रयास किया है। उन्होंने कहा कि इस समिट ने मध्य प्रदेश के विकास को नया आयाम देने का काम किया है। श्री शाह ने कहा कि मध्य प्रदेश हमारे देश की भव्य सांस्कृतिक विरासत से भरपूर है और प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी द्वारा दिए गए ‘विकास भी विरासत भी’ के सूत्र को चरितार्थ करने के लिए राज्य कई प्रयास कर रहा है। केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी जी ने देश के युवाओं और 130 करोड़ की जनता के सामने 2047 तक भारत को पूर्ण विकसित राष्ट्र बनाने और 2027 तक दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य रखा है। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश की ये इन्वेस्टमेंट समिट इन दोनों लक्ष्यों को सिद्ध करने में न सिर्फ सहायक होगी बल्कि इनमें बहुत बड़ा योगदान भी देगी। श्री शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की टीम इंडिया की कल्पना में भारत सरकार और सभी राज्यों की टीमों को साथ मिलकर पूरे देश का विकास करने की दिशा में जान का लक्ष्य रखा गया था जिसे इस कार्यक्रम ने आगे बढ़ाया है। श्री अमित शाह ने कहा कि इस समिट में लोकल और ग्लोबल दोनों प्रकार के निवेश में वृद्धि करने के कई आयाम हासिल किए गए हैं। उन्होंने कहा कि ये समिट भारत की अमृत पीढ़ी के लिए कौशल विकास के कई द्वार भी खोलेगी। श्री शाह ने कहा कि ऑटोमेशन और जॉब क्रिएशन के बीच समन्वय बनाकर मध्य प्रदेश सरकार ने अलग अलग सेक्टर्स के लिए जो नीतियां बनाई हैं वो आगे बढ़ेंगी और ये समिट भारत को मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने में भी बहुत सहायता करेगी। केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में मध्य प्रदेश में एक स्थायी औऱ मज़बूत सरकार काम कर रही है, जिससे विकास के द्वार खुल रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत के दिल जैसे मध्य प्रदेश की एक स्ट्रैटेजिक लोकेशन है और यहां बेहतर इन्फ्रास्ट्रक्चर भी बन चुका है। इसी प्रकार, स्किल्ड वर्कफोर्स की एक बड़ी फौज यहां उपलब्ध है और प्रशासन ने बेहतरीन इकोसिस्टम भी उपलब्ध कराया है। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश से अधिक मार्केट का एक्सेस भी किसी को उपलब्ध नहीं है और डिमांड ओरिएंटेड इकोनॉमी भी अब यहां काफी तेज़ी से बढ़ रही है। श्री शाह ने कहा कि मध्य प्रदेश सरकार के पारदर्शी शासन ने निवेश के लिए काफी लोगों को आकर्षित किया है। उन्होंने कहा कि यहां land भी है, labour force भी है, mines भी हैं minerals भी हैं, उद्योगों के लिए संभावनाएं और अवसर भी हैं, शिक्षित युवा भी हैं और स्किल्ड वर्कफोर्स भी है। गृह मंत्री ने कहा कि मध्य प्रदेश आज पूरे भारत में हर प्रकार से निवेश के लिए एक बड़ा आकर्षण का केन्द्र बना हुआ है। श्री अमित शाह ने कहा कि एक जमाने में मध्य प्रदेश की गिनती बीमारू राज्यों में होती थी लेकिन हमारी सरकार के 20 साल के सतत शासन के बाद यहां 5 लाख किलोमीटर सड़क नेटवर्क बना है, आज यहां 6 हवाईअड्डे हैं, 31 गीगावॉट की ऊर्जा क्षमता है जिसमें से 30 प्रतिशत क्लीन एनर्जी है। उन्होंने कहा कि IIM, IIT, AIIMS, IITM, NIFT और NIFD जैसे कई प्रतिष्ठित संस्थान मध्य प्रदेश के युवाओं को इन मौकों के दोहन के लिए योग्य बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश देशभर में सबसे अधिक खनिज संपदा वाले राज्यें में से एक है।  recent visitors 49

भोपाल के ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में निवेश का बनेगा रिकॉर्ड: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट-2025 में निवेश के क्षेत्र में मध्यप्रदेश को माइनिंग के क्षेत्र में सबसे बड़ी ताकत मिलेगी। उन्होंने कहा कि माइनिंग सेक्टर में निवेश की असीमित संभावनाएँ हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव राष्ट्रीय मानव संग्रहालय भोपाल में आयोजित ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट-2025 के माइनिंग सत्र को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश एकमात्र ऐसा राज्य है, जहाँ पत्थर उठाओ तो हीरा मिलता है। उन्होंने कहा कि खनिज राजस्व में 5 गुना वृद्धि का लक्ष्य है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भोपाल के ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में निवेश का रिकॉर्ड बनेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में खनिज के अकूत भण्डार हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में हीरे के साथ लाइम स्टोन, डोलोमाइट, सीमेंट, कॉपर, मैग्नीज और रॉक फास्फेट जैसे खनिज प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में सभी विभागों के समन्वय से खनन की सरल एवं लचीली नीति बनायी गयी है। उन्होंने कहा कि इन नीतियों से निवेशकों को मध्यप्रदेश में निवेश करने में आसानी होगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि निवेशकों को नीति से हटकर भी कोई सहयोग की आवश्यकता होगी, तो उसे भी पूरा किया जायेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में निवेशकों के लिये नीतियों के बलबूते माइनिंग सेक्टर में बड़ी बढ़त देखने को मिलेगी। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में हम रॉ-मटेरियल देने के साथ प्रदेश को निर्माण का केन्द्र भी बनायेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश संभावनाओं का प्रदेश है। यहाँ बसने वाले लोग बहुत ही सरल है। खनन के क्षेत्र में कार्य करने वाले निवेशकों को पूरा सहयोग मिलेगा। उन्होंने कहा कि हम भारत सरकार के माध्यम से भी खनन के क्षेत्र में पॉलिसी बनाकर कार्य कर रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में मध्यप्रदेश देश में खनिज के क्षेत्र में अहम भूमिका निभाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारे प्रदेश के भू-गर्भ में छिपे खजाने को बाहर लाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि जीआईएस के बाद माइनिंग के लिये पृथक से भी समिट आयोजित की जायेगी। सचिव, खान मंत्रालय श्री बी.एल. कांताराव ने कहा कि भोपाल का ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट अभी तक का सबसे बेहतरीन आयोजन है। उन्होंने कहा कि इस बार की समिट में माइनिंग में बड़े उद्योगपतियों ने सहभागिता की है। इससे मध्यप्रदेश में खनिज में निवेश की संभावनाएँ बढ़ी हैं। केन्द्रीय सचिव, श्री कांताराव ने कहा कि केन्द्र सरकार के खनिज में 4 विभाग हैं, जिनमें कोल, एटॉमिक, पेट्रोलियम, नेचुरल रिसोर्स और मिनिस्ट्री ऑफ माइंस हैं। इन सभी मिनरल्स की मध्यप्रदेश में बहुतायत है। श्री कांताराव ने कहा कि देश में सबसे ज्यादा माइन्स मध्यप्रदेश में हैं। उन्होंने कहा कि हर 4 माइन्स में से एक माइन्स प्रदेश में है। उन्होंने कहा कि खनिज का सबसे ज्यादा ऑक्शन करने वाला राज्य मध्यप्रदेश है। उन्होंने कहा कि देश की जियो लॉजिकल सर्वे ऑफ इण्डिया कम्पनी 175 वर्ष पुरानी है, जिसने माइनिंग सेक्टर में अपार डेटा इकट्ठा किया है। उन्होंने निवेशकों से कहा कि डेटा स्टडी कर खनिज के क्षेत्र में कार्य करें। केन्द्रीय सचिव श्री कांताराव ने कहा कि माइनिंग के क्षेत्र में एक्सप्लोरेशन के लिये सरकार 100 प्रतिशत आर्थिक सहायता देगी। इसके साथ ही सरकार नई नीति के अंतर्गत एक्सप्लोरेशन कम्पनी को लागत का 50 प्रतिशत रिस्क कवर करेगी। केन्द्रीय सचिव श्री कांताराव ने कहा कि ओवर डम्प और रिसाइकिलिंग के लिये विशेष प्रावधान किये जा रहे हैं। इससे कम्पनियों को सहायता मिलेगी और निवेश मिलेगा। प्रमुख सचिव, खनिज श्री उमाकांत उमराव ने कहा कि मध्यप्रदेश में खनिज क्षेत्र में असीमित संभावनाएँ हैं। उन्होंने कहा कि कुछ ऐसे खनिज हैं, जो मध्यप्रदेश में ही पाये जाते हैं। सभी क्षेत्रों में खनिजों के अपार भण्डार हैं। इसके समुचित उपयोग के लिये प्रदेश में एक बेहतरीन ईको सिस्टम भी है। प्रमुख सचिव श्री उमराव ने निवेशकों से कहा कि प्रदेश में सड़क, बिजली, पानी, हवाई कनेक्टिविटी बहुत बेहतर है और यहाँ पर क्रिटिकल मिनरल्स भी बड़ी मात्रा में पाये जाते हैं। प्रमुख सचिव श्री उमराव ने कहा कि मध्यप्रदेश खनिज सम्पदा के क्षेत्र में अग्रणी राज्य है। खनन एवं खनिज आधारित उद्योगों के लिये अत्यधिक संभावनाएँ प्रदान करता है। मध्यप्रदेश में विविधतापूर्ण खनिज पूरे राज्य में प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि राज्य का देश में कॉपर, मैंग्नीज और हीरा उत्पादन में पहला, रॉक फास्फेट के उत्पादन में दूसरा, लाइम स्टोन के उत्पादन में तीसरा और कोयला उत्पादन में चौथा स्थान है। उन्होंने कहा कि राज्य में देश के कुल भण्डारण का 36 प्रतिशत कोल बेण्ड मीथेन के उत्पादन में राज्य का देश में दूसरा स्थान है। उन्होंने कहा कि खनिजों का पता लगाने का कार्य लगातार जारी है। वर्ष 2024-25 में अब तक 73 में से 62 ब्लॉक की नीलामी की जा चुकी है। प्रमुख सचिव श्री उमराव ने कहा कि राज्य में खनिज उद्योगों को बढ़ावा देने के लिये कई नीतिगत पहल की हैं। उन्होंने निवेशकों से कहा कि मध्यप्रदेश में निवेश करने का उचित समय है। उन्होंने सभी निवेशकों को मध्यप्रदेश में निवेश के लिये प्रेरित किया।   recent visitors 74