लॉस एंजिल्स के जंगल में आग लगने से 164 अरब डॉलर का नुकसान, सामने आई रिपोर्ट

लॉस एंजिल्स अमेरिका की लॉस एंजिल्स काउंटी (Los Angeles County) में जंगल की आग पर जारी एक नई रिपोर्ट में भारी नुकसान नुसारन बताया गया है। खबरों के अनुसार, जंगल की आग पर जारी एक नई रिपोर्ट के अनुसार इससे कुल 164 अरब अमेरिकी डॉलर की संपत्ति और पूंजी (Property and Capital) तक का नुकसान हुआ है। कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय (University of California ), लॉस एंजिल्स (यूसीएलए) द्वारा मंगलवार को प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, पैलिसेड्स और ईटन की आग (The Palisades and Eaton’s Fire) से होने वाली कुल संपत्ति और पूंजीगत हानि 95 अरब डॉलर से 164 अरब डॉलर के बीच हो सकती है, जिसमें बीमाकृत नुकसान 75 अरब डॉलर होने का अनुमान है। यूसीएलए एंडरसन फोरकास्ट के अर्थशास्त्री झियुन ली और विलियम यू (Economists Zhiyun Li and William Yu) द्वारा लिखित रिपोर्ट में 2025 के लिए काउंटी-स्तरीय सकल घरेलू उत्पाद (county-level GDP) में 0.48 प्रतिशत की हानि का अनुमान लगाया गया है, जो लगभग 4.6 अरब डॉलर है और प्रभावित क्षेत्रों में स्थानीय व्यवसायों एवं कर्मचारियों की कुल वेतन हानि 29.7 करोड़ डॉलर है। रिपोर्ट में कहा गया कि जंगल की आग का पर्याप्त एवं प्रभावी शमन और निवेश के बिना, कैलिफ़ोर्निया वासियों को तेजी से उच्च बीमा प्रीमियम एवं उत्पन्न प्रदूषण के कारण बढ़ते स्वास्थ्य जोखिमों (health risks) का सामना करना पड़ेगा। लॉस एंजिल्स आवास बाजार विशेष रूप से किराये की इकाइयों के लिए तेजी से पहुंच से बाहर हो जाएगा। यूसीएलए एंडरसन स्कूल ऑफ मैनेजमेंट (UCLA Anderson School of Management)की वेबसाइट के अनुसार, यूसीएलए एंडरसन पूर्वानुमान कैलिफोर्निया एवं देश के लिए सबसे व्यापक रूप से देखे जाने वाले और प्रायः उद्धृत आर्थिक दृष्टिकोणों में से एक है। recent visitors 60

Milkipur By-Election Result 2025 : मिल्कीपुर उपचुनाव में तीसरे राउंड की गिनती पूरी, बीजेपी के चंद्रभानु पासवान 10, 170 वोट से आगे

नई दिल्ली दिल्ली चुनाव में अब नतीजे का वक्त आ गया है. सुबह 8 बजे से काउंटिंग शुरू हो गई है. 11 जिलों के 19 केंद्रों पर काउंटिंग चल रही है. शुरुआती रुझान में बीजेपी आगे चल रही है. AAP भी कड़ी टक्कर दे रही है. राजधानी में 5 फरवरी को वोट डाले गए. कुल 60.54 प्रतिशत वोट पड़े थे. दिल्ली में विधानसभा चुनाव के नतीजे की घड़ी आ गई है. वोटों की काउंटिंग चल रही है. शुरुआती रुझान में बीजेपी आगे चल रही है. AAP भी कड़ी टक्कर दे रही है. AAP के कई दिग्गज नेता पीछे चल रहे हैं. दिल्ली में कुल 70 सीटें हैं और बहुमत के लिए 36 सीटें होना जरूरी है. सुबह से हर किसी की निगाहें इस बात पर रहीं कि अरविंद केजरीवाल की अगुवाई वाली आम आदमी पार्टी (AAP) लगातार तीसरी बार जीत हासिल करती है या बीजेपी राजधानी में 27 साल के सत्ता के सूखे को खत्म करेगी. वहीं, पिछले दो चुनावों में एक भी सीट नहीं जीत पाई कांग्रेस को भी इस चुनाव से काफी उम्मीदें हैं.  रुझानों में कांटे की टक्कर रुझानों में बीजेपी और AAP के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिल रही है. अब तक BJP 39 सीटों पर आगे है. जबकि AAP भी 30 सीटों पर आगे है. एक सीट पर कांग्रेस आगे है. ओखला में बीजेपी आगे नजफगढ़ से बीजेपी 4383 वोटों से आगे है. मटियाला सीट से बीजेपी 2862 वोटों से आगे है. उत्तमनगर से बीजेपी 2223 वोटों से आगे है. द्वारका सीट से बीजेपी 1257 वोटों से आगे है. बिजवासन सीट और पालम सीट पर भी बीजेपी आगे है. पटेलनगर में बीजेपी के राजकुमार आनंद आगे हैं. ओखला सीट से लगातार बीजेपी आगे है. पहले राउंड की गिनती पूरी हो गई है.  ग्रेटर कैलाश में सौरभ भारद्वाज पीछे ग्रेटर कैलाश से AAP के सौरभ भारद्वाज पीछे चल रहे हैं. बीजेपी की शिखा राय आगे हैं. मटियाला सीट से बीजेपी के संदीप सहरावत आगे हैं. कोंडली सीट से बीजेपी उम्मीदवार प्रियंका गौतम आगे हैं. मादीपुर सीट से बीजेपी के कैलाश गंगवाल आगे हैं. AAP की उम्मीदवार राखी बिरला पीछे हैं. रुझानों में बीजेपी की लहर देखी जा रही है. बीजेपी 45 और AAP 24 सीटों पर बढ़त बनाए है. एक सीट पर कांग्रेस आगे है.  जंगपुरा में सिसोदिया भी आगे जंगपुरा सीट पर भी उलटफेर हुआ है. AAP के मनीष सिसोदिया दो राउंड की गिनती के बाद 1800 वोटों से बढ़त बनाई है. हालांकि, आतिशी अभी भी पीछे चल रही हैं.  उत्तर प्रदेश की मिल्कीपुर विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव के नतीजे आज शनिवार को जारी होंगे. मतगणना सुबह 8 बजे से शुरू हो गई है. सपा नेता अवधेश प्रसाद के फैजाबाद से लोकसभा चुनाव जीतने के बाद खाली हुई इस सीट पर बुधवार को उपचुनाव हुआ. समाजवादी पार्टी और बीजेपी के बीच यहां मुख्य मुकाबला है. ये उपचुनाव समाजवादी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी के बीच प्रतिष्ठा की लड़ाई बन गया है. कारण, यह सीट राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण अयोध्या जिले का हिस्सा है. दरअसल, 2024 में फैजाबाद लोकसभा सीट जीतने के बाद सपा नेता अवधेश प्रसाद के मिल्कीपुर सीट खाली करने के बाद यहां उपचुनाव की जरूरत पड़ी है. अब, जबकि सपा इस सीट को बरकरार रखने की कोशिश कर रही है, भाजपा इस चुनाव को फैजाबाद में अपनी हार का बदला लेने के अवसर के रूप में देख रही है. कारण, 2022 के यूपी विधानसभा चुनाव में मिल्कीपुर अयोध्या जिले की एकमात्र विधानसभा सीट थी, जिसे भाजपा हार गई थी. बुधवार को हुए उपचुनाव में पड़े 65 फीसदी वोट मिल्कीपुर सीट पर हुए बुधवार को हुए उपचुनाव में कुल 3.70 लाख मतदाताओं में से 65 प्रतिशत से अधिक ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया, जो 2022 के विधानसभा चुनावों में दर्ज किए गए मतदान से अधिक है. चुनाव आयोग के मुताबिक, मतदान पूरा होने तक 65.35 फीसदी वोट पड़े. 2022 के विधानसभा चुनावों में इस सीट पर वोटिंग प्रतिशत 60.23 था. पांचवें राउंड के बाद- BJP- 27115 वोट सपा- 12850 वोट आजाद समाज पार्टी- 835 वोट अन्य- 1172 वोट कुल- 41972 अब बीजेपी 14220 वोटों से आगे मिल्कीपुर चुनाव में बीजेपी 14220 वोटों से आगे. बीजेपी के चंद्रभानु पासवान सपा के अजीत प्रसाद से पांचवें राउंड में भी आगे. आजाद समाज पार्टी को 549 वोट मिले  अभी तक की काउंटिंग में बीजेपी को 17123, सपा को 7000 जबकि, आजाद समाज पार्टी को 549 वोट मिले हैं. कुल 25407 वोटों की गिनती हुई है.      चौथे राउंड में भी बीजेपी आगे मिल्कीपुर चुनाव में बीजेपी 11635 वोटों से आगे. बीजेपी के चंद्रभानु पासवान सपा के अजीत प्रसाद से चौथे राउंड में भी आगे चल रहे हैं.   recent visitors 47

बुंदेलखंड क्षेत्र में पानी बचाने वाली जल सहेलियां निकाल रहीं 300 किमी की यात्रा

छतरपुर 'बुंदेलखंड' के नाम के साथ ही सूखा ग्रस्त इलाका, पलायन और बेरोजगारी जैसी समस्याएं जुड़ी हुई हैं। पानी के संकट से जूझते इस पूरे इलाके को पानीदार बनाने के लिए देश की पहली नदी जोड़ो परियोजना केन-बेतवा रिवर लिंक प्रोजेक्ट की आधारशिला प्रधानमंत्री मोदी ने किया। चंदेल कालीन तालाबों को पुनर्जीवित करने में मप्र का पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, जल संरक्षण पर काम करने वाली सामाजिक संस्थाओं (NGO), और पब्लिक की मदद से काम करेगी। जल संरक्षण पर काम कर रही गैर सरकारी संस्थाओं ने ओरछा में वर्कशॉप आयोजित की। इस कार्यशाला में जल पुरुष राजेंद्र सिंह, मप्र के पंचायत मंत्री प्रहलाद पटेल और जल संरक्षण पर काम करने वाले संजय सिंह तमाम एक्सपर्ट्स ने मंथन किया। चंदेल राजाओं ने बनवाए बांध, तालाब और बावड़ियां बुंदेलखंड मप्र और उप्र के 7-7 जिलों में बंटा हुआ है। इस इलाके में 9वीं से 16वीं शताब्दी तक चंदेलों का शासन रहा है। पानी की कमी से यह इलाका हमेशा जूझता रहा है। चंदेल राजाओं ने बरसाती पानी को सहेजने के लिए 2 पहाड़ों के बीच पत्थर और मिट्‌टी का प्रयोग करते हुए बांधों का निर्माण कराया। पहाड़ियों के तराई इलाके में बरसाती पानी इकट्‌ठा हो सके। इन तालाबों को बनाने में ऐसी तकनीक का प्रयोग किया गया। जिसमें एक तालाब के भरने पर वेस्टवियर के जरिए उसके तराई इलाके का तालाब भर सके। इन तालाबों के साथ ही बावड़ियां भी बनवाई गई। ताकि तालाबों और बांधों के किनारे की बावड़ियां भर सकें। पंचायत मंत्री बोले- तालाबों का कैचमेंट बढ़ाएंगे पंचायत मंत्री प्रहलाद पटेल ने  कहा- लगातार चर्चाएं होती हैं वास्तविक स्थिति पर हमें जरुरी विचार करना पडे़गा। शुरू से यह बातें होती रहीं हैं। जल पुरुष राजेंद्र सिंह और जो संस्थाएं जल के क्षेत्र में काम करती हैं। उनके साथ विमर्श करके हमें रास्ता निकालना पडे़गा। चूंकि, मैं उस क्षेत्र का जनप्रतिनिधि रहा हूं तो मैंने देखा कि कैचमेंट की समस्या बढ़ी है। चाहे तालाबों में अतिक्रमण हो, या फिर सीसी रोड डाल दिया तो आने वाला बरसाती पानी अवरुद्ध हो गया। अगर पुलिया होती तो शायद पानी उसमें जाता। ये प्रयास इन कमियों को ठीक करने के लिए हैं। पंचायत मंत्री बोले- तालाबों का कैचमेंट बढ़ाएंगे पंचायत मंत्री प्रहलाद पटेल ने  कहा- लगातार चर्चाएं होती हैं वास्तविक स्थिति पर हमें जरुरी विचार करना पडे़गा। शुरू से यह बातें होती रहीं हैं। जल पुरुष राजेंद्र सिंह और जो संस्थाएं जल के क्षेत्र में काम करती हैं। उनके साथ विमर्श करके हमें रास्ता निकालना पडे़गा। चूंकि, मैं उस क्षेत्र का जनप्रतिनिधि रहा हूं तो मैंने देखा कि कैचमेंट की समस्या बढ़ी है। चाहे तालाबों में अतिक्रमण हो, या फिर सीसी रोड डाल दिया तो आने वाला बरसाती पानी अवरुद्ध हो गया। अगर पुलिया होती तो शायद पानी उसमें जाता। ये प्रयास इन कमियों को ठीक करने के लिए हैं।। पानी पर काम करना हमारी संवैधानिक जिम्मेदारी मंत्री प्रहलाद पटेल ने कहा- उन तालाबों में डीसिल्टिंग की बहुत ज्यादा जरूरत नहीं हैं। क्योंकि वहां का जो डेटा हमारे पुरखों ने बनाया उसमें कोई नुकसानदेह चीजें नहीं हैं। पानी की आवक को निरंतर करना। अगर कोई अतिक्रमण है तो उनको दूर करना। पानी आने के रास्तों को खोलने के लिए प्रशासनिक जरूरत पड़ती है। ऐसी कोई जानकारियां जो वहां पर काम करने वाले लोग हैं या फिर जो जल के क्षेत्र में काम करने वाले लोग हैं उनके कोई सुझाव हैं। जो भी सुझाव विमर्श में सामने आएंगे उसके लिए सरकार कटिबद्ध है। हमें आने वाली पीढ़ी के लिए पानी पर काम करना ही होगा। ये हमारी नैतिक और संवैधानिक जिम्मेदारी है। पानी के रास्ते में बनी सड़कों पर विभाग बनवाएगा पुलिया मंत्री प्रहलाद पटेल ने कहा- हमें एक बार चिह्नित करना पडे़गा कि हम शुरुआत कहां से करें। दमोह में मैने किया था बेलाताल में एसपी के सामने पुलिया थी, उसे हमने तोड़ दिया था। मुझे लगता है कि कैचमेंट खोलना हमारे नैतिक बल पर निर्भर करता है। प्रशासन की जरूरत तब पडे़गी तब वहां कोई अवरोध पैदा करे। दूसरी बात ये है कि अगर सीसी रोड बना दिया तो वहां पुलिया बनानी पडे़गी। ऐसे निर्माण की गारंटी हम जैसे मंत्रालय के लोग ही ले सकते हैं। आप बरसात के पहले पुलिया बना दो, अन्यथा वो फिर समस्या पैदा होगी। पानी आएगा तो रास्ता रुक जाएगा। हमारी मानवीय भूलों के कारण जो अवरोध पैदा हुए हैं। उसमें किसी बदलाव की जरूरत पड़ती है। तो फिर उसे हम अपने विभाग की प्राथमिकता में शामिल करेंगे। पानी बचाने वाली जल सहेलियां निकाल रहीं 300 किमी की यात्रा बुंदेलखंड क्षेत्र में जल संरक्षण पर काम करने वाली जल सहेलियों (महिलाओं के समूह) ने 2 फरवरी को ओरछा से यात्रा शुरू की है। जल सहेलियों की यह 18 दिवसीय यात्रा ओरछा के कंचना घाट से शुरू होकर छतरपुर के जटाशंकर धाम में पूरी होगी। इस यात्रा के दौरान जल सहेलियां गांव-गांव जाकर जल संरक्षण का संदेश देंगी और लोगों को जल प्रबंधन के महत्व को समझाएंगी। recent visitors 60

मोहन सरकार 25 साल से ज्यादा उम्र की अविवाहित पुत्री, विधवा, परित्याक्ता को परिवार पेंशन का लाभ देगी

भोपाल मध्य प्रदेश सरकार जल्द ही कर्मचारियों और पेंशनधारकों के लिए नए नियम लागू करेगी। ये नियम पेंशन और छुट्टियों से जुड़े हैं। अविवाहित, विधवा और परित्यक्ता बेटियों को भी परिवार पेंशन मिलेगी। रिटायरमेंट के बाद कर्मचारियों को अब सेवा पुस्तिका नहीं दी जाएगी। छुट्टियों के नियमों में भी बदलाव होंगे। वित्त विभाग ने इन बदलावों का ड्राफ्ट तैयार कर लिया है। इन नियमों के तहत 25 साल से ज्यादा उम्र की अविवाहित, विधवा या परित्यक्ता बेटियों को परिवार पेंशन का लाभ मिलेगा। रिटायरमेंट के बाद कर्मचारियों को सेवा पुस्तिका नहीं दी जाएगी क्योंकि अब सारा रिकॉर्ड ऑनलाइन उपलब्ध है। छुट्टियों के नियमों में भी बदलाव किए जा रहे हैं। नए कर्मचारियों को छुट्टियों के लिए ज्यादा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। लंबे समय से हो रही थी बदलावों की मांग वित्त विभाग की एक समिति ने इन नए नियमों का प्रारूप तैयार किया है। पेंशनर्स एसोसिएशन लंबे समय से पेंशन नियमों में बदलाव की मांग कर रही थी। सरकार ने उनकी मांगों को सुनते हुए यह कदम उठाया है। इस समिति में वित्त विभाग के सदस्यों के अलावा, सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव, पेंशन संचालनालय के संचालक और रेरा के वित्तीय सलाहकार मिलिंद वाईकर भी शामिल थे। समिति की बैठक में पेंशन नियमों में कई अहम बदलावों पर सहमति बनी। पेंशनर्स की मांगों को सरकार ने मांगा पेंशनर्स एसोसिएशन द्वारा लंबे समय से पेंशन नियमों में सुधार करने और नए पेंशन नियम लागू करने की मांग की जा रही थी. इसके लिए राज्य सरकार ने वित्त विभाग की एक समिति गठित की थी. इस समिति में सदस्यों के अलावा सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव, पेंशन संचालनालय के संचालक, रेरा के वित्तीय सलाहकार मिलिंद वाईकर को रखा गया है. समिति की बैठक में नए पेंशन नियमों में कई महत्वपूर्ण बदलाव करने का निर्णय लिया गया. बैठक में तय किया गया है कि परिवार पेंशन में न्यूनतम आयु सीमा के नियमों को बदला जा सकता है. मोहन सरकार ला रही नए पेंशन नियम – राज्य सरकार कर्मचारियों के अवकाश नियमों में करीबन 50 साल बाद बदलाव करने जा रही है. इसके तहत भर्ती होने वाले नए कर्मचारियों को छुट्टियों के लिए ज्यादा इंतजार नहीं करना होगा. नए अवकाश नियमों को लेकर अधिकारियों ने चर्चा की है. – इसमें प्रावधान किया जा रहा है कि 25 साल से ज्यादा उम्र की अविवाहित पुत्री, विधवा, परित्यक्ता को भी परिवार पेंशन का लाभ दिया जा सकता है. – वहीं अभी तक पेंशन प्रकरण के साथ सेवा पुस्तिका भी भेजी जाती थी, लेकिन अब इसे खत्म करने का निर्णय लिया गया है. क्योंकि अब ऑनलाइन व्यवस्था होने के चलते पूरा रिकॉर्ड ऑनलाइन उपलब्ध है, इसलिए इसे अलग से भेजने की जरूरत ही नहीं है. – यदि पेंशनर्स पर आश्रित की दिव्यांगता 25 वर्ष की आयु के पहले होती है तो ही उसे परिवार पेंशन की आजीवन पात्रता का लाभ मिलेगा. इस आयु सीमा के बाद दिव्यांग होने पर उसे परिवार पेंशन का लाभ नहीं दिया जाएगा. – वसूली के मामलों में पेंशन से राशि उसी स्थिति में काटी जा सकेगी, जिसमें वसूली की सूचना रिटायरमेंट के पहले दी जा चुकी हो. इस तरह के मामलों में कोर्ट भी कई बार निर्णय दे चुकी है. सरकार कर्मचारियों के अवकाश नियमों में लगभग 50 साल बाद बदलाव करने जा रही है। नए नियमों के तहत नए कर्मचारियों को छुट्टियों के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। अधिकारियों ने नए अवकाश नियमों पर विस्तार से चर्चा की है। अब सेवा पुस्तिका की ज़रूरत नहीं 25 साल से ज्यादा उम्र की अविवाहित, विधवा या परित्यक्ता बेटियों को परिवार पेंशन देने का प्रावधान किया जा रहा है। अब तक पेंशन प्रकरण के साथ सेवा पुस्तिका भी भेजी जाती थी, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। चूंकि सारा रिकॉर्ड ऑनलाइन उपलब्ध है, इसलिए सेवा पुस्तिका भेजने की ज़रूरत नहीं है। दिव्यांगता पेंशन पर बड़ा अपडेट अगर किसी पेंशनधारी के आश्रित की दिव्यांगता 25 साल की उम्र से पहले होती है, तो उसे ही आजीवन परिवार पेंशन मिलेगी। इस उम्र के बाद दिव्यांग होने पर परिवार पेंशन का लाभ नहीं मिलेगा। वसूली के मामलों में पेंशन से राशि तभी काटी जा सकेगी, जब वसूली की सूचना रिटायरमेंट से पहले दी गई हो। कोर्ट भी इस तरह के मामलों में कई बार फैसला दे चुकी है। जल्द लागू होंगे नए फैसले नए नियमों को जल्द ही लागू किया जाएगा। समिति द्वारा तैयार किए गए प्रारूप पर एक बार फिर उच्च अधिकारियों के साथ चर्चा होगी। इसके बाद इसे मुख्य सचिव अनुराग जैन के सामने पेश किया जाएगा। उनकी मंजूरी के बाद ही नए नियम लागू होंगे। केंद्र सरकार ने पेंशन और अवकाश नियमों को लेकर कई फैसले लिए हैं, लेकिन मध्य प्रदेश में अभी तक इनके आधार पर संशोधन नहीं किए गए थे। recent visitors 73

फ्रीलांसर, डिलीवरी ब्वॉय और कैब ड्राइवर्स जैसे गिग वर्कर्स को भी अब मिलेगी पेंशन! बजट में हुआ बड़ा ऐलान

नई दिल्ली बीते एक फरवरी को पेश किए गए आम बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने फ्रीलांसर, डिलीवरी ब्वॉय और कैब ड्राइवर्स जैसे गिग वर्कर्स के लिए एक बड़ा ऐलान किया। इसके तहत गिग वर्कर्स को हेल्थ बेनिफिट समेत कई बड़ी सुविधाएं दी जाएंगी। इसकी प्रक्रिया अब शुरू कर दी गई है। दरअसल, लेबर मिनिस्ट्री ने कहा है कि जल्द ही ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से जुड़े एक करोड़ गिग श्रमिकों के लिए पेंशन योजना लाने को केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी मांगेगा। एक आधिकारिक सूत्र ने यह जानकारी देते हुए कहा कि इसके तहत हर लेनदेन से हुई आय से सामाजिक सुरक्षा योजना में योगदान दिया जाएगा। क्या है प्लान  कहा कि श्रम मंत्रालय एक ऐसी व्यवस्था पर काम कर रहा है, जिसके तहत जोमैटो, स्विगी के अलावा ओला, उबर जैसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म इन श्रमिकों की आय पर हर लेनदेन पर प्रतिशत के रूप में सामाजिक सुरक्षा अंशदान काट लेंगे। सूत्र के मुताबिक इस योजना के तहत श्रमिकों को रिटायरमेंट के समय दो विकल्प दिए जा सकते हैं, जब उनकी पेंशन तय हो जाएगी। वे जमा पर ब्याज को पेंशन के रूप में निकाल सकते हैं या संचित धन को निर्धारित अवधि के लिए बराबर किस्तों में विभाजित कर सकते हैं। हालांकि, सूत्र ने कहा कि सामाजिक सुरक्षा योजना के लिए योगदान की जाने वाली राशि अभी तय नहीं की गई है। गिग श्रमिक एक साथ दो या अधिक प्लेटफॉर्म के लिए काम कर सकते हैं। बजट में हुआ बड़ा ऐलान वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने बजट भाषण में घोषणा की थी कि सरकार ई-श्रम प्लेटफॉर्म पर गिग कर्मचारियों के लिए पहचान पत्र और रजिस्ट्रेशन की व्यवस्था करेगी। साथ ही उन्हें पीएम जन आरोग्य योजना के तहत स्वास्थ्य सेवा प्रदान की जाएगी। बता दें कि ई-कॉमर्स कंपनियों के लिए डिलिवरी सर्विसेज प्रोवाइड करने वाले कर्मचारी आदि ‘गिग’ कर्मियों की श्रेणी में आते हैं। व्यव सचिव ने कही थी ये बात बीते दिनों व्यय सचिव मनोज गोविल ने कहा कि श्रम मंत्रालय और संबंधित अन्य मंत्रालयों के साथ परामर्श कर योजना के मापदंडों तथा विवरणों पर काम किया जा रहा है। गोविल ने कहा कि ‘गिग’ श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा योजना या तो 100 प्रतिशत केंद्रीय क्षेत्र की योजना हो सकती है या केंद्र प्रायोजित योजना हो सकती है, जहां लागत केंद्र व राज्यों के बीच 60:40 के अनुपात में साझा की जाएगी। recent visitors 75

उज्जैन सिंहस्थ के दौरान रेलवे के सैटेलाइट स्टेशन बनाए जाएंगे, 75 प्रतिशत भीड़ दूसरे स्टेशनों से आ-जा सकेगी

 भोपाल  प्रयागराज की तरह उज्जैन सिंहस्थ के दौरान भी रेलवे के सैटेलाइट स्टेशन बनाए जाएंगे। तीन से चार स्टेशन बनाने की रूपरेखा बनी है। इससे मुख्य स्टेशन में आने वाली लगभग 75 प्रतिशत भीड़ दूसरे स्टेशनों से आ-जा सकेगी। इसका लाभ यह होगा कि स्टेशन और शहर में एक साथ भीड़ नहीं पहुंचेगी। प्रयागराज कुंभ में यह प्रयोग सफल रहा है। मप्र पुलिस के अधिकारियों की टीम ने कुंभ में जाकर सैटेलाइट स्टेशन सहित अन्य व्यवस्था देखी थी। अब उसी के अनुरूप उज्जैन सिंहस्थ के लिए तैयारी की जा रही है। सैटेलाइट रेलवे स्टेशन के लिए विस्तार से हुई चर्चा पिछले दिनों अपर मुख्य सचिव राजेश राजौरा ने भी उज्जैन में सिंहस्थ की तैयारियों को लेकर बैठक ली थी। इसमें सैटेलाइट रेलवे स्टेशन और बस स्टाप कहां-कहां बनाए जा सकते हैं, इस पर भी विस्तार से चर्चा हुई थी। सिंहस्थ के दौरान लगभग तीन करोड़ लोगों के आने की संभावना है। उज्जैन के आसपास पांच से सात किमी के क्षेत्र में सैटेलाइट स्टेशन बनाए जाएंगे। इसके अतिरिक्त विशेष ट्रेन चलाने की भी तैयारी है। सुरक्षा में लगेंगे 42 हजार पुलिसकर्मी सिंहस्थ में सुरक्षा के लिए दो पाली में लगभग 42 हजार पुलिसकर्मी लगाए जाएंगे। पुलिस मुख्यालय के अधिकारियों ने बताया कि जिला पुलिस बल के अतिरिक्त होम गार्ड्स के जवान भी लगाए जाएंगे। आवश्यकता होने पर केंद्र से अर्धसैनिक बल की सहायता ली जाएगी। सिंहस्थ के दौरान सुरक्षा के लिए डोर फ्रेम मेटल डिटेक्टर सहित अन्य सामग्री की खरीदी के लिए पुलिस मुख्यालय से प्रस्ताव मांगा गया है। छह माह के भीतर खरीदी की प्रक्रिया प्रारंभ हो जाएगी। recent visitors 56

एमपी बीजेपी अध्यक्ष के लिए पार्टी अपने पुराने और आजमाए हुए फॉर्मूले पर ही भरोसा करेगी

भोपाल मध्यप्रदेश भारतीय जनता पार्टी में नए प्रदेश अध्यक्ष का नाम तय होना है. जिसके लिए प्रक्रिया तो जारी है, लेकिन सबसे बड़ा सवाल लगातार हो रही देरी से उठ रहा है. क्योंकि काफी मशक्कत के बाद बीजेपी ने जिला अध्यक्षों की घोषणा तो कर दी लेकिन प्रदेश अध्यक्ष के चुनाव में देरी क्यों हो रही है. हालांकि, बीजेपी का कहना है कि फिलहाल पार्टी की प्राथमिकता दिल्ली विधानसभा चुनाव है, जिसके तुरंत बाद प्रदेश भाजपा अध्यक्ष चुन लिया जाएगा. अब सवाल यह है कि पार्टी इस बार अध्यक्ष पद के लिए क्या फॉर्मूला तय करती है? बीजेपी से जुड़े सूत्रों की मानें तो एमपी बीजेपी अध्यक्ष के लिए पार्टी अपने पुराने और आजमाए हुए फॉर्मूले पर ही भरोसा करने वाली है. क्या है पुराना फॉर्मूला? आपको बता दें कि मध्यप्रदेश में बीजेपी ने साल 2003 के विधानसभा चुनाव में 10 सालों की कांग्रेस सरकार को हटाकर प्रचंड बहुमत के साथ सरकार बनाई थी. तब जिस फॉर्मूले पर भारतीय जनता पार्टी ने काम किया, उसने बीजेपी को मध्यप्रदेश में बेहद मजबूत स्थिति में लाकर खड़ा कर दिया. यह फॉर्मूला था ओबीसी मुख्यमंत्री और सवर्ण प्रदेश अध्यक्ष का. 2003 में उमा भारती को मध्यप्रदेश का मुख्यमंत्री बनाया गया था जो ओबीसी वर्ग से आती हैं. उमा भारती के बाद बाबूलाल गौर, शिवराज सिंह चौहान और अब मोहन यादव एमपी के मुख्यमंत्री बने और यह चारों ओबीसी वर्ग से आते हैं. वहीं, इन सभी मुख्यमंत्रियों के कार्यकाल में बीजेपी के संगठन की जिम्मेदारी यानी प्रदेश अध्यक्ष का जिम्मा कैलाश जोशी, नरेंद्र सिंह तोमर, प्रभात झा, नंदकुमार सिंह चौहान, राकेश सिंह और वीडी शर्मा को मिला जो सभी सवर्ण वर्ग से आते हैं.  जातिगत फैक्टर हो सकता है टर्निंग पॉइंट  ओबीसी सीएम वाली सरकार और सामान्य वर्ग वाला प्रदेश अध्यक्ष बनाकर 2003 से बीजेपी ने सत्ता और संगठन में जो संतुलन बनाया, उसने एमपी बीजेपी को देश का सबसे मजबूत संगठन बना दिया और माना जा रहा है कि बीजेपी इसी फॉर्मूले पर इस बार भी भरोसा करने जा रही है. ऐसे में यह जानना जरूरी है कि जातिगत समीकरण किस वर्ग के लिए सटीक बैठने की संभावना है.  ब्राह्मण बीजेपी के मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा जो ब्राह्मण वर्ग से आते हैं, उनका कार्यकाल पूरा हो चुका है. सियासी गलियारों की मानें तो वीडी शर्मा को कोई नई जिम्मेदारी देकर एमपी में वीडी शर्मा की जगह नया प्रदेश अध्यक्ष बनाया जा सकता है. ऐसे में ब्राह्मण वर्ग से जो नाम रेस में हैं- उनमें पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा, डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ला और विधायक रामेश्वर शर्मा का नाम सामने आ रहा है. जातिगत समीकरणों की बात करें तो फिलहाल मोहन कैबिनेट में सबसे कम भागीदारी ब्राह्मण वर्ग की है, जिसमें सिर्फ दो मंत्री शामिल हैं. राजेंद्र शुक्ला और राकेश शुक्ला. विधानसभा चुनाव के नतीजे आए थे तो बीजेपी के 27 ब्राह्मण विधायक चुनाव जीते थे लेकिन सरकार में भागीदारी के मामले में यह वर्ग पीछे रह गया. अब जब 2027 में उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने हैं तो पड़ोसी राज्य में ब्राह्मण को एक बार फिर से प्रदेश अध्यक्ष बनाकर बीजेपी एमपी और यूपी के सवर्णों को खुश करने की कोशिश कर सकती है. दूसरी तरफ, सरकार में ब्राह्मणों की कम भागीदारी से सवर्णों की नाराजगी का जो डर बीजेपी की सता रहा है, उससे भी उसे छुटकारा मिल सकता है.  क्षत्रिय 2003 के बाद से लंबे समय तक प्रदेश अध्यक्ष बनने की जिम्मेदारी एमपी बीजेपी के क्षत्रिय वर्ग से आने वाले नेताओं को ही मिली है. नरेंद्र सिंह तोमर, नंदकुमार सिंह चौहान और राकेश सिंह. वर्तमान में मोहन कैबिनेट की बात करें तो इसमें 4 मंत्री क्षत्रिय वर्ग से आते हैं- जिनमें राकेश सिंह, उदय प्रताप सिंह, गोविंद सिंह राजपूत और प्रद्युम्न सिंह तोमर शामिल हैं. वहीं, विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर हैं जो क्षत्रिय वर्ग से आते हैं. पड़ोसी राज्य छत्तीसगढ़ में बीजेपी ने किरण देव सिंह को प्रदेश अध्यक्ष बनाकर एमपी में संदेश लगभग साफ कर दिया है कि यहां इस वर्ग से प्रदेश अध्यक्ष नहीं बनेगा.  वैश्य बीते कुछ दिनों में जो नाम तेजी से प्रदेश अध्यक्ष की दावेदारी के रूप में उभरा है- उनमें हेमंत खंडेलवाल का नाम है जो वैश्य समाज से आते हैं. मोहन कैबिनेट में फिलहाल 2 वैश्य वर्ग से आने वाले मंत्री हैं- कैलाश विजयवर्गीय और चेतन कश्यप. ऐसे में देखना यह है कि क्या सीएम की पसंद कहे जा रहे हेमंत खंडेलवाल को जिम्मेदारी मिलती है या नहीं? अनुसूचित जाति मोहन कैबिनेट में अनुसूचित जाति के मंत्रियों की संख्या 4 है और एक डिप्टी सीएम हैं- जगदीश देवड़ा. जाहिर है सरकार में इस वर्ग की भागीदारी बेहतर है, इसलिए 2003 फॉर्मूले में यह वर्ग फिट नहीं बैठता. हालांकि, जिस तरह से अंबेडकर के नाम पर इन दिनों सियासी माहौल बना हुआ है, माना जा रहा है कि बीजेपी एससी वर्ग को अपने पाले में करने के लिए किसी एससी वर्ग के नेता को प्रदेश अध्यक्ष बनाने का दांव चल सकती है. अगर ऐसा होता है तो लाल सिंह आर्य का नाम सबसे ऊपर आ जाएगा जो बीजेपी एससी प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं.  ओबीसी मध्यप्रदेश में 2003 के बाद से ही बीजेपी ने ओबीसी वर्ग से ही मुख्यमंत्री बनाया है और वर्तमान में ओबीसी वर्ग से आने वाले मोहन यादव सीएम हैं. वहीं, दूसरी तरफ उनकी कैबिनेट में 8 से ज्यादा मंत्री ओबीसी वर्ग से आते हैं. दूसरी तरफ, 2003 के फॉर्मूले को देखें तो ओबीसी सीएम और सामान्य वर्ग से प्रदेश अध्यक्ष बनाने का नियम रहा है, ऐसे में अगला प्रदेश अध्यक्ष ओबीसी वर्ग से बनने के आसार न के बराबर हैं.  अनुसूचित जनजाति वर्तमान में मोहन कैबिनेट में अनुसूचित जनजाति वर्ग से 5 मंत्री बने हुए हैं. एमपी में 47 एसटी सीटें हैं, जबकि दो दर्जन से ज्यादा सीटों पर अनुसूचित जाति ही हार या जीत का फैसला करती है. जाहिर है यह एक बड़ा वोट बैंक है और इसे साधने के लिए बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष के लिए एसटी चेहरे पर भी दांव चल सकती है. अगर ऐसा होता है तो सुमेर सिंह सोलंकी, दुर्गादास उइके (मोदी कैबिनेट में मंत्री)और गजेंद्र पटेल का नाम ऊपर आ सकता है.  जातिगत समीकरण और अनुभव को दी जाएगी तवज्जो मध्यप्रदेश बीजेपी … Read more