इंदौर में मास्टर प्लान की 23 सड़कें बनेगी, 8 पर पहले फोकस

इंदौर  मध्यप्रदेश के इंदौर शहर में निगमायुक्त शिवम वर्मा ने स्मार्ट सिटी कार्यालय में मास्टर प्लान के पहले चरण में बनने वाली 8 सड़कों के निर्माण कार्य की समीक्षा की। इस दौरान अपर आयुक्त अभय राजनगांवकर, अधीक्षण यंत्री डीआर लोधी मौजूद रहे। वर्मा ने बताया कि मास्टर प्लान के तहत 23 सड़कों का निर्माण प्रस्तावित है।  बिचौली हप्सी से भूरी टेकरी होते हुए नायता मुंडला तक का कार्य जारी है। प्रथम चरण में 8 सड़कों के लिए सेंट्रल लाइन डालने, नोटिस जारी करने संबंधी कार्य इस सप्ताह से शुरू कर दिए जाएंगे। इसके अलावा देवगुराडिया स्थित 500 टीडीपी बायोमिथेन प्लांट की क्षमता बढ़ाकर 800 टीडीपी करने, प्लांट के लिए अतिरिक्त भूमि उपलब्ध कराने, इस प्लांट के अत्याधुनिकरण करने, मुख्य मार्गों की सफाई के लिए रोड स्वीपिंग मशीनें खरीदने को लेकर चर्चा हुई। 450 करोड़ रुपये खर्च होंगे महापौर ने बताया कि इन सड़कों के निर्माण पर करीब 450 करोड़ रुपये खर्च होंगे। यह पैसा केंद्र सरकार ने पहले ही इंदौर नगर निगम के खाते में ट्रांसफर कर दिया है। हमने केंद्र सरकार से 14 अन्य सड़कों के लिए भी 400 करोड़ रुपये जारी करने की मांग की है। हम इसका प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजेंगे। इन 8 सड़कों का होगा काम -सुभाष मार्ग (गोल मंदिर से रामबाग पुल तक): लंबाई 1300 मीटर, चौड़ाई 30 मीटर। -लिंक रोड (एमआर-10 से एमआर-12 तक): लंबाई 1800 मीटर, चौड़ाई 30 मीटर। -एमआर-5 (बड़ा बांगड़दा से पीएमएवाय मल्टी तक): लंबाई 1700 मीटर, चौड़ाई 24 मीटर। -भमोरी चौराहे से एमआर-10 व राजशाही गार्डन से होटल वॉच तक: लंबाई 1100 मीटर, चौड़ाई 30 मीटर। -वीर सावरकर प्रतिमा से अटल गेट तक: लंबाई 1310 मीटर, चौड़ाई 18 मीटर। एडवांस एकेडमी से रिंग रोड तक: लंबाई 3650 मीटर, चौड़ाई 30 मीटर। जमजम चौराहे से स्टार चौराहा तक: लंबाई 1920 मीटर, चौड़ाई 30 मीटर। खजराना मंदिर द्वार से जमजम चौराहा तक: लंबाई 1120 मीटर, चौड़ाई 18 मीटर। बायोमिथेन प्लांट की क्षमता बढ़ेगी, अतिरिक्त जमीन भी देंगे बैठक में एशिया के सबसे बड़े 500 टीडीपी क्षमता वाले बायोमिथेन प्लांट की क्षमता बढ़ाकर 800 टीडीपी करने और इस प्लांट को अत्याधुनिक उपकरणों से लैस करने, प्लांट के लिए अतिरिक्त जमीन देने के प्रस्ताव को स्वीकृति दी गई। 24 मीटर या इससे चौड़ी सड़क पर बेच सकेंगे टीडीआर महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने बताया कि बैठक में टीडीआर सर्टिफिकेट पोर्टल के माध्यम से जारी करने के प्रस्ताव को स्वीकृति दी गई। मास्टर प्लान की 23 सड़कों सहित अन्य सड़कें जहां नगर निगम ने चौड़ीकरण के लिए निजी जमीन ली है, वहां जमीन मालिकों को ट्रांसफरेबल डेवलमेंट राइट्स (टीडीआर) सर्टिफिटेक जारी किए जाएंगे। recent visitors 50

इंदौर के रेल प्रोजेक्ट के लिए निश्चित राशि रखने के बजाय जैसे-जैसे काम होते जाएगा, भुगतान भी लगातार किया जाएगा

इंदौर  इंदौर रेलवे स्टेशन के दिन फिरेंगे। केन्द्रीय बजट में 480 करोड रुपए रेलवे स्टेशन के री-डेवलेपमेंट के लिए मिलेंगे। पिछले साल के मुकाबले ज्यादा राशि इस बार मिली है। बीते साल इंदौर के खाते में 2990 करोड की राशि थी।  सांसद शंकर लालवानी ने दिल्ली में रेलमंत्री अश्विनी वैष्णव से मुलाकात की, जिसमें बताया गया कि इंदौर के लिए अभी तक का सर्वाधिक 5200 करोड़(Rail Budget in MP) की राशि का प्रावधान किया गया है। इस बार प्रोजेक्ट के लिए निश्चित राशि रखने के बजाय जैसे-जैसे काम होते जाएगा, भुगतान भी लगातार किया जाएगा। इंदौर-खंडवा गेज कन्वर्शन, इंदौर-दाहोद, इंदौर-बुधनी के साथ-साथ इंदौर-मनमाड़ नई लाइन में बजट की कमी नहीं आएगी। इंदौर-बुधनी-जबलपुर प्रोजेक्ट: इंदौर-बुधनी नई रेल लाइन प्रोजेक्ट 2018 में स्वीकृत हुआ था। इस लाइन के लिए 1600 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण होना है। जल्द शुरू होगा काम मुख्य स्टेशन के री-डेवलेपमेंट की डेढ़ साल पहले योजना बनी थी। इसके लिए बजट(Rail Budget in MP) में 480 करोड़ रुपए शामिल किए गए हैं। निर्माण के लिए टेंडर भी फाइनल भी हो गए है। एक माह में काम शुरू हो जाएगा। मुख्य बिल्डिंग सात मंजिला बनाई जाएगी। स्टेशन पर आने वाले 50 साल के अनुरूप व्यवस्था जुटाई जाएगी। एयरपोर्ट की तर्ज पर स्टेशन का निर्माण होगा। इन पर नजर इंदौर-मनमाड़ प्रोजेक्ट : इंदौर-मनमाड़ रेल प्रोजेक्ट वर्ष 2017 में स्वीकृत हुआ। हाल ही में इस केंद्रीय केबिनेट से प्रोजेक्ट के लिए अनुमति मिली है। मप्र के हिस्से में डीपीआर का काम हो चुका है। दाहोद-इंदौर रेल प्रोजेक्ट : वर्ष-2007 में दाहोद-इंदौर रेल प्रोजेक्ट स्वीकृत किया गया था। इंदौर-दाहोद रेल लाइन में सबसे महत्वपूर्ण टीही टनल में इन दिनों तेजी से काम चल रहा है। रतलाम-महू-खंडवा-अकोला प्रोजेक्ट रतलाम-महू-खंडवा-अकोला ब्रॉडगेज प्रोजेक्ट को 2008 में विशेष दर्जा मिला। लागत करीब 2 हजार करोड़ के आसपास है। पातालपानी से बलवाड़ा तक डायवर्टेड रेल लाइन के 468.65 करोड़ के टेंडर जारी कर दिए हैं। मध्यप्रदेश को रेल बजट में 14,745 करोड़ रुपए आवंटित मध्यप्रदेश के लिए बड़ी खुशखबरी सामने आई है। जहां रेल बजट 2025-26 घोषित कर दिया गया है। इस बजट में राज्य को 14,745 करोड़ रुपए मिले हैं। जिससे रेल नेटवर्क का विस्तार और आधुनिकीकरण होगा। इसमें 31 नई रेल परियोजनाएं स्वीकृत की गई हैं। जिससे रेल की कनेक्टिविटी बेहतर होगी और यात्रियों को सुविधा मिलेगी। इन स्टेशनों का हो रहा रीडेवलपमेंट रीडेवलपमेंट परियोजनाओं के तहत रानी कमलापति स्टेशन, ग्वालियर, खजुराहो, सतना, इंदौर, बीना और जबलपुर जैसे मुख्य स्टेशनों के रीडेवलपमेंट यानी पुनर्विकास में 1950 करोड़ रुपए की लागत से काम जारी है। 80 स्टेशनों पर खर्च किए जाएंगे 2708 करोड़ रुपए प्रदेश के आमला, अनूपपुर, अशोकनगर, बालाघाट, बनापुरा, बरगवां, ब्योहारी, बेरछा, बैतूल, भिंड, भोपाल, बिजुरी, बीना, गुना, ग्वालियर, हरदा, हरपालपुर, इंदौर जंक्शन, इटारसी जंक्शन, जबलपुर, सतना, जुन्नारदेव, करेली, कटनी जंक्शन, कटनी मुरवारा, कटनी साउथ, ब्यावरा राजगढ़, छिंदवाड़ा, डबरा, दमोह, दतिया, देवास, गाडरवारा, गंजबासौदा, घोड़ाडोंगरी शामिल हैं। जिसमें 2708 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। साथ ही सागर, सीहोर, सिवनी, शहडोल, शाजापुर, श्यामगढ़, श्योपुर कलां, शिवपुरी, श्रीधाम, शुजालपुर, सिहोरा रोड, सिंगरौली, टीकमगढ़, उज्जैन, उमरिया, विदिशा, विक्रमगढ़, आलोट, खाचरोद, खजुराहो जंक्शन, खंडवा, खिरकिया, लक्ष्मीबाई नगर, मैहर, मक्सी जंक्शन, मंडला फोर्ट, मंदसौर, एमसीएस छतरपुर, मेघनगर, मुरैना, मुलताई, नागदा जंक्शन, नैनीपुर जंक्शन, नर्मदापुरम (होशंगाबाद), नरसिंहपुर, नेपनागर, नीमच, ओरछा, पांढुर्णा, पिपरिया, रतलाम, रीवा, रुथियाई, सांची और संत हिरदाराम नगर जैसे स्टेशन शामिल हैं। recent visitors 35

चंबल अंचल के लिए एक बड़ी उपलब्धि, ग्वालियर और शिवपुरी में हीरा मिलने की संभावना: सर्वे

ग्वालियर मध्य प्रदेश में पन्ना जिले की धरती से 'हीरा' निकलता है जो पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है, अब पन्ना के बाद चंबल की धरती भी हीरा उगल सकती है. क्योंकि यहां भी हीरा मिलने की संभावना जताई गई है. जियोलॉजी विभाग के सर्वे में ग्वालियर-शिवपुरी जिले के 421 वर्ग किलोमीटर एरिया में हीरा मिलने की संभवना हैं, अगर ऐसा होता है तो यह ग्वालियर चंबल अंचल के लिए एक बड़ी उपलब्धि होगी. चंबल की मिट्टी अब हीरा उगलेगीं…जी हां, आपने सही सुना है। जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया ने ग्वालियर ओर शिवपुरी जिले के राजस्व, वन और आरक्षित वन भूमि की जानकारी मांगी है। जिसके बाद लगभग 35 लोकेशन के टेंडर होंगे। फिर उसकी नीलामी होगी। दरअसल, पन्ना में हीरा पाया जाता है। यह विंध्य ग्रुप का हिस्सा है। ग्वालियर भी विंध्य ग्रुप के तहत आता है। मिट्टी और पहाड़ों की एक जैसी स्थिति को देखते हुए जीएसआई ने सर्वे किया था। इसमें ग्वालियर और शिवपुरी में हीरा मिलने की संभावना नजर आई है। जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया के तहत इन गांव की पहाड़ियों पर हीरे संभावना है घाटीगांव ब्लॉक: करई, दुर्गसी, बन्हेरी, सेकरा, चुही, बराहना, पटपरी, उम्मेदगढ़, ओबरा, पाटई, मानपुरा, कलवाह, सेमरी, चनगोरा, डागोर, तघई, बडक़ागांव, मोहना, आदि गांव में खनन किया जाएगा भितरवार ब्लॉक: भितरी, गधोटा, मावथा, हरसी, खोर, मुसाहरी, सेबई, जतरथी, रिछारी खुर्द, जखवार, बेलगड़ा, डोंगरपुर, मुधारी, रुअर, तालपुर वीरन, बमोर, रिछारी कला, हुरहुरी, रिठोदन, गाजना, श्याऊ, चिटोली, देवरी कला, कैथोड, धोबट, लोढी, करहिया, बैना। घाटीगांव क्षेत्र के अधिकतर गांव में 100 फीसदी क्षेत्र में खनन को ब्लॉक कर दिया जाएगा। भितरवार के लोढी में 2 फीसदी जगह पर ही खनन ब्लॉक मिलेगा। रिछारी कला में 1 फीसदी जगह पर ब्लॉक मिलेगा। वहीं हीरे की खबर को लेकर ग्रामीण भी काफी खुश नजर आ रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि अगर हीरे की खान यहां पर संचालित होती है तो यहां के लोगों को रोजगार मिलेगा और आमदनी बढ़ेगी। अभी ग्वालियर ओर शिवपुरी में सफेद और लाल पत्थर का खनन हो रहा है। इसके अलावा आयरन की भी खदान आवंटित है। पनिहार के पास नई खदान आवंटित करने की प्रक्रिया चल रही है। इसके साथ ही कांच की खदान डबरा में दी गई हैं। यहां से निकलने वाले खनिज से कांच तैयार किया जा रहा है। वहीं अब हीरा खनन के लिए ब्लॉक दिया जाना है। ऐसे में कहा जा सकता है कि हीरा मिलने पर ग्वालियर की पहचान भी पन्ना की तरह होगी। रोजगार के नए अवसर भी खुलेंगे। ग्वालियर खनिच विभाग ने भी किया सर्वे बता दें कि पन्ना में हीरा पाया जाता है जो विंध्य ग्रुप का हिस्सा है, ग्वालियर भी विंध्य ग्रुप के तहत आता है, मिट्टी और पहाड़ों की एक जैसी स्थिति को देखते हुए जीएसआइ ने सर्वे किया था. इसमें ग्वालियर और शिवपुरी में हीरा मिलने की संभावना नजर आई है, हीरा मिलने पर ग्वालियर की पहचान भी पन्ना की तरह होगी, ग्वालियर के जिला खनिज अधिकारी प्रदीप भूरिया ने बताया कि हीरा खनन के लिए ब्लॉक दिया जाना है. इसके लिए राजस्व, वन और संरक्षित वन की भूमि की जानकारी मांगी गई है. जनाकरी मिलने के बाद भूमि रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी. ग्वालियर-शिवपुरी जिले के इन गांवों में होगा खनन ! घाटीगांव क्षेत्र के अधिकतर गांव में 100 फीसदी क्षेत्र में खनन का ब्लॉक दिया जाएगा, यहां करई, दुर्गसी, बन्हेरी, सेकरा, चुही, बराहना, पटपरी, उम्मेदगढ़, ओबरा, पाटई, मानपुरा, कलवाह, सेमरी, चनगोरा, डागोर, तघई, बडक़ागांव, मोहना, आदि गांव में खनन किया जाएगा, इसके अलावा ग्वालियर के भितरवार ब्लॉक के भितरी, गधोटा, मावथा, हरसी, खोर, मुसाहरी, सेबई, जतरथी, रिछारी खुर्द, जखवार, बेलगड़ा, डोंगरपुर, मुधारी, रुअर, तालपुर वीरन, बमोर, रिछारी कला, हुरहुरी, रिठोदन, गाजना, श्याऊ, चिटोली, देवरी कला, कैथोड, धोबट, लोढी, करहिया, बैना में कुछ फीसदी ब्लॉक दिया जाएगा. अगर यहां हीरा मिलता है तो इस इलाके की किस्मत चमक सकती है.  recent visitors 33

8वें वेतन आयोग में कितनी बढ़ेगी सैलरी, कर्मचारियों को कितनी की उम्मीद करनी चाहिए? जानिए इसका फॉर्मूला

नई दिल्ली सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों के लिए 8वां केंद्रीय वेतन आयोग (CPC) 1 जनवरी 2026 से लागू होने जा रहा है. इससे एक करोड़ से अधिक केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों की सैलरी, पेंशन और भत्तों में वृद्धि होगी. इस आयोग के द्वारा मिलने वाली लाभों की खबरें सरकारी कर्मचारियों में काफी चर्चा का विषय बन चुकी हैं. आइए, जानते हैं कि इस वेतन आयोग से कर्मचारियों को कितनी सैलरी बढ़ोतरी की उम्मीद करनी चाहिए और इसका गणना का तरीका क्या है. 8वां वेतन आयोग और एयक्रॉयड फॉर्मूला 8वां वेतन आयोग भी 7वें वेतन आयोग की तरह सैलरी और पेंशन की वृद्धि के लिए एयक्रॉयड फॉर्मूला का पालन करेगा. इस फॉर्मूला के तहत कर्मचारियों की सैलरी का निर्धारण उनके जीवन निर्वाह की जरूरतों के हिसाब से किया जाता है. इसे डॉ. वॉल्स एयक्रॉयड ने विकसित किया था, जिनका मुख्य उद्देश्य था कि किसी भी श्रमिक के लिए आवश्यक न्यूनतम वेतन उसकी पोषण संबंधी जरूरतों को ध्यान में रखते हुए तय किया जाए. एयक्रॉयड फॉर्मूला में एक श्रमिक, उसकी पत्नी और दो बच्चों के लिए न्यूनतम वेतन का निर्धारण किया जाता है. यह फॉर्मूला 1957 में भारतीय श्रमिक सम्मेलन (ILC) द्वारा अपनाया गया था और तब से इसका उपयोग न्यूनतम मजदूरी निर्धारण के लिए किया जा रहा है. 7वें वेतन आयोग का असर 7वें वेतन आयोग में एयक्रॉयड फॉर्मूला का उपयोग करते हुए न्यूनतम मूल वेतन को ₹7,000 से बढ़ाकर ₹18,000 किया गया था. साथ ही, इसमें एक फिटमेंट फैक्टर भी शामिल किया गया था, जिससे सैलरी में वृद्धि हुई. इसके तहत एक फिटमेंट फैक्टर को 2.57 के रूप में लागू किया गया था, जिससे कर्मचारियों की सैलरी का पुनरीक्षण हुआ था. 8वें वेतन आयोग में संभावित बदलाव अब जब 8वां वेतन आयोग आने वाला है, तो यह अपेक्षाएँ की जा रही हैं कि यह भी एयक्रॉयड फॉर्मूला का पालन करेगा, लेकिन इसमें कुछ बदलाव हो सकते हैं. रिपोर्ट्स के अनुसार, इस बार फिटमेंट फैक्टर को 1.92 से 2.86 के बीच माना जा सकता है. यदि अधिकतम फिटमेंट फैक्टर, यानी 2.86, अपनाया जाता है, तो न्यूनतम मूल वेतन ₹18,000 से बढ़कर ₹51,480 तक पहुँच सकता है, जो कि एक बड़ी बढ़ोतरी होगी. इसके अलावा, पेंशन में भी वृद्धि हो सकती है, और ₹9,000 से ₹25,740 तक पहुंचने की संभावना है. फिटमेंट फैक्टर का महत्व फिटमेंट फैक्टर वह गुणांक है जिसका उपयोग सैलरी और पेंशन में वृद्धि का निर्धारण करने के लिए किया जाता है. यह वर्तमान में मिलने वाली सैलरी या पेंशन राशि से गुणा किया जाता है. हालांकि, इस समय सैलरी वृद्धि का प्रतिशत अभी तक तय नहीं हुआ है, लेकिन पिछले आयोगों के सुझावों से हम अनुमान लगा सकते हैं कि इस बार भी कर्मचारियों की सैलरी में अच्छी वृद्धि हो सकती है. 7वां वेतन आयोग और एक्रोयड फॉर्मूला फाइनेंशियल एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, 7वें वेतन आयोग ने एक्रोयड फॉर्मूले का इस्तेमाल करते हुए केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों के लिए न्यूनतम मूल वेतन 7,000 रुपये से बढ़ाकर 18,000 रुपये कर दिया था. लगभग एक दशक पहले, 7वें वेतन आयोग ने केंद्रीय सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के वेतन और पेंशन को अपडेट करने के लिए 2.57 का फिटमेंट फैक्टर लागू किया था. इस फिटमेंट फैक्टर और एक्रोयड फॉर्मूले पर आधारित वेतन मैट्रिक्स 2016 में 7वें वेतन आयोग की सिफारिशों के लागू होने के बाद से प्रभावी है. इस फॉर्मूले पर 8वां वेतन आयोग के तहत कितनी बढ़ेगी सैलरी? माना जा रहा है कि 8वें वेतन आयोग के तहत भी एक्रोयड फार्मूला अपनाया जाएगा, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि सरकारी कर्मचारियों की सैलरी आज के महंगाई के हिसाब से उचित है या नहीं? रिपोर्ट्स बताती हैं कि सरकार 1.92 से 2.86 के बीच फिटमेंट फैक्टर पर विचार कर सकती है. अगर सीमा का उच्च अंत, 2.86, चुना जाता है, तो सरकारी कर्मचारियों के लिए न्यूनतम मूल वेतन संभावित रूप से 51,480 रुपये तक बढ़ सकता है, जो वर्तमान 18,000 रुपये से काफी अधिक है. इसके अलावा पेंशन में 9,000 रुपये से 25,740 रुपये की बढ़ोतरी हो सकती है. फिटमेंट फैक्टर वेतन और पेंशन बढ़ोतरी का कैलकुलेशन फिटमेंट फैक्टर को वर्तमान न्यूनतम वेतन या पेंशन अमाउंट से गुणा करके तय किया जाता है. 8वें वेतन आयोग के तहत वेतन बढ़ोतरी कितने फीसदी होगा? अभी ये क्लियर नहीं है. उम्मीद है कि केंद्र सरकार जल्द ही 8वें वेतन आयोग की संरचना की घोषणा करेगी, जिसमें एक अध्यक्ष और दो सदस्य शामिल होंगे.   recent visitors 68

भारत में प्रीमियम बाइक्स की कीमतें घटने वाली हैं , खरीदारों के लिए अधिक सुलभ हो जाएंगी

नई दिल्ली भारत सरकार ने हाल ही में बजट पेश किया है। इस बजट में सरकार ने मोटरसाइकिलों में इंपोर्ट ड्यूटी कम करने का ऐलान किया है। यानि की अब हार्ले-डेविडसन, डुकाटी जैसे प्रीमियम बाइक्स अब और सस्ते हो जाएंगी।  हार्ले-डेविडसन टैरिफ भारत और अमेरिका के बीच कई सालों से विवाद का कारण बना हुआ है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प भी इस पर कई बार बयान दे चुके हैं और उन्होंने भारत से टैरिफ में सुधार की मांग की थी। इस बार के बजट में होने वाले नए ऐलान से उम्मीद है कि दोनों देशों के बीच टैरिफ को लेकर तनाव में कमी आएगी। बता दें कि, हार्ले-डेविडसन टैरिफ भारत और अमेरिका के बीच कई वर्षों से विवाद का विषय रहा है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प भी इस मुद्दे पर कई बार बोल चुके हैं और उन्होनें भारत से टैरिफ में सुधार करने की बात कही थी. इस बार के बजट में होने वाले इस नए ऐलान से दोनों देशों के बीच टैरिफ मुद्दे को लेकर होने वाले तनाव में कमी आने की पूरी उम्मीद है. कितनी सस्ती हुईं बाइक्स: सरकार के इस नए फैसले के मुताबिक कम्पलीट बिल्ट यूनिट (CBU) के तौर पर आयात की जाने वाली 1,600 सीसी तक की इंजन क्षमता की मोटरसाइकिलों पर आयात शुल्क 50 प्रतिशत से घटाकर 40 प्रतिशत कर दिया गया है. इन बाइक्स को CBU रूट से आयात किया जाता था, जिससे इनकी कीमत ज्यादा थी. इसके अलावा 1,600 सीसी से अधिक इंजन क्षमता वाली मोटरसाइकिलों पर और अधिक कटौती की गई है. इन्हें 50 प्रतिशत से घटाकर 30 प्रतिशत कर दिया गया है. नए बजट के अनुसार, सेमी-नॉक्ड डाउन (SKD) किट पर आयात शुल्क 25 प्रतिशत से घटाकर 20 प्रतिशत कर दिया गया है, तथा पूरी तरह से नॉक्ड डाउन (CKD) रूट से इम्पोर्ट की जाने वाली बाइक्स पर ड्यूटी को 15 प्रतिशत से घटाकर 10 प्रतिशत कर दिया गया है. टैरिफ में इस कमी से भारत में हार्ले-डेविडसन और डुकाटी जैसे ब्रांड्स के प्रीमियम मोटरसाइकिलों की कीमतों में तगड़ी कटौती देखने को मिलेगी. इससे ये महंगी और उंची कीमत वाली बाइक्स भी लोगों के लिए आसानी से उपलब्ध होगी. जानकारों का मानना है कि, इससे इम्पोर्टेड प्रीमियम बाइक्स की डिमांड बढ़ने की पूरी उम्मीद है. आयातित बाइकों पर टैरिफ में कटौती का निर्णय ऐसे समय में लिया गया है जब डोनाल्ड ट्रम्प ने उन देशों पर भी पारस्परिक कर लगाने की धमकी दी है जो अमेरिकी वस्तुओं पर हाई टैरिफ लगाते हैं. पिछले साल दिसंबर में ट्रम्प ने कहा था कि भारत द्वारा लगाया जाने वाला टैक्स ज्यादा है. उन्होंने कहा कि "यदि वे हम पर टैक्स लगाते हैं, तो हम भी उन पर उतना ही टैक्स लगाएंगे."   recent visitors 67

पीएम मोदी ने तंज कसते हुए कहा- कुछ लोगों का फोकस स्टाइलिश बाथरूम पर है, जबकि हमारा ध्यान हर घर तक नल से जल पहुंचाने पर है

नई दिल्ली दिल्ली विधानसभा चुनाव से ठीक एक दिन पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान आम आदमी पार्टी और पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर बिना नाम लिए तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा, "कुछ लोगों का फोकस स्टाइलिश बाथरूम पर है, जबकि हमारा ध्यान हर घर तक नल से जल पहुंचाने पर है।" इस दौरान पीएम मोदी ने कांग्रेस पर भी निशाना साधते हुए पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की चर्चित टिप्पणी को दोहराया, जिसमें उन्होंने कहा था कि "केंद्र से भेजा गया एक रुपया जनता तक सिर्फ पंद्रह पैसे ही पहुंचता है।" पीएम मोदी ने इसे "गजब की हाथ की सफाई" बताते हुए विपक्ष की भ्रष्टाचार नीति पर करारा वार किया। लोकसभा में दिए गए इस भाषण के बाद राजनीतिक सरगर्मी बढ़ गई है। विपक्ष ने पीएम मोदी के इस बयान को चुनावी जुमला बताया, जबकि सत्ता पक्ष ने इसे विकास की सच्चाई करार दिया। recent visitors 56

कैबिनेट ने दी मंजूरी, जारी रहेगी ढाई लाख की सब्सिडी, शहरी क्षेत्रों में हितग्राहियों को अगले पांच सालों में 10 लाख आवास उपलब्ध कराए जाएंगे

भोपाल शहरों को झुग्गीमुक्त करने की दिशा में राज्‍य सरकार ने कदम बढ़ा दिया है। प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में हितग्राहियों को आगामी पांच वर्ष में 10 लाख आवास उपलब्ध कराए जाएंगे। इसके लिए मुख्यमंत्री मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को मंत्रालय में हुई कैबिनेट बैठक में प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी 2.0 को स्वीकृति दे दी। इसमें केंद्र और राज्य सरकार मिलकर 50 हजार करोड़ रुपये निवेश करेंगी, जिससे न केवल अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी बल्कि रोजगार के अवसर भी बनेंगे। ऐसे समझें किसे क्‍या लाभ मिलेगा प्रदेश के नगरीय क्षेत्रों में प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत दस लाख आवास बनाए जाएंगे। स्वयं की भूमि पर आवास बनाने वाले को ढाई लाख रुपये का अनुदान दिया जाएगा। इसमें डेढ़ लाख रुपये केंद्र और एक लाख रुपये राज्य सरकार से मिलेंगे। भू-संपदा विनियामक अधिकरण (रेरा) से पंजीकृत बिल्डर द्वारा बनाए आवास लेने पर अनुदान का वाउचर दिया जाएगा। इसका प्रावधान योजना में प्रदेश सरकार की ओर से किया गया है। इसे मंगलवार को मुख्यमंत्री मोहन यादव की अध्यक्षता में होने वाली कैबिनेट बैठक में प्रस्तुत किया गया। इसके साथ ही इंदौर की हुकमचंद मिल की भूमि पर हाउसिंग बोर्ड बड़ी आवासीय परियोजना लाएगा। इसका भी अनुमोदन किया गया। लागत निकालने के बाद इससे जो लाभ होगा, उसमें आधा हिस्सा इंदौर नगर निगम को दिया जाएगा। ढाई लाख की सब्सिडी जारी रहेगी प्रधानमंत्री आवास योजना 2.0 शहरी प्रदेश में लागू करने की सहमति केंद्र सरकार को भेजी जा चुकी है। अब इसे लागू करने का अनुमोदन कैबिनेट द्वारा किया गया। योजना में पांच वर्ष में दस लाख आवास निर्मित किए जाएंगे। स्वयं की भूमि पर आवास निर्माण के लिए ढाई लाख रुपये का जो अनुदान दिया जा रहा है, वह जारी रखा जाएगा। बिल्डरों की एक वाइड श्रेणी बनाई जाएगी। इसमें वे बिल्डर शामिल किए जांएगे, जिनकी योजना को रेरा से अनुमति होगी और रिकार्ड अच्छा होगा। योजना के तहत पात्र व्यक्तियों को इनसे आवास लेने पर अनुदान का वाउचर दिया जाएगा। योजना में उन व्यक्तियों को प्राथमिकता दी जाएगी, जिनके पास कहीं भी पक्का आवास नहीं है। नौ लाख रुपये तक की वार्षिक आय और राज्य व केंद्र सरकार की किसी भी आवास योजना में लाभ ले चुके व्यक्ति योजना के लिए अपात्र होंगे। ऐसे व्यक्ति, जिनकी वार्षिक आय तीन लाख रुपये तक हो और उनके पास स्वयं का भूखंड हो, उन्हें मकान बनाने के लिए केंद्र और राज्य सरकार के माध्यम से ढाई लाख रुपये की मदद की जाएगी। यह राशि तीन किस्तों में दी होगी। इसी तरह सरकारी या निजी एजेंसी की परियोजना में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को 30 से 45 वर्ग मीटर का फ्लैट दिलाया जाएगा। हुकुमचंद मिल की भूमि पर बनेगी टाउनशिप, 3,700 करोड़ का होगा निवेश हुकुमचंद मिल की देनदारी 436 करोड़ रुपये चुकाने के बाद अब इसकी 17.52 हेक्टेयर भूमि पर टाउनशिप बनाई जाएगी। 40 प्रतिशत भूमि पर आवासीय परियोजना तो शेष 60 प्रतिशत भूमि का उपयोग वाणिज्यिक किया जाएगा। लगभग 5,100 करोड़ रुपये का निवेश होगा और दस लोगों को रोजगार मिलेगा। परियोजना में 2,323 करोड़ रुपये के अन्य कार्य कराए जाएंगे, जिससे शहर की अर्थव्यवस्था में सुधार होगा। सरकार को जीएसटी के रूप में 400 करोड़, निर्मित क्षेत्र के विक्रय से 600 करोड़, स्टाम्प एवं रजिस्ट्रेशन शुल्क सहित अन्य कर से लगभग 1,200 करोड़ रुपये मिलेंगे। परियोजना के लिए नगर निगम इंदौर भूमि की रजिस्ट्री बिना नीलामी के हाउसिंग बोर्ड के पक्ष में करेगा। इस पर लगभग 19 करोड़ रुपये का शुल्क लगेगा। हाउसिंग बोर्ड को अनुज्ञेय फर्शी तल अनुपात से .5 प्रतिशत अतिरिक्त एफएआर मिलेगा यानी अधिक निर्माण कार्य हो सकेगा। यह अभी दो प्रतिशत है। परियोजना लागत निकालने के बाद जो लाभ होगा, वो नगर निगम इंदौर और हाउसिंग बोर्ड के बीच बराबर बंटेगा। कैबिनेट के महत्‍वपूर्ण फैसले ये भी निजी डेवलपर से हितग्राही यदि आवास खरीदता है तो अनुदान का बाउचर दिया जाएगा। भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर सहित अन्य बड़े शहरों को मलिन बस्ती मुक्त करने की दिशा में पीपीपी माडल पर आवास उपलब्ध कराए जाएंगे। नगरीय निकाय, राज्य की अन्य निर्माण एजेंसी के साथ निजी बिल्डर आवास बनाकर देंगे। इसके साथ ही कामकाजी महिला, औद्योगिक श्रमिक, शहरी प्रवासी, बेघर, निराश्रित, छात्रों सहित अन्य पात्र हितग्राहियों के लिए किराए पर आवास बनाकर उपलब्ध किए जाएंगे। स्वयं की भूमि पर आवास निर्माण के लिए ढाई लाख रुपये का जो अनुदान दिया जा रहा है, वह जारी रखा जाएगा। बिल्डरों की एक वाइट श्रेणी बनाई जाएगी। इसमें वे बिल्डर शामिल किए जांएगे, जिनकी योजना को रेरा से अनुमति होगी और रिकार्ड अच्छा होगा। केंद्र सरकार ने योजना में अविवाहित कमाऊ वयस्क सदस्यों को अलग से लाभ दिए जाने का प्रविधान समाप्त कर दिया है। एक हितग्राही परिवार में अब पति, पत्नी, अविवाहित बेटा-बेटियां शामिल होंगे। 20 वर्ष में किसी भी आवासीय योजना में लाभ प्राप्त करने वाले अपात्र होंगे। सफाई कर्मी, पीएम स्वनिधि और पीएम विश्वकर्मा योजना के हितग्राही, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, मलिन बस्ती के निवेश या विशेष समूह पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। हितग्राही पांच वर्ष तक आवास न तो बेच सकेंगे, न ही किसी को स्थानांतरित कर सकेंगे। recent visitors 29