मुख्यमंत्री ने डोंगला में स्थापित वराह मिहिर खगोलीय वेधशाला के ऑटोमेशन का वर्चुअल किया शुभारंभ

भोपाल   मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि भारतीय विज्ञान और परंपरा के गहरे संबंध हैं। भारत ने हमेशा अपने नेतृत्व से विज्ञान और नवाचार को प्राथमिकता दी है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की दूरदर्शी सोच ने भारतीय विज्ञान और अनुसंधान को नई ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री स्व. लाल बहादुर शास्त्री ने 'जय जवान, जय किसान' का आह्वान कर भारत को एक नई ऊर्जा दी। इस नारे ने न केवल भारत की रक्षा और कृषि को मजबूत किया, बल्कि राष्ट्र को आत्मनिर्भरता की ओर प्रेरित भी किया। इसके बाद पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेयी ने इस कड़ी में 'जय विज्ञान' को जोड़ा, जो भारत की वैज्ञानिक सोच और उपलब्धियों को दर्शाता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी ने इस श्रृंखला में 'जय अनुसंधान' जोड़ते हुए विज्ञान और नवाचार को एक नई दिशा दी है। कोविड-19 महामारी के दौरान मात्र एक वर्ष में स्वदेशी वैक्सीन का निर्माण करना इसका सबसे बड़ा प्रमाण है। यह उपलब्धि भारत के वैज्ञानिक सामर्थ्य और नेतृत्व की कुशलता को प्रदर्शित करती है। पूर्व प्रधानमंत्री स्व. वाजपेयी के समय में हुए परमाणु परीक्षण (पोखरण) और प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में हुई वैज्ञानिक प्रगति, दोनों ही यह दिखाते हैं कि भारत ने हर चुनौती को अवसर में बदलकर दुनिया के सामने अपनी योग्यता और क्षमता को सिद्ध किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शुक्रवार को रवींद्र भवन में 31वीं राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस का शुभारंभ कर संबोधित कर रहे थे। उन्होंने राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस को बाल प्रतिभाओं के विकास का बेहतरीन मंच बताया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उज्जैन जिले के डोंगला में स्थापित वराह मिहिर खगोलीय वेधशाला में हुए नवीनीकरण कार्य एवं नए उपकरणों के साथ ऑटोमेशन कार्य का वर्चुअल शुभारंभ किया। उन्होंने वीर भारत न्यास के रिसर्च जर्नल 'युगयुगीन भारत का पुरोवाक्' का विमोचन किया, साथ ही वीर भारत न्यास द्वारा बनाई गई महादेव फिल्म सीरीज का लोकार्पण भी किया। कार्यक्रम में केन्द्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री जितेन्द्र सिंह का वीडियो संदेश भी प्रसारित किया गया। वीडियो संदेश में केन्द्रीय मंत्री श्री सिंह ने राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस में आए बच्चों को श्रेष्ठतम प्रदर्शन करने की प्रेरणा देकर उनका उत्साहवर्धन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार विज्ञान, अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है। विज्ञान और संस्कृति का यह समन्वय भारत को एक बार फिर से वैश्विक मंच पर सबसे आगे लाने का मार्ग प्रशस्त करेगा। उन्होंने बच्चों और शिक्षकों को प्रेरित करते हुए कहा कि भारत का भविष्य आप सबके हाथों में है। विज्ञान, संस्कृति और परंपरा का संतुलन ही हमारे विकास का आधार है। राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस में 6 खाड़ी देशों और भारत के विभिन्न राज्यों से आये 700 बच्चों और शिक्षकों की भागीदारी ने इसे विशेष और ऐतिहासिक बना दिया है। यह आयोजन नई पीढ़ी को विज्ञान और नवाचार के प्रति प्रेरित करने में महत्वपूर्ण योगदान देगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने डोंगला वेधशाला के ऑटोमेशन के शुभारंभ पर सभी को बधाई देते हुए कहा कि यह पहल छात्रों और शोधकर्ताओं के लिये खगोलीय रहस्यों को बेहतर तरीके से समझने में सहायक होगी। उन्होंने बताया कि भारत का खगोल विज्ञान प्राचीन काल से उन्नत थे। उन्होंने कहा कि नवग्रह की पूजा, ज्योतिष और खगोलीय घटनाओं का अध्ययन हमारी सांस्कृतिक विरासत का अभिन्न हिस्सा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ग्रीनविच समय की अवधारणा को पुन: परिभाषित करने की जरूरत पर बल दिया। उन्होंने कहा कि हमारे पूर्वजों ने समय और खगोलीय पिण्डों की परिक्रमा का अध्ययन वैज्ञानिक दृष्टिकोण से किया था, जिसे आज के परिप्रेक्ष्य में पुन: परिभाषित करने की आवश्यकता है। रात के बारह बजे दिन की शुरूआत किसी भी दृष्टिकोण से वैज्ञानिक नहीं लगती। उन्होंने बाल वैज्ञानिकों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि हर हाथ को काम, हर खेत को पानी के साथ अब हर युवा को अनुसंधान के अवसर देने का संकल्प लिया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारी कोशिश है कि हम भारत के प्राचीन इतिहास और ज्ञान को न केवल संरक्षित करें, बल्कि इसे आधुनिक दृष्टिकोण से प्रस्तुत करें। विज्ञान और संस्कृति की जुगलबंदी ने भारत को हजारों वर्षों से समृद्ध बनाए रखा। इसे पुनर्परिभाषित करने का समय आ गया है। मुख्यमंत्री के संस्कृति सलाहकार और वीर भारत न्यास के सचिव डॉ. श्रीराम तिवारी ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश में पहली बार राज्य की प्राचीन भारतीय विरासत, साहित्य, संस्कृति, विज्ञान, कृषि, जल संरक्षण और उद्योग-व्यापार के समग्र विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विज्ञान और संस्कृति को एक साथ जोड़ने के प्रयासों को नई ऊंचाई दी है। इसी क्रम में वीर भारत न्यास द्वारा दो महत्वपूर्ण पहल की गई हैं। पुरोवाक् रिसर्च जर्नल भारतीय सभ्यता, संस्कृति और इतिहास के विभिन्न आयामों पर केंद्रित होगा। इसका पहला अंक भारत की ऐतिहासिक, पुरातात्विक और समाज वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ समकालीन प्रासंगिकता को रेखांकित करता है। recent visitors 69

भोपाल में NCERT परिसर में आयोजित राष्ट्रीय कला उत्सव का शुभारंभ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किया

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भोपाल में NCERT परिसर में आयोजित राष्ट्रीय कला उत्सव का शुभारंभ किया। इस अवसर पर अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 2015 में इस कला उत्सव की शुरुआत की थी। इसके माध्यम से स्कूली छात्रों की कला को पहचानने और प्रतिभा को निखारने का अवसर मिला। साथ ही भारत जिसकी विशेषता अनेकता में एकता की है। वहां सांस्कृतिक रुप से समृद्ध विभिन्न विरासतों को देखने समझने का मौका मिलता है. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को इस आयोजन के लिए धन्यवाद दिया। 64 कला 14 विद्याओं में निष्णात थे श्रीकृष्ण उन्होंने कहा कि कंस वध के बाद श्रीकृष्ण शिक्षा प्राप्त करने इसी मध्यप्रदेश के सांदीपनी आश्रम आए और गुरुकुल पद्धति के माध्यम से शिक्षा गृहण की. श्रीकृष्ण 64 कला और 14 विद्याओं में निष्णात थे। इसीलिए कहा गया कि श्रीकृष्ण वंदे जगतगुरुं यानि शिष्य रहते भी उन्हें गुरु का दर्जा दिया गया। श्रीकृष्ण बांसुरी वादन करते थे तो सुदर्शन चक्र भी योग के माध्यम से धारण किया। उन्होंने विराट स्वरुप के दर्शन भी कराए। श्रीकृष्ण ने एक ही जीवन में कई स्वरुपों के दर्शन कराएं। इनकी कथाओं को भारत की अलग अलग नृत्य विधाओं में प्रदर्शित किया जाता है। कहां राजा भोज कहां गंगू तेली की सुनाई कहानी उन्होंने बताया कि सिंधुराज ने अपने दत्तक पुत्र मुंज को राजपाट सौंपा जिनका एक युद्ध में प्राणांत हुआ। उनके बाद राजा भोज ने राजपाट संभाला लेकिन वे युद्ध की बजाय अन्य कलाओं में रुचि रखते थे। इसके बाद राजा भोज को एक नाटक के माध्यम से राजा मुंज के युद्ध में हार और अपमान का दृश्य दिखाया गया। तब राजा भोज का खून खौल उठा और उन्होंने एक साथ राजा गांगेय और राजा तैलव की सेना को हराया। तभी से ये कहावत चली कि कहा राजा भोज और कहां गांगेय तैलव जो बाद में अपभ्रंश होकर कहां राजा भोज और कहां गंगू तेली में बदल गई।   recent visitors 48

मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में प्रदेश खनन के क्षेत्र में अधिक राजस्व प्राप्त कर नई ऊँचाइयाँ छू रहा

विशेष लेख नवाचारों से मध्यप्रदेश बनेगा माइनिंग केपिटल भोपाल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नवाचारों से प्रेरित होकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के कुशल नेतृत्व में मध्यप्रदेश सरकार माइनिंग में नवाचार कर रही है। प्रदेश में सबसे पहले क्रिटिकल मिनरल के 2 ब्लॉक्स को नीलामी में रखा गया है। सबसे अधिक खनिज ब्लॉक्स की नीलामी कर मध्यप्रदेश देश में पहले स्थान पर आ गया है। प्रदेश की समृद्ध खनिज सम्पदा और नई खनन नीतियों से राज्य की आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है। खनिज संसाधनों के उपयोग से न केवल राजस्व में बढ़ोत्तरी होगी, बल्कि रोजगार के नये अवसर भी पैदा होंगे। प्रदेश में कोयला, चूना पत्थर, डोलोमाइट और बॉक्साइट जैसे खनिजों का विशाल भण्डार है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में प्रदेश खनन के क्षेत्र में अधिक राजस्व प्राप्त कर नई ऊँचाइयाँ छू रहा है। प्रदेश में वित्तीय वर्ष 2023-24 के मुकाबले खनिज राजस्व संग्रह में 23 प्रतिशत की वृद्धि हुई, प्रदेश में पहली बार खनिज राजस्व संग्रह 5 अंकों में पहुंच गया। जबकि वित्तीय वर्ष 2023-24 में इस अवधि में 4 हजार 958 करोड़ 98 लाख रुपये प्राप्त हुए थे। जबकि वर्ष 2024-25 में यह प्राप्ति 10 हजार करोड़ रुपये से अधिक प्राप्त किया गया है। मध्यप्रदेश खनिज ब्लॉक्स की नीलामी में सर्वप्रथम मध्यप्रदेश मुख्य खनिज ब्लॉकों की सर्वाधिक संख्या में नीलामी करने में देश में प्रथम स्थान पर है। भारत सरकार द्वारा वर्तमान में स्ट्रैटेजिक एवं क्रिटिकल मिनरल पर देश की आत्म-निर्भरता बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है, जिससे इन खनिजों की आयात पर निर्भरता कम हो सके। प्रदेश द्वारा इस खनिज समूह के अंतर्गत अभी तक ग्रेफाइट के 8 खनिज ब्लॉक, रॉक-फॉस्फेट खनिज के 6 ब्लॉक सफलतापूर्वक नीलाम किये गये हैं। मुख्य खनिज के 20 ब्लॉकों की नीलामी के लिये विभाग द्वारा 9 अगस्त, 2024 को निविदा आमंत्रण सूचना-पत्र (NIT) जारी की गयी है, जिसकी कार्यवाही प्रचलन में है। इसके अतिरिक्त महत्वपूर्ण खनिज गोल्ड के 4 ब्लॉक, मैग्नीज खनिज के 16 ब्लॉक एवं कॉपर का एक ब्लॉक अभी तक सफलतापूर्वक नीलाम किये गये हैं। भारत सरकार द्वारा जनवरी-2024 में एक्सप्लोरेशन नीति प्रभावशील की गयी। इस नीति के तहत मध्यप्रदेश राज्य द्वारा क्रिटिकल मिनरल के 2 ब्लॉक नीलामी में रखे गये हैं। मध्यप्रदेश केंद्र सरकार की इस नीति का क्रियान्वयन करने वाला पहला राज्य बन गया है। खनिज अन्वेषण के क्षेत्र में भी प्रदेश प्रथम स्थान पर है। प्रदेश में स्ट्रेटेजिक एवं क्रिटिकल मिनरल, मुख्यत: रॉक-फास्फेट, ग्रेफाइट, ग्लूकोनाइट, प्लेटिनम एवं दुर्लभ धातु (आरईई) के लिये कार्य किया जा रहा है। इसके अंतर्गत 11 क्षेत्रों पर अन्वेषण कार्य किया गया। प्रदेश में जिला खनिज विभाग के अंतर्गत विभिन्न विकास कार्य, जिसमें पेयजल, चिकित्सा, शिक्षा, महिला एवं बाल कल्याण, स्वच्छता, कौशल विकास और वृद्ध, विकलांग कल्याण के लिये 16 हजार 452 परियोजनाएँ स्वीकृत की गयी हैं, जिनकी लागत 4406 करोड़ रुपये है। इनमें से 7 हजार 583 परियोजना लागत 1810 करोड़ रुपये का कार्य पूर्ण हो गया है। अवैध खनन को रोकने के लिये ई-चेकगेट की स्थापना प्रदेश में खनिज के अवैध परिवहन रोकने के लिये एआई आधारित 41 ई-चेकगेट स्थापित किए जा रहे हैं। ई-चेकगेट पर वेरीफोकल कैमरा, आरएफआईडी रीडर और ऑटोमेटिक नम्बर प्लेट रीडर की सहायता से खनिज परिवहन में संलग्न वाहन की जाँच की जा सकेगी। परियोजना में पायलेट प्रोजेक्ट के रूप में खनिज परिवहन के लिये महत्वपूर्ण 4 स्थानों पर ई-चेकगेट स्थापित कर कार्य प्रारंभ कर दिया गया है। अवैध परिवहन की निगरानी के लिये राज्य स्तर पर भोपाल में कमाण्ड एवं कंट्रोल सेंटर तथा जिला भोपाल एवं रायसेन में जिला कमाण्ड सेंटर स्थापित किया गया है। इस वर्ष तक सभी 41 ई-चेकगेट की स्थापना किये जाने का लक्ष्य है। अवैध खनन की रोकथाम के लिये उपग्रह और ड्रोन आधारित परियोजना प्रारंभ की गयी है। इस परियोजना के माध्यम से 7 हजार खदानों को जियो टैग देकर खदान क्षेत्र का सीमांकन किया गया है। यह परियोजना पूर्ण रूप से लागू होने पर अवैध खनन को चिन्हित कर प्रभावी कार्यवाही हो सकेगी। परियोजना के लागू होने पर स्वीकृत खदान के अंदर 3-डी इमेजिंग तथा वॉल्यूमेट्रिक एनालिसिस कर उत्खनित खनिज की मात्रा का सटीक आँकलन किया जा सकेगा। माइनिंग में नवाचारों से प्रदेश की आर्थिक प्रगति सुनिश्चित होगी, साथ ही इससे मध्यप्रदेश को राष्ट्रीय स्तर पर खनिज उत्पादक राज्य के रूप में नई पहचान मिलेगी। निजी क्षेत्र को प्रोत्साहन मध्यप्रदेश सरकार निजी क्षेत्र को प्रदेश के प्रचुर खनिज संसाधनों के बेहतर उपयोग के लिये प्रोत्साहित कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के मार्गदर्शन में हाल ही में भोपाल में आयोजित माइनिंग कॉन्क्लेव में कई बड़ी कम्पनियों ने माइनिंग सेक्टर में निवेश की इच्छा जताई है। कॉन्क्लेव में 20 हजार करोड़ से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। राज्य सरकार ने खनिज क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिये कई सुधार किये हैं। इनमें पारदर्शी नीलामी प्रक्रिया, पर्यावरण-अनुकूल खनन और स्थानीय समुदायों को मुनाफे में भागीदारी देने जैसे कदम शामिल हैं। प्रदेश में है देश का एकमात्र हीरा भण्डार प्रदेश के पन्ना जिले में देश का एकमात्र हीरे का भण्डार है। हीरा खदान से प्रतिवर्ष एक लाख कैरेट हीरे का उत्पादन होता है। मलाजखण्ड कॉपर खदान भारत की सबसे बड़ी ताम्बा खदान है। इस खदान से प्रतिदिन 5 से 10 हजार ताम्बा निकाला जाता है। भारत के कुल ताम्बा भण्डार का 70 प्रतिशत ताम्बा मध्यप्रदेश में है। राज्य में स्थित सासन कोयला खदान भी अपने विशाल खनन उपकरणों के लिये प्रसिद्ध है। मध्यप्रदेश देश का चौथा सबसे बड़ा कोयला उत्पादक राज्य है। प्रदेश में लाइम-स्टोन, डायमण्ड और पाइरोफ्लाइट जैसे खनिज संसाधन हैं। मध्यप्रदेश के जिलों में खनिज के भण्डार हैं, जिसमें सतना, रीवा और सीधी में लाइम-स्टोन, बॉक्साइट, ग्रेफाइट, गोल्ड और ग्रेनाइट, सिंगरौली में कोयला, गोल्ड और आयरन, शहडोल, अनूपपुर और उमरिया में कोयला, कोल बेड, मिथेन और बॉक्साइट, छतरपुर, सागर और पन्ना में डायमण्ड, रॉक फास्फेट, आयरन, ग्रेनाइट, लाइम, डायस्पोर और पाइरोफ्लाइट, जबलपुर और कटनी में बॉक्साइट, डोलोमाइट, आयरन, लाइम-स्टोन, मैग्नीज, गोल्ड और मार्बल, नीमच और धार में लाइम-स्टोन, बैतूल में कोयला, ग्रेफाइट, ग्रेनाइट, लीड और जिंक, छिंदवाड़ा में कोयला, मैग्नीज और डोलोमाइट, बालाघाट में कॉपर, मैग्नीज, डोलोमाइट, लाइम-स्टोन और बॉक्साइट, मण्डला और डिण्डोरी में डोलोमाइट और बॉक्साइट, ग्वालियर और शिवपुरी में आयरन, फ्लेग-स्टोन और क्वार्ट्ज, झाबुआ और अलीराजपुर में रॉक फस्फेट, डोलोमाइट, लाइम-स्टोन, मैग्नीज और ग्रेफाइट … Read more

शाही जामा मस्जिद सर्वे रिपोर्ट यूपी कोर्ट को सौंपी गई, 60 तस्वीरों से खुलेगा राज़!

संभल संभल की शाही जामा मस्जिद के अंदर की एडवोकेट कमीशन रिपोर्ट बंद लिफाफे में कोर्ट में पेश कर दी गई है। इस सर्वे रिपोर्ट की इनसाइड डिटेल सामने आई है। बताया जा रहा है कि जामा मस्जिद में मंदिर होने के प्रमाण मिले हैं। मस्जिद के अंदर दो वट वृक्ष हैं। अमूमन हिंदू धर्म के मंदिरों में ही वट वृक्ष की पूजा होती है। इतना ही नहीं मस्जिद में कुंआ भी है, जो आधा अंदर है और आधा बाहर है। बाहर वाले हिस्से को ढक दिया गया है। मस्जिद के अंदर कमल के फूल भी उकेरे हुए मिले हैं। बता दें कि संभल की जामा मस्जिद के अंदर हुए सर्वे की एडवोकेट कमीशन की रिपोर्ट सिविल जज सीनियर डिवीजन आदित्य सिंह की कोर्ट में पेश की गई है। एडवोकेट कमिश्नर रमेश राघव ने यह रिपोर्ट कोर्ट में पेश की है। सूत्रों के मुताबिक, इस सर्वे रिपोर्ट में शाही जामा मस्जिद में मंदिर होने के काफी सबूत मिले हैं। जामा मस्जिद के सर्वे के पहले दिन यानि 19 नवंबर, 2024 को करीब डेढ़ घंटे की वीडियोग्राफी हुई थी, जबकि दूसरे दिन करीब तीन घंटे की वीडियोग्राफी हुई। इस दौरान करीब 1200 फोटो लिए गए. सारी चीजों का अवलोकन करने पर मस्जिद के अंदर 50 से अधिक फूल के निशान/ कलाकृतियां मिलीं। वहीं, गुंबद के हिस्से को प्लेन कर दिया गया है। पुराने ढांचे को बदलने के भी सबूत मिले हैं, साथ ही उस जगह नए कंस्ट्रशन के सबूत मिले हैं। मंदिर के शेप वाले स्ट्रक्चर पर प्लास्टर लगाकर पेंट कर दिया गया है। मस्जिद में अंदर जहां बड़ा गुंबद है, उस पर झूमर को तार से बांधकर एक चेन से लटकाया गया है। ऐसी चेन का इस्तेमाल मंदिर के घंटों में किया जाता है। सूत्रों के अनुसार, विवादित स्थल में वैसे प्रतीक भी मिले हैं, जो उस दौर के मंदिरों और देवालयों में बने होते थे। मंदिर के दरवाजों, झरोखों और अलंकृत दीवारों पर प्लास्टर लगाकर पेंट कर दिया गया है, जिससे पुराना निर्माण ढक गया है। गौरतलब हो कि संभल में अदालत के आदेश पर 19 नवंबर को कोट गर्वी इलाके में मुगलकालीन शाही जामा मस्जिद का सर्वे किए जाने के बाद से ही तनाव है। दरअसल कोर्ट में दायर याचिका में दावा किया गया कि जिस जगह यह मस्जिद बनी है, वहां पहले हरिहर नाथ मंदिर था। 24 नवंबर को जब मस्जिद के दूसरे सर्वे के लिए टीम आई तो हिंसा भडक़ उठी थी। इसमें चार लोगों की मौत हो गई और कई अन्य घायल हो गए। हिंसा मामले में पुलिस का एक्शन जारी है। 50 फूल, बरगद के पेड़, कुआं भी मौजूद सूत्रों के अनुसार, इस रिपोर्ट में मस्जिद के अंदर हिंदू धर्म से जुड़े 50 से ज्यादा फूल के निशान/कलाकृतियां मिलीं हैं. मस्जिद के अंदर दो बरगद के पेड़ हैं. अमूमन हिंदू धर्म के मंदिरों में ही बरगद के पेड़ की पूजा की जाती है. इतना ही नहीं मस्जिद में कुआं भी है, जो आधा अंदर है और आधा बाहर है. बाहर वाले हिस्से को ढंक दिया गया है. पुराने ढांचे को बदला गया, रिपोर्ट में दावा इतना ही नहीं सर्वे रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि पुराने ढांचे को बदला गया है. गुम्मद के हिस्से को प्लेन कर दिया गया है. साथ ही उस जगह नए कंस्ट्रशन के सबूत मिले हैं. मंदिर के शेप वाले स्ट्रक्चर पर प्लास्टर लगाकर पेंट कर दिया गया है. मस्जिद के अंदर जहां बड़ा गुम्मद है उस पर झूमर को तार से बांधकर एक जंजीर से लटकाया गया है. ऐसी जंजीर का इस्तेमाल मंदिर के घंटों को लटकाने में किया जाता है. मंदिरों के दरवाजों पर प्लास्टर लगाकर किया गया पेंट सूत्रों के अनुसार, विवादित स्थल में वैसे प्रतीक भी मिले हैं जो उस दौर के मंदिरों और देवालयों में बने होते थे. मंदिर के दरवाजों, झरोखों और अलंकृत दीवारों पर प्लास्टर लगाकर पेंट कर दिया गया है, जिससे पुराना निर्माण छिप गया है. रिपोर्ट में कहा गया है कि इसके शिलालेख के साथ छेड़छाड़ हुई है. ऐसा लगता है पुरानी लिखावट को मिटाकर नया शिलालेख बढ़ाने की कोशिश की गई है. जामा मस्जिद के पूर्व के हिस्से में गेट के कुछ हटाकर वहां नया निर्माण कराया गया. नमाज पढ़ने वाली मुख्य स्थान पर परिक्रमा जैसे स्ट्रक्चर मिले हैं. बताया जा रहा है जिसे बदलकर अब कोठरी में तब्दील कर दिया गया है. जामा मस्जिद के मुख्य गेट को तोड़कर अंदर तक रेलिंग लगाए जाने का भी जिक्र है. मुख्य गेट पर फूल की आकृति है और ऐसे ही कई फूल भीतर भी बने हैं. कई कलाकृतियों को हटाकर उन पर पेंट करने की कोशिश की गई है, कुछ आले (ताखे) भी मिले हैं जिन्हें बंद किया गया है. संभल में सर्वे के दौरान भड़की थी हिंसा बता दें कि संभल की शाही जामा मस्जिद को लेकर दावा किया गया है कि प्राचीन काल में ये हरिहर मंदिर था. इसको लेकर 19 नवंबर 2024 को सिविल कोर्ट में याचिका दायर की गई थी. उसी दिन सिविल जज सीनियर डिवीजन आदित्य सिंह ने मस्जिद के अंदर सर्वे करने का आदेश जारी कर दिया था. अदालत ने रमेश सिंह राघव को एडवोकेट कमिश्नर नियुक्त किया. उसी दिन शाम को करीब चार बजे सर्वे के लिए टीम मस्जिद पहुंच गई और करीब दो घंटे के सर्वे किया. हालांकि उस दिन सर्वे का काम पूरा नहीं हुआ. इसके बाद सर्वे की टीम 24 नवंबर को जामा मस्जिद पहुंची. दोपहर में मस्जिद के अंदर सर्वे हो रहा था, इसी दौरान भारी संख्या में लोग जमा हो गए. भीड़ ने पुलिस की टीम पर पत्थर फेंके, जिसके बाद अफरा-तफरी का माहौल हो गया. इस दौरान हुई हिंसा में पांच लोगों की मौत हो गई. मंदिर के ये निशान मस्जिद के अंदर दो वट वृक्ष के साथ कुंआ 50 से अधिक फूल के निशान, कलाकृतियां पुराने ढांचे को बदलने के भी मिले सबूत मंदिर की शेप वाले स्ट्रक्चर पर किया प्लास्टर recent visitors 60

प्रदेश में 6 माह का विशेष अभियान चलाकर 792 वन ग्रामों को राजस्व ग्राम में परिवर्तित करने : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश में 6 माह का विशेष अभियान चलाकर 792 वन ग्रामों को राजस्व ग्राम में परिवर्तित करने की अधिसूचना संबंधित कलेक्टर्स द्वारा जारी कर दी गई है। इसमें बैतूल जिले के 91, डिंडौरी के 86, मंडला के 75, खरगौन के 65, बड़वानी के 64, खंडवा के 51, सीहोर के 49, छिंदवाड़ा के 48, बालाघाट के 46, हरदा के 42, बुरहानपुर के 37, सिवनी के 28, नर्मदापुरम के 24, भोपाल के 14, धार के 13, देवास के 12, सिंगरौली के 11, नरसिंहपुर के 10, रायसेन के 7, टीकमगढ़ एवं जबलपुर के 5-5, सागर के 4, विदिशा, राजगढ़, इंदौर, कटनी और गुना के 1-1 गांव शामिल हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में कुल 827 वन ग्राम बचे थे। इनमें से 792 को राजस्व ग्राम में परिवर्तित किया जा चुका है। शेष 35 वन ग्रामों के वीरान/विस्थापित होने अथवा डूब क्षेत्र में होने से परिवर्तन करने की आवश्यकता नहीं रही। इस प्रकार विस्थापित होने वाले गांव को छोड़कर प्रदेश के सभी वन ग्रामों को राजस्व ग्रामों में परिवर्तित कर दिया गया है। इन 792 ग्रामों के राजस्व नक्शा बनाने का कार्य राजस्व विभाग द्वारा शुरू कर दिया है। भू-अभिलेख और नक्शा पूरे हो जाने से अब ग्रामवासियों को बड़ी सहूलियत होगी। अब यह सुविधाएं मिल सकेंगी मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वन ग्राम के राजस्व ग्राम में परिवर्तित हो जाने से ग्रामवासियों को अनेक सुविधाएं और विकास की सौगातें मिल सकेंगी। बँटवारा और नामांतरण होने के साथ फसलों की गिरदावरी भी हो सकेगी। प्राकृतिक आपदा पर फसल बीमा योजना का लाभ मिलेगा, आँगनवाड़ी एवं विद्यालय भवन स्वीकृत हो सकेंगे और स्वास्थ्य की बेहतर सुविधाएँ मिलेंगी। बिजली, पानी, सड़क और तालाबों आदि सुविधाओं का निर्माण भी हो सकेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि ग्राम सभा के माध्यम से वनवासियों के कल्याण के लिये कार्य का अवसर भी मिलेगा।   recent visitors 50

उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा 33 हज़ार से अधिक पदों पर की जा रही है भर्ती

भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने मंत्रालय भोपाल में लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग में ईएसबी एवं पीएससी के अंतर्गत प्रक्रियाधीन विभिन्न चिकित्सकीय एवं सहायक चिकित्सकीय पदों में भर्ती प्रक्रिया की समीक्षा की। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने निर्देश दिए कि सभी भर्ती प्रक्रियाएं निर्धारित समय सीमा में पूरी की जाएं। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं को सशक्त बनाने के लिए मैन-पॉवर की समय पर नियुक्ति अत्यंत आवश्यक है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने मेडिकल कॉलेजों में पे-प्रोटेक्शन के विषय पर आवश्यक प्रस्ताव तैयार कर, सभी औपचारिकताओं को पूर्ण करते हुए इसे शीघ्र कैबिनेट अनुमोदन के लिए प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। उन्होंने सीधी भर्ती एवं बैकलॉग पदों पर अब तक की गई कार्रवाई की पदवार समीक्षा करते हुए अधिकारियों को निर्देशित किया कि भर्ती प्रक्रिया में किसी भी स्तर पर अनावश्यक देरी न हो। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि सभी कैबिनेट स्वीकृत समस्त पदों पर भर्ती तय समय सीमा में पूरी की जाये। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार की समस्या आने पर उसे तत्काल संज्ञान में लाया जाए। सभी औपचारिकताएं समयबद्ध ढंग से पूरी हों। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग में 33 हज़ार से अधिक पदों पर भर्ती की जा रही है। आईपीएचएस मानक अनुसार 18 हज़ार 653 पद पर, 454 उन्नयित स्वास्थ्य संस्थानों में 7 हज़ार 977 पद पर, कैलाशनाथ काटजू हॉस्पिटल में 195 पदों पर, 18 शासकीय नर्सिंग महाविद्यालयों के लिये 414 पद सहित 273 अन्य स्वीकृत स्वास्थ्य संस्थानों में 5 हज़ार 779 चिकित्सकीय एवं सहायक चिकित्सकीय पदों पर नियुक्ति प्रक्रियाधीन है। बैठक में आयुक्त स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा तरुण राठी सहित अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।   recent visitors 37

छत्तीसगढ़ की साय सरकार ने डीजल पर लगने वाले टैक्स को 7% कम कर दिया

रायपुर छत्तीसगढ़ की साय सरकार ने डीजल पर लगने वाले टैक्स को 7% कम कर दिया है. इससे डीजल की कीमतों में  6 रुपए प्रतिलीटर की कमी आएगी. लेकिन हैरानी की बात यह है कि सस्ते कीमत पर डीजल आम आदमी को नहीं मिलेगा. इसका फायदा सिर्फ बड़े कारोबारियों को ही होगा. छत्तीसगढ़ सरकार के इस फैसले से राज्य के राजस्व को सालाना करीब साढ़े तीन सौ करोड़ का फायदा होने की संभावना है. 7 फीसदी घटा वैट दरअसल, छत्तीसगढ़ की साय सरकार ने अपने अधिकार में आने वाले छत्तीसगढ़ गुड्स एंड सर्विस टैक्स घटाया गया है. राज्य सरकार की तरफ से डीजल पर पहले 24 प्रतिशत टैक्स लिया जा रहा था. जिसे घटाकर अब 17% कर दिया गया है. 7% वैट घटने की वजह से करीब 6 रुपए की कमी डीजल के दामों में आएगी. इसको लेकर छत्तीसगढ़ टैक्स डिपार्टमेंट की तरफ से एक अधिसूचना भी जारी कर दी गई है. बता दें कि छत्तीसगढ़ में लगने वाले 24 प्रतिशत टैक्स के साथ डीजल इस वक्त 94 से 95 रुपए प्रति लीटर के करीब मिलता है. लेकिन अब 17% ही टैक्स लगेगा. जिससे डीजल की कीमत में 6 रुपये प्रति लीटर कमी देखने को मिलेगा. हालांकि, इस कीमत पर डीजल सिर्फ बड़े कारोबारियों को ही होगा. सरकार द्वारा जारी आदेश के मुताबिक,  इस कैटेगरी में आने वाले कारोबारी ही सस्ती दर पर डीजल खरीद पाएंगे. वहीं, आम आदमी को पहले जितनी कीमत पर ही डीजल उपलब्ध होगा. जानिए क्यों लिया ऐसा फैसला छत्तीसगढ़ सरकार  डीजल की बल्क खरीद पर 23 फीसदी वैट के साथ एक रुपया अतिरिक्त चार्ज लगाती थी. इसके चलते बड़े कारोबारी पड़ोसी राज्यों से डीजल खरीदा करते थे, जिससे राज्य सरकार को भारी राजस्व का नुकसान होता था. इसको देखते हुए छत्तीसगढ़ सरकार ने वैट में बड़ी राहत देने का ऐलान किया है. जिससे बाहरी डीजल की खरीद पर रोक लगेगी और कारोबारी अपने ही राज्य में डीजल खरीद सकेंगे. इससे राज्य सरकार को 17 फीसदी वैट की राशि मिलेगी. जानिए किसे मिलेगा फायदा छत्तीसगढ़ सरकार के टैक्स डिपार्टमेंट की तरफ से जारी की गई अधिसूचना के मुताबिक, डीजल के टैक्स में कटौटी का फायदा लेने के कुछ शर्तों को पूरा करना होगा. नए नियमय के मुताबिक,  इसका फायदा  सड़क परिवहन, एयरपोर्ट, रेलवे, नहर, बांध या अन्य सिंचाई कार्यों से जुड़े, पाइपलाइन पेयजल आपूर्ति, वॉटर ट्रीटमेंट, सीवरेज, कंस्ट्रक्शन, पुल, सुरंग, टर्मिनल बनाने, खनन के काम से जुड़े या खनन कारखाने की सामग्री का परिवहन करने वाले व्यापारियों को मिलेगा. कम कीमत पर डीजल उठाने के लिए व्यापारियों के पास  कैटेगरी B का पेट्रोलियम उत्पाद बल्क स्टोरेज लाइसेंस होना चाहिए. कारोबारी सिर्फ इंडियन ऑयल लिमिटेड, भारत पेट्रोलियम, हिंदुस्तान पेट्रोलियम, नायरा एनर्जी और रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड से ही थोक में डीजल लेने पर इस छूट के हकदार होंगे. recent visitors 89