चीन का ऐलान तिब्‍बत की सबसे लंबी नदी यारलुंग त्‍सांगपो पर बांध बनाएगा, थ्री जॉर्ज बांध से 3 गुना ज्‍यादा बिजली पैदा होगी

बीजिंग  चीन की सरकार ने ऐलान किया है कि वह तिब्‍बत की सबसे लंबी नदी यारलुंग त्‍सांगपो पर महाशक्तिशाली बांध बनाने जा रही है। इस बांध से चीन के धरती की स्‍पीड को प्रभावित करने वाले थ्री जॉर्ज बांध से 3 गुना ज्‍यादा बिजली पैदा होगी। चीन की सरकारी न्‍यूज एजेंसी शिन्‍हुआ ने बुधवार को इसकी जानकारी दी है। चीनी मीडिया का कहना है कि यह बीजिंग के लिए इंजीनियरिंग की बहुत बड़ी चुनौती बनने जा रहा है। चीन की सरकार इस बांध को बनाने के लिए 137 अरब डॉलर खर्च करने जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह चीनी बांध धरती पर चल रहे सिंगल इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर के किसी भी प्राजेक्‍ट को बहुत पीछे कर देगा। चीन जिसे यारलुंग त्‍सांगपो नदी कहता है, उसे भारत में ब्रह्मपुत्र नदी कहा जाता है। कई विशेषज्ञों का कहना है कि चीन इस दैत्‍याकार बांध का हथियार की तरह से इस्‍तेमाल करके भारत के पूर्वोत्‍तर राज्‍यों में कभी भी बाढ़ ला सकता है। करीब 2900 क‍िमी लंबी ब्रह्मपुत्र नदी भारत में आने से पहले तिबब्‍त के पठार से होकर गुजरती है। यह नदी तिब्‍बत में धरती की सबसे गहरी खाई बनाती है। तिब्‍बती बौद्ध भिक्षु इसे बहुत पवित्र मानते हैं। चीन इस बांध को भारत की सीमा करीब अपने भयंकर बारिश वाले इलाके में बनाने जा रहा है। चीन का अनुमान है कि इस बांध से 300 अरब किलोवाट घंटे बिजली हर साल मिलेगी। वहीं अभी बिजली पैदा करने के मामले में दुनिया का सबसे बड़ा बांध कहे जाने वाला चीन थ्री जॉर्ज हर साल 88.2 अरब किलोवाट घंटे बिजली पैदा करता है। चीन के हुबई प्रांत में स्थित थ्री जॉर्ज बांध यांगजी नदी पर बनाया गया है। धरती की स्‍पीड को प्रभावित कर रहा चीन का बांध थ्री जॉर्ज बांध में 40 अरब क्‍यूबिक मीटर पानी है और यह धरती की घूमने की रफ्तार को भी प्रभावित कर रहा है। इसकी वजह से धरती की घूमने की गति में हर दिन 0.06 माइक्रोसेकंड बढ़ रहा है। इससे दुनियाभर के वैज्ञानिक काफी चिंत‍ित हैं। इस बांध को सबसे पहले साल 1919 में चीन के पहले राष्‍ट्रपति सुन यात सेन ने बनाने का प्रस्‍ताव दिया था। उन्‍होंने कहा था कि इससे जहां बाढ़ में कमी आएगी, वहीं दुनिया के सामने यह चीन के ताकत का प्रतीक बनेगा। चीन अब तिब्‍बत में ब्रह्मपुत्र नदी पर नया विशालकाय बांध बनाने जा रहा है। चीन का इरादा है कि इस बेहद जटिल इंजीनियरिंग प्राजेक्‍ट को पूरा करने के लिए चार से लेकर छह तक 30 किमी लंबी सुरंग बनानी होगी। चीन को यह सुरंग नामचा बरवा पहाड़ के अंदर बनानी होगी ताकि महाशक्तिशाली ब्रह्मपुत्र नदी के आधे पानी को डायवर्ट किया जा सके। यही नहीं जिस जगह पर यह बांध बनाया जाना है, वहां भूकंप आने का काफी खतरा रहता है। चीन का यह बांध जब पूरा हो जाएगा तो इससे 30 करोड़ लोगों को आसानी से हर साल बिजली दी जा सकेगी। चीन का दावा है कि इस बांध को बनाने के लिए पर्यावरण के मानकों का पूरा ध्‍यान रखा जाएगा। भारत और बांग्‍लादेश दोनों को चीन के बांध से खतरा चीन ने यह नहीं बताया है कि तिब्बत में इस बांध को बनाने का काम कब शुरू होगा और ठीक-ठीक किस जगह पर इसे बनाया जाएगा। चीन इस ऐलान से भारत के लिए बड़ा खतरा पैदा हा सकता है। यह न केवल सुरक्षा के लिहाज से बल्कि पर्यावरण और आजीव‍िका के लिए है। ब्रह्मपुत्र नदी के पानी पर भारत और बांग्‍लादेश में करोड़ों लोग जीवन बिताते हैं। बांग्‍लादेश में इसे सूरमा नदी कहा जाता है। चीन अगर पानी रोकता है तो इन दोनों देशों में सूखा आ सकता है और अगर अचानक से पानी छोड़ता है तो बाढ़ आ सकती है। recent visitors 186

भाजपा को 2244 करोड़, BRS को मिला कांग्रेस से ज्यादा चंदा, जानें किस पार्टी को मिला कितना डोनेशन

नई दिल्ली राजनीतिक पार्टियों को मिलने वाले चंदे को लेकर भारत निर्वाचन आयोग ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर जानकारी शेयर कर की है। ECI द्वारा जारी डाटा के मुताबिक 2023-2024 में BJP को अन्य पार्टियों मुकाबले 2,244 करोड़ का चंदा मिला है। पिछले 10 साल से केंद्र की सत्ता पर काबिज BJP को पिछले साल के मुताबिक तीन गुना ज्यादा चंदा मिला है। इसके अलावा कांग्रेस को 255 करोड़ रुपये का डोनेशन मिला है। देश की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी कांग्रेस की बात करें तो उसे भी पिछले साल के मुकाबले तगड़ा मुनाफा हुआ है। पार्टी को पिछले साल 79 करोड़ रुपये का चंदा मिला था, जबकि इस साल 255 करोड़ रुपये का चंदा मिला है। चुनाव आयोग ने जारी की है रिपोर्ट चुनाव आयोग की वेबसाइट पर उपलब्ध 2023-24 की कंट्रीब्यूशन रिपोर्ट के मुताबिक, बीजेपी को प्रूडेंट इलेक्टोरल ट्रस्ट से 723.6 करोड़ रुपये का चंदा मिला, जबकि इसी ट्रस्ट ने कांग्रेस को 156.4 करोड़ रुपए दिए। 2023-24 में BJP को मिले चंदे का लगभग एक तिहाई और कांग्रेस को मिले चंदे का आधे से ज्यादा हिस्सा प्रूडेंट इलेक्टोरल ट्रस्ट से आया है। इसके अलावा 2022-23 में प्रूडेंट को चंदा देने वालों में मेघा इंजीनियरिंग एंड इंफ्रा लिमिटेड, सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया, आर्सेलर मित्तल ग्रुप और भारती एयरटेल जैसी बड़ी कंपनियां शामिल थीं। 2023-24 के लिए प्रूडेंट ने अभी अपने चंदा देने वालों की लिस्ट जारी नहीं की है। क्षेत्रीय पार्टियों ने भी दी है चंदे की जानकारी बता दें कि देश की कुछ क्षेत्रीय पार्टियों ने भी अपनी मर्जी से चंदे का हिसाब किताब दिया है और बताया है कि उन्हें इलेक्टोरल बॉन्ड्स के जरिए कितना चंदा मिला है। इनमें बीआरएस भी शामिल है, जिसे बॉन्ड के जरिए 495.5 करोड़ रुपये मिले। वहीं डीएमके को 60 करोड़ रुपये और वाईएसआर कांग्रेस को इलेक्टोरल बॉन्ड के जरिए से 121.5 करोड़ रुपये मिले हैं। जेएमएम ने बॉन्ड के जरिए 11.5 करोड़ रुपये मिलने की घोषणा की है। कांग्रेस पार्टी को ट्रस्टों के जरिए 156 करोड़ रुपये से ज्यादा का चंदा मिला है। प्रूडेंट ने 2023-24 में BRS और YSRCP को 85 करोड़ रुपये और 62.5 करोड़ रुपये डोनेशन दिया था। आंध्र प्रदेश की वर्तमान सत्ताधारी पार्टी की बात करें तो टीडीपी को प्रूडेंट से 33 करोड़ रुपये मिले। वहीं डीएमके को ट्राइंफ इलेक्टोरल ट्रस्ट और जयभारत ट्रस्ट से 8 करोड़ रुपये मिले। चुनाव आयोग की रिपोर्ट के मुख्य बिंदु: – बीजेपी को प्रूडेंट इलेक्टोरल ट्रस्ट से 723.6 करोड़ रुपये का चंदा मिला। यह पार्टी को मिले कुल चंदे का लगभग एक-तिहाई है। – कांग्रेस को प्रूडेंट ट्रस्ट से 156.4 करोड़ रुपये मिले, जो उसके कुल चंदे का आधे से अधिक है। – प्रूडेंट ट्रस्ट को 2022-23 में मेघा इंजीनियरिंग, सीरम इंस्टीट्यूट, आर्सेलर मित्तल और भारती एयरटेल जैसी कंपनियों से चंदा मिला था। 2023-24 के लिए दानदाताओं की सूची अभी जारी नहीं की गई है। क्षेत्रीय दलों की स्थिति: – बीआरएस को इलेक्टोरल बॉन्ड के जरिए 495.5 करोड़ रुपये मिले। – वाईएसआर कांग्रेस को 121.5 करोड़ रुपये का चंदा मिला। – डीएमके को 60 करोड़ रुपये और **जेएमएम** को 11.5 करोड़ रुपये का बॉन्ड मिला। – प्रूडेंट ट्रस्ट ने 2023-24 में बीआरएस को 85 करोड़ और वाईएसआर कांग्रेस को 62.5 करोड़ रुपये दिए। – टीडीपी को प्रूडेंट से 33 करोड़ रुपये का चंदा मिला। – डीएमके को ट्राइंफ इलेक्टोरल ट्रस्ट और जयभारत ट्रस्ट से 8 करोड़ रुपये मिले। recent visitors 126

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किया साहिबजादों के बलिदान का स्मरण, वीर बाल दिवस पर बच्चों ने संभाली गुरूद्वारे की व्यवस्था

वीर बाल दिवस, देश-धर्म और समाज के लिए बलिदान होने की अद्वितीय घटना है – मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रधानमंत्री मोदी ने करतारपुर साहिब के दर्शन और वीर बाल दिवस मनाने जैसी अनेक सौगातें दीं मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किया साहिबजादों के बलिदान का स्मरण, वीर बाल दिवस पर बच्चों ने संभाली गुरूद्वारे की व्यवस्था मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने हमीदिया रोड स्थित गुरुद्वारा पहुंच कर टेका मत्था भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने "वीर बाल दिवस" पर दिन की शुरूआत हमीदिया रोड के गुरुद्वारे में मत्था टेककर, साहिबजादों के बलिदान के स्मरण के साथ की। उन्होंने गुरबाणी का श्रवण भी किया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने "जो बोले सो निहाल-सत् अकाल" के उद्घोष के साथ अपना संबोधन आरंभ करते हुए कहा कि आज का दिन भारत ही नहीं, संपूर्ण विश्व के लिए विशेष है। गुरु गोविंद सिंह ने अपना संपूर्ण जीवन, धर्म-समाज और देश के लिए समर्पित कर दिया। ऐसे महान व्यक्तित्व का यह सौभाग्य था कि उनके परिवार ने भी स्वयं को देश पर बलिदान किया। यह इतिहास की अद्वितीय घटना है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने करतारपुर साहब के दर्शन की व्यवस्था और आज के दिन को वीर बाल दिवस के रूप में मनाने जैसी अनेकों सौगातें समाज को प्रदान की हैं। आने वाली पीढ़ियों को वीर बालकों की शहादत से अवगत कराना जरूरी मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि गुरु गोविंद सिंह जी के जीवन के विविध पक्षों को पाठ्यक्रम में सम्मिलित किया जा रहा है। आने वाली पीढ़ियों को वीर बालकों की शहादत से अवगत कराने के लिए उनके दृढ़ संकल्प, वीरता और बलिदान का उल्लेख भी पाठ्य पुस्तकों में होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी हमीदिया रोड द्वारा वीर बाल दिवस पर गुरुद्वारे की सभी व्यवस्थाएं बच्चों को सौंपने की पहल और बच्चों द्वारा पूरी जिम्मेदारी से किए जा रहे हैं दायित्व निर्वहन की सराहना की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शहादत की गाथा पुस्तक का किया विमोचन मुख्यमंत्री डॉ.यादव ने गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी हमीदिया रोड द्वारा प्रकाशित पुस्तक "साहिब गुरु गोविंद सिंह जी के लख्ते जिगर चार साहिबजादे एवं माता गुजरी जी की लासानी शहादत की गाथा" का विमोचन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने लघु फिल्म "शहीदी गाथा" भी देखी। इस अवसर पर भोपाल महापौर श्रीमती मालती राय, सांसद आलोक शर्मा, वरिष्ठ जनप्रतिनिधि सुनेहा बग्गा तथा सिख समाज के प्रतिनिधि उपस्थित थे।   recent visitors 89

प्रधानमंत्री मोदी ने इस कठिनाई को समझा और स्वामित्व योजना बनाई, मालिक को स्वामित्व दिलाया: शिवराज सिंह चौहान

भोपाल केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वामित्व योजना के जरिए ग्रामीण क्षेत्र के संपत्ति मालिकों को संपत्ति का स्वामित्व दिलाया है। गुरुवार को राजस्थान के जोधपुर पहुंचे केंद्रीय कृषि मंत्री और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने संवाददाताओं से चर्चा करते हुए कहा कि गांव में लोगों के पास अपनी संपत्ति तो होती थी, मकान भी होता था, मकान के आसपास जमीन भी होती थी। लेकिन, इसका स्वामित्व उनके पास कागज पर या ऑन रिकॉर्ड नहीं होता था। इसी कारण उस संपत्ति का अन्य उपयोग नहीं हो सकता था। जैसे बैंक से लोन लेने के लिए इस संपत्ति का उपयोग नहीं हो सकता था। कई बार बिना नक्शा अथवा स्वामित्व के विवाद भी बहुत होते थे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने इस कठिनाई को समझा और स्वामित्व योजना बनाई। उस योजना के अंतर्गत जो संपत्ति मकान के रूप में गांव में है, उसके नक्शे बनाए जा रहे हैं, ड्रोन के माध्यम से आधुनिक तकनीक का उपयोग करते हुए उस संपत्ति का स्वामित्व दिया जा रहा है। कई राज्यों में यह काम तेजी से हो रहा है। उन्होंने किसानों के लिए केंद्र सरकार के कार्यों का ब्योरा देते हुए कहा कि खेती को लाभ का व्यवसाय बनाने और किसानों के कल्याण के लिए प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में छह सूत्री रणनीति बनाई गई है। इसका लक्ष्य उत्पादन बढ़ाना, उत्पादन की लागत घटाना, उत्पादन के ठीक दाम देना, कृषि का विविधीकरण करना, परंपरागत खेती के अलावा फूलों, फलों, सब्जियों, औषधि की खेती को बढ़ावा देना, नुकसान हो तो उसकी भरपाई करना है। इसके साथ ही जैविक तथा प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की कोशिश करना भी शामिल है। केंद्रीय मंत्री ने आगे कहा किसानों को अच्छे बीज मिलें, इसके लिए प्रयास किए जा रहे हैं। इसके लिए आईसीआर काम कर रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने इसी साल 109 नए बीजों की किस्में जारी की है। पानी का बेहतर इंतजाम हो, इसके लिए नदी जोड़ो योजना बनाई गई है। इसके लिए मध्य प्रदेश और राजस्थान के बीच समझौता हुआ है। recent visitors 79

मध्यप्रदेश पश्चिम क्षेत्र स्मार्ट मीटर य़ोजना का प्रभावी संचालन कर रही, अब तक 9.20 लाख स्मार्ट मीटर स्थापित

भोपाल डिजिटल इंडिया की दिशा में तेजी से बढ़ते हुए मध्यप्रदेश पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी स्मार्ट मीटर य़ोजना का प्रभावी संचालन कर रही है। अब तक पश्चिम मप्र में 9 लाख 20 हजार से ज्यादा स्मार्ट मीटर स्थापित हो चुके हैं। सबसे ज्यादा स्मार्ट मीटर इंदौर, उज्जैन, रतलाम में लगाए गए हैं। मप्र पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी इंदौर की प्रबंध निदेशक सुश्री रजनी सिंह ने बताया कि अत्याधुनिक स्मार्ट मीटरों की तेजी से स्थापना हो रही है। वर्तमान में इंदौर जैसे महानगर के अलावा उज्जैन, रतलाम जैसे अन्य बड़े नगर, जिला मुख्यालयों, नपा क्षेत्रों मे बिजली उपभोक्ताओं के यहां प्राथमिकतापूर्वक निःशुल्क स्मार्ट मीटर लगाए जा रहे हैं। इंदौर शहर में अब तक 4 लाख से ज्यादा स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं। उज्जैन शहर में करीब 82 हजार, रतलाम शहर में 81 हजार से ज्यादा स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं। वहीं देवास शहर में 55 हजार, खरगोन शहर में 44250 स्मार्ट मीटर स्थापित हो चुके हैं। रतलाम, धार, झाबुआ, मंदसौर, नीमच, शाजापुर, खंडवा, बड़वानी, आगर, बुरहानपुर क्षेत्र में अब भी स्मार्ट मीटर स्थापित किए जा रहे हैं। अब तक पश्चिम मप्र में 9.20 लाख स्मार्ट मीटर लग चुके हैं। इन मीटरों की स्थापना के बाद रीडिंग बिलिंग संबंधी विवादों में व्यापक कमी आई हैं, ये स्मार्ट मीटर बिजली कंपनी के "ऊर्जस" ऐप पर लाइव हैं। उपभोक्ता कहीं से भी अपने घर की "ऊर्जस" ऐप पर खपत देख सकता हैं। स्मार्ट मीटर से संबंद्ध उपभोक्ताओं की बिल भुगतान नहीं करने पर यदि बिजली बंद की जाती हैं, तो कैशलेस बिजली बिल भुगतान होने के तुरंत बाद बिजली ऑटोमेटिक चालू हो जाती है। उपभोक्ताओं को बिजली दफ्तर नहीं जाना होता, न ही किसी कर्मचारी को भुगतान रसीद दिखाने की जरूरत होती है।   recent visitors 71

पार्वती-कालीसिंध-चंबल नदी लिंक परियोजना की लागत 28 हजार 798 करोड़ और सैंच्य क्षेत्र 04 लाख 72 हजार 970 हेक्टेयर होगा

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई मंत्रि-परिषद की बैठक में संशोधित पार्वती-कालीसिंध-चंबल नदी लिंक परियोजना के अंतर्गत प्रशासकीय स्वीकृति से शेष रही 16 परियोजनाओं के समूह को प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई। इनकी लागत 28 हजार 798 करोड़ और सैंच्य क्षेत्र 04 लाख 72 हजार 970 हेक्टेयर होगा। जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट ने बताया कि स्वीकृत परियोजना से मध्यप्रदेश में मालवा एवं चंबल क्षेत्र के 10 जिले गुना, शिवपुरी, मुरैना, उज्जैन, सीहोर, इंदौर, देवास आगर मालवा, शाजापुर एवं राजगढ़ के 1865 ग्रामों के 4 लाख 73 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में नवीन सिंचाई क्षमता निर्मित होगी। साथ ही चंबल दाईं मुख्य नहर प्रणाली के आधुनिकीकरण से भिंड, मुरैना एवं श्योपुर जिलों के 1205 ग्रामों में 3 लाख 62 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा सुनिश्चित होगी। मंत्री सिलावट ने बताया कि संशोधित पार्वती-कालीसिंध-चंबल नदी लिंक परियोजना सह पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना का विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन तैयार करने के लिए सचिव भारत सरकार एवं दोनों राज्यों के अपर मुख्य सचिव के बीच मध्यप्रदेश और राजस्थान के मुख्यमंत्री की उपस्थिति में 28 जनवरी 2024 को समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। यह परियोजना केंद्र द्वारा वित्त पोषित है, जिसकी लागत का वहन 90% केंद्र और 10% राज्यों द्वारा किया जाएगा। अपर मुख्य सचिव डॉ. राजेश राजौरा ने बताया कि प्रयोजन अंतर्गत मध्यप्रदेश की परियोजनाओं के क्रियान्वयन के लिए कुल अनुमानित लागत 35 हजार करोड़ आकलित की गई है। परियोजना के अंतर्गत मध्य प्रदेश में कुल 21 परियोजना प्रस्तावित थी, जिनमें से पाडोन-एक एवं पाडोन-दो सिंचाई परियोजना के कमांड क्षेत्र को इकजाई कर पाडोन वृहत सूक्ष्म सिंचाई परियोजना एवं पावा सिंचाई परियोजना तथा कटीला सिंचाई परियोजना के कमांड क्षेत्र को इकजाई कर कटीला पावा वृहत सूक्ष्म सिंचाई परियोजना, इस प्रकार 19 परियोजनाओं का कार्य सम्मिलित है। इनमें से 2 परियोजना उज्जैन जिले की चितावद वृहत सिंचाई परियोजना की प्रशासकीय स्वीकृति 2066.93 करोड़ रूपये 5 अक्टूबर 2023 को और सेवरखेड़ी, सिलारखेड़ी सिंचाई परियोजना के लिये 614.53 करोड़ रूपये की प्रशासकीय स्वीकृति दी जा चुकी है। मंदसौर जिले की मल्हारगढ़ (शिवना) सूक्ष्म सिंचाई परियोजना की प्रशासकीय स्वीकृति प्रक्रियाधीन है। शेष 16 परियोजनाओं को मंत्रि-परिषद द्वारा प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई। इन परियोजनाओं को मिली प्रशासकीय स्वीकृति मध्यप्रदेश राज्य की परियोजनाओं के क्रियान्वयन के लिये कुल अनुमानित लागत 35000 करोड़ आकलित की गई है। मंत्रि-परिषद द्वारा स्वीकृत परियोजनाओं में धनवाडी वृहद सूक्ष्म सिंचाई परियोजना, नैनागढ बैराज वृहद सूक्ष्म सिंचाई परियोजना, सोनपुर वृहद सूक्ष्म सिंचाई परियोजना, कटीला-पवा वृहद सूक्ष्म सिंचाई परियोजना, श्यामपुर बैराज वृहद सूक्ष्म सिंचाई परियोजना, पार्वती कॉम्प्लेक्स वृहद सूक्ष्म सिंचाई परियोजना, जेठला (वैलेंसिंग रिजरवायर) वृहद सूक्ष्म उदवहन सिंचाई परियोजना, कुम्भराज वृहद सूक्ष्म सिंचाई परियोजना, पाडोन वृहद सूक्ष्म सिंचाई परियोजना (पाडोन-1 एवं पाडोन-2 बैराज), रंजीत सागर काम्पलेक्स वृहद सूक्ष्म सिंचाई परियोजना, कालीसिंध कॉम्पलेक्स वृहद सूक्ष्म सिंचाई परियोजना, लखुंदर काम्पलेक्स वृहद सूक्ष्म सिंचाई परियोजना, बछौड़ा देपालपुर वृहद सूक्ष्म सिंचाई परियोजना, सीकरी सुल्तानपुर मध्यम सूक्ष्म सिंचाई परियोजना, सोनचिरी मध्यम सूक्ष्म सिंचाई परियोजना एवं चम्बल नहर प्रणाली के नवीनीकरण और आधुनिकीकरण शामिल है।   recent visitors 67

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा -भारत की सनातन परम्परा की रक्षा के लिए गुरू गोविंद सिंह ने अपने साहिबजादों को बलिदान कर दिया

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भारत की सनातन परम्परा की रक्षा के लिए गुरू गोविंद सिंह ने अपने साहिबजादों को बलिदान कर दिया, परंतु वे झुके नहीं। साहिबजादों द्वारा देश और धर्म के लिए बलिदान हो जाना उनके अवतारी स्वरूप से हमें अवगत कराता है। मुगलों द्वारा क्रूरता की पराकाष्ठा करते हुए अल्पायु बालकों को शहीद कर देना सदियों बाद भी हमें झकझोर देता है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने अमर बलिदानियों की पुण्य-स्मृतियों को वीर बाल दिवस के रूप में मनाने की परम्परा वर्ष 2022 से आरंभ की। वीर बलिदानियों की स्मृति को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए राज्य शासन द्वारा भी जिला स्तर पर कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं। कीर्तन से हुआ शौर्य, वीरता, बलिदान और करूणा का प्रकटीकरण मुख्यमंत्री डॉ. यादव भारत भवन में वीर बाल दिवस पर आयोजित साहिबजादों की शहादत गाथा कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर कीर्तन जत्थे द्वारा साहिबजादों की शहादत गाथा प्रस्तुत की गई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कीर्तन के माध्यम से अभिव्यक्त शौर्य, वीरता, बलिदान और करूणा की भावनाओं के संवेदनशील और प्रभावशाली प्रस्तुती की सराहना की। इस अवसर पर संस्कृति एवं पर्यटन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री धर्मेन्द्र सिंह लोधी, सांसद श्री वी.डी. शर्मा, श्री हितानंद शर्मा, श्री राहुल कोठारी, सुश्री नेहा बग्गा सहित जन-प्रतिनिधि उपस्थित थे। मात्र 6 और 9 वर्ष की आयु में साहिबजादों ने धर्म और मानवता की रक्षा के लिए किए प्राण न्यौछावर उल्लेखनीय है कि गुरू गोविंद सिंह जी के वीर पुत्रों के अद्वितीय बलिदान और साहस के प्रति सम्मान प्रकट करने के उद्देश्य से प्रतिवर्ष 26 दिसम्बर वीर बाल दिवस के रूप में मनाया जाता है। यह दिन गुरू जी के छोटे साहिबजादे जोरावर सिंह और साहिबजादे फतेह सिंह के बलिदान को समर्पित है। दोनों ही साहिबजादों को दीवार में जीवित चुनवा दिया गया था। धर्म और मानवता की रक्षा के लिए जब उन्होंने अपने प्राण न्यौछावर किए तब साहिबजादे जोरावर सिंह की आयु मात्र 9 वर्ष और साहिबजादे फतेह सिंह की आयु सिर्फ 6 वर्ष थी।   recent visitors 57