प्रधानमंत्री मोदी की अपेक्षाओं पर निरंतर खरा उतरेगा मध्यप्रदेश : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

विचार मंथन द्वितीय सत्र सार्थक रहा मंथन: 2024, मंत्रीगण के मिले महत्वपूर्ण सुझाव : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मध्यप्रदेश को अनेक क्षेत्रों में हब बनाने पर हुआ गंभीर विचार-विमर्श प्रधानमंत्री मोदी की अपेक्षाओं पर निरंतर खरा उतरेगा मध्यप्रदेश अगला मंथन शिविर विभागीय स्तर पर होगा भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि पूरे दिन चला मंथन-2024 का आयोजन सार्थक रहा। मुख्य रूप से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा युवा, गरीब, महिला और किसान, इन चार प्रमुख वर्गों के कल्याण के लिए निर्धारित की गई प्राथमिकता के अनुसार कार्य किया जाएगा। इसके लिए शीघ्र ही चार मिशन कार्य करेंगे। प्रधानमंत्री मोदी ने सुशासन का महत्व प्रतिपादित किया है। सुशासन को दृष्टिगत रखते हुए आज सम्पन्न मंथन शिविर बैठक में विस्तृत विचार- विमर्श किया गया है। आज लिए गए निर्णय के अनुसार इस तरह की विमर्श बैठकें अब विभाग स्तर पर की जाएंगी। मध्यप्रदेश को अनेक क्षेत्रों में हब बनाने पर गुरूवार को गंभीर विचार-विमर्श हुआ है। मंत्रि-परिषद के सदस्यों को विभागीय कार्यों की समीक्षा करने के निर्देश दिए गए हैं। अधिक से अधिक जनकल्याण राज्य सरकार का लक्ष्य है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की अपेक्षाओं पर खरा उतरने के लिए मध्यप्रदेश सरकार निरंतर प्रयास करेगी। प्रदेश में अस्पतालों में वरिष्ठ रोगियों को सम्मान और सुविधा प्राप्त हो, इस दृष्टि से उनकी पृथक पंक्ति और बैठक का प्रबंध किया जाएगा। प्रदेश में चिकित्सा सुविधाओं ओर चिकित्सा शिक्षा संस्थाओं की संख्या निरंतर बढ़ रही है। प्रदेश में मेडिकल टूरिज्म की दृष्टि से भी प्रयास किए जाएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश को औद्योगिक हब बनाने के लिए रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव की जो शुरूआत की गई, उसके सफल परिणाम मिल हैं। उन्होंने बतायया कि प्रधानमंत्री फरवरी 2025 में भोपाल में होने वाली ग्लोबल इंवेस्टर्स समिट में आयेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उद्योगों को भूमि प्रदान करने के लिए उदार नीति का पालन करते हुए अधोसंरचना विकास के प्रयास बढ़ाए जाएंगे। उद्योग स्वयं विभिन्न विकास कार्यों को आवंटित भूमि के अनुसार क्रियान्वित करेंगे, इससे राज्य की अपनी सम्पदा के विकास और सुविधाओं में वृद्धि संभव होगी। प्रधानमंत्री मोदी ने मध्यप्रदेश की प्रशंसा की गई , प्रदेश विभिन्न क्षेत्रों में तेजी से आगे बढ़ेगा मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि स्व. अटल जी की 100वीं जयंती पर खजुराहो में 25 दिसम्बर को केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना के भूमि-पूजन के अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि मध्यप्रदेश ने एक वर्ष में प्रगति के नए आयाम स्थापित किए हैं। मध्यप्रदेश के पर्यटन की उन्होंने सराहना की और विश्व के 10 बड़े पर्यटन संभावनाओं से भरे क्षेत्रों में मध्यप्रदेश के शामिल होने का विशेष उल्लेख किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार प्रधानमंत्री मोदी जी द्वारा किए गए मध्यप्रदेश के इस विशेष उल्लेख का सदैव सम्मान करेगी। मध्यप्रदेश पर्यटन सहित विभिन्न क्षेत्रों में तेजी से आगे बढ़ेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश मेडिकल टूरिज्म के क्षेत्र में भी निरंतर कार्य करेगा। प्रदेश में 30 मेडिकल कॉलेज संचालित हो रहे हैं। आने वाले एक वर्ष में इनकी संख्या 50 से अधिक हो जाएगी। पांच नए आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज प्रारंभ करने की पहल हुई है और शीघ्र ही प्रदेश में इनकी संख्या 60 हो जाएगी। प्रदेश में 55 जिले हैं, जिलों से इससे अधिक मेडिकल कॉलेज प्रदेश में हो जाएंगे, जिससे मध्यप्रदेश चिकित्सा का हब भी बनेगा। विभिन्न क्षेत्रों में मध्यप्रदेश बनेगा सिरमौर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश के प्रतिभाशाली युवा कार्य और रोजगार के लिए अन्य प्रदेशों में जाते हैं। सूचना प्रौद्योगिकी आधारित उद्योगों के विकास, नए मेडिकल कॉलेजों के प्रारंभ होने से उत्पन्न होने वाले रोजगार के अवसर, शिक्षा के क्षेत्र में कार्य की संभावनाओं और कृषि एवं नवकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में विभिन्न कार्यों को गति मिलने से बड़ी संख्या में युवाओं को काम मिलेगा। मध्यप्रदेश पर्यटन क्षेत्र में हब भी बनेगा। इसके साथ ही चिकित्सा क्षेत्र और आईटी में भी हब बनेगा। संभाग स्तर पर हुई रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव के प्रस्ताव क्रियान्वित होंगे। हरित अर्थ व्यवस्था, स्वच्छता, सुशासन के ठोस प्रयासों से राज्य के विकास को गति मिलेगी। मध्यप्रदेश सौर ऊर्जा के उपयोग में आगे है। ओंकारेश्वर में प्रारंभ फ्लोटिंग सोलर प्लांट एक उदाहरण है। नर्मदापुरम जिले के मोहासा-बावई में नवकरणीय ऊर्जा उपकरण निर्माण की इकाइयों को स्थापित करने वाला मध्यप्रदेश पहला राज्य है। किसानों को सस्ती ही नहीं मुफ्त बिजली देने का कार्य नवकरणीय ऊर्जा उत्पादन के उपायों से संभव हो रहा है। यह क्रांतिकारी परिर्वतन है। मंथन शिविर में मुख्यमंत्री डॉ.यादव ने क्या कहा     टीम भावना से कार्य करने का प्रयास आवश्यक है।     युवा, महिला, किसान और गरीब कल्याण पर आज मंथन हुआ है।     मंथन शिविर मंत्रीगण और विभागों को कार्यों से यश-प्राप्ति का अवसर भी है।     प्रदेश का बजट पांच वर्ष में दोगुना करने का प्रयास है।     इस मंथन बैठक के बाद आगामी मंथन विभागीय स्तर पर होगा।     ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में प्रधानमंत्री मोदी जी ने फरवरी माह में मध्यप्रदेश आने की सहमति दी है। यह समिट अपेक्षा से अधिक सफल होगी।     मंत्रीगण पूरे वर्ष के कार्यों की समीक्षा करें।     विभाग स्तर की समीक्षा से यह ज्ञात होगा कि किस क्षेत्र में प्रयास बढ़ाने हैं।     समान स्वरूप के कार्य विभाग किस तरह संयुक्त रूप से कर सकते हैं, यह विचार-विमर्श भी किया गया है।     कुपोषण कम करने के अभियान और 23 जिलों में टीबी नियंत्रण के अभियान सफल हों, ऐसे प्रयास हों।     मंत्री एवं वरिष्ठ अधिकारी पूर्व की महत्वपूर्ण घोषणाओं और निर्णयों के क्रियान्वयन पर ध्यान दें।     सायबर अपराध नियंत्रण के प्रयास बढ़ाने की आवश्यकता है, इसके लिए निर्धारित रणनीति के अमल पर ध्यान दिया जाए।     मध्यप्रदेश राज्य परिवहन निगम को प्रदेश में पुन: प्रारंभ करने के संबंध में प्रक्रिया प्रारंभ की गई है।     नगरों के विकास के लिए टियर-2 और टियर 3 श्रेणी के अनुसार आबादी के आधार पर अधोसंरचना विकास के लिए भारत सरकार से अधिकतम सहयोग प्राप्त करने के लिए भी मार्ग निकाले जा रहे हैं।     वृंदावन ग्राम और नगरों में गीता भवनों की योजना को शीघ्र क्रियान्वित किया जाएगा।     कृष्ण पाथेय के विकास और राम वन गमनपथ के कार्यों को गति दी जाएगी।     दीर्घ अवधि की योजना … Read more

पांढुर्णा: भाजपा जिला अध्यक्ष के लिए संगठन ने भेजा नामों का पैनल, आलाकमान करेगा अंतिम फैसला

पांढुर्णा भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पांढुर्णा जिला संगठन में जिलाध्यक्ष के चयन को लेकर प्रक्रिया संपन्न हो चुकी है। रायशुमारी के माध्यम से संभावित नामों का चयन किया गया और पैनल तैयार कर प्रदेश नेतृत्व को भेजा गया। इसके बाद केंद्रीय नेतृत्व इन नामों का आकलन कर अंतिम निर्णय करेगा। जिलाध्यक्ष चयन प्रक्रिया: पहली बार नई रणनीति भाजपा ने पहली बार लोकसभा और विधानसभा चुनावों की तरह जिलाध्यक्षों के चयन के लिए विस्तृत और पारदर्शी प्रक्रिया अपनाई है। पार्टी ने तय किया है कि संगठनात्मक क्षमता, सामाजिक समीकरण, और नेतृत्व कौशल को प्राथमिकता दी जाएगी। चयन प्रक्रिया का स्वरूप भाजपा जिला कार्यालय में 12 मंडल अध्यक्षों, तीनों तहसीलों (पांढुर्णा, सौंसर, नांदनवाड़ी) के वरिष्ठ पदाधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के साथ रायशुमारी की गई। रायशुमारी के आधार पर तीन-तीन नामों का पैनल तैयार किया गया। सभी नाम प्रदेश भाजपा कार्यालय भेजे गए, जहां से यह सूची केंद्रीय नेतृत्व को भेजी जाएगी। केंद्रीय नेतृत्व दावेदारों का मूल्यांकन कर अंतिम चयन करेगा। प्रबल दावेदार और सामाजिक समीकरण जिलाध्यक्ष पद के लिए कई नाम चर्चा में हैं। इनमें मुख्यतः कुनबी समाज से वर्तमान जिलाध्यक्ष श्रीमती वैशाली ताई महाले, राहुल मोहोड़, संदीप मोहड़, देवीदास राउत, वही पावर समाज से श्रीमती सुनीता यादवराव डोबले, क्रिष्णकुमार डोबले और तेली समाज से श्रीमती मीनाक्षी ताई खुरसंगे, ठाकुर समाज से नरेंद्र परमार जैसे दावेदार भी चर्चा में रहे। हालाकि संगठन नेतृत्व में प्रबल नाम वर्तमान जिलाध्यक्ष श्रीमती वैशाली महाले का माना जा रहा है। केंद्रीय नेतृत्व करेगा अंतिम फैसला संगठन ने सामाजिक समीकरण और कार्यकर्ताओं की अनुभवजन्य क्षमता को ध्यान में रखते हुए पैनल तैयार किया है। केंद्रीय नेतृत्व सभी नामों का आकलन करेगा और जनवरी 2025 तक जिलाध्यक्ष के नाम की घोषणा संभव है। संघ की पृष्ठभूमि और संगठनात्मक अनुभव को मिलेगी प्राथमिकता भाजपा ने स्पष्ट किया है कि ऐसे कार्यकर्ताओं को प्राथमिकता दी जाएगी, जो लंबे समय से संगठन से जुड़े हैं, जिनकी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की पृष्ठभूमि है, और जिन्होंने संगठन में अनुकरणीय कार्य किया है। भाजपा की नई रणनीति इस बार भाजपा ने जिलाध्यक्ष चयन में पारदर्शिता और संगठनात्मक शक्ति को बढ़ाने के लिए नई रणनीति अपनाई है। पार्टी का उद्देश्य है कि सक्षम और प्रभावी नेतृत्व तैयार किया जाए, जो आगामी लोकसभा और विधानसभा चुनावों में संगठन को मजबूत कर सके। recent visitors 67

पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह नहीं रहे, 92 साल की उम्र में AIIMS में निधन

नई दिल्ली भारत के पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह का गुरुवार, 26 दिसंबर 2024 को निधन हो गया। 92 वर्षीय डॉ. मनमोहन सिंह को स्वास्थ्य बिगड़ने के बाद गुरुवार शाम एम्स, नई दिल्ली में भर्ती कराया गया था, जहां इलाज के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली। एम्स नई दिल्ली ने मनमोहन के निधन की पुष्टि करते हुए न्यूज बुलेटिन जारी किया है। एम्स ने कहा, "अत्यंत दुःख के साथ हम भारत के पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के निधन की सूचना देते हैं। उन्होंने 92 वर्ष की उम्र में अंतिम सांस ली। वे उम्र से संबंधित बीमारियों के कारण उपचाराधीन थे और 26 दिसंबर 2024 को घर पर अचानक बेहोश हो गए थे। घर पर ही उन्हें तुरंत पुनर्जीवित करने के उपाय शुरू किए गए। उन्हें रात 8:06 बजे एम्स, नई दिल्ली के मेडिकल इमरजेंसी में लाया गया। तमाम कोशिशों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका और रात 9:51 बजे उन्हें मृत घोषित कर दिया गया।" पीएम मोदी ने भी पूर्व पीएम मनमोहन सिंह को श्रद्धांजलि दी है। पीएम मोदी ने लिखा, "भारत अपने सबसे प्रतिष्ठित नेताओं में से एक डॉ. मनमोहन सिंह जी के निधन पर शोक मना रहा है। साधारण पृष्ठभूमि से उठकर वे एक प्रतिष्ठित अर्थशास्त्री बने। उन्होंने वित्त मंत्री सहित विभिन्न सरकारी पदों पर कार्य किया और वर्षों तक हमारी आर्थिक नीति पर अपनी गहरी छाप छोड़ी। संसद में उनके हस्तक्षेप भी बहुत ही व्यावहारिक थे। हमारे प्रधानमंत्री के रूप में उन्होंने लोगों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए व्यापक प्रयास किए।" इससे पहले कांग्रेस पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं ने इस खबर की पुष्टि की। पूर्व केंद्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद, हरियाणा के पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने मनमोहन सिंह के निधन पर श्रद्धांजलि दी। डॉ. मनमोहन सिंह अपनी सरलता, ईमानदारी और उत्कृष्ट आर्थिक नीतियों के लिए जाने जाते थे। उनका निधन भारतीय राजनीति और अर्थव्यवस्था के लिए एक अपूरणीय क्षति है। उनका अंतिम संस्कार पूरे राजकीय सम्मान के साथ किया जाएगा।  मनमोहन सिंह के निधन पर हरियाणा के सीएम नायब सैनी ने जताया दुख पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के निधन पर हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा, "देश ने एक राजनेता ही नहीं, बल्कि एक अर्थशास्त्री भी खो दिया है। पंजाब के एक गांव में जन्म लेने से लेकर अर्थशास्त्री और प्रधानमंत्री बनने तक का उनका सफर राष्ट्र सेवा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उन्हें उनकी सादगी और उनके आर्थिक फैसलों के लिए हमेशा याद किया जाएगा। मैं ईश्वर से प्रार्थना करता हूं कि उनकी आत्मा को शांति मिले।" प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिवंगत पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह को अंतिम श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की। आर्थिक सुधार के प्रणेता और ‘अनिच्छुक राजा’ ब्रिटिश मीडिया BBC ने डॉ. मनमोहन सिंह के निधन की जानकारी देते हुए अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि, ‘भारत के पूर्व प्रधानमंत्री और आर्थिक सुधार के प्रणेता मनमोहन सिंह का 92 वर्ष की आयु में निधन हो गया है. सिंह भारत के सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले प्रधानमंत्रियों में से एक थे और उन्हें प्रमुख उदारवादी आर्थिक सुधारों का निर्माता माना जाता है.’ न्यूज़ एजेंसी Reuters ने लिखा है, ‘प्रधानमंत्री के तौर पर अपने पहले कार्यकाल में वह ‘अनिच्छुक राजा’ के तौर पर वर्णित किए गए. मृदुभाषी मनमोहन सिंह, जिनका गुरुवार को 92 वर्ष की आयु में निधन हो गया, यकीनन भारत के सबसे सफल नेताओं में से एक थे. वह भारत का नेतृत्व करने वाले पहले सिख प्रधानमंत्री थे. उन्हें भारत को अभूतपूर्व आर्थिक विकास की ओर ले जाने और करोड़ों लोगों को भयंकर गरीबी से बाहर निकालने का श्रेय दिया जाता है. क़तरी ब्रॉडकास्टर अल जज़ीरा ने पूर्व प्रधानमंत्री के निधन पर लिखा है कि, वह 90 के दशक में भारत के आर्थिक उदारीकरण के वास्तुकार थे. पूर्व भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने वित्त मंत्री के तौर पर अपने पहले कार्यकाल में भारत की अर्थव्यवस्था को उदार बनाया. अलजज़ीरा ने लिखा कि, ‘सौम्य स्वभाव वाले टेक्नोक्रेट सिंह भारत के सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले प्रधानमंत्रियों में से एक थे. डॉ. मनमोहन सिंह: एक महानायक की जीवन यात्रा डॉ. मनमोहन सिंह का जन्म 26 सितंबर 1932 को अविभाजित भारत के पंजाब प्रांत (अब पाकिस्तान में) के गाह गांव में हुआ था। विभाजन के बाद उनका परिवार भारत आ गया। बचपन से ही वे मेधावी छात्र रहे। उन्होंने पंजाब विश्वविद्यालय से अपनी स्नातक की पढ़ाई पूरी की और आगे की पढ़ाई के लिए कैम्ब्रिज और ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय गए। डॉ. सिंह ने 1950 के दशक में अपने करियर की शुरुआत आर्थिक मामलों में शोधकर्ता के रूप में की। उनके उल्लेखनीय योगदान के कारण उन्हें 1971 में भारत सरकार में आर्थिक सलाहकार के पद पर नियुक्त किया गया। बाद में वे योजना आयोग के उपाध्यक्ष और भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर के पद पर भी रहे। उदारीकरण के जनक 1991 में, भारत जब गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहा था, उस समय डॉ. मनमोहन सिंह को वित्त मंत्री नियुक्त किया गया। उन्होंने ऐतिहासिक आर्थिक सुधारों की शुरुआत की, जिसने भारत को आर्थिक उदारीकरण की राह पर आगे बढ़ाया। उनके नेतृत्व में अर्थव्यवस्था के कई क्षेत्रों में विदेशी निवेश के दरवाजे खुले और आर्थिक विकास को गति मिली। प्रधानमंत्री के रूप में डॉ. मनमोहन सिंह 2004 से 2014 तक दो कार्यकालों के लिए भारत के प्रधानमंत्री रहे। वे पहले ऐसे प्रधानमंत्री थे, जो लोकसभा चुनाव नहीं जीते थे और राज्यसभा सदस्य रहते हुए इस पद पर आसीन हुए। उनके कार्यकाल में आर्थिक विकास और सामाजिक योजनाओं पर विशेष जोर दिया गया। निजी जीवन डॉ. मनमोहन सिंह एक सादगीपूर्ण जीवन जीने वाले नेता थे। उनकी पत्नी गुरशरण कौर और तीन बेटियां हैं। वे साहित्य, संगीत और अध्यात्म में गहरी रुचि रखते थे। डॉ. मनमोहन सिंह के निधन की खबर सुनते ही पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई। 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इंदौर-दाहोद नई रेल लाइन परियोजना सबसे बड़ी अड़चन 2.9 किमी लंबी सुरंग, टनल में फिनिशिंग का काम जारी

इंदौर इंदौर-दाहोद नई रेल लाइन परियोजना को शुरू हुए करीब 11 साल हो चुके हैं, लेकिन 205 किमी लंबी रेल लाइन के प्रोजेक्ट में पिछले दो वर्षों में ही तेजी आई है। इस पूरी परियोजना में सबसे बड़ी अड़चन पीथमपुर स्थित 2.9 किमी लंबी सुरंग का प्रारंभिक कार्य पूरा हो चुका है। अब फिनिशिंग का कार्य शुरू किया गया है। हर दिन सिर्फ छह मीटर हिस्से में ही फिनिशिंग की जा रही है। इस कारण इस परियोजना में देरी हो रही है। जल्द ही रेलवे यहां पांच मशीनें लगाकर हर दिन 48 मीटर फिनिशिंग का काम शुरू करेगा, ताकि मार्च माह तक यह काम पूरा किया जाकर ट्रैक बिछाने काम शुरू हो सके। टनल में फिनिशिंग का काम जारी जून माह में सुरंग के दोनों हिस्सों को आपस में मिला दिया गया था। इसके बाद टनल से पानी निकालने का काम शुरू कर दिया गया था। करीब दो माह पहले टनल के आंतरिक हिस्से में सीमेंट लेयर तैयार की गई। इसके बाद पिछले सप्ताह ही फिनिशिंग का काम शुरू किया गया है। पानी का रिसाव रोकने का काम इसमें पानी का रिसाव रोकने के लिए जेंट्री मशीन के माध्यम से वाटरप्रूफ जियो टैक्सटाइल और मेमरीन लगाई जा रही है। इसके बाद भी पानी का रिसाव हो तो ड्रेन लाइन भी बनाई गई है। शुरुआत में एक छह मीटर की जेंट्री मशीन के माध्यम से हर दिन छह मीटर हिस्से में फिनिशिंग का काम किया जा रहा है। इस गति से काम होता है तो वर्षभर में ही टनल का काम पूरा नहीं होगा। इसलिए छह मीटर की एक अन्य जेंट्री मशीन और 12 मीटर की तीन जेंट्री मशीन जल्द शुरू की जाएगी, ताकि यह काम मार्च तक पूरा हो सके। दुर्घटना होने पर रेस्क्यू के लिए बनेगी लिफ्ट सुरंग के सेंटर पाइंट को फिलहाल खुला ही रखा गया है। फिनिशिंग और ट्रैक का काम पूरा होने पर इसे कवर कर दिया जाएगा। इसी जगह पर एक लिफ्ट भी लगाई जाएगी। जिसका उपयोग आपातकाल स्थिति में कर्मचारियों को नीचे भेजने और यात्रियों को बाहर निकालने के लिए होगा। बता दें कि इस बार बजट में प्रोजेक्ट के लिए 600 करोड़ रुपये मिले हैं। पूरी परियोजना को 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य इस परियोजना का एक बड़ा हिस्सा आदिवासी अंचल को रेल सेवाओं से जोड़ेगा। परियोजना में पीथमपुर, सागौर, गुणावद, नौगांव, झाबुआ, पिटोल में नए रेलवे स्टेशन भवन, प्लेटफार्म आदि का निर्माण शुरू कर दिया है। इसे 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य है। साल 2008 में प्रोजेक्ट का शुभारंग हुआ था और काम साल 2013 में शुरू हुआ था। वर्तमान में 205 किमी लंबे इस प्रोजेक्ट में अलग-अलग हिस्सों में काम चल रहा है। इंदौर-दाहोद नई रेल लाइन प्रोजेक्ट (205 किमी) को इंदौर-टिही (29 किमी), टिही-गुणावद (28 किमी), गुणावद-नौगांव (14 किमी), धार-अमझेरा (20 किमी), अमझेरा-सरदारपुर (20 किमी), सरदारपुर-झाबुआ (60 किमी) सेक्शन में बांटकर काम किया जा रहा है। recent visitors 83

MP में जमीन रजिस्ट्री पर बड़ा बदलाव, 24 घंटे स्लॉट, उसी दिन रजिस्ट्री; एक दिन का भी इंतजार नहीं

भोपाल मध्य प्रदेश में घर प्लॉट की रजिस्ट्री को लेकर बड़ा बदलाव होने जा रहा है. इस नए सिस्टम के तहत अब लोगों को घर प्लॉट की रजिस्ट्री के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा. दरअसल, एमपी में रेलवे के तत्काल टिकट सिस्टम की तरह घर-प्लॉट की रजिस्ट्री के लिए भी तत्काल सिस्टम लागू होने जा रहा है. यह सिस्टम आने वाले तीन महीने में शुरू हो जाएगा. इस सुविधा के शुरू हो जाने से न तो पंजीयन कार्यालय जाने की जरूरत पड़ेगी और न ही स्लॉट के लिए इंतजार करना पड़ेगा. बल्कि नए सिस्टम के लागू होने के बाद स्लॉट की औपचारिकता पूरी होने पर तत्काल रजिस्ट्री हो जाएगी. देना होगा अतिरिक्त चार्ज इसके लिए प्रॉपर्टी खरीदने वाले को अतिरिक्त चार्ज देना होगा. हालांकि यह चार्ज कितना होगा, यह तय नहीं हुआ है. लेकिन माना जा रहा है कि यह एक्स्ट्रा चार्ज 3000 रुपए तक हो सकता है. बताते चले कि छत्तीसगढ़ में तत्काल रजिस्ट्री के लिए 25 हजार रुपए चार्ज लगता है. जबकि गोवा में तत्काल रजिस्ट्री के लिए 50 हजार से 2 लाख रुपए तक एक्स्ट्रा चार्ज देना पड़ता है. इन राज्यों में है सबसे अधिक फीस गौरतलब है कि गोवा और छत्तीसगढ़ के अलावा कर्नाटक, महाराष्ट्र और हरियाणा में भी लोगों को तत्काल रजिस्ट्री की सुविधा उपलब्ध है. लेकिन इन प्रदेशों में तत्काल रजिस्ट्री की फीस बहुत अधिक ली जाती है. पंजीयन से जुड़े अधिकारियों की मानें तो मध्य प्रदेश में बाकि राज्यों की तुलना में बहुत कम फीस लगेगी. एमपी में तत्काल रजिस्ट्री की सुविधा लागू होने के बाद ऑनलाइन ही स्लॉट बुक हो जाएगा और उसी दिन रजिस्ट्री भी हो जाएगी. प्रकिया जैसे ही पूरी होगी वैसे ही रजिस्ट्री का पीडीएफ आपके मोबाइल पर चला जाएगा. जानिए क्या है रजिस्ट्री का प्रोसेस जिल जिले में जमीन खरीद-फरोख करनी होगी, उस जिले के पंजीयन कार्यलम में कम से कम एक दिन पहले स्लॉट बुक करना होता है. यह स्लॉट सरकार के चिह्नित सर्विस प्रोवाइडर के जरिए बुक होता है. इसके अगले दिन दोनों पक्षों को गवाहों और दस्तावेजों के साथ हाजिर होना पड़ता है. ऑनलाइन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से ऑनलाइन बुकिंग के लिए भी एक दिन पहले सर्विस प्रोवाइडर के जरिए स्लॉट बुक करना होता है. इसके बाद इसकी डिटेल रजिस्टार के लॉग इन पर चली जाएगी. इसके बाद अगले दिन निर्धारित समय पर संपदा-2 पोर्टल के जरिए ऑनलाइन जुड़ना होता है. लेकिन इसमें दोनों पक्ष का एक जगह-एक साथ होना अनिवार्य होता है. तत्काल बुकिंग की प्रकिया तत्काल स्लॉट बुकिंग के लिए आईजी पंजीयन कार्यालय में एक सेंटर बनाया जा रहा है. इसमें तत्काल रजिस्ट्री के लिए अलग टीम बनाई जाएगी. शुरुआत में तत्काल रजिस्ट्री प्रकिया के लिए 5 सब-रजिस्ट्रार तैनात रहेंगे. बाद में डिमांड को देखते हुए इनकी संख्या बढ़ाई जा सकती है. जो व्यक्ति तत्काल स्लॉट बुक करेगा, उसे ऑनलाइन वीडियो के माध्यम से जोड़ा जाएगा. तत्काल रजिस्ट्री की सबसे खास बात यह है कि इसके जरिए दुनिया के किसी भी कोने से उसी दिन रजिस्ट्री संभव हो सकेगी. तीन तरीके से हो सकेगी रजिस्ट्री… तत्काल के लिए पंजीयन ऑफिस में बनेगा अलग सेटअप 1. पंजीयन कार्यालय से : जिस जिले में जमीन की खरीद-फरोख्त करना होती है, उस जिले के पंजीयन कार्यालय में कम से कम एक दिन पहले स्लॉट लेना होता है। सरकार द्वारा चिह्नित सर्विस प्रोवाइडर के जरिए स्लॉट बुक होता है। अगले दिन दोनों पक्षों को गवाहों के साथ दस्तावेज के साथ उपस्थित होना पड़ता है। 2.ऑनलाइन वीडियो कांफ्रेंसिंग से एक दिन पहले सर्विस प्रोवाइडर के माध्यम से स्लॉट बुक करना होता है। यह सब रजिस्टार के लॉगइन पर चला जाएगा। अगले दिन तय समय पर संपदा-2 पोर्टल के जरिए ऑनलाइन जुड़ना होता है। इसमें दोनों पक्ष का एक जगह एक साथ होना अनिवार्य होता है। 3. तत्काल स्लॉट से : इसके लिए आईजी पंजीयन कार्यालय में एक सेंटर बनाया जा रहा है। इसमें तत्काल रजिस्ट्री के लिए अलग टीम रहेगी। शुरुआत में 5 सब-रजिस्ट्रार तैनात रहेंगे। बाद में इनकी संख्या बढ़ाई जा सकती है। जो व्यक्ति तत्काल स्लॉट बुक करेगा, वह ऑनलाइन वीडियो के जरिए जुड़ जाएगा। ये फायदे… 1. ऑनलाइन ही स्लॉट बुक हो जाएगा और उसी दिन रजिस्ट्री भी हो जाएगी। 2. प्रक्रिया पूरी होते ही रजिस्ट्री की पीडीएफ आपके मोबाइल पर होगी। देश में प्रदेश में यह व्यवस्था है अभी ऑफलाइन के साथ ऑनलाइन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से रजिस्ट्री की सुविधा है। हमारा प्रयास है कि लोगों को रजिस्ट्री के लिए एक दिन का भी इंतजार न करना पड़े। – स्वप्नेश शर्मा, वरिष्ठ जिला पंजीयक भोपाल तत्काल में इस तरह होगी प्रक्रिया जो भी व्यक्ति तत्काल रजिस्ट्री के लिए स्लॉट बुक करेगा, वह संपदा 2 पोर्टल के जरिए ऑनलाइन वीडियो से जुड़ जाएगा। इसमें जमीन बेचने वाला और खरीदने वाला, दोनों पक्ष एक साथ एक ही जगह होना अनिवार्य रहेगा। उन्हें अपने साथ अपना पहचान पत्र भी रखना होगा। लॉगइन करते ही ही संबंधित पक्ष के आधार नंबर से लिंक मोबाइल नंबर पर एक ओटीपी आएगा। यह ओटीपी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से जुड़े सब-रजिस्ट्रार को बताना होगा। ओटीपी के सत्यापित होते ही रजिस्ट्री के लिए आगे की प्रक्रिया शुरू होगी। सब कुछ सही होने पर रजिस्ट्री पूरी हो जाएगी। recent visitors 110

एम्स भोपाल ने किया देश का दूसरा सफल हापलो-आइडेंटिकल बोन मैरो ट्रांसप्लांट

 भोपाल  एम्स भोपाल ने बच्चों में रक्त कैंसर के इलाज में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। संस्थान ने हाल ही में एक सात वर्षीय बच्ची का सफल हापलो-आइडेंटिकल बोन मैरो ट्रांसप्लांट किया है, जो रिलेप्स्ड एक्यूट लिम्फोब्लास्टिक ल्यूकेमिया (बाल्य रक्त कैंसर) से पीड़ित थी। पहले एम्स दिल्ली में ऐसा प्रत्यारोपण किया जा चुका है एम्स भोपाल यह सफल ऑपरेशन करने वाला दूसरा अस्पताल बन गया है। इसके पहले एम्स दिल्ली में ऐसा प्रत्यारोपण किया जा चुका है। यह जटिल प्रक्रिया एम्स भोपाल के चिकित्सा ऑन्कोलॉजी और हीमेटोलॉजी विभाग के डॉ. गौरव ढींगरा और डॉ. सचिन बंसल के नेतृत्व में की गई। बच्ची का इलाज बाल्य आन्कोलाजी विभाग में डॉ. नरेंद्र चौधरी की देखरेख में हो रहा था। ट्रांसप्लांट के लिए मरीज के भाई को डोनर के रूप में चुना गया, जो आधे एचएलए (ह्यूमन ल्यूकोसाइट एंटीजन) में मेल खाते थे। क्या है हापलो-आइडेंटिकल बोन मैरो ट्रांसप्लांट एम्स के हीमेटोलाजी विभाग के डा. गौरव ढींगरा ने बताया कि यह सामान्य बोन मैरो ट्रांसप्लांट से कई गुना अधिक जटिल प्रक्रिया है। इसमें रोगी को आधे एचएलए मिलान वाले डोनर से स्टेम सेल दिए जाते हैं। जहां एक तरफ मैच्ड बोन मैरो ट्रांसप्लांट में डोनर और रिसीवर के 12 के 12 जीन मेल खाते हैं और सफलता दर 60 फीसद होती है, वहीं हापलो आइडेंटिकल में सिर्फ छह जीन ही मेल खाते हैं। ट्रांसप्लांट के सफल होने की दर सिर्फ 30 प्रतिशत रहती है। भाई को डोनर के रूप में चुना गया बच्ची का इलाज एम्स भोपाल के बाल्य आन्कोलाजी विभाग में डॉ. नरेंद्र चौधरी की देखरेख में हो रहा था। ट्रांसप्लांट के लिए मरीज के भाई को डोनर के रूप में चुना गया, जो आधे एचएलए (ह्यूमन ल्यूकोसाइट एंटीजन) में मेल खाते थे। एम्स के हीमेटोलाजी विभाग के डॉ. गौरव ढींगरा ने बताया कि यह सामान बौनमेरौ ट्रांसप्लांट से कई गुना अधिक जटिल प्रक्रिया है। जहां एक तरफ मैच्ड बोनमैरो ट्रांसप्लांट में 12 के 12 जीन डोनर और रिसीवर के मेल खाते हैं। इसमें भी सफलता दर 60 फीसदी होती है। हेप्लो आइडेंटिकल में सिर्फ छह जीन ही मेल खाते हैं। इस ट्रांसप्लांट के सफल होने की दर सिर्फ 30 प्रतिशत के करीब रहती है। ऐसे हुआ प्रत्यारोपण सबसे पहले पीड़ित बच्चे के भाई से स्टेम सेल निकाले गए। इसके बाद बच्चे को फुल बाडी रेडिएशन दिया गया। इससे उसकी बाडी इंफेक्शन मुक्त और इम्यूनिटी भी बेहद कम हो जाए। इससे रिसीवर की बाडी डोनर से आए स्टेम सेल को खत्म नहीं कर पाती है। इसके साथ ध्यान रखा गया कि डोनर के स्टेम सेल रिसीवर के सेल्स को मारने का कार्य न करें। यह एक बेहद और बहु स्तरीय प्रक्रिया है। इसमें कई फैक्टर्स को एक साथ निगरानी करना होता है। क्या है हापलो आइडेंटिकल बोन मैरो ट्रांसप्लांट हापलो-आइडेंटिकल बोन मैरो ट्रांसप्लांट एक जटिल प्रक्रिया है, जिसमें रोगी को आधे एचएलए मिलान वाले डोनर से स्टेम सेल दिए जाते हैं। यह प्रक्रिया उन रोगियों के लिए एक आशा की किरण है, जिनके लिए पारंपरिक बोन मैरो ट्रांसप्लांट उपलब्ध नहीं है। मरीज को माइलो-अब्लेटिव कंडीशनिंग रेजिमेन के तहत संपूर्ण शरीर की रेडियोथेरेपी (टोटल बाडी इरैडिएशन) दी गई, जिसे रेडिएशन आन्कोलाजी विभाग के डॉ. सैकत दास, डॉ. विपिन खराडे और भौतिक विज्ञानी (आरएसओ) अवनीश मिश्रा द्वारा सफलतापूर्वक संचालित किया गया। रक्त कैंसर के इलाज में नई उम्मीद जगाएगा     यह एम्स भोपाल के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इस जटिल प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पूरा करने से यह स्पष्ट होता है कि हमारे संस्थान में उच्च स्तरीय चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध हैं। यह बच्चों में रक्त कैंसर के इलाज में एक नई उम्मीद जगाएगा। – प्रो. डॉ. अजय सिंह, कार्यपालक निदेशक, एम्स भोपाल   recent visitors 56

मध्य प्रदेश में वर्ष 2030 तक कुल बिजली की खपत के 50% हिस्से की पूर्ति सौर, पवन और जल विद्युत से करने का लक्ष्य रखा

भोपाल  मध्य प्रदेश में वर्ष 2030 तक कुल बिजली की खपत के 50 प्रतिशत हिस्से की पूर्ति सौर, पवन और जल विद्युत से करने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए सौर ऊर्जा को प्रोत्साहित किया जा रहा है। अब सरकार ने तय किया है कि पांच मेगावाट तक का सौर ऊर्जा संयंत्र लगाने वालों से उत्पादित बिजली खरीदी जाएगी। इतना ही नहीं, परियोजना लागत पर 30 प्रतिशत अनुदान भी दिया जाएगा। इसके लिए नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा विभाग के कुसुम सी योजना के प्रस्ताव पर गुरुवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में होने वाली कैबिनेट बैठक में अंतिम निर्णय लिया जाएगा। दिल्ली मेट्रो को दी जा रही बिजली वर्ष 2012 में प्रदेश में नवकरणीय ऊर्जा क्षमता लगभग 500 मेगावाट थी। वर्तमान में यह सात हजार मेगावाट हो गई है, जो राज्य की कुल ऊर्जा क्षमता का 21 प्रतिशत है। रीवा सौर ऊर्जा परियोजना से दिल्ली मेट्रो को बिजली दी जा रही है तो अप्रैल 2024 से भारतीय रेल को प्रतिदिन 195 मेगावाट बिजली दी जा रही है। इसका उपयोग वह गोवा, झारखंड, महाराष्ट्र, दिल्ली, बिहार, उत्तर प्रदेश और ओडिशा में ट्रेनों के संचालन में कर रहा है। दिन में उत्पादित इस ऊर्जा का उपयोग अधिक से अधिक करने के लिए सरकार कई कदम उठा रही है। 20 प्रतिशत की छूट दी जाएगी औद्योगिक इकाइयों को दिन में खपत बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। एक अप्रैल 2025 से घरेलू उपभोक्ताओं को भी दिन में विद्युत की खपत पर ऊर्जा प्रभार में 20 प्रतिशत की छूट दी जाएगी। इस तरह के अन्य कदम भी उठाए जा रहे हैं। अब कुसुम सी योजना में पांच मेगावाट तक के सौर ऊर्जा संयंत्रों से उत्पादित बिजली सरकार खरीदेगी। 30 प्रतिशत तक अनुदान भी दिया जाएगा। इसके साथ ही पार्वती-कालीसिंध-चंबल परियोजना का शिलान्यास होने के बाद इसे प्रशासकीय स्वीकृति के लिए कैबिनेट के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। 3 हजार से ज्यादा गांवों को मिलेगा लाभ परियोजना से श्योपुर, भिंड, मुरैना, शिवपुरी, गुना, अशोक नगर, आगर, इंदौर, धार, उज्जैन, शाजापुर, राजगढ़, सीहोर जिले में पीने के पानी और सिंचाई की व्यवस्था होगी। इसका लाभ प्रदेश के 3,217 ग्रामों को लाभ मिलेगा। मालवा और चंबल क्षेत्र में छह लाख 13 हजार 520 हेक्टेयर में सिंचाई होगी और 40 लाख की आबादी को पेयजल उपलब्ध होगा। recent visitors 67