केन बेतवा लिंक परियोजना : पीएम मोदी ने किया शिलान्यास, बुंदेलखंड में रचा इतिहास

खजुराहो  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को मध्य प्रदेश के खजुराहो में केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना की नींव रखी। यह राष्ट्रीय नदी जोड़ो नीति के तहत पहली परियोजना है। इससे मध्य प्रदेश के 10 जिलों के 44 लाख और उत्तर प्रदेश के 21 लाख लोगों को पीने का पानी मिलेगा। इस परियोजना की लागत लगभग 44,605 करोड़ रुपये है। इससे 2,000 गांवों के 7.18 लाख किसान परिवारों को फायदा होगा। साथ ही, 103 मेगावाट जलविद्युत और 27 मेगावाट सौर ऊर्जा भी बनेगी। यह परियोजना बुंदेलखंड का कायाकल्प करेगी। बुंदेलखंडी बोली से भाषण की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने भाषण की शुरुआत में बुंदेलखंडी बोली में किया, उन्होंने कहा- वीरों की धरती बुंदेलखंड में रहबे वाले, सबई जनन को हमारी तरफ से हाथ जोड़कर राम-राम पहुंचे। सीएम मोहन यादव की सरकार का एक साल पूरा हो गया है। इस एक साल में एमपी में विकास को एक नई गति मिली है। यहां आज हजारों करोड़ रुपये की विकास परियोजना की शुरुआत हुई है। सुशासन पर लोगों को भरोसा है पीएम ने कहा हमारे लिए सुशासन दिवस केवल एक दिन का कार्यक्रम नहीं है। यह भाजपा सरकारों की पहुंचान है। देश की जनता ने तीसरी बार केंद्र में भाजपा की सरकार बनाई। एमपी में आप सभी लगातार भाजपा को चुन रहे हैं। इसलिए क्योंकि सुशासन का भरोसा ही सबसे प्रबल है। हमारी सरकार ने विकास में पुराने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए पीएम नरेन्द्र मोदी ने कहा कि मैं विद्वानों से आग्रह करुंगा कि देश की आजादी से अब तक किसकी सरकार ने क्या काम किया। मैं दावे से कहता हूं, देश में जब-जब भाजपा को जहां-जहां भी सेवा करने का मौका मिला है, हमने पुराने सारे रिकॉर्ड तोड़कर जनहित के कार्यों में सफलता पाई है। आजादी के बाद सबसे पहले नदी जल का महत्व बाबा साहब आंबेडकर ने समझा पीएम ने कहा भारत के लिए नदी जल का महत्व सबसे पहले डॉ. भीमराव आंबेडकर ने समझा। भारत में जो नदी घाटी परियोजनाएं बनीं, इसके पीछे उन्हीं का विजन था। लेकिन कांग्रेस की सरकार ने उनके इस योगदान के लिए किसी को पता नहीं चलने दिया। उन्होंने कहा कि कई राज्यों के बीच नदी जल को लेकर विवाद चल रहा है। जिस समय कांग्रेस की सकरार थी वो इस विवाद को सुलझा सकती थी, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। अटलजी की सरकार ने पानी से जुड़ी समस्याओं के निराकरण के लिए प्रयास किया, लेकिन उनकी सरकार जाते ही कांग्रेस ने इसे ठंडे बस्ते में डाल दिया। प्रधानमंत्री ने कहा मध्य प्रदेश ऐसा पहला राज्य है, जहां नदियों को जोड़ने की दो परियोजनाएं चल रही हैं। 21वीं सदी में वहीं देश आगे बढ़ पाएगा जिसके पास पर्याप्त जल होगा। पानी होगा तभी खेत-खलिहान होंगे। पानी होगा तभी उद्योग-धंधे होंगे। इसलिए खास है यह परियोजना     केन बेतवा लिंक परियोजना के अंतर्गत पन्ना टाइगर रिजर्व में केन नदी पर 77 मीटर ऊंचाई एवं 2.13 किलोमीटर लंबाई के दौधन बांध बनाया जाएगा।     2 टनल का निर्माण कर बांध में 2,853 मिलियन घन मीटर जल का भंडारण किया जाएगा।     केन नदी पर दौधन बांध से 221 किमी लंबी लिंक नहर के द्वारा एमपी यूपी राज्यों के 14 जिलों को लाभ मिल सकेगा।     मध्य प्रदेश के 10 जिले पन्ना, दमोह, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी, सागर, रायसेन, विदिशा, शिवपुरी एवं दतिया के 2 हजार ग्रामों में 8.11 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई हो सकेगी। इससे लगभग 7 लाख किसान परिवार लाभान्वित होंगे।     केन- बेतवा परियोजना से उत्तरप्रदेश में 59 हज़ार हेक्टेयर क्षेत्र में वार्षिक सिंचाई सुविधा होगी एवं 1.92 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में मौजूदा सिंचाई का स्थिरीकरण किया जाएगा। जिससे उत्तरप्रदेश के महोबा, झांसी, ललितपुर एवं बांदा जिलों में सिंचाई सुविधा प्राप्त होगी।     परियोजना से मध्यप्रदेश की 44 लाख एवं उत्तर प्रदेशकी 21 लाख आबादी को पेयजल की सुविधा मिल सकेगी। साथ ही परियोजना से 103 मेगावाट जल विद्युत एवं 27 मेगावाट सौर ऊर्जा का उत्पादन होगा।     परियोजना के अंतर्गत चंदेल कालीन तालाबों को सहेजने का कार्य होगा। मध्य प्रदेश के छतरपुर, टीकमगढ़ एवं निवाड़ी जिलों में चंदेल कालीन 42 तालाबों का मरम्मत जीर्णोधार किया जाएगा।     प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की उपस्थिति में परियोजना के कियान्वयन के लिए मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री एवं केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री के मध्य 22 मार्च 2021 को त्रिपक्षीय सहमति ज्ञापन हस्ताक्षरित किया गया।     केन बेतवा लिंक परियोजना की लागत राशि 44 हजार 605 करोड़ रूपये है।     परियोजना का व्यय निर्धारण केन्द्र सरकार द्वारा 90 प्रतिशत एवं राज्य सरकार द्वारा 10 प्रतिशत के अनुपात में रहेगा।     परियोजना से 8.10 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा मिलेगी, 02 हजार ग्रामों के लगभग 7 लाख 18 हजार किसान परिवार लाभान्वित होंगे। परियोजना से मिटेगा सूखा और पलायन का कलंक बुंदेलखंड का सूखा और पलायन लोगों की कमर तोड़ता रहा है। परिवारों को पलायन करने पर यह सूखा मजबूर करता रहा है। लेकिन केन बेतवा परियोजना बुंदेलखंड के लिए मील का पत्थर साबित होगी। क्योंकि दौधन बांध से लेकर केन बेतवा तक परियोजना आकार लेगी और बुंलेखंड का सूखा मिटाएगी। सूखाग्रस्त बुंदेलखण्ड क्षेत्र में भूजल स्तर की स्थिति में सुधार, औद्योगीकरण, निवेश एवं पर्याटन को बढ़ावा मिलेगा और रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे। पीएम मोदी 'भागीरथ' मुख्यमंत्री मोहन यादव ने केन-बेतवा लिंक परियोजना के शिलान्यास समारोह में पीएम मोदी की प्रशंसा करते हुए उन्हें 'सरकार, समाज और व्यवस्था' पर ध्यान देने के लिए आदर्श बताया। उन्होंने पीएम मोदी के जयपुर वाले बयान का जिक्र किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि भारत को दूसरे देशों के लिए आदर्श बनना चाहिए। सीएम यादव ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस ने वर्षों तक राज्यों के बीच समन्वय नहीं बनाया और बुंदेलखंड की तरफ ध्यान नहीं दिया। उन्होंने कहा, 'वे कभी बुंदेलखंड का भला नहीं सोचते हैं। जो हो रहा है यह सिर्फ मोदीजी ही कर सकते हैं।' रैली में पहले पहुंचे सीएम यादव कार्यक्रम में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष वीडी शर्मा ने शिरकत की। उनके साथ कई मंत्री और वरिष्ठ नेता भी मौजूद थे। इस कार्यक्रम में दोनों उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला और जगदीश देवड़ा भी शामिल हुए। कई कैबिनेट मंत्री जैसे प्रहलाद पटेल, राकेश सिंह, तुलसी सिलावट और … Read more

भारत के शहरी क्षेत्रों में FMCG का विकास धीमा होकर 4.5 परसेंट, आटे का दाम इस धीमे विकास की सबसे बड़ी वजह

नई दिल्ली भारत में जहां गेहूं का आटा रोजमर्रा के भोजन का जरुरी हिस्सा है, वहां आटे की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी ने घरों का बजट बिगाड़ दिया है. ये समस्या इसलिए बढ़ गई है, क्योंकि आटे की कीमतें 15 साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई हैं. कान्टार रिपोर्ट के मुताबिक इस बढ़ोतरी के असर से सबसे ज्यादा प्रभावित ग्रामीण इलाके हो रहे हैं. यहां परिवारों के खर्चे बढ़ गए हैं और FMCG सेक्टर की ग्रोथ भी इससे धीमी पड़ गई है. रिपोर्ट के मुताबिक, ग्रामीण इलाकों में FMCG सेक्टर की ग्रोथ 4 फीसदी रही है, जो पिछले साल के मुकाबले धीमी है. इसी तरह शहरी क्षेत्रों में भी FMCG का विकास धीमा होकर 4.5 परसेंट रह गया है. खास बात है कि गेहूं के आटे का दाम इस धीमे विकास की सबसे बड़ी वजह बन गई है. 15 साल में सबसे महंगा गेहूं का आटा! आटे की कीमतें दिसंबर में 40 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई हैं, ये कीमत जनवरी 2009 के बाद सबसे ज्यादा है. आटे की कीमतों में इस बढ़ोतरी के असर से खाद्य महंगाई पर नियंत्रण पाने की सरकार की कोशिशों को तगड़ा झटका लगने की आशंका है. दरअसल, ग्रामीण भारत में आटे की बढ़ती कीमतों ने वहां के परिवारों का बजट बिगाड़ दिया है. ग्रामीण इलाकों में आटा लोगों के मासिक खर्च का बड़ा हिस्सा है. लेकिन गेहूं के आटे की कीमतों में आगे भी तेजी आने की आशंका क्योंकि गेहूं की कम पैदावार की वजह से सरकार के पास इसका स्टॉक भी कम है, जो डिमांड में बढ़ोतरी होने पर इसकी कीमतों में तेजी की वजह बन सकता है. महंगाई से FMCG कंपनियां भी परेशान! कुछ FMCG कंपनियों ने संकेत दिया है कि उन्हें कच्चे माल की कीमतों में बढ़ोतरी का सामना करना पड़ रहा है जिसकी वजह से उनके ऊपर कई प्रॉडक्ट्स के दाम बढ़ाने का दबाव है. शहरी क्षेत्रों में खाद्य महंगाई दर 11.1 फीसदी की दर से बढ़ी है जो पिछले 15 महीनों में सबसे ज्यादा है. इस बढ़ोतरी का असर FMCG की कीमतों पर पड़ा है. इस बढ़ोतरी को देखते हुए, अगले कुछ महीनों में FMCG कंपनियां कीमतों में और बढ़ोतरी कर सकती हैं. महंगाई की वजह से शहरी क्षेत्रों में प्रति घर औसत खर्च में भी बढ़ोतरी हुई है जो दो साल में 13 फीसदी बढ़ा है.  कुल मिलाकर, देश भर में खाद्य महंगाई का असर FMCG सेक्टर पर साफ देखा जा रहा है. हालांकि, सरकार और कंपनियां इसे नियंत्रित करने के प्रयासों में जुटी हुई हैं लेकिन इसके बावजूद महंगाई का दबाव लंबे समय तक बना रह सकता है.   recent visitors 61

पूर्व प्रधानमंत्री श्रद्धेय अटल जी की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर मुख्यमंत्री साय ने किया पुण्य स्मरण

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर के अवंति विहार चौक पहुंचकर पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न स्वर्गीय श्री अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती सुशासन दिवस के अवसर पर उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण कर पुण्य स्मरण किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि अटल जी छत्तीसगढ़वासियों की भावनाओं का सम्मान करने वाले महान राजनेता थे। अटल जी का नेतृत्व, दूरदृष्टि और जनसेवा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता हम सभी के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उनकी नीतियों और विचारों ने भारत को एक नई दिशा दी। उन्होंने कहा कि श्रद्धेय अटल जी के सपनों को साकार करते हुए  ही छत्तीसगढ़ तेजी से विकास की ओर अग्रसर है। मुख्यमंत्री ने अटल जी के जन्मशती के इस विशेष अवसर पर कहा कि अटल जी के मूल्यों को आत्मसात कर हम सभी राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान दें। इस अवसर पर स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, विधायक पुरंदर मिश्रा, विधायक सुनील सोनी, विधायक मोतीलाल साहू, विधायक राजेश मूणत सहित अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित थे। recent visitors 58

चैम्प‍ियंस ट्रॉफी में भारतीय टीम अपने मुकाबले दुबई में खेलेगी, मेजबान पाकिस्तान की होगी महा बेइज्जती?

मुंबई इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (ICC) ने  अगले साल होने वाली चैम्पियंस ट्रॉफी 2025 का पूरा शेड्यूल जारी कर दिया है. यह टूर्नामेंट पाकिस्तान की मेजबानी में होगा. मगर शेड्यूल जारी होने के साथ ही पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) की टेंशन बढ़ गई है. यह टेंशन किसी और को लेकर नहीं, बल्कि फाइनल मुकाबले को लेकर बढ़ी है. आईसीसी ने शेड्यूल में फाइनल के वेन्यू का नाम लाहौर लिखा है. यह देखकर पाकिस्तानी फैन्स खुश जरूर होंगे, लेकिन उसके साथ ब्रेकेट में एक शर्त भी लिख दी है, जिसे पढ़कर उनका दिल टूटा है दरअसल, भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने पहले ही साफ कर दिया था कि भारतीय टीम पाकिस्तान दौरे पर नहीं जाएगी. ऐसे में यह टूर्नामेंट हाइब्रिड मॉडल के तहत होगा. यह बात शेड्यूल जारी होने से पहले पाकिस्तान को पता थी. भारतीय टीम अपने मुकाबले दुबई में खेलेगी इसी को ध्यान में रखते हुए ICC ने शेड्यूल में 4 वेन्यू तय किए हैं. इसमें एक वेन्यू UAE का दुबई इंटरनेशनल स्टेडियम रखा है, जिसमें भारतीय टीम अपने सभी मैच खेलेगी. दुबई में भारतीय टीम के 3 ग्रुप मुकाबले शेड्यूल होने के साथ ही एक सेमीफाइनल भी रखा गया है. यहां तक तो बात ठीक है, मगर असली मामला चैम्पियंस ट्रॉफी के फाइनल को लेकर है. ICC ने खिताबी मुकाबला भी एक शर्त के साथ दुबई में शेड्यूल किया है. शर्त यह है कि यदि भारतीय टीम फाइनल में पहुंचती है, तब उस स्थिति में यह खिताबी मुकाबला दुबई में होगा. मेजबान पाकिस्तान की होगी महा बेइज्जती? यदि भारतीय टीम क्वालिफाई नहीं कर पाती है, तो उस स्थिति में फाइनल लाहौर में होना तय है. यही पाकिस्तान के लिए असली टेंशन वाली बात है. यदि भारतीय टीम फाइनल खेलती है, तो पाकिस्तान से खिताबी मुकाबले की मेजबानी छिन जाएगी. यह उसके लिए बड़ा तगड़ा नुकसान होगा. हालांकि यदि भारत के साथ पाकिस्तान भी फाइनल में पहुंचता है, तो PCB के लिए यह किसी बुरे सपने या महा बेइज्जती से कम नहीं होगा. इसका बड़ा कारण है कि फाइनल में एंट्री करते ही पाकिस्तानी टीम को अपना देश छोड़ना पड़ जाएगा. उसे मेजबान होने के बावजूद यह खिताबी दुबई में जाकर खेलना होगा. बतौर मेजबान यह उसके लिए किसी महा बेइज्जती से कम नहीं होगी. भारत और पाकिस्तान एक ही ग्रुप में चैम्पियंस ट्रॉफी 2025 में 8 टीमों के बीच कुल 15 मुकाबले होंगे. सभी टीमों को 2 ग्रुप में बांटा गया है. भारत और पाकिस्तान एक ही ग्रुप-ए में हैं. उनके साथ बाकी दो टीमें न्यूजीलैंड और बांग्लादेश हैं. जबकि ग्रुप-बी में साउथ अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया, अफगानिस्तान और इंग्लैंड को रखा गया है. सभी 8 टीमें अपने-अपने ग्रुप में 3-3 मुकाबले खेलेंगी. इसके बाद हर ग्रुप की टॉप-2 टीमें सेमीफाइनल के लिए क्वालिफाई करेंगी. पहला सेमीफाइनल दुबई, जबकि दूसरा लाहौर में होगा. इसके बाद फाइनल मुकाबला खेला जाएगा. ऐसे में यदि कोई टीम फाइनल तक पहुंचती है, तो वो टूर्नामेंट में कुल 5 मैच खेलेगी. टूर्नामेंट में इस प्रकार होंगे 2 ग्रुप ग्रुप ए – पाकिस्तान, भारत, न्यूजीलैंड, बांग्लादेश ग्रुप बी – दक्षिण अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया, अफगानिस्तान, इंग्लैंड चैम्पियंस ट्रॉफी का फुल शेड्यूल… 19 फरवरी- पाकिस्तान बनाम न्यूजीलैंड, कराची 20 फरवरी- बांग्लादेश बनाम भारत, दुबई 21 फरवरी- अफगानिस्तान बनाम साउथ अफ्रीका, कराची 22 फरवरी- ऑस्ट्रेलिया बनाम इंग्लैंड, लाहौर 23 फरवरी- पाकिस्तान बनाम भारत, दुबई 24 फरवरी- बांग्लादेश बनाम न्यूजीलैंड, रावलपिंडी 25 फरवरी- ऑस्ट्रेलिया बनाम साउथ अफ्रीका, रावलपिंडी 26 फरवरी- अफगानिस्तान बनाम इंग्लैंड, लाहौर 27 फरवरी- पाकिस्तान बनाम बांग्लादेश, रावलपिंडी 28 फरवरी- अफगानिस्तान बनाम ऑस्ट्रेलिया, लाहौर 1 मार्च- साउथ अफ्रीका बनाम इंग्लैंड, कराची 2 मार्च- न्यूजीलैंड बनाम भारत, दुबई 4 मार्च- सेमीफाइनल-1, दुबई 5 मार्च- सेमीफाइनल-2, लाहौर 9 मार्च, फाइनल, लाहौर (भारत के फाइनल में पहुंचने पर दुबई में खेला जाएगा) 10 मार्च- रिजर्व डे recent visitors 78

चित्तौड़ा गौशाला की भूमि होगी श्रीमद्भागवत गौशाला के नाम : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

कथा श्रवण से मिलती है जीवन दर्शन की राह : मुख्यमंत्री डॉ. यादव सत्कर्म से मनुष्य अपने जीवन को बना सकते हैं सार्थक : मुख्यमंत्री डॉ. यादव चित्तौड़ा गौशाला की भूमि होगी श्रीमद्भागवत गौशाला के नाम : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री डॉ. यादव चित्तौडा में श्रीमद्भागवत कथा में हुए शामिल भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि सनातन संस्कृति का अपना विशेष महत्व है। मनुष्य जीवन सत्कर्म के लिए प्राप्त हुआ है। कथा श्रवण के माध्यम से हमें जीवन दर्शन की राह मिलती है, जो हमें सदमार्ग की ओर चलने के लिए सदैव प्रेरित करती है। गौमाता की सेवा भगवान की सेवा के समान है। संत कमल किशोर नागर महाराज गौसेवा के एक बड़े संकल्प के साथ आगे बढ़ रहे है। संत के प्रयासों से मालवा, निमाड़, जनजाति अंचल सहित प्रदेश भर में गौमाताओं के पालन का दायित्व निस्वार्थ भाव से किया जा रहा है, जो प्रशंसनीय और वंदनीय है। भगवत गीता से हमें कर्म के प्रति आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है, इसलिए आवश्यक है कि प्रत्येक व्यक्ति ऐसे सदकर्म करें, जिससे उनकी भावी पीढ़ी पुण्य के मार्ग पर चले और मनुष्य जीवन को सार्थक बनाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंगलवार को इंदौर जिले के सांवेर स्थित चित्तौडा में श्रीमद्भागवत गौशाला में आयोजित भागवत कथा में उपस्थित श्रृद्धालुओं को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने श्रीमद्भागवत गौशाला चित्तौडा की भूमि को गौशाला के नाम करने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा गीता जयंती के आयोजन से पूरे प्रदेश में भगवान श्रीकृष्ण के कर्म के संदेश को पहुंचाने का कार्य किया गया है। संत कमल किशोर जी नागर के द्वारा निस्वार्थ भाव से गौशाला संचालन के लिए जो पुनीत कार्य की अलख जगाई गई है, वह वंदनीय है। संत ने गौशाला संचालन के साथ कई आदर्श निर्मित किए हैं, जो समाज को एक नई दिशा देने का कार्य कर रहे है। उन्होंने प्रदेश के जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट के प्रयासों की भी सराहना की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में नदी जोड़ो अभियान विकास को एक नई दिशा देने का काम करेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 25 दिसम्बर को केन-बेतवा नदी जोड़ो अभियान  के माध्यम से विकास को एक नई दिशा देंगे। उन्होंने कहा प्रदेश में दो नदी जोड़ो अभियान से लगभग 25 जिलों के बडे़ क्षेत्रों में सिंचाई का रकबा बढे़गा, जिससे मालवा और बुंदेलखंड क्षेत्र की तस्वीर और तकदीर बदलेगी। नदी जोड़ो अभियान से प्रदेश का बड़ा क्षेत्र लाभान्वित होगा।   मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश सरकार ने गोवंश पालन को प्रोत्साहित करने के लिए विशेष प्रयास किए हैं। घर-घर गोपाल और गांव-गांव वृंदावन बने, इसके लिए प्रदेश के 313 ब्लॉक के एक-एक गांव में जहां 500 से अधिक गोवंश होगा, उनको वृंदावन गांव बनाकर आदर्श रूप में विकसित करेंगे। वहीं 10 से अधिक गौमाता पालने वाले पशुपालकों को अनुदान देकर प्रोत्साहित करेंगे ताकि घर-घर गोपाल बने। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में दूध खरीदी पर बोनस भी दिया जाएगा। हमारा लक्ष्य कि जिससे घर-घर दूध उत्पादन बढ़े और प्रदेश दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में आत्मनिर्भर हो। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में गोपालन के प्रति लोगों में रुचि बढे़, इसके लिए विशेष प्रयास किए जा रहे है। उन्होंने संत कमल किशोर जी नागर द्वारा गोवंश संरक्षण एवं गौशाला के लिए किए जा रहे प्रयासों की प्रशंसा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने व्यास पीठ का पूजन कर संत नागर का शाल भेंट कर अभिनंदन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का साफा बांधकर सम्मान किया गया। इस अवसर पर विधायक रमेश मेंदोला, चिंदू वर्मा सहित श्रीमद्भागवत गौ-शाला चित्तौडा के पदाधिकारी एवं बड़ी संख्या में धर्मावलंबी उपस्थित थे।   recent visitors 120

अटल जी: आधुनिक भारत के राष्‍ट्रपुरूष

भारत रत्‍न स्‍व. अटल बिहारी वाजपेयी जी की जयंती पर विशेष अटल जी: आधुनिक भारत के राष्‍ट्रपुरूष कर्मण्यकर्म यः पश्येदकर्मणि च कर्म यः। स बुद्धिमान्मनुष्येषु स युक्तः कृत्स्नकर्मकृत्। श्रीमद्भगवद्गीता 4/18 धर्मेंद्र भाव सिंह लोधी भोपाल अर्थात जो मनुष्य कर्म में अकर्म और अकर्म में कर्म को देखता है, वह सभी मनुष्यों में बुद्धिमान और सर्वश्रेष्ठ है। वह कर्म प्रवृत्ति रह कर भी सर्वदा दिव्य स्थिति में रहता है। भारतरत्न स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी भी एक ऐसे ही कर्मशील युगपुरुष थे, जो जीवनपर्यंत नि:स्वार्थ और अनासक्त भाव से अपने कर्तव्य पथ पर अग्रसर रहे। उनके कार्यों में व्यक्तिगत भाव किंचित मात्र भी नहीं रहा है। उनके प्रत्येक कर्म में सदैव राष्ट्रहित सर्वोपरि था। वे केवल राष्ट्र के लिए हीं जीते थे,उनकी हर श्‍वास के लिए थी। इसलिए उनका कर्तव्य पथ उन्हें मोक्ष के मार्ग पर लेकर जाता है। व्यक्तिगत उपबंध से स्वाधीन अटल जी का चिंतन और चिंता का विषय सदैव संपूर्ण राष्ट्र रहा है। भारत और भारतीयता की संप्रभुता एवं उसके संवर्धन की कामना ही उनके चिंतन और दर्शन में सर्वोपरि रही है। उन्होंने राष्ट्र के सम्मान और समृद्धि को सर्वोच्च प्राथमिकता दी और कभी भी किसी भी संकट से विचलित नहीं हुए। उनकी कविताओं में राष्ट्रीयता की भावना,जिस ओजस्विता, तेजस्विता और वीरता के स्वरों के साथ व्यक्त हुई, वह राष्ट्र के गौरव को रेखांकित करती है। अटल जी कहते हैं- आज सिंधु में ज्वार उठा है, नगपति फिर ललकार उठा है, कुरुक्षेत्र के कण–कण से फिर, पांचजन्य हुँकार उठा है। शत–शत आघातों को सहकर, जीवित हिंदुस्तान हमारा, जग के मस्तक पर रोली-सा, शोभित हिंदुस्तान हमारा। दुनियाँ का इतिहास पूछता, रोम कहाँ, यूनान कहाँ है? घर–घर में शुभ अग्नि जलाता, वह उन्नत ईरान कहाँ है? दीप बुझे पश्चिमी गगन के, व्याप्त हुआ बर्बर अँधियारा, किंतु चीरकर तम की छाती, चमका हिंदुस्तान हमारा। अटल जी का राष्ट्रवादी चिंतन उनकी राजनीति, लेखनी और व्यक्तित्व में स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। वह भारतीय सभ्यता, संस्कृति और राष्ट्रीय गौरव के प्रबल समर्थक थे। उनके विचारों के केंद्र में सदा भारत रहा है। उनका राष्ट्रवाद ‘’सर्वजन हिताय सर्वजन सुखाय’’ के सिद्धांत पर आधारित था। उनका मानना था कि भारतीय सभ्यता की नींव में सहिष्णुता, विविधता और समानता के मूल्य निहित हैं। वे कहते हैं- भारत जमीन का टुकड़ा नहीं, जीता जागता राष्ट्र पुरुष है। हम जिएंगे तो इसके लिए, मरेंगे तो इसके लिए। अटल जी एक आदर्शवादी राजनेता के साथ एक काव्य साधक भी थे। उनकी काव्य साधना में मानव समाज और राष्ट्र के प्रति उनकी व्यक्तिगत संवेदनशीलता आद्योपांत प्रकट होती है। वह एक ऐसे भारत के निर्माण का स्वप्न देखते थे, जो भूख, भय, गरीबी, निरक्षरता और अभाव से मुक्त हो। उनकी काव्य साधना में एक कर्मयोगी की कर्तव्य-परायणता और राष्ट्रवाद की दृढ़ भावना की झलक दिखाई देती है। वह कहते हैं – पंद्रह अगस्त का दिन कहता, आजादी अभी अधूरी है। सपने सच होने बाकी है,रावी की शपथ न पूरी है। दिन दूर नहीं खंडित भारत को, पुनः अखंड बनाएंगे। गिलगित से गारो पर्वत तक, आजादी पर्व मनाएंगे। वाजपेयी जी एक अदम्‍य साहसिक व्यक्तित्व के धनी थे, वे जो सोच लेते थे उसे करके ही मानते थे। उनके राजनीतिक निर्णय में यह स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। उनका राष्ट्रवाद ‘’आत्मनिर्भर भारत’’ की अवधारणा पर आधारित था। वह भारत को आर्थिक, सामरिक और वैज्ञानिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना चाहते थे। पोखरण परमाणु परीक्षण और कारगिल विजय जैसे अद्वितीय कार्य उनकी इस कविता को चरितार्थ करते हैं – टूटे हुए सपने की सुने कौन सिसकी, अंतर को चीर व्यथा पलकों पर ठिठकी, हार नहीं मानूंगा, रार नहीं ठानूंगा काल के कपाल पर, लिखता हूं, मिटाता हूं गीत नया गाता हूं । वे भारत की एकता और अखंडता के लिए कितने सजग और संघर्षशील थे। यह बात उनकी कविताओं में भी स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। वे कहते हैं – आहुति बाक़ी यज्ञ अधूरा, अपनों के विघ्नों ने घेरा। अंतिम जय का वज्र बनाने, नव दधीचि हड्डियाँ गलाएँ। आओ फिर से दिया जलाएँ।। अटल जी का राष्ट्रवाद समावेशी था। वे धर्मनिरपेक्षता के पक्षधर थे, किंतु इसका आशय तुष्टीकरण नहीं था। उनका मानना था कि सभी धर्म का सम्मान होना चाहिए और किसी भी धर्म को विशेष लाभ नहीं मिलना चाहिए। वह भारत के सभी वर्गों, धर्म और जातियों के लिए समान अवसर और समान अधिकार सुनिश्चित करना चाहते थे। वाजपेयी जी एक आदर्शवादी और सिद्धांतवादी राजनेता थे। उनके चिंतन में राजनीति और नैतिकता का गहरा संबंध था। उनका मानना था,कि राजनीति में नैतिक मूल्यों का पालन किया जाना आवश्‍यक है। वह कहते थे – ‘’राजनीति में विरोध हो लेकिन विरोधी को शत्रु न माने।’’ उनका मानना था कि, राजनीति में विचारों का संघर्ष हो सकता है लेकिन उसे व्यक्तिगत वैमनस्‍य में नहीं बदलना चाहिए। इन्हीं राजनीतिक आदर्श ने उन्हें भारतीय राजनीति का अजातशत्रु बना दिया है।दलगत राजनीति से ऊपर उठकर उनके सर्वांगीण राष्ट्रवादी चिंतन के कारण ही वर्ष 1994 में भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री व्‍ही०पी० नरसिम्हा राव द्वारा विशेष आग्रह कर अटल जी को जिनेवा में मानवाधिकारों के सम्मेलन में भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए भेजा था। भारत जैसे बड़े गणतांत्रिक राष्ट्र के नेता प्रतिपक्ष द्वारा सरकार का पक्ष प्रस्तुत किए जाने की यह घटना अपने आप में आश्चर्यजनक थी। इस घटना के कारण भारत के लोकतंत्र के प्रति विश्व में निष्ठा और विश्वास और अधिक दृढ़ हुआ। यह घटना अटल जी की योग्यता और उत्कृष्टता का प्रमाण है अटल बिहारी वाजपेयी केवल एक राष्ट्रवादी राजनेता नहीं ही नहीं थे, बल्कि एक गहरे दार्शनिक चिंतक भी थे। उनका दार्शनिक चिंतन, जीवन, राजनीति, समाज और राष्ट्रीयता के व्यापक आयाम को समेटे हुए था। उनकी विचारधारा, मानवीय मूल्य, सहिष्णुता और सत्य निष्ठा पर आधारित थी। उनका दार्शनिक दृष्टिकोण मानवता के प्रति करुणा और मानव कल्याण की भावना से ओत-प्रोत था। उनकी कविता ‘जीवन की ढलान पर’,’मिले दो पल आराम के’ इस विचारधारा को सहज ही अभिव्यक्त करती है। अटल जी का दार्शनिक चिंतन समाज और अर्थव्यवस्था के समावेशी विकास पर केंद्रित था। उनका मानना था कि देश का विकास तभी संभव है,जब समाज के सभी वर्गों को सामान अवसर प्राप्त होंगे एक अवसर पर अपने उद्बोधन में उन्होंने कहा था कि, ‘’हमने समाज के एक बड़े वर्ग को समाज की मुख्य धारा से … Read more

अटल जी के नदी जोड़ो स्वप्न से मिली जनगण को सौगात: डॉ. मोहन यादव

भोपाल उजियारे में, अंधकार में, कल-कछार में, बीच धार में, क्षणिक जीत में दीर्घ हार में, जीवन के शत-शत आकर्षक, अरमानों को ढलना होगा, कदम मिलाकर चलना होगा।। कदम मिलाकर चलने का उद्गोष करने वाले भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेयी जी की आज 100वीं जयंती है। भारत निर्माण के दृष्टा श्रद्धेय अटल जी को शत-शत नमन। श्रद्धेय अटल जी ने संघ के स्वयंसेवक से लेकर राष्ट्रधर्म के संपादक, जनसंघ और भारतीय जनता पार्टी के दायित्वों के बीच कार्यकर्ताओं की पीढ़ियां निर्मित कीं। व्यक्ति निर्माण, समाज निर्माण, राष्ट्र निर्माण की उनकी परिकल्पना के सभी पक्षों ने देश को आधार प्रदान किया। धरती को सुजलाम् सुफलाम् करने और समृद्धि के नये आयाम स्थापित करने के लिये श्रद्धेय अटल जी ने लगभग 20 वर्ष पूर्व नदी जोड़ो अभियान की संकल्पना की थी। उन्होंने देशभर की नदियों को जोड़कर बिखरी पड़ी जलराशि के समुचित प्रबंधन का सपना देखा था।उनका सपना था, देशभर की नदियां आपस में जुड़ें और जल की एक-एक बूंद का उपयोग समाज और राष्ट्र के लिये हो। श्रद्धेय अटल जी 100वीं जयंती पर आज मध्यप्रदेश में केन-बेतवा से विश्व की पहली नदी जोड़ो परियोजना द्वारा जल सुरक्षा का स्थायी समाधान करने की दिशा में महती कदम उठाया जा रहा है। मुझे यह बताते हुये प्रसन्नता है कि आज हमारे यशस्वी प्रधानमंत्री और वर्तमान पीढ़ी के भागीरथ नरेन्द्र मोदी जी खजुराहो में देश की पहली, महत्वाकांक्षी केन-बेतवा नदी जोड़ो राष्ट्रीय परियोजना का शिलान्यास करेंगे। इसी के साथ श्रद्धेय अटल जी का नदियों को आपस में जोड़ने का संकल्प और समृद्धि का सपना मूर्तरूप लेगा।मध्यप्रदेश नदियों का मायका है, सैकड़ों नदियों की विपुल जलराशि से समृद्ध है। प्रदेश की नदियों के आशीर्वाद से यह बहुउद्देशीय परियोजना बुंदेलखंड की जीवन रेखा साबित होगी। यह परियोजना छतरपुर और पन्ना जिले में केन नदी पर विकसित की जा रही है। इसमें पन्ना टाइगर रिजर्व में केन नदी पर 77 मीटर ऊंचाई एवं 2.13 किलोमीटर लंबाई के दौधन बांध एवं 2 टनल का निर्माण होगा। बांध में 2 हजार 853 मिलियन घन मीटर जल का भंडारण किया जायेगा। इसमें दाब युक्त सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली के माध्यम से मध्यप्रदेश के 10 जिले पन्ना, दमोह, टीकमगढ़, छतरपुर, निवाड़ी, सागर, रायसेन, विदिशा, शिवपुरी और दतिया के लगभग 2 हजार ग्रामों में 8.11 लाख हेक्टेयर में सिंचाई हो सकेगी और लगभग 7 लाख किसान परिवार लाभान्वित होंगे। मध्यप्रदेश की 44 लाख और उत्तर प्रदेश की 21 लाख आबादी को पेयजल की सुविधा मिलेगी और 103 मेगावॉट जल विद्युत एवं 27 मेगावॉट सौर ऊर्जा का उत्पादन होगा। इसका लाभ संपूर्ण मध्यप्रदेश को मिलेगा। केन-बेतवा नदी जोड़ो राष्ट्रीय परियोजना से बुंदेलखंड के हर खेत तक सिंचाई के लिये पानी पहुंचेगा। प्रदेश में बिजली, कृषि, उद्योग और पेयजल के लिये भरपूर पानी उपलब्ध होगा। खेत को पानी मिलने से फसलों का अमृत बरसेगा। किसानों के जीवन में खुशहाली आयेगी और बुंदेलखंड की तस्वीर तथा तकदीर बदलेगी। इस परियोजना से खेती-किसानी, उद्योग, व्यवसाय और पर्यटन को गति मिलेगी जिससे पलायन रुकेगा और नागरिकों का जीवन खुशहाल होगा। जलराशि की विपुलता के साथ बाढ़ तथा सूखा, दोनों समस्याओं का समाधान होगा। हमारा संकल्प है विरासत के साथ विकास। इसी लक्ष्य की ओर आगे बढ़ते हुएपरियोजना में ऐतिहासिक चंदेलकालीन 42 तालाबों को सहेजने का कार्य किया जायेगा।यह तालाब वर्षाकाल में जल से भर जायेंगे। इससे धरती का जल स्तर बढ़ेगा जिसका लाभ लोगों को मिलेगा। मध्यप्रदेश कृषि बाहुल्य प्रदेश है। प्रदेश में सिंचाई का रकबा 50 लाख हेक्टेयर से बढ़ाकर एक करोड़ हेक्टेयर तक पहुंचाने का हमारा लक्ष्य है। मुझे विश्वास है कि केन-बेतवा नदी जोड़ो राष्ट्रीय परियोजना से हम इस लक्ष्य को पूर्ण करने में सफल होंगे और बुंदेलखंड की प्रगति के नये द्वार खुलेंगे। इसी विश्वास के साथ मैंने बुंदेलखंड के किसानों से यह आग्रह किया था कि यहां के सूखे का तोड़ निकल जायेगा, किसी भी हाल में अपनी जमीन मत बेचना। मुझे खुशी है कि मेरा वह विश्वास सही साबित हुआ। यह हमारे लिये प्रसन्नता का विषय है कि मध्यप्रदेश, इस समय जनकल्याण पर्व मना रहा है। अटल जी के 100वीं जयंती पर त्रिपक्षीय अनुबंध से केन-बेतवा नदी जोड़ो राष्ट्रीय परियोजना की सौगात प्रदेशवासियों को मिलना अद्भुत संयोग है। मुझे बताते हुए हर्ष है कि कुछ दिनों पूर्व हमारे यशस्वी प्रधानमंत्री जी ने पार्वती-कालीसिंध-चंबल नदी जोड़ो परियोजना की सौगात दी थी। इस परियोजना में 21 बांध, बैराज निर्मित किये जाएंगे। परियोजना से प्रदेश के 3217 ग्रामों को लाभ मिलेगा। मालवा और चंबल क्षेत्र में 6 लाख 13 हजार 520 हेक्टेयर में सिंचाई होगी और 40 लाख की आबादी को पेयजल उपलब्ध होगा। एक साथ प्रदेश में दो नदी जोड़ो परियोजनाओं का शिलान्यास किया जाना ऐतिहासिक अवसर है। यह हमारे लिये गर्व की बात है कि इतिहास में बुंदेलखंड शौर्य, पराक्रम, वीरता और बलिदान का प्रतीक है। वीरों की भूमि बुंदेलखंड अब नदी परियोजना से विकास की भूमि के रूप में जानी जायेगी। मुझे बताते हुये आनंद है कि आज ही के दिन प्रदेश में ऊर्जा आत्मनिर्भरता और ग्रीन ऊर्जा के प्रति किये गये प्रयास धरातल पर उतरने वाले हैं। पुण्य सलिला मां नर्मदा पर विकसित ओंकारेश्वर फ्लोटिंग सौर परियोजना का प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी लोकार्पण करेंगे। परियोजना के प्रथम चरण में इस वर्ष अक्टूबर माह से पूर्ण क्षमता से विद्युत उत्पादन प्रारंभ हो गया है। लोकतंत्र की प्रथम इकाई, ग्राम पंचायत से आरंभ होती है। अटल जी ने गांव को सुशासित और सशक्त बनाने का अभियान चलाया था। प्रधानमंत्री मोदी ने, श्रद्धेय अटलजी के स्वप्न को साकार करने के लिये गांव को आत्मनिर्भर, स्वच्छ, समृद्ध और सुशासित बनाने का संकल्प लिया है। प्रत्येक ग्राम पंचायत का अपना भवन हो, इसके लिये प्रधानमंत्री आज मध्यप्रदेश में 1153 अटल ग्राम सुशासन भवनों का भूमि-पूजन करेंगे। श्रद्धेय अटल जी की 100वीं जन्म जयंती पर आज शुरू होने वाली ऐतिहासिक परियोजनाओं और कार्यों से प्रगति के नये द्वार खुलेंगे। बुंदेलखंड जलशक्ति से संपन्न हो जायेगा और किसान समृद्ध होंगे। इससे समूचे क्षेत्र में खुशहाली आयेगी और युवाओं को नौकरी के लिये पलायन नहीं करना पड़ेगा। सौभाग्य से यह सब संभव हुआ है प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व और डबल इंजन की सरकार से। हमारी सरकार ने पहली बार रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव आयोजित कर उद्योगों को छोटे शहरों तक पहुंचाने का नवाचार किया है। … Read more