गणतंत्र दिवस नहीं इस बार ‘वीर बाल दिवस’ पर बहादुर बच्चों को मिलेगा पुरस्कार, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु करेंगी सम्मानित

नई दिल्ली पहली बार गणतंत्र दिवस के बजाय देश के बाल पुरस्कार आगामी 26 दिसंबर को राष्ट्रीय बाल पुरस्कार के अवसर पर दिए जाएंगे। इस बार पुरस्कृत होने वाले सभी 17 बच्चों को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु सम्मानित करेंगी। राष्ट्रपति मुर्मु करेंगी सम्मानित यह सम्मान सिर्फ वीरता के लिए ही नहीं बल्कि कला-संस्कृति, अन्वेषण, विज्ञान व तकनीकी, समाज सेवा, खेल और पर्यावरण के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए भी दिए जाएंगे। हालांकि इस समारोह का मुख्य केंद्र 'वीर बाल दिवस' ही होगा। 17 बच्चों को मिलेगा पुरस्कार केंद्रीय महिला एवं बाल कल्याण मंत्री ने मंगलवार को एक बयान जारी करके बताया कि भारत के बच्चों की उपलब्धियों और साम‌र्थ्य को सम्मानित करते हुए आगामी गुरुवार को वीर बाल दिवस मनाया जाएगा। इस अवसर पर राष्ट्रव्यापी गतिविधियों के लिए इस साल 14 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों के 17 बच्चों को सम्मानित किया जाएगा। इस पुरस्कार समारोह में सात श्रेणियों में उल्लेखनीय योगदान के लिए सात लड़कों और दस लड़कियों को सम्मानित किया जाएगा। recent visitors 62

पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न श्री अटल बिहारी वाजपेयी को मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने किया नमन

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने पूर्व प्रधानमंत्री भारतरत्न स्वर्गीय श्री अटल बिहारी वाजपेयी के 25 दिसंबर को जन्मदिन पर उन्हें नमन किया है। उन्होंने कहा कि 25 दिसंबर को छत्तीसगढ़ राज्य के निर्माता भारतरत्न पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जी की जन्मशती है। अटल जी का छत्तीसगढ़ से और छत्तीसगढ़ के लोगों से हमेशा आत्मीय लगाव रहा है। उन्होंने छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण में अटल जी की भूमिका को याद करते हुए कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी बाजपेयी जी ने छत्तीसगढ़वासियों की भावनाओं का सम्मान करते हुए छत्तीसगढ़ के विकास और यहां के लोगों की समृद्धि के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ राज्य का गठन किया।  अटल जी के  सपनों को पूरा करने की दिशा में राज्य सरकार बड़ी तेजी से काम कर रही है। छत्तीसगढ़ अपनी स्थापना के 25 वें वर्ष में प्रवेश कर चुका है। हमने अटल जी की स्मृति में इस रजत जयंती वर्ष को "अटल निर्माण वर्ष" के रूप में मनाने का निर्णय लिया है जिसके अंतर्गत राज्य में अधोसंरचना विकास के कार्यों को प्राथमिकता दी जाएगी। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि अटल जी कुशल राजनीतिज्ञ होने के साथ एक ओजस्वी वक्ता और कवि हृदय सरल व्यक्तित्व थे। अटल जी की याद में उनका जन्मदिन ’सुशासन दिवस’ के रूप में मनाया जाता है। अटल जी का सपना था – एक सशक्त, समृद्ध और खुशहाल भारत। उसी सपने को साकार करते हुए छत्तीसगढ़ आज शिक्षा, स्वास्थ्य, आधारभूत संरचना और सामाजिक कल्याण के क्षेत्र में नए आयाम स्थापित कर रहा है। उन्होंने कहा कि सुशासन दिवस के अवसर पर हम सभी को अटल जी के दिखाए रास्तों पर चलकर विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में अपना योगदान देकर अटल जी के स्वर्णिम भारत के स्वप्न को पूर्ण करने में सहभागी बनने के लिए दृढ़संकल्पित होना चाहिए। recent visitors 56

प्रधानमंत्री मोदी आज खजुराहो आएंगे, केन बेतवा लिंक परियोजना का भूमि पूजन करेंगे

 खजुराहो  देश की प्रथम नदी जोड़ो केन-बेतवा लिंक परियोजना का शिलान्यास आज 25 दिसंबर बुधवार को खजुराहो में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे। 44 हजार 605 करोड़ रुपये लागत वाली इस परियोजना से मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के लगभग 11 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा मिलेगी। मप्र के 10 जिले और उत्तर प्रदेश के चार जिलों में पेयजल की व्यवस्था सुदृढ़ होगी। परियोजना में होने वाले व्यय का 90 प्रतिशत भार केंद्र सरकार उठाएगी। प्रदेश के ऊपर वित्तीय भार मात्र 10 प्रतिशत आएगा। इस परियोजना से 103 मेगावाट जल विद्युत एवं 27 मेगावाट सौर ऊर्जा का उत्पादन होगा, जिसका पूरा लाभ मध्य प्रदेश को मिलेगा। बुंदेलखंड का आर्थिक व सामाजिक विकास होगा और रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। परियोजना के प्रति लोगों को किया जा रहा जागरूक     इस बीच, प्रभावित जिलों में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित कर लोगों को परियोजना के प्रति जागरूक किया जा रहा है। गुन्नौर विधायक डॉ. राजेश वर्मा ने कहा कि यह बुंदेलखंड अंचल के लिए महत्वाकांक्षी योजना है।     उन्होंने कहा, ‘बुंदेलखंड की दो दशक पुरानी आस अब पूरी हो रही है। 18 साल से लंबित केन-बेतवा लिंक परियोजना का शुभारंभ क्षेत्र की प्यास के बुझने के साथ ही जीवन बदलने का ऐतिहासिक पड़ाव भी है।’     ‘चार दशके से बुंदेलखंड की जनता को जिस दिन का बेसब्री से इंतजार था, वह दिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दृढ़संकल्प से आ गया है। साथ ही भारत देश के पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी जी का सपना पूरा हुआ।’     लोगों में जागरूकता लाने के उद्देश्य से कलश यात्राओं का आयोजन किया जा रहा है एवं कार्यक्रम में पहुंचने के लिए निमंत्रण दिया जा रहा है। सभी जगह ग्राम पंचायतों में कार्यक्रम आयोजित हो रहे हैं।     इस योजना को लेकर सभी गावों में दीवार लेखन के माध्यम से भी लोगों को जागरूक किया जा रहा है। वहीं नुक्कड़ नाटक और गीत संगीत के माध्यम से भी लोगों में केन बेतवा लिंक परियोजना के बारे में बताया जा रहा है। खजुराहो पुलिस ने जारी किया रूट प्लान पीएम मोदी के आगमन को लेकर छतरपुर पुलिस द्वारा यातायात एवं सुरक्षा व्यवस्था को दृष्टिगत रखते हुए पार्किंग व्यवस्था एवं डायवर्सन प्लान बनाया गया है, जिसका रूट चार्ट जारी किया जा रहा है। डायवर्सन प्लान के तहत छतरपुर, दमोह, सागर, टीकमगढ़, निवाड़ी से कार्यक्रम में आने वाले वाहन की मंजू नगर रोड में फेस्टिवल ग्राउंड, लालगांव, प्रेम गिरी मंदिर, एएसआई ग्राउंड में पार्किंग रहेगी। महोबा, राजनगर, चंदला, गौरीहार, लवकुशनगर की तरफ से कार्यक्रम में आने वाले वाहन बलवंत सिंह महाविद्यालय परिसर पार्किंग, एमपीटी पार्किंग विवेकानंद चौराहा, टूरिस्ट ग्राउंड, आदिवर्त पार्किंग में पार्क करेंगे, जिला दमोह तरफ से आने वाली जो बसे छतरपुर होकर आएंगी वह गंज से राजनगर रोड एवं पन्ना तरफ से आने वाली बसें टोरिया टेक से डायवर्ट होकर आएंगी। पन्ना, चंद्रनगर तरफ से कार्यक्रम में आने वाले समस्त वाहन टोरिया टेक से सूरजपुरा रनेह फॉल, अचनार बाईपास से होते हुवे पायल तिराहा तक आएंगे, विक्रमपुर तरफ से आने वाले वाहन गोकुल धाम होते हुए खजुराहो आएंगे, रानेहफॉल चंद्रनगर से आने वाले वाहन अचनार बाईपास से पायल तिराहा तक आएंगे। पुलिस ने जारी की प्रतिबंधित सामग्री की सूची शिलान्यस समारोह हेतु सभास्थल, मार्ग एवं क्षेत्र में शांति, सुरक्षा एवं यातायात व्यवस्था की दृष्टि से छतरपुर पुलिस द्वारा व्यवस्थाएं की गई हैं। सुरक्षा व्यवस्था एवं जनसामान्य की सुविधा हेतु छतरपुर पुलिस द्वारा कई घेरे की सुरक्षा व्यवस्था बनाई गई है। सुरक्षा कारणों से कार्यक्रम स्थल पर ड्रोन अथवा ड्रोन कैमरे पूरी तरह से प्रतिबंधित रहेंगे। प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री के नाम धन्यवाद पत्र प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नाम छतरपुर जिले के जनपदों एवं ग्राम पंचायतों की जनता ने केन बेतवा नदी जोड़ो परियोजना की सौगात के लिए 443 धन्यवाद पत्र दिए हैं। छतरपुर जिले में आगामी 25 दिसंबर को प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री, स्व. अटल बिहारी वाजपेयी की 100 वीं जयंती पर केन बेतवा लिंक परियोजना के भूमिपूजन के लिए बुन्देलखण्ड की धरती पर खजुराहो में स्वयं पधार रहे हैं। यह परियोजना देश की पहली नदी जोड़ो परियोजना है, जिससे बुन्देलखंड के लोगों की पानी की समस्या का निदान होगा।  recent visitors 40

30 महीने में बदल जाएगी क्षिप्रा नदी की तस्वीर, 12 किमी की टनल का काम शुरू,सिंहस्थ में पर्व स्नान के लिए नर्मदा से नहीं लाना होगा पानी

उज्जैन इंदौर की कान्ह नदी का गंदा पानी दिसंबर 2027 के बाद क्षिप्रा नदी को प्रदूषित नहीं कर पाएगा। न ही हर पर्व स्नान के लिए नर्मदा से करोड़ाें रुपए का पानी खरीदना पड़ेगा। इसी दावे के साथ कान्ह डायवर्जन की नई योजना पर काम शुरू कर दिया है। नाम है- क्लोज डक्ट। इसमें 18 किमी की डक्ट होगी और 12 किमी लंबी टनल रहेगी। इंदौर रोड़ स्थित जमालपुरा से शुरू हुई इस योजना का 20% काम हो चुका है। जल संसाधन विभाग के माध्यम से 400 मजदूर, इंजीनियर व तकनीकी एक्सपर्ट की टीम इसे पूरा कर रही है। इससे पहले कान्ह डायवर्जन के नाम पर पिछले सिंहस्थ में 150 करोड़ रुपए खर्च किए थे। राघोपिपलिया से लेकर कैडी पैलेस तक बड़े पाइप डालकर कान्ह के गंदे पानी को डायवर्ट किया था, लेकिन यह योजना फेल हो गई। पाइपों की ज्वाइंट की इंजीनियरिंग ठीक नहीं थी। वशिष्ठ कंस्ट्रक्शन हैदराबाद के साइट इंजीनियर बृजेंद्र राजपूत ने बताया इस बार हर किमी के लिए इंजीनियर व तकनीकी एक्सपर्ट लगे हैं। कान्ह नदी के डायवर्सन के लिए इंदौर रोड स्थित जमालपुरा से बनाई जा रही टनल की पहली तस्वीर। दावा है कि इस योजना का 20% काम हो चुका है। दिसंबर 2027 तक इसे पूरा कर लिया जाएगा। कलेक्टर नीरज कुमार सिंह के अनुसार, क्षिप्रा को कान्ह के गंदे पानी से मुक्त करने के लिए यह एक बहुत कारगर योजना है। कान्ह का दूषित जल नहीं मिल सकेगा क्षिप्रा में कार्यपालन यंत्री जल संसाधन विभाग मयंक सिंह ने बताया कि 919.94 करोड़ लागत की कान्ह डायवर्सन क्लोज डक्ट परियोजना के कार्य मौके पर प्रारंभ हो गए हैं, जिसमें ग्राम बमोरा और देवराखेड़ी में टनल बिछाने के लिए खुदाई और ग्राम जमालपुर में कट एंड कवर का कार्य जारी है. उन्होंने बताया कि यह परियोजना सिंहस्थ के लिए बहुत उपयोगी साबित होगी. सन 2052 तक के सिंहस्थ को ध्यान में रखते हुए इस परियोजना में 40 क्यूमैक्स जल बहाव क्षमता का भूमिगत क्लोज डक्ट का निर्माण किया जा रहा हैं, जिससे जमालपुर के समीप कान्ह नदी पर बैराज निर्माण कर दूषित जल को टनल में भेजा जाएगा, जिससे कान्ह का दूषित जल क्षिप्रा में नहीं मिल सकेगा. सेवरखेड़ी-सिलारखेडी मध्यम सिंचाई परियोजना क्षिप्रा नदी को निरंतर प्रवाहमान बनाए रखने लिए सेवरखेड़ी-सिलारखेड़ी मध्यम सिंचाई परियोजना के लिए 614.53 करोड़ की विभाग को प्रशासकीय स्वीकृति प्राप्त हुई हैं,  जिसकी कार्य एजेंसी निर्धारित कर जल्द मौके पर कार्य प्रारंभ किया जा रहा है. परियोजना में सेवरखेड़ी में बैराज का निर्माण कर मानसून के समय बैराज से 51 मिली घन मीटर जल को लिफ्ट कर सिलारखड़ी जलाशय में डाला जाएगा, जिसके लिए सिलारखेड़ी जलाशय का विस्तार भी किया जाएगा. परियोजना से ग्रीष्म ऋतु में भी क्षिप्रा नदी प्रवाहमान बनी रहेगी. परियोजना को पूर्ण करने के लिए 30 माह लक्ष्य निर्धारित किया गया.  कान्ह और क्षिप्रा नदी पर बनाए जाएंगे बैराज क्षिप्रा शुद्धिकरण के लिए कान्ह नदी पर 5 और क्षिप्रा नदी पर 1 बैराज का निर्माण किया जाएगा, जिसके लिए कुल 36.6 करोड़ की प्रशासकीय स्वीकृति प्राप्त हुई है, जिसमें 6.24 करोड़ की लागत से गोठड़ा स्टॉपडेम, 5.06 करोड़ की लागत से पिपलिया राघो  बैराज, 6.35 करोड़ की लागत से रामवासा बैराज , 4.56 करोड़ की लागत से जमालपुरा स्टॉपडेम, 5.74 करोड़ की लागत से पंथपीपलई स्टॉपडैम और क्षिप्रा नदी पर 8.71 करोड़ की लागत से किठोदाराव बैराज का निर्माण किया जाएगा. क्लोज डक्ट योजना की टेंडर शर्त के अनुसार, 15 साल तक कंपनी को ही पूरा मेंटेेनेंस करना होगा। पिछली बार जो कान्ह डायवर्जन योजना थी, उसमें टेंडर में ये शर्तें नहींं थी। नई योजना में वर्षाकाल के बाद के पानी को बायपास करने की मात्रा पिछली कान्ह योजना से लगभग 7-8 गुना ज्यादा होगी। जो डक्ट बनेंगे, उनकी आसानी से जेसीबी तक की मदद से सफाई हो सकेगी। कुल मिलाकर हमारे सारे स्नान पर्व क्षिप्रा में बिना गंदे पानी के हो सकेंगे। 5 मीटर गहरी, 5 मीटर चौड़ी टनल पहले कान्ह डायवर्जन में सही से इंजीनियरिंग नहीं हुई, जिससे पाइपों के ज्वाइंट ठीक नहीं बैठ पाए। योजना फेल हुई। नई योजना में 400 लोगों की दक्ष टीम लगाई है। 5 मीटर गहरी व 5 मीटर चौड़ी टनल बना रहे है, इतनी ही लंबी-चौड़ी डक्ट रहेगी। दिसंबर 2027 में काम पूरा कर देंगे और 15 साल तक कंपनी ही मेंटेनेंस करेगी। -इंजीनियर शुभम पांडेय, डिप्टी प्रोजेक्ट इंचार्ज   recent visitors 172

जेक सुलिवन ने बांग्लादेश में मानवाधिकारों की बिगड़ती स्थिति और लोकतंत्र पर चिंता की व्यक्त

ढाका बांग्लादेश में हिंदुओं और अल्पसंख्यकों पर हो रहे हमलों को लेकर अमेरिकी प्रशासन का रुख लगातार सख्त होता जा रहा है। हाल ही में व्हाइट हाउस से बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के प्रमुख सलाहकार मोहम्मद यूनुस को एक सख्त संदेश भेजा गया। अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जेक सुलिवन की ओर से की गई इस कॉल में बांग्लादेश में मानवाधिकारों की बिगड़ती स्थिति और लोकतंत्र पर चिंता व्यक्त की गई। गौरतलब है कि व्हाइट हाउस की तरफ यह बातचीत ऐसे वक्त पर हुई है जब राष्ट्रपति जो बाइडन के व्हाइट हाउस में कुछ ही दिन शेष हैं। व्हाइट हाउस ने अपने बयान में साफ किया कि हर नागरिक के मानवाधिकारों की रक्षा करना किसी भी सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है। धर्म, जाति और किसी भी प्रकार के भेदभाव से परे, अमेरिका ने बांग्लादेश को चेतावनी दी है कि वह अपनी जमीन पर हो रहे अल्पसंख्यकों के उत्पीड़न को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए। इस बातचीत में यूनुस ने भी मानवाधिकारों की रक्षा और लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करने का आश्वासन दिया, लेकिन सवाल यह है कि क्या यह आश्वासन जमीनी हकीकत में बदलेगा? अंतरराष्ट्रीय मंच पर बांग्लादेश की किरकिरी पिछले कुछ महीनों से बांग्लादेश में हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यकों पर हुए हमलों की खबरें अंतरराष्ट्रीय मीडिया में सुर्खियां बनी हुई हैं। अमेरिकी विदेश विभाग पहले ही अल्पसंख्यकों के अधिकारों को लेकर बांग्लादेश सरकार की आलोचना कर चुका है। हाल ही में एक धार्मिक नेता चिन्मयकृष्ण दास की गिरफ्तारी और उनके वकीलों के साथ बदसलूकी ने अमेरिका का ध्यान विशेष रूप से खींचा है। इसके अलावा, अमेरिका में रह रहे बांग्लादेशी प्रवासियों ने भी अपने देश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ बढ़ती हिंसा को लेकर प्रदर्शन किए हैं। इन प्रदर्शनों के चलते बांग्लादेश पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ा है। क्या बांग्लादेश सुधरेगा? बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने अमेरिका को मानवाधिकारों और लोकतंत्र की रक्षा का वादा किया है लेकिन हाल के दिनों में यूनुस सरकार हिंदुओं पर हुए हमलों पर चुप्पी ही साधे रही है। recent visitors 65

यूनियन कार्बाइड के 337 मीट्रिक टन कचरे के भस्मीकरण के बाद 900 मीट्रिक टन अवशेष बनेगा

भोपाल  राजधानी में 40 साल पहले यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री से जहरीली गैस का रिसाव हुआ था, जिससे हजारों लोग काल के गाल में समा गए थे. वहीं लाखों लोग इससे संक्रमित हुए और आज भी इसका दंश झेल रहे हैं. गैस कांड की वजह से बच्चे कई गंभीर बीमारियों के साथ पैदा होते हैं. वहीं अब इसके 337 मीट्रिक टन कचरे को जलाने की खबरों से लोग दहशत में हैं. दरअसल, 2015 में सरकार ने इसके 10 टन खतरनाक कचरे को बतौर ट्रायल जलाता था, इससे पैदा हुई 40 टन राख को इंदौर जिले के पीथमुर में दफनाया गया था लेकिन इससे 8 किमी क्षेत्र का भूजल दूषित हो गया था. वहीं अब सरकार यहां पड़े 337 मीट्रिक टन कचरे को जलाकर डिस्पोज करेगी. हालांकि, इसका क्या असर होगा, ये कह पाना मुश्किल है. यही वजह है कि जिस जगह पर यह जहरीला कचरा जलाया जाना है, वहां के लोग विरोध पर उतर आए हैं. 'तीन गुना बढ़ेगा जहरीला कचरा' भोपाल गैस पीड़ित महिला स्टेशनरी कर्मचारी संघ की अध्यक्ष रशीदा बी ने कहा "यूनियन कार्बाइड के जहरीले कचरे के भस्मीकरण से पर्यावरण और वन मंत्रालय की तकनीकी प्रस्तुति के अनुसार, भस्मीकरण के बाद 900 मीट्रिक टन अवशेष बनेगा. यानी अभी जो कचरा जलाने जा रहे हैं, अवशेष उसका तीन गुना बचेगा. वहीं यह ध्यान रखने योग्य है कि इस 900 मीट्रिक टन में जहरीली धातुओं की बहुत अधिक मात्रा होगी. इधर, पीथमपुर में तथाकथित सुरक्षित लैंडफिल से पिछले कुछ सालों से जहरीला रिसाव जारी है. अधिकारियों के पास यह सुनिश्चित करने का कोई तरीका नहीं है कि 900 मीट्रिक टन अवशेषों से निकलने वाला जहर पीथमपुर और उसके आसपास के भूजल को प्रदूषित न करे." 'यूनियन कार्बाइड कंपनी अमेरिका ले जाए कचरा' भोपाल ग्रुप फॉर इंफॉर्मेशन एंड एक्शन की रचना ढींगरा ने कहा "सरकारी योजनाओं के अनुसार, भोपाल से निकलने वाले खतरनाक कचरे को साढ़े तीन महीने तक जलाया जाना है. इतने लंबे समय तक भस्मक से निकलने वाले धुएं में जहर और पार्टिकुलेट मैटर के चपेट में आने वाली आबादी की संख्या एक लाख से भी अधिक है. वर्तमान में जो काम जारी है वह जानबूझकर सार्वजनिक स्वास्थ्य का एक हादसा पैदा करने से कम नहीं है." रचना ढ़ींगरा ने कहा कि "यदि सरकार इस कचरे को इंदौर में जलाती है, तो वहां भी वायु और जल प्रदूषण बढ़ेगा. इससे अच्छा ये है कि या तो सरकार उस कचरे को वहीं पड़ा रहने दे या फिर यूनियन कार्बाइड कंपनी के प्रबंधन को यह जहरीला कचरा अमेरिका ले जाने का दबाव बनाए." पूर्व मंत्री बाबूलाल गौर और जयंत मलैया ने किया था विरोध यूनियन कार्बाइड के खतरनाक कचरे को पीथमपुर में जलाने के विरोध के लंबे इतिहास पर बोलते हुए भोपाल गैस पीड़ित महिला-पुरुष संघर्ष मोर्चा के नवाब खान ने कहा "पर्यावरण मंत्री के तौर पर जयंत मलैया और गैस राहत मंत्री के तौर पर बाबूलाल गौर ने कई सरकारी बैठकों में भोपाल के कचरे को पीथमपुर में जलाने की योजना का विरोध किया था. गैस राहत आयुक्त ने तो कचरे को पीथमपुर में जलाने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा तक दाखिल किया था. हम ये तथ्य अब सबके सामने इसलिए ला रहे हैं ताकि पीथमपुर को धीमी गति से हो रहे भोपाल हादसे में बदलने की प्रक्रिया में लगे अधिकारी बाद में यह न कह सकें कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं थी." एक किलो कचरा जलाने पर आएगी 3000 रु की लागत रचना ढींगरा ने बताया, "सरकार 337 मीट्रिक टन कचरे को जलाने में 126 करोड़ रु खर्च कर रही है. यह आंकड़ा पूरे विश्व में सबसे मंहगा है. जहां प्रति टन कचरा जलाने पर करीब 27 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे. यानी एक किलो कचरा जलाने की लागत 3 हजार रुपये प्रति किलो से अधिक है." रचना ने बताया, "इससे पहले 2010 से 2015 के बीच पीथमपुर संयंत्र में जहरीले कचरे के निपटान के सात में से छह परीक्षण विफल रहे. क्योंकि इससे डाइऑक्सिन और फ्यूरान की मात्रा स्वीकार्य सीमा से 16 गुना अधिक हो गई थी." recent visitors 52

20 जनवरी तक हो सकता है BJP के नए अध्यक्ष का ऐलान, जनवरी के दूसरे सप्ताह में बैठक

नई दिल्ली भाजपा को नया अध्यक्ष अगले सााल जनवरी-फरवरी में मिल सकता है। इसके लिए कुछ केंद्रीय मंत्रियों समेत पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के नाम चर्चा में हैं। हालांकि, इस बारे में फैसला होने से पूर्व भाजपा तथा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ नेताओं के बीच जनवरी के दूसरे सप्ताह में अनौपचारिक बैठक हो सकती है। इसके पहले पार्टी आधा दर्जन से ज्यादा राज्यों में नये अध्यक्षों की नियुक्ति करेगी। भाजपा नेतृत्व नये अध्यक्ष को लेकर जल्दबाजी में नहीं है। वह संगठन स्तर पर अपनी स्थिति को व्यापक व मजबूत करने के साथ आगे बढ़ रहा है। मौजूदा अध्यक्ष जेपी नड्डा केंद्र में मंत्री बनने के बाद भी अपना दायित्व निभा ही रहे हैं और संगठन स्तर पर भी पूरी तरह सक्रिय हैं। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा है कि संगठन चुनाव चल रहे हैं। जनवरी-फरवरी में नया अध्यक्ष संगठन को मिल जाएगा। दिल्ली के विधानसभा चुनाव को लेकर इस नेता का कहना है कि यह संगठन पर निर्भर करेगा कि उसकी उस समय की प्राथमिकताएं और जरूरतें क्या हैं। चूंकि नया अध्यक्ष 15 जनवरी के बाद आना है, इसलिए अगर चुनाव के चलते संगठन एक माह का और समय लेता है तो उसमें कोई दिक्कत नहीं है। दरअसल, भाजपा अध्यक्ष के चयन के पहले पार्टी व संघ के नेताओं के बीच नये नेता को लेकर चर्चा होना बाकी है। अभी जो नाम चर्चा में है, वह अनुमानों पर है। सूत्रों के अनुसार, अभी तक न तो भाजपा नेतृत्व ने किसी नाम को लेकर संघ से चर्चा की है और न ही संघ ने किसी नाम का सुझाव दिया है। संभवतः जनवरी के दूसरे सप्ताह में भाजपा व संघ के शीर्ष नेताओं के बीच इस बारे में अनौपचारिक बैठक होगी, जिसमें नए अध्यक्ष को लेकर चर्चा होगी। जिन नामों की चर्चा है उनमें केंद्रीय मंत्री मनोहरलाल खट्टर, भूपेंद्र यादव, वरिष्ठ नेता नरेंद्र सिंह तोमर, जी. किशन रेड्डी आदि शामिल हैं। पार्टी सूत्रों का कहना है कि राज्यों के संगठन चुनावों में आधा दर्जन से ज्यादा प्रदेशों में नये अध्यक्ष आना तय हैं। इनमें उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, तेलंगाना, पश्चिम बंगाल, राजस्थान, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, पंजाब, गुजरात शामिल हैं। संगठन चुनावों की मौजूदा स्थिति में अधिकांश राज्यों में मंडल अध्यक्षों के चुनाव पूरे हो चुके हैं। इस माह के अंत और जनवरी के पहले सप्ताह तक जिलों के चुनाव पूरे किए जाने की तैयारी है। इसके बाद राज्यों के चुनाव होंगे। क्या कहता है बीजेपी का संविधान? भारतीय जनता पार्टी के संविधान के मुताबिक राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव की प्रक्रिया शुरू होने से पहले कम से कम आधे राज्य इकाइयों में संगठनात्मक चुनाव खत्म पूरे जाने चाहिए. पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष का कार्यकाल 3 साल का होता है. हालांकि 2024 में लोकसभा चुनाव को देखते हुए जेपी नड्डा के कार्यकाल को आगे बढ़ा दिया गया था. 2020 में राष्ट्रीय अध्यक्ष बने थे नड्डा फरवरी 2020 में जेपी नड्डा को बीजेपी का नया राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना गया था. नड्डा पार्टी के 11वें राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं. इसके बाद जनवरी 2023 में नड्डा का कार्यकाल पूरा हो रहा था उससे पहले ही अमित शाह ने कहा कि बीजेपी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी ने सर्वसम्मति से पार्टी अध्यक्ष जे पी नड्डा का कार्यकाल जून 2024 तक बढ़ाने का फैसला किया. तब से लेकर अभी तक नड्डा बीजेपी अध्यक्ष की जिम्मेदारी निभा रहे हैं. अब बीजेपी का नया अध्यक्ष सरकार या संगठन किसी से भी हो सकता है. बीजेपी का राष्ट्रीय पार्टी या फिर संगठन से कोई भी हो सकता है. अभी तक किसी का भी नाम सामने नहीं आया है. आने वाले कुछ दिनों में इसे लेकर स्थिति स्पष्ट हो सकती है. recent visitors 93