मुस्लिमों के डर से मुजफ्फरनगर के इस मोहल्ले को छोड़कर चले गए हिंदू सभी हिंदू, खंडहर शिव मंदिर दे रहा इसकी गवाही

मुजफ्फरनगर मुजफ्फरनगर में मुस्लिम आबादी में इजाफा और हिंदू समुदाय के पलायन की रिपोर्ट ने क्षेत्र में सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों को जन्म दिया है। इस स्थिति ने स्थानीय समुदायों के बीच तनाव को बढ़ाया है और धार्मिक स्थलों की स्थिति पर भी असर डाला है, जैसे कि खंडहर बन गए शिव मंदिर का उदाहरण। इस मंदिर के बारे में ज्यादा बात बताते हुए यहां से पलायन करने वाले परिवार के सदस्य अमरेश सिंह जो कि बीजेपी नेता भी हैं ने बताया कि सबसे पहले 1970 में इस मंदिर का निर्माण हुआ था।  मामला मोहनलाल लद्दावाला मोहल्ले का है। वहां पूजा अर्चना निरंतर होती रही मगर जैसे ही अयोध्या के राम मंदिर का मसला जोर शोर से उठा तो लोग मोहल्ले को छोड़ गए. क्योंकि, वहां मुस्लिम की जनसंख्या बहुत बढ़ गई थी. इधर-उधर मांस की दुकानें आदि खुल गई थीं. ऐसे में पूजा-पाठ मुश्किल था। इसकी के चलते सन् 1990-91 में हिंदू लोग मंदिर से मूर्तियां उठाकर अपने साथ लेकर चले गए और दूसरे स्थान पर स्थापित कर दिया। खंडहर बन गए शिव मंदिर की स्थिति यह दर्शाती है कि धार्मिक स्थलों की देखभाल और संरक्षण की आवश्यकता है। यह न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि स्थानीय इतिहास और संस्कृति का भी हिस्सा है। हिंदू शख्स का दावा इस मंदिर के बारे में अधिक जानकारी देते हुए यहां से पलायन करने वाले परिवार के सदस्य सुधीर खटीक जो कि बीजेपी नेता भी हैं ने बताया कि सबसे पहले 1970 में इस मंदिर की स्थापना हुई थी. वहां पूजा अर्चना लगातार होती रही. मगर जैसे ही अयोध्या के राम मंदिर का मुद्दा जोर शोर से उठा तो लोग मोहल्ले को छोड़ गए. क्योंकि, वहां मुस्लिम आबादी बहुत बढ़ गई थी. इधर-उधर नॉनवेज शॉप आदि खुल गई थीं. ऐसे में पूजा-पाठ मुश्किल था. इसलिए 1990-91 में हिंदू लोग मंदिर से मूर्तियां उठाकर अपने साथ लेकर चले गए और दूसरी जगह स्थापित कर दीं. जब लंबे वक्त तक मंदिर में पूजा अर्चना नहीं हुई तो आसपास के लोगों ने अतिक्रमण कर लिया. किसी ने अपने घर के छज्जे निकाल लिए तो किसी ने पार्किंग बना ली. मंदिर खंडहर बन गया और सिकुड़ गया. सुधीर खटीकने कहा कि सरकार से आग्रह है कि इस मंदिर की पुनर्स्थापना कराई जाए. उसे पुराना रूप दिया जाए ताकि पूजा-पाठ शुरू हो सके. क्योंकि, हिंदू अगर अपनी संस्कृति को भूल गए, अपने धर्म को भूल गए तो राष्ट्र सुरक्षित नहीं हो सकता. राष्ट्र भी जब ही सुरक्षित रहता है जब आपका धर्म सुरक्षित हो. मुस्लिम शख्स का बयान वहीं, मुजफ्फरनगर के मोहनलाल लद्दावाला मोहल्ले के निवासी मोहम्मद समीर आलम ने कहा कि यह स्थल 1970 में बना था. बुजुर्गों ने बताया था कि यहां पाल जाति के लोग अधिक थे. उन्होंने ही इसका निर्माण कराया होगा. हालांकि, बाद में वो अपनी प्रॉपर्टी सेल आउट करके दूसरी जगह शिफ्ट हो गए. जाते वक्त मंदिर से शिवलिंग और मूर्तियां भी ले गए. फिलहाल, काफी समय से मंदिर बंद पड़ा है, कोई देखने नहीं आता. जो भी रंग-रोगन का काम हुआ मुस्लिम समुदाय ने किया. अगर कोई पूजा-पाठ के लिए आने चाहे तो आए, हम नहीं रोकते. हमारे द्वारा किसी को क्यों रोका जाएगा, यह तो सार्वजनिक है, कोई भी आ सकता है, मंदिर हो या मस्जिद. हालांकि, 1994 से देख रहा हूं कोई पूजा करने नहीं आया आज तक.  recent visitors 118

जिले वासियों को निःशुल्क अयोध्या और बाबा विश्वनाथ के दर्शन करवाए , विशेष ट्रेनों के माध्यम से श्रद्धालुओं को यात्रा की सुविधाएं उपलब्ध करवाई

मनेन्द्रगढ़/एमसीबी  छत्तीसगढ़ सरकार की श्रीरामलला दर्शन योजना से एमसीबी जिले के लिए किसी सौगात से कम नहीं है। इस योजना के माध्यम से यहॉ के श्रद्धालुओं का वर्षों पुराना सपना साकार हो रहा है। योजना के अंतर्गत जिले वासियों को निःशुल्क अयोध्या धाम और काशी में बाबा विश्वनाथ के दर्शन करवाए जा रहे हैं। विशेष ट्रेनों के माध्यम से श्रद्धालुओं को यात्रा की सुविधाएं उपलब्ध करवाई जा रही हैं, जहां उन्हें उत्कृष्ट व्यवस्था के साथ धार्मिक स्थलों का दर्शन कराया जा रहा है। अयोध्या और काशी की यात्रा किसी भी श्रद्धालु के लिए आध्यात्मिक सुख और जीवन का महत्वपूर्ण अवसर है। इस योजना के माध्यम से एमसीबी जिले के लोग अपने आराध्य श्रीरामलला और बाबा विश्वनाथ के दर्शन कर रहे हैं। इस योजना ने श्रद्धालुओं के लिए एक ऐसी सुविधा प्रदान की है, जो न केवल उनकी आस्था को मजबूत कर रही है बल्कि समाज में सकारात्मक वातावरण का निर्माण कर भी रहा है। जिला एमसीबी के ओमप्रकाश जैन अपनी पत्नी के साथ रामलला के दर्शन करने गए थे। यात्रा के बाद उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार की इस योजना ने उनके जैसे आम लोगों को भी अयोध्या और काशी के दर्शन का अवसर प्रदान किया है। उन्होंने बताया कि यात्रा के दौरान सारी व्यवस्थाएं बेहतरीन था। और किसी को किसी प्रकार की कोई दिक्कत नहीं हुई। खाने-पीने की उत्तम व्यवस्था के साथ-साथ स्वास्थ्य सुविधाओं का भी ध्यान रखा गया। ओमप्रकाश जैन ने भावुक होते हुए कहा कि अयोध्या धाम में रामलला के दर्शन करना हमारे लिए सौभाग्य की बात है। यह अवसर हमें मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की वजह से मिला है। उन्होंने अपना वादा निभाया और हमारे लिए यह अविस्मरणीय अनुभव बना दिया। उनकी पत्नी ने भी यात्रा के अनुभव को साझा करते हुए बताया कि पूरे सफर के दौरान महिलाओं के लिए विशेष ध्यान रखा गया। ट्रेन में स्वच्छता से लेकर सुरक्षा तक की सारी व्यवस्था बहुत अच्छी थी। उन्होंने कहा कि इस यात्रा के दौरान हमने कभी यह महसूस नहीं किया कि हम किसी प्रकार की परेशानी में हैं। यात्रा बहुत सुखद और आनंदमयी रही। जिले में बढ़ती रही श्रद्धालुओं की संख्या रामलला दर्शन योजना के अंतर्गत एमसीबी जिले से अब तक कुल 6 बार विशेष ट्रेन के माध्यम से श्रद्धालुओं को अयोध्या धाम की यात्रा करा चुके हैं। इस जिले से लगभग 322 श्रद्धालुओं को रामलला के दर्शन का अवसर मिला है। यात्रा से लौटने वाले श्रद्धालुओं ने मुख्यमंत्री और राज्य शासन का बार-बार आभार व्यक्त किया। यात्रा में शामिल श्रद्धालुओं ने बताया कि उनके लिए यह जीवन का सबसे महत्वपूर्ण और सुखद अनुभव रहा। यात्रा कर लौटे श्रद्धालुओं का कहना है कि मुख्यमंत्री ने हमें यह अवसर देकर हमारे जीवन की सबसे बड़ी इच्छा पूरी कर दी है। हम भगवान श्रीरामलला के दर्शन कर पाए, यह हमारे लिए सौभाग्य की बात है। यात्रा के दौरान हमें किसी भी प्रकार की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा। व्यवस्था इतनी बेहतरीन थी कि हमें घर जैसा अनुभव हुआ। सुरक्षा और सुविधाओं का दिया जा रहा विशेष ध्यान यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए विशेष इंतजाम किए गए थे। खाने-पीने की उत्तम व्यवस्था के साथ-साथ स्वास्थ्य सुविधाओं का भी ध्यान रखा गया। ट्रेन में सफाई की व्यवस्था इतनी अच्छी थी कि यात्रियों ने विशेष रूप से इसका जिक्र किया। यात्रा के दौरान सभी यात्रियों को समय-समय पर भोजन और नाश्ते की सुविधा उपलब्ध कराई गई। इसके साथ ही बुजुर्गों और महिलाओं के लिए विशेष सुविधा और सहारा उपलब्ध था। श्रद्धालुओं ने बताया कि यात्रा के दौरान न केवल हमारी जरूरतों का ध्यान रखा गया, बल्कि पूरे सफर को आनंददायक बनाने के लिए हर छोटी-बड़ी बात पर विषेश ध्यान दिया गया। सरकार की इस योजना ने हमें यह महसूस कराया   कवे हमारी आस्था और भावनाओं का सम्मान करते हैं। श्रद्धालुओं ने अपनी यात्रा के सुखद अनुभव को किया साझा एमसीबी जिले के कई श्रद्धालुओं ने अपनी यात्रा के अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि अयोध्या धाम पहुंचकर जब उन्होंने रामलला के दर्शन किए, तो उनकी आंखों में आंसू आ गए। यह उनके जीवन का सबसे यादगार पल था। उन्होंने कहा कि अयोध्या में रामलला के दर्शन का अनुभव शब्दों में बयां करना मुश्किल है। यह सिर्फ एक यात्रा नहीं थी, बल्कि हमारे लिए जीवन का सबसे बड़ा सौभाग्य था। वहीं ओमप्रकाश जैन ने यात्रा को याद करते हुए कहा कि यात्रा के दौरान हमें हर तरह की सुविधा मिली। सरकार ने यह सुनिश्चित किया कि हमें किसी भी प्रकार की असुविधा न हो। खाने-पीने से लेकर आराम करने तक की सारी व्यवस्थाएं बहुत ही व्यवस्थित थीं। मुख्यमंत्री के प्रति श्रद्धालुओं ने जताया आभार व्यक्त यात्रा से लौटे श्रद्धालुओं ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति गहरा आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों और जिले वासियों से किया गया अपना वादा निभाया है। यह योजना न केवल श्रद्धालुओं के लिए एक अवसर है बल्कि यह छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक और धार्मिक आस्था को भी सशक्त बना रही है। श्रद्धालुओं ने बताया कि हमारे मुख्यमंत्री ने हमें भगवान श्रीरामलला और बाबा विश्वनाथ के दर्शन करवाकर हमारी वर्षों पुरानी मनोकामना पूरी कर दी। उनके प्रति हम सदैव कृतज्ञ रहेंगे। जिले में हो रहा रामलला दर्शन योजना का व्यापक असर श्रीरामलला दर्शन योजना का असर पूरे प्रदेश में देखने को मिल रहा है। यह योजना न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है बल्कि यह सामाजिक एकता और सद्भाव को भी बढ़ावा दे रही है। प्रदेश के विभिन्न जिलों से लोग इस यात्रा में शामिल होकर अपने जीवन का सबसे सुखद अनुभव प्राप्त कर रहे हैं। जिला एमसीबी के श्रद्धालु इस योजना के माध्यम से बार-बार अयोध्या और काशी की यात्रा पर जाना चाहते हैं। श्रद्धालुओं का कहना है कि यदि अवसर मिला तो हम लोग दोबारा यह यात्रा करना चाहेंगे। recent visitors 51

Ravichandran Ashwin ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास की घोषणा की, गाबा टेस्ट के बाद लिया फैसला

नई दिल्ली भारत के दिग्गज स्पिनर रविचंद्रन अश्विन ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने का फैसला किया है। उन्होंने गाबा टेस्ट के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में इसकी घोषणा की। अश्विन कप्तान रोहित शर्मा के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस में पहुंचे थे और वहां इसकी घोषणा की। संन्यास से पहले अश्विन ड्रेसिंग रूम में विराट कोहली के साथ बैठे नजर आए थे। इस दौरान कोहली ने उन्हें गले भी लगाया था। अश्विन एडिलेड डे नाइट टेस्ट में टीम इंडिया का हिस्सा रहे थे। 38 साल का यह स्पिनर भारत के लिए कई रिकॉर्ड बना चुका है। वह टेस्ट में सबसे ज्यादा विकेट लेने वालों में सातवें स्थान पर हैं। अश्विन के नाम 106 टेस्ट में 537 विकेट हैं। 59 रन देकर सात विकेट उनकी सर्वश्रेष्ठ गेंदबाजी है। इस दौरान उनका औसत 24.00 का और स्ट्राइक रेट 50.73 का रहा है। अश्विन टेस्ट में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले भारतीय में अनिल कुंबले के बाद दूसरे नंबर पर हैं। कुंबले के नाम 619 टेस्ट विकेट थे। अश्विन का एलान चौंकाने वाला है, क्योंकि वह भारतीय सरजमीं पर भारतीय स्पिन अटैक की धार थे। ऑस्ट्रेलिया आकर अचानक से रिटायरमेंट का फैसला लेना चौंकाने वाला है। यह मेरा आखिरी दिन – अश्विन ने संन्यास को लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, ''बतौर भारतीय क्रिकेटर इंटरनेशनल लेवल पर यह मेरा आखिरी दिन है.'' अश्विन प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान भावुक नजर आए. उनके साथ कप्तान रोहित भी बैठे थे. ऐसा रहा अश्विन का टेस्ट करियर – अश्विन ने भारत के लिए 106 टेस्ट मैच खेले हैं. उन्होंने इस दौरान 3503 रन बनाए. अश्विन ने टेस्ट में 6 शतक और 14 अर्धशतक जड़े हैं. उनका सर्वश्रेष्ठ टेस्ट स्कोर 124 रन रहा. वे भारत के लिए कई बार मुश्किल परिस्थिति में दमदार प्रदर्शन कर चुके हैं. अश्विन ने बैटिंग के साथ-साथ बॉलिंग में भी कमाल दिखाया. उन्होंने इस दौरान 537 विकेट झटके. अश्विन का एक टेस्ट पारी में 59 रन देकर 7 विकेट लेना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन रहा है. अश्विन ने भारत के लिए 41 वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप (WTC) मैच खेले हैं और उनके नाम 195 विकेट हैं, जो किसी भी खिलाड़ी द्वारा लिए गए सबसे ज्यादा विकेट हैं। टेस्ट क्रिकेट में अपने शानदार प्रदर्शन के अलावा अश्विन ने भारत के लिए 116 वनडे और 65 T20I खेले हैं। दोनों में उन्होंने क्रमशः 156 और 72 बल्लेबाजों को आउट किया है। अश्विन के संन्यास पर भारतीय कप्तान रोहित शर्मा ने कहा कि वह अपने फैसले को लेकर काफी आश्वस्त था, हमें उसकी इच्छा का सम्मान करना चाहिए। वहीं, BCCI ने एक बयान में कहा कि निपुणता, कौशल, प्रतिभा और नवीनता के पर्याय हैं अश्विन। 537 विकेट लेने के अलावा अश्विन ने अपनी बल्लेबाजी से भी भारत को कई टेस्ट मैच जिताए हैं। वे टेस्ट में भारत के लिए 151 बार बल्लेबाजी करने उतरे और छह शतकों और 14 अर्द्धशतकों की मदद से 3503 रन बनाए। अपने 14 साल के अंतरराष्ट्रीय करियर के दौरान अश्विन ने भारत के लिए 44 टेस्ट सीरीज खेली। इस दौरान वह 11 मौकों पर प्लेयर ऑफ द सीरीज का पुरस्कार जीता, जो कि खेल के टेस्ट फॉर्मेट में किसी भी खिलाड़ी द्वारा संयुक्त रूप से सबसे अधिक है। 106 टेस्ट मैचों में अश्विन ने 37 बार पांच विकेट लिए हैं, जो खेल के पांच दिवसीय फॉर्मेट में किसी भारतीय गेंदबाज द्वारा लिया गया सबसे ज्यादा है। इस लिस्ट में अश्विन से आगे सिर्फ श्रीलंका के मुथैया मुरलीधरन (67) हैं। अश्विन ने 12 जून 2010 को जिम्बाब्वे के खिलाफ हरारे में भारत के लिए अपना टी20 अंतरराष्ट्रीय पदार्पण किया। उन्होंने कुल 65 मैच खेले, जिसमें उन्होंने 72 विकेट लिए। अश्विन के नाम टेस्ट में 37 फाइव विकेट हॉल है, जो कि किसी भारतीय गेंदबाज द्वारा सबसे ज्यादा है। उनके बाद कुंबले का नंबर आता है। कुंबले ने टेस्ट में 35 बार पारी में पांच विकेट लिए थे। ओवरऑल सबसे ज्यादा पारी में पांच विकेट लेने का रिकॉर्ड श्रीलंका के मुथैया मुरलीधरन के नाम है। उन्होंने 67 बार ऐसा किया था। अश्विन शेन वॉर्न के साथ संयुक्त रूप से दूसरे नंबर पर हैं। अश्विन 106 टेस्ट खेलने के अलावा 116 वनडे और 65 टी20 में भी टीम इंडिया का हिस्सा रहे। उन्होंने वनडे में 156 विकेट और टी20 में 72 विकेट लिए थे। वनडे में उनकी सर्वश्रेष्ठ गेंदबाजी 25 रन देकर चार विकेट और टी20 में आठ रन देकर चार विकेट है। वनडे में उनकी इकोनॉमी 4.93 की और टी20 में 6.90 की रही है। हालांकि, इन दोनों में वह एक बार भी पारी में पांच विकेट नहीं ले पाए। इसके अलावा अश्विन ने टेस्ट में काफी रन भी बनाए हैं। उनके नाम टेस्ट में 3503 रन हैं। इस दौरान उनका औसत 25.75 का रहा है। अश्विन के नाम टेस्ट में सर्वोच्च स्कोर 124 रन का रहा है। उन्होंने छह शतक और 14 अर्धशतक लगाए हैं। इसके अलावा वनडे में उन्होंने 16.44 की औसत से 707 रन और टी20 में 114.99 के स्ट्राइक रेट से 184 रन बनाए हैं। अश्विन ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में डेब्यू पांच जून 2010 को हरारे में श्रीलंका के खिलाफ वनडे में किया था। वहीं, टी20 डेब्यू उन्होंने 12 जून 2010 को ही हरारे में जिम्बाब्वे के खिलाफ किया था। अश्विन का टेस्ट डेब्यू 2011 में वेस्टइंडीज के खिलाफ दिल्ली में हुआ था। वह टेस्ट में सबसे ज्यादा प्लेयर ऑफ द सीरीज अवॉर्ड जीतने वाले खिलाड़ी भी हैं। उन्होंने टेस्ट में 11 बार प्लेयर ऑफ द सीरीज अवॉर्ड जीता है। इस मामले में वह मुरलीधरन की बराबरी पर हैं।   recent visitors 54

‘चिकित्सा पेशे में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी, भारत बन रहा है एक विकसित समाज’

अमरावती राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि चिकित्सा पेशे में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी और उनका महत्वपूर्ण योगदान दर्शाता है कि भारत वास्तव में एक विकसित समाज बन रहा है. मुर्मू ने यहां मंगलागिरी में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के प्रथम दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि समग्र स्वास्थ्य को निरंतर बढ़ावा देना तथा सभी के लिए स्वास्थ्य सुनिश्चित करना इस संस्थान के प्रत्येक चिकित्सा पेशेवर का मार्गदर्शक सिद्धांत होना चाहिए. राष्ट्रपति ने कहा, ‘‘चिकित्सा पेशे में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी और उनका महत्वपूर्ण योगदान यह दर्शाता है कि हम वास्तव में एक विकसित समाज बन रहे हैं. इससे यह तथ्य भी उजागर होता है कि अवसर मिलने पर हमारी बेटियां हर क्षेत्र में उत्कृष्टता हासिल करती हैं.’’ उन्होंने कहा कि सरकार ने आयुष्मान भारत स्वास्थ्य बीमा योजना सहित कई योजनाएं शुरू की हैं और उपचार में कठिनाइयों का सामना करने वालों के लिए इलाज सुलभ बनाया है. मुर्मू ने इस बात पर जोर दिया कि सरकार के साथ-साथ जागरूक समाज की भी यह जिम्मेदारी है कि वह सुनिश्चित करे कि कोई भी व्यक्ति वित्तीय या अन्य कारणों से चिकित्सा सेवाओं से वंचित न रहे. राष्ट्रपति ने कहा कि भारतीय चिकित्सक अपनी प्रतिभा और कड़ी मेहनत के दम पर विकसित देशों में अग्रणी स्थान पर हैं. उन्होंने कहा कि दूसरे देशों से लोग स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ उठाने के लिए भारत आते हैं. उन्होंने कहा कि भारत विश्व मानचित्र पर किफायती चिकित्सा पर्यटन के एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में विकसित हो रहा है. उन्होंने कहा कि देश के चिकित्सक इस संबंध में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. उन्होंने युवा चिकित्सकों से ग्रामीण, आदिवासी और दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को चिकित्सा देखभाल और सेवाएं प्रदान करने को प्राथमिकता देने का आह्वान किया. उन्होंने कहा कि समग्र स्वास्थ्य देखभाल के संदर्भ में योगासन और प्राणायाम को आधुनिक दृष्टिकोण से भी स्वीकार किया गया है. इस अवसर पर आंध्र प्रदेश के राज्यपाल एस. अब्दुल नजीर, मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू, केंद्रीय आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) प्रतापराव जाधव, आंध्र प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री सत्य कुमार यादव और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे. एम्स-मंगलागिरि की आधारशिला 2015 में रखी गई थी और एमबीबीएस छात्रों के पहले बैच को 30 अगस्त, 2018 को शामिल किया गया था, जो आज उत्तीर्ण हुए. recent visitors 78

अब रूस जाने के लिए नहीं पड़ेगी वीजा की जरूरत, पुतिन जल्द करेंगे घोषणा

नई दिल्ली भारतीय पर्यटकों के लिए एक अच्छी खबर है. भारत के लोग जल्द ही बिना वीजा के रूस घूम सकते हैं. भारत और रूस के बीच 2025 में इसे लेकर एक सिस्टम विकसित होने की संभावना है. अब कुछ ही समय बाद भारतीयों को रूस जाने के लिए टूरिस्ट वीजा की आवश्यकता नहीं होगी. इससे पहले रूस ने भारतीयों के लिए अगस्त 2023 से ई-वीजा की शुरुआत की थी जिसकी प्रक्रिया पूरे होने में लगभग 4 दिन लगते हैं. हालांकि, अब नई वीजा-फ्री व्यवस्था से भारतीयों के लिए रूस की यात्रा और भी सरल हो जाएगी. रिपोर्ट के अनुसार, पिछले साल रूस ने जितने ई-वीजा जारी किए, उसमें भारत टॉप पांच देशों में शामिल था. रूस ने भारतीयों को 9,500 ई-वीजा दिए. बिना वीजा के रूस जा सकेंगे भारतीय रूस और भारत के बीच द्विपक्षीय समझौते के तहत ग्रुप टूरिस्ट एक्सचेंज के लिए वीजा नियमों को आसान बनाने की प्रक्रिया जून 2023 में शुरू हुई थी. रूस के आर्थिक विकास मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी, निकिता कोंद्रात्येव ने कहा, “भारत इस समझौते को अंतिम रूप देने के अंतिम चरण में है.” माना जा रहा है कि यह समझौता साल के अंत तक पूरा हो जाएगा, जिसके बाद भारतीय नागरिक बिना वीजा के रूस की यात्रा कर सकेंगे. रूस में भारतीय यात्रियों की बढ़ती संख्या हाल के वर्षों में रूस जाने वाले भारतीय यात्रियों की संख्या में लगातार वृद्धि देखी गई है. 2023 में, रूस ने भारतीय यात्रियों को 9,500 ई-वीजा जारी किए, जो कुल ई-वीजा का 6% था. 2024 की पहली छमाही में, 28,500 भारतीय यात्रियों ने मॉस्को का दौरा किया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 1.5 गुना अधिक है. 2023 में, 60,000 से अधिक भारतीयों ने रूस की यात्रा की, जो 2022 की तुलना में 26% अधिक है. मॉस्को सिटी टूरिज्म कमेटी के चेयरमैन, एवगेनी कोज़लोव ने बताया, "2023 की पहली तिमाही में, भारत गैर-CIS देशों के व्यापार पर्यटकों में तीसरे स्थान पर था." मॉस्को के अधिकारियों का मानना है कि भारत रूस के लिए एक प्राथमिक बाजार है, क्योंकि दोनों देशों के बीच मजबूत और ऐतिहासिक संबंध हैं. रूस और भारत के बीच गहरी ऐतिहासिक और कूटनीतिक मित्रता रही है. नई वीजा-फ्री नीति से न केवल पर्यटन बल्कि व्यापारिक संबंधों को भी बल मिलेगा. 58 देशों में भारतीयों की वीजा फ्री एंट्री वर्तमान में भारतीय पासपोर्टधारियों को 58 देशों में वीजा फ्री एंट्री का अधिकार हासिल है. हेनले पासपोर्ट इंडेक्स 2024 में भारत का पासपोर्ट 83वें स्थान पर है जिसकी मदद से भारतीय थाईलैंड, इंडोनेशिया, मालदीव, श्रीलंका , मोरिशियस और कतर जैसे ट्रैवल डेस्टिनेशन्स पर बिना वीजा के यात्रा कर सकते हैं. recent visitors 75

2024 का साल खास तौर पर लोकसभा चुनाव, विपक्षी एकजुटता, राज्यों में राजनीतिक बदलाव भरा रहा

नई दिल्ली 2024 का साल भारतीय राजनीति में महत्वपूर्ण बदलावों और घटनाओं से भरा रहा। यह साल खास तौर पर लोकसभा चुनाव, विपक्षी एकजुटता, राज्यों में राजनीतिक बदलाव और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार के लिए चुनौतियों का साल रहा। आइए, 2024 के राजनीतिक घटनाक्रम पर एक नजर डालते हैं। 1. लोकसभा चुनाव 2024: मोदी की तीसरी बार वापसी 2024 में भारत में हुए लोकसभा चुनाव ने भारतीय राजनीति में एक बार फिर से बीजेपी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सत्ता में लौटाया। बीजेपी ने अपने चुनावी प्रचार में विकास, सुरक्षा और कड़े प्रशासनिक उपायों को प्रमुख मुद्दा बनाया। नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता और उनके नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने तीसरी बार शानदार जीत दर्ज की, लेकिन इस बार मुकाबला पहले से कहीं कठिन था। विपक्षी गठबंधन ने बीजेपी के खिलाफ एकजुट होकर चुनाव लड़ा। इस गठबंधन में कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, शिवसेना, समाजवादी पार्टी, और अन्य क्षेत्रीय दल शामिल थे। हालांकि, बीजेपी ने बहुमत से सत्ता में वापसी की, लेकिन कुछ राज्यों में विपक्ष ने अच्छा प्रदर्शन किया। खासकर दक्षिण भारत, पश्चिम बंगाल, और उत्तर-पूर्वी राज्यों में बीजेपी को कड़ी टक्कर मिली। इसने दिखा दिया कि भारतीय राजनीति में अब क्षेत्रीय दलों की ताकत लगातार बढ़ रही है और भविष्य में ये दल राष्ट्रीय राजनीति में अहम भूमिका निभा सकते हैं। 2. विपक्ष का एकजुट होना 2024 का साल विपक्ष के लिए अहम था, क्योंकि विभिन्न विपक्षी दलों ने मिलकर बीजेपी के खिलाफ मोर्चा खोला। 'INDIA' गठबंधन के तहत कांग्रेस और अन्य क्षेत्रीय दलों ने बीजेपी के खिलाफ एकजुट होकर चुनाव लड़ा। हालांकि, यह गठबंधन अपनी पूरी ताकत के साथ चुनाव में सफलता हासिल नहीं कर सका, लेकिन यह विपक्ष के लिए एक नया रास्ता दिखाने का काम किया। इस गठबंधन का मुख्य उद्देश्य बीजेपी को रोकना था, लेकिन कई राज्यों में विपक्ष के बीच आंतरिक मतभेद और नेतृत्व को लेकर समस्याएं सामने आईं। इसके बावजूद, विपक्ष का एकजुट होना यह दर्शाता है कि भविष्य में बीजेपी को चुनौती देने के लिए विपक्षी दलों को एक साथ आना होगा। 3. राज्य चुनावों में बदलाव 2024 में कई राज्यों में विधानसभा चुनाव हुए, जिनमें बीजेपी और विपक्ष दोनों के लिए बड़े बदलाव देखने को मिले। राजस्थान, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, और तेलंगाना में कांग्रेस ने शानदार प्रदर्शन किया और बीजेपी को कड़ी टक्कर दी। राजस्थान और छत्तीसगढ़ में कांग्रेस ने सत्ता बरकरार रखी, जबकि मध्यप्रदेश और तेलंगाना में बीजेपी को अपनी ताकत साबित करनी पड़ी। इन चुनावों में क्षेत्रीय दलों की भूमिका भी अहम रही, जैसे कि तेलंगाना में केसीआर (कांग्रेस नेता) और बंगाल में ममता बनर्जी ने अपनी पकड़ मजबूत बनाई। इन चुनावों ने यह साबित किया कि भारतीय राजनीति में राज्य स्तर पर क्षेत्रीय दलों का प्रभाव बढ़ता जा रहा है और राष्ट्रीय राजनीति में उनका रोल भी महत्वपूर्ण हो सकता है। साथ ही, यह दिखाता है कि बीजेपी को राज्यों में अपनी पकड़ बनाए रखने के लिए लगातार कड़ी मेहनत करनी होगी। 4. कृषि और किसान आंदोलनों का असर 2024 में कृषि और किसान आंदोलनों का भी बड़ा राजनीतिक प्रभाव रहा। किसान विरोधी कानूनों को लेकर 2020 में शुरू हुआ आंदोलन अब भी पूरी तरह से समाप्त नहीं हो पाया था। हालांकि, 2024 में सरकार ने किसानों के लिए कुछ राहत के कदम उठाए, लेकिन किसानों के मुद्दे और उनके अधिकारों को लेकर विवाद जारी रहा। किसानों का आंदोलन और उनके समर्थन में विपक्षी दलों ने इसे अपने राजनीतिक एजेंडे का हिस्सा बनाया। इसने न सिर्फ सरकार को चुनौती दी, बल्कि यह भी साबित किया कि किसानों और ग्रामीण इलाकों के मुद्दे राजनीति में अहम बन चुके हैं। 5. राष्ट्रीय सुरक्षा: विदेश नीति की दिशा 2024 में भारतीय राजनीति में राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति भी प्रमुख मुद्दा बने। मोदी सरकार ने अपने कार्यकाल में कई अहम कदम उठाए, जैसे कि पाकिस्तान और चीन के साथ सीमा विवाद पर कड़े रुख अपनाना। चीन के साथ सीमा पर तनाव और पाकिस्तान से संबंध जैसे मुद्दों ने राजनीतिक माहौल को प्रभावित किया। प्रधानमंत्री मोदी ने कूटनीतिक तरीके से कई बार इन दोनों देशों से अपने रिश्तों को सुधारने की कोशिश की, लेकिन सीमा पर स्थिति तनावपूर्ण रही। अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में भारत ने अपनी स्थिति मजबूत की और अमेरिका, रूस और यूरोपीय संघ जैसे देशों के साथ रिश्तों को और प्रगाढ़ किया। 2024 में G20 की अध्यक्षता के दौरान भारत ने वैश्विक मंच पर अपनी कूटनीतिक ताकत का प्रदर्शन किया। 6. समाजवादी और क्षेत्रीय दलों की बढ़ती ताकत 2024 में एक और बड़ा बदलाव देखने को मिला, वह था क्षेत्रीय दलों और समाजवादी दलों की बढ़ती ताकत। उदाहरण के लिए, पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस, तेलंगाना में के. चंद्रशेखर राव की टीआरएस, और उत्तर-पूर्वी राज्यों में विभिन्न क्षेत्रीय दलों ने भारतीय राजनीति में अपनी महत्वपूर्ण जगह बनाई। इन दलों ने न सिर्फ राज्य स्तर पर, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में भी अपनी उपस्थिति दर्ज की और अब उनका राष्ट्रीय निर्णयों पर असर होता है। इन दलों ने यह साबित किया कि राष्ट्रीय चुनावों में उनकी भूमिका और ताकत दिन-ब-दिन बढ़ रही है। 7. सवर्ण और पिछड़ा वर्ग के बीच टकराव 2024 में भारत में समाजिक न्याय और आरक्षण को लेकर भी राजनीति गरमाई। कई राज्य सरकारों ने सवर्ण और पिछड़े वर्गों के बीच आरक्षण की नीति को लेकर विवादों को जन्म दिया। बीजेपी सरकार ने सवर्णों के लिए आरक्षण बढ़ाने की योजना बनाई, वहीं विपक्ष ने इसे गरीबों के हक में न होने की आलोचना की। इन सामाजिक मुद्दों ने राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी राजनीतिक बहसें छेड़ीं, जिससे राजनीतिक दलों के बीच खींचतान बनी रही। 2024 भारतीय राजनीति के लिए एक महत्वपूर्ण साल था, जिसमें भारतीय जनता पार्टी ने अपनी सत्ता बरकरार रखी, लेकिन विपक्षी दलों ने भी अपनी चुनौती पेश की। राज्य चुनावों, किसान आंदोलनों, राष्ट्रीय सुरक्षा और सामाजिक मुद्दों ने राजनीति को नया मोड़ दिया। यह साल यह दिखाता है कि भारतीय राजनीति अब केवल दो प्रमुख दलों तक सीमित नहीं रही, बल्कि क्षेत्रीय और समाजवादी दल भी राष्ट्रीय राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। 2024 ने यह साबित किया कि भारतीय राजनीति में भविष्य में और अधिक बदलाव और संघर्ष देखने को मिल सकता है।   recent visitors 163

बीजेपी को फरवरी के अंत तक नया राष्ट्रीय अध्यक्ष मिल सकता है, राज्यों की इकाई में भी होगा बड़ा बदलाव

नई दिल्ली बीजेपी को फरवरी के अंत तक नया राष्ट्रीय अध्यक्ष मिल सकता है। पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारी के मुताबिक जनवरी के मध्य तक आधे राज्यों में चुनाव की प्रक्रिया पूरी हो जाएगी। उन्होंने कहा कि राज्यों में भी 60 फीसदी इकाई अध्यक्षों के कार्यकाल पूरे होने वाले हैं। अगले महीने के मध्य तक नए अध्यक्ष बनाए जा सकते हैं। बता दें कि जेपी नड्डा 2020 से ही बीजेपी अध्यक्ष हैं। इसके अलावा वह केंद्र में स्वास्थ्य मंत्री भी हैं। एक सीनियर नेता ने कहा, फरवरी के अंत तक बीजेपी के नए अध्यक्ष पद ग्रहण कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि नए अध्यक्ष सरकार से भी हो सकते हैं और संगठन से भी हो सकते हैं। इसपर कोई अंतिम फैसला नहीं किया गया है। आम तौर पर बीजेपी अध्यक्ष का कार्यकाल तीन साल का ही होता है। हालांकि 2024 के आम चुनाव को देखते हुए जेपी नड्डा का कार्यकाल बढ़ा दिया गया था। आम चुनाव के बाद बीजेपी की वापसी भी हो गई। बीजेपी में अध्यक्ष पद को लेकर मंथन लंबे समय से चल रहा है। अगस्त में भी इसको लेकर मंथन किया गया था लेकिन उस समय महाराष्ट्र, झारखंड और जम्मू-कश्मीर, हरियाणा के चुनाव करीब थे। ऐसे में यथास्थिति बनाए रखने का ही फैसला किया गया। 2014 में केंद्र में पूर्ण बहुमत से मोदी सरकार बनने के बाद अमित शाह को तीन साल के लिए पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया था। पार्टी के संविधान मुताबिक उसी को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया जा सकता है जो कि कम से कम 15 साल से पार्टी का सदस्य हो। इससे पहले 2010 से 2013 तक संगठन की कमान नितिन गडकरी के पास थी। राजनाथ सिंह 2005 से 2009 तक और फिर 2013 से 14 तक बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे। 2014 से 2020 तक अमित शाह ने बीजेपी की कमान संभाली। recent visitors 69