फ्रांस में चक्रवात आने से 1000 लोगों के मरने की आशंका, हर तरफ तबाही

पेरिस फ्रांस के मायोट क्षेत्र में चक्रवात ‘चिडो’ के कारण सैकड़ों लोगों की मौत हो गई है। कई इलाकों पर तबाही का ऐसा मंजर पसरा हुआ है, मानो परमाणु हमले के बाद की तबाही हो। स्थानीय लोगों का हाल इतना बुरा है कि कई दिनों से पीने को पानी नहीं है, खाने को भोजन नहीं और कइयों के तो घर तूफान में उड़ गए। अधिकारियों का कहना है कि मरने वालों की संख्या हजारों में भी जा सकती है। चक्रवात चिडो के कारण मायोट इलाके में 225 किमी/घंटा (140 मील प्रति घंटे) से अधिक की गति से हवाएं चलीं। इससे वे क्षेत्र नष्ट हो गए जहां बेसहारा लोग टिन की छत वाली झुग्गियों में रह रहे थे। इलाके के एक स्थानीय ममूदज़ौ ने बीबीसी से बातचीत में कहा, "हमें तीन दिनों से पानी नहीं मिला है।" एक अन्य ने कहा, "मेरे कुछ पड़ोसी भूखे और प्यासे हैं।" मलबे से शवों को निकालने में लगेंगे कई दिन बचावकर्मी मलबे में जीवित बचे लोगों की तलाश कर रहे हैं। बचाव कर्मियों का कहना है कि इलाके में तबाही इतनी ज्यादा है कि मलबे से शवों को निकालने में ही कई दिन लग सकते हैं। उन्होंने कहा कि मरने वालों की संख्या हज़ारों तक पहुंच सकती है। चक्रवात के कारण हवाई अड्डे सहित सार्वजनिक बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है, इलाके तबाह हो गए हैं और बिजली आपूर्ति ठप हो गई है। फ्रांस ने 90 साल बाद देखी ऐसी तबाही फ्रांस के एक टीवी चैनल मायोट लाएरे की रिपोर्ट के मुताबिक, यह 90 वर्षों में आया अब तक का सबसे भयंकर तूफान है। इस तबाही में सैकड़ों लोग मारे गए हैं, शायद संख्या लगभग एक हजार के करीब हो सकती है या फिर हजारों में भी पहुंच सकती है।” फ्रांस के गृह मंत्रालय ने सोमवार को कम से कम 11 लोगों की मौत और 250 से अधिक लोगों के घायल होने की पुष्टि की थी लेकिन कहा कि यह संख्या काफी बढ़ने की आशंका है। अफ्रीका के तट से दूर दक्षिण-पूर्वी हिंद महासागर में स्थित मायोट, फ्रांस का सबसे गरीब द्वीप क्षेत्र और यूरोपीय संघ का सबसे गरीब क्षेत्र है। recent visitors 67

PMML का राहुल को लेटर- नेहरू के डॉक्यूमेंट्स लौटाएं, 2008 में सोनिया ने म्यूजियम से मंगवाए थे

नई दिल्ली भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के पत्र लौटाने के लिए सांसद राहुल गांधी को पत्र लिखा गया है। यह पत्र PMML यानी प्रधानमंत्री संग्रहालय और पुस्तकालय की ओर से लिखा गया है। हालांकि, अब तक इसे लेकर कांग्रेस की ओर से आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा गया है। खबर है कि कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी के पास इन पत्रों को करीब 16 साल पहले पहुंचाया गया था। 10 दिसंबर को PMML के सदस्य रिजवान कादरी की ओर से कांग्रेस सांसद राहुल गांधी को पत्र भेजा गया है। इसमें उनसे अपील की गई है कि सोनिया गांधी की तरफ से वापस बुलाए गए ओरिजिनल लेटर लौटाएं या उनकी फोटोकॉपी या डिजिटल कॉपी दाखिल करें। खास बात है कि सितंबर में भी सोनिया गांधी से पत्र लौटाने का अनुरोध किया गया था। साल 1971 में इन पत्रों को नेहरू मेमोरियल म्यूजियम एंड लाइब्रेरी (अब PMML) में जमा कराए गए थे। रिपोर्ट के अनुसार, कथित तौर पर साल 2008 में 51 बॉक्स में ये लेटर वापस सोनिया गांधी को भेज दिए गए थे। खास बात है कि तब तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अगुवाई वाली UPA सरकार थी। पंडित नेहरू के पत्र इन पत्रों में नेहरू समेत इतिहास के कई बड़े नामों के बीच संवाद हैं। इनमें एडविना माउंटबेटन, एल्बर्ट आइंस्टीन, जयप्रकाश नारायण, पद्मजा नायडू, विजयलक्ष्मी पंडित, अरुणा आसिफ, बाबू जगजीवन राम, गोविंद वल्लभ पंत समेत कई लोग शामिल हैं। PMML की तरफ से भेजे गए पत्र में कहा गया है, 'हम समझते हैं कि ये पत्र नेहरू परिवार के लिए निजी महत्व रख सकते हैं। हालांकि, PMML का मानना है कि ऐतिहासिक सामग्री तक… आसान पहुंच बनाना स्कॉलर्स और रिसर्चर्स की काफी मदद कर सकता है।' रिजवान कादरी ने चिट्ठी में क्या लिखा? कादरी ने अपनी चिट्टी में आगे लिखा है,  2008 में तत्कालीन यूपीए की अध्यक्ष सोनिया गांधी के अनुरोध पर इन दस्तावेजों का एक संग्रह पीएमएमएल से वापस ले लिया गया था। हम समझते हैं कि ये दस्तावेज 'नेहरू परिवार' के लिए व्यक्तिगत महत्व रखते होंगे। मगर पीएमएमएल का मानना है कि ये ऐतिहासिक महत्व के दस्तावेज हैं और इन तक पहुंच आवश्यक है। सोनिया गांधी से भी की थी लेटर लौटाने की मांग कादरी ने  बातचीत में बताया कि सितंबर 2024 में भी मैंने सोनिया गांधी को पत्र लिखकर अनुरोध किया था कि 2008 में नेहरू स्मारक संग्रहालय एवं पुस्तकालय से वापस लिए गए 51 डिब्बों को लौटा दिए जाएं या हमें उन्हें देखने और स्कैन करने की अनुमति दी जाए या फिर उनकी एक प्रति हमें प्रदान की जाए ताकि हम उनका अध्ययन कर सकें। इस पर अब तक उनकी ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई। तो मैंने विपक्ष के नेता और उनके बेटे राहुल गांधी से उन्हें वापस लाने में हमारी मदद करने का अनुरोध किया। हमें उम्मीद है कि विपक्ष के नेता के रूप में वे इस पर गौर करेंगे और इसे शोधकर्ताओं के लिए उपलब्ध कराएंगे।" नेहरू ने किसके नाम लिखी थी चिट्ठी बता दें कि नेहरू ने ये चिट्टी अपने शासनकाल में जयप्रकाश नारायण, बाबू जगजीवन राम, एडविना माउंटबेट, पद्मजा नायडू, विजया लक्ष्मी पंडित, अरुणा आसफ और गोविंद बल्लभ समेत अन्य भारतीय इतिहास से संबंधित लोगों के कई महत्वपूर्ण पत्र वहां थे। रिजवान कादरी ने बताया कि ये लेटर जवाहरलाल नेहरु मेमोरियल ने 1971 में नेहरु मेमोरियल म्यूज़ियम एंड लाइब्रेरी (अब पीएमएमएल) को दिए थे। बता दें कि15 जून, 2023 नेहरू मेमोरियल म्यूजियम और लाइब्रेरी का नाम बदलकर ‘प्रधानमंत्री म्यूजियम और लाइब्रेरी सोसाइटी’ रखने का फैसला किया गया था।   recent visitors 81

बांग्लादेश : मोहम्मद युनुस ने कहा है 2025 के आखिरी या फिर 2026 की शुरुआत में आम चुनाव कराए जा सकते

ढाका बांग्लादेश में अंतरिम सरकार के मुखिया नोबल विजेता मोहम्मद युनुस ने कहा है कि 2025 के आखिरी या फिर 2026 की शुरुआत में आम चुनाव कराए जा सकते हैं। तब तक अंतरिम सरकार ही देश की सरकार चलाएगी। शेख हसीना को हटाने के बाद मोहम्मद यूनुस को अंतरिम सरकार का मुख्य सलाहकार बनाया गया है। वहीं बांग्लादेश में कट्टरपंथियों के हौसले बुलंद हैं और वे लगातार अल्पसंख्यकों को टारगेट कर रहे हैं। यूनुस ने सोमवार को एक टीवी चैनल को बताया कि चुनाव आखिरी 2025 या फिर 2026 की शुरुआत में ही होंगे। बांग्लादेश में युनुस पर आम चुनाव को लेकर अब दबाव बढ़ रहा है। वहीं तख्तापलट के बाद शेख हसीना भारत आ गई थीं। युनुस ने कहा कि चुनाव कराने से पहले बहुत सारे सुधार करने की जरूरत है। वोटर लिस्ट में सुधार केसाथ ही चुनावी प्रक्रिया को भी सुधारना है। इससे पहले 7 जनवरी 2024 को ही बांग्लादेश में आम चुनाव करवाए गए थे। लागातर चौथी बार शेख हसीना की आवामी लीग ने जीत दर्ज की थी। विजय दिवस के मौके पर मोहम्मद युनुसन ने चुनाव को लेकर प्लान सामने रखा है। वहीं शेख हसीना ने रविवार को देश की अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस पर एक और तीखा हमला किया तथा उन पर एक ऐसे ‘अलोकतांत्रिक समू’’ का नेतृत्व करने का आरोप लगाया, जिसकी लोगों के प्रति कोई जवाबदेही नहीं है। ‘विजय दिवस’ की पूर्व संध्या पर एक बयान में हसीना ने यूनुस को ‘फासीवादी’ कहा और आरोप लगाया कि उनके नेतृत्व वाली सरकार का मुख्य उद्देश्य मुक्ति संग्राम और मुक्ति समर्थक ताकतों की भावना को दबाना है। बांग्लादेश 16 दिसंबर को विजय दिवस के रूप में मनाता है। 16 दिसंबर 1971 को पाकिस्तानी सेना के तत्कालीन प्रमुख जनरल अमीर अब्दुल्ला खान नियाजी ने 93,000 सैनिकों के साथ 13 दिन के युद्ध के बाद भारतीय सेना और ‘मुक्ति वाहिनी’ की संयुक्त सेना के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया, जिसके बाद पूर्वी पाकिस्तान बांग्लादेश बन गया। हसीना ने अपने बयान में कहा कि ‘राष्ट्र विरोधी समूहों’ ने असंवैधानिक तरीके से सत्ता पर कब्जा कर लिया है। उन्होंने कहा, ‘फासीवादी यूनुस के नेतृत्व वाले इस अलोकतांत्रिक समूह की जनता के प्रति कोई जवाबदेही नहीं है।’ उन्होंने कहा, ‘वे सत्ता पर कब्जा कर रहे हैं और सभी जन कल्याण कार्यों में बाधा डाल रहे हैं।’ हसीना ने यूनुस सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि बांग्लादेश के लोग बढ़ती कीमतों के बोझ तले दबे हुए हैं। उन्होंने कहा, ‘चूंकि यह सरकार लोकतांत्रिक तरीके से चुनी हुई नहीं है, इसलिए लोगों के प्रति उनकी कोई जवाबदेही नहीं है। उनका मुख्य उद्देश्य मुक्ति संग्राम और मुक्ति समर्थक ताकतों की भावना और उनकी आवाज को दबाना है।’ recent visitors 200

राज्य देश का तकनीकी केंद्र बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा :मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव

भोपाल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘मेक इन इंडिया’ अभियान में मध्यप्रदेश ने एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। संत शिरोमणि रविदास ग्लोबल स्किल्स पार्क ने वंदे भारत ट्रेन के लिए बीएचईएल द्वारा सौंपे गए उच्च गुणवत्ता वाले बियरिंग पार्ट्स का सफलतापूर्वक निर्माण कर यह साबित कर दिया है कि राज्य देश का तकनीकी केंद्र बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के कुशल नेतृत्व और कौशल विकास एवं रोजगार राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गौतम टेटवाल के मार्गदर्शन में ग्लोबल स्किल्स पार्क ने बियरिंग पार्टस निर्माण के प्रोजेक्ट को समय पर पूरा करते हुए अपनी तकनीकी क्षमता को सिद्ध किया है। बियरिंग पार्टस निर्माण की इस परियोजना में अत्याधुनिक 3-एक्सिस और 5-एक्सिस सीएनसी मिलिंग और टर्निंग तकनीकों का उपयोग किया गया है। ग्लोबल स्किल्स पार्क के प्रशिक्षित विशेषज्ञों और युवाओं ने पूरी दक्षता के साथ बियरिंग पार्ट्स का निर्माण उच्च गुणवत्ता के साथ किया। यह केवल एक तकनीकी उपलब्धि नहीं है, बल्कि आत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार करने की दिशा में एक बड़ा कदम भी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस उपलब्धि पर गर्व जताते हुए कहा कि यह मध्यप्रदेश के तकनीकी नवाचार और कौशल विकास के बढ़ते कदमों का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि ग्लोबल स्किल्स पार्क ने यह साबित कर दिया है कि मध्यप्रदेश न केवल तकनीकी हब बनने की ओर अग्रसर है, बल्कि यह मेक इन इंडिया अभियान को मजबूती देने वाला एक मजबूत स्तंभ भी बन रहा है। कौशल विकास एवं रोजगार राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) टेटवाल ने कहा कि यह सफलता दर्शाती है कि हमारे युवा विश्वस्तरीय औद्योगिक मानकों को पूरा करने और वैश्विक प्रतिस्पर्धा का सामना करने में पूरी तरह सक्षम हैं। ग्लोबल स्किल्स पार्क ने तकनीकी नवाचार और प्रशिक्षण में एक अनूठी मिसाल पेश की है। तकनीकी शिक्षा और नवाचार का केंद्र ग्लोबल स्किल्स पार्क, कौशल विकास और तकनीकी शिक्षा के समन्वय का बेहतरीन उदाहरण है। संस्था ने साबित किया है कि भारत में उन्नत तकनीकों का विकास और उन्हें विश्वस्तरीय उत्पादों में बदलना संभव है। ग्लोबल स्किल्स पार्क न केवल युवाओं को आधुनिक तकनीकी कौशल सिखा रहा है, बल्कि उन्हें रोजगार के नए अवसर भी प्रदान कर रहा है। ग्लोबल स्किल्स पार्क की यह सफलता इस बात का प्रमाण है कि राज्य के प्रशिक्षित युवा वैश्विक औद्योगिक चुनौतियों का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। ग्लोबल स्किल्स पार्क : आत्मनिर्भरता और प्रगति का प्रतीक ग्लोबल स्किल्स पार्क की यह उपलब्धि ‘मेक इन इंडिया’ अभियान की सफलता को मजबूत आधार प्रदान करती है। यह परियोजना बताती है कि उन्नत तकनीकों का उपयोग और स्थानीय प्रतिभा का सही मार्गदर्शन देश को वैश्विक औद्योगिक मानचित्र पर स्थापित कर सकता है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में चल रहे इस अभियान के तहत, भारत ने तकनीकी और औद्योगिक क्षेत्र में अपनी स्थिति मजबूत की है। ग्लोबल स्किल्स पार्क भोपाल जैसे संस्थान न केवल स्थानीय स्तर पर विकास की कहानी लिख रहे हैं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर आत्मनिर्भरता और तकनीकी उत्कृष्टता के उदाहरण भी पेश कर रहे हैं।   recent visitors 50

स्थानीय बुनकरों को डिजिटल प्लेटफॉर्म से अपने उत्पाद बेचने के लिए किया जा रहा है प्रशिक्षित – मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘वोकल फॉर लोकल’ अभियान को सशक्त बनाने की दिशा में 16 दिसंबर से दिल्ली स्थित भारत मंडपम में होने वाला 'फ्लेवर्स ऑफ इंडिया कार्यक्रम' एक अद्भुत पहल है। उन्होंने कहा कि हमारे देश की समृद्ध विरासत में निहित स्थानीय खानपान, शिल्पकला और वस्त्र उद्योग की पहचान को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहुंचाने की यह एक अनूठी कोशिश है। इसमें भारतीय मूल अनाजों, विशेष रूप से मिलेट्स – जिन्हें ‘अन्न’ के रूप में भी जाना जाता है,  पोषण लाभों और उनकी महत्ता पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। यह कदम आने वाली पीढ़ियों को हमारे पारंपरिक खानपान की ओर प्रेरित करेगा और स्वास्थ्य के प्रति एक नई जागरूकता लाएगा। केन्द्रीय खाद्य प्र-संस्करण मंत्रालय द्वारा दिल्ली के भारत मंडपम में 16 दिसम्बर को "फ्लेवर्स ऑफ इंडिया-2024" का आयोजन केन्द्रीय वस्त्र मंत्रालय, नीति आयोग, सर्व रिथु सेवा फाउंडेशन के सहयोग से किया जा रहा है। भारतीय खान-पान और परंपरागत परिधानों की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुत करने की दिशा में यह एक प्रयास है। राज्य सरकार कर रही है वोकल फॉर लोकल में प्रदेश के हर जिले की विशेषताओं को प्रोत्साहित मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार ने वोकल फॉर लोकल के तहत अपने स्थानीय उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। खान-पान क्षेत्र में, प्रदेश के हर जिले की विशेषताओं को प्रोत्साहित करने के लिए स्थानीय व्यंजन महोत्सव आयोजित किए हैं। चंदेरी, भोपाल, और मालवा क्षेत्रों के खास व्यंजनों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए उन्हें फूड फेस्टिवल्स और अन्तर्राष्ट्रीय मंचों पर प्रदर्शित किया गया है। मुख्यमंत्री ने स्थानीय उत्पादों और परंपराओं को प्रोत्साहित करने का किया आव्हान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वस्त्र उद्योग में, चंदेरी और महेश्वरी जैसे पारंपरिक वस्त्रों को बढ़ावा देने के लिए हस्तशिल्प विकास योजनाएं शुरू की गई हैं। स्थानीय बुनकरों को डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से अपने उत्पाद बेचने के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है, जिससे वे सीधे अपने ग्राहकों से जुड़ सकें। हमने लोकल-टू-ग्लोबल के दृष्टिकोण के साथ इंटरनेशनल टेक्सटाइल एक्सपो भी आयोजित किए हैं। फ्लेवर्स ऑफ इंडिया जैसे आयोजनों के माध्यम से, स्थानीय कारीगरों, किसानों और बुनकरों की कला और परिश्रम को राष्ट्रीय और वैश्विक पहचान दिलाने में मदद मिलती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी आयोजकों को इस प्रयास के लिए बधाई देते हुए कहा कि यह पहल भारतीय खानपान और वस्त्र उद्योग को एक नई ऊंचाई पर ले जाने में मदद करेगी और वोकल फॉर लोकल को एक सशक्त दिशा प्रदान करेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी को इस पहल में शामिल होकर अपने स्थानीय उत्पादों और परंपराओं को प्रोत्साहित करने का आहवान किया।   recent visitors 43

राज्यपाल पटेल ने कहा टी.बी. को हराने और देश को जिताने के लिए भरपूर जोश और शक्ति के साथ कार्य करना होगा

टी.बी. को हराने और देश को जिताने में लगाए पूरी शक्ति और जोश : राज्यपाल पटेल जनता के प्राणों की रक्षा के उद्देश्य के भाव के साथ टी.बी. सील अभियान में सहयोग करें : राज्यपाल पटेल राज्यपाल पटेल ने कहा टी.बी. को हराने और देश को जिताने के लिए भरपूर जोश और शक्ति के साथ कार्य करना होगा राज्यपाल द्वारा 75वें टी.बी. सील का विमोचन भोपाल राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा है कि टी.बी. को हराने और देश को जिताने के लिए भरपूर जोश और शक्ति के साथ कार्य करना होगा। उन्होंने टी.बी. उन्मूलन अभियान में योगदान के लिए नागरिकों से अपील की है। उन्होंने कहा है कि निक्षय मित्र योजनाओं में पांच सौ, हजार रुपए का योगदान किसी के प्राणों की रक्षा कर सकता है। जनता के प्राणों की रक्षा के उद्देश्य के भाव के साथ टी.बी. सील अभियान में सहयोग करें। राज्यपाल पटेल आज क्षय भवन में आयोजित 75वें टी.बी. सील विमोचन कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर 75वीं टी.बी. सील का विमोचन किया। प्रतीकात्मक रुप से टी.बी. के 5 रोगियों को फूड-बास्केट प्रदान की। टी.बी. चैम्पियन और दो नि:क्षय मित्रों का सम्मान किया। राज्यपाल का कार्यक्रम में शॉल और स्मृति चिन्ह भेंट कर अभिनंदन किया गया। विमोचन कार्यक्रम में मानव अधिकार आयोग के अध्यक्ष मनोहर ममतानी भी उपस्थित थे। राज्यपाल पटेल ने कहा कि टी.बी. के बारे में जानकारियों का प्रसार रोग उन्मूलन की प्राथमिक आवश्यकता है। उन्होंने सूदूर अंचलों और वंचित क्षेत्रों में टी.बी. रोग के बारे में जन जागरण के प्रयासों पर बल दिया है। कहा है कि सामुदायिक स्तर पर संवाद कायम किया जाए। रोग के लक्षणों से हर घर को परिचित कराए। बताए कि रोग को छिपाना जानलेवा होगा। रोग की शीघ्र जांच, नियमित दवाइयों का सेवन और विटामिन युक्त पोषण आहार से गम्भीर से गम्भीर टी.बी. रोगी स्वस्थ हो सकता है। उन्होंने कहा कि टी.बी. रोगियों के साथ ही रोग बचाव के संबंध में परिजनों और परिचारकों को भी सूचित किया जाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि रोग उपचार के साथ रोग बचाव पर भी ध्यान केन्द्रित करने की जरुरत है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रसंग का उल्लेख करते हुए बताया कि उज्ज्वला गैस योजना मोदी के जनजातीय क्षेत्रों के भ्रमण के अनुभवों से टी.बी. रोग उन्मूलन की पहल है। उन्होंने बताया कि एक समय के भोजन के लिए रसोई के चूल्हें से निकलने वाला धुआँ 60 सिगरेटों के धुंए के बराबर घातक होता। इस धुंए से माताओं, बहनों को बचाने के लिए प्रधानमंत्री मोदी ने उज्ज्वला योजना की परिकल्पना की थी। कार्यक्रम में अध्यक्ष, नगर निगम भोपाल किशन सूर्यवंशी ने अध्यक्ष निधि से टी.बी. चिकित्सालय के पेवलिंग का कार्य कराने आश्वासन दिया। एसोसिएशन को 1 लाख रुपए के अनुदान दिलाने की बात भी कहीं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के पहले शिक्षा और स्वास्थ्य बातों का विषय होते थे। केन्द्र सरकार ने आयुष्मान कार्ड बनाकर, इसे सरकार का काम बना दिया है। आज सरकार समाज के वरिष्ठ नागरिकों को शारीरिक, मानसिक रुप से स्वस्थ एवं खुशहाल रखने के लिए 70 वर्ष की आयु से अधिक के सभी बुजुर्गों को आयुष्मान कार्ड दे रही है। टी.बी. एसोसिएशन के अध्यक्ष जयपाल सचदेव ने बताया कि एसोसिएशन राष्ट्रीय संगठन की इकाई है। संस्था चिकित्सकों के माध्यम से स्कूली बच्चों, नागरिकों को टी.बी. के लक्षण, उपचार सेवाओं, सुविधाओं के संबंध में जन जागरण का कार्य करती है। एसोसिएशन के मानसेवी सचिव डॉ. मनोज वर्मा ने संस्था का प्रगति प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। बताया कि संस्था पूर्णत: जन सहयोग से संचालित है। संस्था ने शासन से किसी भी प्रकार का अनुदान नहीं प्राप्त किया है। एसोसिएशन के मानसेवी कोषाध्यक्ष डॉ. अभिजीत देशमुख ने सभी उपस्थित अतिथियों का आभार ज्ञापित किया। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी की संवेदनशीलता और दूरदर्शिता का आभार माना।   recent visitors 55

मध्यप्रदेश में सामंती, पूंजीपतियों का नहीं अब गरीबों का दौर आयेगा, कमलनाथ लगभग भाजपा में चले ही गए थे- असलम शेर खान

बैतूल पूर्व केंद्रीय मंत्री और बैतूल में कांग्रेस के सांसद रहे असलम शेर खान ने प्रदेश में कांग्रेस की दुर्दशा के लिए कमलनाथ, दिग्विजय सिंह और सुरेश पचौरी जैसे नेताओं को जिम्मेदार ठहराया है। बैतूल में एक निजी कार्यक्रम में हिस्सा लेने पहुंचे पूर्व मंत्री ने चर्चा में कहा कि मध्यप्रदेश में सामंती और पूंजीपतियों वाला दौर खत्म हो गया है। 2023 और 2024 में साफ हो गया कि मध्यप्रदेश में सामंती, पूंजीपतियों का नहीं अब गरीबों का दौर आयेगा। कमलनाथ लगभग भाजपा में चले ही गए थे- असलम शेर खान पूर्व केंद्रीय असलम शेर खान ने कहा कि मध्यप्रदेश में दो-तीन लोग तो कांग्रेस चला ही रहे थे। दो तो जाते-जाते रुक गए, एक भाजपा में चले गए, एक बुरी तरह हार गए, अब उनका रोल थोड़ी चलेगा। राहुल गांधी ने मध्यप्रदेश इन्हीं लोगों पर छोड़ा हुआ था। इन्हीं को टिकट बांटना और संगठन चलाना था। कमलनाथ लगभग भाजपा में चले ही गए थे। उन्होंने कांग्रेस की पूरी विचारधारा को ही बदलकर उसको भगवा रंग दे दिया। यहां तक कह दिया कि हम भी हिन्दू राष्ट्र के समर्थक हैं। असलम शेर खान ने कमलनाथ की इस रणनीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि आप इस प्लेटफार्म पर भाजपा का मुकाबला कर सकेंगे क्या। उनका स्ट्रांग विकेट है वो। ये हिंदुओं का देश है मेजोरिटी का देश है। आप उनके पीछे-पीछे चले गए। उन्होंने गठरी बांध कर फेंक दिया। ये देश नेहरू, गांधी का था असलम शेर खान ने कहा कि ये देश नेहरू का था गांधी का था। ये सेकुलर देश था। राहुल गांधी इसी लाइन पर काम कर रहे हैं, सही दिशा में काम कर रहे है, लेकिन उसे राज्यों में संभालने वाला कोई नहीं। मक्कार नीचे रहेंगे तो उसके सब मंसूबे फैल हो जाएंगे। मौजूदा संगठन पर असलम शेर खान ने कोई भी टिप्पणी करने से इनकार करते हुए कहा कि वे खुद को स्थापित करें। अपनी प्रतिभा बताएं, कर पाएंगे। बगैर किसी कोशिश के कांग्रेस को 40 प्रतिशत लोग वोट दे रहे हैं पूर्व केंद्रीय मंत्री असलम शेर खान ने कहा कि आज मैं देखता हूं हमारी टीम कहां कमजोर पड़ रही। कहां से हम हार रहे हैं। विधानसभा चुनाव में सिर्फ दो परसेंट वोट डिफरेंस था, जबकि उन्होंने मध्यप्रदेश को थाली में परोस कर दे दिया। असलम शेर खान ने कहा कि आज भी कांग्रेस को 40 परसेंट लोग वोट कर रहे बगैर किसी कोशिश के कोई संगठन नहीं, सही टिकट नहीं। 40 परसेंट लोग वोट दे रहे। उसी को तरतीब देने की जरूरत है। उन्होंने दावा किया कि साल 2028 में यह सरकार नहीं रहेगी। यह भी बोले पूर्व मंत्री हमें सीधे मतदाता के पास जाना चाहिए। अगर आप इस मुल्क को समझने की कोशिश करे तो मोदी, अमित शाह ने 2024 का इलेक्शन पूरा इस बुनियाद पर लड़ा था कि यहां हिन्दू राष्ट्र बनाना है। उनकी पूरी कोशिश थी कि इस इलेक्शन को पोलराइज करना है, जिस तरह के वो भाषण दे रहे थे कि आपने कांग्रेस को मौका दिया तो ये बहनों के मंगलसूत्र छीन लेंगे, गाय खोलकर ले जाएंगे। हर तरह का जोर लगा दिया कि यह देश हिंदू राष्ट्र की शक्ल में उनको पावर दे दे, ताकि वो संविधान बदलकर इसका नाम भी बदलते, ये उनका लक्ष्य था। लेकिन धन्य है इस देश की जनता उन्होंने इसको नकार दिया। उनको 350 के बहुमत से उतार कर 240 पर ला दिया। असलम शेर खान ने कहा कि ये देश की जनता को बड़ा संदेश है। हमारे जैसे कार्यकर्ताओं को कि ये देश क्या चाहता है। कांग्रेस खुद भूल गई कि उसकी विचारधारा क्या थी। कांग्रेस खुदगर्जो की पार्टी बन गई। recent visitors 58