स्कूली बसों को लेकर हाईकोर्ट का सख्त निर्देश, नहीं चलेंगी ये बसें, DPS बस हादसे की याचिका पर सुनवाई में शासन को दिए निर्देश

इंदौर मध्य प्रदेश में स्कूल बसों के हादसों को गंभीरता से लेते हुए हाईकोर्ट की इंदौर बैंच ने बड़ा फैसला दिया है. हाईकोर्ट ने बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए गाइडलाइन जारी की है. होईकोर्ट की तरफ से सरकार को निर्देश दिया गया है कि एमपी मोटर व्हीकल एक्ट-1994 में स्कूल बस रजिस्ट्रेशन, संचालन व प्रबंधन के लिए नियमों का प्रावधान किया जाए. आइए जानते हैं क्या है गाइडलाइन… जानिए निर्देश स्कूली बसों को लेकर हाईकोर्ट ने सख्त निर्देश दिए हैं. हाईकोर्ट ने कहा कि अब प्रदेश के सभी स्कूलों में 12 साल पुरानी बसें नहीं चलाई जाएगी. बसों में स्पीड गवर्नर, जीपीएस और सीसीटीवी कैमरे के जरुरी है. ताकि ऐप के जरिए बस को ट्रैक किया जा सके. इसके साथ ही कोर्ट ने निर्देश दिया है कि बस में एक स्कूल की तरफ से एक शिक्षक को रखा जाए, जो बस के आखिरी स्टॉप तक बस में रहे. वहीं, अगर स्कूल की तरफ से ऑटो रिक्शा से छात्रों को ले जाए जाता है तो इस ड्राइवर सहित ऑटो रिक्शा में चार लोग ही बैठ सकेंगे. कोर्ट ने कहा है कि आरटीओ, डीएसपी-सीएसपी ट्रैफिक इन गाइडलाइन का सख्ती से पालन करवाएं. आरटीओ, डीएसपी-सीएसपी ट्रैफिक इन गाइडलाइन का सख्ती से पालन करवाएं। इंदौर में हुए डीपीएस बस हादसे में चार स्कूल बच्चों और ड्राइवर की मौत हुई थी। इस पर लगी विविध जनहित याचिकाओं की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट की डबल बेंच ने स्कूल व शैक्षणिक संस्थानों की बसों के लिए अहम आदेश जारी किया है। सात वर्ष पहले हुई थी चार बच्चों की मौत 2018 को डीपीएस की बस छु‌ट्टी के बाद बच्चों को घर छोड़ने जा रही थी। बायपास पर बस अनियंत्रित हो गई और डिवाइडर फांदते हुए दूसरे लेन में चल रहे ट्रक से जा टकराई। हादसे में चालक स्टीयरिंग पर फंस गया। उसने वहीं दम तोड़ दिया। हादसे में चार बच्चों की भी मौत हो गई थी जबकि वह अन्य बच्चे घायल हो गए। ऑटो में नहीं बैठा सकेंगे 3 से ज्यादा बच्चे इसमें स्कूल बस और ऑटो के लिए गाइडलाइन जारी कर दी है। मप्र शासन को आदेश दिए हैं कि वह मोटर व्हीकल एक्ट में संशोधन करे। जब तक ऐसा नहीं होता यह गाइडलाइन लागू रहेगी। साथ ही उनका पालन कराने की जिम्मेदारी संबंधित जिले के आरटीओ और ट्रैफिक सीएसपी, डीसीपी की होगी। वहीं पीएस स्कूल शिक्षा विभाग, संबंधित जिले के कलेक्टर, एसपी इस मामले में ध्यान देंगे कि इनका पालन हो और इन गाइडलाइन को लेकर जागरूकता फैलाई जा सके। आदेश में यह भी कहा गया है कि ऑटो में तीन से ज्यादा स्कूली बच्चे नहीं बैठेंगे। ड्राइवर सहित कुल चार ही सवारी होंगी। जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस बिनोद कुमार द्विवेदी की डिवीजन बेंच ने यह फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा कि वर्तमान नियम ट्रांसपोर्ट व्हीकल के है। सरकार मोटर व्हीकल एक्ट के तहत स्कूल बसों के लिए विशेष प्रावधान करे। इनके पालन की जिम्मेदारी भी तय करे। जानिए पूरी गाइडलाइन सरकारी स्कूल में प्राचार्य, निजी स्कूल में मालिक, प्रबंधन स्कूल के किसी सीनियर शिक्षक या कर्मचारी को बस का इंजार्च नियुक्त करेंगे. जो नियमों का पालन करवाएंगे. वहीं, बस में एक शिक्षक को रखा जाएगा, यह शिक्षक महिला या पुरुष कोई भी हो सकता है. जो बस के आखिरी स्टॉप तक बस में ही रहेगा. इस दौरान हादसा या उल्लंघन होने पर प्रबंधन के साथ वे भी जिम्मेदार होंगे. ये भी आदेश बस की खिड़की पर ग्रिल हो, साथ ही फर्स्ट एड किट व अग्निशमन यंत्र जरूरी है. स्कूल प्रबंधन ड्राइवर व कंडक्टर का मेडिकल चेकअप कराएं और आपराधिक गतिविधियों पर नजर रखें. बस का रंग पीला रहेगा। बस पर स्कूल बस या ऑन स्कूल ड्यूटी लिखा जाए. अनुबंधित बसों के पास मोटर व्हीकल एक्ट के अनुसार फिटनेस प्रमाण पत्र होना चाहिए. बसों में बीमा, परमिट, पीयूसी व टैक्स रसीद रखी जाए. स्कूल का नाम, पता, टेलिफोन व व्हीकल इंचार्ज का मोबाइल नंबर की पट्टी लगाएं. खिड़की में ग्रिल लगी होनी चाहिए. फिल्म व रंगीन ग्लास का उपयोग नहीं करें. बसों में फर्स्ट एड किट और अग्निशमन यंत्र अनिवार्य रूप से लगे हों. बस सहायक को स्कूल प्रबंधन की तरफ से इमर्जेंसी उपयोग व बच्चों को बैठाने-उतारने का प्रशिक्षण दिया जाए. ड्राइवर के पास स्थाई लाइसेंस व 5 साल का अनुभव हो.  ऐसे ड्राइवर नियुक्त न करें जिनका ओवर स्पीडिंग, नशा करके चलाने जैसे नियमों के उल्लंघन पर जुर्माना या चालान किया गया हो. पेरेंट्स मोबाइल एप पर देख सकेंगे बस की स्थिति हाईकोर्ट जस्टिस विवेक रुसिया और जस्टिस विनोद कुमार द्विवेदी ने गाइडलाइन के साथ ही आदेश दिए हैं कि हर सरकारी स्कूल में प्रिंसिपल और निजी स्कूल, शैक्षणिक संस्थान में ऑनर, प्रिंसिपल व अन्य जिम्मेदार व्यक्ति हर बस के लिए एक व्हीकल इंचार्ज नियुक्त करेगा। जो बस के परमिट, लाइसेंस, फिटनेस ड्राइवर के क्रिमिनल रिकॉर्ड व अन्य बातों पर नजर रखेगा। कोई भी घटना होने पर उन्हें ही सीधे जिम्मेदार माना जाएग। हाईकोर्ट ने यह भी आदेश दिए हैं कि हर बस में सीसीटीवी और जीपीएस भी होना चाहिए। इससे पेरेंट्स मोबाइल एप पर हर बस की स्थिति देख सकें। बस में मेल, फीमेल टीचर भी होना चाहिए, जो बच्चों के बस में आने-जाने को देखेगा। ड्राइवर का लगातार मेडिकल चैकअप भी किया जाएगा। मुआवजे का मुद्दा जनहित याचिका में नहीं उठाया जा सकता- कोर्ट इसके साथ ही बस दुर्घटना में मरने वालों और घायलों को उचित मुआवजा दिए जाने का मुद्दा भी जनहित याचिका में उठाया गया था। साथ ही प्रबंधन के खिलाफ कार्रवाई की भी मांग की गई थी, लेकिन इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि मुआवजे का मुद्दा जनहित याचिका में नहीं उठाया जा सकता। इसलिए इस पर विचार नहीं किया जाएगा। जहां तक प्रबंधन के खिलाफ कार्रवाई की बात है, तो उस समय पहले से ही मामला दर्ज था, इसलिए इन दो बिंदुओं पर विचार नहीं किया जा रहा है। लेकिन स्कूली बसों और ऑटो में बच्चों की सुरक्षा के लिए दिशा-निर्देश जरूर जारी किए जा रहे हैं।     recent visitors 46

मदरसा अधिनियम में संशोधन करेगी योगी सरकार, दायरे से बाहर होगी ग्रेजुएशन की डिग्री

लखनऊ उत्तर प्रदेश सरकार मदरसा अधिनियम में महत्वपूर्ण संशोधन करने जा रही है. इस संशोधन के तहत कुछ मदरसा डिग्रियों को अधिनियम के दायरे से बाहर किया जाएगा. विशेष रूप से, कामिल और फाजिल प्रमाणपत्र देने वाले मदरसों को अब मान्यता नहीं दी जाएगी. यह कदम शासन स्तर पर तैयार किया जा रहा है और इसके लिए एक विस्तृत प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है. सूत्रों के अनुसार, इस संशोधन का मुख्य उद्देश्य मदरसों को केवल शैक्षिक संस्थान के रूप में सीमित करना है, जिससे कि उनका पाठ्यक्रम और प्रमाणपत्र राष्ट्रीय शिक्षा व्यवस्था के अनुरूप हो सके. इस प्रस्ताव के तहत, मदरसा शिक्षा और प्रशिक्षण को सिर्फ बारहवीं कक्षा तक सीमित करने की योजना है. इस बदलाव से संबंधित नियमों और निर्देशों को शीघ्र लागू किया जाएगा, और इसे मदरसों के संचालन में एक नई दिशा देने की दिशा में एक कदम के रूप में देखा जा रहा है. क्यों किया जा रहा है यह बदलाव? सुप्रीम कोर्ट का आदेश: सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा परिषद अधिनियम, 2004 की संवैधानिक वैधता को सही ठहराते हुए यह स्पष्ट किया कि बारहवीं कक्षा के बाद कामिल और फाजिल डिग्री देने वाले मदरसों को मान्यता नहीं दी जा सकती. वहीं, उच्च शिक्षा यूजीसी (विश्वविद्यालय अनुदान आयोग) अधिनियम के तहत संचालित होती है. मदरसा एक्ट पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला हाल ही में, सुप्रीम कोर्ट की तीन न्यायाधीशों की पीठ ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए उत्तर प्रदेश मदरसा बोर्ड एक्ट 2004 को संवैधानिक करार दिय. सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से राज्य के लगभग 17 लाख मदरसा छात्रों को बड़ी राहत मिली है, क्योंकि इससे उनकी शिक्षा और भविष्य की पढ़ाई के लिए अनिश्चितता खत्म हो गई है. मदरसा कानून है क्या? उत्तर प्रदेश में मदरसा शिक्षा को सुव्यवस्थित और संरचित करने के उद्देश्य से 2004 में एक विशेष कानून बनाया गया, जिसे यूपी मदरसा बोर्ड अधिनियम के नाम से जाना जाता है. इस कानून के तहत उत्तर प्रदेश मदरसा बोर्ड की स्थापना की गई, जिसका मुख्य उद्देश्य राज्य में संचालित मदरसों की शिक्षा को प्रबंधित और नियोजित करना है. इस अधिनियम में अरबी, उर्दू, फारसी, इस्लामिक स्टडीज, तिब्ब (यानी पारंपरिक चिकित्सा), और दर्शनशास्त्र जैसी पारंपरिक इस्लामी शिक्षा को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है. यह कानून मदरसों को एक संरचित पाठ्यक्रम के अनुसार संचालित करने का ढांचा प्रदान करता है, ताकि धार्मिक और सांस्कृतिक अध्ययन के साथ-साथ आधुनिक शिक्षा का भी समावेश किया जा सके. उत्तर प्रदेश में करीब 25,000 मदरसे हैं, जिनमें से लगभग 16,000 मदरसों को यूपी मदरसा बोर्ड से मान्यता प्राप्त है शिक्षा नीति के अनुरूप: केंद्र सरकार की नई शिक्षा नीति का उद्देश्य सभी प्रकार की शिक्षा को एकीकृत करना है. इसीलिए मदरसा शिक्षा को भी मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है. मदरसों की सीमाओं का निर्धारण: इस संशोधन के बाद, मदरसा बोर्ड केवल बारहवीं कक्षा तक की शिक्षा तक सीमित रहेगा. इससे मदरसों की शिक्षा व्यवस्था को और अधिक व्यवस्थित किया जा सकेगा. इस बदलाव का क्या होगा असर? मदरसों का आधुनिकीकरण: यह बदलाव मदरसों को आधुनिक शिक्षा पद्धति अपनाने के लिए प्रेरित करेगा. छात्रों के लिए अधिक अवसर: मदरसों के छात्रों को अब उच्च शिक्षा के लिए और अधिक विकल्प मिलेंगे. वे अन्य विश्वविद्यालयों में ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई कर सकेंगे. समाज में एकता: यह बदलाव मदरसों और मुख्यधारा की शिक्षा के बीच की खाई को कम करने में मदद करेगा और समाज में एकता लाने में योगदान देगा.   recent visitors 65

प्रधानमंत्री मोदी के देश को टीबीमुक्त बनाने का संकल्प को मध्यप्रदेश भी कदम से कदम मिला कर चल रहा

भोपाल मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने आज कहा कि 'टीबीमुक्त भारत' के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संकल्प में राज्य भी कदम से कदम मिला कर चल रहा है और अगर कोई व्यक्ति टीबी से ग्रस्त है तो उसे इस अभियान का हिस्सा बनाने में सभी मदद करें। डॉ यादव ने अपने वीडियो संदेश में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2018 में देश को टीबीमुक्त बनाने का संकल्प लिया था। मध्यप्रदेश भी उसमें कदम से कदम मिला कर चल रहा है। उन्होंने कहा कि क्षय रोग के दृष्टिकोण से देश भर के 347 जिलों का चयन किया गया है, जिसमें 100 दिवसीय नि:क्षय अभियान चलाया जा रहा है। इसमें मध्यप्रदेश के 23 जिले अलीराजपुर, अनूपपुर, बैतूल, छतरपुर, छिंदवाड़ा, दमोह, दतिया, डिंडोरी, जबलपुर, कटनी, खंडवा, मंडला, मंदसौर, नरसिंहपुर, नीमच, रतलाम, सीहोर, सिवनी, श्योपुर, सीधी, सिंगरौली, उज्जैन और विदिशा शामिल हैं। उन्होंने भरोसा जताया कि क्षय उन्मूलन की दिशा में इन जिलों में सक्रियता के साथ काम होगा। साथ ही जनता भी इस अभियान में मददगार बनते हुए टीबी से ग्रस्त अगर कोई व्यक्ति है तो उसे इस अभियान का हिस्सा बनाने में मदद करे।मुख्यमंत्री ने कहा कि टीबी लाइलाज बीमारी नहीं है। इससे डरे नहीं। रोगी की पहचान कर राेगमुक्ति का संकल्प लें। recent visitors 80

अंतःरामनिवास रावत का इस्तीफा हुआ मंजूर, नए वनमंत्री के लिए इन नेताओं के नाम बटोर रहे सुर्खियां, जल्द होगा फैसला

भोपाल  मध्य प्रदेश की विजयपुर विधानसभा सीट पर उपचुनाव में हार के बाद वनमंत्री रामनिवास रावत ने 2 दिसंबर को इस्तीफा दिया। विदेश दौरे से लौटने के बाद CM डॉ. मोहन यादव ने रावत के इस्तीफे को अनुशंसा के लिए राज्यपाल मंगू भाई पटेल के पास भेजा। बुधवार (4 दिसंबर) को राम निवास रावत का इस्तीफा मंजूर हो गया है। रावत का इस्तीफा मंजूर होते ही अब नए वन मंत्री की तलाश शुरू हो गई है। रावत की कुर्सी पर बैठने के लिए कई नेताओं के नाम सियासी गलियारों में सुर्खियां बटोर रहे हैं। आइए जानते हैं कौन हैं वो नेता। कुर्सी पाने की होड़ शुरू वनमंत्री की कुर्सी पाने के लिए कई नेताओं ने प्रयास शुरू कर दिए हैं। अपने-अपने स्तर पर ताकत लगा रहे हैं। सियासी गलियारों में पूर्व वन मंत्री नागर सिंह चौहान और विजय शाह के नाम सबसे ज्यादा चर्चा में हैं। सूत्रों के मुताबिक, दोनों नेताओं की दावेदारी सबसे मजबूत मानी जा रही है। जनजातीय कार्य मंत्री विजय शाह ने दिल्ली में केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री भूपेन्द्र यादव से भेंट की थी। पिछली सरकार में शाह के पास वन विभाग था। नागर सिंह के पास था वन मंत्रालय नागर सिंह चौहान अलीराजपुर से विधायक हैं। नागर की पत्नी अनीता सिंह चौहान रतलाम से बीजेपी सांसद हैं।  रावत को वन मंत्री बनाए जाने से पहले यह महकमा मंत्री नागर सिंह चौहान के पास था। उनसे वन विभाग छीने जाने पर चौहान ने नाराजगी भी जताई थी और बात दिल्ली तक पहुंची थी। ऐसे में उनकी भी दावेदारी इस पद के लिए मानी जा रही है। हाल ही में नागर सिंह ने दिल्ली में पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान से मुलाकात की थी।   शिवराज सरकार में वनमंत्री थे विजय शाह हरसूद विधायक कुंवर विजय शाह मोहन सरकार में जनजातीय कार्य मंत्री हैं। शिवराज सिंह चौहान की सरकार में विजय सिंह वनमंत्री की जिम्मेदारी संभान चुके हैं। रावत के इस्तीफे के बाद विजय शाह का नाम भी वनमंत्री के लिए चल रहा है। दो दिन पहले शाह का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर सामने आया था। वीडियो में शाह से पूछा गया था कि रावत के इस्तीफे के बाद वन मंत्री का पद खाली है, क्या वे वन मंत्री बन सकते हैं। इस पर शाह बिना कोई जवाब दिए मुस्कुरा कर चल दिए थे। इनके नाम भी बटोर रहे सुर्खियां नागर सिंह और विजय शाह के अलावा भी कई नेताओं के नाम वनमंत्री के लिए सुर्खियां बटोर रहे हैं। रहली विधायक गोपाल भार्गव, विजयराघवगढ़ विधायक संजय पाठक, पाटन विधायक अजय विश्नोई सहित कई विधायकों के नाम भी चर्चा में हैं। इनके अलावा मोहन कैबिनेट में कमजोर विभाग वाले मंत्रियों की निगाहे भी इस विभाग पर हैं। हालांकि इसका अंतिम फैसला मुख्यमंत्री को ही करना है।   1. मंत्रिमंडल विस्तार और किसी नए चेहरे को जिम्मेदारी मंत्रिमंडल में रावत के इस्तीफे के बाद मोहन कैबिनेट में अब कुल 32 मंत्री हैं। विधानसभा सदस्यों की संख्या के हिसाब से संवैधानिक व्यवस्था के मुताबिक अधिकतम 35 मंत्री (मुख्यमंत्री सहित) रह सकते हैं। इस हिसाब से 3 मंत्रियों की गुंजाइश है, लेकिन मंत्रिमंडल विस्तार की फिलहाल कोई संभावना नहीं दिख रही है। ऐसी राजनीतिक परिस्थितियां भी नहीं हैं कि संगठन या सरकार के लिए विस्तार मजबूरी हो। 2. मौजूदा मंत्रियों में से किसी को वन विभाग सौंपा जाए इसकी संभावना ज्यादा है। किसी आदिवासी मंत्री को यह जिम्मेदारी मिल सकती है, क्योंकि रावत से पहले यह विभाग आदिवासी मंत्री नागर सिंह के पास ही था। नागर सिंह भी खुलकर दावेदारी कर चुके हैं। आदिवासी चेहरों में पीएचई मंत्री संपतिया उइके प्रबल दावेदार हैं। आदिवासियों से जुड़े मुद्दों के मामले में मुख्यमंत्री मोहन यादव फील्ड में उन्हें आगे करते रहे हैं। इससे सरकार महिला और आदिवासी दोनों वर्गों में मैसेज देगी। दूसरे दावेदार जनजातीय कार्य मंंत्री विजय शाह हैं जो दिल्ली तक लॉबिंग कर चुके हैं। शिवराज सरकार में वन विभाग उनके पास रह चुका है। दो दिसंबर को इस्तीफा मंजूर, 4 को नोटिफिकेशन रावत का इस्तीफा दो दिसंबर को मंजूर किया गया। इसका नोटिफिकेशन सामान्य प्रशासन विभाग ने 4 दिसंबर को जारी किया। सीएम डॉ मोहन यादव के जर्मनी और यूके से 30 नवंबर को भोपाल लौटने के बाद मंत्री रावत ने उनसे मुलाकात की थी। माना जा रहा है कि सीएम से मुलाकात के बाद ही इस्तीफे को स्वीकार करने पर अंतिम फैसला हुआ है। सीएम यादव की अनुशंसा के बाद इस्तीफा राजभवन को भेजा गया। उपचुनाव रिजल्ट आते ही राहत ने दिया था इस्तीफा वनमंत्री राम निवास रावत ने 23 नवंबर को विजयपुर विधानसभा उपचुनाव के परिणाम घोषित होने के बाद उसी शाम मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। हालांकि तब से इस पर फैसला पेंडिंग था। मुख्यमंत्री 24 नवंबर को विदेश के लिए रवाना हो गए और तीस नवंबर को भोपाल लौटे। इसके बाद रावत की उनसे मुलाकात हुई और अब इस्तीफे को मंजूरी मिली है। वन मंत्री बनने के सवाल पर मुस्कुरा कर रह गए थे शाह वन मंत्री रह चुके कुंवर विजय शाह का दो दिन पहले एक वीडियो भी सामने आया था। इसमें जब शाह से पूछा गया कि रावत के इस्तीफे के बाद वन मंत्री का पद खाली है, क्या वे वन मंत्री बन सकते हैं। इस पर शाह बिना कोई जवाब दिए मुस्कुरा कर चल दिए थे। सीएम के पास जीएडी, गृह, जेल, खनिज जैसे महकमे मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने अपने पास कई महत्वपूर्ण विभाग रखे हैं। इसमें सामान्य प्रशासन विभाग के अलावा गृह, जेल विभाग, औद्योगिक नीति और निवेश प्रोत्साहन, जनसंपर्क, नर्मदा घाटी विकास विभाग, विमानन, खनिज, लोक सेवा प्रबंधन, प्रवासी भारतीय विभाग शामिल हैं। विभागों के नए बंटवारे में सीएम अपने पास से भी कुछ विभाग दूसरे मंत्रियों को दे सकते हैं।   recent visitors 115

बाबा सिद्दीकी से पहले हिटलिस्ट में थे सलमान, शूटर का बड़ा खुलासा

मुंबई बॉलीवुड एक्टर सलमान खान को लेकर शॉकिंग खुलासा हुआ है. एक्टर की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं. कुछ महीने पहले ही NCP लीडर और सलमान के जिगरी दोस्त बाबा सिद्दीकी की हत्या कर दी गई थी. अब बाबा सिद्दीकी हत्याकांड में खुलासा हुआ है की उनसे पहले सलमान खान को मारने की प्लानिंग थी. आरोपियों ने पुलिस से पूछताछ में बताया है कि गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई की हिटलिस्ट में सलमान खान का भी नाम था. आरोपियों ने ये भी खुलासा किया है, लेकिन सलमान की कड़ी सुरक्षा के कारण शूटर सलमान तक नहीं पहुंच सके. सलमान को लगातार मिल रही धमकियों की वजह से उन्हें हाई सिक्योरिटी दी गई है. एक्टर हमेशा सुरक्षा घेरे में ही कहीं भी आते जाते हैं.   शूटिंग साइट पर पहुंचा संदिग्ध बीते दिन ही खबर आई थी कि सलमान की शूटिंग साइट पर एक अनजान शख्स ने अवैध तरीके से प्रवेश किया था. संदिग्ध पाए जाने पर जब उससे पूछताछ की गई तो शख्स ने कहा- बिश्नोई को बोलूं क्या? इसके बाद उसे पूछताछ के लिए तुरंत शिवाजी पार्क पुलिस स्टेशन ले जाया गया. सलमान की शूटिंग दादर वेस्ट में चल रही थी. मौजूदा लोगों के मुताबिक, सलमान का कोई फैन था जिसे शूटिंग देखनी थी, सिक्योरिटीज के रोकने पर झगड़ा हुआ और उसने गुस्से में लॉरेस बिश्नोई का नाम लिया.      शूटर सलमान खान पर करना चाहते थे हमला जांच में यह बात भी सामने आई है कि आरोपी जब सलमान खान पर हमला करने में नाकामयाब रहे तो उन्होंने अपना पूरा ध्यान बाबा सिद्दीकी और उनके बेटे जीशान सिद्दीकी पर केंद्रित कर दिया. 12 अक्टूबर को वे बाबा सिद्दीकी की हत्या करने में सफल रहे, लेकिन जीशान बाल-बाल बच गए, क्योंकि वह हत्या से कुछ मिनट पहले ही अपने कार्यालय से निकल गए थे.  एक अधिकारी ने बताया कि जांच के दौरान हमें जिस तरह की जानकारियां मिली हैं, वह इस ओर इशारा करती हैं कि आरोपियों ने सलमान खान के घर की एक बार रेकी की थी. तब उन्होंने देखा कि सलमान खान के घर के बाहर बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात है. इसके अलावा उन्होंने यह भी पाया कि सलमान खान अपनी बिल्डिंग के अंदर से ही अपनी गाड़ी में बैठकर बाहर निकलते हैं, जिसकी वजह से उनके पास जाना नामुमकिन है. इसके बाद आरोपियों ने सलमान खान से ध्यान हटाकर बाबा सिद्दीकी पर ध्यान केंद्रित कर दिया. लॉरेंस गैंग की धमकियों के कारण अभिनेता पहले से ही वाई प्लस कैटेगरी की सुरक्षा में थे. बाबा सिद्दीकी की हत्या के बाद उनके सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मियों की संख्या और बढ़ा दी गई थी. फिलहाल उनकी सुरक्षा में लगभग 50-60 पुलिस अधिकारी तैनात हैं, साथ ही दो एस्कॉर्ट व्हीकल भी हैं.    recent visitors 66

मुख्यमंत्री ने औद्योगिक विकास नीति के संबंध में स्टेक होल्डर कनेक्ट वर्कशॉप को किया सम्बोधित

नई औद्योगिक नीति के रूप में निवेशकों के लिए छत्तीसगढ़ में खुला रेड कारपेट: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय 27 बड़े औद्योगिक समूहों को 32 हजार 225 करोड़ रुपए के नवीन पूंजी निवेश के लिए प्रदान किए गए ‘इंटेंट टू इन्वेस्ट लेटर’ मुख्यमंत्री ने औद्योगिक विकास नीति के संबंध में स्टेक होल्डर कनेक्ट वर्कशॉप को किया सम्बोधित रायपुर छत्तीसगढ़ में नए नए उद्योगों की स्थापना की व्यापक संभावनाएं हैं। यहां मिनरल्स का विपुल भंडार है, अनुकूल औद्योगिक वातावरण है, साथ ही उद्योग और व्यापार जगत के प्रतिनिधियों से चर्चा कर राज्य की नवीन औद्योगिक विकास नीति 2024-30 तैयार की गई है। इस नवीन नीति में उद्योगों की स्थापना की प्रक्रिया को सरल बनाया गया है और उद्योगों की स्थापना को प्रोत्साहित करने के लिए अनेक प्रावधान शामिल किए गए हैं। नई औद्योगिक नीति के रूप में निवेशकों के लिए रेड कारपेट छत्तीसगढ़ में खुला है। निवेश की जटिलताएं अब छत्तीसगढ़ में नहीं रही। सिंगल विंडों सिस्टम ने सब कुछ बहुत सरल कर दिया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज नवा रायपुर में नीति आयोग एवं छत्तीसगढ़ शासन द्वारा संयुक्त रूप से ‘‘छत्तीसगढ़ की औद्योगिक विकास नीति 2024-30 के संबंध में हितधारकों के साथ संवाद कार्यक्रम (स्टेक होल्डर कनेक्ट वर्कशॉप)’’ को संबोधित करते हुए यह बात कही। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य दिया है। इसके लिए हमें विकसित छत्तीसगढ़ का निर्माण करना होगा। विकसित भारत के निर्माण में छत्तीसगढ़ के उद्योग जगत का भी महत्वपूर्ण योगदान होगा। छत्तीसगढ़ के विकास हेतु विभिन्न क्षेत्रों में औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देते हुए छत्तीसगढ़ के अधिक से अधिक लोगों को रोजगार का अवसर प्रदान किया जाएगा। उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन ने कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ की नवीन औद्योगिक नीति मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के मार्गदर्शन और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से प्रेरणा लेकर किया गया है। नई नीति तैयार करने में उद्योगपतियों से सुझावों को शामिल किया गया है। इस नीति से प्रदेश में निवेश तो आएगा ही, नये उद्योगों की स्थापना होगी, साथ ही राज्य के लोगों को रोजगार मिलेगा। नीति आयोग के वरिष्ठ सलाहकार संजीत सिंह ने कहा कि छत्तीसगढ़ निवेशकों के लिए पसंदीदा राज्य बन गया है। छत्तीसगढ़ के नवीन औद्योगिक नीति की हर तरफ प्रशंसा की जा रही है। इस नीति से प्रदेश में सस्टेनेबल औद्योगिक विकास को नई दिशा मिलेगी। नई नीति में एमएसएमई उद्योगों को सशक्त बनाने का अच्छा प्रयास किया गया है। नये क्षेत्रों में निवेश के लिए इंसेन्टिव स्कीम तैयार की गई है। इस उद्योग नीति में रोजगार सृजन महत्वपूर्ण पहलू है। मुख्यमंत्री साय ने कार्यक्रम में राज्य के 27 बड़े औद्योगिक समूहों को नवीन पूंजी निवेश के प्रस्ताव के संबंध में 32 हजार 225 करोड़ रुपए के निवेश के लिए इंटेंट टू इन्वेस्ट लेटर प्रदान किए। इनमें राज्य के कोर सेक्टर के साथ ही नये निवेश क्षेत्रों जैसे आईटी, एआई, डाटा सेंटर, एथेनॉल, इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिकल, कम्प्रेस्ड बायो गैस जैसे क्षेत्रों में निवेश किया जाएगा। इनमें शिवालिक इंजीनियरिंग, मां दुर्गा आयरन एण्ड स्टील, एबीआरईएल ग्रीन एनर्जी, आरएजी फेरो एलायज, रिलायंस बायो एनर्जी, यश फैंस एण्ड एप्लायंसेस, शांति ग्रीन्स बायोफ्यूल, रेक बैंक डाटा सेंटर आदि सम्मिलित हैं। मुख्य सचिव अमिताभ जैन ने कहा कि छत्तीसगढ़ की नवीन औद्योगिक नीति में रोजगार सृजन, निर्यात प्रोत्साहन और उद्योगों की मंजूरी और स्थापना की प्रक्रिया के सरलीकरण पर फोकस किया गया है। वाणिज्य एवं उद्योग विभाग के सचिव रजत कुमार ने बताया कि नवीन औद्योगिक विकास नीति में राज्य की प्राथमिकताओं एवं राज्य में औद्योगिक विकास को गति प्रदान करने के लिये प्रावधान किये गये हैं । कार्यक्रम में आयोजित पैनल डिस्कशन में रोजगारवर्धक औद्योगिक विकास में औद्योगिक अधोसंरचना, नीति समर्थन एवं उद्योग स्थापना हेतु औपचारिक आवश्यकताओं को कम करने पर चर्चा की गई। कार्यक्रम में विभिन्न औद्योगिक संगठनों के प्रतिनिधियों सहित अन्य अधिकारीगण उपस्थित थे। recent visitors 58

मुख्यमंत्री ने मंत्रिमंडल के सदस्यों को प्रदेश की उपलब्धियों से कराया अवगत

सोयाबीन एवं धान उपार्जन पर निगरानी के लिए मंत्री करें अपने-अपने क्षेत्र का दौरा : मुख्यमंत्री डॉ. यादव औद्योगिक निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए अत्यधिक सार्थक रही विदेश यात्रा-मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री ने मंत्रिमंडल के सदस्यों को प्रदेश की उपलब्धियों से कराया अवगत भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि औद्योगिक निवेश के संदर्भ में की गई जर्मन एवं इंग्लैंड यात्रा अत्यधिक सार्थक और आशाओं से कहीं आगे साबित हुई। उन्होंने कहा कि विभिन्न क्षेत्रों में निवेश के लिए लगभग 78 हजार करोड़ के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए। विदेशी निवेश प्राप्त करने के पहले हमने प्रदेश में रीजनल कॉन्क्लेव आयोजित किए। उज्जैन, जबलपुर, ग्वालियर, सागर और रीवा के बाद अगली रीजनल कॉन्क्लेव नर्मदापुरम में 7 दिसम्बर को आयोजित करने जा रहे हैं। नर्मदापुरम् कॉन्क्लेव के पूर्व ही हमें बहुत अच्छा रिस्पांस मिला है। जिससे नर्मदापुरम् रीजन में उद्योगों के लिए 250 हेक्टेयर से बढ़ाकर 750 हेक्टेयर भूमि आरक्षित की गई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बुधवार को कैबिनेट बैठक के पहले मंत्रि-परिषद के सदस्यों को विभिन्न क्षेत्रों में किए जाने वाले आयोजनों और उपलब्धियों से अवगत कराया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में सोयाबीन और धान उपार्जन का काम जारी है। प्रदेश में 25 अक्टूबर से 31 दिसम्बर तक समर्थन मूल्य पर सोयाबीन का उपार्जन किया जा रहा है। अब तक 77 हजार से अधिक किसानों से 2 लाख 4 हजार मीट्रिक टन सोयाबीन उपार्जन किया गया है। प्रतिदिन 20 हजार मीट्रिक टन की आवक हो रही है। प्रदेश में 2 दिसम्बर से 1184 उपार्जन केन्द्रों पर धान का उपार्जन समर्थन मूल्य पर प्रारंभ है, जिसमें लगभग 7 लाख 68 हजार किसानों द्वारा पंजीयन कराया गया है। मंत्रीगण अपने क्षेत्र में भ्रमण कर‌किसानों से उपार्जन प्रक्रिया एवं खाद वितरण के बारे में जानकारी प्राप्त करें। गीता जयंती, तानसेन शताब्दी समारोह तथा जन-कल्याण उत्सव मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आगामी 8 से 11 दिसम्बर तक उज्जैन और 11 दिसम्बर को भोपाल एवं समस्त जिलों में गीता जयंती का भव्य आयोजन किया जा रहा है। तानसेन शताब्दी समारोह 15 से 19 दिसम्बर तक ग्वालियर में आयोजित किया जायेगा। महिला, किसान, युवा और गरीब कल्याण तथा विकास से जुड़े जन-कल्याण उत्सव प्रदेश में 11 से 26 दिसम्बर तक मनाया जायेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि संबंधित विभागीय मंत्री पृथक-पृथक कमेटी बनाएं। राज्य शासन द्वारा इन वर्गों के लोगों के लिए किए गए कार्यों को आमजन के बीच में लेकर आएं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि रातापानी अभयारण्य को प्रदेश के 8वें टाइगर रिजर्व के रूप में स्वीकृति मिली है। विश्व में किसी भी राज्य की राजधानी से एकदम सटे एकमात्र टाइगर रिजर्व से न सिर्फ पर्यटन से रोजगार के अवसर बढ़ेंगे बल्कि राजधानी के पास स्थित टाइगर रिजर्व के जंगलों, बाघों तथा अन्य जंगली पशुओं का प्रभावी संरक्षण हो सकेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रधानमंत्री मोदी को प्रदेश की जनता की ओर से धन्यवाद देता हूँ हुए कहा कि मध्यप्रदेश में 4100 मेगावाट के नवीन थर्मल पावर प्लांट के लिए कोयला आवंटन की स्वीकृत प्रदान की है। इससे लगभग 25 हजार करोड़ रूपए के निवेश और प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर इस प्लांट से सृजित होंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि नदी जोड़ो अभियान चंबल संभाग में पार्वती-कालीसिंध-चंबल और बुंदेलखंड क्षेत्र की केन-बेतवा लिंक परियोजना को केंद्र एवं राज्य सरकारों ने अपनी सहमति प्रदान की है। पार्वती-कालीसिंध-चंबल परियोजना से प्रदेश के 11 जिलों के 2094 गांवों में लगभग 6 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई होगी। केन-बेतवा लिंक परियोजना पर सहमति से बुंदेलखंड अंचल में सिंचाई सहज और सुलभ होगी।   recent visitors 47