एमपी में व्हाइट टॉपिंग तकनीक बनेगी, बढ़ेगी सड़कों की उम्र, चार महीनों के अंदर काम खत्म करने का रखा टारगेट

भोपाल  मध्य प्रदेश में जल्द ही सड़कें और मजबूत बनेंगी। पीडब्ल्यूडी खराब सड़कों की समस्या से निपटने के लिए व्हाइट टॉपिंग तकनीक अपना रहा है। इस तकनीक से बनी सड़कें ज़्यादा टिकाऊ होती हैं और लंबे समय तक चलती हैं। शुरुआत में 21 जिलों की 41 सड़कों पर इस तकनीक का इस्तेमाल होगा। काम इसी महीने शुरू हो जाएगा और चार महीने में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इससे बारिश में सड़कों के उखड़ने की समस्या से निजात मिलेगी। लोक निर्माण विभाग ने खराब सड़कों की बढ़ती शिकायतों के बाद यह कदम उठाया है। बारिश में सड़कें टूटने से लोगों को काफी परेशानी होती है। व्हाइट टॉपिंग तकनीक से बनी सड़कें इस समस्या का समाधान करेंगी। इस तकनीक से करीब 108 किलोमीटर लंबी सड़कें बनाई जाएंगी। प्रोजेक्ट नवंबर अंत तक शुरू होकर अगले चार महीनों में पूरा हो जाएगा। सड़क निर्माण में नई क्रांति व्हाइट टॉपिंग तकनीक सड़क निर्माण में एक नया मोड़ है। यह तकनीक सड़कों को मजबूत और टिकाऊ बनाती है। इससे सड़कों का रखरखाव भी आसान हो जाता है। यह तकनीक लंबे समय में पैसा भी बचाती है। सरकार का यह कदम प्रदेश की सड़कों की दशा सुधारने में मददगार साबित होगा। इससे लोगों को आवागमन में सुविधा होगी और राज्य के विकास को गति मिलेगी। यह तकनीक भविष्य में सड़क निर्माण का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकती है। यह पर्यावरण के लिए भी फायदेमंद है। यह सड़कों को गर्मी से बचाती है. इससे शहरों का तापमान भी कम रहता है। व्हाइट टॉपिंग तकनीक से बेहतर सड़कें और बेहतर भविष्य की उम्मीद है। लोगों को मिलेगा बेहतर यात्रा का अनुभव भोपाल में वल्लभ भवन मार्ग और सीएम हाउस मार्ग समेत 14 सड़कों को चिह्नित किया गया है। PWD ने 15 अन्य जिलों में भी एक-एक सड़क पर इस तकनीक का इस्तेमाल करने का फैसला किया है। इन जिलों में इंदौर, नर्मदापुरम, नीमच, बैतूल से लेकर मुरैना, रतलाम, रायसेन, रीवा, सतना,आगर मालवा, उमरिया, खंडवा, गुना, छतरपुर, देवास और हरदा शामिल हैं। इससे इन जिलों की सड़कों की हालत में सुधार होगा। लोगों को बेहतर यात्रा का अनुभव मिलेगा। जानें क्या है व्हाइट टॉपिंग तकनीक व्हाइट टॉपिंग तकनीक में पुरानी सड़क की ऊपरी परत हटाकर कंक्रीट की मोटी परत बिछाई जाती है। इसमें M-40 ग्रेड सीमेंट और फाइबर बुरादा का इस्तेमाल होता है। 6 से 8 इंच मोटी यह परत सड़क को मजबूत बनाती है। भारी ट्रैफ़िक और खराब मौसम का भी इस पर कम असर होता है। इससे सड़क की उम्र 20 से 25 साल तक बढ़ जाती है। यह तकनीक पर्यावरण के अनुकूल भी है। कंक्रीट की सतह डामर से ज़्यादा ठंडी रहती है। इससे रखरखाव का खर्च भी कम आता है। recent visitors 68

विकसित भारत यंग लीडर डायलॉग के तहत प्रदेश में होगा राज्य स्तरीय प्रतियोगिता का आयोजन

संविधान के 75 वर्ष पूर्ण होने पर भोपाल में निकलेगी 'संविधान दिवस पदयात्रा'- मंत्री  सारंग विकसित "भारत यंग लीडर" डायलॉग के तहत प्रदेश स्तर पर चयनित युवाओं को मिलेगा प्रधानमंत्री मोदी से सीधे संवाद का अवसर- मंत्री सारंग विकसित भारत यंग लीडर डायलॉग के तहत प्रदेश में होगा राज्य स्तरीय प्रतियोगिता का आयोजन युवा महोत्सव 2025 में युवाओं की प्रतिभा को मंच देने के उद्देश्य से जिला एवं राज्य पर होंगे आयोजन भोपाल खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने संविधान दिवस, विकसित भारत यंग लीडर डायलॉग और 28वें युवा महोत्सव-2025 से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां साझा की। मंत्री सारंग ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत तेज गति से विकसित भारत-2047 के लक्ष्य की ओर अग्रसर है। इन कार्यक्रमों से युवाओं की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित कर उनकी ऊर्जा और दृष्टिकोण को राष्ट्र निर्माण में समाहित किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी का सपना है कि भारत 2047 तक विश्व के विकसित राष्ट्रों की श्रेणी में अग्रणी हो। इसके लिए युवाओं को नई ऊर्जा के साथ जोड़ा जा रहा है। संविधान दिवस, विकसित भारत यंग लीडर डायलॉग और युवा महोत्सव जैसे कार्यक्रम इस दिशा में मील का पत्थर साबित होंगे। संविधान दिवस पदयात्रा – 75 वर्ष का उत्सव मंत्री सारंग ने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी के आव्हान पर देश भर में संविधान दिवस के 75 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में देश के सभी राज्यों एवं केन्द्र शासित प्रदेशों की राजधानी में संविधान दिवस पदयात्रा निकाली जा रही हैं। भोपाल में भी 26 नवंबर 2024 को संविधान के 75 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में भोपाल में "संविधान दिवस पदयात्रा" निकलेगी। उन्होंने बताया कि यह यात्रा शौर्य स्मारक से शाम 4 बजे शुरू होकर बोर्ड ऑफिस स्थित डॉ. बी.आर. अंबेडकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण के बाद पुनः शौर्य स्मारक जाकर समाप्त होगी। मंत्री सारंग ने कहा कि इस आयोजन में लगभग 3000 युवा शामिल होंगे। खेल और युवा कल्याण विभाग के तत्वावधान में यह पदयात्रा विभिन्न विभागों के सहयोग से की जाएगी, जिसमें शिक्षा विभाग, राष्ट्रीय सेवा योजना और नेहरू युवा केंद्र जैसे संगठनों की भागीदारी होगी। विकसित भारत यंग लीडर डायलॉग- युवाओं के विचारों को मंच मंत्री सारंग ने कहा कि विकसित भारत लीडर डायलॉग का उद्देश्य अधिक से अधिक प्रतिभावान युवा की पहचान कर उन की विशेषज्ञता में वृद्धि करना और विकसित भारत के लिए उन्हें अपने विचारों को शामिल करने का मंच प्रदान करना है। इसके तहत प्रदेश स्तर पर चयनित युवाओं को मिलेगा प्रधानमंत्री मोदी से सीधे संवाद का अवसर मिलेगा। उन्होंने बताया कि भारत सरकार, युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय, नई दिल्ली के निर्देशानुसार विकसित भारत-2047 के अंतर्गत 4 चरणों में 15 से 29 आयु वर्ग के युवाओं के लिए प्रतियोगिता आयोजित की जा रही है।     प्रथम चरण (विकसित भारत ऑनलाईन प्रश्नोत्तरी)- यह डिजिटल क्विज दिनांक 25 नवंबर से 5 दिसंबर, 2024 तक "माय भारत" पोर्टल पर किया जायेगा। जिसमेंडिजिटल क्विज से विकसित भारत की ऐतिहासिक उपलब्धियों के प्रति जागरूकता का परीक्षण किया जायेगा।प्रतियोगिता में भाग लेने के लिये "माय भारत" पोर्टल पर पंजीयन करवाया जाना अनिवार्य है। इसके परिणाम 6 दिसंबर को पोर्टल पर रैंक सूची के माध्यम से जारी किये जायेंगे।     द्वितीय चरण (निबंध और ब्लॉग लेखन)- प्रतियोगिता 8 से 15 दिसंबर 2024 तक "माय भारत" पोर्टल पर ऑनलाइन होगी। इसमें पिछले चरण के विजेता लगभग 10 चुने गए विषयों जैसे 'विकसित भारत के लिए तकनीक', 'विकसित भारत के लिए युवाओं को सशक्त बनाना' आदि पर 1000 शब्दों का निबंध प्रस्तुत करेंगे। प्रत्येक विषय से 100 चिन्हित युवाओं को तृतीय चरण राज्य स्तर के लिये चयनित किया जायेगा।इसके परिणाम 18 दिसंबर को घोषित किये जायेंगे।     तीसरा चरण (विकसित भारत विज़न पिच डेक – राज्य स्तरीय प्रस्तुतियां)- प्रतियोगिता 20 से 26 दिसंबर 2024 तक आयोजित की जायेगी, इसके दिशा-निर्देश पृथक से जारी किए जायेंगे। दूसरे चरण में चयनित प्रतिभागी राज्य स्तर पर चुने हुए 10 विषयों पर अपने विचार प्रस्तुत करेंगें। राज्य स्तर की प्रतियोगिता में भाग लेने के ‍लिये प्रतिभागियों में से प्रत्येक विषय पर 4 युवाओं को राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिभागिता के लिये चिन्हित किया जायेगा।     चतुर्थ चरण (भारत मंडपम में राष्ट्रीय चैम्पियनशिप)- विभिन्न थीम आधारित राज्य स्तरीय टीम 11 से 12 जनवरी, 2025 को राष्ट्रीय युवा महोत्सव प्रतिस्पर्धा में प्रत्येक राज्य से प्रत्येक विषय पर 4-4 युवाओं की प्रतिभागिता होगी। चयनित देश भर के 1500 युवा प्रधानमंत्री मोदी के समक्ष विकसित भारत के निर्माण में अपने दृष्टिकोण और विचार प्रस्तुत करेंगे। 28वां राष्ट्रीय युवा महोत्सव: युवा प्रतिभा को मंच मंत्री सारंग ने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी की मंशानुसार पंच प्राण और आजादी के अमृत महोत्सव वर्ष के उपलक्ष्य में 15 से 29 वर्ष के आयु वर्ग के युवाओं की प्रतिभा को मंच प्रदान करने के उद्देश्य से जिला एवं राज्य स्तर पर आयोजन किये जायेंगे। इसमें 12 से 16 जनवरी 2025 के मध्य राष्ट्रीय स्तर पर 28वां युवा उत्सव का आयोजन किया जा रहा है। राष्ट्रीय युवा उत्सव का स्थान भारत सरकार द्वारा निर्धारित किया जायेगा। इस वर्ष 28वां युवा उत्सव का आयोजन इन विषयों पर किया जा रहा है। क्र. विषय विधा 01 विषयगत (Thematic) विज्ञान मेला (एकल एवं समूह) 02 संस्कृति समूह लोक नृत्य समूह लोक गायन 03 जीवन कौशल (Life Skills) कविता लेखन भाषण पेंटिंग फोटोग्राफी   मंत्री सारंग ने बताया कि 28वें युवा उत्सव का आयोजन राज्य शासन, नेहरू युवा केन्द्र एवं राष्ट्रीय सेवा योजना द्वारा आपसी समन्वय के साथ संयुक्त रूप से किया जायेगा। इसके अन्तर्गत आयोजित होने वाले इवेन्ट युवा उत्सव के तहत विस्तृत योजनाबद्ध गतिविधियां और कार्यक्रम "माय भारत" पोर्टल पर अपलोड की जायेंगी तथा प्रतिभागियों का पंजीयन भी पोर्टल पर किया जाना अनिवार्य होगा।   recent visitors 65

सीएम मोहन यादव ने अस्पतालों में एक्सपर्ट की कमी को देखते हुए फैसला लिया, अब कोई भी मरीज बिना इलाज के अस्पताल से वापस नहीं हो सकेगा

भोपाल मध्य प्रदेश के सभी सरकारी अस्पतालों में मरीजों को उत्तम और विश्वस्तरीय इलाज मिलने की शुरुआत की जा रही है। अब किसी अस्पताल से मरीजों को अन्य अस्पतालों में सिर्फ इसलिए रेफर नहीं किया जा सकेगा कि वहां डॉक्टर नहीं हैं। इसका रास्ता मध्य प्रदेश की डॉ. मोहन यादव सरकार ने निकाल लिया है। प्रदेश के जिन अस्पतालों में सर्जरी के लिए ऑपरेशन थियेटर व अन्य संसाधन उपलब्ध हैं, वहां हर तरह के आपरेशन संभव होंगे। विशेषज्ञ की कमी के कारण सर्जरी नहीं रुकेगी। इसके लिए सरकार निजी डॉक्टर्स को अस्पताल बुलाएगी। सर्जरी और एनेस्थीसिया देने के लिए निजी डॉक्टरों की सेवाएं ली जा सकेंगी। सरकार ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिए हैं। डॉक्टर की कमी से नहीं रुकेगा इलाज सरकार का मानना है कि इस प्रक्रिया का लाभ यह होगा कि जिला अस्पताल, सिविल अस्पताल और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में भी डॉक्टरों की कमी से सर्जरी या अन्य इलाज नहीं रुकेगा। आपको बता दें कि सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी को दूर करने के लिए सरकार ने यह तरीका इजाद किया है। भुगतान की दरें भी निर्धारित हालांकि शुरुआत में यह व्यवस्था आयुष्मान रोगियों के लिए शुरू की गई है। बेहतर रिस्पांस मिलने के बाद अन्य रोगियों को भी इस सेवा का अवसर मिल पाएगा। लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के आयुक्त तरुण राठी के अनुसार निजी सेवाएं देने वाले डॉक्टरों के लिए भुगतान की दरें भी निर्धारित कर दी गई हैं। इन्हें भुगतान मासिक आधार पर किया जाएगा। ये रहेगी रेट लिस्ट सर्जिकल विशेषज्ञ डॉक्टर्स को संबंधित बीमारी में आयुष्मान योजना में निर्धारित पैकेज की कुल राशि का 21.6 प्रतिशत दिया जाएगा। जबकि एनेस्थीसिया यानि बेहोश करने वाले विशेषज्ञ को 10.8 प्रतिशत दिया जाएगा। सर्जरी करने वाले डॉक्टर की ऑपरेशन के पहले से लेकर फालोअप तक उपचार की संपूर्ण जिम्मेदारी होगी। गौरतलब है कि आयुष्मान योजना में आपरेशन के 99 प्रतिशत पैकेज में राशि दो हजार से अधिक है। सामान्य मानी जाने वाली गठान का आपरेशन पैकेज 2000 रुपये, साइनस की सर्जरी के 5000 रुपये, नसबंदी के दो हजार रुपये है। हालांकि निजी क्षेत्र के डॉक्टर्स मध्य प्रदेश सरकार की इस योजना में कितनी रुचि लेते हैं? यह आने वाले समय में साफ हो पाएगा। recent visitors 62

सरकार ने राशन की मात्रा और नियमों में बदलाव किया, चावल की मात्रा में आधा किलो कम कर दी गई, जबकि गेहूं की मात्रा में आधा किलो की बढ़ोतरी हुई

नई दिल्ली भारत सरकार की राशन योजनाएं गरीब और जरूरतमंद लोगों के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। नेशनल फूड सिक्योरिटी एक्ट (NFSA) के तहत राशन कार्ड धारकों को कम कीमत पर अनाज उपलब्ध कराया जाता है। अब सरकार ने राशन की मात्रा और नियमों में बदलाव किया हैं। जो 1 जनवरी 2025 से लागू होंगे। राशन की मात्रा में बदलाव राशन कार्ड पर पहले एक यूनिट में 3 किलो चावल और 2 किलो गेहूं मिलता था। वही अब इसे बदलकर 2.5 किलो चावल और 2 किलो गेहूं कर दिया गया है।इससे तात्पर्य है कि अब चावल की मात्रा आधा किलो कम कर दी गई है। जबकि गेहूं की मात्रा में आधा किलो की बढ़ोतरी हुई है। दरअसल सरकार ने अंत्योदय राशन कार्ड धारकों के लिए भी बदलाव किए गए हैं। पहले 14 किलो गेहूं और 21 किलो चावल मिलता था। अब यह बदलकर 17 किलो गेहूं और 18 किलो चावल कर दिया गया है। हालांकि, कुल मात्रा 35 किलो ही रहेगी। e-KYC अनिवार्य सभी राशन कार्ड धारकों के लिए e-KYC करवाना अनिवार्य कर दिया गया है। अगर 1 जनवरी 2025 तक यह प्रक्रिया पूरी नहीं की गई, तो राशन कार्ड रद्द कर दिया जाएगा। इसके बाद फ्री राशन या कम कीमत पर मिलने वाली सुविधा बंद हो जाएगी। e-KYC की अंतिम तिथि पहले 1 अक्टूबर तय की गई थी, जिसे बढ़ाकर 1 नवंबर और फिर 1 दिसंबर 2024 कर दिया गया है। e-KYC कराने का तरीका सरकार ने e-KYC प्रक्रिया को आसान बनाया है। इसे ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीकों से किया जा सकता है। – ऑनलाइन: राशन कार्ड धारक अपने आधार कार्ड की जानकारी के साथ खाद्य विभाग की वेबसाइट पर जाकर या नजदीकी राशन की दुकान पर प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं। – ऑफलाइन: राशन डीलर या कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) में आधार कार्ड और जरूरी दस्तावेज जमा कर प्रक्रिया पूरी की जा सकती है। महत्वपूर्ण तिथियां – e-KYC की आखिरी तारीख: 1 दिसंबर 2024 – बदलाव लागू होने की तिथि: 1 जनवरी 2025   recent visitors 64

नकल माफियाओं पर लगाम लगाने मध्य प्रदेश सरकार तैयारियों में जुटी, नए कानून में नकल माफिया से परीक्षा का खर्च वसूला जाएगा

भोपाल  एमपी में नकल माफिया के बुरे दिन आने वाले हैं। मध्य प्रदेश सरकार नकल, सामूहिक नकल और पेपर लीक जैसे मामलों में सजा बढ़ाने जा रही है। ऐसे मामलों में अब 10 साल तक की जेल और एक करोड़ रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। इसके लिए मध्य प्रदेश मान्यता प्राप्त परीक्षा अधिनियम में संशोधन होने जा रहा है। अभी तक नकल करने पर तीन साल की जेल और पांच हजार रुपए तक का जुर्माना लगता था। अब सरकार ने इसके लिए कमर कस ली है। पेपर लीक, सामूहिक नकल और परीक्षा की गोपनीयता भंग करने जैसे अपराधों को गंभीरता से लेते हुए सरकार ने सजा बढ़ाने का फैसला लिया गया है। कौन कौन दायरे में? इस कानून के दायरे में एमपी बोर्ड, एमपीपीएससी और कर्मचारी चयन मंडल की सभी परीक्षाएं आएंगी। अधिकारियों का कहना है कि पिछले कुछ सालों में एमपी बोर्ड, व्यापमं और एमपीपीएससी की परीक्षाओं में पेपर लीक और सामूहिक नकल की घटनाएं बढ़ी हैं। इसी को देखते हुए कानून में बदलाव किया जा रहा है। पेपर लीक करने पर हो सकती ये सजा पेपर लीक करने के मामले में दी जाने वाली सजा में बदलाव करने की बात चल रही है। यानी अगर किसी ने पेपर लीक किया तो उसे आजीवन कैद तक की सजा दी जा सकती है। साथ ही जुर्माने के तौर पर एक करोड़ रुपए तक का भुगतान करना पड़ सकता है। कहां तक पहुंचा काम 1937 में बने परीक्षा कानून, मध्य प्रदेश मान्यता प्राप्त परीक्षा अधिनियम में जरूरी संसोधन पर बात चल रही है। संशोधित कानून का ड्राफ्ट तैयार हो गया है। इसे विधि विभाग और कैबिनेट की मंजूरी मिलनी बाकी है। इसके बाद विधानसभा से पारित कराके लागू कर दिया जाएगा। लीक होने और घोटाले रोकने में मदद की आशंका ऐसा होने से इसके दायरे में एमपी बोर्ड, एमपीपीएससी और कर्मचारी चयन मंडल की सभी परीक्षाएं आ जाएंगी। बीते सालों में एमपी में परीक्षाओं से जुड़े कई तरह के घोटाले और लीक होने की घटनाएं सामने आई थीं। इसके सख्ती से लागू होने से इनमें लगाम लगने में सहायता मिलेगी। नकल माफिया से वसूला जाएगा खर्च नए कानून में नकल माफिया से परीक्षा का खर्च भी वसूला जाएगा। अगर कोई फर्जी प्रश्नपत्र बांटता है या फर्जी वेबसाइट बनाता है और इससे परीक्षा टलती है तो उस पर होने वाला सारा खर्च वही उठाएगा। परीक्षा केंद्रों पर मोबाइल फोन ले जाने पर पहले से ही पाबंदी है, लेकिन अब केंद्र अध्यक्ष भी मोबाइल फोन नहीं ले जा सकेंगे। ऐसा करने पर उन्हें भी 10 साल की जेल और एक करोड़ रुपये जुर्माना देना होगा। विधानसभा के शीतकालीन सत्र में हो सकता है पेश यह कानून केंद्र सरकार के नए कानून 'सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम 2024' पर आधारित होगा। कैबिनेट की मंजूरी के बाद इसे विधानसभा के शीतकालीन सत्र में पेश किया जाएगा। recent visitors 60

Cyber धोखाधड़ी का सबसे अधिक झांसा निवेश पर मोटे मुनाफे के नाम पर, नौकरी प्रस्ताव और आसान लोन के नाम पर भी फंस रहे

भोपाल साइबर ठगों ने इंटरनेट मीडिया का दुरुपयोग कर जालसाजी का ऐसा ताना-बाना बुना है कि बैंकिंग, डिजिटल पेमेंट कंपनियां और पुलिस एजेंसियां उलझ कर रह गई हैं। साइबर क्राइम सेल में दर्ज अपराधों के विश्लेषण से सामने आया है कि ठगी का हर पांचवा मामला यूपीआई से जुड़ा है। यानी ऑनलाइन पेमेंट एप से ठगों के खातों में रकम पहुंची है। इस धोखाधड़ी का सबसे अधिक झांसा निवेश पर मोटे मुनाफे के नाम पर दिया गया है। बढ़ रहा यूपीआई का चलन कैशलेस अर्थव्यवस्था की तरफ बढ़ रही दुनिया में डिजिटल पेमेंट अथवा यूपीआई बड़ा जरिया है। भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) के आंकड़े बताते हैं कि एक नवंबर से 21 नवंबर तक 15 लाख 32 हजार 344 करोड़ रुपये का भुगतान यूपीआई के जरिये हुआ है। लेन-देन के इस बेहद लोकप्रिय तरीके को साइबर अपराधियों ने ठगी के लिए इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है। इसमें हर रोज कोई नया तरीका निकालकर लोगों को लूटा जा रहा है। ऐसे करते हैं ठगी नामी संस्थाओं की ओर से यूपीआई पेमेंट की रिक्वेस्ट डालकर रकम निकलवाने से लेकर यूपीआई ऑटो-पे रिक्वेस्ट जैसे तरीकों से लोगों के खातों में सेंध लगाई जा रही है। इसमें ऑटो पे रिक्वेस्ट सबसे खतरनाक है। इसमें फोन, बिजली, बीमा अथवा फाइनेंस कंपनी के नाम पर ऑटो पे रिक्वेस्ट भेजी जाती है। ठग उस संस्थान का प्रतिनिधि बनकर फोन करके वह रिक्वेस्ट स्वीकार करने को कहता है। वह बताता है कि ऐसा करने से आपको बार-बार भुगतान की तिथि याद करने की जरूरत नही पड़ेगी। आपके खाते से प्रीमियम की रकम अपने आप कट जाएगी और आप विलंब शुल्क से बच जाएंगे। लेकिन इसको स्वीकार करते ही आपके खाते की रकम ठग के खाते में ट्रांसफर हो जाती है। ये ठग इसी तरह शेयर बाजार में निवेश, आसान लोन और सस्ती दरों पर खरीद-फरोख्त जैसे लुभावने प्रस्ताव देते हुए लिंक भेजकर खाते खाली कर रहे हैं। भोपाल साइबर क्राइम सेल में इस वर्ष 42 प्रकार की कुल पांच हजार 463 शिकायतें पहुंची हैं। इनमें से 80 प्रतिशत मामले सिर्फ साइबर ठगी से जुड़े हैं। इसमें भी हर पांचवां मामला यूपीआई से संबंधित है। यानि ठगी के लिए डिजिटल भुगतान के किसी न किसी एप का उपयोग किया गया है। इन दस तरीकों से ठगी के सर्वाधिक मामले   इंटरनेट मीडिया उत्पीड़न 1186 21 प्रतिशत यूपीआई 1067 19.5 प्रतिशत डेबिट/क्रेडिट कार्ड 572 10.47 प्रतिशत ऑनलाइन खरीदफरोख्त 361 6.6 प्रतिशत टास्क 287 5.5 प्रतिशत लोन एप 242 4.43 प्रतिशत निवेश प्रस्ताव 238 4.37 प्रतिशत नौकरी प्रस्ताव 175 3.20 प्रतिशत ऑनलाइन लिंक 138 2.53 प्रतिशत मिरर एप 104 1.90 प्रतिशत   बचाव के लिए यह करें साइबर एक्सपर्ट प्रथमेश कापड़े के मुताबिक यूपीआई से ठगी केवल उपभोक्ताओं में जागरूकता की कमी के चलते होती है। इससे बचने के लिए यूपीआई पर भेजी गई ऐसी किसी भी रिक्वेस्ट को स्वीकार न करें। बिल पेमेंट के लिए ऑटो-पे की सुविधा शुरू करना है तो उसके लिए यूपीआई एप्स में अलग से व्यवस्था दी गई है। कंपनियों के प्रतिनिधि कभी भी फोन कर इस सुविधा को शुरू करने का दबाव नहीं बनाते हैं। recent visitors 60

वायु प्रदूषण के बीच दिल्ली-NCR में खुलेंगे स्कूल! SC ने कहा, AQI लेबल देखें, फिर

नई दिल्ली  सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को दिल्ली में वायु प्रदूषण के मुद्दे पर सुनवाई की और स्कूल खोलने से पहले दो दिन और इंतजार करने का आदेश दिया। शीर्ष अदालत ने कहा, "हमारा सुझाव है कि अगले दो दिनों के लिए AQI लेबल देखें.. परसों डेटा लाएं, फिर हम देखेंगे कि पिछले दो दिनों में क्या रुझान रहा है और फिर शिक्षण संस्थान खोलने से जुड़े मामले पर फैसला लेंगे।" दिल्ली एनसीआर में स्कूल फिर से खुल सकते हैं क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने सीएक्यूएम (Commission for Air Quality Managemen) को ऑफलाइन स्कूलों या हाइब्रिड कक्षाओं की अनुमति देने पर विचार करने की अनुमति दी है. एससी ने मध्याह्न भोजन और ऑनलाइन शिक्षा तक पहुंच की कमी को इस अपवाद के पीछ के मुख्य कारणों के तौर पर बताया है. फिलहाल सीएक्यूएम के फैसले तक कक्षाएं ऑनलाइन ही रहेंगी.  गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण के स्तर को कम करने के लिए ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान IV (जीआरएपी IV) के तहत वर्तमान में लागू कुछ उपायों में छूट देने पर विचार करने के लिए सहमति व्यक्त की है. इन उपायों में स्कूलों को बंद करना भी शामिल है.  इसे लेकर कुछ माता-पिता ने शीर्ष अदालत में याचिका दायर की थी, जिसमें कहा गया था कि हर घर में स्वच्छ हवा नहीं है और सभी के पास बच्चों की ऑनलाइन कक्षाओं के लिए तकनीकी सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं. इसके अलावा, दिल्ली सरकार ने दिल्ली-एनसीआर में वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) के "गंभीर से अधिक" श्रेणी में पहुंचने के बाद सभी स्कूलों को बंद करने का आदेश दिया था. कक्षा 10 और 12 को छोड़कर सभी कक्षाओं को ऑनलाइन मोड में स्थानांतरित कर दिया गया था.  बता दें कि जस्टिस ऑगस्टिन जॉर्ज मसीह की पीठ इस पर सुनवाई कर रही है कि ग्रेप 4 के तहत लगी पाबंदियों को जारी रखा जाए या उनमें कुछ छूट दी जाए. इस पर SC ने पूछा कि कितनी चेकपोस्ट की जांच की गई? वकील ने बताया कि कोर्ट कमिश्नर ने कुल 83 चेकपोस्ट की जांच की है. एमाइकस अपराजिता सिंह ने कहा कि कई चेक पोस्ट्स पर तो कोर्ट के आदेश के बाद कर्मचारियों की तैनाती की गई. उनके बीच दिशा-निर्देशों को लेकर भी कोई स्पष्टता नहीं है.  सर्वे करने गए वकील ने बताया कि चेक पोस्ट्स पर चेकिंग तो हो रही थी लेकिन प्रभावी तरीके से नहीं. कुछ चेक पोस्ट पर हरियाणा और दूसरी तरफ से आने वाले वाहनों को रोका जा रहा था. वहां दिल्ली सरकार के परिवहन विभाग के कर्मचारी नहीं थे. कोई बैरिकेड नहीं थे. पुलिस ट्रकों को रोकने के लिए सड़क के बीच जाकर चेकिंग कर रही थी. दिल्ली सरकार के वकील ने बताया कि तीन से चार अलग-अलग स्तर के कर्मचारी चेकिंग मे लगाए गए थे. दिल्ली पुलिस,नगर निगम के कर्मचारी और नागरिक सुरक्षा के स्वयंसेवक थे.  इस पर एमाइकस ने कहा कि ट्रक ड्राइवरों को यह नहीं पता था कि उन्हें दिल्ली में प्रवेश करना है या नहीं. सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस से पूछा कि 18 नवंबर के बाद क्या कोई लिखित आदेश आया था जिसमें पुलिस को चेकपॉइंट पर स्थायी रूप से तैनात करने का निर्देश दिया गया था? ट्रकों के प्रवेश को रोकने के लिए 13 एंट्री प्वाइंट पर तैनात लोगों को सूचित करने के लिए दिल्ली सरकार ने क्या कदम उठाए? ASG ऐश्वर्या भाटी ने कहा कि आदेश दिए गए थे लेकिन अभी हमारे पास कॉपी नहीं है.  पीठ ने कहा कि हम बयान दर्ज करना चाहते हैं. हमें बताएं कि क्या आदेश को लागू करने के लिए इन चेकपोस्ट पर 24/7 पुलिसकर्मियों को तैनात करने के लिए कोई आदेश जारी किया गया था? ASG एश्वर्या भाटी ने कहा कि हमें 23 प्रमुख चेकपॉइंट पर पुलिस तैनात करने के आदेश दिए जाने चाहिए. अभी आदेश नहीं आया है, लेकिन हमारे पास की गई कार्रवाई का विवरण है.  उधर, कोर्ट कमिश्नर ने बताया कि अदालत के आदेश का पालन नहीं हो रहा है. कोर्ट कमिश्नर ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि कुछ जगहों पर चेक पोस्ट बने हैं चेकिंग हो रही है लेकिन वह प्रभावी नहीं है.  बेरिकेड्स नहीं होने की वजह से अवैध रूप से दिल्ली में घुस रहे ट्रकों को रोकने के लिए बीच सड़क पर हाईवे के चलते ट्रैफिक में पुलिस के जवान कूदकर ट्रकों को रोकते हुए पाए गए.  गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने 22 तारीख को 13 वकीलों को कोर्ट कमिश्नर्स नियुक्त किया था जिन्हें रिपोर्ट देना था कि दिल्ली में इंटर करने वाले ट्रकों को रोकने के आदेश का पालन हो रहा है या नहीं. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दिल्ली सरकार ने 18 से 23 नवंबर के बीच ग्रेप 4 के दिशानिर्देशों का पालन ठीक से नहीं किया है. ट्रकों को दिल्ली आने से रोकने के लिए उचित कदम नहीं उठाए गए. सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस से पूछा कि सिर्फ़ 13 पोस्ट पर ही क्यों चेकपोस्ट लगे? यह लापरवाही सिर्फ़ 23 प्वाइंट पर की गई. हम CAQM आयोग को धारा 14 के तहत दिल्ली के पुलिस आयुक्त पर मुकदमा चलाने का निर्देश देंगे. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम CAQM को सभी एजेंसियों को कारण बताओ नोटिस जारी करने, जवाब लेने और उन पर मुकदमा चलाने का निर्देश देंगे.  सुप्रीम कोर्ट ने ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) के चरण-4 के तहत प्रतिबंधों को ठीक से लागू न करने के लिए दिल्ली सरकार की भी आलोचना की। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि दिल्ली सरकार ने 18 से 23 नवंबर के बीच ग्रुप 4 के दिशा-निर्देशों का ठीक से पालन नहीं किया। कोर्ट ने कहा कि ट्रकों को दिल्ली में प्रवेश करने से रोकने के लिए उचित कदम नहीं उठाए गए। यूपी के इन शहरों में खुल गए स्कूल दिल्ली से सटे नोएडा में स्कूल बंद हैं. इसका आदेश शनिवार को जारी कर दिया गया था. गाजियाबाद के स्कूलों को खोलने का भी कोई नोटिस नहीं आया है. वहीं, मेरठ के डीएम दीपक मीणा ने सोमवार, 25 नवंबर 2024 से सभी स्कूलों को खोलने का निर्देश दिया है. यहां अब ऑनलाइन क्लास के बजाय बच्चों को स्कूल जाकर ही पढ़ाई करनी होगी. मेरठ और हापुड़ में स्कूल, कॉलेज, कोचिंग समेत सभी … Read more