शिवराज आखिरी बार 2006 में खुद के लिए वोट मांगने बुदनी आए थे, अब भार्गव के लिए आएंगे

बुधनी बुधनी विधानसभा में वर्ष 2008 के विधानसभा चुनाव के बाद ऐसा मौका पहली बार देखने को मिलेगा, जिसमें शिवराज सिंह चौहान स्वयं भाजपा प्रत्याशी के लिए वोट मांगते हुए नजर आएंगे। इस अवधि में उन्होंने विधानसभा चुनाव में कभी भी वोट नहीं मांगे थे। लेकिन इस बार परिस्थितियां ठीक नहीं होने के कारण उन्हें मैदान में उतरना पड़ रहा है। माना जा रहा है कि अपने खास सखा के लिए वह बुधनी विधानसभा क्षेत्र के कई गांवों में पहुंचकर जनसभाओं को संबोधित करेंगे। पहले दौरे कार्यक्रम के मुताबिक वह सात नवम्बर को पिपलानी, छिदगांव काछी व रेहटी में चुनावी सभाओं को संबोधित करने के साथ ही आम मतदाताओं से रूबरू होंगे। बुधनी में विधानसभा का उपचुनाव होना है, जिसमें भाजपा की ओर से रमाकांत भार्गव प्रत्याशी हैं। 2006 से लेकर 2023 तक हुए सभी चुनावों में शिवराज सिंह चौहान भाजपा की ओर से प्रत्याशी रहे हैं। 2006 में हुए उपचुनाव के दौरान उनके द्वारा विधानसभा क्षेत्र में पदयात्रा करते हुए वोट मांगे गए थे। लेकिन उसके बाद हुए आम चुनावों में वह अपने लिए कभी भी बुधनी की जनता के पास वोट मांगने नहीं आए थे। विपक्षी दल से कोई भी नेता चुनाव मैदान में उतरा हो या फिर किसी भी बड़े स्टार प्रचारक की सभा हुई हो उसके बावजूद भी उन्होंने विधानसभा की और अपना रुख नहीं किया था। उनका पूरा चुनाव क्षेत्र के कार्यकर्ता और जनता के हवाले ही रहता था। इसके बावजूद भी हर चुनाव में उनकी जीत का अंतर लगातार बढ़ता ही रहा। लेकिन आगामी 13 नवम्बर को होने वाले उपचुनाव में शिवराज सिंह चौहान को भाजपा प्रत्याशी के लिए वोट मांगने गांव-गांव दस्तक देना पड़ रहा है। माना जा रहा है कि झारखंड में हो रहे विधानसभा चुनाव की व्यस्तता के बावजूद भी उन्हें बुधनी में अपना समय देना पड़ रहा है। इसके पीछे बड़ा कारण भाजपा प्रत्याशी का कार्यकर्ताओं और आम जनता के बीच पुरजोर विरोध है, जिसे थामने के लिए शिवराज सिंह चौहान मैदान में उतर रहे हैं। उनके द्वारा लगातार भाजपा के वरिष्ठ कार्यकर्ताओं व नेताओं से सतत संपर्क बनाकर चुनाव में जुटने के निर्देश जारी कर दिए गए हैं। बुधनी में कांग्रेस की काट है शिवराज बुधनी विधानसभा में कांग्रेस की काट शिवराज सिंह चौहान हैं, जिन्होंने कांग्रेस के गढ़ को नेस्तनाबूद किया था। उसके बाद से लेकर अभी तक कभी भी कांग्रेस इस विधानसभा पर जीत का परचम नहीं लहरा सकी है। वर्ष 1990 में अपनी राजनीति का आगाज करने के बाद पहला चुनाव उन्होंने 24,000 से भी अधिक मतों से जीता था। उसके बाद से उनकी जीत का कारवां लगातार जारी रहा। लेकिन इस बार शिवराज सिंह चौहान बुधनी विधानसभा से प्रत्याशी नहीं है। ऐसे में कांग्रेस इस मौके को गंवाना नहीं चाहती। शिवराज सिंह चौहान की जन्म और कर्म स्थली कहलाने वाली बुधनी सीट को कांग्रेस के हाथों में नहीं जाने देना चाहते। जिसके कारण वह पुरजोर प्रयास करते हुए भाजपा प्रत्याशी रमाकांत भार्गव (जिन्हें उनका सबसे खास सखा माना जाता है) के पक्ष में मैदान में उतरने वाले हैं। जनता का मूड, शिवराज के लिए सभी एक, लेकिन भार्गव के लिए चुनौती बुधनी विधानसभा क्षेत्र की जनता का मूड  शिवराज सिंह चौहान के लिए तो हमेशा एक ही रहा है। लेकिन भाजपा के द्वारा घोषित किए गए प्रत्याशी रमाकांत भार्गव के लिए आम जनता चुनौती साबित हो रही है। भाजपा प्रत्याशी का कार्यकर्ताओं के बीच ही पुरजोर विरोध होना पार्टी के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। भाजपा के द्वारा आयोजित किए जा रहे कार्यकर्ता सम्मेलन( दीपावली मिलन समारोह) में भी पार्टी कार्यकर्ताओं की कम उपस्थिति नेताओं के लिए चिंता का कारण बन गई है। इसके पीछे बड़ा कारण कुछ समय पूर्व टिकट वितरण से उपजा विरोध है। हालांकि भाजपा संगठन ने अपने सभी जनप्रतिनिधियों और कार्यकर्ताओं को एकजुट कर भाजपा प्रत्याशी के पक्ष में प्रचार की जिम्मेदारी सौंप दी है। गौरतलब है कि 1990 में राजनीति का आगाज करने के बाद शिवराज सिंह ने पहला चुनाव 24000 से भी अधिक मतों से जीता था। उसके बाद से उनकी जीत का कारवां यहां लगातार जारी रहा। वहीं कांग्रेस भी इस बार बुदनी विधानसभा सीट का जीतकर शिवराज सिंह चौहान का किला भेदने की तैयारी में जुट गई है। recent visitors 68

नवंबर और दिसंबरमें 48 लाख शादियां, 6 लाख करोड़ रुपये का व्यापार होने की उम्मीद : CAIT

नई दिल्ली दिवाली का त्योहार बीत चुका है। अब महापर्व छठ (Chhath Mahaparv) की तैयारी शुरू हो गई है। इसके बीतते ही 12 नवंबर को देवोत्थान एकादशी है। फिर शुरू हो जाएगा शादी-ब्याह का मौसम। इस साल शादी का लगन 16 दिसंबर तक चलेगा। अनुमान है कि इस दौरान देश भर में करीब 48 लाख शादियां होंगी। इन शादियों से बाजार में करीब छह लाख करोड़ रुपये आएंगे। मतलब कि अर्थव्यवस्था को एक नया बल मिलेगा। कहां से आया है यह अनुमान देश के रिटेल कारोबारियों के संगठन कंफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) ने एक अध्ययन रिपोर्ट जारी किया है। इसी में दावा किया गया है कि इस साल नवंबर और दिसंबर महीने में करीब 48 लाख शादियां होने का अनुमान है। संगठन का कहना है कि इन शादियों से करीब 6 लाख करोड़ रुपये का व्यापार होने की उम्मीद है। पिछले साल इस सीजन में करीब 35 लाख शादियों से कुल 4.25 लाख करोड़ रुपये का व्यापार हुआ था। कैट का कहना है कि देश भर के 75 प्रमुख शहरों में शादी से संबंधित वस्तुओं और सेवाओं में व्यापार करने वाले प्रमुख व्यापारी संगठनों से चर्चा के आधार पर यह अनुमान लगाया गया है। इस बार शुभ मुहूर्त की ज्यादा है तिथियां बताया जाता है कि इस साल शुभ विवाह मुहूर्त की तिथियों में वृद्धि के कारण व्यापार में उल्लेखनीय वृद्धि का अनुमान है। वर्ष 2023 में 11 शुभ मुहूर्त थे, जबकि इस वर्ष 18 मुहूर्त है। इससे व्यापार को और अधिक बढ़ावा मिलने की संभावना है। इस दौरान दिल्ली में ही अनुमानित 4.5 लाख शादियां होंगी। इससे इस सीजन में 1.5 लाख करोड़ रुपये के व्यापार की उम्मीद है। किस-किस दिन लगन कैट के अनुसार, इस साल के शादी सीजन में नवंबर में शुभ तिथियां 12, 13, 17, 18, 22, 23, 25, 26, 28 और 29 हैं, जबकि दिसंबर में ये तिथियां 4, 5, 9, 10, 11, 14, 15 और 16 हैं। इसके बाद लगभग एक महीने तक शादियों के सीजन में विराम होगा। इसके बाद साल 2025 में मध्य जनवरी से मार्च तक फिर से शादियां शुरू होंगी। एक शादी में कितना खर्च कैट के महासचिव प्रवीन खंडेलवाल के मुताबिक दो महीने के दौरान देश भर में 10 लाख शादियों में औसतन 3 लाख रुपये खर्च होंगे। करीब 10 लाख शादियों में 6 लाख रुपये खर्च होंगे। करीब 10 लाख शादियां ऐसी होंगी जिनमें 10 लाख रुपये, इतनी ही शादियों में 15 लाख रुपये खर्च होंगे। लगभग 7 लाख शादियां ऐसी होंगी जिनमें औसतन 25 लाख रुपये खर्च होंगे जबकि 50,000 शादियों में 50 लाख रुपये खर्च होंगे। देश में करीब 50,000 ऐसी शादियां होंगी जिनमें एक करोड़ या उससे अधिक राशि के खर्च होने का अनुमान है। शादी में किन वस्तुओं पर कितना खर्च खंडेलवाल के अनुसार, शादी के खर्च को सामान और सेवाओं के बीच विभाजित किया जाता है। इनमें मुख्य रूप से कपड़े, साड़ियां, लहंगे, और अन्य परिधान पर 10%, आभूषण पर 15%, इलेक्ट्रॉनिक्स, बिजली उपकरण, और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स 5%, सूखे मेवे, मिठाइयां, और स्नैक्स 5%, किराना और सब्जियां 5%, उपहार आइटम्स 4% तथा अन्य वस्तुओं पर 6% का अमूमन खर्च होता है। दूसरी आर सर्विस सेक्टर में बैंक्वेट हॉल, होटल, और शादी के स्थल पर 5%, इवेंट मैनेजमेंट 3%, टेंट सजावट 10%, केटरिंग एवं सेवाएं 10%, फूल सजावट 4%, परिवहन और कैब सेवाएं 3%, फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी 2%, ऑर्केस्ट्रा, संगीत आदि 3%, लाइट और साउंड 3% तथा अन्य सेवाएं 7%, के खर्च के अंदाज़ से संपन्न होती हैं। recent visitors 84

एंबुलेंस समय पर नहीं पहुंची , ठेले पर ही हो गई महिला की डिलीवरी, बच्चे की मौत, सरकार ने लिया एक्शन

 सीधी  मध्य प्रदेश के सीधी जिले से एक दर्दनाक मामला सामने आया है। मिली जानकारी के अनुसार, एक महिला ने समय पर एम्बुलेंस न मिलने पर ठेले पर ही बच्चे को जन्म दे दिया, जिसके बाद कुछ अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। अधिकारियों ने बताया कि उर्मिला रजक (26) को शुक्रवार रात को प्रसव पीड़ा शुरू हुई और परिवार के सदस्य उसे ठेले पर अस्पताल ले गए, हालांकि अस्पताल पहुंचने से पहले ही उसका प्रसव हो गया। सिविल सर्जन दीपरानी इसरानी ने पीटीआई-भाषा को बताया, अस्पताल पहुंचने पर स्टाफ ने उसकी जांच की। बच्चे की मौत 24 घंटे पहले ही गर्भ में हो चुकी थी। परिवार एक संकरी गली में रहता है और उन्हें एंबुलेंस के लिए मुख्य सड़क पर आना पड़ा, जो देर से पहुंची। जिला प्रशासन का एंबुलेंस बुकिंग प्रणाली पर कोई सीधा नियंत्रण नहीं है। क्या है पूरा मामला? दरअसल, ये पूरा मामला मध्य प्रदेश के सीधी जिला का है, जहां जिला मुख्यालय से महज 2 किलोमीटर की दूरी पर रहने वाली महिला उर्मिला रजक प्रसव पीड़ा से परेशान थी. घरवालों ने एंबुलेंस को फोन लगाया, लेकिन एंबुलेंस मौके पर नहीं पहुंची. काफी देर इंतजार करने के बाद महिला का पति हाथ ठेले में ही पत्नी को अस्पताल लेकर निकल पड़ा लेकिन वे अस्पताल नहीं पहुंच पाए और प्रसव पीड़ा से परेशान महिला ने ठेले में ही बच्चे को जन्म दे दिया. जन्म देने के कुछ मिनट बाद ही बच्चे की मौत हो गई. अब इस घटना के वीडियो शेयर किए जा रहे हैं. बच्चे की मौत के बाद गरमाई राजनीति नवजात बच्चे की मौत होने के बाद मामले में राजनीति गरमा गई है. नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने ट्वीट कर इस मामले में चिंता जाहिर की है और सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं. वहीं डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल ने कार्रवाई के निर्देश दिए हैं. नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सोशल मीडिया साइट एक्स पर लिखा, '' सीधी में एक गर्भवती महिला को अस्पताल ले जाने के लिए एंबुलेंस नहीं मिली. परिवार को उसे सब्जी के ठेले पर अस्पताल ले जाना पड़ा. जहां रास्ते में ही महिला ने बच्चे को जन्म दे दिया और बच्चे को बचाया नहीं जा सका. जब स्वास्थ्य मंत्री के गृह जिले में स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की हालत इतनी खराब है तो पूरे प्रदेश की हालत को समझा जा सकता है.'' सरकार ने की कड़ी कार्रवाई वहीं समय पर एंबुलेंस सेवा न मिलने पर हाथ ठेले पर महिला के प्रसव और नवजात की मौत के मामले में सरकार ने सख्त कार्रवाई की है. उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने मामले में संज्ञान लेते हुए कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं. उन्होंने कहा, ''सरकार की प्राथमिकता त्वरित और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है. किसी भी प्रकार की लापरवाही अस्वीकार्य है.'' इस मामले को लेकर सोमवार शाम प्रोजेक्ट हेड 108 एकीकृत कॉल सेंटर भोपाल ने 3 एंबुलेंस वाहनों के एक माह के परिचालन व्यय में कटौती कर दी है, जिसकी राशि 4,56,917 रुपए है. एडिश्नल कलेक्टर अंशुमान राज ने कही ये बात एडिश्नल कलेक्टर अंशुमान राज ने कहा, “हमने डॉक्टरों और एम्बुलेंस चालक से बात की है। महिला के परिवार द्वारा केंद्रीकृत कॉल सेंटर पर कॉल करने के लगभग 25 मिनट बाद एम्बुलेंस पहुंची। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को नोटिस जारी कर दिया गया है। मामले की जांच चल रही है।” बता दें कि बीते दिनों ओडिशा के केंद्रपारा से गर्भवती महिला के साथ लापरवाही का मामला सामने आया था। यहां ओडिशा सरकार की कर्मचारी ने दावा किया था कि बाल विकास अधिकारी द्वारा अस्पताल जाने के लिए छु्ट्टी नहीं दिए जाने के कारण उसने अपना बच्चा खो दिया। इस मामले में पीड़िता परिवार ने पुलिस में अधिकारी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। recent visitors 69

कैबिनेट बैठक में मेडिकल कॉलेजों में सहायक प्राध्यापक की भर्ती की आयु सीमा में वृद्धि पर भी निर्णय लिया

भोपाल  प्रदेश की मोहन सरकार ने महिलाओं के हित में बड़ा कदम उठाया है। सिविल सेवाओं में महिलाओं के लिए अब 33 के बजाय 35 प्रतिशत पद आरक्षित होंगे। मंगलवार को मंत्रालय में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में इस प्रस्ताव पर सर्वसम्मति से मुहर लगाई गई। इसके साथ-साथ मेडिकल कॉलेज में सहायक प्राध्यापक की भर्ती के लिए आयु सीमा को दस साल बढ़ाने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी गई। अब 40 के बजाय 50 साल तक उम्र के अभ्यर्थी मेडिकल कॉलेजों में सहायक प्राध्यापक पद के लिए आवेदन कर सकेंगे। इन प्रस्तावों पर लगी मुहर         – प्रदेश में खाद आपूर्ति व्यवस्था को और बेहतर बनाने के लिए 254 नकद विक्रय केंद्र खोलने की दी गई स्वीकृति। 7 दिसंबर को होगी नर्मदापुरम में इन्वेस्टर्स समिट। मुख्य सचिव की अध्यक्षता में पर्यवेक्षण समिति गठित उधर, सिंहस्थ वर्ष-2028 की तैयारियों के लिए मप्र शासन द्वारा मुख्य सचिव की अध्यक्षता में पर्यवेक्षण समिति गठित कर दी गई है। पर्यवेक्षण समिति सिंहस्थ के अंतर्गत मंत्रि-परिषद समिति के निर्देशों का पालन, मंत्रि-परिषद समिति के समक्ष रखे जाने समस्त नीतिगत प्रकरणों का परीक्षण कार्य तथा विभिन्न विभागों की सिंहस्थ मद कार्य योजना की समीक्षा करेगी। समिति में अपर मुख्य सचिव, गृह, उर्जा, लोक निर्माण, जल संसाधन, परिवहन, प्रमुख सचिव, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, राजस्व, वित्त, धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व, संस्कृति एवं पर्यटन, सदस्य होंगे। प्रमुख सचिव, नगरीय विकास एवं आवास समिति के सदस्य सचिव होंगे। recent visitors 101

कोर्ट की लाइव स्ट्रीमिंग पर MP हाईकोर्ट की रोक, सरकारों, यूट्यूब, X को जारी किया नोटिस

 भोपाल मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने अदालती कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग यानी सीधा प्रसारण वीडियो को सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर अवैध रूप से साझा करने, एडिट करने, इस्तेमाल करने और बदलाव करने पर सोमवार को रोक लगा दी। अदालत ने सोशल मीडिया प्लेटफार्मों से ऐसे वीडियो हटाने के अनुरोध वाली एक याचिका पर केंद्र और राज्य सरकारों और हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को भी नोटिस जारी किया। क्या दी दलील? दमोह के एक कारोबारी डॉ. विजय बजाज ने अदालती कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग के वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर अवैध रूप से साझा करने, एडिट करने और उसे प्रसारित करने के खिलाफ एक याचिका दायर की थी। विजय बजाज की पैरवी करने वाले वकील उत्कर्ष अग्रवाल ने कहा कि यह मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की कार्यवाही के सीधा प्रसारण से संबंधी नियमों का उल्लंघन है। कमाई करने वालों से वसूली जाए रकम याचिका में अदालत से यह भी अनुरोध किया गया है कि अदालती कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग वीडियो को सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर अवैध रूप से साझा करके इन वीडियो पर मिली व्यूवरशिप (देखने वाले लोगों की संख्या) के जरिये धन कमाने वालों से उक्त धन की वसूली के लिए भी निर्देश जारी किया जाए। कॉपीराइट का उल्लंघन करके अवैध रूप से अपलोड किए गए कुछ वीडियो विशेष रूप से प्रस्तुत किए गए। यूट्यूब और एक्स को नोटिस मुख्य न्यायाधीश एसके कैत और न्यायमूर्ति विवेक जैन की खंडपीठ ने याचिका पर सुनवाई की। वकील उत्कर्ष अग्रवाल ने बताया कि याचिका की सुनवाई के दौरान यूट्यूब और एक्स को नोटिस जारी किया गया है। अग्रवाल ने कहा कि याचिका की सुनवाई के दौरान इसने मेटा प्लेटफॉर्म इंक, यूट्यूब और ट्विटर को नोटिस जारी किए। विस्तृत आदेश के अपलोड होने का इंतजार है। हाई कोर्ट के पास लाइव स्ट्रीमिंग की कॉपीराइट इन नियमों में स्पष्ट प्रविधान है कि लाइव स्ट्रीमिंग के सभी कापीराइट हाई कोर्ट के पास हैं। इन नियमों के अंतर्गत किसी भी प्लेटफार्म पर लाइव स्ट्रीमिंग का मनमाना उपयोग, शेयर, ट्रांसमिट या अपलोड करना प्रतिबंधित है। इसके बावजूद निर्धारित नियमों का उल्लंघन करते हुए कई सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर लाइव स्ट्रीमिंग की क्लिपिंग को एडिट करके अपलोड करके आर्थिक लाभ उठाया जा रहा है। हाई कोर्ट के सुनवाइयों की मीम्स, शार्ट्स यही नहीं हाई कोर्ट के आदेशों के मीम्स, शार्ट बनाए जाते हैं और न्यायाधीशों, अधिवक्ताओं व शासकीय अधिकारियों पर अभद्र व आपत्तिजनक टिप्पणियां की जाती हैं। अब तक जिन भी लोगों ने हाई कोर्ट लाइव स्ट्रीमिंग का दुरुपयाेग कर सोशल मीडिया के माध्यम से धनार्जन किया है, उनसे वसूली की जाए। अभी तक जितनी भी क्लिपिंग सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर अपलोड की गई हैं, उन्हें डिलीट करने का भी आदेश पारित किया जाए। recent visitors 82

उत्तर प्रदेश में पुलिस महानिदेशक पद पर तैनाती के लिए नई नियमावली बना दी

लखनऊ उत्तर प्रदेश में पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) पद पर तैनाती के लिए नई नियमावली बना दी गई है। इसे सोमवार को कैबिनेट से मंजूरी भी मिल गई है। अब डीजीपी की नियुक्ति के लिए एक मनोनयन समिति का प्रावधान किया गया है। समिति के अध्यक्ष हाईकोर्ट के रिटायर न्यायाधीश होंगे। साथ ही समिति में प्रदेश के मुख्य सचिव, संघ लोक सेवा आयोग और यूपी लोक सेवा आयोग से नामित एक-एक व्यक्ति, अपर मुख्य सचिव गृह और एक रिटायर डीजीपी भी होंगे। न्यूनतम कार्यकाल दो वर्ष का रहेगा नियमावली में तय किया गया है कि डीजीपी पर उसी अधिकारी की नियुक्ति की जाएगी जिनकी सेवा अवधि कम से कम छह महीने अवश्य शेष हो। इसके साथ ही डीजीपी का न्यूनतम कार्यकाल दो साल तक होना चाहिए। डीजीपी की नियुक्ति होने पर उन्हें कम से कम दो साल तक कार्यकाल जरूर प्रदान किया जाए। अगर तैनाती के बाद उनकी सेवा अवधि छह महीने ही शेष है तो सेवा अवधि को बढ़ाया जा सकता है। अगर नियुक्त डीजीपी किसी अपराधिक मामले या भ्रष्टाचार अथवा अपने कर्तव्यों का पालन करने में अक्षम साबित हुए तो सरकार उन्हें दो वर्ष का कार्यकाल पूरा होने से पहले ही हटा सकती है। डीजीपी को उनके पद से हटाने के लिए संबंधित प्रावधानों में भी हाईकोर्ट के निर्देशों का पालन किया जाना जरूरी होगा। नियमावली के मुताबिक डीजीपी पद पर वे ही अधिकारी चुने जाएंगे जो वेतन मैट्रिक्स के स्तर 16 में पुलिस महानिदेशक के पद पर कार्यरत हो। सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2006 में अधिनियम बनाने को कहा था सुप्रीम कोर्ट ने रिट याचिका प्रकाश सिंह व अन्य बनाम भारत संघ व अन्य के मामले में 22 सितम्बर, 2006 में राज्य सरकारों से एक नया पुलिस अधिनियम बनाने को कहा था जिससे पुलिस व्यवस्था को किसी भी तरह के दबाव से मुक्त रखा जाए। नागरिकों के अधिकारों को सुरक्षित रखने और विधि का शासन स्थापित करने में यह व्यवस्था सक्षम साबित हो सके। हाईकोर्ट ने भी आशा की है कि नई नियमावली से सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अनदेखी न हो। नियुक्ति नियमावली-2024 का उद्देश्य यूपी के डीजीपी पद पर उपयुक्त व्यक्ति की नियुक्ति हेतु चयन के लिए स्वतंत्र व पारदर्शी तंत्र स्थापित करना है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि उक्त चयन राजनीतिक या कार्यकारी हस्तक्षेप से मुक्त है। यूपी में अभी अधिकारी कैसे बनते हैं डीजीपी?   डीजीपी के चयन में अब तक प्रचलित प्रक्रिया के अनुसार उत्तर प्रदेश सरकार संघ लोक सेवा आयोग को DG पद के सभी अफसर का नाम भेजती है. संघ लोक सेवा आयोग से पहले केंद्र का डिपार्मेंट ऑफ पर्सनल ट्रेंनिंग यानी डीओपीटी तीन सीनियर मोस्ट अधिकारियों का पैनल बनाकर भेजता है, जिनके पास काम से कम 2 साल का कार्यकाल हो. राज्य सरकार की तरफ से उन DG पद के अफसर का नाम नहीं भेजा जाता जिनका 6 महीने या उससे कम वक्त में रिटायरमेंट होना हो. संघ लोक सेवा आयोग के द्वारा भेजे गए तीन अफसरों के नाम में एक अफसर को डीजीपी बनाया जाता है.   योगी सरकार ने क्यों किया ये बदलाव? उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की सरकार आई तो कानून व्यवस्था को संभालने की जिस नीति पर सरकार काम कर रही थी उस मानक पर खरा उतरने वाले अफसरों की लगातार कमी महसूस की जा रही थी. सरकार के भरोसेमंद अफसर जूनियर थे जिनको डीजीपी बनाने के लिए संघ लोक सेवा आयोग के मानक आड़े आते थे. अब कैबिनेट में प्रस्ताव पास होने के बाद संघ लोक सेवा आयोग का दखल खत्म हो जाएगा.   HC के रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में बनी कमेटी चुनेगी DGP अब उत्तर प्रदेश के डीजीपी का चयन हाई कोर्ट के रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में गठित कमेटी करेगी. इस कमेटी में हाई कोर्ट के रिटायर्ड जज अध्यक्ष होंगे. उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव, संघ लोक सेवा आयोग द्वारा नामित एक व्यक्ति, उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग का अध्यक्ष या नामित व्यक्ति, प्रमुख सचिव गृह, एक रिटायर्ड DGP जिसने उत्तर प्रदेश पुलिस में काम किया हो, यह कमेटी स्थायी डीजीपी का चयन करेगी. कैबिनेट से पारित प्रस्ताव के अनुसार, नई व्यवस्था में बनाए गए डीजीपी का कार्यकाल 2 साल का होगा. recent visitors 184

छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश दोनों राज्य सगे भाई, दोनो राज्यों की साझा संस्कृति है, साथ ही साझा विचार और साझा राष्ट्रवादी भाव है: CM यादव

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ सांझी संस्कृति को सहेजते हुए विकास के पथ पर अग्रसर है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश दोनों राज्य सगे भाई है। दोनो राज्यों की साझा संस्कृति है, साथ ही साझा विचार और साझा राष्ट्रवादी भाव है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव रायपुर में छत्तीसगढ़ स्थापना दिवस समारोह राज्योत्सव को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पूर्व प्रधानमंत्री और भारतरत्न अटल बिहारी वाजपेयी का स्मरण करते हुए कहा कि उनके कुशल नेतृत्व में ही छत्तीसगढ़ राज्य का उदय हुआ। उन्होंने छत्तीसगढ़ राज्य के विकास की असीम संभावनाओं का आंकलन कर निर्णय लिया। आज वनांचल और माइनिंग के साथ-साथ सभी क्षेत्रों में छत्तीसगढ़ अग्रणी राज्य है। पूरे प्रदेश में विकास के नए आयाम रचे जा रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में अब डबल इंजन की सरकार तेजगति से विकास के पथ पर आगे बढ़ रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि छत्तीसगढ़ की पावन भूमि का संबंध भगवान श्रीराम और श्रीकृष्ण से रहा है। मां कौशल्या और माँ शबरी ने भी इस भूमि का उद्धार किया है। माता शबरी के झूठे बेर भगवान श्रीराम के द्वारा खाने का गौरवशाली प्रसंग जनजातीय संस्कृति को गौरवान्वित करता है। उल्लेखनीय है कि मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ, राजस्थान और गुजरात ये सभी राज्य भगवान श्रीराम और श्रीकृष्ण के आध्यात्मिक प्रसंगों को अपने में समेटे हुए है। इस गौरवशाली अतीत को भावी पीढ़ी के सामने लाने के लिए हमारी सरकार मिलकर काम करेगी। भगवान श्रीराम के पदचिन्हों पर बनने वाले श्रीराम वन-गमन पथ के साथ साथ भगवान श्रीकृष्ण के प्रसंग स्थलों को चिन्हित करते हुए धार्मिक तीर्थ स्थल के रूप में विकसित किया जायेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने छत्तीसगढ़ राज्योत्सव का दीप प्रज्ज्वलित और देव नगाड़ा बजाकर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा और अरूण साव, विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह एवं सांसद ब्रजमोहन अग्रवाल सहित अन्य जन-प्रतिनिधि, समाजसेवी, कलाकार और बड़ी संख्या में आमजन उपस्थित थे।   recent visitors 110