जगरगुंडा साप्ताहिक बाजार में ड्यूटी के दौरान दो जवान घायल, छत्तीसगढ़-सुकमा में जवानों पर नक्सलियों ने किया हमला

सुकमा. जगरगुंडा साप्ताहिक बाजार की ड्यूटी में तैनात जवानों पर नक्सलियों ने हमला किया है। हमले में दो जवान घायल हुए हैं। जिन्हें जगरगुंडा अस्पताल में भर्ती कराया गया है। हमले के बाद बाजार में अफरातफरी मच गई। पुलिस ने पूरे इलाके को घेर लिया है। नक्सली जवानों से हथियार लूटकर ले गए हैं। एसपी किरण चव्हाण ने इसकी पुष्टि की है। जानकारी के मुताबिक, जगरगुंडा साप्ताहिक बाजार ड्यूटी मे निकले पुलिस पार्टी पर नक्सलियो के स्मॉल एक्शन टीम ने चाकू से हमला किया। हमले में थाना जगरगुंडा के दो जवान घायल हो गए हैं। घायल जवानों के नाम -करतम देवा, सोढ़ी कन्ना हैं। दोनों जवानों के हथियार नक्सली लूट कर ले गए हैं। इलाके में सुरक्षा बलों द्वारा गहन सर्चिंग की जा रही है। recent visitors 85

महाकुंभ 2025 में यूपी में पर्यटकों को मिलेंगे स्किल्ड और स्मार्ट सर्विस प्रोवाइडर: योगी सरकार

प्रयागराज उत्तर प्रदेश की योगी सरकार प्रदेश में पारंपर‍िक भारतीय मूल्यों और 'अतिथि देवो भव:' की संकल्पना पर पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं और वातावरण प्रदान कर रही है। सरकार के इस भागीरथ प्रयत्न से प्रदेश में पर्यटन सेक्टर का कायाकल्प हो रहा है। प्रयागराज महाकुंभ जैसा विशाल जन समागम इसे बड़ा मंच प्रदान कर रहा है। पर्यटन को गति देने के लिए पूरे प्रयागराज में विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं, जिससे महाकुंभ के दौरान न सिर्फ वेंडर्स और सेवा प्रदाताओं की आय बढ़ेगी, बल्कि 45 हजार से अधिक परिवारों को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार भी मिलेगा। इसके साथ ही समस्त धार्मिक पर्यटन स्थलों के आसपास भी रोजगार के नए स्रोत विकसित होंगे। उत्तर प्रदेश में वर्ष 2017 से उपेक्षित पड़े पर्यटन सेक्टर को प्रदेश की योगी सरकार ने नया आयाम दिया है। 16 नवंबर, 2022 को उत्तर प्रदेश की नई पर्यटन नीति-2022 को मंज़ूरी मिलने के बाद पर्यटन क्षेत्र के विकास का नक्शा बदलना शुरू हुआ। नई पर्यटन नीति से प्रदेश में 20 हजार करोड़ के निवेश और 10 लाख लोगों को रोजगार देने का लक्ष्य रखा गया है। इसमें भी सबसे पहले पर्यटन सेक्टर से जुड़े सर्विस प्रोवाइडर को कौशल विकास और प्रबंधन से जोड़ना महत्वपूर्ण है। प्रयागराज महाकुंभ इसके लिए बड़ा मंच साबित हो रहा है। प्रयागराज की क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी अपराजिता सिंह का कहना है कि प्रयागराज महाकुंभ में पर्यटकों से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से संपर्क में आने वाले सभी सेवा प्रदाताओं को प्रशिक्षित करने का अभियान शुरू किया गया है। नाविकों, टूर गाइड, और स्ट्रीट वेंडर्स जैसे सेवा प्रदाताओं को कौशल विकास और मैनेजमेंट की ट्रेनिंग दी जा रही है। उत्तर प्रदेश में धार्मिक स्थलों में नदियों में नौका संचालन से आजीविका चलाने वाले नाविकों की आय बढ़ाने और क्षमताओं का विकास कर योगी सरकार उन्हें नई भूमिका दे रही है। पर्यटन विभाग 2000 नाविकों को इसका प्रशिक्षण दे रहा है। क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी अपराजिता सिंह बताती हैं कि पर्यटन विभाग ने मान्यवर कांशीराम पर्यटन प्रबंधन संस्थान और एक अन्य संस्था के साथ एक एमओयू साइन किया है, जिसके अंतर्गत यह ट्रेनिंग चल रही है, इसमें अभी तक 300 नाविकों को कौशल विकास की ट्रेनिंग दी जा चुकी है। इस प्रशिक्षण से नाविक अब नौकायन से आगे बढ़कर रिवर गाइड की भूमिका का निर्वहन कर सकेंगे। इससे नदियों में धार्मिक स्थलों के किनारे नाव चलाने वाले हजारों नाविकों को रोजगार मिलेगा और पर्यटन स्थलों का वातावरण भी बेहतर होगा। पर्यटन स्थलों में पर्यटकों की संख्या में वृद्धि के लिए इस स्थलों में बुनियादी संरचना के विकास के साथ यहां सेवा प्रदान करने सेवा प्रदाताओं को भी स्मार्ट बनाना होगा। पर्यटन विभाग ने इसी को देखते हुए प्रयागराज में 1000 टूर गाइड को स्किल डेवलपमेंट और मैनेजमेंट की ट्रेनिंग प्रदान कर रहा है। मान्यवर कांशीराम पर्यटन प्रबंध संस्थान, लखनऊ के असिस्टेंट प्रोफेसर प्रखर तिवारी की अगुवाई में यह ट्रेनिंग चल रही है। प्रखर तिवारी बताते हैं कि अब तक यहां टूर गाइड के सात बैच की ट्रेनिंग पूरी हो चुकी है, इसमें 420 टूर गाइड प्रशिक्षित होकर सेवाएं देने को तैयार हैं। पर्यटकों को गुणवत्तापूर्ण सेवाओं की डिलीवरी देने के लिए पर्यटन सेक्टर में प्रशिक्षित जनशक्ति पूल का निर्माण करना बड़ी आवश्यकता है। महाकुंभ में आने वाले पर्यटकों के आतिथ्य में यह जन शक्ति उपयोगी साबित हो सकती है। प्रयागराज की क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी अपराजिता सिंह का कहना है कि महाकुंभ के पूर्व पर्यटन क्षेत्र से जुड़े सभी सेवा प्रदाताओं और जनशक्ति को कुशल बनाने के लिए टूर गाइड और नाविकों के साथ साथ अब शहर के स्ट्रीट वेंडर्स और टैक्सी ड्राइवर्स को भी प्रशिक्षण दिया जा रहा है। स्ट्रीट वेंडर्स शहरी अर्थव्यवस्था का एक महत्त्वपूर्ण घटक हैं, जो एक तरफ जहां स्थानीय लोगों तक रोज़मर्रा की आवश्यक उपयोगी वस्तुओं को पहुंचाते हैं, तो वहीं बाहर से आने वाले पर्यटकों के साथ भी उनका संपर्क होता है। पर्यटकों के साथ व्यवहार के प्रति संवेदनशील बनाने और पर्यटक स्थलों एवं मार्गों पर स्वच्छता की जानकारी देने के लिए इनका प्रशिक्षण भी आवश्यक है। पर्यटन विभाग की तरफ से इनका प्रशिक्षण शुरू किया गया है। प्रयागराज में 600 स्ट्रीट वेंडर्स और 600 टैक्सी ड्राइवर को इसका प्रशिक्षण दिया जाना है। इसके अंतर्गत अभी तक 250 स्ट्रीट वेंडर्स और 120 टैक्सी ड्राइवर को ट्रेनिंग दी जा चुकी है। योगी सरकार की नई पर्यटन नीति पर्यटन क्षेत्र के लिए जहां गेम चेंजर साबित हो रही है, वहीं इससे रोजगार की असीमित संभावनाएं खुल गई हैं। प्रयागराज में महाकुंभ के पूर्व पर्यटन से जुड़े इन सेवा प्रदाताओं स्किल डेवलपमेंट और मैनेजमेंट की ट्रेनिंग देने से बड़ी तादाद में युवाओं को रोजगार मिलेगा। उनकी आमदनी बढ़ेगी। क्षेत्रीय पर्यटक अधिकारी के मुताबिक महाकुंभ के पहले इस ट्रेनिंग कैंपेन से 45 हजार से अधिक परिवारों को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलेगा। इसके साथ ही इन धार्मिक पर्यटन स्थलों के आसपास भी रोजगार के नए स्रोत विकसित होंगे। recent visitors 104

भारत से पैसा निकालकर चीन गए विदेशी निवेशक, बाजारों में भी हाल में गिरावट आई से हुए कंगाल

नई दिल्ली  विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने अक्टूबर महीने में भारतीय बाजार में भारी बिकवाली करते हुए 1,13,858 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। यह अब तक किसी एक महीने में की गई सबसे बड़ी बिकवाली है। हालांकि वे इस दौरान प्राइमरी मार्केट में सक्रिय खरीदार बने रहे। सेकंडरी मार्केट मे भारी बिकवाली के उलट उन्होंने प्राइमरी मार्केट में 19,842 करोड़ रुपये का निवेश किया। विदेशी निवेशक भारत में बेचो और चीन में खरीदो की नीति पर चल रहे थे। लेकिन चीन का बाजार एक बार फिर दबाव में लौटता दिख रहा है। चीनी शेयरों में तेजी कम हो रही है। हाल में शंघाई और हैंग सेंग सूचकांकों में गिरावट आई है। एफपीआई के व्यवहार में इस तरह के विरोधाभास के बारे में जियोजित फाइनेंशियल सर्विसेज के मुख्य निवेश रणनीतिकार डॉ. वी के विजयकुमार ने कहा कि प्राइमरी मार्केट के इश्यू ज्यादातर उचित मूल्यांकन पर हैं, जबकि बेंचमार्क सूचकांक ऊंचे मूल्यांकन पर कारोबार कर रहे हैं। एफपीआई की लगातार बिकवाली से बेंचमार्क सूचकांकों में पीक से लगभग 8% की गिरावट आई है। एफपीआई आगे भी बिकवाली जारी रख सकते हैं जिससे बाजार में किसी भी संभावित तेजी पर रोक लग सकती है। चीन की निकली हवा लेकिन यह ट्रेंड देखने को मिला है वित्तीय क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर एफपीआई की बिकवाली के बावजूद यह सेक्टर लचीला बना हुआ है। इससे साफ है कि भारतीय शेयरों का उचित मूल्यांकन हैं क्योंकि बिक्री घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) और व्यक्तिगत निवेशकों ने बिकवाली को एबजॉर्ब किया है। विदेशी निवेशक भारत से पैसा निकालकर चीन में लगा रहे थे। इसकी वजह यह थी कि चीन की सरकार ने भारी-भरकम पैकेज की घोषणा की थी। उसके बाद चीन के बाजारों में कुछ तेजी दिख रही थी। लेकिन अब एक बार फिर चीन के बाजार में दबाव हावी होने लगा है। हाल के दिनों में शंघाई और हैंग सेंग इंडेक्स में गिरावट आई है। वैश्विक मोर्चे पर बाजार आने वाले सप्ताह में कुछ दिनों के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति चुनावों पर प्रतिक्रिया देंगे। उसके बाद अमेरिकी में जीडीपी के आंकड़े, महंगाई और फेड के दर में कटौती जैसे बुनियादी कारक बाजार की चाल को प्रभावित करेंगे। recent visitors 127

तेजस विमानों के इंजनों की सप्लाई हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड को सौपी जाएगी !

नई दिल्ली तेजस विमानों के लिए अमेरिकी कंपनी जनरल इलेक्ट्रिक (जीई) से इंजनों की आपूर्ति नहीं होने को लेकर भारत सरकार बेहद चिंतित है। जीई की तरफ से अब अप्रैल, 2025 से इंजनों की आपूर्ति को सुचारू करने का भरोसा दिलाया गया है। हालांकि, रक्षा मंत्रालय के सूत्रों ने स्पष्ट कर दिया कि अगर इस तारीख के बाद भी आपूर्ति शुरू नहीं हुई तो फिर जीई से सीधे तकनीक हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) को सौंपे जाने की मांग की जाएगी। इसके बाद एचएएल में ही फिर इंजनों के निर्माण की प्रक्रिया शुरू होगी। सूत्रों के अनुसार एचएएल और जीई के बीच 2021 में समझौता हुआ था, जिसके तहत तेजस विमानों के लिए 99 इंजनों की आपूर्ति जीई को करनी है। इसकी शुरुआत अप्रैल, 2023 से होनी थी और हर साल 16 इंजनों की आपूर्ति भारत को की जानी थी। लेकिन, पिछले डेढ़ साल में महज दो इंजन ही जीई ने दिए हैं, जबकि मार्च 2025 तक 32 इंजन की आपूर्ति करनी है। सिर्फ इंजन के कारण रुका है निर्माण वहीं रक्षा मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, इस देरी के कारण एचएएल तेजस का निर्माण नहीं कर पा रहा है। स्थिति यह है कि दर्जनभर तेजस बनकर तैयार हैं, लेकिन उनमें इंजन फिट करने का काम ही बचा है। बता दें, रक्षा मंत्रालय और एचएएल के बीच 2021 में वायुसेना के लिए 83 तेजस मार्क 1ए विमानों की खरीद को लेकर करार हुआ था। तीन साल बाद यानी मार्च, 2024 से एचएएल को उसे विमानों की आपूर्ति शुरू करनी थी। हर साल 24 विमान वायुसेना को सौंपने का लक्ष्य था, लेकिन अभी तक एक भी विमान नहीं सौंपा जा सका है। वायुसेना इसे लेकर चिंतित है। जुर्माने से इनकार रक्षा सूत्रों के अनुसार, ऐसे मामले में जीई कंपनी पर जुर्माना लगाने का विकल्प सरकार के पास है, लेकिन फिलहाल यह कदम उठाने जाने से सरकार ने इनकार किया है। कंपनी के दिवालिया होने से हो रहा विलंब रक्षा मंत्रालय के सूत्रों ने कहा कि इस मामले में बार-बार जीई को कहा गया है और कंपनी ने भरोसा दिलाया है कि अप्रैल, 2025 से इंजनों की आपूर्ति सुचारू हो जाएगी। जीई ने कहा कि दक्षिण कोरिया की जो कंपनी उसे पुर्जों की आपूर्ति करती थी, वह दिवालिया हो गई है। इसके चलते विलंब हुआ है। recent visitors 112

डीजल इंजन में 80 प्रतिशत डीजल के साथ 20 प्रतिशत हाइड्रोजन गैस का उपयोग किया जा सकता : शोध

 भोपाल  दुनियाभर के वाहनों में ईंधन के रूप में उपयोग हो रहे पेट्रोल और डीजल पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंचा रहे हैं। ऐसे में वैज्ञानिक हाइड्रोजन को भविष्य के ईंधन के रूप में देख रहे हैं। हाइड्रोजन के उपयोग को लेकर विश्व के तमाम संस्थानों में शोधकार्य किया जा रहा है। भोपाल में स्थित मौलाना आजाद राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (मैनिट) में एनर्जी सेंटर के तीन प्रोफेसर और एक पीचएचडी छात्र ने भी ईंधन के रूप में हाइड्रोजन गैस के उपयोग को लेकर एक वर्ष तक शोध किया। इस अनुपात में सुरक्षित शोध में उन्होंने पाया कि डीजल इंजन में 80 प्रतिशत डीजल के साथ 20 प्रतिशत हाइड्रोजन गैस का उपयोग किया जा सकता है। उनके अनुसार अगले पांच वर्षों में वाहनों में हाइड्रोजन का उपयोग शुरू हो जाएगा, जो वाहन चालकों के लिए सुरक्षित रहेगा। साथ ही पर्यावरण के अनुकूल होगा और इंजन को अधिक ऊर्जा भी प्रदान करेगा। इन्होंने किया शोध मैनिट में स्थापित एनर्जी सेंटर ने सितंबर 2023 में 25 लाख रुपये की लागत से हाइड्रोजन ईंधन के उपयोग को लेकर प्रोजेक्ट शुरू किया था। इसमें विभिन्न विभागों के प्रोफेसर डॉ. प्रशांत बारेदार, डॉ. गौरव द्विवेदी, डॉ. टिकेंद्रनाथ वर्मा और पीएचडी छात्र कौस्तुभ ने ड्युअल फ्यूल इंजन में हाइड्रोजन गैस के ईंधन के रूप में उपयोग को लेकर शोध किया। धीरे-धीरे बढ़ाई मात्रा डॉ. गौरव द्विवेदी ने बताया कि शुरुआत के चार महीने हमने सिर्फ डीजल के साथ हाइड्रोजन गैस की अलग-अलग मात्रा को ईंधन के रूप में जांचा। शुरुआत पांच प्रतिशत से की, इसके बाद मात्रा बढ़ाते हुए 20 प्रतिशत तक लेकर गए। आगे जब ईंधन में हाइड्रोजन की मात्रा बढ़ी तो हीटिंग की समस्या होने की आशंका हुई, जिसके बाद इंजन में 20 प्रतिशत ईंधन के रूप में हाइड्रोजन का आठ माह तक उपयोग किया। चूंकि हाइड्रोजन का एनर्जी कंटेंट पेट्रोकैमिकल्स से अधिक है, इसलिए इंजन को अतिरिक्त ऊर्जा मिली और संतुलित उपयोग से इंजन में गर्मी की समस्या भी नहीं हुई। इनका शोध एक रिसर्च जर्नल में भी प्रकाशन हो चुका है। इस तरह से इंजन में काम करता है हाइड्रोजन पीएचडी स्कॉलर कौस्तुभ ने बताया कि ड्युअल फ्यूल इंजन में डीजल टैंक के साथ हाइड्रोजन सिलेंडर भी लगाया जाता है। इंजन में दोनों की सप्लाई की जाती है। इंजन को डीजल सप्लाई से चालू किया जाता है और इंजन गर्म होने पर हाइड्रोजन की सप्लाई शुरू की जाती है। इसका कितनी मात्रा में उपयोग करना है, इसे सप्लाई को रोककर कंट्रोल किया जाता है। इंजन में जिस रास्ते से एयर प्रेशर किया जाता है, उसी जगह से हाइड्रोजन की सप्लाई की जाती है। recent visitors 124

उज्जैन : स्टेशन से महाकाल मंदिर पल भर में पहुंचेंगे भक्त, साल 2026 तक पूरा होने की संभावना

उज्जैन उज्जैन रेलवे स्टेशन से महाकाल मंदिर तक आप रोप-वे से आ-जा सकेंगे। इसके लिए ओडिशा की एमएस इंफ्रा इंजीनियर कंस्ट्रक्शन कंपनी को कॉन्ट्रैक्ट मिला है। कंपनी ने इनिशियल वर्क भी शुरू कर दिया है। उज्जैन रेलवे स्टेशन से नूतन स्कूल-महाकाल मंदिर प्रशासक कार्यालय तक बनने वाला यह रोप-वे 1.76 किलोमीटर लंबा होगा। मोनोकेबल डिटैचेबल गोंडोला (MDG) सिस्टम से ऑपरेट होने वाले रोपवे में रेलवे स्टेशन से महाकाल मंदिर तक 3 स्टेशन बनाए जाएंगे। रोप-वे में 48 केबिन होंगे। हर 1 केबिन में एक समय में 10 लोग आ-जा सकेंगे। रोप-वे 16 घंटे चालू रहेगा। इस हिसाब से मोटे तौर पर माना जा रहा है कि 16 घंटे में 64 हजार श्रद्धालु इसमें आना-जाना कर सकेंगे। रेलवे स्टेशन से आखिरी स्टेशन तक पहुंचने में करीब 6 मिनट का समय लगेगा। रोपवे 2026 तक शुरू हो जाएगा। रोजाना दो से ढाई लाख भक्त आते हैं उज्जैन सिहस्थ 2028 काे देखते हुए रोपवे को बेहद अहम माना जा रहा है। श्री महाकाल लोक बनने के बाद से सामान्य दिनों में ही महाकाल के दर्शन करने के लिए रोजाना औसतन दो से ढाई लाख श्रद्धालु पहुंच रहे हैं।जबकि पर्व-त्योहार और विशेष अवसरों पर ये संख्या बढ़कर 5 लाख से 10.50 लाख तक पहुंच रही है। ऐसे में शहर में भीड़ प्रबंधन और श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए रोपवे की प्लानिंग की गई है। इसके लिए केंद्र सरकार के सड़क परिवहन मंत्रालय ने 189 करोड़ रुपए की स्वीकृति दे रखी है। रोपवे का विकास, संचालन और रखरखाव नेशनल हाईवे-रोपवे प्रोजेक्ट करेगा। ऐसे होगा रोपवे का रूट रोपवे उज्जैन रेलवे स्टेशन से त्रिवेणी होते हुए गणेश कॉलोनी तक जाएगा। जिसकी कुल लंबाई 1.76 किलोमीटर होगी। इसमें तीन स्टेशन 13 टावर और 48 केबिन होंगे। इनमें से प्रत्येक केबिन में लगभग 10 लोगों के बैठने की क्षमता होगी। यात्रा का समय लगभग सात मिनट होगा। 2026 तक पूरा हो जाएगा काम उज्जैन में प्रशासनिक परिसर भवन में शुक्रवार को हुई बैठक में रोपवे परियोजना के विवरण पर चर्चा की गई है। नेशनल हाईवे लॉजिस्टिक्स मैनेजमेंट लिमिटेड के अधिकारियों ने बताया कि रोपवे परियोजना अक्टूबर 2024 में शुरू होगी और अक्टूबर 2026 तक पूरी होने की उम्मीद है। पर्यटन को मिलेगा फायदा पर्वतमाला योजना के अतंर्गत नेशनल हाईवे लॉजिस्टिक्स मैनेजमेंट कंपनी और एमपी सड़क विकास निगम के बीच उज्जैन में रोपवे बनाने के लिए समझौता हुआ।इससे लोगों को आवाजाही में सुविधा होगी और पहाड़ी इलाकों तक पहुंच आसान हो जाएगी। एनएचएलएमएल और एमपीआरडीसी मिलकर इस परियोजना को पूरा करेंगे। इस महत्वकांक्षी योजना से हर दिन हजारों लोग आसानी से सफर कर सकेंगे। इसके साथ ही पर्यटन को लाभ मिलेगा। recent visitors 204

‘बंटेंगे तो कटेंगे’ नकारात्मक नारा CM की निराशा और नाकामी का प्रतीक है- अखिलेश यादव

लखनऊ  उत्तर प्रदेश में चल रहे उपचुनाव के बीच नारों की सियासत काफी गरमाई है। मुख्यमंत्री योगी के 'बंटेंगे तो कटेंगे' नारा को लेकर सपा मुखिया अखिलेश यादव ने निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि यह नकारात्मक नारा उनकी निराशा और नाकामी का प्रतीक है। अखिलेश यादव ने  को सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा कि उनका ‘नकारात्मक-नारा’ उनकी निराशा और नाकामी का प्रतीक है। इस नारे ने साबित कर दिया है कि उनके जो गिनती के 10 फीसद मतदाता बचे हैं, अब वो भी खिसकने के कगार पर हैं, इसलिए ये उनको डराकर एक करने की कोशिश में जुटे हैं, लेकिन ऐसा होने वाला नहीं। उन्होंने कहा कि ‘नकारात्मक-नारे’ का असर भी होता है। दरअसल, इस ‘निराश-नारे’ के आने के बाद उनके बचे-खुचे समर्थक ये सोचकर और भी निराश हैं कि जिन्हें हम ताकतवर समझ रहे थे, वो तो सत्ता में रहकर भी कमजोरी की ही बातें कर रहे हैं। जिस ‘आदर्श राज्य’ की कल्पना हमारे देश में की जाती है, उसके आधार में ‘अभय’ होता है, ‘भय’ नहीं। ये सच है कि ‘भयभीत’ ही ‘भय’ बेचता है, क्योंकि जिसके पास जो होगा, वो वही तो बेचेगा। अखिलेश यादव ने भाजपा पर बोला हमला सपा मुखिया ने कहा कि देश के इतिहास में ये नारा ‘निकृष्टतम-नारे’ के रूप में दर्ज होगा और उनके राजनीतिक पतन के अंतिम अध्याय के रूप में आखिरी ‘शाब्दिक कील’ साबित होगा। उन्होंने कहा कि देश और समाज के हित में उन्हें अपनी नकारात्मक नजर और नजरिये के साथ अपने सलाहकार भी बदल लेने चाहिए, ये उनके लिए भी हितकर साबित होगा। एक अच्छी सलाह ये है कि ‘पालें तो अच्छे विचार पालें’ और आस्तीनों को खुला रखें, साथ ही बांहों को भी, इसी में उनकी भलाई है। सकारात्मक समाज कहे आज का, नहीं चाहिए भाजपा। पोस्टरवार शुरू हुआ मुख्यमंत्री योगी का नारा 'बंटेंगे तो कटेंगे' काफी चर्चित हो रहा है। इस कारण यूपी से महाराष्ट्र तक की सियासत गरमा गई है। बीते दिनों मुंबई के कई इलाकों में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तस्वीर और 'बंटेंगे तो कटेंगे' संदेश वाले पोस्टर लगाए गए हैं। इन पोस्टर में 'बंटेंगे तो कटेंगे और एक रहेंगे तो नेक रहेंगे', सुरक्षित रहेंगे के संदेश लिखे हैं। योगी ने आगरा में दिया था नारा दरअसल, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आगरा में एक कार्यक्रम में कहा था कि आप देख रहे हैं बांग्लादेश में क्या हो रहा है? वे गलतियां यहां नहीं होनी चाहिए। 'बटेंगे तो कटेंगे, एक रहेंगे तो नेक रहेंगे, सुरक्षित रहेंगे और समृद्धि की पराकाष्ठा पर पहुंचेंगे। इसके बाद यह नारा काफी मजबूती के साथ आगे बढ़ रहा है। सबसे पहले अखिलेश यादव के जन्मदिन से पोस्टर वार की शुरुआत हुई थी। इसके बाद से भाजपा और सपा के बीच पोस्टर वार जारी है। recent visitors 102