विदेशी निवेशक भारत में जमकर निवेश कर रहे , अप्रैल से जून में 12.2 अरब डॉलर कमाए

नई दिल्ली  विदेशी निवेशकों के लिए भारत सोने के अंडे देने वाली मुर्गी बना गया है। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों, निजी इक्विटी फर्मों और स्थानीय स्तर पर परिचालन करने वाली कंपनियों ने डिविडेंड इनकम, प्रॉफिट और रिइनवेस्टेड अर्निंग्स के रूप में अप्रैल-जून तिमाही में कुल 12.2 अरब डॉलर कमाए। यह वह राशि है जो विदेशी निवेशकों ने तीन महीने के दौरान भारत से निकाली। यह पांच साल पहले की तुलना में दोगुना से भी अधिक है जो भारतीय फाइनेंशियल एसेट्स की मजबूत आय संभावनाओं को रेखांकित करता है। आरबीआई के आंकड़ों से यह भी पता चला है कि कुल इनवेस्टमेंट इनकम आउटफ्लो जून तिमाही में दोगुना से ज्यादा बढ़ा है। 2019 की अप्रैल-जून तिमाही में यह $11 अरब था जो इस साल इसी अवधि में $21.6 अरब हो गया है। अमेरिका स्थित कंसल्टेंसी बैन एंड कंपनी की एक रिपोर्ट के अनुसार 2024 की पहली छमाही में निजी इक्विटी से निकासी छह साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई। एग्जिट डील वैल्यू में साल-दर-साल 40% की वृद्धि हुई, जो कैलेंडर वर्ष 2023 की पहली छमाही में $9.5 अरब से बढ़कर 2024 की पहली छमाही में $13.3 अरब हो गई। क्या कहते हैं जानकार PwC इंडिया के पार्टनर-रिस्क कंसल्टिंग और लीडर-फाइनेंशियल सर्विसेज और ट्रेजरी रिस्क मैनेजमेंट, कुंतल सूर ने कहा, 'पिछले कुछ वर्षों में पीई फर्मों ने अच्छा मुनाफा कमाया है। बढ़ते शेयर बाजारों ने उन्हें लिस्टेड फर्मों में उनके निवेश के लिए अच्छा मूल्यांकन दिया। इससे उन्हें निवेशकों को अच्छा रिटर्न देने का मौका मिला। इसके अलावा कई निवेशकों के लिए ब्याज दरें अधिक होने के कारण उनके देशों में पुनर्निवेश के कई अवसर रहे हैं।' बहुराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा भारत में किए गए निवेश से प्राप्त लाभ और लाभांश भी निवेश आय में परिलक्षित होते हैं। बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस ने कहा, 'इसके दो कारक हैं। पहला, ऐसे समय में समग्र राजस्व में वृद्धि करना जब मंदी के कारण लाभ अस्थिर हो। दूसरा, विनिर्माण के कुछ क्षेत्रों में अतिरिक्त क्षमता को देखते हुए पुनर्निवेश की कम आवश्यकता महसूस की जाती है।' जानकारों का कहना है कि यह आउटफ्लो चालू खाते पर दबाव बढ़ा सकता है और बाहरी क्षेत्र के संकेतकों के लिए हानिकारक हो सकता है। लेकिन अर्थशास्त्रियों का कहना है कि यह अभी भी चालू खाते के आउटफ्लो का एक छोटा हिस्सा है। recent visitors 103

CM ने खुद सड़क की मरम्मत कर अभियान शुरू किया, अब आंध्र प्रदेश की सड़के होगी बेहरतर

अमरावती आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने राज्य की सड़कों को बेहरतर बनाने के लिए एक बड़ा अभियान शुरू किया। सीएम ने सड़कों को गड्ढा मुक्त करने के लिए इस अभियान की शुरुआत की। 861 करोड़ की लागत का अभियान 861 करोड़ रुपये की लागत के इस अभियान को सड़कों की समस्या को देखते हुए शुरू किया गया है। अनकापल्ली जिले के चिंतलागोर्लिवनिपालम गांव से राज्यव्यापी अभियान की शुरुआत करते हुए मुख्यमंत्री ने खुद एक गड्ढे को मोर्टार से भरकर उसकी मरम्मत की। CM ने खुद सड़क की मरम्मत की इस दौरान उनके साथ गृह मंत्री वांगलापुडी अनिता और अन्य नेता और अधिकारी भी मौजूद थे। बाद में उनकी मौजूदगी में एक बड़े गड्ढे को भी ट्रक से भरकर ठीक किया गया। नायडू ने खुद कुदाल उठाई और दक्षिणी राज्य में मरम्मत कार्यों को गति देने के लिए गड्ढे को समतल किया।   recent visitors 78

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राज्य स्तरीय गोवर्धन पूजा समारोह को किया संबोधित, कहा- गायों की देखभाल गौ-शालाओं में होंगी

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश में गौ-पालन को बढ़ावा देकर किसानों और गौ-पालकों की आर्थिक सशक्तिकरण का कार्य किया जा रहा है। शहरों में कांजी हाऊस के स्थान पर गौ-वंश की देशभाल के लिए गौशालाएं प्रारंभ की जायेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश के 51 हजार से अधिक ग्रामों में दूध का उत्पादन बढ़ाते हुए इस क्षेत्र में मध्यप्रदेश को पूरे देश में प्रथम स्थान पर लाने का प्रयास है। इसके साथ ही अगली पशुगणना में प्रदेश पहले तीसरे स्थान से पहले स्थान पर लाने के के समस्त प्रयास भी किये जाएंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में गौ-वंश पालन पर क्रेडिट कार्ड देने की पहल की गई है। हमारे किसान भाई और पशुपालक दीपावली के बाद गोवर्धन पूजा करते हैं। प्रदेश में पहली बार शासन स्तर पर गोवर्धन पूजा के कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इसका उद्देश्य हमारी हजारों वर्ष पुरानी संस्कृति और गौ-माता के प्रति सम्मान की भावना को सशक्त करना है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शनिवार को रवींद्र भवन परिसर भोपाल में राज्य स्तरीय गोवर्धन पूजा समारोह को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उपस्थित नागरिकों को गोवर्धन पूजा की बधाई दी। प्रारंभ में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रवींद्र बहिरंग मंच पर गोवर्धन पूजा समारोह का दीप जलाकर शुभारंभ किया। दुग्ध सहकारिता क्षेत्र में लौह पुरूष सरदार पटेल के योगदान का किया स्मरण मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राष्ट्रीय डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड से अनुबंध कर प्रदेश में दुग्ध उत्पादन बढ़ाने की रणनीति तैयार की गई है। लौह पुरूष सरदार वल्लभभाई पटेल ने दुग्ध सहकारिता आंदोलन को गति दी थी। आज "अमूल" के उत्पाद देश-विदेश में लोकप्रिय हैं। मध्यप्रदेश में गुजरात पैटर्न पर दुग्ध सहकारिता क्षेत्र में किसानों और पशुपालकों की सहायता के लिए ठोस कदम उठाए गए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि दूध, घी और मक्खन के साथ गौ-काष्ठ का भी उपयोग हो रहा है। गोबर से खिलौने और कलाकृतियां तैयार की जा रही हैं। प्रदेश सरकार गौ-पालन को प्रोत्साहित करने के लिए गौ-शाला को प्रति गाय 20 रुपये के स्थान पर 40 रुपये के अनुदान का निर्णय ले चुकी है। जो पशुपालक 10 या उससे अधिक गायों का पालन करेंगे उन्हें भी विशेष अनुदान दिया जाएगा। प्रदेश में दुग्ध उत्पादन में वृद्धि के प्रयास किए जा रहे हैं। प्रदेश में वर्तमान में देश के कुल दुग्ध उत्पादन का 9 प्रतिशत उत्पादन हो रहा है, जिसे 20 प्रतिशत तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है। सभी गाँव में दुग्ध संघ के माध्यम से गतिविधियां बढ़ाई जाएंगी। प्रारंभ में 11 हजार गाँव में दुग्ध सहकारी समितियों के माध्यम से दुग्ध उत्पादन में वृद्धि का प्रयास है। प्रदेश में इस वर्ष गौ-वंश रक्षा पर्व मनाया जा रहा है। गौ-वध के दोषी को मिलेगा 7 वर्ष का सख्त कारावास मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि गौ-वंश से समृद्ध प्रदेश में गौ-माता के संरक्षण के लिये समुचित प्रावधान किये जा रहे है। गौ-वध को रोकने के लिये समुचित व्यवस्था की गई है। गौ-वध का दोषी पाये जाने पर 7 वर्ष की सख्त सजा देने का कानूनी प्रावधान है। प्रदेश है गौ-वंश में समृद्ध मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश गौ-वंश में समृद्ध है। प्रदेश में लगभग 1 करोड़ 39 लाख गायें हैं। वर्ष 2019 की पशु गणना के अनुसार मध्य प्रदेश तीसरे स्थान पर है। हम अगली पशुगणना में देश में प्रथम स्थान पर आने का प्रयास करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गौ-पालकों को प्रोत्साहन, गौ-वंश संरक्षण के सरकार के प्रयासों और योजनाओं की जानकारी दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में पशु चिकित्सा के लिये गौ-एंबुलेंस का संचालन भी किया जा रहा है। शहरों और ग्रामों में अर्थव्यवस्था में भी सहयोगी है गौ-पालन मुख्यमंत्री डॉ. ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के संकल्प को पूरा करने के लिए मध्यप्रदेश गौ-वंश संरक्षण सहित अन्य क्षेत्रों में कार्य कर रहा है। भारत विश्व में 5वीं बड़ी अर्थव्यवस्था है। शीघ्र ही भारत तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था होगा। ग्रामों में कृषि कार्य के साथ पशुपालन एवं गौ-पालन किसान की आर्थिक समृद्धि में सहयोगी है। शहरों में भी गौपालन से पशुपालक अपनी आय बढ़ा सकते हैं। मध्य प्रदेश इस क्षेत्र में निरंतर कार्य कर रहा है। पशुधन संरक्षण के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि आज राज्य स्तर पर गोवर्धन पूजा कार्यक्रम में जनप्रतिनिधि पूरे प्रदेश में कार्यक्रमों में हिस्सा ले रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि गोवर्धन पूजा हमारी संस्कृति की प्रतीक भी है, जिससे विश्व में भारत की पहचान है। मानवता का संरक्षण करती है गाय मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण और गोवर्धन पर्वत की पूजा को समर्पित इस पर्व से संबंधित यह मान्यता भी है कि भगवान श्रीकृष्ण ने वृंदावन क्षेत्र के नागरिकों को आपदाओं से बचाने के लिए गोवर्धन पर्वत उठाया था। यह घटना भगवान द्वारा उन भक्तों को सुरक्षा देने का भी प्रतीक है, जो उनकी शरण में आते हैं। गोवर्धन पूजा में अन्न का पर्वत बनाया जाता है, इसे अन्नकूट कहा जाता है। भगवान श्रीकृष्ण के गायों के प्रति प्रेम से ही उनका नाम गोपाल हुआ। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विश्व के हर देश में गौपालन देखने को मिलता है। उन्होंने कहा कि हमारे प्रदेश में मालवी गाय विशिष्ट है। गाय माँ के समान है, वह सृष्टि की जननी भी मानी गई है। शास्त्रों के अनुसार ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना के बाद सर्वप्रथम गाय को ही पृथ्वी पर भेजा था। गाय माँ लक्ष्मी का भी स्वरूप है और इसे कामधेनु भी माना जाता है। गाय के दूध में जो पोषक तत्व हैं, वह अन्य दुधारू पशुओं के दूध में नहीं है। इस तरह गाय कई रूपों में मानवता का संरक्षण करती है। शहरों में प्रारंभ होंगी बड़ी गौ-शालाएं मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि गौपालन एवं गौ संरक्षण के कार्यों को दृष्टिगत रखते हुए इंदौर, भोपाल, उज्जैन, ग्वालियर जैसे शहरों में जहाँ हजारों की संख्या में गौ-वंश है, बड़ी गौशालाएँ प्रारंभ की जायेगी। शहरों की गौशालाओं में 5 हजार से लेकर 10 हजार तक गौवंश को रखने की व्यवस्था होगी। राज्य सरकार ने वर्ष 2024-25 में पशुधन संरक्षण और पशुपालन गतिविधियों के लिए 590 करोड़ रूपए की राशि का प्रावधान किया … Read more

पलक्कड़ में दर्दनाक हादसा, हादसे में ट्रेन की चपेट में आने से 4 सफाई कर्मचारियों की मौत

केरल केरल के पलक्कड़ में शनिवार को दर्दनाक हादसा हो गया। जानकारी के मुताबिक, केरल एक्सप्रेस की चपेट में आने से चार सफाई कर्मचारियों की मौत हो गई। मृतकों की पहचान वल्ली, रानी, ​​लक्ष्मण और एक अन्य अज्ञात पुरुष के रूप में हुई है, सभी तमिलनाडु के रहने वाले थे। यह घटना शनिवार शाम को भरतपुझा नदी पर बने शोरनूर रेलवे पुल पर घटी। रिपोर्ट्स के अनुसार, जब ट्रेन ने उन्हें टक्कर मारी, तब वे पुल पर चल रहे थे। एक व्यक्ति के शव को खोजने के लिए नदी में तलाश जारी है। यूपी में भी कई लोगों की मौत इससे पहले उत्तर प्रदेश के लखनऊ-गोंडा रेल मार्ग  पर बहराइच के जरवल रोड थाना क्षेत्र में शुक्रवार सुबह मालगाड़ी से कटकर दो महिलाओं की मौत हो गई। जरवल रोड थानाक्षेत्र में झुकिया गांव की शाहजहां (42) और सलमा (40) रेलवे ट्रैक पार कर खेतों में नित्य क्रिया हेतु गई थीं। वापसी में वे ट्रेन की आवाज सुनकर दूसरे ट्रैक के बीच रूक गईं और ट्रेन के निकलने का इंतजार करने लगीं। सूत्रों के मुताबिक इसी बीच, जिस ट्रैक पर दोनों खड़ी थीं, उसी पर एक अन्य ट्रेन (मालगाड़ी) आ गई। मालगाड़ी की चपेट में आने से दोनों की मौके पर ही मृत्यु हो गई। जरवल रोड थाना प्रभारी बृजराज प्रसाद ने बताया कि शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है। वहीं, उत्तर प्रदेश के इटावा जिले में दिल्ली हावड़ा रेल मार्ग पर इकदिल इलाके में कुरट गांव के पास रेलवे लाइन के किनारे रील बना रहे दो दोस्तों की यात्री रेलगाड़ी की चपेट में आने से दर्दनाक मौत हो गई। इटावा के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक संजय कुमार ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह दर्दनाक हादसा आज तड़के सुबह सात बजे के आसपास तब घटित हुआ, जब दो दोस्त रेलवे लाइन के किनारे मोबाइल फोन से रील बना रहे थे तभी एक यात्री ट्रेन की चपेट में आने से दोनों की दर्दनाक मौत हो गई है। recent visitors 91

‘कांग्रेस से दूर रहो कहते थे बाला साहेब , लेकिन उद्धव ने…’, शिंदे ने बताया क्यों किया था ‘तख्तापलट’

मुंबई महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने विधानसभा चुनाव के बीच में उद्धव ठाकरे पर शिवसेना में फूट डालने का आरोप लगाया है। एएनआई को दिए एक खास इंटरव्यू में शिवसेना में हुए विभाजन पर बोलते हुए सीएम शिंदे ने कहा कि मैं महाविकास अघाड़ी सरकार का हिस्सा था, लेकिन जो सरकार बनी। वह बाला साहेब ठाकरे के आदर्शों के खिलाफ थी। शिवसेना और बीजपी का गठबंधन ही आगे का सही रास्ता था। हालांकि उद्धव ठाकरे के निजी स्वार्थों के कारण कांग्रेस के साथ गठबंधन हुआ, जो बाला साहेब कभी नहीं चाहते थे। इसके चलते पार्टी अनुशासन का पालन करते हुए और बदलाव लाने के लिए उन्होंने बीजेपी के साथ गठबंधन किया। शिंदे ने क्याें उठाया कदम? शिंदे ने आगे कहा कि शिवसेना कार्यकर्ता होने के नाते हमने पार्टी अनुशासन का पालन किया और बदलाव की जरूरत को महसूस किया। हमने शिवसेना-बीजेपी गठबंधन सरकार बनाने का प्रयास किया लेकिन हम असफल रहे और दुर्भाग्य से हमारी पार्टी और कार्यकर्ताओं को जो नुकसान हो रहा था, हमने महाराष्ट्र के लोगों की सुनने का फैसला किया, जो शिवसेना-बीजेपी गठबंधन चाहते थे। हमारे विधायक भी थके हुए थे क्योंकि उनके क्षेत्रों में कोई काम नहीं हो रहा था। इसलिए हमने सरकार बदली और बीजेपी और शिवसेना के गठबंधन के साथ एक नई सरकार बनाई। महायुति सरकार की तारीफ महायुति सरकार की सराहना करते हुए सीएम शिंदे ने गर्व किया कि इस सरकार ने निजी लाभ से ऊपर लोगों के हितों को प्राथमिकता दी। उन्होंने कहा कि महायुति सरकार ने उन परियोजनाओं को फिर से शुरू किया जिन्हें MVA सरकार ने रोक दिया था। महायुति की उपलब्धि पर प्रकाश डालते हुए सीएम शिंदे ने कहा कि उनके शासन के दौरान महाराष्ट्र जीडीपी, एफडीआई, जीएसटी या स्वच्छता, हर क्षेत्र में शीर्ष पर रहा। उन्होंने कहा कि राज्य ने उनके शासनकाल में ही 5 लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश आकर्षित किया। दो साल के काम का बखान सीएम शिंदे ने कहा कि मुझे गर्व और खुशी है कि हमने निजी लाभ से ऊपर लोगों के हितों को प्राथमिकता दी। पिछले दो सालों में हमारी सरकार को उसके काम के लिए सराहना मिली है। पहले दिन से ही हमने किसानों, श्रमिकों, युवाओं पर ध्यान केंद्रित किया, और विकास परियोजनाएं। हमने मेट्रो, बुलेट ट्रेन और राजमार्गों जैसी रुकी हुई परियोजनाओं को फिर से शुरू किया। इससे महाराष्ट्र निवेश के अनुकूल बना। आज मैं गर्व से कहता हूं कि हमने 5 लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश आकर्षित किया है। MVA शासन के दौरान महाराष्ट्र तीसरे स्थान पर था, लेकिन जब हम आए, तो महाराष्ट्र जीडीपी, एफडीआई, जीएसटी और स्वच्छता में शीर्ष पर रहा। हमारी कल्याणकारी योजनाएं, जैसे लाडली बहना योजना आदि लड़कियों को वजीफा और मुफ्त उच्च शिक्षा प्रदान करती हैं। हमने दो सालों में बहुत कुछ हासिल किया है और मैं आभारी हूं। केंद्र की कठपुतली वाले आरोप पर क्या बोले? यह पूछे जाने पर कि विपक्ष उनकी सरकार को केंद्र सरकार की कठपुतली बता रहा है। इस पर सीएम शिंदे ने कहा कि जब से महाराष्ट्र में डबल इंजन की सरकार आई है, राज्य को केंद्र से कई लाभ मिले हैं। उन्होंने कहा कि महायुति सरकार की 'कड़ी मेहनत' को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने सराहा है। शिंदे ने कहा, मुझे खुशी है कि पिछले दो सालों में हमारी सरकार की कड़ी मेहनत को पीएम नरेंद्र मोदी और अमित शाह ने सराहा है। एमवीए सरकार पर हमला पिछली MVA सरकार पर परोक्ष हमला करते हुए सीएम शिंदे ने कहा कि सीएम होने का मतलब लोगों की सेवा करना है, न कि केवल फेसबुक लाइव के जरिए सरकार चलाना। उन्होंने जोर देकर कहा कि उनकी सरकार सुनती है और काम करती है, बहरी या गूंगी नहीं है। हमारी सरकार किसानों को प्राथमिकता देती है, सहायता और समर्थन प्रदान करती है। हमने किसानों के लिए 15,000 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं और विभिन्न योजनाएं लागू की हैं। यह किसानों की सरकार है। recent visitors 119

RSS का प्लान सत्तारूढ़ गठबंधन के पक्ष में वोटरों की गोलबंदी करना और विपक्षी एमवीए को सत्ता में आने से रोकना

मुंबई महाराष्ट्र में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने राज्य में बड़े पैमाने पर जनसंपर्क कार्यक्रम आयोजित करने की योजना बनाई है. जिस तरह हरियाणा विधानसभा चुनाव में संघ ने पर्दे के पीछे से अहम भूमिका निभाई थी, उसी तर्ज पर महाराष्ट्र में भी वोटरों को भाजपा के नेतृत्व वाले गठबंधन के पक्ष में करने के लिए बड़े पैमाने पर यह कार्यक्रम चलाया जाएगा. आरएसएस के उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार, संगठन, मतदाता जागरूकता पर ध्यान केंद्रित करते हुए राज्य भर में 300,000 से अधिक छोटी बैठकें आयोजित करने वाला है. इस रणनीतिक बदलाव के तहत आरएसएस एक सुव्यवस्थित मशीनरी के रूप में काम करेगा, जो जनमत को प्रभावित करने और चुनावी परिदृश्य को आकार देने के लिए अपने विशाल नेटवर्क का लाभ उठाएगा. पिछले चुनावों में जहां आरएसएस ने मुख्य रूप से मतदाता जागरूकता पर ध्यान केंद्रित किया था वहीं इस बार इसके उलट कार्यक्रमों को रिजल्ट में तब्दील करने के लिए अधिक सक्रिय दृष्टिकोण अपना रहा है. सूत्रों ने आज को बताया कि आरएसएस अपने अभियान के हिस्से के रूप में तीन बड़े कार्यक्रम आयोजित करने जा रहा है- 1-संविधान सम्मान: कांग्रेस के 'संविधान बचाओ' अभियान का जवाब? राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) "संविधान सम्मान" नामक एक विशाल अभियान शुरू करने जा रहा है. इसे कांग्रेस पार्टी के "संविधान बचाओ" अभियान के जवाब के रूप में देखा जा रहा है. आरएसएस के इस अभियान का उद्देश्य यह उजागर करना है कि कैसे कांग्रेस पार्टी ने कथित तौर पर बार-बार संविधान का अपमान किया है, साथ ही समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के खिलाफ़ जाकर बाधाए भी पैदा की हैं. आरएसएस के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने कांग्रेस पार्टी की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा, "जब आप संविधान के मूल के खिलाफ़ जा रहे हैं तो आप संविधान को बचाने की बात कैसे कर सकते हैं?" पदाधिकारी ने इस बात पर भी निराशा व्यक्त की कि कांग्रेस पार्टी ने अपने 70 साल के शासन के दौरान भारतीय संविधान के निर्माता बाबा साहेब अंबेडकर की शिक्षाओं का कभी सम्मान नहीं किया. पदाधिकारी ने कहा, "बाबा साहेब अंबेडकर के खिलाफ साजिश रचने वाले और उनकी शिक्षाओं के खिलाफ़ जाने वाले लोग यह दावा नहीं कर सकते कि वे भारत के संविधान का सम्मान करते हैं. बहुत से लोग नहीं जानते कि आज भी आरएसएस की सुबह की प्रार्थना में बाबा साहेब अंबेडकर का नाम होता है." 2- लोकमत परिष्कर यह लोकतंत्र को मजबूत करने पर केंद्रित एक अभियान होगा. इसमें आरएसएस द्वारा उम्मीदवारों के अच्छे और बुरे पहलुओं को उजागर किया जाएगा और विभिन्न राजनीतिक दलों के घोषणापत्रों पर चर्चा की जाएगी. 3- सजग बनो 'सजग बनो' एक बैठकों की एक सीरीज है, जिसमें आरएसएस लोगों से वोट डालने से पहले सावधानी से सोचने का आग्रह करेगा, लोकतंत्र की पवित्रता बनाए रखने के महत्व पर जोर देगा. हरियाणा में अपनी सफलता को दोहराने के लिए, आरएसएस ने महाराष्ट्र में अपने स्वयंसेवकों के माध्यम से 50,000 से अधिक छोटी बैठकें और जनसंपर्क प्रयास शुरू कर दिए हैं. अभियान की सफलता आरएसएस की भाजपा के नेतृत्व वाले सत्तारूढ़ गठबंधन, महायुति के पक्ष में जनमत करने और विपक्षी महा विकास अघाड़ी (एमवीए) के सत्ता हासिल करने के प्रयासों का मुकाबला करने की क्षमता पर निर्भर करेगी.   recent visitors 72

अडानी कंपनी का बांग्लादेश पर 846 मिलियन डॉलर का बकाया, आधी की सप्लाई!

ढाका  दिवाली के बाद बांग्लादेश की बत्ती गुल होने के आसार बन रहे हैं। दरअसल, अडानी ग्रुप की कंपनी अडानी पावर झारखंड लिमिटेड ने बांग्लादेश को बिजली की सप्लाई आधी कर दी है। सप्लाई रोकने का कारण बिजली के बकाया बिलों का पेमेंट नहीं होना है। यदि मसला हल नहीं हुआ तो हो सकता है कि आने वाले दिनों में बांग्लादेश में अंधेरा छा जाए। 846 मिलियन डॉलर का है बकाया स्थानीय मीडिया रिपोर्ट के अनुसार अडानी पावर की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी अडानी पावर झारखंड लिमिटेड (APJL ) ने बांग्लादेश को अपनी आधी बिजली की सप्लाई रोक दी है। कंपनी का उसके ऊपर 846 मिलियन डॉलर का बकाया है। द डेली स्टार अखबार के मुताबिक पावर ग्रिड बांग्लादेश पीएलसी के आंकड़ों से पता चला है कि अडानी प्लांट ने गुरुवार रात को आपूर्ति कम कर दी। अखबार ने बताया कि बांग्लादेश ने गुरुवार और शुक्रवार की दरम्यानी रात को 1,600 मेगावाट (MW) से अधिक की कमी की सूचना दी, क्योंकि 1,496 मेगावाट का प्लांट अब एक यूनिट से 700 मेगावाट बिजली का उत्पादन कर रहा है। 30 अक्टूबर तक बकाया भरने को कहा था इससे पहले अडानी कंपनी ने ऊर्जा सचिव को पत्र लिखकर बांग्लादेश पावर डेवलपमेंट बोर्ड (PDB) से 30 अक्टूबर तक बकाया राशि का भुगतान करने को कहा था। 27 अक्टूबर को लिखे पत्र में कहा गया था कि यदि बिलों का भुगतान नहीं किया गया तो कंपनी 31 अक्टूबर को बिजली आपूर्ति बंद कर पावर परचेज एग्रीमेंट (PPA) के तहत सुधारात्मक कार्रवाई करने को बाध्य होगी। कंपनी ने कहा कि पीडीबी ने न तो बांग्लादेश कृषि बैंक से 170.03 मिलियन अमरीकी डालर की राशि के लिए लेटर ऑफ क्रेडिट (LC) उपलब्ध कराया है और न ही 846 मिलियन अमरीकी डालर की बकाया राशि का भुगतान किया है। अडानी भेज रहा है ज्यादा बिल? अखबार ने पीडीबी के एक अधिकारी के हवाले से कहा कि उन्होंने पहले पिछले बकाए का एक हिस्सा चुका दिया था, लेकिन जुलाई से अडानी पिछले महीनों की तुलना में अधिक पैसे ले रहा है। उन्होंने कहा कि पीडीबी करीब 18 मिलियन अमरीकी डालर का साप्ताहिक भुगतान कर रहा है, जबकि शुल्क 22 मिलियन डालर से अधिक है। उन्होंने कहा, "इसी कारण से बकाया भुगतान फिर से बढ़ गया है।" बकाया भुगतान का दवाब तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना के हटने के बाद जब से नोबेल पुरस्कार विजेता प्रोफेसर मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व में एक अंतरिम सरकार का कार्यभार संभाला है, तभी से अडानी बकाया भुगतान करने का दबाव बना रहे हैं। अडानी समूह के अध्यक्ष गौतम अडानी ने भी मुख्य सलाहकार यूनुस को इस बारे में पत्र लिखा था। recent visitors 91