पहली बार सेना ने मोबिलिटी के लिए BMP-2 का इस्तेमाल किया, आतंकियों के खात्मे के लिए बड़ी प्लानिंग

सुंदरबनी  जम्मू के सुंदरबनी सेक्टर के असन इलाके में आतंकियों के खिलाफ किया ऑपरेशन इस लिहाज से खास रहा, कि पहली बार सेना ने मोबिलिटी के लिए BMP-2 का इस्तेमाल किया। सोशल मीडिया में कुछ लोग BMP की तस्वीरें डाल इसे टैंक बता रहे हैं, लेकिन टैंक और BMP में काफी फर्क होता है। BPM सैनिकों को कैरी करने वाला वीइकल है, जिसके आगे एक कैनन लगा होता है। कैनन का इस्तेमाल नहीं किया गया। ऑपरेशन के दौरान सैनिकों की सुरक्षा के लिए BPM का इस्तेमाल एक सिक्योर वीइकल की ही तरह किया गया। दो दिन में खत्म हो गया ऑपरेशन जिस जगह सेना आतंकियों के खिलाफ ऑपरेशन चला रही थी वह जंगल के बीच एक खुला मैदान वाला इलाका है। वहां किसी और वीइकल से मूवमेंट में दिक्कत होती इसलिए BMP का इस्तेमाल किया गया। इसमें सैनिक आतंकियों की फायरिंग से सुरक्षित भी रहते हैं। BMP-2 का इस्तेमाल कर सेना ने ऑपरेशन को दो दिन में खत्म कर दिया। अगर ऑपरेशन अर्बन इलाके में होता है तो सेना बख्तरबंद गाड़ियों जैसे कैस्पर का इस्तेमाल करती है। BMP इंफ्रेंट्री कैरियर वीइकल (ICV) है, जो सैनिकों को ले जाते हैं और इनमें हथियार भी लगे होते हैं। भारतीय सेना की मैकेनाइजड इंफ्रेंट्री में अभी 2000 के करीब ICV हैं। ये रूसी ICV BMP-2 हैं। ये दो तरह के हैं। एक ट्रैक्ड यानी की टैंक की तरह ट्रैक पर चलने वाले और दूसरे वीइल्ड यानी टायरों पर चलने वाले। BMP-2 एंफीबियस हैं यानी ये नदी-नाले को भी आसानी से पार कर सकते हैं। BMP और टैंक में फर्क बीएमपी और टैंक दोनों अलग अलग होते हैं। दोनों ही बख्तरबंद हैं। ट्रैक्ड BMP और टैंक के चलने का तरीका एक जैसा है। आपने इनके चेन से लगे पहिए देखें होंगे। लेकिन दोनों की खासियत और उनका इस्तेमाल अलग अलग है। बीएमपी को आर्मी की मैकेनाइज्ड इंफ्रेंट्री इस्तेमाल करती है और टैंक आर्मी की आर्मर्ड यानी टैंक रेजिमेंट का हिस्सा है। टैंक को आर्मर्ड फाइटिंग वीइकल यानी एएफवी भी कहा जाता है। जबकि बीएमपी हैं इंफ्रेंट्री कैरियर वीइकल यानी आईसीवी। बीएमपी का फुल फॉर्म वैसे Boyevaya Mashina Pekhoty है, यह रशियन शब्द है जिसका मतलब होता है इंफ्रेंट्री फाइटिंग वीइकल। इंफ्रेंट्री सैनिकों की स्पीड भी टैंक जितनी ही रखने के लिए आर्मर्ड के दस्ते के साथ मैकेनाइज्ड इंफ्रेंट्री की जरूरत होती है। इसके लिए बीएमपी चाहिए। टैंक की जितनी मोटी चादर यानी लेयर होती है उतनी बीएमपी की नहीं होती। इसे छोटे हथियारों से प्रोटेक्शन के हिसाब से बनाया गया है। बीएमपी में फायरिंग का सिस्टम टैंक से अलग है। बीएमपी कैनन फायर करते हैं। कैनन का राउंड नॉर्मल हथियार से थोड़ा बड़ा होता है। बीएमपी की गन छोटी और पतली होती है जबकि टैंक की बड़ी और चौड़ी होती है। इंडियन आर्मी के पास बीएमपी-1 और बीएमपी-2 हैं। बीएमपी -2 अपग्रेडेड वर्जन है. recent visitors 64

मेक्सिको में मिला प्राचीन माया सभ्यता का शहर, घर और मंदिरों के 6,674 ढांचे देखकर एक्सपर्ट भी हैरान

न्यू मेक्सिको मेक्सिको में युकाटन प्रायद्वीप पर 1,500 साल पुराने माया सभ्यता के एक विशाल शहर का पता लगाया गया है। ये खोज खास तरह के लेजर सर्वे (लिडर तकनीक) के जरिए की गई है। लाइव साइंस ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि जर्नल एंटिक्विटी ने मंगलवार को इस नई रिसर्च को पब्लिश किया है। रिसर्च कहती है कि खोजे गए शहर में 6,674 स्ट्रक्चर हैं। इनमें चिचेन इट्जा और टिकाल जैसे पिरामिड शामिल हैं। शोधकर्ताओं ने 1,500 साल पुरानी साइट में अपनी खोज के लिए लिडार मैप्स का इस्तेमाल किया, जो जमीन पर लेजर पल्स शूट करके बनाए जाते हैं। लिडार तकनीक के आने के बाद से प्राचीन बस्तियों के अवशेषों की खोज में बहुत तेज वृद्धि हुई है। हालांकि यह एक तकनीक महंगी है। एरिजोना विश्वविद्यालय के पुरातत्वविद् और अध्ययन के पहले लेखक ल्यूक औल्ड-थॉमस का कहना कि उनके जैसे शुरुआती करियर वाले वैज्ञानिकों के लिए ये तकनीक सुलभ नहीं थी। थॉमस ने कहा कि इस क्षेत्र का लिडार सर्वेक्षण पहले से मौजूद होना काफी काम आया। खेतों और राजमार्गों के भीतर माया शहर के निशान थॉमस ने पहले से कमीशन किए गए लिडार अध्ययनों को खंगालकर मेक्सिको के जंगलों में कार्बन को मापने और निगरानी करने के लिए बनाए गए सर्वेक्षण का पता लगाया। उन्होंने मेक्सिको के पूर्व-मध्य कैम्पेचे में 50 वर्ग मील का विश्लेषण किया, जहां पहले कभी माया संरचनाओं की खोज नहीं की गई । इस दौरान थॉमस और उनके सहयोगियों ने खेतों और राजमार्गों के भीतर छिपे हुए माया शहर के निशान पाए। शोधकर्ताओं ने इस शहर का नाम पास के मीठे पानी के लैगून के नाम पर वेलेरियाना रखा है। ये शहर 250 से 900 ईस्वी का है। शोधकर्ताओं का कहना है कि इसमें क्लासिक माया राजधानी के सभी लक्षण दिखते हैं। इसमें एक बड़ा रास्ता, मंदिर पिरामिड और एक बॉल कोर्ट से जुड़े प्लाजा शामिल हैं। वेलेरियाना शहर के केंद्र से दूर पहाड़ी पर छतें और घर हैं, जो एक घने शहरी फैलाव का संकेत देते हैं। यह अपनी तरह की पहली रिसर्च यह पूर्व-मध्य कैम्पेचे में माया संरचनाओं को प्रकट करने वाली पहली रिसर्च है। थॉमस का कहना है कि इसके बारे में वैज्ञानिक समुदाय को पता नहीं था। उन्होंने ये भी कहा कि हमने सब कुछ नहीं पाया है। अभी और भी बहुत कुछ खोजा जाना बाकी है। शोध में अगला कदम पुरातत्वविदों के लिए साइट पर शहर की पुष्टि करना है। इस पर रिसर्चर कदम बढ़ा सकते हैं। recent visitors 51

भारत ने सऊदी अरब को पीछे छोड़ यूरोप का सबसे बड़ा रिफाइंड ईंधन आपूर्तिकर्ता बनने का गौरव हासिल किया

नई दिल्ली  भारत अपनी जरूरत की तेल का अधिकतर हिस्सा दूसरे देशों से आयात करता है। इसके बाद भी साफ तेल निर्यात करने के मामले में हमारा देश दुनिया में प्रमुख स्थान रखता है। रूस और यूक्रेन के बीच लड़ाई से बदली हुई वैश्विक परिस्थिति का असर है कि भारत सऊदी अरब को पीछे छोड़कर यूरोप का सबसे बड़ा इंधन सप्लायर बन गया है। भारत रूस से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल खरीद रहा है और इसे रिफाइन कर यूरोप के देशों को बेच रहा है। व्यापार खुफिया फर्म केप्लर के आंकड़ों के अनुसार अब भारत सऊदी अरब को पीछे छोड़ते हुए यूरोप का सबसे बड़ा रिफाइंड ईंधन आपूर्तिकर्ता बन गया है। भारत से यूरोप का तेल आयात 360,000 बैरल प्रति दिन पार कर गया है। ऐतिहासिक रूप से सऊदी अरब वैश्विक तेल आपूर्ति में प्रीमियम स्थिति रखता है। वह दुनिया के सबसे बड़े तेल उत्पादकों में शामिल है। रूस पर प्रतिबंधों के कारण तेल की कीमत बढ़ी है। इसके चलते यूरोप के देश वैकल्पिक स्रोतों की तलाश कर रहे हैं। ऐसे में भारत ने तेजी से अपनी पहुंच का विस्तार किया है। 20 लाख बैरल प्रतिदिन तक बढ़ सकता है रूस से भारत का तेल आयात रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार रूस और यूक्रेन के बीच लड़ाई शुरू होने से पहले यूरोप भारतीय रिफाइनरियों से प्रतिदिन औसतन 154,000 बैरल तेल आयात करता था। यूरोपीय संघ द्वारा 5 फरवरी को रूसी तेल पर प्रतिबंध लगाने के बाद यह आंकड़ा बढ़कर 200,000 बैरल प्रतिदिन हो गया था। केप्लर का अनुमान है कि अगले साल अप्रैल तक भारत का रूसी तेल आयात 20 लाख बैरल प्रतिदिन से अधिक हो सकता है। यह भारत के कुल तेल आयात का 44% होगा। रूस पर अमेरिका के कड़े प्रतिबंधों से भारत के लिए खुले नए दरवाजे यूक्रेन पर अटैक करने के चलते अमेरिका और उसके सहयोगी देशों ने रूसी तेल पर कड़े प्रतिबंध लगाए हैं। इससे भारत के लिए नए दरवाजे खुले हैं। भारत को रियायती दरों पर रूसी तेल प्राप्त करने में मदद मिली है। इससे भारत को 2022 और 2024 के बीच लगभग 7 बिलियन डॉलर की बचत हुई है। रूस से तेल खरीदने पर भारत अमेरिकी डॉलर के बजाय स्थानीय मुद्राओं में लेनदेन करता है। तेल निर्यात को लेकर भारत ने अपनी स्थिति मजबूत की है। इसे देख सऊदी अरब अपनी तेल उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए कदम उठा रहा है। दिसंबर में सऊदी अरब के नेतृत्व में OPEC+ ने प्रतिदिन 180,000 बैरल जोड़ने की योजना बनाई है। 2025 तक तेल उत्पादन में और वृद्धि होने का अनुमान है। recent visitors 78

भारतीय और चीनी सैनिकों की वापसी की प्रक्रिया पूरी, LAC पर दो जगहों से पीछे हटी भारत-चीन की सेना

नई दिल्ली पूर्वी लद्दाख सेक्टर के देपसांग और डेमचोक इलाकों में सैनिकों की वापसी की प्रक्रिया लगभग पूरी हो चुकी है। भारत और चीन की सेनाएं एक-दूसरे की तरफ से वहां जगह खाली करने और बुनियादी ढांचे को हटाने के लिए  वेरिफिकेशन कर रही हैं। रक्षा सूत्र ने इसकी जानकारी दी है। बता दें कि देपसांग और डेमचोक में भारतीय और चीनी सैनिकों की वापसी की प्रक्रिया मंगलवार को पूरी होने की उम्मीद है। सेना के सूत्रों ने बताया है, दोनों सेनाएं अब उन क्षेत्रों में गश्त शुरू करेंगी, जहां वे अप्रैल 2020 में गतिरोध शुरू होने के बाद नहीं पहुंच पाए थे। चीन के साथ भारत ने बनाई सहमति भारत ने 21 अक्टूबर, 2024 को एलान किया था कि पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर पैट्रोलिंग को लेकर चार साल से अधिक समय से बने सैन्य गतिरोध को समाप्त करने के लिए चीन के साथ एक समझौते पर सहमति बनी है। इसके बाद विदेश मंत्री एस जयशंकर का भी बयान सामने आया था, उन्होंने कहा, दोनों देशों के बीच विश्वास बनाने में समय लगेगा, लेकिन सैनिकों की वापसी महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि दो महत्वपूर्ण बिंदुओं पर सैन्य वापसी पहला कदम है, और तनाव को कम करना अगला कदम है। ग्राउंड कमांडरों की बैठकें रोजाना होंगी दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संबंधों को बेहतर बनाने के लिए भारत और चीन 29 अक्टूबर तक वास्तविक नियंत्रण रेखा के पार सैन्य वापसी की प्रक्रिया पूरी कर लेंगे।सूत्रों ने कहा, "नियमित ग्राउंड कमांडरों की बैठकें होती रहेंगी। गश्त में शामिल सैनिकों की ताकत की पहचान की गई है और किसी भी गलत संचार से बचने के लिए जब हम गश्त करने जा रहे हैं तो एक-दूसरे को सूचित करें। शेड या तंबू, सैनिकों जैसे सभी अस्थायी बुनियादी ढांचे को हटा दिया जाएगा। दोनों पक्ष इस क्षेत्र पर निगरानी रखेंगे। देपसांग और डेमचोक में गश्त बिंदु वे बिंदु होंगे जहां हम अप्रैल 2020 से पहले पारंपरिक रूप से गश्त कर रहे थे।'' recent visitors 74

सुप्रीम कोर्ट ने कहा- किसी करीबी रिश्तेदार को दिए गए मौखिक बयान को दोषसिद्धि का आधार नहीं बनाया जा सकता

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसला सुनाते हुए कहा कि मरने से पहले किसी करीबी रिश्तेदार को दिए गए मौखिक बयान को दोषसिद्धि का आधार नहीं बनाया जा सकता। कोर्ट ने इस प्रकार के बयानों पर गंभीरता से परीक्षण की जरूरत पर बल देते हुए मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के फैसले पर मुहर लगा दी है, जिसमें तीनों आरोपियों को बरी किया गया था। यह मामला एक अक्टूबर 1996 का है, जब नसीम खान की हत्या के आरोप में रमजान खान, मुसफ खान और हबीब खान को मध्यप्रदेश के सेशन कोर्ट ने दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। मामले में मृतक की मां ने ट्रायल कोर्ट में बयान दिया था कि मरने से पहले उसके बेटे ने आरोपियों के नाम बताए थे, और इसी बयान को ट्रायल कोर्ट ने दोषसिद्धि का आधार बनाया था। हाईकोर्ट ने निचली कोर्ट के फैसले को खारिज करते हुए सभी आरोपियों को संदेह का लाभ दिया, जिसके बाद मध्यप्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की। सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस सीटी रविकुमार की अगुवाई वाली पीठ ने कहा कि मरने से पहले दिया गया मौखिक बयान अकेले पुख्ता साक्ष्य नहीं हो सकता, खासकर जब उसमें विरोधाभास हो और अन्य प्रमाण कमजोर हों। कोर्ट ने कहा कि संदेह का लाभ देते हुए आरोपियों को रिहा किया जाना चाहिए। इस फैसले को कानूनी मामलों में एक नजीर के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें कोर्ट ने साफ कर दिया है कि मृत्यु से पहले दिए गए बयान की विश्वसनीयता और प्रमाणिकता का गहराई से परीक्षण किया जाना चाहिए।   recent visitors 79

पीएम मोदी ने AAP सरकार पर साधा निशाना, दिल्ली के बुजुर्गों से माफी मांगी, कहा-अपने ही लोगों पर जुल्म, मेरे दिल में कितना दर्द

नई दिल्ली देश में 70 साल या इससे अधिक उम्र के सभी बुजुर्गों को अब 5 लाख रुपए तक का मुफ्त इलाज मिल सकेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को आयुष्मान योजना को विस्तार देते हुए यू-विन पोर्टल की शुरुआत की। इस दौरान उन्होंने दिल्ली की आम आदमी पार्टी सरकार पर निशाना साधते हुए राजधानी के बुजुर्गों से माफी मांगी। पीएम मोदी ने कहा कि वह उनकी मदद नहीं कर पाएंगे क्योंकि दिल्ली और पश्चिम बंगाल की सरकार ने इस योजना को लागू नहीं किया है। पीएम मोदी ने कहा कि राजनीतिक स्वार्थ की वजह से दिल्ली और पश्चिम बंगाल की सरकारों ने योजनाओं को लागू नहीं किया है और इस वजह से वह दोनों राज्यों के बुजुर्गों के कष्ट को जानते हुए भी मदद नहीं कर पा रहे हैं। पीएम ने कहा, 'मैं दिल्ली के 70 साल के जितने बुजुर्ग हैं उनसे क्षमा मांगता हूं कि मैं आपकी सेवा नहीं कर पाऊंगा। मैं उनसे क्षमा मांगता हूं कि मुझे पता तो चलेगा कि आपको कष्ट है। मुझे जानकारी तो मिलेगी लेकिन मैं सहायता नहीं कर पाऊंगा। कारण दिल्ली और पश्चिम बंगाल में जो सरकार है वह इस आयुष्मान योजना से नहीं जुड़ रही है।' पीएम ने कहा कि राजनीतिक स्वार्थ के लिए अपने ही राज्य के बीमार लोगों के साथ जुल्म करने की यह प्रवृत्ति मानवता की दृष्टि से किसी भी तराजू पर खरी नहीं उतरती। उन्होंने कहा कि उनके दिल में जो दर्द है उसको वह शब्दों में बयां नहीं कर सकते। पीएम ने कहा, 'देशवासियों की तो सेवा कर पा रहा हूं लेकिन राजनीतिक स्वार्थ की दीवारें मुझे दिल्ली, पश्चिम बंगाल के बुजुर्गों की सेवा करने से रोक रही हैं। मैं राजनीतिक पहलू से नहीं बोल रहा हूं, भीतर एक दर्द होता है जिस दिल्ली से मैं बोल रहा हूं, दिल्ली के बुजुर्ग मेरी बात सुनते होंगे, मेरे दिल में कितना दर्द होता होगा, मैं शब्दों में बयां नहीं कर पाऊंगा।' recent visitors 71

जो बाइडेन ने व्हाइट हाउस में एक भव्य दिवाली समारोह का आयोजन किया, उत्साह के साथ मनाई दिवाली

वाशिंगटन अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने व्हाइट हाउस में एक भव्य दिवाली समारोह का आयोजन किया। इस अवसर पर राष्ट्रपति ने एक दीया जलाकर समारोह की शुरुआत की, जो इस पावन पर्व का एक महत्वपूर्ण प्रतीक है। इस कार्यक्रम में भारतीय मूल के 600 से अधिक अमेरिकी नागरिकों ने भाग लिया, जिसमें सांसदों, वरिष्ठ अधिकारियों और समुदाय के विभिन्न सदस्यों की उपस्थिति रही। राष्ट्रपति बाइडेन का भाषण राष्ट्रपति बाइडेन ने समारोह के दौरान उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा, "यह मेरे लिए एक बड़ा सम्मान है कि राष्ट्रपति के रूप में मुझे व्हाइट हाउस में दिवाली कार्यक्रम की मेज़बानी करने का अवसर मिला।" उन्होंने यह भी बताया कि कैसे दक्षिण-एशियाई अमेरिकी समुदाय ने अमेरिकी जीवन के हर क्षेत्र को समृद्ध किया है। बाइडेन ने इस समुदाय की भूमिका को स्वीकार करते हुए कहा कि यह दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ने वाला समुदाय है और अब दिवाली गर्व से व्हाइट हाउस में मनाई जाती है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि दक्षिण एशियाई समुदाय ने न केवल अमेरिका की सांस्कृतिक विविधता को बढ़ाया है, बल्कि यह देश के सामाजिक और आर्थिक जीवन में भी एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। बाइडेन का यह संदेश अमेरिका की समग्रता और विविधता को सम्मानित करने का प्रतीक है। उपराष्ट्रपति और फर्स्ट लेडी की अनुपस्थिति हालांकि, इस विशेष समारोह में उपराष्ट्रपति कमला हैरिस और फर्स्ट लेडी जिल बाइडेन शामिल नहीं हो सकीं। राष्ट्रपति ने बताया कि फर्स्ट लेडी जिल बाइडेन विस्कॉन्सिन की यात्रा पर हैं, जहां वह कुछ महत्वपूर्ण कार्यों में व्यस्त थीं। वहीं, कमला हैरिस अपने चुनावी अभियान में भाग ले रही थीं। बाइडेन ने कहा, "मैंने कई कारणों से कमला को अपने साथी के रूप में चुना है। वह न केवल स्मार्ट हैं, बल्कि उन पर भरोसा भी किया जा सकता है।" यह अनुपस्थिति कई लोगों के लिए आश्चर्यजनक थी, क्योंकि दिवाली समारोह एक ऐसा अवसर है जब लोग एक साथ मिलकर अपने सांस्कृतिक मूल्यों को मनाते हैं। लेकिन राष्ट्रपति का इस बारे में खुलकर बात करना दर्शाता है कि वे अपनी टीम के प्रति कितने समर्पित हैं। व्हाइट हाउस में दिवाली की परंपरा व्हाइट हाउस में दिवाली मनाने की परंपरा की शुरुआत 2003 में तत्कालीन राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश द्वारा की गई थी। हालांकि, बुश ने कभी भी इस समारोह में व्यक्तिगत रूप से भाग नहीं लिया। इसके बाद 2009 में राष्ट्रपति बराक ओबामा ने इस परंपरा को आगे बढ़ाया और व्हाइट हाउस में पहली बार दीया जलाया। उन्होंने इस दौरान भारतीय संस्कृति और परंपराओं की सराहना की। 2017 में, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी इस परंपरा को जारी रखा, लेकिन राष्ट्रपति बाइडेन के तहत 2022 में व्हाइट हाउस में अब तक की सबसे बड़ी दिवाली पार्टी आयोजित की गई थी, जिसमें 200 से अधिक मेहमानों को आमंत्रित किया गया था। इस प्रकार, बाइडेन ने व्हाइट हाउस में दीवाली मनाने की परंपरा को एक नया आयाम दिया।   अमेरिकी भारतीय समुदाय का उत्सव इस वर्ष, उपराष्ट्रपति कमला हैरिस ने अपने आधिकारिक आवास पर दिवाली पार्टी का आयोजन किया, जिससे यह पता चलता है कि अमेरिकी सरकार भारतीय संस्कृति को कितनी गंभीरता से लेती है। इसके साथ ही, अमेरिका में भारतीय मूल के प्रवासी लोगों ने भी जोर-शोर से दिवाली मनाई। न्यूयॉर्क से लेकर सैन फ्रांसिस्को, ओहायो, न्यूजर्सी और कैलिफोर्निया तक, हर जगह दीवाली के रंग बिखरे हुए थे। अमेरिका के विभिन्न हिंदू मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना की गई, जिसमें भजन-कीर्तन और मंत्रोच्चारण किए गए। यह समुदाय के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर था, जिसमें लोग एकत्र होकर अपनी संस्कृति और परंपराओं का सम्मान कर सके। इस दिवाली समारोह ने न केवल भारतीय संस्कृति को प्रदर्शित किया, बल्कि यह अमेरिका में विविधता और सहिष्णुता का भी प्रतीक बन गया। राष्ट्रपति बाइडेन का व्हाइट हाउस में दीया जलाना इस बात का संकेत है कि अमेरिका में विभिन्न संस्कृतियों को कितना महत्व दिया जाता है। उनके द्वारा दिए गए संदेश से यह स्पष्ट होता है कि हर समुदाय को सम्मानित किया जाना चाहिए और उनकी परंपराओं का स्वागत किया जाना चाहिए। इस आयोजन ने यह भी दर्शाया कि कैसे भारतीय मूल के अमेरिकियों ने अमेरिका के सामाजिक और सांस्कृतिक ताने-बाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। यह एक ऐसा अवसर है जब सभी लोग एक साथ मिलकर अपने सामूहिक उत्सवों को मनाते हैं और एक दूसरे के प्रति सम्मान और प्यार का प्रदर्शन करते हैं। recent visitors 56