केंद्रीय मंत्री गडकरी ने भोपाल दौरे पर की थी ऐतिहासिक घोषणा, प्रदेश में आधारभूत संरचना का तेज़ी से होगा विस्तार

मध्यप्रदेश को मिला 20,000 करोड़ रुपये की सड़क निर्माण परियोजनाओं का उपहार केंद्रीय मंत्री गडकरी ने भोपाल दौरे पर की थी ऐतिहासिक घोषणा प्रदेश में आधारभूत संरचना का तेज़ी से होगा विस्तार मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में विकास की नई ऊँचाइयों की ओर अग्रसर मध्यप्रदेश भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के कुशल नेतृत्व में मध्य प्रदेश लगातार विकास की नई ऊँचाइयाँ छू रहा है। उनके विजन के अनुरूप राज्य में इंफ्रास्ट्रक्चर का तेज़ी से विकास हो रहा है, जो प्रदेश के समग्र उत्थान में सहायक सिद्ध हो रहा है। मध्यप्रदेश की आधारभूत संरचना को सुदृढ़ और आधुनिक बनाने के उद्देश्य से केंद्रीय भूतल एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने 19 अक्टूबर को भोपाल में हुए सेमिनार में की गई घोषणा अनुसार प्रदेश को 20,000 करोड़ रुपये से अधिक की सड़क निर्माण योजनाओं की स्वीकृति प्रदान कर दी है। इन परियोजनाओं को शीघ्र धरातल पर उतारने के लिए कार्यवाही तेज़ी से की जा रही है। आने वाले दिनों में लगभग 20 हज़ार 403 करोड़ की लागत से प्रारंभ होने वाली 27 परियोजनाओं से प्रदेश के मार्गों और सड़कों का विस्तार होगा, जिससे यातायात सुगम बनेगा साथ ही सड़क सुरक्षा में अभूतपूर्व सुधार आएगा। लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने केंद्रीय मंत्री गडकरी और मुख्यमंत्री डॉ. यादव का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह सौगात प्रदेश के लिए एक बड़ी उपलब्धि है, जो राज्य के इंफ्रास्ट्रक्चर विकास को नई दिशा प्रदान करेगी। राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में सड़क निर्माण कार्य शुरू होंगे, जिससे यातायात में सुधार के साथ आर्थिक और सामाजिक प्रगति के नये आयाम स्थापित होंगे। इन महत्वाकांक्षी परियोजनाओं से मध्यप्रदेश में विकास की रफ्तार बढ़ेगी और राज्य के नागरिकों के लिए सफर पहले से अधिक सुगम और सुरक्षित होगा। एनएचएआई के अंतर्गत प्रस्तावित परियोजनाएँ:     बैतूल-खंडवा सेक्शन (एनएच-347बी): बेतूल से मोहदा (90 कि.मी.) और मोहदा से बाराकुंड तक 2-लेन प्लस पावर्ड सेक्शन का निर्माण किया जाएगा, जिसकी लागत 1,200 करोड़ रुपये है।     देशगांव-खरगोन सेक्शन (एनएच-347बी): 65 कि.मी. लंबी इस सड़क को 4 लेन में परिवर्तित करने के लिए 1,700 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है।     खरगोन-बड़वानी सेक्शन (एनएच-347बी): 35 कि.मी. की इस परियोजना में 1,000 करोड़ रुपये का प्रावधान है।     बरेठा घाट (एनएच-46): इटारसी-बैतूल सेक्शन में टाइगर कॉरिडोर के इस 20 कि.मी. हिस्से को 4-लेन में परिवर्तित किया जाएगा, जिसकी लागत 550 करोड़ रुपये है।     सलकनपुर-नसरुल्लागंज-बुधनी-बाड़ी स्ट्रेच: इस 41 कि.मी. लंबे हिस्से की लागत 650 करोड़ रुपये निर्धारित की गई है।     झाबुआ-रायपुरिया-पेटलावद सेक्शन: 50 कि.मी. लंबाई की इस परियोजना के लिए 650 करोड़ रुपये का प्रावधान है।     बेतूल-खंडवा पैकेज-4 (एनएच-347बी): यह 33 कि.मी. लंबी परियोजना 381 करोड़ रुपये में पूरी होगी।     सागर-कानपुर (पैकेज-3): सतिया घाट से अंगोर गाँव तक 55 कि.मी. की यह सड़क 1,006 करोड़ रुपये में बनेगी।     सागर-कानपुर (पैकेज-4): अंगोर गाँव से एमपी/यूपी सीमा तक के 44 कि.मी. हिस्से की लागत 996 करोड़ रुपये है।     ग्वालियर सिटी बायपास: पश्चिमी क्षेत्र में 29 कि.मी. लंबे इस बायपास पर 1,005 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।     ओरछा-झांसी ग्रीनफील्ड हाईवे लिंक: NH-26 को एनएच-76 से जोड़ने वाले इस लिंक की लंबाई 14 कि.मी. होगी और इसकी लागत 491 करोड़ रुपये है।     सागर बायपास (सागर लिंक रोड-02): इस 26 कि.मी. लंबे बाईपास की लागत 756 करोड़ रुपये है।     जबलपुर-दमोह (पैकेज-1 और 3): जबलपुर से दमोह तक 80 कि.मी. लंबी इस परियोजना पर 1,773 करोड़ रुपये का व्यय होगा।     रीवा-सीधी सेक्शन (एनएच-39): 30 कि.मी. लंबे इस सेक्शन पर 1,500 करोड़ रुपये का व्यय होगा। एनएचएआई के तहत कुल 612 कि.मी. लंबाई की परियोजनाओं का अनुमानित बजट 13,658 करोड़ रुपये है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के अंतर्गत प्रस्तावित परियोजनाएँ:     मंडला बायपास से नैनपुर बायपास (एनएच-543): इस 46 कि.मी. लंबे खंड की लागत 642 करोड़ रुपये का व्यय होगा।     सेंधवा-खेतिया (एनएच-752जी): इस 57 कि.मी. लंबे हिस्से के लिए 725 करोड़ रुपये का व्यय होगा।     टिकमगढ़-ओरछा (एनएच-539): 75 कि.मी. की यह परियोजना 926 करोड़ रुपये का व्यय होगा।     शाहगढ़-टीकमगढ़ (NH-539): इस 80.1 कि.मी. लंबी सड़क की लागत 951 करोड़ रुपये का व्यय होगा।     अंजड़-बड़वानी (एनएच-347बी): 20.25 कि.मी. लंबाई की इस परियोजना पर 250 करोड़ रुपये का व्यय होगा।     चंदेरी-पिछोरे (एनएच-346): इस 55.15 कि.मी. लंबे हिस्से पर 452 करोड़ रुपये का व्यय होगा, जिसमें तीन ग्रीनफील्ड बाईपास भी शामिल हैं।     सिरमौर-डभोरा (एनएच-135बी): 38.29 कि.मी. लंबाई की इस सड़क का बजट 300 करोड़ रुपये का व्यय होगा।     पवई-सलेहा-जसो-नागौद (एनएच-943): इस 12.49 कि.मी. लंबे हिस्से के शेष कार्य पर 56 करोड़ रुपये खर्च होंगे।     बैतूल-परतवाड़ा (एनएच-548सी): 62.16 कि.मी. की इस सड़क के लिए 580 करोड़ रुपये का प्रावधान है।     नैनपुर बायपास से बालाघाट बायपास (एनएच-543): इस 74.35 कि.मी. लंबे खंड पर 860 करोड़ रुपये की लागत आएगी।     लोनिया (मध्यप्रदेश /महाराष्ट्र सीमा) से बुरहानपुर(एनएच-347सी): 8.8 कि.मी. की इस परियोजना पर 100 करोड़ रुपये खर्च होंगे।     सिंगरौली-चित्रंगी-बगदरा (एनएच-135सी): 70.1 कि.मी. लंबी इस सड़क की लागत 903 करोड़ रुपये है।     सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के तहत कुल 616 कि.मी. लंबाई की परियोजनाओं का अनुमानित बजट 6,745 करोड़ रुपये है। स्वीकृत परियोजनाएँ     वित्तीय वर्ष 2024-25 में पहले से स्वीकृत परियोजनाएँ जो प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में प्रगतिरत है।     अयोध्या नगर बायपास (NH-46 से NH-146): 16 कि.मी. लंबे इस बायपास की लागत 1,219 करोड़ रुपये है।     ग्यारसपुर-राहतगढ़ (NH-146): 36 कि.मी. लंबाई की इस परियोजना पर 620 करोड़ रुपये का खर्च होगा।     राहतगढ़-बरखेड़ी (NH-146): 11 कि.मी. की यह परियोजना 450 करोड़ रुपये में पूरी होगी।     विदिशा-भोपाल (NH-146): 52 कि.मी. लंबाई की इस सड़क पर 1,096 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।     विदिशा-ग्यारसपुर (NH-146): इस 32 कि.मी. लंबी परियोजना की लागत 543 करोड़ रुपये है।     जबलपुर रिंग रोड (पैकेज-5): 18 कि.मी. लंबाई की इस रिंग रोड के लिए 620 करोड़ रुपये का बजट है।     आगरा-ग्वालियर ग्रीनफील्ड: इस 88 कि.मी. लंबे हाईवे की लागत 4,821 करोड़ रुपये है।     प्रदेश मे केन्द्र स्वीकृत परियोजनाओं के तहत 9,369 करोड़ रुपये के विभिन्न सड़क निर्माण कार्य प्रगतिरत है।   recent visitors 61

मुकेश अंबानी तेल के बिजनस में बड़ा फेरबदल करने की तैयारी में, रिलायंस ने कच्चे तेल के लिए रूस से लॉन्ग-टर्म एग्रीमेंट किया

नई दिल्ली देश की सबसे वैल्यूएबल कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज तेल के बिजनस में बड़ा फेरबदल करने की तैयारी में है। रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक रिलायंस इंडस्ट्रीज अपने ट्रेडिंग ऑपरेशंस का पुनर्गठन कर रही है। इसमें दुबई से क्रूड ऑयल ट्रेडिंग टीम को वापस बुलाना शामिल है। रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से यह दावा किया गया है। रिलायंस जामनगर में दुनिया का सबसे बड़ा रिफाइनिंग कॉम्प्लेक्स चलाती है। उसकी योजना इस साल के अंत तक दुबई से अपनी क्रूड ट्रेडिंग टीम को वापस बुलाने की है। सूत्रों का कहना है कि रिलायंस ने कच्चे तेल की सप्लाई के लिए रूस के साथ लॉन्ग-टर्म एग्रीमेंट किया है। इससे स्पॉट कार्गो खरीदने की जरूरत कम हो गई है। एक सूत्र ने कहा कि रिलायंस की अब रूस के साथ क्रूड इम्पोर्ट डील हो गई है। साथ ही उसकी मिडिल ईस्ट के बड़े प्रॉड्यूसर देशों के साथ भी डील है। इसलिए दुबई में स्टाफ पर ज्यादा खर्च करने का कोई मतलब नहीं रह गया है। इस बारे में रिलायंस ने ईमेल का जवाब नहीं दिया। 2021 में रिलायंस ने ऑयल और रिफाइंड फ्यूल की ट्रेडिंग के लिए यूएई में एक ऑफिस खोलने की घोषणा की थी। इसके एक साल बाद मुकेश अंबानी की कंपनी ने अपनी क्रूड ट्रेडिंग टीम को दुबई भेजा था। यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद दुबई रूसी तेल के व्यापार का हब बनकर उभरा था। जामनगर रिफाइनरी रिलायंस अपनी जरूरत का 40% कच्चा तेल रूस से आयात करती है। जामनगर में रिलायंस की रिफाइनरी में रोजाना 14 लाख बैरल तेल को प्रोसेस किया जा सकता है। सूत्रों के मुताबिक रिलायंस के दुबई ऑफिस में करीब 20 ट्रेडर्स हैं। सूत्रों ने कहा कि तीन-चार को छोड़कर बाकी सबको मुंबई बुला लिया जाएगा। बाकी लोगों को भी धीरे-धीरे मुंबई हेडक्वार्टर वापस लाया जाएगा। कंपनी ने पहले ही इस बारे में दुबई के ट्रेडर्स को बता दिया है। लेकिन कंपनी अपनी प्रॉडक्ट ट्रेडिंग टीम को लंबे समय तक दुबई में बनाए रखना चाहती है। रिलायंस का दुबई के अलावा ह्यूस्टन और लंदन में भी ट्रेडिंग ऑफिस है। कंपनी लंदन में अपनी टीम को बढ़ाना चाहती है। पिछली तिमाही में रिलायंस ने अपने पेट्रोकेमिकल ट्रेडि को दुबई से मलेशिया ट्रांसफर कर दिया था। मलेशिया में उसकी प्रॉडक्शन फैसिलिटीज हैं। रिलायंस की मलेशिया में दो कंपनियां हैं। इनमें इंटिग्रेटेड पॉलिस्टर और टेक्सटाइल कंपनी रेक्रॉन और आरपी केमिकल्स शामिल हैं। recent visitors 69

एक करोड़ 28 लाख 56 हजार पात्र परिवारों को वितरण प्रणाली से खाद्यान्‍न का वितरण किया जा रहा : खाद्य मंत्री राजपूत

भोपाल खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविन्द सिंह राजपूत ने बताया है कि मध्‍यप्रदेश शासन द्वारा खाद्य सुरक्षा अधिनियम के अंतर्गत सम्मिलित एक करोड़ 28 लाख 56 हजार पात्र परिवारों को लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत संचालित उचित मूल्‍य दुकानों के माध्‍यम से खाद्यान्‍न का वितरण किया जा रहा है। इसमें अंत्‍योदय श्रेणी एवं प्राथमिकता श्रेणी के पात्र परिवारों को गेंहू, चावल का प्रतिमाह वितरण किया जाता है। माह अक्‍टूबर 2024 से गेंहू एवं चावल के अनुपात में परिवर्तन कर हितग्राहियों को खाद्यान्न वितरण कराया गया है। जिलों को माह नवम्‍बर 2024 के लिये खाद्यान्न का आवंटन जारी कर दिया गया है। पूर्व में प्रदेश को केन्द्र सरकार से गेहूं एवं चावल 40:60 के अनुपात में प्राप्त हो रहा था। वर्तमान में गेहूँ एवं चावल का आवंटन 60:40 अनुपात से प्राप्त हो रहा है। इसी अनुपात में सार्वजनिक वितरण प्रणाली अंतर्गत उचित मूल्‍य दुकानों से पीओएस मशीन के माध्‍यम से पात्र श्रेणियों के हितग्राहियों को खाद्यान्न वितरित भी किया जा रहा है। अंत्योदय श्रेणी के पात्र परिवार को 35 किग्रा (गेंहू एवं चावल) तथा प्राथमिकता श्रेणी के परिवार को प्रति सदस्य, 5 किग्रा के मान से गेहॅू एवं चावल का वितरण किया जा रहा है। अंत्‍योदय श्रेणी में जिले आगर-मालवा, अलीराजपुर, बडवानी, भोपाल, बुरहानपुर, छतरपुर, दमोह, देवास, धार, इंदौर, झाबुआ, खण्‍डवा, खरगौन, मंदसौर, नीमच, निवाड़ी, पन्‍ना, रायसेन, राजगढ़, रतलाम, सागर, सीहोर, शाजापुर, टीकमगढ़, उज्‍जैन, विदिशा जिलों में 24 किलोग्राम गेहूँ और 11 किलोग्राम चावल, अशोकनगर, बैतूल, भिंड, दतिया, गुना, ग्‍वालियर, हरदा, मैहर, मउगंज, मुरैना, नर्मदापुरम, रीवा, सतना, शिवपुरी, सीधी, सिंगरौली जिलों में 21 किलोग्राम गेहूँ और 14 किलोग्राम चावल, श्‍योपुर में 22 किलोग्राम गेहूँ और 13 किलोग्राम चावल, डिंडोरी, मंडला, सिवनी में 15 किलोग्राम गेहूँ और 20 किलोग्राम चावल, छिंदवाडा, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, पांढुर्णा में 20 किलोग्राम गेहूँ और 15 किलोग्राम चावल, अनूपपुर, बालाघाट, शहडोल, उमारिया में 14 किलोग्राम गेहूँ और 21 किलोग्राम चावल के अनुपात में वितरण किया जायेगा। प्राथमिकता श्रेणी अंतर्गत जिले अलीराजपुर, बडवानी, भोपाल, बुरहानपुर, छतरपुर, दमोह, धार, इंदौर, झाबुआ, खण्‍डवा, खरगौन, निवाडी, पन्‍ना, रायसेन, राजगढ, सागर, सीहोर, टीकमगढ, विदिशा, अशोकनगर, बैतूल, भिंड, दतिया, गुना, ग्‍वालियर, हरदा, मैहर, मउगंज, मुरैना, नर्मदापुरम, रीवा, सतना, शिवपुरी, सीधी, सिंगरौली, श्‍योपुर, छिंदवाडा, जबलपुर, नरसिंहपुर, पांढुर्णा जिलों में 03 किलोग्राम गेहूँ और 02 किलोग्राम चावल, आगर-मालवा, देवास, मंदसौर, नीमच, रतलाम, शाजापुर, उज्‍जैन, में 04 किलोग्राम गेहूँ और 01 किलोग्राम चावल, अनूपपुर, बालाघाट, डिंडोरी, कटनी, मंडला, सिवनी, शहडोल, उमारिया, में 02 किलोग्राम गेहूँ और 03 किलोग्राम चावल के अनुपात में वितरण किया जायेगा।   recent visitors 74

चीतों के लिए गांधीसागर बाड़े में छोड़े गए 434 चित्तीदार हिरण, जिनमें 120 नर और 314 मादा

मंदसौर मध्य प्रदेश के गांधीसागर अभयारण्य में चीतों को बसाने से पहले शिकार का इंतजाम कर दिया गया है. फॉरेस्ट सेंचुरी में 28 चीतल छोड़े गए हैं. श्योपुर जिले के कूनो नेशनल पार्क के बाद गांधीसागर अभयारण्य चीतों का अब दूसरा घर बन जाएगा. वन विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि चीतों के शिकार की संख्या बढ़ाने के प्रयासों के तहत 1250 चित्तीदार हिरण (चीतल) गांधीसागर अभयारण्य में छोड़ा जाएगा. फिलहाल कान्हा नेशनल पार्क से 18 नर और 10 मादा चीतल लाए गए और उन्हें गांधीसागर के बाड़े वाले क्षेत्र में छोड़ा गया.  इसके साथ ही अब तक गांधीसागर में 434 चित्तीदार हिरण छोड़े जा चुके हैं, जिनमें 120 नर और 314 मादा हैं. मध्य प्रदेश में चीतों के दूसरे घर को देखने के लिए केन्या का एक प्रतिनिधिमंडल भी आया था. उसने इसी साल 21 और 22 मई को मंदसौर और नीमच जिलों में फैले गांधीसागर अभयारण्य का दौरा किया था. बता दें कि साल 1952 में भारत से विलुप्त घोषित किए गए चीतों को महत्वाकांक्षी पुनर्स्थापन योजना के तहत सितंबर 2022 और फरवरी 2023 में नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका से कूनो नेशनल पार्क में लाया गया था. वर्तमान में कूनो नेशनल पार्क में शावकों सहित 24 चीते हैं. 1952 में भारत से विलुप्त घोषित किए गए चीतों को महत्वाकांक्षी रीइंट्रोडक्शन प्लान के तहत सितंबर 2022 और फरवरी 2023 में नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका से कुनो राष्ट्रीय उद्यान में लाया गया. भारत में हैं अभी 24 चीते बता दें कि, सितंबर 2022 में नामीबिया और साउथ अफ्रीका से 20 चीते भारत में लाए गए थे. जिन्हें मध्य प्रदेश के कूनो वन अभ्यारण्य में चीता प्रोजेक्ट के तहत रखा गया था. जैसा कि योजना थी भारत में चीता शावकों का जन्म भी हुआ, लेकिन इस बीच भारत में जन्में 6 चीता शावकों और 2 चीतों की मौत हो चुकी है, लेकिन अब भी भारत में चीतों की संख्या 24 है. तीन अभयारण्यों से होगी भोजन की व्यवस्था चीतों को गांधीसागर अभयारण्य में छोडऩे से पहले उनके खाने की व्यवस्था की जा रही है। वन विभाग के अनुसार यहां 1000 चीतल और 400 काले हिरण छोड़े जाएंगे। 500 चीतल कान्हा, 250 वनविहार भोपाल, 250 नरसिंहगढ़ के चिडिख़ो अभयारण्य से लाए जाएंगे। 400 काले हिरण शाजापुर से लाकर छोड़े जाएंगे। गांधीसागर में चीतल छोड़ने का काम तो शुरु भी हो गया है। सोमवार को यहां कान्हा रिजर्व से लाई गईं 23 चितल छोड़ी गई। अभी यहां 961 चीतल आना शेष है। recent visitors 68

अंतरिक्ष में संचार उपग्रह अचानक बम की तरह हुआ ब्लास्ट, टुकड़े-टुकड़े होकर मलबा अंतरिक्ष में बिखरा

नई दिल्ली अंतरिक्ष में एक संचार उपग्रह 19 अक्टूबर को अचानक बम की तरह ब्लास्ट कर गया। टुकड़े-टुकड़े होकर उसका मलबा अंतरिक्ष में बिखर गया। जिस सर्विस प्रोवाइडर की कम्यूनिकेशन सैटलाइट थी, उसके कस्टमर अफ्रीका, यूरोप और एशिया-प्रशांत के कुछ हिस्सों में हैं जहां इंटरनेट सर्विस भी प्रभावित हुई है। एक कम्यूनिकेशन सैटलाइट की उम्र 15-20 वर्ष मानी जाती है लेकिन ये सिर्फ 7 साल में खाक हो गई। आखिर ऐसा क्यों हुआ? एक्सपर्ट भी सिर खुजा रहे हैं, जवाब तलाशने में लगे हैं। अंतरिक्ष में सैटलाइट का मलबा फैलने के बाद अन्य उपग्रहों के लिए भी खतरा पैदा हो गया है। सैटलाइट का नाम था इंटेलसैट 33E और इसका संचालन अमेरिकी कंपनी इंटेलसैट कर रही थी। कंपनी ने इसे 'टोटल लॉस' करार दिया है। सैटलाइट को बोइंग ने बनाया था। यूएस स्पेस फोर्स ने भी सैटलाइट में विस्फोट की पुष्टि की है। उसने बताया कि 19 अक्टूबर 2024 को इंटेलसैट 33E (#41748, 2016-053B) टूट गया। अभी तक इसके लगभग 20 टुकड़े देखे गए हैं और आगे की जांच जारी है। स्पेस फोर्स के मुताबिक फिलहाल तो कोई खतरा नहीं है। लेकिन, वे अंतरिक्ष में सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए इन टुकड़ों पर नजर बनाए हुए हैं। हालांकि, एक स्विस ट्रैकिंग कंपनी एस2ए सिस्टम्स का कहना है कि उसने 21 अक्टूबर को सैटलाइट के 40 टुकड़ों को देखा है। एक और ट्रैकिंग कंपनी एक्सो ऐनालिटिक सलूशंस ने उसी दिन सैटलाइट के 57 टुकड़े देखने का दावा किया है। ये ट्रैकिंग कंपनी अमेरिका की है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, अंतरिक्ष में ये टुकड़े अन्य सैटलाइट के लिए खतरा बन सकते हैं। इंटेलसैट, जो इस उपग्रह का संचालन करती है, ने भी इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि यह काम करना बंद कर चुका है और पूरी तरह से नष्ट हो चुका है। इंटेलसेट ने कहा, 'हम उपग्रह निर्माता बोइंग और सरकारी एजेंसियों के साथ मिलकर डेटा और अवलोकनों का विश्लेषण कर रहे हैं।' इस घटना के कारणों का पता लगाने के लिए एक बोर्ड का गठन किया जा रहा है। इंटेलसेट 33E, बोइंग द्वारा बनाया गया था और 2016 में लॉन्च किया गया था। यह 2017 से सेवा में था। आम तौर पर कम्यूनिकेशन सैटलाइट्स की उम्र 15 से 20 साल तक की होती है। लेकिन 33E महज 7 साल तक सेवा देने के बाद नष्ट हो गई। बोइंग पहले से ही मुश्किलों का सामना कर रहा है। इसका स्टारलाइनर अंतरिक्ष यान, जिसे अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन तक अंतरिक्ष यात्रियों को ले जाने के लिए बनाया गया था, कई तकनीकी समस्याओं से जूझ रहा है। हाल ही में, इसके स्टारलाइनर यान में खराबी के कारण दो अंतरिक्ष यात्री, सुनीता विलियम्स और बैरी विल्मोर ISS पर फंस गए हैं। उन्हें फरवरी में स्पेसएक्स ड्रैगन अंतरिक्ष यान से वापस लाया जाएगा। recent visitors 116

अब जमीन से ही रूस-चीन की सैटेलाइट जाम हो जाएगी, अमेरिका ने बनाया घातक सैटेलाइट जैमर, डिलीवरी जल्द शुरू होगी

वॉशिंगटन  चीन और रूस की सैटेलाइट को युद्ध के दौरान जाम करने के लिए बनाए गए हथियार की तकनीकी खामियों को दूर कर लिया गया है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी स्पेस फोर्स ने इसकी घोषणा की है। निर्धारित समय से दो साल की देरी के बाद इसकी डिलीवरी की उम्मीद जताई जा रही है। L3Harris टेक्नोलॉजीस सिस्टम एक काउंटर कम्युनिकेशन सिस्टम का हल्के वजन वाला और लाने ले जाने में आसान वर्जन है। इसे मीडोलैंड्स के नाम से जाना जाता है। साल 2020 में इसे चालू घोषित किया गया था। नया मॉडल अपना सॉफ्टवेर अपडेट कर सकता है। साथ ही यह हल्की और कई अन्य फ्रीक्वेंसी को जाम करने में सक्षम है। मूल रूप से इसकी डिलीवरी 2022 में होनी थी। लेकिन अज्ञात तकनीकी समस्याओं के कारण इसमें देरी हुई है। स्पेस सिस्टम्स कमांड के मुताबिक पिछले महीने तक इसने सभी सिस्टम-लेलव वेरीफिकेशन पूरे कर लिए हैं। अगले साल से इसकी डिलीवरी हो सकती है। अमेरिका तैनाती की कर रहा तैयारी जनवरी और मार्च के बीच अंतरिक्ष बल यह आकलन करेगा कि प्लान किए गए 32 हथियारों में से पहले पांच को कब ऑपरेशनल घोषित किया जा सकता है। कमांड के मुताबिक उन्हें स्पेस फोर्स की इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर यूनिट, स्पेस डेल्टा 3 को सौंपा जाएगा। एल3हैरिस ने एक बयान में कहा, 'मीडोलैंड्स प्रणाली तकनीकी प्रदर्शन, तैनाती और रखरखाव के लिए सरल लॉजिस्टिक के मामले में महत्वपूर्ण अपडेट होगा। यद्यपि वेरीफिकेशन टेस्टिंग में अनुमान से ज्यादा समय लगा।' चीन-रूस की सैटेलाइट को करेगा जाम मीडोलैंड्स जैसे जैमर का उद्देश्य चीनी और रूसी स्पेस सिस्टम की बढ़ती संख्या का मुकाबला करना है। संघर्ष की स्थिति में यह अस्थायी रूप से इन्हें क्षति पहुंचाएगा। चीन अलग-अलग सेंसरों से लैस 300 से ज्यादा रिमोट सेंसिंग सैटेलाइट का संचालन करता है। वहीं रूस दुनिया की कुछ सबसे सक्षम रिमोट-सेंसिंग सैटेलाइटों का संचालन करता है। लेकिन अमेरिका और चीन की तुलना में इसकी संख्या सीमित है। recent visitors 65

रेल मंत्रालय का फरमान अब लोको शेड में हफ्ते भर गुजारेंगे रेलवे के वरिष्ठतम इलेक्ट्रिकल इंजीनियर

नई दिल्ली  अब लोको शेड (Electric Loco Shed) में हफ्ते भर गुजारेंगे रेलवे के वरिष्ठतम इलेक्ट्रिकल इंजीनियर। जी हां, रेल मंत्रालय का यही फरमान है। दरअसल, इन दिनों रेल दुर्घटना कुछ ज्यादा ही हो रही है। इसलिए रेलवे बोर्ड ने फैसला किया है कि रेलवे के एसएजी (Senior Administrative Grade ) के ऑफिसर फील्ड इंस्पेक्शन में ज्यादा समय देंगे। यही नहीं, इलेक्ट्रिकल डिपार्टमेंट के लिए तो कुछ ज्यादा ही कड़ा आदेश है। कहा गया है कि एचएजी (Higher Administrative Grade) और इससे भी वरिष्ठ अधिकारी (Principle Chief Electrical Engineer) लोको शेड में एक हफ्ता गुजारेंगे। ऐसा इसलिए, ताकि ये अधिकारी भी लोको शेड के कामकाज और दिक्कतों से फेमिलियर हो सकें। क्या आया रेलवे बोर्ड का आदेश रेलवे बोर्ड ने पिछले सप्ताह शुक्रवार को ही सभी जोनल रेलवे के प्रिंसिपल चीफ इलेक्ट्रिकल इंजीनियर को एक पत्र भेजा है। इसमें कहा गया है कि रेलवे की सुरक्षा में लोको शेड का बड़ा योगदान है। लोको शेड में इंजन का मेंटनेंस होता है। यदि सही तरीके से इंजन का मेंटनेंस नहीं होता है तो उसके दुर्घटनाग्रस्त होने की आशंका ज्यादा होती है। इसलिए इलेक्ट्रिकल विभाग के मुखिया यानी पीसीईई (PCEE) को कहा गया है कि वे अपने जोन के सभी लोको शेड में जाकर एक हफ्ता गुजारें। अन्य विभाग के अधिकारियों को भी निर्देश सिर्फ इलेक्ट्रिकल विभाग को ही नहीं, बल्कि अन्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को भी दफ्तर के एसी कमरों से निकल कर फील्ड में बिताने को कहा गया है। निर्देश दिया गया है कि एसएजी अधिकारी हर महीने कम से कम दो रात मुख्यालय से दूर के स्टेशन (Roadside Stations) में गुजारेंगे। इस दौरान वे लेवल क्रॉसिंग गेट का भी इंस्पेक्शन करेंगे, रनिंग रूम जाएंगे। साथ ही चलती ट्रेन में फुटप्लेटिंग भी करेंगे। यह सब उनके रूटीन इंस्पेक्शन के अलावा होगा। औचक निरीक्षण भी करेंगे इस निर्देश में कहा गया है कि समय-समय पर ये अधिकारी औचक निरीक्षण भी करेंगे। ये पुलिस स्टाफ के साथ समन्वय स्थापित कर बिना चौकीदार वाले फाटकों पर जाएंगे और देंखेंकि वहां सुरक्षा के उपाय सही हैं या नहीं। यदि वहां कुछ कमी-बेशी हो तो उसकी सूचना डीआरएम और जीएम ऑफिस को देंगे। नाइट इंस्पेक्शन को बढ़ाएं रेलवे बोर्ड की तरफ से सभी जोन के जीएम (GMs) और डीआरएम (DRMs) को निर्देश दिया गया है कि वे इस सिस्टम को तो लागू करे ही, साथ ही नाइट इंस्पेक्शन भी सुनिश्चित करें। बोर्ड को लगता है कि इस तरह के निरीक्षण से कर्मचारी के स्तर पर होने वाली लापरवाही पर लगाम लगेगी और दुर्घटना नहीं होगी। recent visitors 152