राष्ट्रपति के आगमन पर राजधानी रायपुर तैयार, चप्पे-चप्पे पर पुलिस के जवान तैनात, अधिकारी कर रहे मौका मुआयना

रायपुर  राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के दौरे के लिए राजधानी रायपुर तैयार है. सुरक्षा में कोई चूक न हो, इसके लिए शहर के चप्पे-चप्पे पर पुलिस के जवान तैनात किए गए हैं. अधिकारी मौका मुआयना करते हुए नजर आ रही छोटी-बड़ी खामियों को दुरुस्त करने के निर्देश दे रहे हैं. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का दो दिवसीय दौरा शुक्रवार से शुरू हो रहा है. कमोबेश एक साल के अंतराल के बाद हो रहे राष्ट्रपति के इस दौरे को लेकर जिला प्रशासन कोई कोर-कसर नहीं छोड़ना चाह रहा है, जिसके लिए आज फाइनल मॉकड्रिल किया गया. राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू के दौरे के मद्देनजर शुक्रवार सुबह 11 बजे से शाम 5 बजे के बीच चार बार रिंग रोड नंबर 1 बंद रहेगा. राष्ट्रपति का काफिला डीडीनगर, गोलचौक जैसे व्यस्त इलाके से होकर गुजरेगा. रूट प्लान में काफिला गुजरने के आधे घंटे पहले रास्ते बंद रहेंगे. राष्ट्रपति सुरक्षा की पूरी कमान रायपुर रेंज आईजी अमरेश मिश्रा के हाथों में रहेगी. उनके निर्देशन में शहर के अलग-अलग इलाकों में एक हज़ार से अधिक पुलिस जवान और सौ से अधिक पुलिस के आला अधिकारी सुरक्षा संभालेंगे. इसके लिए अन्य जिलों से अतिरिक्त बल भी बुलाया गया है. दौरे का मिनट-टू-मिनट कार्यक्रम 25 अक्टूबर सुबह 11 बजे: राष्ट्रपति का रायपुर एयरपोर्ट पर आगमन. सुबह 11:30 बजे: रायपुर एम्स के दूसरे दीक्षांत समारोह में शामिल होंगी. दोपहर 1 बजे: एम्स से रवाना होकर राजभवन पहुंचेंगी. दोपहर 3 बजे: NIT रायपुर के 14वें दीक्षांत समारोह में हिस्सा लेंगी. शाम 4:30 बजे: नवा रायपुर स्थित पुरखौती मुक्तांगन में स्थानीय आदिवासियों से मुलाकात. शाम 6 बजे: राजभवन लौटेंगी और रात्रि विश्राम करेंगी. 26 अक्टूबर सुबह 9 बजे: विवेकानंद सरोवर, रायपुर का दौरा. सुबह 10 बजे: रायपुर एयरपोर्ट से भिलाई के लिए प्रस्थान. सुबह 11 बजे: IIT भिलाई के चौथे दीक्षांत समारोह में शामिल होंगी. दोपहर 1:30 बजे: भिलाई से वापस रायपुर स्थित राजभवन लौटेंगी. दोपहर 3:30 बजे: पं. दीनदयाल उपाध्याय स्मृति चिकित्सा एवं आयुष विश्वविद्यालय के तीसरे दीक्षांत समारोह में हिस्सा लेंगी. शाम 5 बजे: दीक्षांत समारोह के बाद दिल्ली के लिए रायपुर एयरपोर्ट से प्रस्थान करेंगी. recent visitors 67

देश के साधु-संत, महंत, अखाड़ा प्रमुखों और महामंडलेश्वर आदि ने प्रसन्नता व्यक्त कर मुख्यमंत्री की घोषणा को सराहा है

साधु-संतों ने उज्जैन में भी स्थायी आश्रम बनाने के मुख्यमंत्री के निर्णय को सराहा स्वामी अवधेशानंद जी ने संतों के प्रति संवेदनशीलता के लिए मुख्यमंत्री को दिया साधुवाद देश के साधु-संत, महंत, अखाड़ा प्रमुखों और महामंडलेश्वर आदि ने प्रसन्नता व्यक्त कर मुख्यमंत्री की घोषणा को सराहा है अखाड़ा परिषद ने निर्णय को बताया विकासोन्मुखी भोपाल उज्जैन में वर्ष 2008 में होने वाले वैश्विक सिंहस्थ की तैयारियां राज्य शासन ने अभी से शुरू कर दी है। सिंहस्थ में पूरे देश से आने वाले साधु-संतों से भी उज्जैन की पहचान सदैव से रही है। साधु-संतों के हित में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा स्थायी आश्रम निर्माण के लिए की गई घोषणा को पूरे देश के साधु-संत, महंत, अखाड़ा प्रमुखों और महामंडलेश्वर आदि ने प्रसन्नता व्यक्त कर मुख्यमंत्री की घोषणा को सराहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि हरिद्वार में जिस प्रकार साधु-संतों के अच्छे आश्रम बने हुए हैं, उसी प्रकार उज्जैन में भी साधु-संतों के स्थायी आश्रम बनवाने के प्रयास किए जाएंगे। उज्जैन विकास प्राधिकरण के माध्यम से योजना को आकार दिया जाएगा। सभी मूलभूत सुविधाओं के विकास के साथ साधु-संतों के लिए आश्रम निर्माण के कार्य समानांतर रूप से होंगे। समाज के इच्छुक सनातन धर्मावलंबियों के माध्यम से अन्न क्षेत्र, धर्मशाला, आश्रम, चिकित्सा केंद्र, आयुर्वेद केंद्र आदि सार्वजनिक गतिविधियों के संचालन को भी प्राथमिकता दी जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा की गई इस महत्वपूर्ण पहल का उज्जैन से लेकर हरिद्वार तक संत समाज ने स्वागत किया है। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष मां मनसा देवी ट्रस्ट हरिद्वार के अध्यक्ष पंचायती निरंजनी अखाड़ा के सचिव महंत रवींद्र पुरी महाराज ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव के निर्णय को अत्यंत ही महत्वपूर्ण बताते हुए विकास के लिये नये आयाम स्थापित करने वाला बताया है। महांमडलेश्वर और अखाड़ों के प्रमुखों ने इस पहल पर प्रसन्नता व्यक्त की है। जूना अखाड़ा के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद जी ने कहा कि सनातन धर्म संस्कृति में चिरकाल से अंतर्निहित “सर्वं खल्विदं ब्रह्म नेह नानास्ति किंचन” व “आत्मवत सर्व भूतेषु” जैसे दिव्य भावों के संपोषक, लोक कल्याणकारी योजनाओं तथा पारमार्थिक प्रवृत्तियों के प्रसारक संत सत्पुरुष ही हैं। स्वामी अवधेशानंद जी ने कहा कि मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा लिये गये निर्णय अनुसार उज्जैन में हरिद्वार की भाँति साधु संतों, महंत, अखाड़ा प्रमुखों, महामंडलेश्वर इत्यादि को स्थाई आश्रम बनाने की अनुमति दी जाना, अत्यंत प्रशंसनीय है। उन्होंने उज्जैन तीर्थ विकास एवं संतों के प्रति उनकी इस संवेदनशीलता के लिये मुख्यमंत्री को साधुवाद दिया। पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर 1008 आनंद विभूषित अवधूत बाबा अरुण गिरी जी महाराज (एनवायरमेंट बाबा) ने कहा कि संतों में बड़ा उल्लास और खुशी है। सिंहस्थ क्षेत्र उज्जैन में जो अखाड़ों की जगह है, संतों की जमीन है, उसमें पर्यावरण को बचाते हुए स्थायी निर्माण के लिए सभी संत समाज के लोग उनका स्वागत करते हैं। इससे हरिद्वार जैसा विकास उज्जैन का भी हो जाएगा, जब सभी संत महापुरुषों का वहां आश्रम बनेगा। राज्यसभा सांसद बाल योगी उमेश नाथ जी महाराज, पीठाधीश्वर वाल्मिकी धाम ने कहा कि मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अपनी सूझबूझ और विवेक से अभुतपूर्व और ऐतिहासिक निर्णय लिया है। कुंभ मेला भारत के चार पवित्र स्थानो पर लगता है उसमें एक अवंतिका पुरी उज्जैन भी है। प्रसन्नता की बात है कि कुंभ, अवंतिका और मध्यप्रदेश के शासनकाल के इतिहास में डॉ. यादव के निर्णय से कुंभ-2028 में देश के उच्च कोटि के महात्मा तंबूओ में न रहकर पक्के आश्रम में रहेंगे। बाल योगी उमेश नाथ जी महाराज ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यह निर्णय इस लिये लिया है कि अयोध्या में भगवान श्रीराम का भव्य मंदिर बन गया है। डॉ. यादव ने संकल्प लिया है कि 2028 में जो कुंभ आएगा उसमें हम देश के जितने भी निर्धारित अखाड़े हैं, उन सभी अखाड़ों का स्थायी निर्माण करके दिया जाएगा। उसके लिए एक हेक्टेयर के भू-खंड पर 25 प्रतिशत पर भवन निर्माण किया जा सकेगा। शेष भू-खंड अन्य जरूरी व्यवस्थाओं के लिये खुला रहेगा। उन्होंने सन्यासी होने के नाते देश के तमाम साधु-संतों की ओर से मुख्यमंत्री डॉ. यादव के उज्ज्वल भविष्य की कामना की और आशीर्वाद दिया। आचार्य महामंडलेश्वर श्रीपंचदशनाम आव्हान अखाडा हरिद्वार के अरुण गिरी जी महाराज (अवधूत बाबा), बाल योगी उमेश नाथ जी महाराज, पीठाधीश्वर वाल्मिकी धाम, (राज्यसभा सांसद), महंत रामेश्वर गिरी महाराज, सचिव श्रीपंचदशनाम जूना अखाड़ा, अध्यक्ष, शैव मंडल उज्जैन, पीर रामनाथ जी महाराज, गादीपति, भर्तहरि गुफा, उज्जैन एवं महंत डॉ. रामेश्वर दास महाराज अध्यक्ष रामादल अखाड़ा परिषद उज्जैन ने भी मुख्यमंत्री के निर्णय पर प्रसन्नता व्यक्त की है।   recent visitors 124

अब इंडिगो-विस्तारा, AI की 85 फ्लाइट्स में बम की धमकी, सरकार बोली- सख्त कानून लाएंगे

नई दिल्ली विमानों को बम से उड़ाने की धमकी से जुड़े मामले थम नहीं रहे हैं. अब 85 विमानों को उड़ाने की धमकी मिली है. इनमें एअर इंडिया के 20 विमान शामिल हैं. जिन विमानों को धमकी मिली है, उनमें 20 इंडिगो, 20 विस्तारा और 25 अकासा की उड़ानें शामिल हैं. न्यूज एजेंसी के मुताबिक, इससे पहले दिल्ली पुलिस ने पिछले आठ दिनों में 90 से ज्यादा घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को बम से उड़ाने की धमकी के संबंध में आठ अलग-अलग एफआईआर दर्ज की हैं. जिन उड़ानों को धमकी मिली हैं, उनमें अकासा, एअर इंडिया, इंडिगो और विस्तारा की सेवाएं शामिल हैं. ये उड़ानें दिल्ली से विभिन्न घरेलू और अंतरराष्ट्रीय गंतव्यों के लिए संचालित होती हैं. पुलिस का कहना है कि इन मामलों में जांच की जा रही है. एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के अनुसार, धमकी भरे मैसेज एक्स पर प्राप्त हुए थे जिन्हें बाद में अधिकारियों ने खारिज कर दिया. पहला मामला 16 अक्टूबर को बेंगलुरु जाने वाली अकासा की फ्लाइट को निशाना बनाने से जुड़ा आया था. एक्स के माध्यम से मिली बम की धमकी के बाद केस दर्ज किया गया था. इस विमान में 180 से ज्यादा यात्री सवार थे. विमान को दिल्ली लौटना पड़ा था. पुलिस ने अगले दिन सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स को पत्र लिखकर धमकी भरे मैसेज पोस्ट करने वाले अकाउंट की डिटेल मांगी थी. दिल्ली पुलिस की साइबर सेल की विभिन्न टीमें उड़ानों पर जारी खतरों को लेकर एक्स और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर गतिविधियों पर नजर रख रही हैं. एक हफ्ते से भी कम समय में 170 से अधिक उड़ानों को बम की धमकी मिली है. इस बीच, सरकार एयरलाइनों को बम की धमकियों से निपटने के लिए विधायी कार्रवाई की योजना बना रही है, जिसमें अपराधियों को नो-फ्लाई सूची में डालना भी शामिल है. विमानों को धमकी से निपटने के लिए सख्त कानून लाने की तैयारी केंद्रीय उड्डयन मंत्री राममोहन नायडू ने  कहा- ऐसी धमकी देने वालों के नाम ‘नो फ्लाई लिस्ट’ में शामिल किए जा सकते हैं। सरकार विमानन सुरक्षा नियमों और नागरिक विमानन सुरक्षा के विरुद्ध गैरकानूनी कृत्यों का दमन अधिनियम, 1982 में संशोधन की योजना बना रही है। उन्होंने कहा- नागर विमानन सुरक्षा ब्यूरो (BCAS) इस मुद्दे पर लगातार गृह मंत्रालय के संपर्क में है। धमकियों को लेकर केंद्र सरकार के 4 एक्शन     एयर मार्शल की संख्या दोगुनी: केंद्र सरकार ने 16 अक्टूबर को फ्लाइट्स में एयर मार्शलों की संख्या दोगुनी करने का फैसला किया। इसी दिन गृह मंत्रालय ने फर्जी धमकियों को लेकर एविएशन मिनिस्ट्री से रिपोर्ट मांगी। CISF, NIA और IB को भी रिपोर्ट देने को कहा गया है।     एयरलाइंस के CEOs के साथ बैठक: ब्यूरो ऑफ सिविल एविएशन सिक्योरिटी (BCAS) ने 19 अक्टूबर को सभी एयरलाइंस के CEOs के साथ बैठक की। इसमें झूठी धमकियों से निपटने को लेकर चर्चा की गई। साथ ही यात्रियों की असुविधा और एयरलाइंस के नुकसान पर भी बात हुई।     DGCA प्रमुख को हटाया: केंद्र ने 19 अक्टूबर को DGCA चीफ विक्रम देव दत्त को पद से हटाते हुए कोयला मंत्रालय में सचिव बना दिया। इस बदलाव को धमकी वाले मामलों से जोड़कर देखा जा रहा है।     मुंबई और कोच्चि से 2 अरेस्ट: मुंबई पुलिस ने एक शख्स को गिरफ्तार किया। इसके अलावा छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव से एक नाबालिग को हिरासत में लिया गया है। दोनों ने इंडिगो फ्लाइट में बम की धमकी दी थी। वहीं, केरल के कोच्चि एयरपोर्ट पर सोमवार को एक यात्री को बम की धमकी देने के आरोप में हिरासत में लिया गया। धमकियों से हफ्तेभर में ₹200 करोड़ से ज्यादा का नुकसान विमान में बम होने की सूचना मिलने पर फ्लाइट को अपने निर्धारित एयरपोर्ट के बजाय नजदीकी एयरपोर्ट पर उतारा जाता है। इससे ईंधन की खपत तो ज्यादा होती ही है, विमान की दोबारा जांच करने, यात्रियों को होटलों में ठहराने और उन्हें उनके मंजिल तक पहुंचाने के लिए भी व्यवस्था करनी पड़ती है। एक रिपोर्ट के अनुसार, इन सब पर करीब 3 करोड़ रुपए तक खर्च होते हैं। इस हफ्ते विस्तारा, एअर इंडिया, इंडिगो, अकासा, स्पाइसजेट, स्टार एयर और अलायंस एयर की 70 से ज्यादा घरेलू व अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को धमकी मिल चुकी है। धमकियों की वजह से अब तक 200 करोड़ रुपए तक का नुकसान हो चुका है।   recent visitors 80

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. यादव की उपस्थिति में मध्य प्रदेश टूरिज्म बोर्ड और एकेएस यूनिवर्सिटी के बीच एमओयू, युवाओं को देंगे प्रशिक्षण

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रीवा में रीजनल इंडस्ट्री कान्क्लेव में मध्य प्रदेश टूरिज्म बोर्ड के न्यूजलेटर ‘ऑफबीट मध्य प्रदेश’ का विमोचन किया। इस न्यूजलेटर का उद्देश्य राज्य के पर्यटन स्थलों की व्यापक जानकारी प्रदान करना और राज्य में पर्यटन को बढ़ावा देना है। हर तीन महीने में प्रकाशित होने वाले इस न्यूज लेटर में मध्य प्रदेश के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, प्राकृतिक, और धार्मिक स्थलों के बारे में जानकारी दी जाएगी। मध्य प्रदेश के पर्यटन स्थल, नीतियों, आयोजन और सम-सामयिक गतिविधियों के प्रचार प्रसार के लिए प्रकाशन किया जा रहा है। एपी टूरिज्म की वेबसाइट पर भी दिखेगा न्यूजलेटर पर्यटन क्षेत्र के देश और विदेश के हितधारक, मीडिया और जनसामान्य को मध्य प्रदेश पर्यटन की उपलब्धियों और नवाचार की जानकारी मिल सकेगी। इस न्यूजलेटर को मध्य प्रदेश पर्यटन की वेबसाइट पर भी अपलोड किया जाएगा। पर्यटन गतिविधियों से स्थानीय स्तर पर बढेंगे रोजगार मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने फेन सेन्चूरी, मंडला में स्थित इकाई के संचालन के लिए स्वीकृति पत्र (लेटर ऑफ अवॉर्ड) अंश इन्फ्रास्ट्रक्चर और डेवलपर्स रायपुर को सौंपा। मध्य प्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम द्वारा 30 वर्ष के लिए पीपीपी मोड में संचालित करने के लिए सौंपा है। इससे क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों का विकास होगा और स्थानीय स्तर पर रोजगार में वृद्धि होगी। पर्यटन प्रबंधन के क्षेत्र में कौशल विकास मुख्यमंत्री डॉ. यादव की उपस्थिति में मध्य प्रदेश टूरिज्म बोर्ड (एमपीटीबी) और एकेएस यूनिवर्सिटी, सतना के एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। इस समझौते का उद्देश्य सतना और रीवा क्षेत्र में पर्यटन प्रबंधन और आतिथ्य क्षेत्र में कौशल विकास और रोजगार क्षमता को बढ़ावा देना है। दोनों संस्थाएं मिलकर पर्यटन एवं आतिथ्य सत्कार के क्षेत्र में प्रशिक्षण, पाठ्यक्रम विकास, इंटर्नशिप के माध्यम से रोजगार एवं स्व-रोजगार के अवसरों को प्रोत्साहित करेंगी। एमपी के पर्यटन स्थलों की जानकारी आसानी से उपलब्ध होगी प्रमुख सचिव पर्यटन और संस्कृति एवं प्रबंध संचालक टूरिज्म बोर्ड शिव शेखर शुक्ला ने बताया कि मध्य प्रदेश में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं। ऑफ बीट मध्य प्रदेश न्यूजलेटर के माध्यम से देश-विदेश के पर्यटकों को राज्य के पर्यटन स्थलों की जानकारी आसानी से उपलब्ध हो सकेगी। न्यूजलेटर में पर्यटन से जुड़े पहलुओं पर होगा फोकस न्यूजलेटर राज्य के पर्यटन से जुड़े सभी महत्वपूर्ण पहलुओं पर फोकस करेगा, जिसमें टाइगर रिजर्व, नेशनल पार्क, विरासत स्थल, धार्मिक स्थल और पारंपरिक गांव सहित पर्यटन नीतियां और नवाचार की जानकारी शामिल होगी। इसके साथ ही एकेएस यूनिवर्सिटी, सतना के साथ हुआ एमओयू क्षेत्रीय विकास, उद्यमिता को बढ़ावा देने और समुदायों के सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो सतना और रीवा के पर्यटन और आतिथ्य क्षेत्र में रोजगार की नई संभावनाएं पैदा करेगी। recent visitors 60

MVA में होने के कारण उद्धव ठाकरे को सेक्युलर पॉलिटिक्स करने की मजबूरी, हिंदुत्‍व का भी विरोध

मुंबई ये ठाकरे परिवार की ताकत नहीं तो क्या है, बीजेपी को महाराष्ट्र की राजनीति में अपने बूते खड़े होने के लिए अब भी जूझना पड़ रहा है. मुश्किल ये है कि बालासाहेब ठाकरे ने जो कुछ कमाया था, उद्धव ठाकरे ने एक झटके में गंवा दिया. महाराष्‍ट्र की राजनीति में अब मातोश्री का वो महत्‍व नहीं है, जो भाजपा से गठबंधन के दौर में हुआ करता था. महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री की जिस कुर्सी के लिए उद्धव ठाकरे ने बीजेपी के खिलाफ जंग छेड़ी, उस पर भी आधे कार्यकाल तक ही टिक पाये, और जब सरकार गई तो संगठन से भी हाथ धोना पड़ा. उद्धव ठाकरे को महाराष्ट्र के लोगों को शुक्रिया कहना चाहिये कि लोकसभा चुनाव 2024 में थोड़ी बहुत इज्जत रख ली – लेकिन कांग्रेस को ज्यादा सीटें देकर उद्धव ठाकरे को कहीं का छोड़ा भी नहीं. और अब तो उद्धव ठाकरे की हालत और भी बुरी होती लग रही है. मुख्यमंत्री पद देने की बात तो दूर, शरद पवार और राहुल गांधी ने महाविकास आघाड़ी में उद्धव ठाकरे के लिए उनके मनमाफिक सीटें भी नहीं छोड़ी हैं – अब तक ये तो साफ हो ही गया है कि बीजेपी के साथ ही उद्धव ठाकरे के भी अच्छे दिन हुआ करते थे. क्या से क्या हो गये देखते देखते! पांच साल पहले उद्धव ठाकरे कहां थे, और अब कहां पहुंच चुके हैं – अगर परिस्थितियों, उपलब्धियों और चुनौतियों के पैमाने पर रखकर तुलना करें तो बहुत कुछ बदल चुका है. उद्धव ठाकरे के खाते में उपलब्धि के नाम पर सिर्फ एक ही चीज दर्ज हुई है, ढाई साल के लिए महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री की कुर्सी – लेकिन बाकी सब घाटे का ही सौदा रहा है. 1. उद्धव ठाकरे जब भारतीय जनता पार्टी के साथ हुआ करते थे चुनावों के दौरान बीजेपी के साथ साथ करीब 50-50 के पार्टनर हुआ करते थे, लेकिन MVA में उनकी हिस्सेदारी एक-तिहाई बनकर रह गई है. 2. 2019 में उद्धव ठाकरे की पार्टी 165 सीटों पर चुनाव मैदान में उतरी थी, लेकिन इस बार उनको महज 85 सीटों से संतोष करना पड़ रहा है. MVA में जो सीट शेयरिंग का फार्मूला तय हुआ है, उसके हिसाब से शिवसेना (UBT), कांग्रेस और एनसीपी (शरद पवार) तीनों को 85-85-85 सीटें मिल रही हैं. मतलब, अभी 255 सीटों पर तस्वीर साफ हुई है, जबकि 33 सीटें रिजर्व रखी गई हैं. संजय राउत का तो दावा है कि 270 सीटों पर बात बन गई है. बताते हैं कि 33 सीटें INDIA ब्लॉक के बाकी सहयोगी दलों समाजवादी पार्टी और सीपीएम के लिए बचाकर रखी गई हैं, लेकिन अभी तस्वीर नहीं साफ है. 3. सवाल ये है कि कितना भी बेहतर परफॉर्मेंस कर लें, क्या उद्धव ठाकरे पिछली बार जितनी सीटें नहीं जीत पाएंगे? 2019 में बीजेपी-शिवसेना में बीजेपी को 105 सीटें और शिवसेना को 56 सीटें मिली थी. महाराष्ट्र में 20 नवंबर को एक ही फेज में वोटिंग होगी – और 23 नवंबर को नतीजे आने की अपेक्षा है. मुख्यमंत्री बन पाना तो किस्मत की बात होगी!   उद्धव ठाकरे ने खुद को एमवीए के मुख्यमंत्री पद का चेहरा बना दिये जाने की हर मुमकिन कोशिश की, लेकिन न तो शरद पवार और न ही राहुल गांधी ने ऐसा कोई वादा किया – अब तो जो ज्यादा सीटें जीतेगा, दावेदारी उसीकी मजबूत होगी. 1. पहले मुख्यमंत्री पद का चेहरा बनने के लिए उद्धव ठाकरे ने सार्वजनिक बयानों का सहारा लिया. फिर शरद पवार का साथ मिलने की उम्मीद रही, लेकिन वो भी दगा दे गये. बल्कि, वो तो जयंत पाटिल का भी नाम लेने लगे हैं. दिल्ली पहुंचकर गांधी परिवार से मिलकर गुजारिश भी की, लेकिन मुख्यमंत्री पद देने के लिए कोई भी राजी नहीं हुआ. 2. जब देखा कि विपक्षी गठबंधन मुख्यमंत्री का नाम घोषित करने से बचना चाह रहा है, तो कदम पीछे खींचकर उद्धव ठाकरे ने सुझाव दिया कि सार्वजनिक घोषणा भले न हो, कम से कम तय तो कर ही लिया जाये कि मुख्यमंत्री कौन होगा – लेकिन ये तो किसी को मंजूर न था. 3. उद्धव ठाकरे के हिस्से वाली शिवसेना के प्रभाव क्षेत्र का दायरा भी सिकुड़ता जा रहा है. महाराष्‍ट्र में महज मुंबई-कोंकण तक सिमट जाने का खतरा पैदा हो गया है. पुणे और आसपास तो एकनाथ शिंदे ही जमे हुए हैं, जहां बीजेपी के लिए भी उनको बेदखल करना मुश्किल हो रहा है. सेक्युलर पॉलिटिक्स करने की मजबूरी MVA में होने के कारण उद्धव ठाकरे की पार्टी के सामने हिंदुत्‍व की राजनीति का विरोध करने की मजबूरी भी है. कांग्रेस और शरद पवार के साथ खड़े होने के लिए उद्धव ठाकरे को भी वही बोलना पड़ता है, जो गठबंधन की पॉलिटिकल लाइन बनी हुई है. हिंदुत्व का एजेंडा ही नहीं, शिवसेना तो कट्टर हिंदुत्व की राजनीति करती आ रही थी. बीजेपी के हिंदुत्व से भी चार कदम आगे. देखा जाये तो नई बीजेपी भी पुरानी शिवसेना के मुकाबले नहीं टिक पाती – लेकिन सेक्युलर दलों का साथ देने के नाम पर उद्धव ठाकरे को क्या क्या नहीं करना और सहना पड़ रहा है. उद्धव ठाकरे बार बार हिंदुत्व की बात दोहराते हैं, लेकिन लोगों तक संदेश पहुंचते पहुंचते वो रस्मअदायगी जैसा ही हो जाता है. उद्धव ठाकरे अपने हिंदुत्व को बीजेपी से बेहतर बताने की कोशिश करते हैं, लेकिन बीजेपी के आक्रामक रुख के आगे वो नहीं टिक पाते. अगर बीजेपी सबका साथ सबका विकास जैसा नारा देती है, तो किसी को दिक्कत नहीं होती, लेकिन उद्धव ठाकरे का हिंदुत्व की बात करना भी असरदार नहीं होता. भले ही उद्धव ठाकरे धारा 370, तीन तलाक और अयोध्या के मुद्दे पर पुराने स्टैंड पर ही कायम क्यों न रहते हों.   recent visitors 87

गांदरबदल में आतंकियों के हाथ में US आर्मी में इस्तेमाल होने वाली राइफल, जानिए इसकी ताकत

नई दिल्ली जम्मू-कश्मीर के गांदरबल में 20 अक्टूबर की शाम टनल कंस्ट्रक्शन में लगे मजदूरों पर आतंकवादियों ने नाटो असॉल्ट राइफल M-4 से हमला किया था। बेहद अडवांस इस राइफल का इस्तेमाल अमेरिकी सेना करती है। एक्सपर्ट मानते हैं कि इससे एक मिनट में 970 गोलियां दागी जा सकती हैं और इतने के बाद भी राइफल गर्म नहीं होती। जांच में जुटे सुरक्षा बलों को घटनास्थल पर लगे CCTV कैमरों की एक फुटेज भी मिली है, जिसमें 2 आतंकी दिखे हैं। हालांकि हमले को अंजाम देने वाले आतंकियों की संख्या 2 से 3 बताई जा रही है। कैमरे में कैद हुए आतंकियों की तलाश में कई जगह दबिश दी जा रही है। खून-खराबे का इरादा रखते हुए मजदूरों के कैंप में दाखिल हुए सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि दोनों आतंकी बड़े पैमाने पर खून-खराबे का इरादा रखते हुए मजदूरों के कैंप में दाखिल हुए थे। अंदर पहुंचने पर लोगों को देखते हुए उन्होंने ओपन फायरिंग शुरू कर दी थी। घटना में 7 लोग मारे गए थे और कई घायल हुए। आतंकियों ने जिस तरह से इस हमले को अंजाम दिया उसे देखते हुए आशंका यह भी जताई जा रही है कि कहीं दोनों या इनमें से किसी एक का रियासी हमले से भी संबंध है। ठीक इसी तरह से आतंकवादियों ने इसी साल 9 जून को जम्मू के रियासी में तीर्थ यात्रियों की बस में ओपन फायरिंग की थी। लगभग वही पैटर्न आतंकवादियों ने इस हमले में भी अपनाया। रियासी अटैक वाले आतंकवादी भी अभी खुले घूम रहे हैं। चेहरा छुपाने की कोशिश नहीं की, शॉल से राइफल छिपाई गांदरबल हमले के बारे में एजेंसियों का कहना है कि फिलहाल दो आतंकियों के बारे में ही जानकारी मिल रही है। दोनों ने अपना चेहरा ढकने की कोई कोशिश नहीं की थी। यानी वह अपनी पहचान ना छिपाते हुए एक तरह से यह मेसेज देना चाह रहे थे कि हिम्मत है तो हमें पकड़कर दिखाओ। दोनों ने शॉल ओढ़े हुए थे। शॉल शायद राइफल छिपाने के लिए लिए थे। दोनों आतंकियों की उम्र 22 से 30 साल के बीच की लग रही है। दोनों ने कमर पर पिट्टू बैग थे। शायद उस बैग में गोली और खाने-पीने का सामान भरा हो। हमले को अंजाम देने के बाद दोनों मौके से भाग गए थे। 100 से ज्यादा लोगों से हुई पूछताछ मामले की जांच जम्मू-कश्मीर पुलिस के हाथों में है। लेकिन, आने वाले समय में यह मामला राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को ट्रांसफर होने की बात कही जा रही है। फरार आतंकियों और स्थानीय स्तर पर उनकी मदद करने वालों की धर-पकड़ के लिए पुलिस, सेना, सीआरपीएफ और अन्य फोर्सेज तलाशी अभियान चला रही हैं। अभी तक 100 से अधिक लोगों से पूछताछ की जा चुकी है। एजेंसियों को शक है कि फरार आतंकियों की मदद स्थानीय स्तर पर की गई थी। नहीं तो इतना सटीक और टाइमिंग के हिसाब से हमला नहीं हो पाता। शक है कि आतंकियों ने कुछ दिन पहले यहां मजदूर के रूप में काम भी किया हो या उनका कोई साथी मजदूरों या कंस्ट्रक्शन साइट से संबंधित अन्य ग्रुप में शामिल हो। पता था कि मजदूर कहां मिलेंगे आतंकियों को यह अच्छे से पता था कि दिनभर काम करने के बाद अब मजदूर कहां मिलेंगे? उसी स्पाट को आतंकियों ने निशाना बनाया। हालांकि, जम्मू-कश्मीर पुलिस सूत्रों का कहना है कि स्थानीय लोगों से पूछताछ करने पर उन्होंने बताया कि शुरुआत में लगा कि पटाखे जलाए जा रहे हैं। क्योंकि घटनास्थल के पास में ही सोमवार को लड़की की शादी थी। हमले के समय वहां घर पर ढोल-नगाड़ों पर डांस चल रहा था। लेकिन चंद मिनटों में लग गया कि यह हमला है। हमले के दौरान एक बात यह भी सामने आ रही है कि यहां की लाइट ऑफ हो गई थी। अब लाइट को आतंकवादियों ने बंद किया या फिर मजदूरों ने या फिर बिजली विभाग द्वारा ही बंद की गई। इसकी भी जांच की जा रही है। M-4 राइफल के बारे में जानें     1980 के दशक में इसका शुरुआती वर्जन अमेरिका ने बनाया।     गैस से चलने वाली यह एयर कूल्ड असॉल्ट राइफल है।     एक मिनट में 700 से 970 राउंड गोलियां दाग सकती है।     इसकी प्रभावी रेंज 500-600 मीटर है और अधिकतम रेंज 3,600 मीटर है।     इसे चलाने के लिए बहुत ज्यादा मिलिट्री ट्रेनिंग की जरूरत नहीं होती।     अब 60 से ज्यादा देशों के सुरक्षा बल भी इसका इस्तेमाल करती है।     इससे ग्रेनेड भी लॉन्च किया जा सकता है। recent visitors 60

बीजेपी ने अनुजेश को करहल से उतारकर इस सीट पर मुलायम परिवार के बीच मुकाबला कर दिया

 मैनपुरी यूपी की नौ विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी ने सात सीटों पर उम्मीदवारों का ऐलान कर दिया है. मैनपुरी की जिस करहल सीट से सपा मुखिया अखिलेश यादव ने इस्तीफा दिया था, उस सीट पर बीजेपी ने उनके ही जीजा अनुजेश यादव को उतार दिया है. अनुजेश को उतारकर बीजेपी ने इस सीट पर मुलायम परिवार के बीच मुकाबला कर दिया है क्योंकि अखिलेश यादव ने इस सीट पर अपने भतीजे और मैनपुरी के पूर्व सांसद तेज प्रताप यादव को टिकट दिया है. अनुजेश यादव मुलायम परिवार के दामाद हैं. वह मुलायम सिंह यादव के भाई अभयराम यादव की बेटी संध्या यादव के पति हैं. संध्या यादव, आजमगढ़ से सांसद धर्मेद्र यादव की सगी बहन हैं. संध्या यादव मुलायम परिवार की पहली बेटी हैं, जिन्होंने राजनीति में कदम रखा था. इतना ही नहीं वो मैनपुरी की जिला पंचायत अध्यक्ष भी रह चुकी हैं. संध्या और अनुजेश को समाजवादी पार्टी से निकाल दिया गया था, जिसके बाद दोनों ने बीजेपी ज्वाइन कर ली थी. घिरोर से विधायक रह चुकी हैं अनुजेश की मां उर्मिला अनुजेश यादव का परिवार शुरू से ही राजनीति में है और समाजवादी पार्टी से जुड़ा हुआ है. उनकी मां उर्मिला यादव मैनपुरी की घिरोर विधानसभा सीट से समाजवादी पार्टी की टिकट पर विधायक रह चुकी हैं.    लोकसभा चुनाव के दौरान ऐसी चर्चाएं थीं कि बीजेपी मुलायम परिवार के ही किसी सदस्य को डिंपल यादव के सामने उतार सकती है. इनमें दो नाम आगे चल रहे थे. पहला नाम था अपर्णा यादव का, जोकि मुलायम परिवार की बहू हैं. वो मुलायम सिंह यादव के छोटे बेटे प्रतीक यादव की पत्नी हैं. जबकि दूसरा नाम था अनुजेश यादव का. अनुजेश ने मैनपुरी में हुए उपचुनाव में भी समाजवादी पार्टी के खिलाफ प्रचार किया था. हालांकि बाद में डिंपल के सामने यूपी सरकार में कैबिनेट मंत्री जयवीर सिंह को उतारा गया था, लेकिन इस सीट पर बीजेपी जीत हासिल नहीं कर पाई थी.   विधानसभा का नंबर विधानसभा का नाम उम्मीदवार का नाम 29 कुंदरकी श्री रामवीर सिंह ठाकुर 56 गाजियाबाद श्री संजीव शर्मा 71 खैर श्री सुरेंद्र दिलेर 110 करहल श्री अनुजेश यादव 256 फूलपुर श्री दीपक पटेल 277 कटेहरी श्री धर्मराज निषाद 397 मझवां श्रीमती सुचिस्मिता मौर्या   बीजेपी ने किन सीटों पर उतारे उम्मीदवार? करहल पर अनुजेश यादव के साथ ही बीजेपी ने गाजियाबाद सदर पर पार्टी के महानगर अध्यक्ष संजीव शर्मा, कुंदरकी से रामवीर सिंह ठाकुर को टिकट दिया है. इसके अलावा खैर (अजा) सीट से सुरेंद्र दिलेर, फूलपुर से दीपक पटेल, कटेहरी से धर्मराज निषाद और मझवां से श्रीमती सुचिस्मिता मौर्या को टिकट दिया गया है.   recent visitors 66