पेजर बम वाली तकनीक का हुआ खुलासा, देशी जुगाड़ ने दुनिया को हिला दिया

बेरूत बेरूत के दक्षिणी उपनगर और हिजबुल्लाह के गढ़ वाले इलाकों में हजारों पेजर ब्लास्ट ने चरमपंथी समूह को हिलाकर कर रख दिया था। इजराइली खुफिया एजेंसी ने एक बड़ी योजना के तहत हिजबुल्लाह के लड़ाकों के पेजर को बम में बदल दिया था। इसके लिए इजराइली जासूसी ने एक लंबी योजना तैयार की थी, जिसमें बैटरी के डिजाइन के साथ कवर स्टोरी भी तैयार की गई थी। इसमें एक कमजोरी भी थी। लेकिन इजराइली योजना की हिजबुल्लाह को भनक तक नहीं लगी। इसमें एक कमी भी थी। पेजर की बैटरी इलेक्ट्रॉनिक्स में इस्तेमाल लिथियम ऑयन बैटरी पैक जैसी ही थी लेकिन समस्या थी कि पेजर की तरह यह बाजार में मौजूद नहीं थी। इसलिए इजराइली एजेंटों ने एक बैकस्टोरी बनाई। पेजर के लिए इजराइली एजेंटों ने मशहूर ताइवानी ब्रांड गोल्ड अपोलो का बताकर हिजबुल्लाह को धोखा दिया। एक रिपोर्ट में पेजर के अध्ययन और खुफिया सूत्रों से पता चला है कि एक बैटरी विशेषज्ञ ने बताया कि विस्फोटक के लिए पीईटीएन का इस्तेमाल किया गया था। एक लेबनानी स्रोत ने कहा कि हिजबुल्लाह ने पाया था कि बैटरी अपेक्षा से ज्यादा तेजी से गर्म हो रही थी। हालांकि, इससे कोई बड़ी चिंता नहीं हुई। समूह हमले से कुछ घंटे पहले तक अपने सदस्यों को पेजर बांट रहा था। रिपोर्ट में कहा गया था कि हजारों पेजर एक साथ फटे। ज्यादातर मामलों में डिवाइस में मैसेज आने के बीप वाले संकेत के बाद इसमें ब्लास्ट हुआ। यह भी योजना का ही हिस्सा था, ताकि विस्फोट के समय पेजर हाथ और चेहरे के पास रहे। हमले में करीब 3000 लोग घायल हो गए थे। पेजर हमले के अगले ही दिन वॉकी-टॉकी में विस्फोट हुए। दोनों हमलों में कम से कम 39 लोगों की मौत हुई थी और 3400 से ज्यादा लोग घायल हुए थे। पश्चिमी सुरक्षा सूत्रों ने कहा कि इजराइली खुफिया एजेंसी ने इन पेजर और वॉकी-टॉकी हमलों की योजना बनाई थी। इसके लिए इजराइली खुफिया एजेंसी मोसाद ने हिजबुल्लाह के सप्लाई सिस्टम में घुसपैठ कर ली थी। हिजबुल्लाह को जिस डीलर ने पेजर सप्लाई किए वह मोसाद का ही एजेंट था। यही नहीं, इन पेजर को मोसाद की निगरानी में ही तैयार किया गया था। पेजर बम वाली तकनीक का हुआ खुलासा, देशी जुगाड़ ने दुनिया को हिला दिया  हिजबुल्ला ह पर पिछले महीन इजरायल ने पेजर अटैक कर हर किसी को चौंका दिया। इतने छोटे से दिखने वाले पेजर को आखिर इजरायल ने कैसे चलते फिरते बम में बदल दिया, ये सोचकर हर कोई हैरान था। एक एजेंसी की तरफ से अब इस मामले में एक अहम रिपोर्ट प्रकाशित की गई है, जिसमें लेबनान सूत्रों के हवाले से पेजर को बम में बदलने की इजरायली तकनीक के बारे में विस्तारर में बताया गया है। फरवरी में पेजर प्राप्त करने के बाद हिजबुल्लाह ने विस्फोटकों की उपस्थिति की जांच की। उन्हें हवाई अड्डे के सुरक्षा स्कैनर के माध्यम से यह देखने के लिए डाला कि क्या वे अलार्म ट्रिगर करते हैं। कुछ भी संदिग्ध नहीं बताया गया। दो बम विशेषज्ञों ने कहा कि उपकरणों को बैटरी पैक के अंदर एक चिंगारी उत्पन्न करने के लिए सेट किया गया था, जो विस्फोट करने वाली सामग्री को जलाने के लिए पर्याप्त था, और शीट को विस्फोट करने के लिए ट्रिगर करता था। क्योंरकि विस्फोटक और उसके कवर ने लगभग एक तिहाई हिस्सा ले लिया था, लिहाजा बैटरी पैक में 35 ग्राम वजन के अनुरूप शक्ति का एक अंश था। दरअसल, पेजर बनाने वाले एजेंटों ने एक ऐसी बैटरी डिजाइन की थी, जिसमें प्लास्टिक विस्फोटक का एक छोटा लेकिन शक्तिशाली चार्ज और एक नया डेटोनेटर छिपा था, जिसे देख पाना भी संभव नहीं है। पेजर बम का गुप्त डिजाइन और बैटरी की सावधानीपूर्वक बनाई गई कवर स्टोरी, दोनों के बारे में विस्तानर में बताया गया। ये पूरा ऑपरेशन एक दो दिन या महीने में नहीं, बल्कि सालों की मेहनत के बाद पूरा हुआ। छह ग्राम सफेद पेंटाएरीथ्रिटोल टेट्रानाइट्रेट प्लास्टिक विस्फोटक का इसमें इस्ते माल किया गया। उसके साथ एक पतली स्वेइट्रयर शीट का इस्तेंमाल किया गया। दोनों की कोशिकाओं को आपस में निचोड़ा गया। बताया गया कि बैटरी कोशिकाओं के बीच बाकी स्थान अत्यधिक ज्वलनशील पदार्थ की एक पट्टी द्वारा कब्जा कर लिया गया था, जिसने डेटोनेटर के रूप में काम किया। इस पूरे प्रोसेस की तस्वी र भी दिखाई गई, जिससे पता चलता है कि इस तीन-परत वाले सैंडविच को एक काले प्लास्टिक की स्लीाव में डाल दिया गया था और एक धातु के कवर में वो लगभग एक माचिस के आकार का था। दो बम विशेषज्ञों ने बताया कि असेंबली असामान्य थी क्योंकि यह एक स्टैं डर्ड छोटे डेटोनेटर या यूं कहें कि आमतौर पर दिखने वाले मेटल के सिलेंडर पर निर्भर नहीं था।   recent visitors 90

ओरछा यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल होगा, राम राजा की नगरी को मिलेगी ऐतिहासिक मान्यता

ओरछा मध्य प्रदेश के निवाड़ी जिले में भगवान रामराजा सरकार की नगरी ओरछा (Orchha) को अब प्रदेश की चौथी वर्ल्ड हेरिटेज साइट (World Heritage) बनने का दर्जा मिलने जा रहा है. इसके लिए डोजियर (कम्पाइल्ड डॉक्यूमेंट्स) को यूनेस्को (संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन) ने मंजूरी दे दी है. इसको लेकर ओरछा में खुशी का माहौल है. वहीं स्थानीय लोगों का कहना है कि इससे ओरछा को नए आयाम मिलेंगे, जिससे यहां के रोजगार में बढ़ोतरी होगी. अभी तक ओरछा यूनेस्को की टेंटेटिव लिस्ट (वर्ल्ड हेरिटेज साइट की टेम्पररी लिस्ट) में शामिल है. परमानेंट लिस्ट में शामिल करने के लिए डोजियर और डॉक्यूमेंटेशन का काम पिछले साल पूरा किया गया था. डोजियर को केंद्र सरकार ने यूनेस्को की विश्व धरोहर कमेटी को सौंपा है. साल 2027 और 2028 के लिए केंद्र सरकार ने ओरछा वर्ल्ड हेरिटेज साइट घोषित करने के लिए रिकमेंडेशन दिया है. हर साल केंद्र सरकार देश की एक धरोहर को यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में नॉमिनेट कराने के लिए यूनेस्को को रिकमेंडेशन देती है. यूनेस्को ऑफिस पेरिस में भारतीय राजदूत विशाल वी शर्मा ने यूनेस्को विश्व विरासत केंद्र के निदेशक लाजारे एलौंडो असोमो को यह डोजियर सौंपा. यूनेस्को की आधिकारिक घोषणा के बाद ओरछा देश की ऐसी एकमात्र विश्व धरोहर स्थली होगी, जो राज्य संरक्षित है. पांच साल की मेहनत के बाद मिली सफलता मध्य प्रदेश टूरिज्म बोर्ड ने ओरछा और भेड़ाघाट को यूनेस्को की टेंटेटिव लिस्ट में शामिल कराने के लिए साल 2019 और 2021 में प्रस्ताव तैयार कराया था. इसे भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने योग्य मानते हुए यूनेस्को के विश्व धरोहर अनुभाग को फॉरवर्ड किया और फिर टेंटेटिव लिस्ट में शामिल करने की घोषणा की गई थी. घोषणा के बाद टूरिज्म बोर्ड ने विशेषज्ञ संस्थाओं के सहयोग से ओरछा, मांडू, भेड़ाघाट के डोजियर तैयार कर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण को भेजा. वहीं संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार ने प्रारंभिक निरीक्षण कर ओरछा के डोजियर को रिकमेंड कर यूनेस्को के विश्व धरोहर अनुभाग को सौंपा. रामराजा मंदिर भारत का  ऐसा मंदिर जहां भगवान राम को राजा के रूप में पूजा जाता है. यह विश्व का एक मात्र स्थान जहां भगवान को सरकार की ओर से शस्त्र सलामी दी जाती है. यहां भगवान को सूर्योदय से पहले और सूर्यास्त के बाद भी सलामी दी जाती है. ईश्वरीय सत्ता का अनूठा उदाहरण जहां भगवान राम के लिये करोड़ों रुपये की लागत से भव्य मंदिर बनाया गया, लेकिन भगवान उस मंदिर में विराजमान न होकर महल में विराजे हैं. जानकार बताते हैं कि यह एक मात्र स्थान है जहां रामराजा राजकाज निपटाने और जनता को दर्शन देने के लिये गर्भगृह से बाहर आते हैं. जबकि हिन्दू धर्म की मान्यता के अनुसार प्राण प्रतिष्ठा की गई मूर्ति को हटाया नहीं जाता है. बुंदेला स्थापत्य शैली ओरछा का स्थापत्य बुंदेला शासकों द्वारा विकसित किया गया था, जो अद्वितीय स्थापत्य शैली का प्रतीक है, जिसमें महलों, मंदिरों, और किलों का समावेश है. जहांगीर महल ओरछा का प्रसिद्ध मुगल और राजपूत स्थापत्य कला का अनूठा संगम है. इस महल को मुगल सम्राट जहांगीर के स्वागत के लिए बनवाया गया था. ओरछा का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व यह चतुर्भुज मंदिर विशाल और भव्य मंदिर अनूठी वास्तुकला की उत्कृष्ट मिसाल है. ओरछा का किला परिसर बुंदेलखंड क्षेत्र की शक्ति और प्रतिष्ठा का प्रतीक है, जिसमें महल, दरबार हॉल और अन्य ऐतिहासिक संरचनाएं शामिल हैं. ओरछा बेतवा नदी के किनारे स्थित है, जो इसे प्राकृतिक सुंदरता प्रदान करता है और इसे आध्यात्मिक और सांस्कृतिक यात्रा के लिए आकर्षक बनाता है. राजशाही छतरियां बेतवा नदी के किनारे स्थित बुंदेला राजाओं की स्मृति में बनवाई गई और शाही वास्तुकला का एक शानदार उदाहरण हैं. अमर महल और लक्ष्मी नारायण मंदिर इन मंदिरों में की गई भित्ति चित्रकारी और वास्तुकला बुंदेला शासकों की धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक योगदान को दर्शाती है. यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर का दर्जा मिलने से ओरछा को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक प्रमुख सांस्कृतिक और ऐतिहासिक स्थल के रूप में मान्यता मिलेगी. नामांकन के बाद अंतरराष्ट्रीय और घरेलू पर्यटकों की संख्या में बड़ी बढ़ोतरी होगी, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी. पर्यटन के विकास से स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर उत्पन्न होंगे, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार होगा. यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट बनने पर ओरछा को विभिन्न अंतरराष्ट्रीय संगठनों और संस्थाओं से संरक्षण और विकास के लिए सहयोग मिल सकता है. स्थानीय शिल्प, हस्तकला और अन्य सांस्कृतिक उत्पादों का प्रचार-प्रसार बढ़ेगा, जिससे उन्हें राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलेगी. यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट बनने से ओरछा पर शिक्षा, शोध और अध्ययन के नए अवसर खुलेंगे, जिससे इतिहासकारों और शोधकर्ताओं का ध्यान आकर्षित होगा. यूनेस्को की मान्यता से ओरछा में स्थायी और पर्यावरण संवेदनशील पर्यटन के विकास को बढ़ावा मिलेगा, जिससे लंबे समय तक पर्यटन की संभावनाओं को मजबूती मिलेगी. recent visitors 161

देश के हाईवे-मैन गडकरी ने भोपाल – कानपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर अब होगा फोरलेन, ₹3589 करोड़ मंजूर

भोपाल मध्य प्रदेश हर साल विकास के नए कीर्तिमान गढ़ रहा है। विकास की इस गति शक्ति और भी तेज बढ़ाने के लिए केंद्र से एमपी को बड़ी सौगात मिली है। हाईवे मैन ऑफ इंडिया केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने एमपी में सड़कों के विकास के लिए बड़ी राशि की मंजूरी दे दी है। इससे भोपाल-कानपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर 4-लेन का होगा और मंडला-नैनपुर मार्ग को भी अपग्रेड किया जाएगा। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने भोपाल-कानपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर को 4-लेन में बदलने के लिए 3589.4 करोड़ रुपए की मंजूरी दी है। इसके तहत भोपाल से विदिशा, विदिशा से ग्यारसपुर, सतईघाट से चौका और चौका से कैमाहा तक के हिस्सों को अपग्रेड किया जाएगा। इसके अलावा, मंडला-नैनपुर मार्ग के लिए भी 592 करोड़ रुपए की मंजूरी दी गई है। सीएम मोहन ने जताया आभार इसे लेकर मुख्यमंत्री मोहन यादव ने पीएम मोदी और नितिन गडकरी का आभार जताया है। साथ ही इसे मध्य प्रदेश के लिए बड़ी सौगात बताया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में मध्य प्रदेश सरकार बेहतर सड़क संपर्क के ज़रिए विकास के नए आयाम स्थापित कर रही है। उन्होंने आगे कहा कि भोपाल-कानपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर के 4-लेन में अपग्रेडेशन से क्षेत्र के आर्थिक विकास को गति मिलेगी। इसके साथ ही यातायात सुगमता के और सड़क दुर्घटना में भी कमी आएगी। संकल्प पत्र में की थी घोषणा मध्यप्रदेश सरकार ने अपने संकल्प पत्र के तहत बुंदेलखंड विकास पथ की घोषणा की थी। यह राज्य की राजधानी भोपाल को बुंदेलखंड के सागर और छतरपुर जिलों से जोड़ने वाली एक महत्वपूर्ण 4-लेन सड़क परियोजना है। इस परियोजना का उद्देश्य भोपाल से सागर होते हुए छतरपुर और उत्तरप्रदेश बॉर्डर तक की कनेक्टिविटी को बेहतर बनाना है। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) द्वारा इस मार्ग को 4-लेन में अपग्रेड करने की प्रोसेस पहले से जारी थी, लेकिन कुछ हिस्सों के लिए मंजूरी लंबित थी। आज नई दिल्ली में आयोजित बैठक में भोपाल से सागर और छतरपुर से उत्तरप्रदेश बॉर्डर तक इस मार्ग को 4-लेन में अपग्रेड करने की अनुमति दी गई है। इस परियोजना की कुल लागत 3589.4 करोड़ रुपए निर्धारित की गई है। इस स्वीकृति से बुंदेलखंड विकास पथ के निर्माण में तेजी आएगी और सरकार के संकल्प को सिद्धि की ओर ले जाएगी। इसी के साथ मंडला से नैनपुर तक 46 किलोमीटर लंबे मार्ग को अपग्रेड करने के लिए भी 592 करोड़ रुपए की स्वीकृति दी गई है। इस मार्ग के अपग्रेड होने से क्षेत्र की यातायात व्यवस्था को और अधिक सुरक्षित और कुशल बनाया जाएगा। संकल्प पत्र पर बीजेपी कर रही काम मध्य प्रदेश सरकार ने अपने संकल्प पत्र में बुंदेलखंड विकास पथ बनाने का वादा किया था। यह 4-लेन का एक महत्वपूर्ण सड़क प्रोजेक्ट है जो राज्य की राजधानी भोपाल को बुंदेलखंड के सागर और छतरपुर जिलों से जोड़ेगा। इस प्रोजेक्ट का मकसद भोपाल से सागर होते हुए छतरपुर और उत्तर प्रदेश सीमा तक संपर्क को बेहतर बनाना है। 3589.4 करोड़ की लागत से होगा निर्माण राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण यानि एनएचएआई पहले से ही इस मार्ग को 4-लेन में चौड़ा करने का काम कर रहा था, लेकिन कुछ हिस्सों के लिए मंजूरी लंबित थी। 17 अक्टूबर को नई दिल्ली में हुई बैठक में भोपाल से सागर और छतरपुर से उत्तर प्रदेश सीमा तक इस मार्ग को 4-लेन में अपग्रेड करने की अनुमति दे दी गई। इस प्रोजेक्ट की कुल लागत 3589.4 करोड़ रुपए आंकी गई है। बुंदेलखंड विकास पथ का निर्माण इस मंजूरी से बुंदेलखंड विकास पथ के निर्माण में तेजी आएगी और सरकार के वादे को पूरा करने में मदद मिलेगी। यह मार्ग न केवल संपर्क को बेहतर बनाएगा, बल्कि क्षेत्रीय आर्थिक विकास और व्यापारिक गतिविधियों को भी बढ़ावा देगा। मंडला से नैनपुर तक 46 किलोमीटर लंबे मार्ग को अपग्रेड करने के लिए 592 करोड़ रुपए की मंजूरी दी गई है। इससे इस क्षेत्र की यातायात व्यवस्था और भी सुरक्षित और बेहतर होगी। recent visitors 107

कांग्रेस जनता को गुमराह करती है, उनकी सोच बांटो और राज करो की रही है : पीएम मोदी

चंडीगढ़ कांग्रेस जनता को गुमराह करती है। उनकी सोच बांटो और राज करो की रही है। जब कांग्रेस खतरे में आती है तो वो संविधान खतरे में होने का शोर मचाती है। यह बात चंडीगढ़ में एनडीए के मुख्यमंत्रियों की बैठक में पीएम नरेंद्र मोदी ने कही। परिवारवाद के मुद्दे पर भी पीएम ने कांग्रेस को घेरा। उन्होंने कहा कि वहां एक घराना पार्टी तंत्र चलाना है। पीएम मोदी ने मुख्यमंत्रियों से कहा कि हमने संविधान निर्माताओं की सोच को आगे रखा। संविधान की रक्षा का संकल्प जनता तक पहुंचाएंगे। भारत का संविधान सुरक्षित है। संविधान के खतरे में होने की बात कहने वाले खुद खतरे में रहते हैं। कांग्रेस पर हमला बोलते हुए पीएम मोदी ने कहा कि इनकी आदत फूट डालो और राज करो की है। पीएम मोदी ने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि आपातकाल लगाकर और राजीव गांधी शाहबानो मामले में संविधान को कुचलने का काम किया। पीएम मोदी ने धारा 370 समेत कई मुद्दों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि पब्लिक सब देख रही है। कांग्रेस के बहकावे में, उनके फूट डालो-राज करो वाली नीति पर ध्यान देने की जरूरत नहीं है। हरियाणा चुनाव को लेकर मोदी ने कहा कि कांग्रेस ने इस चुनाव में गुमराह करने की कोशिश की लेकिन बीजेपी का लोगों ने समर्थन किया। हरियाणा में बीजेपी की लगातार तीसरी बार शानदार जीत से पार्टी पूरे जोश में है। अब उनकी निगाहें महाराष्ट्र और झारखंड विधानसभा चुनाव पर है। यही वजह है कि बीजेपी ने आगामी चुनावों के मद्देनजर कांग्रेस को घेरने के लिए खास रणनीति तैयार की है। बीजेपी नेतृत्व ने तय किया है कि वो आपातकाल की 50वीं वर्षगांठ मनाएगी, कैसे कांग्रेस ने संविधान की धज्जियां उड़ाई उसे लोगों के बीच लेकर जाएंगे। बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने बताया कि चंडीगढ़ में एनडीए के मुख्यमंत्रियों और उप-मुख्यमंत्रियों की बैठक हुई। इस बैठक में पीएम मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि शासन के माध्यम से लोगों की समस्याओं का समाधान होना चाहिए। इस पर ध्यान केंद्रित कर हम इसको आगे बढ़ाएं।   recent visitors 69

हमारे पड़ोस में हिंदुओं की दुर्दशा के सबसे निराशाजनक पहलू, संरक्षकों की बहरी चुप्पी की ओर ध्यान आकर्षित किया : धनखड़

नई दिल्ली  उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने पड़ोसी देशों में हिंदुओं के खिलाफ मानवाधिकारों के उल्लंघन पर वैश्विक चुप्पी पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि हमारे पड़ोस से अपनी अंतरात्मा की आवाज पर चलने का पाप करने के कारण कठोर दमन के तहत भारत भागकर आए राज्यविहीन शरणार्थियों का मानवाधिकारों के नाम पर विरोध किया गया। नई दिल्ली के विज्ञान भवन में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) के स्थापना दिवस के अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने मानवाधिकारों के सभ्यतागत संरक्षक के रूप में भारत की असाधारण भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने हमारे पड़ोस में हिंदुओं की दुर्दशा के सबसे निराशाजनक पहलू और तथाकथित नैतिक उपदेशकों, मानवाधिकारों के संरक्षकों की बहरी चुप्पी की ओर ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने कहा, “वे पूरी तरह से बेनकाब हो चुके हैं। वे ऐसी चीज के भाड़े के सैनिक हैं जो मानवाधिकारों के बिल्कुल विपरीत है। लड़कों, लड़कियों और महिलाओं के साथ किस तरह की बर्बरता, यातना, दर्दनाक अनुभव होता है, इसे देखें। हमारे धार्मिक स्थलों को अपवित्र होते हुए देखें।” उन्होंने वैश्विक आक्रोश की कमी की ओर इशारा करते हुए कुछ क्षेत्रों में हिंदुओं द्वारा सामना किए जा रहे मानवीय संकटों पर अधिक ध्यान देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि इस तरह के उल्लंघनों के प्रति बहुत अधिक सहनशील होना उचित नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा कि एक के बाद एक प्रकरणों में सबूत जमा हो रहे हैं कि “डीप स्टेट” उभरती शक्तियों के खिलाफ कानूनी लड़ाई में शामिल है। उन्होंने कहा कि मानवाधिकारों का इस्तेमाल विदेश नीति के एक उपकरण के रूप में दूसरों पर शक्ति और प्रभाव डालने के लिए नहीं किया जाना चाहिए। नाम लेना और शर्मिंदा करना कूटनीति का एक घटिया रूप है। आपको केवल वही उपदेश देना चाहिए जो आप करते हैं। हमारी स्कूल प्रणाली को देखें-हमारे यहां उस तरह की गोलीबारी नहीं होती है जो कुछ विकसित होने का दावा करने वाले देशों में नियमित रूप से होती है। उन देशों के बारे में सोचें जो मानवाधिकारों के ऐसे भयानक उल्लंघनों पर भी आंखें मूंद लेते हैं। धनखड़ ने नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) की सराहना करते हुए कहा कि इस अधिनियम का उद्देश्य अपने देश में उत्पीड़न से बचने के लिए अपने विवेक का पालन करने वाले राष्ट्रविहीन व्यक्तियों को शरण प्रदान करना है। भारत का मानवाधिकार रिकॉर्ड बेजोड़ है। उन्होंने कहा कि दोस्तो, दुनिया भर में देखिए। मानवाधिकारों, खासकर अल्पसंख्यकों, हाशिए पर पड़े और समाज के कमजोर वर्गों के संरक्षण के मामले में आप पाएंगे कि भारत अन्य देशों से बहुत आगे है। उपराष्ट्रपति ने भारत के मानवाधिकार रिकॉर्ड को घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बदनाम करने के लिए काम कर रही हानिकारक ताकतों के खिलाफ भी आगाह किया। उन्होंने कहा, हमारे अंदर और बाहर ऐसी हानिकारक ताकतें हैं जो एक सुनियोजित तरीके से हमें गलत तरीके से कलंकित करने की कोशिश करती हैं। ये ताकतें बहुत सक्रिय हैं और उनका एजेंडा मानवाधिकारों की चिंता से कोसों दूर है। इस अवसर पर एनएचआरसी की कार्यवाहक अध्यक्ष विजया भारती सयानी, एनएचआरसी के महासचिव भरत लाल और अन्य गण्यमान्य भी उपस्थित थे। कुछ हानिकारक ताकतें भारत की खराब छवि पेश करने की कोशिश कर रही हैं: धनखड़  उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने कहा कि कुछ हानिकारक ताकतें भारत की ‘‘खराब छवि’’ पेश करने की कोशिश कर रही हैं और उन्होंने ऐसे प्रयासों को बेअसर करने के लिए ‘‘प्रतिघात’’ करने का आह्वान किया। धनखड़ ने साथ ही कहा कि भारत को दूसरों से मानवाधिकारों पर उपदेश या व्याख्यान सुनना पसंद नहीं है। उन्होंने यहां राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के स्थापना दिवस समारोह को संबोधित करते हुए विभाजन, आपातकाल लागू किए जाने और 1984 के सिख विरोधी दंगों को ऐसी दर्दनाक घटनाएं बताया, जो ‘‘याद दिलाती हैं कि आजादी कितनी नाजुक होती है।’’ धनखड़ ने कहा, ‘‘कुछ ऐसी हानिकारक ताकतें हैं जो एक सुनियोजित रूप से हमें अनुचित तरीके से कलंकित करना चाहती हैं।’’ उन्होंने कहा कि इन ताकतों का अंतरराष्ट्रीय मंचों का इस्तेमाल कर ‘‘हमारे मानवाधिकार रिकॉर्ड पर सवाल उठाने’’ का ‘‘दुष्ट इरादा’’ है। उन्होंने कहा कि ऐसी ताकतों को बेअसर करने की जरूरत है और भारतीय संदर्भ में वे इसके लिए ‘‘प्रतिघात’’ शब्द का इस्तेमाल करेंगे। उपराष्ट्रपति ने कहा कि इन ताकतों ने सूचकांक तैयार किए हैं और ये दुनिया में हर किसी को ‘रैंक’ दे रही हैं ताकि ‘‘हमारे देश की खराब छवि’’ पेश की जा सके। उन्होंने भुखमरी सूचकांक पर भी निशाना साधा, जिसकी सूची में भारत की रैंकिंग खराब है। उन्होंने कहा कि कोरोना वायरस महामारी के दौरान सरकार ने जाति और पंथ की परवाह किए बिना 80 करोड़ से अधिक लोगों को मुफ्त राशन उपलब्ध कराया।       recent visitors 50

सैनी सरकार हरियाणा में 22 अक्टूबर को करेगी रोजगार मेले का आयोजन, युवाओं के लिए अवसर

रोहतक राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान पुन्हाना में 22 अक्टूबर को रोजगार मेले का आयोजन किया जाएगा। जिसमे नूंह, तावडू,फिरोजपुर झिरका व पुन्हाना की आईटीआई के सभी पास आउट बच्चे अपना रजिस्ट्रेशन कराकर भाग ले सकते है। मेले में शामिल कंपनियां पात्र छात्रों के साक्षात्कार लेंगी। इसके आधार पर छात्रों को रोजगार के अवसर प्रदान किए जाएंगे। पुन्हाना आईटीआई के प्रधानाचार्य विजय कुमार ने बताया की 22 अक्टूबर मंगलवार को अप्रेंटिसशिप मेला 2024 का आयोजन राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान पुन्हाना में किया जा रहा है। कहां लगा है इस रोजगार मेले के द्वारा ज्यादा से ज्यादा आईटीआई पास छात्रों को अप्रेंटिस लगवाने और प्लेसमेंट करवाने का लक्ष्य है। इस रोजगार मेले में फरीदाबाद और पलवल सहित अन्य जिलों की बड़ी-बड़ी कंपनियां हिस्सा ले रही हैं। मेले में सभी ट्रेडों के छात्र-छात्राएं भाग ले सकते है। जिन प्रार्थियों का नाम विभाग की साइट पर दर्ज नहीं होगा उनके लिए मौके पर ही रोजगार मेले में रजिस्ट्रेशन की व्यवस्था भी की जाएगी। रोजगार मेले में नौकरी 2024 रोजगार मेले में भाग लेने के लिए अपने साथ जरूरी दस्तावेज जैसे दसवीं की मार्कशीट आईटीआई पास आउट सर्टिफिकेट निवास प्रमाण पत्र पैन कार्ड आधार कार्ड बैंक पासबुक दो पासपोर्ट साइज फोटो साथ लेकर आए। उन्होंने बताया कि छात्रों का अप्रेंटिस लगना यह एक सुनहरा मौका है और इसमें इन्हें इंडस्ट्रीज फर्स्ट एक्सपीरियंस का भी फायदा मिलेगा जिससे कौशल का स्तर भी बढ़ेगा। उन्होंने कहा की सभी पास आउट प्रार्थियों के लिए यह मेला काम की जगह है। चयन प्रक्रिया इस रोजगार में चयनित अभ्यर्थियों को कंपनियों में रोजगार के अपार मौके तो मिलेंगे साथ ही बढ़िया सैलरी भी मिलेगी। इसके लिए कंपनियां अपनी सुविधा और रिक्तियों के हिसाब से अभ्यर्थियों का साक्षात्कार लेंगी। इंटरव्यू के आधार पर ही उम्मीदवारों को नौकरी के लिए सेलेक्शन किया जाएगा। इसके बाद सीधे अप्रेंटिस ट्रेनिंग या प्लेसमेंट के बाद नौकरी के लिए अभ्यर्थियों की नियुक्ति की जाएगी। ऐसे में जो भी युवा पढ़ाई पूरी होने के बाद अच्छी जॉब ढूंढ रहे हैं, वो इस जॉब फेयर में शामिल होकर अपने करियर की बेहतरीन शुरुआत कर सकते हैं। उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि रोजगार मेले में समय से पहुंचे। recent visitors 94

मध्यप्रदेश 160 से अधिक देशों को निर्यात कर रहा है दवाएं : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

राज्य सरकार बनाने जा रही है आकर्षक फार्मा पॉलिसी : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मध्यप्रदेश 160 से अधिक देशों को निर्यात कर रहा है दवाएं वर्ष 2023-24 में प्रदेश से 11 हजार 889 करोड़ रुपये के फार्मा प्रोड्क्ट का हुआ एक्सपोर्ट पेट्रो-केमिकल इकाइयों को प्रशिक्षित मानव संसाधन उपलब्ध कराने प्रदेश में की जा रही है पहल प्रदेश में केमिकल-फार्मा-पेट्रो-केमिकल और प्लास्टिक जैसे उद्योगों के लिए है बेहतरीन इकोसिस्टम भारत पेट्रोलियम की 50 हजार करोड़ और गैल की 35 हजार करोड़ लागत की पेट्रो-केमिकल परियोजनाओं का कार्य जारी मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मुंबई में इंडिया केम- 2024 के 13वें संस्करण को किया संबोधित भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश में केमिकल, फार्मा, पेट्रो-केमिकल और प्लास्टिक जैसे उद्योगों के लिए बेहतरीन इको-सिस्टम विद्यमान है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा बीना में भारत पेट्रोलियम की 50 हजार करोड़ रुपये से अधिक की पेट्रो-केमिकल परियोजना का भू्मि-पूजन किया गया, जिसका कार्य आरंभ हो गया है। प्रदेश में 35 हजार करोड़ की गेल इंडिया की वृहद पेट्रो-केमिकल परियोजना का काम तेजी से जारी है, इससे 25 हजार व्यक्तियों को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा। प्रदेश में केमिकल और पेट्रो-केमिकल क्षेत्र की देश की सबसे बड़ी निजी और सार्वजनिक क्षेत्र की प्रमुख कंपनियां कार्यरत हैं। प्रदेश में 275 फार्मा यूनिट्स स्थापित हैं, जिनसे 160 से अधिक देशों को दवाएं निर्यात हो रही हैं। दवा निर्यात में मध्यप्रदेश का देश में चौथा स्थान है। वर्ष 2023-24 में 11 हजार 889 करोड़ रुपये के फार्मा प्रोड्क्ट का एक्सपोर्ट हुआ है। इस क्षेत्र में और अधिक निवेश आकर्षित करने तथा गतिविधियों को विस्तार देने के लिए राज्य सरकार आकर्षक फार्मा पॉलिसी बनाने जा रही है। हम एक फ्यूचर रेडी स्टेट हैं, रसायन और उर्वरक के क्षेत्र में राज्य सरकार के प्रयास, आने वाले समय में विकास की नई कहानी लिखने वाले हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शुक्रवार को मुंबई में इंडिया केम- 2024 के 13वें संस्करण को संबोधित कर रहे थे। केमिकल एंड पेट्रो-केमिकल स्ट्रेटजीज पर "नॉलेज पेपर" का विमोचन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण और रसायन व उर्वरक मंत्री जगत प्रकाश नड्डा के साथ "इंडिया केम-2024 एडवांटेज भारत : इंडियन केमिकल्स एंड पेट्रो-केमिकल्स पेविंग द फ्यूचर" के 13वें द्वि-वार्षिक सम्मेलन का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस अवसर पर केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण एवं रसायन-उर्वरक राज्य मंत्री श्रीमती अनुप्रिया पटेल, गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेन्द्र रजनीकांत पटेल, ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण मांझी सहित फिक्की के पदाधिकारी और विभिन्न उद्योग समूहों के प्रतिनिधि उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव कैटालाइजिंग इंडिया ऑन केमिकल एंड पेट्रो-केमिकल स्ट्रेटजीज फॉर ग्लोबल इंटीग्रेशन एंड ग्रोथ विषय पर फिक्की और अर्नेस्ट एंड यंग द्वारा तैयार "नॉलेज पेपर" के विमोचन में शामिल हुए। मध्यप्रदेश, औद्योगिक गतिविधियों और निवेश को प्रोत्साहित करने की दिशा में प्रयासरत मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश प्रगति पथ पर निरंतर अग्रसर है। भारत विश्व की 11वीं अर्थव्यवस्था से बढ़कर 5वें पायदान पर आया है। मध्यप्रदेश, औद्योगिक गतिविधियों और निवेश को प्रोत्साहित करने की दिशा में निरंतर प्रयासरत है। प्रदेश में वर्तमान में 250 फार्मेसी और 35 मेडिकल कॉलेज संचालित हैं। केमिकल पेट्रो-केमिकल उद्योग के लिए प्रदेश में आवश्यक अधोसंरचना तैयार है। रायसेन जिले के तामोट, ग्वालियर के बिलोवा में प्लास्टिक पार्क तथा रतलाम में वृहद फार्मा बायोटेक केमिकल जोन का विकास हो रहा है। झाबुआ में मेघनगर के औद्योगिक क्षेत्र में केमिकल उद्योग के लिए आधुनिक अधोसंरचना, धार के पास बदनावर में पीएम मित्रा पार्क और भोपाल तथा ग्वालियर में केंद्रीय पेट्रो रसायन अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी संस्थान सीपेट की शाखाएं स्थापित की गई हैं। रीजनल इंड्रस्ट्री कॉन्क्लेव में उद्योग समूहों ने निवेश के लिए की पहल मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में औद्योगिकीकरण तथा निवेश के क्षेत्र में केंद्र सरकार के साथ कदम से कदम मिलाकर चलने के लिए प्रदेश में रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव का आयोजन आरंभ किया गया है। अब तक उज्जैन, जबलपुर, ग्वालियर और सागर में रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव हो चुकी हैं। अगली इंडस्ट्री कॉन्क्लेव शीघ्र ही रीवा में होगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में सभी प्रकार के उद्योगों के लिए संभावनाएं विद्यमान हैं। उद्योग समूहों तथा निवेशकों को इससे अवगत कराने और राज्य सरकार की नीतियों के बारे में बताने के उद्देश्य से मुम्बई सहित कोयंबटूर, बैंगलुरू और कोलकाता में रोड-शो किए गए हैं। प्रदेश में निवेश के लिए कई उद्योग समूहों ने पहल की है। रतलाम, झाबुआ और इन्दौर में फार्मा क्षेत्र की गतिविधियों के विस्तार के कार्य जारी मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पेट्रो-केमिकल क्षेत्र में मध्यप्रदेश प्रगति करेगा। राज्य सरकार "स्टेट ऑफ दी आर्ट पेट्रो-केमिकल इन्वेस्टमेंट रीजन" बनाने की योजना पर भी कार्य कर रही हैं। सीहोर-आष्टा एक प्रकार से देश का मध्य क्षेत्र है जहां विमानतल और रेल लाइन सहित उद्योगों को प्रोत्साहित करने के लिए आवश्यक सभी व्यवस्थाएं विद्वमान हैं। रतलाम, झाबुआ और इन्दौर में भी फार्मा क्षेत्र में गतिविधियों के विस्तार के लिए कार्य किया जा रहा है। केन्द्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा ने इंडिया केम – 2024 में किया मध्यप्रदेश का उल्लेख केन्द्रीय रसायन और उर्वरक मंत्री जे.पी. नड्डा ने प्रदेश के बीना की भारत पेट्रोलियम पेट्रो-केमिकल परियोजना का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा पेट्रो-केमिकल, फार्मा, रसायन और उर्वरक क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियों के विस्तार के लिए किए जा रहे प्रयासों से निवेश और रोजगार के क्षेत्र में सकारात्मक परिणाम प्राप्त होंगे। कार्यक्रम को केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण और रसायन-उर्वरक राज्य मंत्री श्रीमती अनुप्रिया पटेल, गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेन्द्र रजनीकांत पटेल और ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण मांझी ने भी संबोधित किया। फिक्की के पदाधिकारियों और विभिन्न उद्योग समूहों के प्रतिनिधियों ने भी इंडिया केम-2024 में अपने विचार रखे।   recent visitors 68