पहला मौका होगा जब कैबिनेट की सुरक्षा के दौरान बॉडी वॉर्न कैमरों का भी इस्तेमाल किया जाएंगा

इंदौर  मध्य प्रदेश सरकार की कैबिनेट बैठक मंगलवार को इंदौर में आयोजित होने वाली है. ये पहला मौका होगा जब कैबिनेट की सुरक्षा के दौरान बॉडी वॉर्न कैमरों का भी इस्तेमाल किया जाएंगा. इंदौर के राजवाड़ा पर आयोजित होने वाली इस कैबिनेट बैठक में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री सहित तमाम मंत्री उपस्थित रहेंगे. ऐसे में उनकी सुरक्षा में किसी भी तरह की कोई चूक न हो इसके लिए इंदौर पुलिस ने व्यापक स्तर पर सिक्योरिटी प्लानिंग की है. मोहन कैबिनेट की सुरक्षा में 1 हजार जवान एडिशनल पुलिस कमिश्नर अमित सिंह ने बताया, '' 20 मई को इंदौर के राजवाड़ा पर कैबिनेट मीटिंग का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें भाग लेने के लिए मुख्यमंत्री मोहन यादव के साथ ही मंत्रिमंडल के समस्त मंत्री भी इंदौर आएंगे. कैबिनेट मीटिंग की सुरक्षा व्यवस्था या किसी भी तरह की स्थिति को लेकर इंदौर पुलिस काफी अलर्ट है. राजवाड़ा क्षेत्र को नो व्हीकल जोन बनाया गया है साथ ही यहां 1000 से अधिक पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है, जो सभी परिस्थितियों से निपटने के लिए सक्षम होंगे.'' पहली बार बॉडी वॉर्न कैमरा का इस्तेमाल एडिशनल पुलिस कमिश्नर ने आगे बताया, '' कैबिनेट मीटिंग जिस क्षेत्र में होगी, उस क्षेत्र में ड्रोन और सीसीटीवी फुटेज के साथ अलग-अलग तरह से निगरानी रखी जाएगी. पहली बार इंदौर पुलिस के द्वारा बॉडी वॉर्न कैमरा के माध्यम से निगरानी रखी जाएगी. इससे पुलिस को रियल टाइम और लाइव फुटेज कंट्रोल रूम में मिलेंगे और किसी भी स्थिति में तुरंत एक्शन लिया जा सकेगा.'' क्या होता है बॉडी वॉर्न कैमरा? जैसा की नाम है बॉडी वॉर्न कैमरा इस तरह का कैमरा होता है, जिसे शरीर पर पहना जा सकता है. ये हाथ, चेस्ट, सिर आदि जगहों पर यूनिफॉर्म के साथ फिट किए जा सकते हैं, जिससे लाइव स्ट्रीमिंग भी होती है. आमतौर पर पुलिस के द्वारा बॉडी वॉर्न कैमरे का प्रयोग वाहन चेकिंग सहित अन्य जगहों पर किया जाता है लेकिन पहली बार कैबिनेट बैठक की सुरक्षा में इनका इस्तेमाल हो रहा है. recent visitors 36

भारत के सिर्फ एक कदम से बांग्लादेश को 770 मिलियन डॉलर का नुकसान होने वाला ……

नई दिल्ली पहलगाम आतंकी हमले के बाद (Pahalgam Terror Attack) के बाद भारत लगातार एक्शन मोड में है. पाकिस्तान को करारा सबक सिखाने के बाद अब सरकार के निशाने पर Pakistan का समर्थन करने वाले देश और उनसे नजदीकी रखने वाले मुल्क हैं. इनमें जहां तुर्की और अजरबैजान (Turkey-Azerbaijan) शामिल हैं, तो वहीं चीन के साथ गहरी दोस्ती निभाने वाला बांग्लादेश (Bangladesh) भी भारतीय राडार पर है. दरअसल, मोहम्मद युनूस द्वारा बीते दिनों चीन में भारत के लिए विवादित टिप्पणियां की गईं और अब वो इसकी बड़ी कीमत चुकाने वाला है. भारत के सिर्फ एक कदम से ही ड्रैगन के इस दोस्त को 770 मिलियन डॉलर या करीब 6581 करोड़ रुपये (लगभग 9,367 करोड़ बांग्लादेशी टका) का नुकसान होने वाला है. आइए समझते हैं कैसे… बांग्लादेश के लिए भारत के लैंड पोर्ट बैन सबसे पहले बात करते हैं भारत की ओर से बांग्लादेश के खिलाफ की गई इकोनॉमिक स्ट्राइक के बारे में, तो बता दें कि भारत ने बांग्लादेश के कई सामानों के लिए भारतीय लैंड पोर्ट्स को बैन (India Bans Land Port For Bangladesh) कर दिया है. भारत की ओर से यह कदम बीते 9 अप्रैल को भारत द्वारा 2020 में दी गई ट्रांसशिपमेंट सुविधा को वापस लेने के बाद उठाया गया है, जिसने बांग्लादेश को भारतीय बंदरगाहों और यहां तक ​​कि दिल्ली हवाई अड्डे के माध्यम से मध्य पूर्व और यूरोप को निर्यात करने की अनुमति दी थी. बीते शनिवार 17 मई को बांग्लादेश से आयातित कई तरह के सामानों को इन बंदरगाहों पर प्रतिबंधित कर दिया गया है, जिनमें रेडीमेड गारमेंट और प्रोसेस्ड फूड प्रोडक्ट समेत अन्य सामान शामिल हैं. विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) द्वारा शनिवार को जारी नोटिफिकेशन को देखें, तो इसमें कहा गया है कि बांग्लादेश से रेडीमेड कपड़ों का आयात अब केवल सिर्फ दो बंदरगाहों न्हावा शेवा और कोलकाता पोर्ट तक ही सीमित रहेगा, जबकि अन्य सभी लैंड पोर्ट्स से आयात प्रतिबंधित रहेगा. मतलब साफ है कि अब Bangladesh लैंड पोर्ट की बजाए सी पोर्ट के जरिए ही निर्यात कर पाएगा. GTRI ने बताया बांग्लादेश को कितना नुकसान यह कदम डायरेक्टर जनरल ऑफ फॉरेन ट्रेड (DGFT) के निर्देश के बाद उठाया गया है, जिसमें भारत सरकार ने बांग्लादेशी सामानों को लैंड पोर्ट्स पर तत्काल प्रतिबंधित कर दिया है और सिर्फ दो समुद्री-पोर्ट (Sea Ports) तक सीमित किया है. भारत की ओर से लिए गए इस एक्शन से बांग्लादेश को कितना नुकसान होने वाला है, इसे ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) ने एक रिपोर्ट जारी कर समझाया है. इसमें कहा गया है कि लैंड पोर्ट के माध्यम से बांग्लादेशी आयात बैन करने के भारत के फैसले से पड़ोसी मुल्क के 770 मिलियन डॉलर (लगभग 9,367 करोड़ बांग्लादेशी टका) मूल्य के सामानों पर प्रभाव दिख सकता है और ये आंकड़ा कुल द्विपक्षीय आयात (Bilateral Imports) का करीब 42 फीसदी होता है. GTRI के मुताबिक, रेडीमेड गारमेंट, प्रोसेस्ड फूड और प्लास्टिक प्रोडक्ट प्रभावित होने वाले प्रमुख सामानों में सबसे ऊपर हैं. अकेले गारमेंट्स की अगर बात करें, तो इनकी वैल्यू सालाना 618 मिलियन डॉलर है और भारतीय प्रतिबंधों के बाद ये अब केवल कोलकाता और न्हावा शेवा बंदरगाहों से होकर ही भारत में एंट्री कर सकते हैं. यानी बांग्लादेश की महत्वपूर्ण लैंड ट्रेड कॉरिडोर्स तक पहुंच कट गई है. जीटीआरआई के मुताबिक, भारत के फैसले से Bangladesh के सबसे प्रॉफिटेबल एक्सपोर्ट रूट पर गंभीर असर पड़ने वाला है. निर्यात की लागत में होगा इजाफा भारत के इस कदम से बांग्लादेश को बड़ी आर्थिक चोट कैसे लगने वाली है, इसे आसान शब्दों में इस तरह समझ सकते है कि बांग्लादेश और भारत के बीच अब तक जो भी व्यापार होता था, उसका करीब 93 फीसदी लैंड पोर्ट्स के जरिए ही होता था, लेकिन अब इन Land Ports को बंद किए जाने के बाद बांग्लादेशी प्रोडक्ट्स कोलकाता या फिर महाराष्ट्र के न्हावा शेवा बंदरगाह के जरिए ही आ सकेंगे और इसका सीधा असर बांग्लादेशी निर्यात की लागत में बढ़ोतरी के रूप में दिखेगा, जो उसके लिए भारी नुकसानदायक साबित होगा. आखिर क्यों भारत के निशाने पर बांग्लादेश बता दें कि बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस (Muhammad Yunus) द्वारा की गई विवादास्पद टिप्पणियों के बाद भारत और बांग्लादेश के बीच संबंधों में ये तनाव देखने को मिला है और खास बात ये है कि उन्होंने ये टिप्पणियां चीन में जाकर की हैं. हाल ही में चीन के इशारे पर नाच रहे यूनुस ने वहां का दौरा किया और इस दौरान दावा किया था कि भारत के पूर्वोत्तर राज्य भूमि से घिरे हुए हैं और समुद्र तक पहुंच के लिए बांग्लादेश पर निर्भर हैं. उन्होंने बांग्लादेश को इस क्षेत्र में हिंद महासागर का एकमात्र संरक्षक बताते हुए China को अपने व्यापार मार्गों का उपयोग करने का निमंत्रण दिया. ऐसे में इसके जवाब में भारत की ओर से बांग्लादेशी सामानों के आयात के लिए पोर्ट्स बैन करने का कदम उसकी हेकड़ी निकालने की दिशा में उठाया गया. इसके अलावा अन्य कारण भी हैं, जिनके चलते भारत ने ये बड़ा एक्शन बांग्लादेश के खिलाफ लिया है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, पिछले महीने ढाका द्वारा कुछ भारतीय उत्पादों पर लगाए गए इसी प्रकार के प्रतिबंधों के जवाब में ये कदम उठाया गया है. बीते साल 2024 के अंत से ही बांग्लादेश ने भारतीय सामनों पर व्यापार प्रतिबंधों को बढ़ाना शुरू कर दिया था और पिछले महीने अप्रैल 2025 में बांग्लादेश ने 5 प्रमुख लैंड पोर्ट्स के जरिए भारतीय धागे के आयात पर बैन लगाया था और इसके साथ ही दर्जनों अन्य सामानों को भी प्रतिबंधित किया था. यही नहीं ढाका द्वारा भारतीय कार्गो पर प्रति टन प्रति किलोमीटर 1.8 टका की ट्रांसिट फीस लगाने से मामला और भी जटिल हो गया था.   recent visitors 63

एमपी पुलिस हेडक्वॉर्टर्स में 400 लिपिक पदों पर होगी भर्ती, कर्मचारी चयन मंडल के माध्यम से

भोपाल  मध्य प्रदेश पुलिस मुख्यालय में सात वर्षों के अंतराल के बाद लिपिकीय संवर्ग में 400 पदों पर भर्ती की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। यह प्रस्ताव मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल (MPESB) को भेजा गया है, जिससे यह भर्ती प्रक्रिया जल्द ही शुरू हो सके। इससे पहले वर्ष 2018 में इन पदों पर नियुक्तियां की गई थीं। पदों पर कार्यरत पुलिसकर्मियों की वापसी अभी इन रिक्त पदों पर जिला पुलिस बल के जनरल ड्यूटी वाले पुलिसकर्मियों को पदस्थ कर काम लिया जा रहा है। भर्ती के बाद इन पुलिसकर्मियों को वापस उनके जिलों में भेजा जाएगा, जिससे जिलों में पुलिस बल की कमी पूरी की जा सकेगी। कंप्यूटर दक्षता की आवश्यकता इन पदों के लिए उम्मीदवारों को कंप्यूटर की बुनियादी जानकारी होना अनिवार्य होगा। इससे यह सुनिश्चित होगा कि लिपिकीय कार्यों के लिए दक्ष कर्मचारी मिल सकेंगे, जो कार्यालयीन कार्यों को प्रभावी ढंग से कर सकें। पदस्थापना और प्रशिक्षण की प्रक्रिया भर्ती के बाद चयनित कर्मचारियों को पुलिस मुख्यालय की विभिन्न शाखाओं में आवश्यकतानुसार पदस्थ किया जाएगा। उन्हें उनके कार्यों में दक्षता प्राप्त करने के लिए प्रशिक्षण भी प्रदान किया जाएगा, ताकि वे अपने कार्यों को पूरी निष्ठा और क्षमता से कर सकें। भर्ती प्रक्रिया की समयसीमा पुलिस मुख्यालय के अधिकारियों के अनुसार, भर्ती प्रक्रिया जल्द ही शुरू की जाएगी। चयनित कर्मचारियों की नियुक्ति के बाद, जिला पुलिस बल के जिन पुलिसकर्मियों को पुलिस मुख्यालय में लगाया गया है, उन्हें वापस जिलों में भेज दिया जाएगा, जिससे जिलों में पुलिस बल की कमी पूरी की जा सकेगी। भविष्य में नियमित भर्ती की योजना पुलिस मुख्यालय ने भविष्य में लिपिकीय संवर्ग में नियमित भर्ती की योजना बनाई है, ताकि कार्यालयीन कार्यों में दक्षता बनी रहे और पुलिस बल की कार्यकुशलता में वृद्धि हो। इससे प्रदेश के विभिन्न जिलों में पुलिस बल की कमी को भी दूर किया जा सकेगा। recent visitors 55

हम खुद 140 करोड़ है, भारत कोई धर्मशाला नहीं, जहां दुनिया भर के शरणार्थी घुस आएं: सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्‍ली सुप्रीम कोर्ट ने शरणार्थियों को लेकर बड़ी टिप्पणी की है. कोर्ट ने एक मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि भारत कोई धर्मशाला नहीं है. दुनिया भर से आए शरणार्थियों को भारत में शरण क्यों दें? हम 140 करोड़ लोगों के साथ संघर्ष कर रहे हैं. हम हर जगह से आए शरणार्थियों को शरण नहीं दे सकते. सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस दीपांकर दत्ता ने श्रीलंका से आए तमिल शरणार्थी को हिरासत में लिए जाने के मामले में हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए ये बात कही.   तुरंत भारत छोड़ देना… सुप्रीम कोर्ट में श्रीलंका के एक नागरिक की हिरासत के खिलाफ याचिका दाखिल की गई थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर दखल देने से इनकार कर दिया. पीठ मद्रास हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई कर रही थी. इसमें निर्देश दिया गया था कि याचिकाकर्ता को UAPA मामले में लगाए गए 7 साल की सजा पूरी होते ही तुरंत भारत छोड़ देना चाहिए. जस्टिस दीपांकर दत्ता के नेतृत्व वाली बेंच में जस्टिस के. विनोद चंद्रन भी शामिल थे। श्रीलंकाई तमिल ने मद्रास हाई कोर्ट के उस फैसले के खिलाफ अर्जी दाखिल की थी, जिसमें कहा गया था कि अपनी 7 साल की सजा पूरी होने के तुरंत बाद वह देश से निकल जाए। शख्स को UAPA के एक केस में 7 साल कैद की सजा मिली थी। लेकिन श्रीलंकाई तमिल ने सजा पूरी होने के बाद भारत में ही रहने की इच्छा जाहिर की। उसके वकील ने अदालत से कहा कि मेरा मुवक्किल वीजा लेकर भारत आया था। अब यदि वह अपने देश वापस गया तो फिर उसकी जान को खतरा होगा। उन्होंने कहा कि शख्स को बिना किसी डिपोर्टेशन की प्रक्रिया के ही करीब तीन सालों से हिरासत में रखा गया है। इस पर जस्टिस दीपांकर दत्ता ने कहा, 'आखिर आपका यहां बसने का क्या अधिकार है?' इस पर याची के वकील ने कहा कि वह एक शरणार्थी हैं और उनके बच्चे एवं पत्नी पहले से ही भारत में सेटल हैं। इस पर जस्टिस दत्ता ने कहा कि याची को भारत छोड़ने का आदेश देने में किसी भी तरह से आर्टिकल 21 का उल्लंघन नहीं हुआ है। जस्टिस दत्ता ने कहा कि आर्टिकल 19 के तहत भारत में बसने का अधिकार सिर्फ यहां के नागरिक को ही है। किसी भी बाहरी व्यक्ति के पास कोई अधिकार नहीं है कि वह आए और यहां बस जाए। इस पर वकील ने कहा कि मेरे मुवक्किल यदि अपने देश वापस लौटे तो उनकी जान को खतरा होगा। इस पर जस्टिस दत्ता ने कहा कि वह किसी और मुल्क में जा सकते हैं। रोहिंग्या रिफ्यूजी वाली अर्जी भी सुप्रीम कोर्ट ने की थी खारिज बता दें कि रोहिंग्या रिफ्यूजियों के मामले में भी हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने दखल देने से इनकार कर दिया था। दरअसल याची को 2015 में लिट्टे से जुड़े होने के आरोप में अरेस्ट किया गया था। 2018 में शख्स को ट्रायल कोर्ट ने दोषी करार दिया था और 10 साल की कैद की सजा दी थी। इस फैसले के खिलाफ उसने हाई कोर्ट में अपील की थी, जिसके बाद उसकी सजा 7 साल हो गई। इसके साथ ही यह आदेश भी उच्च न्यायालय ने दिया था कि वह सजा पूरी होते ही देश छोड़ देगा। अब देश छोड़ने के फैसले के खिलाफ याची ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया, लेकिन अदालत ने राहत देने से साफ इनकार कर दिया। जस्टिस दत्ता ने पूछा कि यहां बसने का आपका क्या अधिकार है? वकील ने दोहराया कि याचिकाकर्ता एक शरणार्थी है। जस्टिस दत्ता ने कहा कि अनुच्छेद-19 के अनुसार, भारत में बसने का मौलिक अधिकार केवल नागरिकों को ही प्राप्त है। जब वकील ने कहा कि याचिकाकर्ता को अपने देश में जान का खतरा है, तो जस्टिस दत्ता ने कहा कि किसी दूसरे देश में चले जाइए। बता दें, साल 2015 में याचिकाकर्ता को दो अन्य लोगों के साथ LTTE ऑपरेटिव होने के संदेह में गिरफ्तार किया गया था। साल 2018 में याचिकाकर्ता को UAPA की धारा-10 के तहत अपराध के लिए ट्रायल कोर्ट द्वारा दोषी ठहराया गया था और उसे दस साल की कैद की सजा सुनाई गई थी।   मद्रास हाई कोर्ट ने साल 2022 में उसकी सजा को घटाकर साल साल कर दिया था, लेकिन निर्देश दिया कि उसे अपनी सजा के तुरंत बाद भारत छोड़ना होगा और भारत छोड़ने तक शरणार्थी शिविर में रहना चाहिए। recent visitors 51

पंडित धीरेंद्र शास्त्री करेंगे 131 किमी पैदल यात्रा, बाबा बागेश्वर बोले- 5 करोड़ लोगों से करेंगे संवाद

छतरपुर  बाबा बागेश्वर एक और पदयात्रा शुरू करने वाले हैं। यह यात्रा 131 किलोमीटर की होगी। यात्रा दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश से होकर गुजरेगी। बाबा बागेश्वर ने यह घोषणा हरियाणा के पानीपत में एक कथा के दौरान की। उनकी पहली पदयात्रा नवंबर 2024 में हुई थी। इस यात्रा का उद्देश्य भारत को हिंदू राष्ट्र बनाना है। बाबा बागेश्वर का कहना है कि वह गरीब लोगों तक पहुंचना चाहते हैं, जो किराया न होने के कारण बागेश्वर धाम नहीं आ पाते। उन्होंने यह भी कहा कि वह किसी भी कीमत पर अपने धर्म से समझौता नहीं करेंगे। 7 नवंबर से शुरू होगी पदयात्रा बागेश्वर महाराज एक बार फिर पदयात्रा पर निकलने वाले हैं। यह उनकी दूसरी पदयात्रा होगी। पहली पदयात्रा 2024 में निकाली गई थी। इस बार की यात्रा 131 किलोमीटर लंबी होगी। यह यात्रा 7 नवंबर से शुरू होगी। यात्रा दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के लगभग 400 गांवों और शहरों से गुजरेगी। अनुमान है कि इस क्षेत्र में पांच करोड़ लोग रहते हैं। बाबा बागेश्वर का कहना है कि इस यात्रा का मकसद भारत को हिंदू राष्ट्र बनाना है। यात्रा का उद्देश्य: भारत को हिंदू राष्ट्र बनाना बाबा बागेश्वर ने साफ कहा कि यह यात्रा भारत को पूरी तरह से हिंदू राष्ट्र बनाने के लिए निकाली जा रही है। उनका उद्देश्य है देशभर के गांवों और गरीब तबकों तक अपनी बात पहुंचाना, जो बड़े अधिकारियों के साथ नहीं मिल पाते। पहले की थी 160 किमी की यात्रा पिछले साल नवंबर में बाबा बागेश्वर ने 160 किलोमीटर की पदयात्रा निकाली थी। इस यात्रा में लाखों सनातनी हिंदू, व्यास पीठ, राजपीठ, फिल्म और उद्योग जगत के लोग, साथ ही सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हुए थे। 2025 की यात्रा 10 दिन की होगी और लगभग 5 करोड़ की आबादी वाले क्षेत्र से गुजरेगी, जिसमें तीन बड़े राज्य और दिल्ली शामिल हैं। पानीपत में तीन दिवसीय हनुमंत कथा का आयोजन हरियाणा के कपड़ा नगर पानीपत में बागेश्वर महाराज की श्री हनुमंत कथा का तीन दिवसीय आयोजन हुआ। इसमें नगरवासी और हरियाणा के शिक्षा मंत्री महिपाल टंडा भी उपस्थित थे। कथा के प्रथम दिन बाबा बागेश्वर ने यह यात्रा शुरू करने की घोषणा की। उन्होंने बताया कि कैसे वह गरीबों तक पहुंचना चाहते हैं जो उनके धाम तक नहीं आ पाते। खुद चलकर लोगों के घर पहुंचेंगे बाबा बागेश्वर पानीपत में कथा के दौरान बाबा बागेश्वर ने इस यात्रा की घोषणा की। उन्होंने कहा कि बहुत से गरीब लोग बागेश्वर धाम तक नहीं पहुंच पाते। वे VIP प्रोटोकॉल और पुलिस के कारण उनसे नहीं मिल पाते। इसलिए, वह खुद चलकर उनके घर जाएंगे और उन्हें गले लगाएंगे। धर्मांतरण कराने वालों पर हमला बाबा बागेश्वर ने किसी समुदाय का नाम लिए बिना कहा, 'हालेलुयाह कहने वाले कान खोलकर सुन लो, हम वो हिंदू हैं जो गोली खा लेते हैं, लेकिन कलमा नहीं पढ़ते। सर कटा लेते हैं, लेकिन वतन को मिटने नहीं देते।' उन्होंने यह भी कहा कि वह 10 रुपये के लिए दुकान का नाम बदलने वालों में से नहीं हैं। वह जैसे हैं, वैसे ही रहेंगे और भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने तक चैन से नहीं बैठेंगे। सफल रही थी पहली यात्रा उनकी पहली पदयात्रा 160 किलोमीटर की थी। यह यात्रा नवंबर 2024 में निकाली गई थी। उस यात्रा में भारत और विदेशों से लाखों हिंदू शामिल हुए थे। फिल्म जगत, उद्योग जगत और समाज सेवा से जुड़े लोग भी इस यात्रा में शामिल हुए थे। 10 दिन चलेगी इस बार यात्रा इस बार की यात्रा 10 दिनों तक चलेगी। बाबा बागेश्वर का कहना है कि यह यात्रा भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने के लिए एक आंदोलन है। उनका कहना है कि बड़े लोग तो VIP प्रोटोकॉल के साथ उनसे मिल लेते हैं, लेकिन गरीब लोग उनसे नहीं मिल पाते। इसलिए, वह खुद उनके पास जाएंगे। recent visitors 36

महिला सशक्तिकरण और स्वावलम्बन पर केंद्रित सम्मेलन में होगा लेंगी एक लाख महिलाएं

प्रधानमंत्री मोदी 31 मई को भोपाल में महिला सम्मेलन को करेंगे संबोधित : मुख्यमंत्री डॉ. यादव लोकमाता देवी अहिल्या बाई होलकर के 300वें जयंती वर्ष को समर्पित होगा सम्मेलन लोकमाता देवी अहिल्या को समर्पित डाक टिकट और सिक्के का विमोचन महिला सशक्तिकरण और स्वावलम्बन पर केंद्रित सम्मेलन में होगा लेंगी एक लाख महिलाएं महिलाएं संभालेंगी सम्मेलन की व्यवस्था मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बैठक में दिए निर्देश भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेशवासियों के लिए यह गर्व और प्रसन्नता का विषय है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का 31 मई को भोपाल आगमन प्रस्तावित है। प्रधानमंत्री मोदी भोपाल के जम्बूरी मैदान में महिला सम्मेलन को संबोधित करेंगे। लोकमाता देवी अहिल्या बाई होलकर के 300वें जयंती वर्ष के शुभारंभ का प्रतीक यह सम्मेलन महिला सशक्तिकरण और स्वावलम्बन को समर्पित होगा। सम्मेलन में लगभग एक लाख महिलाएं भाग लेंगी। कार्यक्रम का संयोजन प्रदेश के पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा किया जा रहा है, इसमें भारत सरकार का संस्कृति मंत्रालय भी सहयोग करेगा। कार्यक्रम में भारत सरकार की ओर से लोकमाता देवी अहिल्या बाई होल्कर को समर्पित डाक टिकट और सिक्के का विमोचन भी प्रस्तावित है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव, मुख्यमंत्री निवास स्थित समत्व भवन में बैठक को संबोधित कर रहे थे। बैठक में परिवहन एवं स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह, संस्कृति, पर्यटन धार्मिक न्यास और धर्मस्व मंत्री धर्मेन्द्र सिंह लोधी, मुख्य सचिव अनुराग जैन तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी का विजन ही राज्य शासन का मिशन है। उन्होंने ज्ञान के कल्याण के अंतर्गत गरीब-युवा-किसान और नारी सशक्तिकरण के लिए मिशन आरंभ किए हैं। प्रदेश में नारी सशक्तिकरण के लिए संचालित सभी प्रमुख गतिविधियों और उपलब्धियों को महिला सम्मेलन में प्रदर्शित किया जाएगा। सम्मेलन में स्व सहायता समूहों के नवाचारों, उद्योग-रोजगार और स्टार्ट-अप में महिलाओं द्वारा की जा रही पहल, सेव सिटी प्रोजेक्ट सहित विभिन्न विभागों द्वारा महिलाओं के लिए संचालित योजनाओं और कार्यक्रमों पर केंद्रित स्टॉल लगाए जाएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में महिलाएं, नगरीय निकायों- पंचायतों, शासकीय सेवाओं और स्व सहायता समूहों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। इंजीनियरिंग, चिकित्सा और शिक्षण सहित सभी विशेषज्ञतापूर्ण गतिविधियों में भी महिलाओं का योगदान बढ़ा है। प्रधानमंत्री मोदी की उपस्थिति में हो रहे महिला सम्मेलन के अंतर्गत मंच संचालन, क्रॉउड मैनेजमेंट, यातायात प्रबंधन, मीडिया प्रबंधन और सुरक्षा सहित सम्पूर्ण व्यवस्था की कमान महिलाओं को सौंपी जाए। यह पहल प्रदेश में महिला सशक्तिकरण का प्रभावी उदाहरण प्रस्तुत करेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सम्मेलन में पधार रहीं महिलाओं के सुगम आगमन-प्रस्थान, उचित बैठक व्यवस्था के साथ ही पेयजल और खान-पान की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए।   recent visitors 50

सुशासन तिहार: सीएम साय ने लगाई पीएचई के सब इंजीनियर को फटकार

  जीपीएम छत्तीसगढ़ सरकार के सुशासन तिहार का तीसरे चरण जारी है. मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का हेलीकॉप्टर आज जीपीएम जिले के चुकतीपानी गांव में उतरा. मुख्यमंत्री ने ग्रामीणों से सीधा संवाद किया और सरकारी योजनाओं का फीडबैक लिया. ग्रामीणों ने गांव में पेयजल व्यवस्था की समस्या से अवगत कराया. जिसपर मुख्यमंत्री ने चौपाल के बीच जल जीवन मिशन के काम में लापरवाही से नाराज होकर पीएचई के सब इंजीनियर को जमकर फटकार लगाई. उन्होंने कहा कि काम करो या फिर सस्पेंड होने के लिए तैयार रहो. सुशासन तिहार के बीच मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का अलग-अलग अंदाज देखने को मिला. सीएम साय ने कड़े लहजे में पीएचई के सब इंजनियर को फटकार लगाते हुए कहा कि “या तो ईमानदारी से काम करो या फिर सस्पेंड होने को तैयार रहो. ये सरकार का काम है, कोई मजाक नहीं. गेट आउट…“ इस विशेष अभियान में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय अलग-अलग जिलों में बिना पूर्व सूचना के पहुंच रहे हैं. इसी कड़ी में आज मुख्यमंत्री साय का हेलीकॉप्टर जीपीएम जिले के चुकतीपानी गांव में उतरा है. सीएम साय के आगमन पर ग्रामीणों ने उनका पुष्प गुच्छ भेंट कर स्वागत किया. आदिवासी बाहुल्य गांव, चुकतीपानी में सीएम साय ने आज चौपाल लगाई और ग्रामीणों से सरकार के विभिन्न योजनाओं का फीडबैक लिया. चुकतीपानी में मुख्यमंत्री की घोषणा बता दें कि 5 मई से ‘सुशासन तिहार’ के तीसरे चरण की शुरुआत हो चुकी है. मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय 31 मई तक आकस्मिक दौरे पर निकलेंगे। इस विशेष अभियान के दौरान मुख्यमंत्री किसी भी समय, किसी भी जिले या गांव में अचानक पहुंच सकते हैं. सीएम साय का दौरा पूरी तरह गोपनीय रखा गया है. स्थानीय प्रशासन से लेकर आम जनता तक, किसी को भी इस बात की जानकारी नहीं होगी कि मुख्यमंत्री साय कब और कहां पहुंचेंगे. सीएम साय किसी भी जिले में पहुंचकर आमजनों से सीधे संवाद करेंगे और ग्रामीणों से मिलकर योजनाओं के क्रियान्वयन का फीडबैक लेंगे. वे समाधान शिविरों में भी शामिल होंगे और लोगों की समस्याओं को मौके पर ही सुनकर समाधान की दिशा में कार्य करेंगे. recent visitors 46