प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कल नई दिल्ली के भारत मंडपम में वर्ल्ड टेलीकम्युनिकेशन स्टैंडर्डाइजेशन असेंबली का करेंगे उद्घाटन

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंगलवार सुबह 10 बजे नई दिल्ली के भारत मंडपम में वर्ल्ड टेलीकम्युनिकेशन स्टैंडर्डाइजेशन असेंबली (डब्ल्यूटीएसए) 2024 का उद्घाटन करेंगे जिसका आयोजन अंतर्राष्ट्रीय दूरसंचार संघ द्वारा किया जा रहा है। पीएम नरेंद्र मोदी कार्यक्रम के दौरान इंडिया मोबाइल कांग्रेस 2024 के आठवें संस्करण का भी उद्घाटन करेंगे। वर्ल्ड टेलीकम्युनिकेशन स्टैंडर्डाइजेशन असेंबली (डब्ल्यूटीएसए) अंतर्राष्ट्रीय दूरसंचार संघ (आईटीयू) के मानकीकरण कार्य के लिए शासी सम्मेलन है, जो संयुक्त राष्ट्र की डिजिटल प्रौद्योगिकी एजेंसी है। यह सम्मेलन हर चार साल में आयोजित किया जाता है। पहली बार इसका आयोजन भारत और एशिया-प्रशांत क्षेत्र में किया जाएगा। यह एक महत्वपूर्ण वैश्विक आयोजन है। इसमें 190 से ज्यादा देशों के तीन हजार से अधिक उद्यमी, नीति-निर्माता और तकनीकी विशेषज्ञ शामिल होंगे, जो दूरसंचार, डिजिटल और आईसीटी क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करेंगे। डब्ल्यूटीएसए 2024 एक ऐसा मंच प्रदान करेगा जहां देश को अगली पीढ़ी की महत्वपूर्ण तकनीकों जैसे 6जी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), आईओटी, बिग डेटा, साइबर सुरक्षा आदि के मानकों के भविष्य पर चर्चा की जाएगी। भारत में इस कार्यक्रम की मेजबानी करने से देश को वैश्विक दूरसंचार एजेंडे को आकार देने और भविष्य की प्रौद्योगिकियों की दिशा निर्धारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने का अवसर मिलेगा। भारतीय स्टार्टअप और अनुसंधान संस्थान बौद्धिक संपदा अधिकार और मानक आवश्यक पेटेंट विकसित करने में महत्वपूर्ण अंतर्दृष्टि प्राप्त करने के लिए तैयार हैं। इंडिया मोबाइल कांग्रेस 2024 में भारत के इनोवेशन इकोसिस्टम का प्रदर्शन होगा, जिसमें प्रमुख दूरसंचार कंपनियां और नवप्रवर्तनकर्ता क्वांटम तकनीक, सर्कुलर इकोनॉमी, 6जी, 5जी, क्लाउड और एज कंप्यूटिंग, आईओटी, सेमीकंडक्टर, साइबर सुरक्षा, ग्रीन टेक, सैटकॉम और इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में नवाचार और प्रगति का प्रदर्शन करेंगे। इंडिया मोबाइल कांग्रेस, एशिया का सबसे बड़ा डिजिटल तकनीकी मंच, दुनिया भर में उद्योग, सरकार, अकादमिक, स्टार्टअप और अन्य प्रमुख हितधारकों के लिए नवीनतम समाधान, सेवाएं और आधुनिक उपयोग के मामलों को प्रदर्शित करने का एक जाना-माना प्लेटफॉर्म बन गया है। इंडिया मोबाइल कांग्रेस 2024 में 400 से अधिक प्रदर्शकों, लगभग 900 स्टार्टअप और 120 से ज्यादा देशों की भागीदारी होगी। इस आयोजन का उद्देश्य 900 से अधिक तकनीकी उपयोग परिदृश्यों का प्रदर्शन करना, 100 से अधिक सत्र और चर्चाएं आयोजित करना है, जिसमें 600 से अधिक वैश्विक और भारतीय वक्ता शामिल होंगे। recent visitors 85

दिवाली से पहले मिल सकता है 1 करोड़ केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए DA में 3% की बढ़त का तोहफा

नई दिल्ली देश में करीब 1 करोड़ केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए एक महत्वपूर्ण खुशखबरी सामने आई है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, केंद्र सरकार दिवाली से पहले इन कर्मचारियों के महंगाई भत्ते (DA) में 3% की बढ़ोतरी करने की योजना बना रही है। यह बढ़ोतरी कर्मचारियों के लिए लंबे समय से अपेक्षित थी, और इसकी घोषणा 25 अक्टूबर तक की जा सकती है। DA की वर्तमान स्थिति फिलहाल, केंद्रीय कर्मचारियों का महंगाई भत्ता 50% है। यदि यह 3% की बढ़ोतरी लागू होती है, तो DA बढ़कर 53% हो जाएगा। इस बढ़ोतरी से न केवल कर्मचारियों को लाभ होगा, बल्कि उन्हें जुलाई, अगस्त और सितंबर महीनों का एरियर भी प्राप्त होगा। इससे उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार होगा और त्योहारों के समय उन्हें वित्तीय राहत मिलेगी। कैबिनेट की मंजूरी इस प्रस्ताव को लेकर बताया जा रहा है कि केंद्र सरकार ने कर्मचारियों की सैलरी बढ़ाने का पूरा प्लान तैयार कर लिया है। कैबिनेट की बैठक में इस पर चर्चा की जाएगी, जिसके बाद इसे आधिकारिक रूप से मंजूरी दी जाएगी। कैबिनेट द्वारा मंजूरी मिलने के बाद, जल्द ही कर्मचारियों के खातों में नया DA और एरियर का पैसा ट्रांसफर किया जा सकता है। हिमाचल प्रदेश और यूपी सरकार की पहल दिवाली के इस समय, अन्य राज्यों में भी कर्मचारियों के लिए महंगाई भत्ते में बढ़ोतरी की खबरें आई हैं। हाल ही में, हिमाचल प्रदेश सरकार ने अपने राज्य के सरकारी कर्मचारियों के लिए 4% महंगाई भत्ते की बढ़ोतरी की घोषणा की है। इससे राज्य के 1.80 लाख सरकारी कर्मचारियों और 1.70 लाख पेंशनभोगियों को लाभ मिलेगा। यह कदम दशहरा से पहले उठाया गया, जिससे कर्मचारियों को त्योहार के मौसम में अतिरिक्त वित्तीय सहायता मिली। इसी तरह, उत्तर प्रदेश सरकार ने मार्च 2024 में अपने राज्य के सरकारी कर्मचारियों के महंगाई भत्ते में 4% की बढ़ोतरी की थी। ये सभी पहलें दर्शाती हैं कि राज्य सरकारें भी अपने कर्मचारियों के कल्याण के प्रति गंभीर हैं और उन्हें आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रही हैं। महंगाई भत्ते की गणना की प्रक्रिया महंगाई भत्ते की गणना अखिल भारतीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (AICPI) के आधार पर की जाती है। AICPI, देश में खुदरा मूल्य आंदोलनों को ट्रैक करता है, और इस सूचकांक का नियमित रूप से संशोधन किया जाता है। महंगाई भत्ता साल में दो बार, आमतौर पर जनवरी और जुलाई में, संशोधित किया जाता है। जब भी महंगाई में वृद्धि होती है, तो इससे कर्मचारियों के DA में भी बढ़ोतरी की जाती है।   कर्मचारियों की मांग कर्मचारी संगठन लंबे समय से महंगाई भत्ते में वृद्धि की मांग कर रहे थे। इस संदर्भ में, सरकार की इस पहल को बहुत सकारात्मक रूप में देखा जा रहा है। अगर यह प्रस्ताव कैबिनेट से मंजूरी पा जाता है, तो इसे सरकारी कर्मचारियों के लिए एक महत्वपूर्ण वित्तीय मदद माना जाएगा। त्योहारों का महत्व त्योहारों का समय हमेशा से लोगों के लिए खुशी और उत्सव का समय होता है। दिवाली, जो भारत में सबसे बड़े त्योहारों में से एक है, इस समय महंगाई भत्ते में बढ़ोतरी होने से कर्मचारियों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण होगी। यह बढ़ोतरी उन्हें अपने परिवार के साथ बेहतर तरीके से त्योहार मनाने में मदद करेगी। कुल मिलाकर, महंगाई भत्ते की प्रस्तावित बढ़ोतरी न केवल सरकारी कर्मचारियों के लिए, बल्कि उनके परिवारों के लिए भी खुशियों का कारण बनेगी। दिवाली से पहले इस खुशी की उम्मीद करना न केवल उचित है, बल्कि इससे कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति भी मजबूत होगी। इस फैसले से ना केवल कर्मचारियों को वित्तीय राहत मिलेगी, बल्कि यह उन्हें अपने काम में और भी प्रेरित करेगा। सरकार की इस पहल से सरकारी कर्मचारियों में सकारात्मकता और उत्साह बढ़ेगा, जो समाज के लिए एक अच्छी खबर है। recent visitors 68

अंतरिक्ष में जोड़े जाएंगे स्पेसक्राफ्ट के हिस्से, ISRO बड़े प्रयोग की तैयारी, रचेगा इतिहास

नई दिल्ली ISRO चीफ डॉ. एस. सोमनाथ ने खुलासा किया है कि दिसंबर में इसरो SPADEX (Space Docking Experiment) मिशन कर सकता है. क्योंकि चंद्रयान-4 (Chandrayaan-4) के लिए अंतरिक्ष में डॉकिंग बहुत जरूरी तकनीक है. डॉकिंग मतलब जो अलग-अलग हिस्सों को एकदूसरे की तरफ लाकर उसे जोड़ना. इस समय SPADEX के सैटेलाइट्स का इंटीग्रेशन हो रहा है. एक महीने में ये बनकर तैयार हो जाएंगे. इसके बाद इनकी टेस्टिंग वगैरह होगी. सिमुलेशन होंगे. उम्मीद है कि इसरो इसे 15 दिसंबर 2024 या उससे पहले लॉन्च करे. यह मिशन अंतरिक्ष में डॉकिंग प्रोसेस पूरा करने की पहली सीढ़ी होगी. SPADEX मिशन क्यों है जरूरी? अंतरिक्ष में दो अलग-अलग चीजों को जोड़ने की ये तकनीक ही भारत को अपना स्पेस स्टेशन बनाने में मदद करेगी. साथ ही चंद्रयान-4 प्रोजेक्ट में भी हेल्प करेगी. स्पेडेक्स यानी एक ही सैटेलाइट के दो हिस्से होंगे. इन्हें एक ही रॉकेट में रखकर लॉन्च किया जाएगा. अंतरिक्ष में ये दोनों अलग-अलग जगहों पर छोड़े जाएंगे. धरती की निचली कक्षा में प्रयोग इसके बाद इन दोनों हिस्सों को धरती से निचली कक्षा में जोड़ा जाएगा. ताकि ये फिर से एक यूनिट बन जाएं. इस पूरे प्रोसेस कई तरह के काम होंगे- जैसे दोनों अलग-अलग हिस्से एकदूसरे को खुद से अंतरिक्ष में खोजेंगे. उनके पास आएंगे. ताकि एक ही ऑर्बिट में आ सकें. इसके बाद दोनों एकदूसरे से जुड़ जाएंगे. इसरो के आगे के मिशन क्या होंगे? इसके बाद इसरो गगनयान के दो टेस्ट करेगा. पहला टेस्ट व्हीकल डिमॉन्स्ट्रेशन-2 (TVD2) और पहला मानवरहित मिशन (G1). इस दौरान इंटीग्रेटेड एयर ड्रॉप टेस्ट और पैड अबॉर्ट टेस्ट भी किए जाएंगे. G1 मिशन में ह्यूमेनॉयड व्योममित्र (Vyomitra) महिला रोबोट भी जाएगी. ताकि उसके ऊपर पड़ने वाले असर की स्टडी की जा सके. G1 में एक सीट पर व्योममित्र और दूसरे पर एनवायरमेंटल कंट्रोल एंड लाइफ सपोर्ट सिस्टम (ECLSS) होगा. इन दोनों के डेटा का एनालिसिस किया जाएगा. ताकि यह पता चल सके कि अंतरिक्ष में इंसानों पर क्या असर होगा. और इलेक्ट्रॉनिक्स, हार्डवेयर, सॉफ्टवेयर आदि पर क्या फर्क पड़ेगा.   recent visitors 75

रूस के काजान में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से पहले सदस्यता लेने की मची होड़, 34 देशों की सदस्यता पर नई रार

नई दिल्ली रूस के काजान में इसी महीने 22 से 24 अक्तूबर के बीच ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन आयोजित होने जा रहा है। उससे पहले ब्रिक्स की सदस्यता लेने की होड़ सी मच गई है। पाकिस्तान, तुर्की, म्यांमार, सीरिया, फिलिस्तीन समेत कुल 34 देशों ने ब्रिक्स की सदस्यता के लिए आवेदन दिया है। बड़ी बात यह है कि हिंसा प्रभावित सीरिया, म्यांमार और फिलिस्तीन ने भी आवेदन दिया है। मीडिया रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि आगामी शिखर सम्मेलन में 10 नए सदस्यों और 10 पार्टनर को इस संगठन में शामिल किया जा सकता है। बता दें कि भारत,ब्राजील, रूस, चीन और दक्षिण अफ्रीका इसके संस्थापक सदस्य देश हैं। जनवरी 2024 में इस समूह का विस्तार हुआ था। अब इसमें मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) भी शामिल हैं। न्‍यू इंडियन एक्‍सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक काजान में होने वाली बैठक में आम सहमति बनने के बाद ही नए सदस्‍यों का ऐलान किया जाएगा। कहा जा रहा है कि भारत ब्रिक्स में नए सदस्यों को शामिल करने का फिलहाल पक्षधर नहीं है, जबकि चीन क्षेत्रीय दबदबा मजबूत करने और अपने एजेंडे को साधने के लिए ब्रिक्स का विस्तार करना चाहता है। चीन इस एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए रूस को अपने साथ ला सकता है। किन-किन देशों ने किया है आवेदन रिपोर्ट्स के मुताबिक, जिन 34 देशों ने ब्रिक्स की सदस्यता के लिए आवेदन दिया है, उनमें अल्‍जीरिया, अजरबैजान, बहरीन, बांग्‍लादेश, बेलारूस, बोलिव‍िया, क्‍यूबा, चाड, इंडोनेशिया, कजाखस्‍तान, कुवैत, पाकिस्‍तान, कुवैत, मलेशिया, लाओस, म्‍यांमार, मोरक्‍को, नाइजीरिया, सेनेगल, दक्षिण सूडान, श्रीलंका, फिलिस्‍तीन, सीरिया, थाइलैंड, तुर्की, यूगांडा, वेनेजुएला, वियतनाम और जिंबाब्‍वे शामिल हैं। इस लिस्ट में कई ऐसे देश हैं जो चीन के करीबी हैं और उन पर चीन का बहुत ज्यादा प्रभाव है। ये देश चीन के साथ मिलकर अमेरिकी नेतृत्व वाले गठजोड़ और देशों का विरोध करते हैं। अपने फायदे के लिए विस्तार चाहता है चीन विश्लेषकों का मानना है कि चीन ब्रिक्स का इस्तेमाल अपने फायदे के लिए करना चाहता है। इसी कड़ी में श्रीलंका और बांगलादेश का भी नाम जुड़ा है, जो भारत के पड़ोसी देश हैं लेकिन चीन की तरफ झुकाव रखते हैं। चीन चाहता है कि जी-7 के खिलाफ ब्रिक्स को खड़ा किया जाय। वह रूस को आगे कर अपनी चाल चल रहा है। इस वक्त रूस यूक्रेन के खिलाफ युद्ध में फंसा हुआ है और पश्चिमी देशों के साथ लोहा ले रहा है, जबकि चीन उसकी मदद कर रहा है। भारत नहीं चाहता ब्रिक्स का विस्तार भारत और ब्राजील को छोड़कर ब्रिक्स के सभी सदस्य देश चीन के बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (बीआरआई) का हिस्सा हैं। भले ही ब्राजील आधिकारिक तौर पर बीआरआई का हिस्सा नहीं है, लेकिन चीन उसे लुभाने की कोशिश कर रहा है, क्योंकि वह ब्राजील से निर्यात होने वाली चीजों का लगभग एक-तिहाई हिस्सा खरीदता है। ऐसे में भारत का तर्क है कि अभी हाल ही में ब्रिक्स का विस्तार हुआ है, इसलिए अभी रुककर इसके विस्तार पर विचार किया जाना चाहिए। काजान में होने वाले शिखर सम्मेलन में ईरान और तुर्की के भी राष्ट्रपति शामिल होने वाले हैं। भारत की तरफ से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जाने वाले हैं। तीन महीने के अंदर उनकी यह दूसरी रूस यात्रा होगी। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के भी इसमें शामिल होने की संभावना है। दरअसल, ब्रिक्स एक अंतर-सरकारी संगठन है, जिसकी स्थापना 2006 में की गई थी। रूस ने 01 जनवरी, 2024 को ब्रिक्स की अध्यक्षता संभाली। इस वर्ष की शुरुआत रूस, ब्राजील, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के अलावा अब इसमें मिस्र, इथियोपिया, ईरान, संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब शामिल हो चुके हैं। रूस की ब्रिक्स अध्यक्षता निष्पक्ष वैश्विक विकास और सुरक्षा के लिए बहुपक्षवाद को मजबूत करने पर केंद्रित है। अपनी अध्यक्षता के हिस्से के रूप में रूस 200 से अधिक राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक कार्यक्रम आयोजित कर रहा है। recent visitors 58

कोरोना वैक्सीन के साइड इफेक्ट वाली याचिका हुई खारिज, कहा- यह सिर्फ सनसनी फैलाने के लिए है: सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने कोविड वैक्सीन के साइड इफेक्ट्स वाली याचिका को खारिज कर दिया है। याचिका में दावा किया गया था कि कोविड वैक्सीन के इस्तेमाल के बाद से इंसानों के ऊपर साइड इफेक्ट्स (रक्त का थक्का जमना, हार्ट अटैक) दिखाई दे रहे हैं, जिसे लेकर यूके की एक कोर्ट में भी मुकदमा दायर किया गया है। चीफ जस्टिस डीवाई चन्द्रचूड़, जस्टिस जे बी पादरीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की बेंच ने कहा कि जनहित याचिका को खारिज करते हुए कहा कि यह सिर्फ सनसनी फैलाने के लिए है। हमें उस स्थिति के बारे में भी सोचना चाहिए कि अगर वैक्सीन ना ली जाती तो क्या साइड इफेक्ट्स होते। जस्टिस पादरीवाला ने याचिकाकर्ता से सवाल किया कि क्या आपने वैक्सीन ली है? आपको कुछ हुआ है, जिस पर याचिकाकर्ता के वकील ने वैक्सीन लेने की बात को स्वीकार किया लेकिन किसी भी तरह के साइड इफेक्ट से इंकार किया। इस पर बेंच की तरफ से कहा गया कि यह याचिका केवल सनसनी फैलाने का प्रयास लग रही है, इसलिए हम इसे खारिज कर रहे हैं। प्रिया मिश्रा और अन्य याचिकाकर्ताओं द्वारा दायर की गई इस याचिका में सुप्रीम कोर्ट ने मांग की गई थी कि वह मेडिकल विशेषज्ञों की एक समिति से एस्ट्राजेनेका की कोविडशील्ड वैक्सीन और उसके साइड इफेक्ट और जानलेवा जोखिम की जांच करवाएं। इस याचिका में सुप्रीम कोर्ट के सामने यह मांग की रखी गई थी कि इस समिति में दिल्ली एम्स के निदेशक और रिटायर सुप्रीम कोर्ट के जज हों ताकि वैक्सीन के जोखिमों का अध्ययन किया जा सके। इसके अलावा याचिका में यह भी मांग की गई थी कि इस वैक्सीन से जिन लोगों को भी नुकसान हुआ है उनके लिए वैक्सीन डैमेज पेमेंट सिस्टम स्थापित किया जाए, जिसमें मुआवजे की व्यवस्था हो। दरअसल, कोविड वैक्सीन बनाने वाली ब्रिटिश कंपनी एस्ट्राजेनेका ने अप्रैल में कोर्ट में माना था कि वैक्सीन से इंसानों को ऊपर खतरनाक साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं। उन्होंने माना कि वैक्सीन से रक्त के थक्के और प्लेटलेट्स की कमी हो सकती है, हालांकि इसके चांसेज बहुत कम हैं। भारत के सीरम इंस्टीट्यूट ने भी जो कोविडशील्ड वैक्सीन बनाई थी वह एस्ट्राजेनेका के फॉर्मूला पर ही आधारित थी। इसी वैक्सीन की करीब 175 करोड़ से ज्यादा खुराकें तो भारत में दी जा चुकी हैं और करोड़ों की संख्या में यह विदेशों को भी भेजी जा चुकी हैं। recent visitors 65

स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल के निर्देश पर स्वास्थ्य व्यवस्था को बेहतर बनाने का प्रयास सतत रूप से जारी

रायपुर : गर्भवती महिलाओं की सुरक्षित प्रसव के लिए बेहतर सुविधा – स्वास्थ्य मंत्री जायसवाल बलौदाबाजार के जिला अस्पताल में 9 महीने में हुए 462 सिजेरियन सहित 1 हजार 800 से अधिक प्रसव  स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल के निर्देश पर स्वास्थ्य व्यवस्था को बेहतर बनाने का प्रयास सतत रूप से जारी रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के मार्गदर्शन में स्वास्थ्य सुविधाओं एवं संसाधनों में लगातार इजाफा हो रहा है। स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल के निर्देश पर स्वास्थ्य व्यवस्था को बेहतर बनाने का प्रयास सतत रूप से जारी है। इसी कड़ी में बलौदाबाजार में कलेक्टर दीपक सोनी के मार्गदर्शन में जिले में स्वास्थ्य सुविधाओं का विशेष ध्यान रखा जा रहा है। जिला अस्पताल बलौदाबाजार में इस वर्ष जनवरी 2024 से माह सितंबर तक 9 माह में कुल 1816 सफल प्रसव कराए गए हैं। उक्त प्रसव में से 1354 सामान्य प्रसव तथा 462 सिजेरियन शामिल है। सिजेरियन में आकस्मिक और पूर्व नियोजित दोनों ही सम्मिलित हैं। जिला अस्पताल बलौदाबाजार के सिविल सर्जन डॉक्टर के. के. टेम्भूरने ने बताया कि अस्पताल में तीन स्त्री रोग विशेषज्ञों के साथ कुशल प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ अपनी सेवाएं देते हैं। यहाँ आधुनिक सुविधाओं से युक्त प्रसव कक्ष स्थापित है। प्रसव के बाद नवजात शिशु के देखभाल हेतु विशेष एस.एन.सी.यू. भी स्थापित है। उक्त कुल प्रसव में 161 बच्चों को उक्त एस.एन.सी.यू. में भर्ती कर उनकी विशेष देखभाल भी की गई। ग्राम खैरा से माह सितंबर में अपनी 23 वर्षीय पत्नी को प्रसव पीड़ा पर जिला अस्पताल लेकर आएं नोहर पटेल ने बताया कि अस्पताल में आने पर उन्हे बताया गया कि फीटल डिस्ट्रेस की स्थिति है जिसमें भ्रुण तक ऑक्सीजन पहुँचने में दिक्कत होती है और बच्चे की धड़कन बढ़ती है। ऐसे में ऑपेरशन के माध्यम से प्रसव हुआ जिसमें मां और बच्चे दोनों ही स्वस्थ हैं। इसी प्रकार प्रोलांग लेबर (देर तक प्रसव पीड़ा) की स्थिति में आये हुए गिरौदपुरी के पास स्थित ग्राम खोसड़ा के रहने वाले महेंद्र पैकरा ने बताया कि 28 वर्षीय उनकी पत्नी को प्रसव पीड़ा काफी देर से हो रही थी जिस कारण जिला अस्पताल लेकर आया तथा यहाँ ऑपेरशन के माध्यम से प्रसव हुआ। अस्पताल में दवाई और अन्य सुविधाएं निःशुल्क प्राप्त हुई। इस प्रकार के ऑपेरशन का निजी अस्पताल में काफी पैसा खर्च होता, जो बच गया। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी बलौदाबाजार डॉ. राजेश कुमार अवस्थी के अनुसार जिला अस्पताल एन.क्यू.ए.एस. प्रमाण पत्र धारी संस्था है। यह प्रमाण पत्र उच्च गुणवत्त्तापूर्ण सेवाएँ प्रदान करने के कारण राष्ट्रीय स्तर के मूल्यांकन के बाद प्राप्त हुआ है। अस्पताल में प्रसव की इस सुविधा को लगातार बेहतर से और बेहतर करने का प्रयास जारी है, जिससे आम जनता को इसका लाभ प्राप्त हो सके। recent visitors 68

हमारे नागरिकों के हितों की रक्षा के हमारे प्रयासों में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है : जयशंकर

नई दिल्ली विदेश मंत्री एस जयशंकर ने दुनिया के विभिन्न देशों से आज अपील किया कि वे भारत की प्रतिभाओं एवं युवा जनशक्ति का अपने यहां विकास के लिए लाभ लें। डॉ जयशंकर ने यहां सुषमा स्वराज भवन में प्रवासी श्रमिकों के कानूनी एवं सुरक्षित प्रवासन के लिए विदेश मंत्रालय के विदेशी रोज़गार प्रभाग द्वारा विकसित पोर्टल ‘ईमाईग्रेट’ के नये संस्करण के अनावरण के मौके पर यह अपील की। इस मौके पर केन्द्रीय श्रम, रोज़गार, खेल एवं युवा मामलों के मंत्री मनसुख मांडविया और विदेश राज्य मंत्री पवित्र मार्गरीटा भी उपस्थित थे। डॉ जयशंकर ने कहा कि पिछले साल ही सुरक्षित और कानूनी प्रवासन चैनलों के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए विदेश मंत्रालय के अभियान के दौरान प्रधानमंत्री ने 'सुरक्षित जाएं, संरक्षित जाएं' आदर्श वाक्य के साथ एक स्मारक डाक टिकट जारी किया था। आज का कार्यक्रम उस भावना को दर्शाता है क्योंकि यह जीवन को आसान बनाने और जन केंद्रित शासन को बढ़ाने के लिए मोदी सरकार की प्रतिबद्धता की अभिव्यक्ति है। ई-माइग्रेट पोर्टल का शुभारंभ भारतीय श्रमिकों के लिए एक सुरक्षित, अधिक पारदर्शी और समावेशी गतिशीलता बनाने के हमारे निरंतर प्रयासों का एक प्रमाण है और हमारे नागरिकों के हितों की रक्षा के हमारे प्रयासों में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। विदेश मंत्री ने कहा कि जबकि हम भारत की अर्थव्यवस्था और वैश्विक प्रतिष्ठा में अपने प्रवासी श्रमिकों के अमूल्य योगदान को पहचानते हैं, हमें उन कमजोरियों को भी स्वीकार करना चाहिए जिनका वे विदेशी भूमि पर सामना करते हैं। हमारे मिशनों, विशेष रूप से खाड़ी में मिशनों में समर्पित श्रमिक अताशे हैं जो श्रम और अन्य शिकायतों का निवारण सुनिश्चित करते हैं। उन्होंने कहा, “मुझे यह जानकर खुशी हो रही है कि संशोधित ई-माइग्रेट पोर्टल में उनके सामने आने वाली समस्याओं के समाधान के लिए 24 गुणा 7 बहुभाषी हेल्पलाइन नंबर भी हैं, जिनके लिए कभी-कभी तत्काल समाधान की आवश्यकता होती है।” उन्होंने कहा कि यह पाेर्टल एवं मोबाइल ऐप प्रवासी श्रमिकों के लिए अवसरों के द्वार खोल रहा है। भारत सरकार ने उनके लिए रोज़गार के अवसराें के साथ सुरक्षित एवं प्रशिक्षित प्रवासन के सभी उपाय भी मुहैया कराये हैं। विदेश मंत्री ने इस मौके पर मौजूद विदेशी राजनयिकों से अपील की कि वे अपने अपने देशों के विकास की यात्रा में भारत की प्रतिभाओं एवं परिश्रमी युवाओं के कौशल का लाभ उठायें। उन्होंने सभी पक्षकारों से ईमाइग्रेट पोर्टल के उपयोग की भी अपील की। मनसुख मांडविया ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार ने भारत के युवाओं को ना केवल देश में बल्कि विश्व भर में रोज़गार के अवसर सुलभ कराने का संकल्प लिया है और उनका कहना है कि भारत सरकार के सभी मंत्रालयों एवं विभागों को समग्रता में सोचना एवं योजना तैयार करना चाहिए। ईमाइग्रेट पोर्टल उसी सोच का परिणाम है जिसमें श्रम एवं रोज़गार मंत्रालय का नेशनल कैरियर पोर्टल और माई भारत पोर्टल भी जुड़ा है। इससे दुनिया के अन्य देशों को भी भारत की प्रतिभाओं का लाभ उठाने का मौका मिलेगा। ईमाइग्रेट पोर्टल एवं मोबाइल ऐप में डिजीलॉकर, करीब छह लाख कॉमन सर्विस सेंटरों, भाषिणी अनुवाद सेवा, उमंग पोर्टलों को जोड़ा गया है। आर्थिक जांच वांछित (ईसीआर) श्रेणी के 21 देशों और नॉन ईसीआर देशों में काम के लिए इच्छुक कामगार सीधे पंजीकरण करा सकते हैं। विदेशी मिशनों में स्थायी रूप से माइग्रेशन अताशे की नियुक्ति की गयी है जो प्रवासी श्रमिकों की मदद के मुद्दों को देखते हैं।       recent visitors 60