देशभर के मदरसों में पढ़ रहे बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा को लेकर एनसीपीसीआर ने फंडिंग पर रोक लगाने के दिए निर्देश

नई दिल्ली राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) के चेयरपर्सन प्रियंक कानूनगो ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण पत्र जारी किया है, जिसमें उन्होंने देशभर में मदरसों में पढ़ रहे बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा को लेकर सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों और प्रशासकों को निर्देशित किया है। इस पत्र का उद्देश्य मदरसों और बच्चों के संवैधानिक अधिकारों के बीच उत्पन्न हो रहे टकराव को समाप्त करना है। पत्र की मुख्य बातें प्रियंक कानूनगो ने पत्र में उल्लेख किया है कि NCPCR, 2005 के बाल अधिकार संरक्षण अधिनियम के तहत स्थापित एक वैधानिक निकाय है, जिसका मुख्य उद्देश्य बच्चों के अधिकारों की रक्षा करना और इस संदर्भ में विभिन्न मुद्दों की निगरानी करना है। उन्होंने यह भी कहा कि आयोग को 2015 के बाल न्याय (देखभाल और संरक्षण) अधिनियम और 2009 के मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा के अधिकार (RTE) अधिनियम के सही और प्रभावी कार्यान्वयन की निगरानी करने का अधिकार प्राप्त है। पत्र में यह बताया गया है कि RTE अधिनियम का उद्देश्य बच्चों को समान शिक्षा का अवसर प्रदान करना है, लेकिन मदरसों की स्थिति के कारण बच्चों के मौलिक अधिकारों और अल्पसंख्यक समुदायों के अधिकारों के बीच टकराव उत्पन्न हो गया है। धार्मिक संस्थानों को RTE अधिनियम से छूट मिलने के कारण कई बच्चे औपचारिक शिक्षा प्रणाली से बाहर हो गए हैं, जिससे उनके शिक्षा के अधिकार का उल्लंघन हो रहा है। NCPCR की रिपोर्ट का महत्व इस पत्र के साथ NCPCR ने "गार्जियंस ऑफ फेथ या ओप्रेसर्स ऑफ राइट्स: कंस्टीट्यूशनल राइट्स ऑफ चिल्ड्रन वर्सेस मदरसा" शीर्षक से एक विस्तृत रिपोर्ट भी प्रस्तुत की है। इस रिपोर्ट में कुल 11 अध्याय शामिल हैं, जो मदरसों के इतिहास, उनकी कार्यप्रणाली और बच्चों के शिक्षा अधिकारों के उल्लंघन के विभिन्न पहलुओं को छूते हैं। रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट किया गया है कि केवल एक मदरसा बोर्ड का गठन या UDISE कोड प्राप्त करना यह सुनिश्चित नहीं करता कि मदरसे RTE अधिनियम की शर्तों का पालन कर रहे हैं। वित्तीय सहायता पर रोक NCPCR ने सभी राज्यों में मदरसों और मदरसा बोर्डों को राज्य से मिलने वाली वित्तीय सहायता को रोकने और उन्हें बंद करने की सिफारिश की है। आयोग ने यह स्पष्ट किया है कि मदरसा बोर्ड नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं, और ऐसे में इनकी गतिविधियों को नियंत्रित करना अत्यंत आवश्यक है।   बच्चों के दाखिले की दिशा में सुझाव पत्र में यह भी सुझाव दिया गया है कि सभी गैर-मुस्लिम बच्चों को मदरसों से बाहर निकालकर स्कूलों में दाखिल कराया जाए। वहीं, मुस्लिम समुदाय के बच्चों को, चाहे वे मान्यता प्राप्त हों या न हों, औपचारिक स्कूलों में दाखिल कराने की दिशा में कदम उठाने का निर्देश दिया गया है। NCPCR का यह प्रयास बच्चों को एक सुरक्षित, स्वस्थ और उत्पादक वातावरण में बढ़ने का अवसर प्रदान करना है। उनका लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि सभी बच्चे देश के निर्माण की प्रक्रिया में प्रभावी ढंग से योगदान कर सकें। NCPCR की अपेक्षाएँ इस रिपोर्ट की एक प्रति सभी मुख्य सचिवों के लिए संलग्न की गई है, ताकि वे आवश्यक कार्रवाई कर सकें। NCPCR की इस पहल का उद्देश्य बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए मदरसों की फंडिंग पर रोक लगाना है। यह कदम न केवल बच्चों के शिक्षा अधिकारों को सशक्त करेगा, बल्कि समाज में समानता और न्याय को भी बढ़ावा देगा। इस प्रकार, NCPCR ने एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए बच्चों के अधिकारों की रक्षा के लिए ठोस कदम उठाए हैं। यह स्थिति न केवल शिक्षा के अधिकार को बढ़ावा देगी, बल्कि समाज में सामाजिक न्याय और समानता को भी स्थापित करने में सहायक होगी। आयोग की यह पहल इस बात का प्रमाण है कि बच्चों के भविष्य के लिए उचित और सख्त कदम उठाने की आवश्यकता है, ताकि सभी बच्चों को उनके अधिकारों का पूरा लाभ मिल सके और वे एक उज्ज्वल भविष्य की ओर बढ़ सकें। recent visitors 100

दुर्गा पूजा मंडपों में कट्टरपंथियों ने किया इस्लामिक क्रांति का आह्वान, बांग्लादेश में दशहरे का माहौल बिगड़ा!

ढाका बांग्लादेश में हिंदुओं के साथ हो रहे भेदभाव के मामले रूके नहीं थे कि अब दुर्गा पूजा के दौरान भी हिंदुओं को कई परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। 1 अक्टूबर से देश भर में चल रहे दुर्गा पूजा समारोह से संबंधित 35 घटनाएं हुई हैं। इसमें 11 मामले दर्ज किए गए हैं और 17 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। दुर्गा पूजा मंडप से कट्ट्ररपंथियों ने इस्लामिक क्रांति का आह्वान किया है। ढाका ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, आईजीपी मोहम्मद मोइनुल इस्लाम ने कहा कि देश भर में 32,000 से ज्यादा मंडपों में दुर्गा पूजा मनाई जा रही है। 35 घटनाएं सामने आई हैं। हर एक मामले में या तो केस दर्ज किया गया है या जीडी दर्ज की गई है और उसके अनुसार कार्रवाई की गई है। पिछले 11 दिनों में 11 मामले दर्ज किए गए हैं, जबकि मामूली तोड़फोड़ और चोरी जैसी घटनाओं के लिए 24 जीडी दर्ज की गई हैं। अब तक इन घटनाओं में शामिल होने के आरोप में 17 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। मंडप से इस्लामी क्रांति का आह्नान इससे पहले गुरुवार के दिन ढाका से करीब 250 किलोमीटर की दूरी पर चटगांव के दुर्गा पूजा मंडप के मंच पर आधा दर्जन से ज्यादा लोगों ने इस्लामी क्रांति का आह्वान करते हुए एक गीत गाया। इससे लोगों में भारी गुस्सा फैल गया। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, चटगांव मेट्रोपॉलिटन पुलिस ने शुक्रवार को इस्लामी क्रांति का आह्वान करने के आरोप में दो लोगों को अरेस्ट किया है। पूजा समिति के महासचिव सजल दत्ता समेत सात लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। इस मामले पर आईजीपी ने कहा, ‘हमने चटगांव में हुई घटना के सिलसिले में गुरुवार को छापेमारी के बाद दो लोगों को गिरफ्तार किया। घटना का कोई खास मकसद था या नहीं, इसकी जांच की जा रही है। कभी-कभी स्थानीय घटनाएं सूचना के तेजी से फैलने के कारण व्यापक ध्यान आकर्षित करती हैं। हमें छोटी घटनाओं को बड़ी घटनाओं में बदलने से रोकने के लिए सतर्क रहना चाहिए।’ मोहम्मद यूनुस भी मंदिर का करेंगे दौरा पांच दिन के हिंदू धार्मिक उत्सव की शुरुआत बुधवार को देवी दुर्गा के आह्वान के साथ में हुई। इस पूरे कार्यक्रम का समापन रविवार को देवी दुर्गा की मूर्तियों के विसर्जन के साथ में होगा। इसी बीच, नोबेल पुरस्कार विजेता और बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के मुखिया मोहम्मद यूनुस प्रमुख शक्तिपीठों में से एक सदियों पुराने ढाकेश्वरी मंदिर का दौरा करेंगे। बांग्लादेश की आबादी में से 8 फीसदी हिंदुओं की आबादी है। यहां पर शेख हसीना के प्रधानमंत्री पद को छोड़ने के बाद में हिंदुओं को काफी नुकसान झेलना पड़ा है। अंतरिम सरकार के प्रमुख भी जाएंगे मंदिर पांच दिवसीय हिंदू धार्मिक उत्सव की शुरुआत बुधवार को देवी दुर्गा के आह्वान के साथ हुई, जिसे महा षष्ठी कहा जाता है. समारोह का समापन रविवार को देवी दुर्गा की मूर्तियों के विसर्जन के साथ होगा. इस बीच रविवार को मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस राष्ट्रीय राजधानी के मध्य में स्थित प्रमुख शक्तिपीठों में से एक, सदियों पुराने ढाकेश्वरी राष्ट्रीय मंदिर का दौरा करेंगे. बांग्लादेश की 170 मिलियन आबादी में हिंदुओं की संख्या लगभग 8 प्रतिशत हैं जिन्हें 5 अगस्त को प्रधानमंत्री शेख हसीना के निष्कासन के बाद भड़की छात्र-नेतृत्व वाली हिंसा के दौरान भारी नुकसान झेलना पड़ा. इस दौरान हिंदुओं के व्यवसायों और संपत्तियों में तोड़फोड़ की गई और और मंदिरों पर भी हमले किए गए. 17 लोग अरेस्ट अखबार ढाका ट्रिब्यून ने पुलिस महानिरीक्षक (आईजीपी) एमडी मोइनुल इस्लाम के हवाले से बताया, "1 अक्टूबर से, देशभर में चल रहे दुर्गा पूजा समारोह के दौरान 35 अप्रिय घटनाएं हुई हैं, जिसके कारण 11 मामले दर्ज किए गए हैं, 24 सामान्य डायरी (जीडी) दर्ज की गई हैं और 17 व्यक्तियों को गिरफ्तार किया गया है." इस्लाम ने शुक्रवार को ढाका में एक पूजा मंडप का दौरा किया, जिसके बाद उन्होंने संवाददाताओं को बताया कि देश भर में 32,000 से अधिक मंडपों में दुर्गा पूजा मनाई जा रही है. आईजीपी इस्लाम ने आश्वासन दिया कि पुलिस के पास घटनाओं में शामिल लोगों का रिकॉर्ड है. उन्होंने कहा,  “इन घटनाओं में शामिल किसी भी व्यक्ति को न्याय के कटघरे में लाया जाएगा.अगर कोई भी दुर्गा पूजा के दौरान अराजकता फैलाने या दुर्भावनापूर्ण गतिविधियों में शामिल होने का प्रयास करता है तो हम सख्त कार्रवाई करेंगे.” चटगांव में हुए हमले के बारे में एक सवाल का जवाब देते हुए, आईजीपी ने कहा, गुरुवार को छापेमारी के बाद दो लोगों को गिरफ्तार किया गया और इसके पीछे के मकसद का पता लगाने की कोशिश की जा रही है. सोने का मुकुट हो गया था चोरी इससे पहले शुक्रवार को बांग्लादेश पुलिस ने कहा कि उन्होंने सोने के मुकुट की चोरी के सिलसिले में एक व्यक्ति की पहचान की है और इसे बरामद करने के लिए बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान शुरू किया है. एक निजी समाचार चैनल ने दिखाया कि जब मंदिर में कोई नहीं था तो सफेद टी-शर्ट और जींस पहने एक युवक मंदिर में घुसा. उसने मुकुट का सुनहरा हिस्सा निकाला और उसे जेब में रख लिया. बांग्लादेश हिंदू बौद्ध ईसाई एकता परिषद के नेता कृष्ण मुखर्जी ने कहा, "यह चोरी का एक साधारण मामला हो सकता है या यह एक सुनियोजित साजिश का मामला भी हो सकता है. हम मांग करते हैं कि मामले की उचित जांच की जाए और इसमें शामिल लोगों को न्याय के कटघरे में लाया जाए." तीनों सेना प्रमुखों ने किया मंदिरों का दौरा इस बीच, सरकारी समाचार एजेंसी बांग्लादेश संगबाद संघ (बीएसएस) ने कहा कि तीनों सेनाओं के प्रमुख – सेना प्रमुख जनरल वाकर-उज-जमा, नौसेना प्रमुख एडमिरल एम नजमुल हसन और वायु सेना प्रमुख एयर मार्शल हसन महमूद खान – ने शुक्रवार को ढाका में रमना काली मंदिर का दौरा किया. युवा और खेल सलाहकार आसिफ महमूद सजीब भुइयां ने शुक्रवार को खुलना में गल्लामारी हरिचंद टैगोर मंदिर और बागमारा गोविंदा मंदिर में दुर्गा पूजा पूजा मंडपों में पहुंचे और हिंदू समुदाय के सदस्यों के साथ शुभकामनाएं साझा कीं. 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ईरान पर बड़ा साइबर हमला, सरकार और न्यूक्लियर ठिकानों से कई अहम जानकारियां चुराई

तेहरान मिडिल ईस्ट में जारी लड़ाई के बीच शनिवार को ईरान के ऊपर बड़ा साइबर अटैक हुआ है। रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान की सरकार और न्यूक्लियर ठिकानों पर किए गए इस साइबर अटैक में कई अहम जानकारियां चुराई गई हैं। इस हमले में सरकार के तीनों ब्रांचेज को निशाना बनाया गया है। यह साइबर अटैक कब हुआ और इसे किसने अंजाम दिया, इस बारे में कोई सूचना नहीं है। गौरतलब है कि 1 अक्टूबर को ईरान ने इजरायल पर मिसाइलों की बौछार कर दी थी। तब से ही इजरायल बौखलाया हुआ है और उसने बदला लेने की कसम खाई है। बीते दिनों इजरायली प्रधानमंत्री ने इस बारे में एक बैठक भी की थी, जिसमें ईरान के न्यूक्लियर ठिकानों को निशाना बनाने संबंधी चर्चा हुई थी। ईरान इंटरनेशनल ने ईरान के सुप्रीम काउंसिल ऑफ साइबरस्पेस के पूर्व सचिव फिरोजाबादी के हवाले से कहाकि ईरान की सरकार की सभी तीन शाखाएं-न्यायपालिका, विधायिका और एग्जीक्यूटिव ब्रांच पर बड़ा साइबर हमला हुआ है। यहां से बडे़ पैमाने पर जानकारियां चुराई गई हैं। उन्होंने बताया कि इस हमले में परमाणु ठिकानों के साथ-साथ ईंधन वितरण, नगरपालिका नेटवर्क, परिवहन नेटवर्क, बंदरगाहों और अन्य नेटवर्क को टारगेट किया गया है। ये देश भर के विभिन्न क्षेत्रों की एक लंबी सूची का हिस्सा हैं, जिन पर हमला किया गया है। यह साइबर हमले ऐसे समय में हुए हैं जब अमेरिका ने इजरायल पर कई प्रतिबंध लगाए हैं। पेट्रोलियम और पेट्रोकेमिकल सेक्टर्स पर लगाए गए यह प्रतिबंध इजरायल पर ईरानी मिसाइल हमलों के बाद लगाए गए हैं। अमेरिका का यह कदम उस आदेश की कड़ी है जिसमें वह ईरान को मिसाइल प्रोग्राम्स के लिए सरकारी मदद मुहैया कराने से रोकता है। इससे पहले, ईरान ने कहा था कि अगर उसका कट्टर दुश्मन इजरायल हमला करता है तो वह अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए पूरी तरह तैयार है। इस्लामिक रिपब्लिक ने अपने दो करीबी सहयोगियों, हमास नेता इस्माइल हानिया और हिजबुल्ला नेता हसन नसरल्लाह के साथ-साथ एक ईरानी जनरल की हत्या के प्रतिशोध में 1 अक्टूबर को इजरायल पर मिसाइलें दागीं। सोशल मीडिया पर उनके प्रेडिक्शन को संजीदगी से लिया जा रहा है. इसकी वजह उनकी पिछली भविष्यवाणियां हैं, जो ज्यादातर सही साबित हुई हैं, जिनमें माइक्रोसॉफ्ट के ग्लोबल आउटेज, कोरोनावायरस महामारी और एलन मस्क के ट्विटर अधिग्रहण जैसी घटनाएं शामिल थीं. ईरान और इजरायल के बीच AI का बढ़ता इस्तेमाल सलोम का मानना है कि आने वाले समय में ईरान और इज़राइल, दोनों देश अपने सैन्य रणनीतियों में आर्टिफिशेयल इंटिलेजेंस का ज्यादा इस्तेमाल कर सकते हैं. साथ ही ये भी चेतावनी दी कि AI शांति बनाए रखने के लिए इस्तेमाल हो सकता है, लेकिन अगर इसका गलत इस्तेमाल हुआ, तो यह संघर्ष को और बढ़ा सकता है. यह स्थिति दुनिया को एक बड़े युद्ध के मुहाने पर खड़ा कर सकती है. EMP का बढ़ता खतरा, 'तीन दिनों का अंधकार'? सलोम की मानें तो EMP तकनीक का बढ़ता इस्तेमाल, खासकर अमेरिका, रूस, चीन, और उत्तर कोरिया जैसे देशों में, एक बड़े खतरे की ओर इशारा कर रहा है. सलोम के अनुसार, EMP का इस्तेमाल तीसरे विश्व युद्ध में किया जा सकता है, जिससे 'तीन दिनों का अंधकार'  जैसे हालात पैदा हो सकते हैं. इससे दुनिया भर के इलेक्ट्रॉनिक ढांचे ठप हो सकते हैं, जिससे समाज ढह सकता है और देशों में अराजकता फैल सकती है. क्या है EMP EMP एक ऐसा उपकरण है जो सूचना प्रणालियों को नष्ट करने के लिए डिजाइन किया गया है. यह मानवों या इमारतों को नुकसान नहीं पहुंचाता, लेकिन इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को निष्क्रिय कर सकता है. यह आमतौर पर ऊंचाई पर हुए विस्फोटों से ट्रिगर होता है, जो पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र के साथ संपर्क में आकर इलेक्ट्रॉनिक ढांचों को बाधित कर सकता है. कोल्ड वॉर के दौरान, अमेरिका और सोवियत संघ दोनों ने इस तकनीक को दुश्मनों के बुनियादी ढांचे को निष्क्रिय करने के साधन के रूप में देखा था. अमेरिका और चीन के बीच टकराव की संभावना सलोम ने डेली मेल से एक एक्सक्लूसिव बातचीत में कहा कि अमेरिका और चीन के बीच तनाव बढ़ सकता है. उन्होंने कहा कि दक्षिण चीन सागर, जहां क्षेत्रीय और सैन्य तनाव पहले से ही मौजूद हैं, एक अस्थिर क्षेत्र बन सकता है. इसके अलावा, एक बड़े साइबर हमले से किसी देश की सुरक्षा ढांचे पर हमला किया जा सकता है, जो युद्ध की वजह बन सकता है. रूस और चीन जैसे देशों की क्या भूमिका होगी? सलोम ने यह भी चेतावनी दी है कि चीन और रूस के बीच बढ़ती साझेदारी एक बड़े वैश्विक संघर्ष को जन्म दे सकती है. उन्होंने कहा एशिया, जहां तेज आर्थिक विकास और महत्वपूर्ण भू-राजनीतिक महत्व है, एक अस्थिर क्षेत्र के रूप में देखा जा रहा है. यह क्षेत्र एक अंतरराष्ट्रीय संघर्ष को भड़काने में सक्षम हो सकता है अथोस सलोम की इन भविष्यवाणियों ने दुनिया में तीसरे विश्व युद्ध को लेकर चर्चा को और तेज कर दिया है अब यह देखना होगा कि आगे क्या होता है. recent visitors 90

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विजयादशमी पर महेश्वर के ऐतिहासिक क़िले में लोकमाता देवी अहिल्याबाई होल्कर को माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि दी

महेश्वर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने विजयादशमी पर महेश्वर के ऐतिहासिक क़िले में लोकमाता देवी अहिल्याबाई होल्कर को माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि दी। उन्होंने विजयादशमी के पर्व अवसर पर महेश्वर के शस्त्रागार में शस्त्र-पूजन किया।  नर्मदा तट पर स्थित क़िले में पहुँचने पर देवी अहिल्या बाई के वंशज यशवंतराव होलकर तृतीय ने उनका परम्परागत रूप से  अभिनन्दन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शस्त्रागार में विशेष तौर पर उस तलवार का पूजन किया जो उनके शौर्य का प्रतीक है। यह तलवार लोकमाता देवी अहिल्या बाई स्वयं धारण करती थीं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस अवसर पर कहा कि देवी अहिल्या पुण्य प्रताप और परोपकार की पर्याय हैं। आज विजयादशमी के अवसर पर  उनकी कर्मभूमि पहुँचकर नमन कर स्वयं को कृतार्थ महसूस कर रहा हूँ। इस अवसर पर खरगोन के स्थानीय जन-प्रतिनिधिगण मौजूद थे।   recent visitors 82

मुंह में सिगरेट डाली, महिला अधिकारी से हुज्जत..! दिग्विजय सिंह के भतीजे आदित्य की दबंगई, FIR हुई दर्ज

गुना पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के भतीजे आदित्य विक्रम सिंह का एक वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है. इस वीडियो में देखा जा सकता है कि आदित्य विक्रम सिंह महिला सीओ और टीआई के मुंह पर सिगरेट का धुआं उड़ाता हुआ नजर आ रहा है. इसके बाद बहस भी करता है और पुलिस अधिकारियों से कहता है कि बेटा मामला अब गरम हो गया है. पुलिस ने इस मामले में आदित्य विक्रम सिंह के खिलाफ सरकारी काम में बाधा डालने, पुलिस टीम से धक्का-मुक्की करने और गाली-गलौज करने का केस दर्ज किया है. राघौगढ़ में ‘मैं हूं अभिमन्यु’ अभियान चल रहा है. इस कार्यक्रम के तहत स्कूल-कॉलेज, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन सहित कई जगहों पर आम लोगों को जागरूक करने के लिए रैली और नाटक किए जा रहे हैं. शुक्रवार को केनरा बैंक तिराहे पर कॉलेज स्टूडेंट्स नुक्कड़ नाटक कर रहे थे, तभी पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह के भाई पूर्व सांसद लक्ष्मण सिंह का बेटा आदित्य विक्रम सिंह वहां आ गया. उसने कार्यक्रम को रोकने की बात कही. इसी को लेकर वहां मौजूद पुलिस से उसकी बहस हो गई. आदित्य सिंह, मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सदस्य दिग्विजय सिंह के छोटे भाई लक्ष्मण सिंह के बेटे हैं। सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ है जिसमें आदित्य सिंह एक महिला पुलिसकर्मी सहित सरकारी कर्मचारियों से बहस करते दिखाई दे रहे हैं और उनके हाथ में एक सिगरेट भी है। आदित्य, राघौगढ़ नगर पालिका के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। बीजेपी नेताओं ने ट्वीट कर निशाना साधा जैसे ही ये वीडियो सामने आया, बीजेपी नेताओं ने भी आदित्य विक्रम सिंह के बहाने दिग्विजय सिंह को आड़े हाथों ले लिया. बीजेपी मीडिया प्रभारी आशीष अग्रवाल ने ‘X’ पर लिखा कि, “सिगरेट के ‘धुएं का छल्ला’ बनाकर महिला अधिकारियों पर ‘रंगदारी’ दिखाता दिग्विजय सिंह का भतीजा! देखिये… कांग्रेस के मुख्य परिवरों के बेटों का ‘चाल, चेहरा और चरित्र’!” “ये हैं कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के भतीजे और वरिष्ठ नेता लक्ष्मण सिंह के बेटे आदित्य विक्रम सिंह, जो पूर्व में नगर पालिका अध्यक्ष रह चुके हैं. महिला अधिकारी पर कांग्रेस के विशेष परिवार से होने का धौंस दिखाने के साथ-साथ इनकी आपत्तिजनक भाषा शैली और व्यवहार कांग्रेस के नेताओं के अपराधी और महिला विरोधी चरित्र को बता रहे हैं.” “सोचिए, अभ्रदता की सीमा पार कर चुके ये कांग्रेसी नेता, विपक्ष में होने के बाद ऐसी शर्मनाक हरकत कर रहे हैं तो सत्ता में रहकर क्या करते? मध्य प्रदेश की जनता विवेकवान है और इन्हें भलिभांति जानती है! फिलहाल दिग्विजय सिंह के भतीजे पर FIR हो चुकी है. पुत्र चाहे नेता का हो या अभिनेता का, जो भी गलत काम करेगा, भाजपा की ‘मोहन सरकार’ में नहीं बचेगा” आदित्य के ड्राइवर ने भी अधिकारियों पर जमाया रौब अभिमन्यु अभियान के नुक्कड़ नाटक में मौजूद थाना प्रभारी जुबेर खान ने जब आदित्य विक्रम को समझाने की कोशिश की तो उन्होंने टीआई को धक्का दे दिया. इसके बाद सिगरेट का धुआं उड़ाते हुए टीआई के ऊपर एश (ASH) फेंक दी. घटनास्थल पर एसडीओपी दीपा डुडवे भी पहुंच गईं. एसडीओपी और आदित्य विक्रम सिंह के बीच भी बहसबाजी हो गई. आदित्य विक्रम सिंह ने एसडीओपी से कह दिया कि आप सुप्रीम कोर्ट से बड़ी नहीं हो…आदित्य विक्रम के ड्राइवर ने भी पुलिस अधिकारियों पर रौब जमाते हुए कहा की राघौगढ़ आदित्य विक्रम का ही है. फिलहाल पुलिस ने पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष आदित्य विक्रम सिंह के खिलाफ शासकीय कार्य में बाधा डालने की FIR दर्ज की है. आपको बता दें कि कुछ समय पहले विधायक जयवर्धन सिंह ने भी राघौगढ़ थाना प्रभारी के खिलाफ मोर्चा खोला था. उन्होंने पुलिस के खिलाफ नारेबाजी करते हुए जुलूस भी निकाला था. recent visitors 79

संघ मना रहा 100वीं सालगिरह, अमित शाह ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक RSS के स्थापना दिवस पर दी बधाई

नई दिल्ली केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने शनिवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के स्थापना दिवस के अवसर पर इसके सदस्यों को बधाई दी और कहा कि अपनी स्थापना के बाद से यह संगठन भारतीय संस्कृति की रक्षा और युवाओं में देशभक्ति के विचारों को विकसित करने का उल्लेखनीय काम कर रहा है। संघ की स्थापना केशव बलिराम हेडगेवार ने 1925 में विजया दशमी के दिन नागपुर में की थी। शाह ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, “अनुशासन और देशभक्ति के अद्वितीय प्रतीक, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सभी स्वयंसेवकों को स्थापना दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं। संघ अपनी स्थापना से ही भारतीय संस्कृति की रक्षा एवं युवाओं को संगठित कर उनमें राष्ट्रभक्ति के विचारों को सींचने का उल्लेखनीय कार्य कर रहा है।” उन्होंने कहा कि संघ समाज सेवा के कार्यों को गति देकर हर वर्ग को सशक्त बनाने के साथ ही शैक्षणिक प्रयासों से देशहित के प्रति समर्पित देशभक्तों का निर्माण कर रहा है। गृहमंत्री ने विजया दशमी के अवसर पर भी देशवासियों को बधाई दी। उन्होंने एक संदेश में कहा कि विजया दशमी अधर्म पर धर्म और असत्य पर सत्य की जीत का प्रतीक है। उन्होंने कहा, “अधर्म पर धर्म और असत्य पर सत्य की विजय का प्रतीक, विजया दशमी का यह पर्व सभी को अपने अंदर की बुराइयों को समाप्त कर धर्म और मानवता के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। प्रभु श्री राम सभी का कल्याण करें। जय श्री राम।” विजया दशमी दुर्गा पूजा के समापन और असुरों के राजा रावण पर भगवान राम की विजय का प्रतीक है। एक अलग संदेश में शाह ने भाजपा नेता राजमाता विजयाराजे सिंधिया को भी उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि वह (राजमाता सिंधिया) सादगी की प्रतिमूर्ति थीं और आपातकाल के दौरान उनके साहस और संघर्ष ने लोकतंत्र की पुनर्स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने कहा, “राजमाता सिंधिया जी की देश के प्रति निष्ठा और जनकल्याण के कार्यों को देश सदैव याद रखेगा।” ग्वालियर राजघराने से ताल्लुक रखने वाली राजमाता सिंधिया भाजपा की उपाध्यक्ष और सांसद थीं। उनका जन्म 12 अक्टूबर 1919 को हुआ था।   recent visitors 154

उमर अब्दुल्ला ने सरकार बनाने का दावा पेश किया, 14 अक्टूबर को शपथ समारोह

श्रीनगर नेशनल कांफ्रेंस के उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला ने  शाम को श्रीनगर में जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा से मुलाकात कर नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां)-कांग्रेस गठबंधन की सरकार बनाने का दावा पेश किया। अब्दुल्ला ने सिन्हा के साथ अपनी मुलाकात के दौरान गठबंधन सहयोगियों की ओर से समर्थन पत्र प्रस्तुत किया। अब्दुल्ला ने राजभवन से लौटने के बाद अपने आवास पर संवाददाताओं से कहा कि उन्होंने उपराज्यपाल से नई सरकार के शपथ ग्रहण की तारीख जल्द से जल्द तय करने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा, “मैंने उपराज्यपाल से मुलाकात कर नेकां, कांग्रेस, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी, ‘आप’ और निर्दलीय उम्मीदवारों के समर्थन पत्र प्रस्तुत किए। सभी ने नेकां का समर्थन किया है। मैंने उनसे (राज्यपाल) जल्द से जल्द एक तारीख तय करने का अनुरोध किया ताकि शपथ समारोह हो सके और लोगों द्वारा चुनी गई सरकार काम करना शुरू कर सके।” उन्होंने कहा कि शपथ समारोह बुधवार को होने की संभावना है। जो लोग जम्मू कश्मीर की राजनीति को बहुत नजदीक से जानते हैं उन्हें लगता है कि केंद्र की बीजेपी सरकार और अब्दुल्ला परिवार एक दूसरे के नजदीक आ रहे हैं. दरअसल जम्मू कश्मीर में सरकार बनाने जा रही नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला ने इन दिनों कई ऐसी बातें की हैं जो उपरोक्त बात की तस्दीक कर रही हैं. कश्मीर के सीएम बनने जा रहे उमर अब्दुल्ला ने गुरुवार को कहा कि उन्हें 4 निर्दलीयों का सपोर्ट मिल गया है और कांग्रेस से भी सपोर्ट की बातचीत चल रही है. इस एक लाइन ने तमाम राजनीतिक विश्लेषकों के कान ख़ड़ें कर दिए हैं. उन्हें लगता है कि कहीं उमर अब्दुल्ला के मन में कुछ और तो नहीं चल रहा है. क्योंकि इधर कम से 3 बार उमर ने ऐसी बातें कहीं हैं जिससे लोगों को लगा कि उन्‍हें अब कांग्रेस की खास जरूरत नहीं है. बल्कि वे बीजेपी के नजदीक जाने को आतुर दिख रहे हैं. बावजूद इसके कि उमर ने कई बार यह भी दोहराया है कि मैं किसी भी कीमत पर बीजेपी के साथ नहीं जा सकता हूं. पर बीजेपी समर्थकों के बीच इस बात की चर्चा खूब है कि नेशनल कांफ्रेंस पीडीपी से तो बेहतर ही है. बीजेपी जब पीडीपी चीफ महबूबा मुफ्ती के साथ सरकार बना सकती है तो नेशनल कॉन्फ्रेंस तो उससे बेहतर ही है. मुफ्ती तो कश्मीर को भारत से अलग करने की बात तक करती रही हैं जबकि नेशनल कांफ्रेंस तो काफी उदारवादी है. फारूक अब्‍दुल्‍ला सीना ठोककर कहते हैं क‍ि वे भारतीय हैं. यही नहीं उनके राम भजन भी बहुत लोकप्रिय हैं. आइये देखते हैं कि सोशल मीडिया और राजनीतिक विश्लेषकों में एनसी और बीजेपी के पास आने की क्यों चर्चा हो रही है? 1-क्या कांग्रेस से छुटकारा पाना चाहते हैं उमर? पिछले कुछ दिनों में उमर अब्दुल्ला के उन बयानों पर गौर करें जो इस तरह की कयासबाजी को जन्म दे रही हैं. उमर अब्दुल्ला ने गुरुवार को जब कहा कि उन्हें 4 निर्दलीयों का सपोर्ट मिल गया है और कांग्रेस से भी सपोर्ट की बातचीत चल रही है.तो लोगों को खटका कि आखिर कांग्रेस से सपोर्ट की बातचीत क्यों चल रही है? कांग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस दोनों ने साथ मिलकर चुनाव लड़ा था. इसमें सपोर्ट के लिए बातचीत जैसी बात कहां से आ गईं. यही नहीं इसके पहले भी उमर ने जैसी बातें की उससे यही लगता है कि उमर बीजेपी के नजदीक आना चाहते हैं. कुछ बानगी देखिए- -हमें केंद्र के साथ समन्वय बनाकर चलने की जरूरत है. जम्मू-कश्मीर के कई मुद्दों का समाधान केंद्र से लड़ाई करके नहीं हो सकता. चुनाव परिणाम आने के बाद अब्दुल्ला ने यह टिप्पणी की थी. -मैं यह सुनिश्चित करने का हर प्रयास करूंगा कि आने वाली सरकार एलजी और केंद्र सरकार के साथ अच्छे संबंधों के लिए काम करे. नई सरकार की प्राथमिकता जम्मू और कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल करना है, जिसके लिए वह दिल्ली में सरकार के साथ काम करेगी. -उमर अब्दुल्ला ने इंडिया टुडे को बताया था कि नेशनल कॉन्फ्रेंस ने कांग्रेस के साथ गठबंधन के बिना भी अच्छा प्रदर्शन किया होता. कांग्रेस के साथ गठबंधन हमारे लिए सीटों के बारे में नहीं था. हम बिना कांग्रेस के भी ये सीटें जीत सकते थे, सिवाय शायद एक के. -मुझे विश्वास है कि प्रधानमंत्री एक सम्माननीय व्यक्ति हैं, उन्होंने यहां चुनाव प्रचार करते समय राज्य का दर्जा बहाल करने का वादा किया है. सम्माननीय गृह मंत्री ने भी यही कहा था. 2-नेशनल कॉन्फ्रेंस की क्या मजबूरी है केंद्र से मधुर रिश्ता नेशनल कांफ्रेंस जानती है कि द‍िल्‍ली की तरह ज्‍यादातर सत्‍ता उपराज्‍यपाल के हाथ में रहने वाली है. हर चीज के ल‍िए उन्‍हें एलजी के पास जाना होगा.मौजूदा हालात में नई राज्य सरकार काफी हद तक पावरलेस ही होगी. कानून व्यवस्था, सार्वजनिक व्यवस्था और पुलिस समेत तमाम मामलों के ल‍िए एलजी का फैसला आख‍िरी होगा. इससे टकराव की नौबत आने से बेहतर है कि आपसी रजामंदी से काम किया जाए. इससे भविष्य में बीजेपी के साथ आने का रास्ता भी खुला रहेगा.अगर साथ आते हैं तो केंद्र सरकार में भी नेशनल कांफ्रेंस को एक दो मंत्रालय संभालने का मौका मिल सकता है. कश्मीर के डिवलपमेंट के ल‍िए काफी पैसों की जरूरत है.यह बजट भी मौजूदा केंद्र सरकार के रहमोकरम पर ही निर्भर होगा. दूसरी बात यह भी है कि  एनसी के पास 42 सीटें हैं, लेकिन एनसी-कांग्रेस गठबंधन, 48 सीटों के साथ, जम्मू-कश्मीर विधानसभा में 45 सीटों के आधे-अधूरे अंक से बस थोड़ा ऊपर है. अब उनके साथ 4 निर्दली भी हैं. फिर भी 90 विधायकों और 5 नियुक्त विधायकों को भी जोड़ लिया जाए तो बहुमत का आंकड़ा 48 तक पहुंच जाता है. इसलिए उमर सरकार कभी भी बहुत सेफ नहीं रहेगी. उसे अपनी मर्जी की करने के लिए बीजेपी के सहयोग की हमेशा जरूरत बनी रहेगी. 3-नेशनल कॉन्फ्रेंस का मधुर रिश्ता रहा एनडीए से फारूक अब्‍दुल्‍ला के बेटे उमर अब्‍दुल्‍ला अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं.यही कारण है कि जब उन्‍होंने मोदी सरकार की तारीफ की तो लोगों में संदेह बढ़ गया कि क्या वो बीजेपी की ओर जा सकते हैं?  नेशनल कांफ्रेंस एक ऐसी पार्टी रही है, ज‍िसका कांग्रेस और बीजेपी दोनों से रिश्ता रहा है.कांग्रेस के समर्थन से फारूक … Read more