केंद्रीय मंत्री चौहान ने कहा आज हम संकल्प लें कि मन, वचन, कर्म से बेटियों, बहनों का सम्मान करेंगे

नवरात्रि पर बेटियों-बहनों के सम्मान का संकल्प लें : शिवराज केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आवास पर कन्या भोज का आयोजन किया केंद्रीय मंत्री  चौहान ने कहा आज हम संकल्प लें कि मन, वचन, कर्म से बेटियों, बहनों का सम्मान करेंगे भोपाल केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपने भोपाल स्थित आवास पर नवरात्रि की अष्टमी-नवमी के अवसर पर कन्या भोज का आयोजन किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि आज हम संकल्प लें कि मन, वचन, कर्म से बेटियों, बहनों का सम्मान करेंगे। केंद्रीय कृषि मंत्री चौहान ने अपनी धर्मपत्नी साधना सिंह के साथ कन्याओं का पूजन किया और उन्हें भोजन कराया। संवाददाताओं से चर्चा करते हुए चौहान ने कहा, “संपूर्ण देश नौ दिन तक श्रद्धा और भक्ति के भाव में डूबा था। हमने देवी मां की पूजा की और आज मां से यही प्रार्थना है कि वह सब पर कृपा और आशीर्वाद की वर्षा सदैव करती रहें।” केंद्रीय कृषि मंत्री ने दुर्गा सप्तशती का उल्लेख करते हुए कहा, “माता कहती हैं कि समस्त बेटियां, स्त्रियां मेरा ही अंश है और इसलिए संपूर्ण देशवासियों से मेरी प्रार्थना है कि बेटी का आदर करें, सम्मान करें।” बीते कुछ दिनों में मासूम बालिकाओं से लेकर महिलाओं के साथ हुई घटनाओं पर केंद्रीय कृषि मंत्री चौहान ने कहा, “कुछ घटनाएं आहत करती हैं, मन को उद्वेलित करती हैं और पूरा समाज शर्मसार हो जाता है। आज संकल्प लेने का समय है कि हम मन, वचन और कर्म से बेटियों की पूजा करेंगे, उनका आदर करेंगे, बहनों का सम्मान करेंगे, समाज में उनका उचित स्थान देंगे।” कृषि मंत्री चौहान ने अपने आवास पर आयोजित कन्या भोज का जिक्र करते हुए कहा, “आज जब बेटियों के साथ आरती की, देवी मां की पूजा की, बेटियों की आरती उतारी, उस समय मुझे और धर्मपत्नी साधना को लग रहा था जैसे हम साक्षात देवी मां की आरती कर रहे हों और बेटियों को भोजन कराया तो लग रहा था जैसे साक्षात मां ही भोजन कर रहीं हो।”     recent visitors 95

मुख्यमंत्री डॉ. यादव महेश्वर और इंदौर में करेंगे शस्त्र-पूजन, प्रदेशवासियों को दी विजयदशमी पर्व की बधाई

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि हमारे भारतीय पर्व उमंग और उल्लास के प्रतीक होते हैं। इस वर्ष प्रदेश में दशहरा पर्व सरकार और समाज मिलकर धूमधाम के साथ मनाएंगे और शस्त्र-पूजन भी किया जायेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेशवासियों को दशहरा पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए कहा कि राज्य सरकार ने निर्णय लिया है कि इस वर्ष का दशहरा पर्व महिला सशक्तिकरण और सुशासन की प्रतीक देवी अहिल्याबाई को समर्पित रहेगा। देवी अहिल्याबाई ने देश भर में जन-कल्याण के अनेक महती कार्य संपन्न करवाए। इन कार्यों की स्मृति और देवी अहिल्याबाई के योगदान से आज की पीढ़ी को अवगत करवाने और उनके सम्मान में दशहरा पर्व पर शस्त्र-पूजन के कार्यक्रम होंगे। मंत्री, सांसद, विधायक और जन-प्रतिनिधि भी करेंगे अपने क्षेत्रों में शस्त्र-पूजन मुख्यमंत्री डॉ.यादन ने कहा कि इस दशहरा पर्व पर भारत की प्राचीन शस्त्र-पूजन परंपरा में सरकार के मंत्रीगण सहित सांसद, विधायक और जन-प्रतिनिधि भी अपने क्षेत्र में होने वाले कार्यक्रमों में शामिल होंगे। प्रत्येक जिले में पुलिस शस्त्रागार, कोतवाली और थानों में होने वाले शस्त्र-पूजन एक विभाग तक सीमित न होकर जनता का पर्व बनेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वे स्वयं देवी अहिल्याबाई की राजधानी रही महेश्वर और उनकी छावनी रही इंदौर में शस्त्र-पूजन करेंगे। अहिल्याबाई का व्यक्तित्व, जीवन और चरित्र हम सबके लिये आदर्श मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हम अहिल्याबाई की 300वीं जयंती का वर्ष मना रहे हैं। लोकमाता देवी अहिल्याबाई का व्यक्तित्व, जीवन और चरित्र हम सबके लिये आदर्श है। वे एक तपोनिष्ठ, धर्मनिष्ठ और कर्मनिष्ठ शासक, प्रशासक रही है। उनसे हम सबको प्रेरणा लेना चाहिये। देवी अहिल्याबाई ने धर्म के भाव के साथ शासन व्यवस्था चलाने का बेहतर उदाहरण प्रस्तुत किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उनका धर्म तथा राज्य व्यवस्था में विशेष महत्व है। उनका मुख्य ध्येय था कि उनकी प्रजा कभी भी अभावग्रस्त और भूखी नहीं रहे। उनके सुशासन की यशोगाथा पूरे देश में प्रसिद्ध है। उन्होंने समाज-सेवा के लिए खुद को पूरी तरह समर्पित कर दिया था। अहिल्याबाई हमेशा अपनी प्रजा और गरीबों की भलाई के बारे में सोचती थी, साथ ही वे गरीबों और निर्धनों की हरसंभव मद्द के लिए हमेशा तत्पर रहती थी। उन्होंने समाज में विधवा महिलाओं की स्थिति पर भी खासा काम किया और उनके लिए उस वक्त बनाए गए कानून में बदलाव भी किया था।   recent visitors 76

छत्तीसगढ़ आ रही हैं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, छह से अधिक कार्यक्रमों में होंगी शामिल

रायपुर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 25 और 26 अक्टूबर को छत्तीसगढ़ के दो दिवसीय दौरे पर रहेंगी. इस दौरान वे प्रदेश में विभिन्न शैक्षणिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में शामिल होंगी. राष्ट्रपति के दौरे का मिनट टू मिनट कार्यक्रम जारी कर दिया गया है. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का मिनट-टू-मिनट कार्यक्रम: 25 अक्टूबर 2024 (पहला दिन) सुबह 11 बजे: राष्ट्रपति का रायपुर एयरपोर्ट पर आगमन. सुबह 11:30 बजे: रायपुर एम्स के दूसरे दीक्षांत समारोह में शामिल होंगी. दोपहर 1 बजे: एम्स से रवाना होकर राजभवन पहुंचेंगी. दोपहर 3 बजे: NIT रायपुर के 14वें दीक्षांत समारोह में हिस्सा लेंगी. शाम 4:30 बजे: नवा रायपुर स्थित पुरखौती मुक्तांगन में स्थानीय आदिवासियों से मुलाकात. शाम 6 बजे: राजभवन लौटेंगी और रात्रि विश्राम करेंगी. 26 अक्टूबर 2024 (दूसरा दिन): सुबह 9 बजे: विवेकानंद सरोवर, रायपुर का दौरा. सुबह 10 बजे: रायपुर एयरपोर्ट से भिलाई के लिए प्रस्थान. सुबह 11 बजे: IIT भिलाई के चौथे दीक्षांत समारोह में शामिल होंगी. दोपहर 1:30 बजे: भिलाई से वापस रायपुर स्थित राजभवन लौटेंगी. दोपहर 3:30 बजे: पं. दीनदयाल उपाध्याय स्मृति चिकित्सा एवं आयुष विश्वविद्यालय के तीसरे दीक्षांत समारोह में हिस्सा लेंगी. शाम 5 बजे: दीक्षांत समारोह के बाद दिल्ली के लिए रायपुर एयरपोर्ट से प्रस्थान करेंगी.     recent visitors 60

मुख्यमंत्री निवास में कन्या-पूजन में कन्याओं के पांव पखारे, मातारानी से सभी के लिए मंगलमय और सुखमय जीवन के लिये की प्रार्थना

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शारदीय नवरात्र की महानवमी पर मुख्यमंत्री निवास में कन्या-पूजन और कन्या-भोज की सनातन परंपरा का पालन किया। मातृ-शक्ति के प्रति अपनी अगाध श्रद्धा प्रदर्शित करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आज नौ दुर्गा स्वरूपा कुंवारी कन्याओं के पांव पखारे और उनका विधि-विधान से पूजन किया। उन्होंने श्रद्धापूर्वक कन्याओं को चुनरी ओढ़ाई और आरती उतारी। पूजन के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कन्याओं से संवाद कर उन्हें दुलारा भी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कन्या-पूजन के बाद कन्याओं को स्वयं अपने हाथों से भोजन परोसा और उनकी रूचि के अनुरूप मिष्ठान भी खिलाये। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कन्या भोज के बाद सभी कन्याओं को दक्षिणा और उपहार देकर उनका आशीर्वाद लिया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मोक्षदायिनी मां सिद्धिदात्री के चरणों में शत-शत प्रणाम कर प्रदेशवासियों को शारदीय नवरात्रि की महानवमी पर हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दी। उन्होंने मातारानी से सभी को संकल्प सिद्धि के असीम आशीर्वाद के साथ मंगलमय और सुखमय जीवन की प्रार्थना भी की।   recent visitors 61

मंत्री विजयवर्गीय बोलेआने वाले 25 साल बाद हमारे बच्चों के लिए बहुत खतरा है, बंटोगे तो कटोगे

इंदौर इंदौर में गुरुवार रात कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने बड़ा बयान दिया है। मंत्री विजयवर्गीय ने कहा कि, योगी जी ने सही कहा है बंटोगे तो कटोगे। आने वाले 25 साल बाद हमारे बच्चों के लिए बहुत खतरा है। जिस प्रकार देश की डेमोग्राफी बदल रही है। दरअसल, मंत्री कैलाश विजयवर्गीय गुरुवार रात बीजेपी प्रदेश उपाध्यक्ष जीतू जिराती द्वारा आयोजित सादगी गरबा महोत्सव में शामिल होने पहुंचे थे। इस दौरान मंत्री विजयवर्गीय ने कहा कि मैं फिर कह रहा हूं आने वाले 25 साल बाद हमारे बच्चो के लिए बहुत खतरा है। जिस प्रकार देश की डेमोग्राफी बदल रही है, और जिस प्रकार कुछ राजनीतिक दल तुष्टिकरण की नीति के कारण देश में अशांति फैलाने वाले लोगों को संरक्षण दे रहे हैं। इसलिए बहुत जरूरी है की हम सनातन धर्म के साथ चले। मंत्री विजयवर्गीय ने कहा कि, योगी जी ने सही कहा है “बंटोगे तो कटोगे” और हरियाणा की जानता ने बता दिया नहीं बाटेंगे। इसलिए आप सब से भी निवेदन हैं, गंभीरता के साथ विचार करें, चिंतन करें हमारे धर्म, हमारी परंपरा, हमारी आध्यात्मिक शक्ति, हमारे धर्म गुरु और हमारे धर्म ग्रंथ विश्व में सर्वश्रेष्ठ हैं। उन्होंने आगे कहा कि विश्व को शांति का मार्ग कोई दिखा सकता है तो वह भारत हैं। ये कट्टरवाद ने सारे दुनियां में युद्ध के माध्यम से अशांति और अराजकता फैला दी हैं। दो महीनें पहले कहा था- 30 साल बाद देश में गृहयुद्ध की स्थिति मंत्री विजयवर्गीय ने लगभग 2 महीने पहले सामाजिक समरसता कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा था की मैं कुछ दिन पहले एक मिलिट्री के रिटायर ऑफिसर के साथ बैठा था, उन्होंने कहा की 30 साल बाद देश के अंदर गृह युद्ध प्रारंभ हो जाएगा। जिस प्रकार से हमारे देश की डेमोग्राफी बदल रही है उस पर हमें विचार करना चाहिए। हिंदू शब्द कैसे मजबूत हो इसके लिए हमें काम करना होगा। होली, दीपावली, राखी, भगवान परशुराम, महाराणा प्रताप हम सब के हैं। महाराणा प्रताप ने हिंदू समाज को बचाने के लिए मुगलों के सामने संघर्ष किया। देश के त्योहार सभी धर्म के त्योहार है, हमे हमारी सोच बदलना होगी। विजयवर्गीय ने आगे कहा था कि अंग्रेजों ने एक ही काम किया है फूट डालो और राज करो। अंग्रेज चले गए लेकिन देश में कुछ लोग ऐसे है जो अंग्रेजों का प्रतिनिधित्व करते हैं और फूट डालो और राज करो की नीति पर काम करते हैं। वो भी सिर्फ कुर्सी के लिए। उनको कुर्सी चाहिए। आज के समय पर कुछ लोग समाज को जाति के आधार पर बांट रहे हैं। देश ताकतवर बने इसके लिए समाज को ताकतवर बनाना जरूरी है। समाज ताकतवर बने इसके लिए जातिवाद के बंधन से मुक्त होना पड़ेगा। recent visitors 72

रतन टाटा के बाद नोएल बने टाटा ट्रस्ट के चेयरमैन, सर्वसम्मति से लिया गया फैसला

मुंबई नोएल टाटा को टाटा ट्रस्ट्स का नया अध्यक्ष नियुक्त किया गया है. बुधवार को रतन टाटा के निधन के बाद आज मुंबई में एक बैठक हुई थी, जिसमें रतन टाटा के सौतेले भाई नोएल टाटा (Noel Tata) को Tata Tusts का नया चेयरमैन बना दिया गया है. बैठक में ये फैसला सभी के सहमति से लिया गया. इसके तहत नोएल को टाटा समूह के दो सबसे महत्वपूर्ण धर्मार्थ संस्‍थाओं सर रतन टाटा ट्रस्ट और सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट का प्रमुख नियुक्‍त किया गया है. ये पहले इन संस्‍थाओं में ट्रस्‍टी के तौर पर शामिल थे. अब इन्‍हें टाटा ट्रस्‍ट का चेयरमैन नियुक्‍त कर दिया गया है. र‍तन टाटा ने टाटा ट्रस्‍ट को बनाने में अपनी महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाई थी. टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी TATA Sons में टाटा ट्रस्‍ट की एक बड़ी हिस्‍सेदारी है. इसमें करीब 66 फीसदी की हिस्‍सेदारी है. टाटा ट्रस्‍ट के तहत ही Tata Group संचालित है. ये ट्रस्‍ट परोपकारी पहल और शासन की देखरेख के लिए काम करता है. टाटा ग्रुप में निभाते हैं ये जिम्‍मेदारियां Ratan Tata के सौतेले भाई नोएल टाटा को टाटा ट्रस्‍ट की नई जिम्‍मेदारी दे दी गई है. नोएल टाटा ट्रस्‍ट में भी ट्रस्‍टी के तौर पर शामिल थे. वहीं पिछले कुछ सालों से वे टाटा इंटरनेशनल लिमिटेड के चेयरमैन भी हैं. इनका टाटा ग्रुप के साथ चार दशकों का लंबा इतिहास रहा है. वे ट्रेंट, वोल्टास और टाटा इन्वेस्टमेंट कॉरपोरेशन जैसी कंपनियों के चेयरमैंन भी हैं. इतना ही नहीं टाटा स्टील और टाइटन कंपनी लिमिटेड के उपाध्यक्ष के रूप में कार्य करते हैं. इसके अलावा, टाटा इकोसिस्टम के साथ उनके गहरे संबंध भी हैं. 50 करोड़ डॉलर से 3 अरब डॉलर की बना दी कंपनी टाटा इंटरनेशनल लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्‍टर के तौर पर अपने कार्यकाल के दौरान, उन्होंने 2010 और 2021 के बीच कंपनी के राजस्व को 500 मिलियन डॉलर से 3 बिलियन डॉलर से ज़्यादा तक बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. ट्रेंट लिमिटेड कंपनी का साल 1998 में सिर्फ एक सिंगल  रिटेल स्टोर था, जो आज इनके लीडरशिप में पूरे भारत में 700 से अधिक स्टोर्स के साथ एक मजबूत नेटवर्क में बदल चुका है. नोएल टाटा पर्दे के पीछे रहकर करते थे काम जहां एक तरफ रतन टाटा ग्रुप का चेहरा थे। तो वहीं नोएल टाटा (Noel Tata) पर्दे के पीछे रहकर काम करना पसंद करते हैं। वो मीडिया से भी बहुत दूर रहते हैं। उनका फोकस ग्रुप के ग्लोबल वेंचर्स और रिटेल सेक्टर विशेष तौर पर रहता था। नोएल टाटा के पास है कई कंपनियों की कमान नोएल टाटा पिछले 40 साल से टाटा ग्रुप का हिस्सा हैं। मौजूदा समय में वो टाटा ग्रुप की कई कंपनियों के बोर्ड के सदस्य हैं। वह टाटा इंटरनेशनल लिमिटेड, वोल्टास और टाटा इनवेस्टमेंट कॉरपोरेशन के चैयरमैन हैं। साथ ही टाटा स्टील और टाइटन कंपनी लिमिटेड में बतौर वाइस चेयरमैन अपनी सर्विसेज दे रहे हैं। नोएल टाटा अगस्त 2010 से नवंबर 2021 तक ट्रेंट के मैनेजिंग डायरेक्टर रह चुके हैं। उनकी लीडरशिप में ट्रेंट का टर्नओवर 500 मिलियन डॉलर से बढ़कर 3 बिलियन डॉलर पहुंच गया। बता दें कि नोएल टाटा ने ससेक्स यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन किया है। माना जा रहा है कि टाटा ट्रस्ट की कमान ऐसे व्यक्ति को मिल सकती है, जिसके नाम के साथ टाटा जुड़ा हुआ है। ऐसे में नोएल टाटा ही विकल्प के तौर पर उभर कर आते हैं। मौजूदा समय में दो अन्य व्यक्ति भी टाटा ट्रस्ट के अहम सदस्य हैं। टीवीएस के वेणु श्रीनिवासन और पूर्व रक्षा सचिव विजय सिंह। साइरस मिस्त्री के चचेरे भाई भी प्रमुख दावेदार टाटा ट्रस्ट के चेयरमैन के लिए टाटा संस के पूर्व चेयरमैन दिवंगत साइरस मिस्त्री के चचेरे भाई मेहली मिस्त्री भी मजबूत विकल्प के तौर पर देखे जा रहे हैं। मेहली मिस्त्री 2000 से टाटा ट्रस्ट के चेयरमैन के साथ काम कर रहे थे। वो काफी सक्रिय भी थे। 2016 में साइरस मिस्त्री को टाटा संस के चेयरमैन के पद से हटाया गया था, तब शुरू हुए विवाद में उन्हें रतन टाटा का समर्थक माना जाता था। बता दें कि अक्टूबर 2022 में टाटा के 2 सबसे ट्रस्ट मे शामिल किया गया था। रतन टाटा, टाटा ट्रस्ट के चेयरमैन और टाटा संस के मानद चेयरमैन पर रहने वाले आखिरी व्यक्ति थे। टाटा संस 2022 में ऑर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन में बदलाव कर दिया था। जिसकी वजह से अब कोई व्यक्ति दोनों पदों पर एक साथ नहीं रह सकता है।   recent visitors 117

एशिया शिखर सम्मेलन एक मुक्त, खुला, समावेशी, पारदर्शी, नियम आधारित, शांतिपूर्ण, समृद्ध हिंद-प्रशांत क्षेत्र को बढ़ावा देने का मंच है- PM मोदी

नई दिल्ली  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लाओस की यात्रा पर हैं, जहां उन्होंने पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन(EAS) को संबोधित करते हुए हिंद प्रशांत क्षेत्र और दक्षिण चीन सागर में शांति और स्थिरता पर बात की। प्रधानमंत्री मोदी ने इस मंच से हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा और शांति पर काफी जोर दिया। इससे पहले 4 नवंबर, 2019 की बात है, जब इसी अंतरराष्ट्रीय मंच से पीएम मोदी ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में उभर रहे मतभेदों पर बात की थी, जिसमें उन्होंने कहा था कि पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन एक मुक्त, खुला, समावेशी, पारदर्शी, नियम आधारित, शांतिपूर्ण, समृद्ध हिंद-प्रशांत क्षेत्र को बढ़ावा देने का तार्किक मंच है, जहां संप्रभुता व क्षेत्रीय अखंडता और समुद्री कानूनों के पालन पर जोर दिया जाता है। उस वक्त पीएम ने'इंडो-पैसिफिक ओशन इनिशिएटिव (IPOI)' का प्रस्ताव दिया था, जिससे हिंद-प्रशांत समुद्री क्षेत्र को सुरक्षित, भयमुक्त और स्थिर बनाया जा सके और इसके लिए इच्छुक राष्ट्रों के बीच सहयोगी ढांचा बनाया जा सके। जानते हैं मोदी के उसी भयमुक्त समुद्री क्षेत्र के विजन के बारे में, यह इतना जरूरी क्यों है। यह भी जानेंगे कि आखिर ये मंच किस तरह का है। समुद्री सुरक्षा को लेकर क्या हैं मोदी के 7 सूत्र राजनीतिक विश्लेषक डॉ. राजीव रंजन गिरि कहते हैं कि 4 नवंबर, 2019 को भारत ने पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन में अपने प्रस्ताव में समुद्री सहयोग और सहभागिता के 7 मूल पहलुओं की पहचान की थी, जो रणनीतिक रूप से मोदी के 7 तीर भी हैं। ये हैं-समुद्री सुरक्षा, समुद् इकोसिस्टम, समुद्री रिसोर्स, क्षमता निर्माण और संसाधनों का बंटवारा, आपदा जोखिम में कमी और मेनेजमेंट, विज्ञान, प्रौद्योगिकी सहयोग और कारोबारी कनेक्टिविटी व समुद्री परिवहन। पीएम मोदी के यही सूत्र हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन को दबदबे को कम कर सकते हैं। क्या है पूर्वी एशिया-शिखर सम्मेलन पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन का गठन 2005 में किया गया था। यह हिंद प्रशांत क्षेत्र में प्रमुख राजनीतिक, सुरक्षा और आर्थिक चुनौतियों पर रणनीतिक बातचीत और सहयोग के लिए 18 देशों का एक मंच है। इस मंच का विचार सबसे पहले 1991 में तत्कालीन मलेशियाई प्रधानमंत्री महाथिर बिन मुहम्मद ने दिया था। उन्होंने उस वक्त पूर्वी एशिया समूह बनाने की बात की थी। पहला पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन 14 दिसंबर, 2005 को कुआलालंपुर, मलेशिया में आयोजित किया गया था। भारत इस मंच के फाउंडर मेंबर में शामिल भारत पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन के संस्थापक सदस्यों में शामिल है। पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन में दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों का संगठन (ASEAN) के 10 सदस्य देश शामिल हैं-ब्रुनेई, कंबोडिया, इंडोनेशिया, लाओस, मलेशिया, म्यांमार, फिलीपींस, सिंगापुर, थाईलैंड और वियतनाम के साथ ही 8 सदस्य देश ऑस्ट्रेलिया, चीन, जापान, भारत, न्यूज़ीलैंड, कोरिया गणराज्य, रूस और संयुक्त राज्य अमेरिका है। दुनिया की जीडीपी में 58 फीसदी हिस्सेदारी डॉ. राजीव रंजन गिरि के अनुसार, पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन के सदस्य विश्व की लगभग 54% आबादी का प्रतिनिधित्व करते हैं तथा वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद में इनकी 58% भागीदारी है। पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन एक आसियान केंद्रित मंच है। इसकी अध्यक्षता केवल एक आसियान सदस्य द्वारा की जा सकती है। पूर्वी एशिया-शिखर सम्मेलन की अध्यक्षता कौन करता है ASEAN का अध्यक्ष EAS का भी अध्यक्ष होता है तथा प्रतिवर्ष 10 ASEAN सदस्य देशों के मध्य बारी-बारी से इसकी अध्यक्ष की जाती है। सहयोग के प्रमुख क्षेत्र हैं-पर्यावरण और ऊर्जा, शिक्षा, वित्त, वैश्विक स्वास्थ्य संबंधी मुद्दे, प्राकृतिक आपदा प्रबंधन, आसियान देशों के मध्य संपर्क, आर्थिक व्यापार और सहयोग, खाद्य सुरक्षा और समुद्री सहयोग। क्या यह अमेरिका-यूरोप के बाद तीसरा ध्रुव भारतीय वैश्विक परिषद में रिसर्चर रहे डॉ. टेम्जेनमरेन एओ के एक लेख 'हिंद-प्रशांत और भू-राजनीतिक क्षेत्र में पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन की भूमिका' में कहा गया है कि 2021 में EAS सदस्यों ने दुनिया की करीब 54% आबादी का प्रतिनिधित्व किया। इसके सदस्य देशों ने अनुमानित रूप से 57.2 ट्रिलियन डॉलर मूल्य का कारोबार किया, जो वैश्विक जीडीपी का 59.5% है। यह मज़बूत और तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं वाला क्षेत्र है। इसे अमेरिका और यूरोप के बाद विश्व अर्थव्यवस्था का तीसरा ध्रुव माना जाता है। भारत, जापान, चीन और कोरिया वर्ल्ड इकोनॉमी में पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन में 4 प्रमुख आर्थिक भागीदार देश जापान, चीन, भारत और कोरिया 12 उच्च रैंकिंग वाली वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हैं। EAS देशों के बीच वित्तीय और मौद्रिक सहयोग इतना ज्यादा है कि उनका संयुक्त विदेशी मुद्रा भंडार 3 ट्रिलियन डॉलर के पार जा चुका है। समंदर पर है चीन की टेढ़ी नजर, भारत से दुश्मनी भारत-जापान समेत चीन का हिंद प्रशांत क्षेत्र में तकरीबन हर देश के साथ कुछ न कुछ विवाद बना हुआ है। दरअसल, चीन के मंसूबे नापाक हैं। उसकी दक्षिण चीन सागर से लेकर हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अपना प्रभुत्व बढ़ाने की टेढ़ी नजर है। इसके अलावा, इस क्षेत्र में चीन कारोबार और निवेश के क्षेत्र में भी भारत को अपना प्रतिद्वंद्वी मानता है। समुद्री सुरक्षा समेत मुक्त कारोबार पर भी जोर डॉ. टेम्जेनमरेन एओ कहते हैं कि EAS का मकसद समुद्री सुरक्षा के साथ-साथ समंदर में मुक्त कारोबारी क्षेत्र विकसित करना भी है। यही वजह है कि पीएम मोदी समंदर को भयमुक्त बनाना चाहते हैं। वह चाहते हैं कि समुद्री सुरक्षा होने से हिंद-प्रशांत देशों के बीच समुद्री कारोबार ज्यादा बढ़ेगा। दरअसल, इस इलाके में क्षेत्रीय शक्तियों के बीच सैन्य बजट में बढ़ोतरी शांति, सुरक्षा और समृद्धि के व्यापक मकसद को कमजोर करता है। भारत के लिये EAS की क्या अहमियत है? भारत के लिए EAS इसके तेजी से बढ़ते आर्थिक और राजनीतिक ताकत को मान्यता देने वाला मंच है। ASEAN और अन्य बहुपक्षीय देशों के साथ बहुआयामी संबंध बनाने और द्विपक्षीय संबंधों को मज़बूत करने के लिये भारत ने अपनी एक्ट ईस्ट पॉलिसी (Act East Policies) पर बल दिया है जिसके लिये EAS महत्त्वपूर्ण साबित होगा। मुद्री क्षेत्र में भारत बन सकता है बड़ा पॉवर दक्षिण चीन सागर में चीन की दबंगई और उसके बढ़ते निवेश की प्रकृति ने आसियन देशों में भारत को एक ऐसी संभावित शक्ति के रूप में देखने के लिये प्रेरित किया है जो चीन को संतुलित कर सकता है। भारत समुद्री क्षेत्र में बड़ा पॉवर बन सकता है। भारत की शक्ति सेवा क्षेत्र और सूचना-प्रौद्योगिकी में है, वहीं जापान के पास एक मजबूत पूंजी आधार भी है। recent visitors 147