साईबर सुरक्षा व जल संरक्षण को लेकर नगर निगम ऑडिटोरियम में आयोजित हुई कार्यशाला

साईबर सुरक्षा व जल संरक्षण के उपायों को लेकर जागरूकता व उसे अमल में लाना बेहद जरूरी-सुप्रीम कोर्ट जस्टिस प्रशांत मिश्रा साईबर अपराधों से बचाव व जल संरक्षण के लिए सजगता से करने होंगे साझे प्रयास-वित्त मंत्री ओ.पी.चौधरी साईबर सुरक्षा व जल संरक्षण को लेकर नगर निगम ऑडिटोरियम में आयोजित हुई कार्यशाला जिला विधिक सेवा प्राधिकरण तथा जिला एवं पुलिस प्रशासन के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित हुई कार्यशाला रायगढ़ साईबर जागरूकता एवं जल संरक्षण को लेकर नगर निगम ऑडिटोरियम में गुरूवार शाम 5 बजे से कार्यशाला का आयोजन किया गया। सुप्रीम कोर्ट जस्टिस प्रशांत मिश्रा कार्यक्रम के मुख्य अतिथि रहे। वित्त मंत्री ओ.पी.चौधरी बतौर विशिष्ट अतिथि के रूप में कार्यक्रम में शामिल हुए। कार्यशाला में साईबर जागरूकता एवं जल संरक्षण पर प्रजेन्टेशन के माध्यम से विस्तृत जानकारी दी गई। यह कार्यशाला जिला विधिक सेवा प्राधिकरण तथा जिला एवं पुलिस प्रशासन के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित की गई। इसमें जिला एवं सत्र न्यायाधीश रायगढ़ जितेन्द्र कुमार जैन, कलेक्टर कार्तिकेया गोयल, पुलिस अधीक्षक दिव्यांग पटेल, सीईओ जिला पंचायत जितेन्द्र यादव, जिला न्यायालय से सभी न्यायाधीश, जिला व पुलिस प्रशासन के अधिकारी उपस्थित रहे।             कार्यशाला को संबोधित करते हुए जस्टिस प्रशांत मिश्रा ने कहा कि साईबर जागरूकता एवं जल संरक्षण यह दो ऐसे विषय है जो आज के समय में हम सभी के जीवन से सीधे तौर से जुड़े हुए है। साईबर अपराधों से बचाव के लिए इसके बारे में जागरूक होना सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है। आज टेक्नालॉजी तेजी से विकसित हो रही है। ऐसे में स्वयं को अपडेट रखना और साईबर अपराधों से जुड़ी जानकारी व उससे बचाव के तरीकों को अमल में लाकर ऐसे अपराधों से बचा जा सकता है। उन्होंने अपने आसपास के वाकये बताते हुए कहा कि साईबर ठग लोगों को ज्यूडशरी से जुड़े लोगों के नाम पर भी ठगने का प्रयास करते है। ऐसे मामलों में सतर्कता व सुझबुझ से काम लेना जरूरी है। उन्होंने जल संरक्षण को लेकर कहा कि यह ऐसा मामला है जिसमें हर नागरिक की सहभागिता जरूरी है। जागरूकता के साथ ही जल संरक्षण के उपायों को अमल में लाकर ही हम अपने आसपास एक बेहतर वातावरण निर्मित कर सकते है। इसके लिए सभी को सकारात्मक सोच के साथ काम करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, जिला एवं पुलिस प्रशासन के द्वारा लोगों को जागरूक करने के लिए एक अच्छा प्रयास किया जा रहा है। अधिक से अधिक लोगों को इसका लाभ लेकर अपने आसपास दूसरों को भी जागरूक करना चाहिए।             वित्त मंत्री ओ.पी.चौधरी ने कहा कि साईबर अपराधों का दायरा जिस तेजी से बढ़ा है, लोगों के बीच सतर्कता का स्तर उसी अनुरूप बढ़ाना आवश्यक है। आज के डिजीटल युग में अगर समझदारी से काम न लिया जाए तो एक क्लिक में आदमी अपनी सारी जमा पूंजी गंवा सकता है। उन्होंने बताया कि चोरी जैसे अपराधों के मुकाबले अब साईबर ठगी से लोगों को कही ज्यादा आर्थिक नुकसान हो रहा है। शासन-प्रशासन अपने स्तर पर ऐसे अपराधों पर लगाम लगाने व अपराधियों को सजा दिलाने के लिए कार्य कर रही है। लेकिन एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में सभी को सतर्कता बरतने की आवश्यकता है। साईबर अपराधों के तरीके व इसके पीछे काम करने वाले मनोभावों की समझ बढ़ाकर तथा उससे बचाव के तरीकों के बारे में स्वयं तथा अपने परिवार वालों को जागरूक कर साईबर अपराधों से बचा जा सकता है। उन्होंने जिला प्रशासन के जल संरक्षण अभियान की सराहना करते हुए कहा कि रायगढ़ में भू-जल व पर्यावरण संरक्षण की दिशा में यह महत्वपूर्ण कार्य है। उन्होंने बताया कि शासन स्तर पर नवा रायपुर में पीपल फॉर पीपुल अभियान चलाकर व्यापक रूप से पीपल के पेड़ लगाने का काम किया जा रहा है। रायगढ़ जिले में भी व्यापक स्तर पर यह कार्य हुआ है। केलो बांध का पानी नहरों के माध्यम से किसानों तक पहुंचाने की दिशा में कार्य हो रहा है। उन्होंने कहा कि हमारी संस्कृति में प्रकृति पूजन का अहम स्थान रहा है। इसको दृष्टिगत रखते हुए हम सभी को जल संरक्षण की दिशा में साथ मिलकर कार्य करना होगा। उन्होंने बताया कि पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से शासन स्तर पर फ्लाईएश व ईएसपी मैनेजमेंट की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है।            कार्यशाला को कलेक्टर कार्तिकेया गोयल ने संबोधित करते हुए कहा कि साईबर सुरक्षा व जल संरक्षण को लेकर जागरूकता आज समाज के प्रत्येक नागरिक के लिए बेहद जरूरी है। सभी के साझे प्रयास से ही इन समस्याओं का समाधान संभव है। पुलिस अधीक्षक दिव्यांग पटेल ने कार्यक्रम में आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इन सामाजिक उद्देश्यों की पूर्ति सभी के समन्वित प्रयास से ही संभव होगी। कार्यशाला में नगर निगम आयुक्त सुनील कुमार चंद्रवंशी, एसडीएम रायगढ़ प्रवीण तिवारी, डीएसपी साईबर अभिनव उपाध्याय व साइबर टीम के साथ हेल्पिंग हैंड्स क्लब फाउंडेशन के संरक्षक मनोज गोयल अध्यक्ष  अंकित अग्रवाल, विन्नी सलूजा, निलेश अग्रवाल, राजेश अग्रवाल, कविता बेरीवाल, अंजू बंसल, दिव्य ऊर्जा लायंस क्लब, लायंस क्लब प्राइड, रानीसति सेवा समिति, लायंस क्लब सिटी, दिव्य शक्ति सहित शहर के गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। जन भागीदारी से जल भागीदारी की मुहिम होगी सफल कार्यक्रम में सीईओ जिला पंचायत जितेन्द्र यादव ने जन भागीदारी से जल भागीदारी विषय पर जिला प्रशासन द्वारा किए गए कार्यों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पूरे जिले में जल संरक्षण को लेकर विभागीय समन्वय से व्यापक स्तर पर कार्य किए जा रहे है। इसमें लोगों को जल संरक्षण के लिए जागरूक करने के साथ पानी को सहेजने के लिए किए जा रहे प्रयासों में उनकी सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित की जा रही है। इस मुहिम में जिले के हर पंचायत में काम किया जा रहा है। दस हजार से अधिक हैण्डपंप के समीप सोख्ता गड्ढा बनाया गया है। 50 हजार पीपल के पेड़ लगाए गए है। नारी शक्ति से जल शक्ति के ध्येय के साथ कार्य किया जा रहा है। रायगढ़ में जल शक्ति केन्द्र की स्थापना की गई है। अमृत सरोवर योजना से तालाबों के गहरीकरण व विस्तार का काम किया जा रहा है। विभागों द्वारा विभिन्न प्रकार की जल संरक्षण संरचनाओं का निर्माण किया गया है। किसानों को उद्यानिकी फसलों की खेती से जोड़ा गया है। स्वच्छता ही सेवा के तहत … Read more

महादेव बेटिंग एप के मास्टरमाइंड सौरभ चंद्राकर को यूएई (UAE) में गिरफ्तार, भारत लाने की तैयारी

नई दिल्ली महादेव बेटिंग ऐप केस में भारत की जांच एजेंसियों को बड़ी कामयाबी मिली है. सूत्रों के मुताबिक बेटिंग ऐप के मालिक सौरभ चंद्राकर को इंटरपोल ने डिटेन कर लिया है, जिसके बाद उसे भारत वापस लाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है. सूत्रों के मुताबिक प्रवर्तन निदेशालय (ED) की टीम महादेव ऐप के मालिक सौरभ चंद्राकर को एक हफ्ते के अंदर भारत लेकर आ सकती है. बताया जा रहा है कि इंटरपोल ने सीबीआई को सूचित किया है, जो नोडल एजेंसी है. बता दें कि इस मामले में ईडी ने रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया था. बता दें कि महादेव ऐप के मास्टरमाइंड सौरभ चंद्राकर का D कंपनी (दाऊद इब्राहिम) से भी कनेक्शन है. देश के कई राज्यों में महादेव ऐप के खिलाफ केस दर्ज है. ED में भी ऐप को लेकर शिकायत दर्ज की गई है. बता दें कि इससे पहले दिसंबर 2023 को भी सौरभ चंद्राकर को दुबई में हिरासत में लेने के बाद 'घर में नजरबंद' किया गया था. केंद्र ने महादेव बेटिंग ऐप पर लगाया बैन केंद्र सरकार ने 5 नवंबर 2023 को महादेव बेटिंग ऐप समेत अवैध सट्टेबाजी वाले 22 ऐप और वेबसाइटों को ब्लॉक करने का आदेश दिया था. ED की सिफारिशों के बाद इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी अधिनियम की धारा 69ए के तहत आदेश जारी किए गए थे. महादेव ऑनलाइन सट्टेबाजी ऐप मामला तब सुर्खियों में आया था, जब ईडी ने दावा किया कि उसने एक 'कैश कूरियर' के ईमेल स्टेटमेंट को रिकॉर्ड किया है, जिसमें खुलासा हुआ है कि छत्तीसगढ़ के तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने यूएई में स्थित ऐप प्रमोटरों से कथित तौर पर 508 करोड़ रुपये लिए थे. हालांकि, बघेल ने आरोपों को खारिज किया था. ईडी ने 8 नवंबर को दर्ज किया था केस महादेव बेटिंग ऐप और उसके प्रमोटर्स के खिलाफ धोखाधड़ी को लेकर मुंबई पुलिस ने 8 नवंबर 2023 को केस दर्ज किया था. आरोपियों पर चीटिंग करने और जुआ खिलाने के आरोप लगे थे. इस मामले में माटुंगा पुलिस थाने में सौरभ चंद्राकर, रवि उप्पल समेत 30 से ज्यादा लोगों पर केस दर्ज हुआ था, जिसे बाद में मुंबई क्राइम ब्रांच को सौंपा गया और बाद में इसकी जांच के लिए एक एसआईटी बनाई गई. दरअसल, इस मामले में सामाजिक कार्यकर्ता ने निचली अदालत में याचिका दायर की थी. इसमें ऐप और इसके प्रमोटर्स के खिलाफ एक्शन लेने की मांग की गई थी. इस पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने माटुंगा पुलिस को केस दर्ज करने को कहा था. पुलिस ने बताया कि सौरभ, रवि आदि के खिलाफ FIR दर्ज की गई. FIR के मुताबिक, आरोपियों ने लोगों को करीब 15 हजार करोड़ का चूना लगाया है.   recent visitors 70

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उज्जैन के 15 अखाड़ों को प्रोत्साहन स्वरूप 2-2 लाख रुपए देने की घोषणा

प्रदेश में कुश्ती सहित अन्य सभी खेलों को निरंतर बढ़ावा दिया जाएगा : मुख्यमंत्री डॉ. यादव उज्जैन में मलखंभ अकादमी शीघ्र चालू होगी  : मुख्यमंत्री डॉ. यादव  मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उज्जैन के 15 अखाड़ों को प्रोत्साहन स्वरूप 2-2 लाख रुपए देने की घोषणा मुख्यमंत्री डॉ. यादव उज्जैन के क्षीरसागर सागर स्टेडियम ऑडिटोरियम में आयोजित कुश्ती दंगल कार्यक्रम में पहुंचे उज्जैन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश में कुश्ती सहित अन्य सभी खेलों को निरंतर बढ़ावा दिया जाएगा। उज्जैन में मलखंभ अकादमी शीघ्र चालू होगी। मलखंभ के साथ जिम्नास्टिक की भी सौगात मिलेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गुरुवार को उज्जैन के क्षीरसागर स्टेडियम के ऑडोटोरियम में सॉवरियाँ ग्रुप द्वारा आयोजित कुश्ती दंगल प्रतियोगिता के प्रतिस्पर्धियों को संबोधित किया1 मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस दौरान उज्जैन के सभी 15 अखाड़ों को आवश्यक उपकरण और सामग्री के लिए 2-2 लाख रुपए देने की घोषणा की। उन्होंने सभी खेल प्रेमियों को हार्दिक शुभकामनाएं एवं बधाई दी। इस अवसर पर विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा, विवेक जोशी सहित अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री उज्जैन के विभिन्न गरबा कार्यक्रमों में हुए शामिल मुख्यमंत्री डॉ. यादव महाष्टमी के पर्व पर आयोजित विभिन्न गरबा कार्यक्रमों में शामिल हुए। उन्होंने देवी माँ की पूजा-अर्चना कर सभी के लिये मंगल-कामनाएँ कीं।   recent visitors 67

अटल पेंशन योजना 18 से 40 वर्ष की उम्र के नागरिकों के लिए लाई गई है, इस योजना से 10वें वर्ष में जुड़े 56 लाख लोग

नई दिल्ली भारत सरकार नागरिकों के लिए कई योजनाएं चला रही है। इन्हीं योजनाओं में से एक अटल पेंशन योजना है। यह योजना 18 से 40 वर्ष की उम्र के नागरिकों के लिए लाई गई है। अटल पेंशन योजना यानी एपीआई के 9 वर्ष पूरे हो चुके हैं। योजना के दसवें वर्ष में पेंशन फंड नियामक एवं विकास प्राधिकरण (पीएफआरडीए) की ओर से मंगलवार को सकल पंजीकरण के आंकड़ों की जानकारी दी गई है। पीएफआरडीए द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक,अटल पेंशन योजना से अब तक 7 करोड़ लोग जुड़ चुके हैं। इस योजना के तहत वर्ष 2024- 25 में अब तक 56 लाख से अधिक नामांकन हुए हैं। प्राधिकरण ने कहा, “यह योजना अपने 10वें वर्ष में है और इसने एक बड़ी उपलब्धि हासिल कर ली है।” अटल पेंशन योजना के तहत नागरिकों को 60 वर्ष की उम्र में पेंशन की सुविधा दी जाती है। यह भारत में असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों पर केंद्रित पेंशन योजना है, जिसे पेंशन फंड नियामक एवं विकास प्राधिकरण द्वारा रेगुलेट किया जाता है। योजना के तहत लाभार्थी को 1,000- 5000 रुपये प्रति माह पेंशन दी जाती है। पेंशन की राशि लाभार्थी को उसके द्वारा योजना में दिए योगदान के आधार पर तय होती है। भारत का कोई भी नागरिक इस योजना में नामांकन करवा सकता है। योजना के लिए व्यक्ति का डाकघर या बैंक में एक बचत खाता होना अनिवार्य है। पीएफआरडीए ने कहा, “समाज के सबसे कमजोर वर्गों को पेंशन के दायरे में लाने की यह उपलब्धि सभी बैंकों और एसएलबीसी/यूटीएलबीसी के अथक प्रयासों से संभव हो पाई है।” हाल के दिनों में, नियामक प्राधिकरण ने योजना के बारे में जागरूकता पैदा करने के लिए राज्य और जिला स्तर पर एपीवाई आउटरीच कार्यक्रम आयोजित करना, जागरूकता और प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करना, विभिन्न मीडिया चैनलों के माध्यम से प्रचार करना और नियमित निष्पादन समीक्षा करना जैसी पहल की है।   recent visitors 82

भारत सरकार ने परमाणु पनडुब्बी बनाने के लिए ₹40 हजार करोड़ मंजूर किए

नई दिल्ली भारत सरकार की CCS यानी प्रधानमंत्री के नेतृत्व वाली कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी ने दो स्वदेशी परमाणु पनडुब्बियों को बनाने की अनुमति दे दी है. इससे भारतीय नौसेना की सामरिक और आक्रामक क्षमता में बढ़ोतरी होगी. इन पनडुब्बियों के बनने से नौसेना की ताकत हिंद महासागर क्षेत्र और दक्षिण चीन सागर में अधिक हो जाएगी. इन पनडुब्बियों को विशाखापट्टनम के शिप बिल्डिंग सेंटर में बनाया जाएगा. इस बनाने में लार्सेन एंड टुब्रो जैसी निजी कंपनियों की मदद भी ली जा सकती है. पनडुब्बियां 95 फीसदी तक स्वदेशी होंगी. ये पनडुब्बियां अरिहंत क्लास से अलग होंगी. इन्हें प्रोजेक्ट एडवांस्ड टेक्नोलॉजी वेसल के तहत बनाया जाएगा. अभी दो पनडुब्बियां बनेंगी, इसके बाद चार और बनाई जा सकती है. जबकि भारत ने हाल ही में अपनी दूसरी SSBN यानी परमाणु पनडुब्बी INS Arighat कमीशन की है. अगले साल भर के अंदर भारतीय नौसेना में अलग-अलग तरह के कई युद्धपोत और सबमरीन मिलने वाले हैं. कौन-कौन से जंगी जहाज होंगे शामिल… इन 12 जंगी जहाजों में फ्रिगेट्स, कॉर्वेट्स, डेस्ट्रॉयर्स, सबमरीन और सर्वे वेसल भी हैं. नौसेना में इनके शामिल होने से इंडियन ओशन रीजन (IOR) में सुरक्षा का स्तर बढ़ जाएगा.   आईएनएस विशाखापट्टनम (INS Vishakhapatnam)… विशाखापट्टनम क्लास में चार युद्धपोत शामिल हैं. विशाखपट्टनम अपने क्लास की प्रमुख जंगी जहाज है. ये इस साल दिसंबर में नौसेना में शामिल होगा. इसमें कुछ अपग्रेडेशन का काम चल रहा है. इसी साल दिसंबर में इसी क्लास का आईएनस सूरत भी शामिल होगा. इस क्लास के डेस्ट्रॉयर्स में 32 बराक 8 मिसाइलें, 16 ब्रह्मोस एंटी शिप मिसाइल 4 टॉरपीडो ट्यूब्स, 2 एंटी-सबमरीन रॉकेट लॉन्चर्स, 7 प्रकार के गन्स होते हैं. ध्रुव और सी किंग हेलिकॉप्टर तैनात हैं. ये ऐसे युद्धपोत हैं, जिनसे लगातार ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों का परीक्षण किया जा रहा है. आईएनएस वाघशीर (INS Vagsheer)… ये कलवारी क्लास यानी स्कॉर्पीन क्लास की डीजल-इलेक्ट्रिक अटैक पनडुब्बी है. यह पनडुब्बी इस साल दिसंबर में तैनात हो जाएगी. यह एंटी-सरफेस, एंटी-सबमरीन वारफेयर में माहिर है. आईएनएस वाघशीर कई मिशन कर सकती है. जैसे सतह-विरोधी युद्ध, पनडुब्बी रोधी युद्ध, खुफिया जानकारी जमा करना, समुद्री बारूदी सुरंग बिछाना, क्षेत्र की निगरानी आदि. पनडुब्बी को ऑपरेशन के समय हर परिस्थिति में संचालित करने के लिए डिजाइन किया गया है. इसकी लंबाई लगभग 221 फीट, बीम 20 फीट और ऊंचाई 40 फीट होती है. पानी की सतह पर इसकी गति 20 KM प्रतिघंटा है. पानी के अंदर ये 37 KM प्रतिघंटा की स्पीड से चलती हैं. यह 50 दिनों तक पानी के अंदर बिता सकती है. अधिकतम 350 फीट की गहराई जा सकती है. इसमें 8 सैन्य अधिकारी और 35 सेलर तैनात किए जा सकते हैं. इनके अंदर एंटी-टॉरपीड काउंटरमेजर सिस्टम लगा है. इसके अलावा 533 मिमी के 6 टॉरपीडो ट्यूब्स होते हैं, जिनसे 18 एसयूटी टॉरपीडोस या एसएम.39 एक्सोसेट एंटी-शिप मिसाइल लॉन्च की जा सकती हैं. इसके अलावा यह पानी के अंदर 30 समुद्री बारूदी सुरंग बिछा सकती है. आईएनएस संशोधक (INS Sanshodhak)… यह अगले साल जून में नेवी में शामिल होगी. यह संध्यक क्लास का सर्वे शिप है. इसकी मदद से नौसेना समंदर के नीचे और ऊपर किसी भी तरह का रिसर्च और सर्वे मिशन कर सकती है. आईएनएस निर्देशक (INS Nirdeshak)… ये भी संध्यक क्लास का सर्वे वेसल है. ये इस साल अगस्त में शामिल हो चुकी है. इसमें एडवांस हाइड्रोग्राफिक जांच करने की क्षमता है. साथ ही यह नौसेना के मेरिटाइम ऑपरेशन और सुरक्षित नेविगेशन में मदद करेगा. आईएनएस इक्छक (INS Iskshak)… संध्यक क्लास का यह सर्वे वेसल अगले साल मार्च में मिलेगा. इससे नौसेना हाइड्रोग्राफिक सर्वे कर पाएगी. और साथ ही मेरीटाइम डेटा जमा करने में मदद करेगा. आईएनएस अरनाला (INS Arnala)… यह इस साल नवंबर में नौसेना को मिलेगा. इसका डिस्प्लेसमेंट 900 टन होगा. यह करीब 255 फीट लंबा है. बीम 34 फीट ऊंची है. यह अधिकतम 46 km/hr  की रफ्तार से चलेगा. इसकी रेंज 3300 km है. इस युद्धपोत पर 7 अधिकारियों समेत 57 नौसैनिक तैनात हो सकते हैं. इसमें ASW कॉम्बैट सूइट लगा है, जो दुश्मन के हमलों से टकराने के लिए हथियारों को तैयार करेगा. उनपर नजर रखेगा. इसपर 4 तरह के मैनेजमेंट सिस्टम लगे हैं, जो जंग में युद्धपोत को सही-सलामत रखने में मदद करेंगे. RBU-6000 एंटी सबमरीन रॉकेट लॉन्चर लगा होगा. यह 213 mm की एंटी-सबमरीन रॉकेट सिस्टम है, जो दुश्मन की पनडुब्बियों के ऊपर ताबड़तोड़ रॉकेट फायरिंग करता है. इसके अलावा इस पर 6 हल्के वजन वाले ASW टॉरपीडो लगे हैं. साथ ही एंटी-सबमरीन समुद्री बारूदी सुरंगें रहेंगी. आईएनएस अरनाला पर 30 मिलिमीटर की एक CRN-91 नेवल गन होगी. यह एक ऑटोमैटिक गन होती है, जो हर मिनट 550 गोलियां दाग सकती है. यानी दुश्मन का जहाज छलनी हो जाएगा. इसकी रेंज 4 km है. इसके अलावा 2 ओएफटी 12.7 मिलिमीटर एम2 स्टेब्लाइज्ड रिमोट कंट्रोल्ड गन लगी होगी. यह भारतीय नौसेना का वाटर जेट प्रोपल्शन पावर्ड सिस्टम से लैस सबसे बड़ा युद्धपोत होगा.   आईएनएस माहे (INS Mahe)… यह अगल साल अगस्त में मिलने वाला ASW-SWC कॉर्वेट है. यह एक माइनस्वीपर है. इसके अलावा इसमें सबकुछ अरनाला जैसा ही होगा.   आईएनएस तमाला (INS Tamala)… तलवार क्लास का फ्रिगेट. इसे फरवरी 2025 में नौसेना में शामिल किया जाएगा. इन जंगी जहाजों का समंदर में डिस्प्लेसमेंट 3850 टन होता है. लंबाई 409.5 फीट, बीम 49.10 फीट और ड्रॉट 13.9 फीट है. ये जंगी जहाज समंदर में अधिकतम 59 km/hr की रफ्तार से चलते हैं. यह जंगी जहाज 18 अधिकारियों समेत 180 सैनिकों को लेकर 30 दिन तक समंदर में तैनात रह सकता है. ये जंगी जहाज इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम से लैस हैं. साथ ही 4 केटी-216 डिकॉय लॉन्चर्स लगे हैं. इसके अलावा इसमें 24 Shtil-1 मीडियम रेंज की मिसाइलें तैनात हैं.   8 इगला-1ई, 8 वर्टिकल लॉन्च एंटी-शिप मिसाइल क्लब, 8 वर्टिकल लॉन्च एंटी-शिप और लैंड अटैक ब्रह्मोस मिसाइल भी तैनात है. इसमें एक 100 मिलिमीटर की A-190E नेवल गन लगी है. इसके अलावा एक 76 mm की ओटो मेलारा नेवल गन लगी है. 2 AK-630 सीआईडब्लूएस और 2 काश्तान सीआईडब्लूएस गन लगी हैं. इन खतरनाक बंदूकों के अलावा दो 533 मिलिमीटर की टॉरपीडो ट्यूब्स हैं. और एक रॉकेट लॉन्चर भी तैनात की गई है. इस जंगी जहाज पर एक कामोव-28 या एक कामोव-31 या ध्रुव हेलिकॉप्टर लैस … Read more

शिमला मस्जिद मामले में संजौली की दुकानों पर लगाए गए ‘सनातनी सब्जी वाला’ बोर्ड, देवभूमि संघर्ष समिति लगा रही पोस्टर

शिमला हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला के संजौली इलाके में देवभूमि संघर्ष समिति ने एक नया अभियान शुरू कर दिया है. यहां देवभूमि संघर्ष समिति की ओर से हिंदू दुकानदारों की सब्जी की दुकान के बाहर एक बोर्ड लगाया जा रहा है. इस बोर्ड में 'सनातन सब्जी वाला' लिखा गया है. इसका उद्देश्य यह है कि स्थानीय लोग हिंदू दुकानदारों से खरीदारी करें और बाहरी लोगों का बॉयकॉट किया जाए. देवभूमि संघर्ष समिति के राज्य सह संयोजक विजय शर्मा ने कहा कि समिति की ओर से यह अभियान शुरू किया गया है. इस अभियान का उद्देश्य संजौली इलाके में हिंदू सब्जीवालों को बढ़ावा देना है. उन्होंने कहा कि वे लोगों से यह भी अपील कर रहे हैं कि बाहरी लोगों से वह खरीददारी न करें और स्थानीय दुकानदारों को आगे बढ़ाएं, ताकि उनका रोजगार चल सके. विजय शर्मा ने कहा, "हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला के संजौली इलाके में रोहिंग्या जैसे लोगों का आना शुरू हो गया है. यह लोग यहां पर व्यापार कर रहे हैं. इस बीच देवभूमि संघर्ष समिति ने स्थानीय दुकानदारों को आगे बढ़ने का बीड़ा उठाया है." नेम प्लेट को लेकर पहले मच चुका बवाल हिमाचल में इससे पहले भी दुकानों में नेम प्लेट लगाने को लेकर विवाद हो चुका है। शहरी विकास मंत्री विक्रमादित्य सिंह के बयान पर पूरे देश में बवाल मचा था। दरअसल, पिछले महीने विक्रमादित्य सिंह ने कहा था कि सभी दुकानों में उत्तर प्रदेश की तर्ज पर नेम प्लेट लगानी होगी। इस बयान के बाद देशभर में कांग्रेस बेक फुट पर आ गई थी, क्योंकि उत्तर प्रदेश में योगी सरकार ने जब कावड़ यात्रा के दौरान नेम प्लेट लगाना अनिवार्य किया था, उस दौरान देशभर में कांग्रेस ने विरोध किया था। विक्रमादित्य के इस बयान के बाद कांग्रेस सरकार ने भी मंत्री के बयान से किनारा कर दिया था और मंत्री का निजी बयान बताया था। बहुदलीय कमेटी स्ट्रीट वेंडर पॉलिसी के लिए रूल्स तैयार कर रही हिमाचल विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने उद्योग मंत्री हर्ष वर्धन चौहान की अध्यक्षता में रेहड़ी फड़ी वालों की समस्या के समाधान के लिए उद्योग मंत्री की अध्यक्षता में एक कमेटी गठित कर रखी है। यह कमेटी स्ट्रीट वेंडर पॉलिसी के लिए रूल्स तैयार कर रही है। नेम प्लेट वाले मामले पर हो चुका है विवाद हिमाचल प्रदेश देवभूमि संघर्ष समिति के इस अभियान के बाद अब संजौली में सब्जी बेच रहे दुकानदारों का धर्म प्रदर्शित होगा. इससे पहले हिमाचल प्रदेश में शहरी विकास मंत्री विक्रमादित्य सिंह के नेम प्लेट वाले बयान को लेकर भी खासा विवाद हो चुका है. विक्रमादित्य सिंह ने उत्तर प्रदेश के तर्ज पर हिमाचल प्रदेश के रेहड़ी-फड़ी वालों के नाम प्रदर्शित करने की बात कही थी. हालांकि बाद में उन्होंने स्पष्ट किया था कि इस पूरे मामले का उत्तर प्रदेश और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मॉडल से कोई लेना-देना नहीं है. विधानसभा अध्यक्ष ने की कमेटी गठित हिमाचल प्रदेश में स्ट्रीट वेंडर पॉलिसी के लिए विधानसभा अध्यक्ष की ओर से जो कमेटी गठित की गई है, वहीं इस संबंध में फैसला लेगी. गौरतलब है कि कि हिमाचल प्रदेश में स्ट्रीट वेंडर एक्ट के तहत जो भी व्यक्ति वेंडिंग करता है, उसे नगर निगम की ओर से लाइसेंस दिया जाता है. इस लाइसेंस में पहले से ही व्यक्ति की पहचान से जुड़ी जानकारी होती है. इस लाइसेंस को दुकान में लगाना पहले से ही अनिवार्य है. recent visitors 138

“उद्योग मित्र योजना से कनेक्शन जोड़ने एवं विद्युत विक्रय में वृद्धि होने से राजस्व में वृद्धि भी होगी : ऊर्जा मंत्री तोमर

भोपाल ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने बताया कि प्रदेश के उच्चदाब एवं निम्नदाब श्रेणी के औद्योगिक एवं वाणिज्यिक उपभोक्ताओं की सुविधा के लिये स्थायी रूप से विच्छेदित विद्युत कनेक्शनों को पुन: जोड़ने एवं बकाया राशि के भुगतान में राहत तथा नवीन औद्योगिक एवं वाणिज्यिक आवेदकों को आवश्यक अधोसंरचना निर्माण की लागत के भुगतान में राहत देने के लिये "उद्योग मित्र योजना-2024" लागू की गई है। यह योजना 2 वर्षों के लिये प्रभावशील रहेगी। मंत्री तोमर ने कहा है कि इस योजना से वितरण कंपनियों की स्थायी रूप से विच्छेदित उपभोक्ताओं से बकाया राशि की वसूली हो सकेगी। साथ ही फिर से कनेक्शन जोड़ने एवं नवीन कनेक्शनों से विद्युत विक्रय में वृद्धि होने से राजस्व में वृद्धि भी होगी। यह योजना राज्य के औद्योगिक विकास के लिये भी सहायक होगी। पात्रता योजना में सभी उच्च एवं निम्न दाब श्रेणी के स्थायी रूप से विच्छेछित औद्योगिक और वाणिज्यिक उपभोक्ता, जो कि योजना अनुसार बकाया राशि जमा कर पुनर्संयोजन या नया कनेक्शन लेना चाहते हैं, पात्र होंगे। साथ ही ऐसे औद्योगिक एवं वाणिज्यिक श्रेणी के नवीन आवेदक भी पात्र होंगे, जो विद्युत कनेक्शन के लिये विद्युत अधोसंरचना का निर्माण विद्युत वितरण कंपनियों से करवाना चाहते हैं। प्रावधान योजना में उपभोक्ताओं को स्थाई विच्छेदन के दिनांक पर देय कुल बकाया राशि का न्यूनतम 20 प्रतिशत भुगतान कनेक्शन जोड़ने के पूर्व एक मुश्त देना होगा। नवीन कनेक्शनों के प्रकरणों में जरूरी अधोसंरचना लागत की राशि का न्यूनतम 20 प्रतिशत भुगतान आवेदन के साथ एक मुश्त देना होगा। शेष राशि का भुगतान मासिक बिल के साथ ब्याज सहित अधिकतम 3 वर्ष में किया जा सकेगा। योजना का लाभ लेने के लिये आवेदक को महाप्रबंधक/वृत्त कार्यालय में आवेदन देना होगा। साथ ही 500 रूपये के स्टॉम्प पेपर पर इस आशय का शपथ-पत्र देना होगा कि वह योजना के प्रावधान के अनुसार राशि का भुगतान करेंगे। नवीन कनेक्शनों के लिये आवेदकों को ऑनलाइन आवेदन देना होगा एवं विद्युत नियामक आयोग द्वारा निर्धारित सर्विस कनेक्शन शुल्क, सुरक्षा निधि आदि भी देय होगा। आवश्यक अधोसंरचना का निर्माण बिजली कम्पनियों द्वारा निर्धारित एसओआर के अनुसार किया जायेगा। निर्धारित किश्तों एवं मासिक देयकों का भुगतान नहीं किये जाने पर 15 दिवस की सूचना देकर बिजली कनेक्शन काटा जा सकेगा। योजना का लाभ उपभोक्ताओं को केवल एक बार ही प्राप्त हो सकेगा। योजना अवधि में कोई उपभोक्ता अपने परिसर का हस्तांतरण किसी अन्य व्यक्ति को करता है, तो निर्धारित शर्तों के तहत सभी सुविधाएं नये उपभोक्ता को प्राप्त हो सकेंगी। योजनांतर्गत किसी भी प्रकार के विवाद की स्थिति में प्रकरण का निराकरण विभागीय समिति द्वारा किया जायेगा। समिति में अपर मुख्य सचिव ऊर्जा, प्रबंध संचालक एमपी पॉवर मैनेजमेंट कम्पनी और विधि विशेषज्ञ होंगे। समिति के संयोजक संबंधित विद्युत वितरण कम्पनी के प्रबंध संचालक होंगे। योजनावधि में प्राप्त होने वाले आवेदनों पर भी विचार किया जायेगा। योजनावधि समाप्ति के अंतिम दिन तक प्राप्त सभी आवेदनों के निराकरण हर स्थिति में योजना समाप्ति दिनांक से 30 दिन के अंदर कर दिया जायेगा।   recent visitors 147