गाजा की मस्जिद पर की इजरायल ने Air Strike, 18 लोगों की मौत; युद्ध की पहली वर्षगांठ मनाने जुटे थे लोग

गाजा. गाजा पर इजरायल के हमले आज भी जारी हैं। रविवार को सुबह-सुबह एक मस्जिद पर हुई भीषण बमबारी में 18 से अधिक लोगों के मारे जाने की खबर है। फिलिस्तीनी समाचार एजेंसी वफा ने इसकी जानकारी दी है। इस हमले में दर्जनों लोग घायल हो गए हैं। इजरायल का दावा है कि यहां हमास का कमांड सेंटर था। आपको बता दें कि बीते साल 7 अक्तूबर से दोनों देशों के बीच युद्ध जारी है। इसकी पहली बरसी से ठीक पहले मध्य गाजा पट्टी के डेर अल-बला में अल-अक्सा अस्पताल के पास मौजूद मस्जिद पर हमला हुआ है। प्रत्यक्षदर्शियों ने कहा कि हताहतों की संख्या बढ़ सकती है क्योंकि मस्जिद का इस्तेमाल विस्थापित लोगों को रखने के लिए किया जा रहा था। इजरायली सेना ने एक बयान में कहा कि उसने हमास के आतंकवादियों पर एक सटीक हमला किया है। वे डेर अल बलाह के क्षेत्र में 'शुहादा अल-अक्सा' मस्जिद के रूप में काम करने वाली एक संरचना में लगे एक कमांड और कंट्रोल सेंटर के भीतर काम कर रहे थे। इससे पहले हमास की सशस्त्र शाखा अल-कस्साम ब्रिगेड ने वेस्ट बैंक के शहर तुलकरम पर एक इजरायली हमले में अपने एक प्रमुख कमांडर जही यासर अब्द अल-रजेक औफी के साथ सात अन्य लड़ाकों की मौत की पुष्टि की थी। हमास ने शुक्रवार को एक बयान में यह बातें कही। हमास की सशस्त्र शाखा अल-क़स्साम ब्रिगेड ने कहा कि इज़रायल को अपने आपराधिक कृत्यों की कीमत चुकानी होगी। इजरायल रक्षा बलों (आईडीएफ) ने गुरुवार रात घोषणा की कि उसने हमास नेटवर्क के प्रमुख कमांडर औफी को मार गिराया है। आईडीएफ ने एक बयान में कहा कि औफी ने 02 सितंबर को अटेरेट में कार बम विस्फोट की योजना बनाई और उसका नेतृत्व किया था। फिलिस्तीन के स्वास्थ्य मंत्रालय ने एक संक्षिप्त बयान में कहा कि गुरुवार को वेस्ट बैंक में तुलकरम शरणार्थी शिविर को निशाना बनाकर किए गए एक इज़रायली हवाई हमले में कम से कम 18 फिलिस्तीनी मारे गए और कई अन्य घायल हो गए थे। आपको बता दें कि इजरायली-फिलिस्तीनी संघर्ष में की शुरुआत में 1200 लोग मारे गए और लगभग 250 लोगों को बंधक बना लिया गया था। वहीं, गाजा के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, गाजा पर इजरायल के हमले के बाद 42,000 फिलिस्तीनी मारे गए हैं। इन हमलों ने लगभग 23 लाख लोगों को विस्थापित कर दिया है। फिलिस्तीन के लोग भूख का संकट से जूझ रहे हैं। recent visitors 78

दंतेवाड़ा जैविक कृषि जिला बनने की ओर अग्रसर, जैविक कृषि की मिसाल बनेगा

दंतेवाड़ा  जिला प्रशासन एवं कृषि विभाग के द्वारा आकांक्षी जिला दंतेवाड़ा को जैविक जिला बनाने की ओर वृहद स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं। इन प्रयासों में प्रमुख रूप से जिले के किसानों को जैविक खेती की विभिन्न तकनीकों से अवगत कराया जा रहा है। किसानों को रासायनिक खेती को छोड़ कर जैविक खेती की ओर अग्रसर करना एवं किसानों का जैविक प्रमाणीकरण इत्यादि गतिविधियां शामिल है। गौरतलब है कि दंतेवाड़ा जिले में रासायनिक खाद एवं कीटनाशकों का प्रचार-प्रसार और विक्रय प्रतिबंधित किया गया है। इसके अतिरिक्त वृहद क्षेत्र प्रमाणीकरण अंतर्गत जिले के 110 गांव के 10 हजार 264 किसानों के 65 हजार 279 हेक्टेयर भूमि का जैविक प्रमाणीकरण किया जा चुका है जो कि देश में सबसे बड़ा क्षेत्र है। जिले के प्रभारी मंत्री श्री केदार कश्यप ने इस उपलब्धि के लिए जिला प्रशासन के अधिकारियों को बधाई देते हुए कहा है कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की मंशा के अनुरूप मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य के सभी आकांक्षी जिले लगातार बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं। गौरतलब है कि दंतेवाड़ा जिले में वर्तमान में जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए जिले के 220 ग्रामों में तीन चरणों में कृषक खेत पाठशाला का आयोजन के साथ-साथ जैविक कार्यकर्ताओं के माध्यम से तकनीकी सहयोग किसानों को दिया जा रहा है। इसके साथ-साथ जैविक किसानों को विभिन्न जगहों पर अभ्यास भ्रमण एवं उनके लिए आवासीय प्रशिक्षणों का आयोजन भी किया जा रहा है। कृषि मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने दंतेवाड़ा में लोक सुराज अभियान में अधिकारियों को इसके लिए कार्य योजना बनाने को कहा। उन्होंने अभियान के दौरान पूरनतराई नर्सरी में चल रहे कृषकों के प्रशिक्षण सत्र को भी संबोधित किया। उन्होंने क्षेत्र में सिंचाई क्षमता को बढ़ाने के लिए 14 करोड़ 84 लाख की तीन सिंचाई योजनाओं की घोषणा की। इसमें फूलपाड़ जलाशय, दंतेवाड़ा व्यपवर्तन तथा कुंदेली योजना शामिल है। किसान अपनी आधी भूमि में खेती करें, एक तिहाई भूमि में पशुपालन तथा एक तिहाई भूमि में फल-फूल की खेती करें। उन्होंने कहा कि आपको नवाचार अपनाना चाहिए। आंध्र में अमरूद की बहुत माँग है नई वैरायटी के अमरूद का उत्पादन कर आप अच्छा लाभ कमा सकते हैं। लीची भी अच्छा फायदा देती है। उन्होंने कहा कि शासन द्वारा खाद-बीज के लिए शून्य प्रतिशत ब्याज पर ऋण दिया जाता है। पंप के लिए अनुदान दिया जाता है। कृषि उपकरणों के लिए अनुदान दिए जाते हैं तो इसे अपनाने के लिए किसानों को आगे आना चाहिए। recent visitors 64

31 अक्टूबर या 1 नवंबर, कब मनाई जाएगी दीपावली कन्फ्यूजन जारी ? ज्योतिषी ने दूर किया भ्रम

 हर साल की तरह इस साल भी दिवाली का त्योहार कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या को मनाया जाएगा, लेकिन इस बार तिथि की शुरुआत और समापन के बीच त्योहार मनाने की तारीखों को लेकर असमंजस खड़ी हो गई है. हिंदू धर्म के बड़े त्योहारों में से एक दिवाली को प्रकाश पर्व के रूप में मनाया जाता है. इसकी तैयारी महीनों पहले शुरू हो जाती है. इस दिन भगवान श्रीराम 14 वर्ष के वनवास के बाद वापिस अयोध्या आए थे, लेकिन इस बार दिवाली 31 अक्टूबर को मनाई जाएगी या फिर 1 नवंबर को इसको लेकर बड़ी असमंजस बनी हुई है. सनातन धर्म के पर्वों की तिथियों को लेकर अक्सर मतभेद रहता है. देश के अलग-अलग हिस्सों में अलग-अलग पंचांगों के अनुसार ज्योतिर्विद पर्वों की तिथियों का निर्धारण कर देते हैं. ऐसा ही कुछ इस बार दीपावली के पर्व पर भी हुआ है. काशी में जहां एक ओर दीपोत्सव का पर्व 31 अक्टूबर तय हो गया है तो वहीं अयोध्या सहित पश्चिम यूपी में 1 नवंबर को दिवाली के मनाने की बात सामने आ रही है. तो आइए जानते हैं कि ज्योतिष और धर्म शास्त्र के मुताबिक, दीपावली का यह महत्वपूर्ण पर्व कब मनाया जाएगा. काशी के ज्योतिष ने दिवाली की तिथि को लेकर क्या कहा काशी के ज्योतिष ऋषि द्विवेदी ने बताया कि सनातन धर्म में कार्तिक अमावस्या को दीपोत्सव या दीपावली मनाया जाता है. जिसका सभी पर्वों में अपना एक विशिष्ट स्थान है. वहीं, कार्तिक अमावस्या इस बार दो दिन है. इस बार कार्तिक अमावस्या तिथि 31 अक्टूबर को दोपहर 3 बजकर 12 मिनट से लग रही है जो अगले दिन 1 नवंबर को सायं 5 बजकर 13 मिनट तक रहेगी. देखा जाए तो इस बार दीपावली की तिथि के निर्णय ने लोगों में संशय प्रकट कर दिया है. ज्योतिष ऋषि द्विवेदी ऐसे संदर्भ में धर्म सिंधु का निर्णय सर्वोपरि माना जाता है. जिसके अनुसार कहा गया है कि "पूर्वत्रैव प्रदोष व्याप्तौ लक्ष्मीपूजनादौ पूर्वा अभ्यंग स्नान दौ परा" अर्थात यदि कार्तिक अमावस्या दो दिन हो तो उसमें पूर्व दिन लेना चाहिए. कारण है कि अमावस्या प्रदोष और रात्रि व्यापिनी में होनी चाहिए जो कि इस बार 31 अक्टूबर की अमावस्या प्रदोष और रात्रि में ही मिलेगी. इसलिए, दीपावली शास्त्रानुसार 31 अक्टूबर को मनाना शास्त्र संवत है. क्योंकि 1 अक्टूबर को रात्रि काल में अमावस्या नहीं मिल रही है इसलिए उस 1 नवंबर को दीपावली मनाना शास्त्र संवत नहीं है. उन्होंने आगे यह चुनौती भी दी कि जो लोग 1 नवंबर को दीपावली मनाने का दावा कर रहें हैं उन्हें शास्त्र की आज्ञा को प्रकट करना चाहिए. वाराणसी ज्योतिषाचार्य श्रीधर पांडेय का पक्ष वहीं, वाराणसी के ज्योतिषाचार्य श्रीधर पांडेय ने बताया कि दीपावली की पूजा अमावस्या में होती है और अमावस्या की रात्रि महाकाली की रात्रि होती है. 31 अक्टूबर 2024 को दोपहर 3 बजकर 12 मिनट के बाद अमावस्या लग रही है जो अगले दिन 1 नवंबर को शाम 5 बजकर 14 मिनट तक रहेगी. इसलिए, दीपावली का मान 31 अक्टूबर को ही है. दीपावली के पर्व पर महारात्रि में अमावस्या मिलनी चाहिए और इसमें उदया तिथि की मान्यता नहीं होती है. ज्योतिषाचार्य श्रीधर पांडेय माना जाता है कि अमावस्या की काली रात में माता लक्ष्मी धरती पर भ्रमण करती हैं. उस समय जो लोग अपने घरों और दरवाजे पर दीपक जलाते हैं और महानिशा काल में पूजन करते हैं, उन पर मां लक्ष्मी की कृपा होती है. कई जगहों पर उदया तिथि का तर्क देकर दीपावली को 1 नवंबर को मनाने का प्रचार अपने-अपने पंचांग के मुताबिक किया जा रहा है जो सरासर गलत और भ्रमित करने वाला है. धर्म शास्त्रों के अनुसार, 31 अक्टूबर की रात्रि ही दीपावली मनाई जाएगी. ज्योतिष उमंग नाथ शर्मा का तथ्य वाराणसी के एक अन्य ज्योतिष उमंग नाथ शर्मा ने बताया कि 31 अक्टूबर को ही दीपावली मनाई जाएगी. क्योंकि, रात्रि में अमावस्या का मिलना आवश्यक होता है और काशी से जितने भी पंचांग निकलते हैं उनकी गणित शास्त्रीय विधि से पूर्ण रहती है. सिंधु ग्रंथ में संदेहास्पद तिथि और पर्व को नक्षत्र और तिथि के अनुसार तय किया जाता है कि कब और किस दिन पर्व मनाए जाएंगे. निर्णय सिंधु के आधार पर पूर्ण रूप से दीपावली का पर्व 31 अक्टूबर को ही मनाई जाएगी. पूर्वांचल की तुलना में पश्चिम में सूर्योदय का समय भिन्न होता है जिसकी वजह से उदया तिथि के अनुसार चलने वाले कई जगहों पर 1 नवंबर को दीपावली मनाने की बात सामने आ रही है. जो शास्त्र संवत नहीं है. प्रो. रामनारायण द्विवेदी ने बताई दीपावली की तिथि वहीं, काशी विद्वत परिषद के महामंत्री और बी.एच.यू संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय के प्रो. रामनारायण द्विवेदी के अनुसार 31 अक्टूबर को पूर्णकालिक प्रदोष व्यापिनी अमावस्या मिलने के कारण और धर्मसिंधु ग्रंथ के अनुसार यदि ये खास अमावस्या जिस दिन प्राप्त होती है उसी दिन दीपोत्सव मनाने के विधान शास्त्रों में बताए गए हैं. प्रो. रामनारायण द्विवेदी श्री काशी विद्वत परिषद तिथि पर्व निर्णय के अनुसार भी, 31 अक्टूबर को ही दीपावली मनाई जाएगी. दरअसल, 1 नवंबर को अमावस्या पूर्णकालिक प्रदोष व्यापिनी से न मिलकर अंशकालिक ही मिल रही है जिस वजह से जो शास्त्र संवत नहीं है. इसलिए दीपावली का पर्व 31 अक्टूबर को मनाना ही शास्त्र संवत है. काशी के सभी पंचांगकारों ने 31 अक्टूबर को ही दीपोत्सव मनाने का विधान लिखा है. दीपावली का पर्व प्रदोष काल का ही पर्व होता है. इसलिए इसमें उदया तिथि के गृहीत का विधान नहीं है. यह है दिवाली का शुभ मुहूर्त  इस बार तारीख के साथ ही दिवाली के शुभ मुहूर्त को लेकर भी असमंजस है. ऐसे में दिवाली का पहला शुभ मुहूर्त प्रदोष काल में शाम 5 बजकर 36 मिनट से लेकर रात के 8 बजकर 11 मिनट तक रहेगा. वहीं वृषभ काल में शुभ मुहूर्त शाम के 6 बजकर 20 मिनट से लेकर रात 8 बजकर 15 मिनट तक रहेगा. इस समय में लक्ष्मी पूजन करना शुभ होगा.  recent visitors 72

बैंक अकाउंट या इंश्योरेंस, नॉमिनी नहीं है तो फंस सकता है पैसा, आज ही करें ये काम

नई दिल्ली  रोहित (बदला हुआ नाम) एक प्राइवेट कंपनी में सीनियर पोस्ट पर थे। उन्होंने 30 लाख रुपये का लाइफ इंश्योरेंस कराया था। साथ ही वे शेयर मार्केट में भी पैसे निवेश करते थे। एक दुर्घटना में उनका निधन हो गया। जब उनके पिता इंश्योरेंस की रकम लेने बीमा कंपनी पहुंचे तो उन्हें पैसा नहीं मिला। कारण था कि रोहित ने अपने इंश्योरेंस में नॉमिनी का नाम नहीं लिखवाया था। इसी प्रकार उन्हें शेयर का भी पैसा भी नहीं मिला, क्योंकि उसमें भी कोई नॉमिनी नहीं था। बाद में उन्हें एक वकील की मदद लेनी पड़ी। कोर्ट-कचहरी के काफी चक्कर लगाने के बाद उन्हें अपने बेटे की रकम मिली। इसमें पैसा और समय दोनों खर्च हुए। परेशानी हुई वह अलग। कौन होता है नॉमिनी? नॉमिनी वह शख्स होता है जो अकाउंट होल्डर की मृत्यु के बाद अकाउंट से उसके पैसे को निकाल सके। यह शख्स परिवार का सदस्य या दोस्त या जानकार, कोई भी हो सकता है। अकाउंट होल्डर जब चाहे, अपने अकाउंट से नॉमिनी का नाम बदल सकता है। काफी लोग नॉमिनी के तौर पर किसी संस्था का भी नाम लिखवा देते हैं। नॉमिनी वसीयतनामे से बिल्कुल अलग है। वसीयतनामे में वह शख्स अकाउंट होल्डर की संपत्ति का मालिक हो जाता है, जबकि नॉमिनी जरूरी नहीं कि मालिक हो। संपति का मालिक नहीं होता नॉमिनी नॉमिनी अकाउंट होल्डर की संपत्ति का मालिक नहीं, बल्कि केयरटेकर होता है। नॉमिनी अगर अकाउंट होल्डर की संपत्ति का कानूनी तौर पर अकेला वारिस है तो वह उस संपत्ति को अपने पास रख सकता है। वहीं अगर कानूनी वारिस नहीं है तो उसकी जिम्मेदारी है कि वह उस संपत्ति को मृतक के कानूनी वारिसों में बांट दे। अकाउंट होल्डर की मृत्यु के बाद बैंक या दूसरे वित्तीय संस्थान अकाउंट में जमा रकम नॉमिनी को दे देते हैं। इसके बाद नॉमिनी की जिम्मेदारी है कि वह उस रकम को मृतक के वारिसों तक पहुंचाए। अगर वह रकम उन्हें नहीं पहुंचाता है तो यह मामला नॉमिनी और मृतक के वारिसों के बीच का हो जाता है। यहां बैंक की कोई भूमिका नहीं रहती। कब जुड़वाएं नॉमिनी? बैंक अकाउंट, पॉलिसी, इंश्योरेंस, डीमैट अकाउंट, लॉकर, एफडी आदि में नॉमिनी का नाम जरूर लिखवाना चाहिए। वैसे तो नॉमिनी के तौर पर किसी भी शख्स का नाम लिखवा सकते हैं। लेकिन जानकार कहते हैं कि अकाउंट होल्डर के निधन के बाद परिवार के लोग कानूनी चक्कर में न पड़ें, इससे बेहतर है कि उसी शख्स का नाम लिखवाएं जो कानूनी वारिस हो। अगर अकाउंट खुलवा लिया है और नॉमिनी का नाम नहीं लिखवाया है तो अब भी नाम लिखवा सकते हैं। अकाउंट में एक से ज्यादा नॉमिनी का भी नाम लिखवा सकते हैं। नॉमिनी न होने पर पड़ सकते हैं ये चक्कर     बैंक या इंश्योरेंस कंपनी मृतक की रकम को उसके परिवार के किसी भी सदस्य को नहीं देगी। बैंक लीगल वारिस के लिए कोर्ट की तरफ से जारी पेपर मांग सकता है।     कई बार कोई दूर का रिश्तेदार या अनजान शख्स भी खुद काे मृतक का वारिस घोषित कर देता है। ऐसे में मामला और उलझ जाता है।     अगर परिवार के सदस्यों में आपसी कलह हो जाए तो मामला कोर्ट तक चला जाता है। इसका फैसला होने में 6 महीने या कई साल तक लग सकते हैं।     परिवार के लोग किसी कानूनी चक्कर में न फंसें, इसलिए आज ही अपने अकाउंट में कानूनी वारिस का नाम नॉमिनी के तौर पर लिखवाएं। recent visitors 111

दुनिया की सबसे लंबी खजाना खोज का अंत, मिला सोने का उल्लू

पेरिस  दुनिया की सबसे लंबी खजाना खोज का अंत हो गया। फ्रांस की एक घोषणा के बाद ऐसा लगता है कि 31 साल बाद दफन सोने के उल्लू की मूर्ति अंततः खोज ली गई है। तीन दशकों पहले फ्रांस में मायावी सुनहरे उल्लू की मूर्ति की खोज शुरू हुई थी। 1993 में यह शुरू हुई, जिसने दुनिया भर के हजारों प्रतिभागियों को मोहित कर लिया। प्रत्येक ने 11 मुश्किल पहेलियों की एक सीरीज को समझने की कोशिश की, जो उल्लू की दफन कांस्य की मूर्ति तक ले जा सकती थी। यह कोई प्राचीन खजाना नहीं है। बल्कि प्रतियोगिता के तहत रखा गया था। खजाने की खोज को 'गोल्डन आउल' के नाम से जाना जाता है। पहेली निर्माता मैक्स वैलेन्टिन के दिमाग की यह उपज थी। फ्रांस में कहीं उन्होंने इसे दफना दिया था। इससे जुड़े जटिल सुराग 1993 में प्रकाशित एक पुस्तक में थे। खजाना खोज की आधिकारिक चैटलाइन पर किताब के चित्रकार माइकल बेकर ने गुरुवार सुबह एक पोस्ट में कहा, 'हम पुष्टि करते हैं कि गोल्डन उल्लू की प्रतिकृति कल रात खोदी गई थी, और साथ ही ऑनलाइन प्रणाली पर इसका सॉल्यूशन भेज दिया गया है। इसलिए अब किसी भी स्थान के लिए यात्रा करना और वहां जाकर खुदाई करना व्यर्थ है।' जीतने वाले को मिलेगा सोने का उल्लू पहेली सुलझाने वाले को अंतिम पुरस्कार के रूप में एक असली सोने का उल्लू मिलना था। इसकी कीमत 1 करोड़ 38 लाख थी। उल्लू कहां पर दफन था इसकी कोई जानकारी नहीं दी गई है। न ही इसके खोजने वाले के बारे में बताया गया है। खजाना खोजने वालों के बीच यह चर्चा का विषय बन गया है। खजाना खोजियों ने सोशल मीडिया पर अपने रिएक्शन देने शुरू कर दिए। एक शख्स ने लिखा, 'अंततः मुक्ति मिली।' दूसरे ने मजाक में कहा, 'मुझे नहीं लगा था कि यह देखने के लिए मैं जिंदा रहूंगा।' कहां छिपा था जवाब इस खोज में हजारों लोगों ने हिस्सा लिया। इस पूरे खेल ने किताबों, मैग्जीन और इससे जुड़ी वेबसाइटों को जन्म दिया। 2009 में वैलेन्टिन की मौत हो गई। बाद में बेकर ने इस पूरी प्रतियोगिता की जिम्मेदारी ली। हालांकि कुछ खजाना खोजी इस बात को लेकर डरे हैं कि इसकी खोज मेटल डिटेक्टर से की गई होगी। नियमों के तहत खजाना खोजने वाले को यह दिखाना होगा कि पहेलियों को उसने सही ढंग से हल किया है। न कि वह उसे सिर्फ संयोग से मिल गया। मूल रूप से दबे हुए उल्लू के बारे में बेकर को भी नहीं पता था। इसका जवाब वैलेंटाइन के परिवार के पास एक सीलबंद लिफाफे में था। recent visitors 100

येरुशलम में 35 एकड़ जमीन के टुकड़ा जिसका ताल्लुक तीन-तीन धर्मों से है, जिसका कब्ज़ा पाने तीसरे विश्व युद्व के मुहाने पर ….

येरुशलम हिज्बुल्लाह चीफ हसन नसरल्लाह की मौत के बाद पूरी दुनिया की निगाहें अब इजरायल और फिलिस्तीन पर लगी हैं. क्या इजरायल अब लेबनान पर जमीनी हमला करेगा? क्या ईरान इजरायल पर पलट वार करेगा? और क्या इस बीच सारी दुनिया दो हिस्सों में बंट जाएगी? दरअसल, ये मसला ही कुछ ऐसा है कि इसे सुलझाना आसान नहीं है. क्योंकि इस मसले की जड़ में 35 एकड़ जमीन का एक टुकड़ा है. 35 एकड़ जमीन के लिए जंग ये पूरी दुनिया कुल 95 अरब 29 करोड़ 60 लाख एकड़ जमीन पर बसी है. जिस पर दुनिया भर के लगभग 8 अरब इंसान बसते हैं. इस 95 अरब 29 करोड़ 60 लाख एकड़ जमीन में से सिर्फ 35 एकड़ जमीन का एक ऐसा टुकड़ा है, जिसके लिए बरसों से जंग लड़ी जा रही है. जिस जंग में हजारों जानें जा चुकी हैं. लेकिन आज भी दुनिया की कुल 95 अरब 29 करोड़ 60 लाख एकड़ जमीन में से इस 35 एकड़ जमीन के मालिकाना हक को लेकर कोई फैसला नहीं हो पाया. हमास का हमला और उसके जवाब में इजरायल की जोरदार बमबारी. जी हां, आप माने या ना मानें लेकिन सिर्फ 35 एकड़ जमीन के एक टुकड़े की वजह से इजरायल और फिलिस्तीन के बीच बरसों से ये जंग जारी है.  संयुक्त राष्ट्र के अधीन है पूरी जगह इस जंग को समझने के लिए पहले 35 एकड़ इस जमीन की पूरी सच्चाई को समझना जरूरी है. येरुशलम में 35 एकड़ जमीन के टुकड़े पर एक ऐसी जगह है, जिसका ताल्लुक तीन-तीन धर्मों से है. इस जगह को यहूदी हर-हवाइयत या फिर टेंपल माउंट कहते हैं. जबकि मुस्लिम इसे हरम-अल-शरीफ बुलाते हैं. कभी इस जगह पर फिलिस्तीन का कब्जा हुआ करता था. बाद में इजरायल ने इसे अपने कब्जे में लिया. लेकिन इसके बावजूद आज की सच्चाई ये है कि 35 एकड़ जमीन पर बसे टेंपल माउंट या हरम अल शरीफ ना तो इजरायल के कब्जे में है और ना ही फिलिस्तीन के. बल्कि ये पूरी जगह संयुक्त राष्ट्र के अधीन है.  761 सालों तक था मुस्लिम पक्ष का कब्जा 35 एकड़ जमीन का ये वो टुकड़ा है, जिस पर सैकड़ों साल पहले ईसाइयों का कब्जा हुआ करता था. लेकिन 1187 में यहां मुसलमानों का कब्जा हुआ और तब से लेकर 1948 तक मुसलमानों का ही कब्जा था. लेकिन फिर 1948 में इजरायल का जन्म हुआ और उसके बाद से ही जमीन के इस टुकड़े को लेकर जब-तब झगड़ा शुरू हो गया. आईए जान लेते हैं कि आखिर 35 एकड़ जमीन के इस टुकड़े पर ऐसा क्या है, जिसके लिए सदियों से यहूदी, ईसाई और मुस्लिम लड़ते रहे हैं.  मुस्लिमों का दावा मुस्लिम मान्यताओं के मुताबिक मक्का और मदीना के बाद हरम-अल-शरीफ उनके लिए तीसरी सबसे पाक जगह है. मुस्लिम धर्म ग्रंथ कुरान के मुताबिक आखिरी पैगंबर मोहम्मद मक्का से उड़ते हुए घोड़े पर सवार होकर हरम अल शरीफ पहुंचे थे. और यहीं से वो जन्नत गए. इसी मान्यता के मुताबिक तब येरुशलम में मौजूद उसी हरम अल शरीफ पर एक मजसिद बनी थी. जिसका नाम अल अक्सा मस्जिद है. मान्यता है कि ये मस्जिद ठीक उसी जगह पर बनी है, जहां येरुशलम पहुंचने के बाद पैगंबर मोहम्मद ने अपने पांव रखे थे. अल अक्सा मस्जिद के करीब ही एक सुनहरे गुंबद वाली इमारत है. इसे डोम ऑफ द रॉक कहा जाता है. मुस्लिम मान्यता के मुताबिक ये वही जगह है, जहां से पैगंबर मोहम्मद जन्नत गए थे. जाहिर है इसी वजह से अल अक्सा मस्जिद और डोम ऑफ द रॉक मुसलमानों के लिए बेहद पवित्र जगह है. इसीलिए वो इस जगह पर अपना दावा ठोंकते हैं. यहूदियों का दावा यहूदियों की मान्यता है येरुशलम में 35 एकड़ की उसी जमीन पर उनका टेंपल माउंट है. यानी वो जगह जहां उनके ईश्वर ने मिट्टी रखी थी. जिससे आदम का जन्म हुआ था. यहूदियों की मान्यता है कि ये वही जगह है, जहां अब्राहम से खुदा ने कुर्बानी मांगी थी. अब्राहम के दो बेटे थे. एक इस्माइल और दूसरा इसहाक. अब्राहम ने खुदा की राय में इसहाक को कुर्बान करने का फैसला किया. लेकिन यहूदी मान्यताओं के मुताबिक तभी फरिश्ते ने इसहाक की जगह एक भेड़ को रख दिया था. जिस जगह पर ये घटना हुई, उसका नाम टेंपल माउंट है. यहूदियों के धार्मिक ग्रंथ हिबू बाइबल में इसका जिक्र है. बाद में इसहाक को एक बेटा हुआ. जिसका नाम जैकब था. जैकब का एक और नाम था इसरायल. इसहाक के बेटे इसरायल के बाद में 12 बेटे हुए. उनके नाम थे टुवेल्व ट्राइब्स ऑफ इजरायल. यहूदियों की मान्यता के मुताबिक, इन्हीं कबीलों की पीढ़ियों ने आगे चल कर यहूदी देश बनाया. शुरुआत में उसका नाम लैंड ऑफ इजरायल रखा. 1948 में इजरायल की दावेदारी का आधार यही लैंड ऑफ इजरायल बना.  होली ऑफ होलीज का एक हिस्सा है वेस्टर्न वॉल  लैंड ऑफ इजरायल पर यहूदियों ने एक टेंपल बनाया. जिसका नाम फर्स्ट टेंपल था. इसे इजरायल के राजा किंग सोलोमन ने बनाया था. बाद में ये टेंपल दुश्मन देशों ने नष्ट कर दिया. कुछ सौ साल बाद यहूदियों ने उसी जगह फिर एक टेंपल बनाया. इसका नाम सेकंड टेंपल था. इस सेकंड टेंपल के अंदरुनी हिस्से को होली ऑफ होलीज़ कहा गया. यहूदियों के मुताबिक ये वो पाक जगह थी, जहां सिर्फ खास पुजारियों की छोड़ कर खुद यहूदियों को भी जाने की इजाजत नहीं थी. यही वजह है कि इस सेकंड टेंपल की होली ऑफ होलीज वाली जगह खुद यहूदियों ने भी नहीं देखी.  लेकिन 1970 में रोमन ने इसे भी तोड़ दिया. लेकिन इस टेंपल की एक दीवार बची रह गई. ये दीवार आज भी सलामत है. इसी दीवार को यहूदी वेस्टर्न वॉल कहते हैं. यहूदी इस वेस्टर्न वॉल को होली ऑफ होलीज के एक आहाते का हिस्सा मानते हैं. मगर चूंकि होली ऑफ होलीज के अंदर जाने की इजाजत खुद यहूदियों को भी नहीं थी, इसीलिए वो पक्के तौर पर ये नहीं जानते कि वो अंदरुनी जगह असल में ठीक किस जगह पर है? लेकिन इसके बावजूद वेस्टर्न वॉल की वजह से यहूदियों के लिए ये जगह बेहद पवित्र है. ईसाइयों का दावा ईसाइयों की मान्यता है कि ईसा मसीह ने इसी 35 एकड़ की जमीन से उपदेश … Read more

साइबर फ्रॉड पर नकेल के लिए सरकार का बड़ा एक्शन,काटे गए 1.77 करोड़ मोबाइल कनेक्शन , 45 लाख स्पूफ कॉल किए गए ब्लॉक

नई दिल्ली  केंद्र ने  बताया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित उपकरणों का उपयोग करके अब तक 1.77 करोड़ मोबाइल कनेक्शन काट दिए गए हैं। इसके अंतर्गत वह मोबाइल कनेक्शन काटे गए हैं। इनमें नकली या जाली दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया था। इसके अलावा, चार दूरसंचार सेवा प्रदाताओं (टीएसपी) ने दूरसंचार विभाग (डीओटी) के सहयोग से एक उन्नत प्रणाली को सफलतापूर्वक लागू किया है। इसके तहत अब तक 45 लाख फर्जी अंतर्राष्ट्रीय कॉलों को भारतीय दूरसंचार नेटवर्क में आने से रोका गया है। संचार मंत्रालय ने कहा, अगले चरण में एक केंद्रीकृत प्रणाली शामिल होगी, जो सभी टीएसपी में शेष बची फर्जी कॉलों को समाप्त कर देगी, इसके शीघ्र ही चालू होने की उम्मीद है। वहीं दूरसंचार विभाग ने एक उन्नत प्रणाली शुरू की है। इसके तहत भारतीय दूरसंचार उपभोक्ताओं तक पहुंचने से पहले आने वाली अंतर्राष्ट्रीय फर्जी कॉलों की पहचान करने और उन्हें ब्लॉक करने के लिए तैयार की गई है। इस व्यवस्था को दो चरणों में लागू किया जा रहा है। पहला चरण टीएसपी स्तर पर लागू किया जा रहा है। इसके तहत अपने ग्राहकों के फोन नंबर से आने वाली फर्जी कॉल को रोका जा सकेगा। दूसरा चरण केंद्रीय स्तर पर लागू किया जा रहा है। इसके तहत दूसरे टीएसपी के ग्राहकों के फोन नंबर से आने वाली फर्जी कॉल को रोका जा सकेगा। 1.77 करोड़ मोबाइल कनेक्शनों पर कार्रवाई के तहत केंद्र ने देश के साइबर अपराध हॉटस्पॉट/जिलों में साइबर अपराधियों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले 33.48 लाख मोबाइल कनेक्शन काट दिए और 49,930 मोबाइल हैंडसेट ब्लॉक कर दिए। एक व्यक्ति के लिए निर्धारित सीमा से अधिक मोबाइल कनेक्शन वाले लगभग 77.61 लाख कनेक्शन काट दिए गए हैं और साइबर अपराध या धोखाधड़ी गतिविधियों में शामिल 2.29 लाख मोबाइल फोन ब्लॉक कर दिए गए हैं। चोरी/खोए हुए 21.03 लाख मोबाइल फोन में से लगभग 12.02 लाख का पता लगा लिया गया है। साथ ही डीओटी और टीएसपी ने एसएमएस भेजने में शामिल लगभग 20,000 संस्थाओं, 32,000 एसएमएस हेडर और 2 लाख एसएमएस टेम्पलेट को काट दिया है। मंत्रालय ने बताया, बैंकों और पेमेंट वॉलेट्स ने करीब 11 लाख खातों को फ्रीज कर दिया है, जो फर्जी/जाली दस्तावेजों के आधार पर लिए गए डिस्कनेक्ट मोबाइल कनेक्शन से जुड़े थे।व्हाट्सएप ने करीब 11 लाख व्हाट्सएप प्रोफाइल/खातों को बंद कर दिया है, जो फर्जी या जाली दस्तावेजों के आधार पर लिए गए डिस्कनेक्टेड मोबाइल कनेक्शन से जुड़े थे। दूरसंचार विभाग ने बताया कि अब तक 71,000 पॉइंट ऑफ सेल (सिम एजेंट) को ब्लैकलिस्ट किया जा चुका है और कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 365 एफआईआर दर्ज की गई हैं।   recent visitors 66