मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने फैसले को बताया ऐतिहासिक, गैर-बासमती चावल के निर्यात पर से प्रतिबंध हटाया, किसानों को मिलेगा लाभ

भोपाल केंद्र सरकार के गैर-बासमती चावल के निर्यात पर से प्रतिबंध हटाने का निर्णय देश के चावल उत्पादकों को भरपूर राहत देने वाला साबित होगा। मध्यप्रदेश के चावल उत्पादक किसानों को लाभ होगा। पिछले 10 सालों में 2015 से वर्ष 2024 तक 12,706 करोड़ रूपये का चावल निर्यात हुआ है। सबसे ज्यादा 3634 करोड़ का चावल निर्यात इसी साल हुआ है। उल्लेखनीय है कि वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय, भारत सरकार के अंतर्गत विदेश व्यापार महानिदेशालय की 28 सितंबर को जारी अधिसूचना के अनुसार गैर-बासमती सफेद चावल के निर्यात के लिए 490 डॉलर प्रति टन का न्यूनतम निर्यात मूल्य निर्धारित किया गया है। इसके अतिरिक्त, पारबॉइल्ड और ब्राउन चावल पर निर्यात शुल्क को 20% से घटाकर 10% कर दिया गया। इससे किसानों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में और ज्यादा लाभ मिल सकेगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस फैसले की सराहना करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में कृषि निर्यात में सुदृढ़ीकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक निर्णय है, जो देश और मध्यप्रदेश के किसानों को अंतर्राष्ट्रीय बाजार में अपनी पहचान स्थापित करने में मदद करेगा। केन्द्र सरकार के इस फैसले का लाभ मध्यप्रदेश के चावल उत्पादक क्षेत्रों के किसानों को होगा। राज्य के प्रमुख चावल उत्पादन क्षेत्रों में जबलपुर, मंडला, बालाघाट और सिवनी शामिल हैं। ये अपनी उच्च गुणवत्ता वाले जैविक और सुगंधित चावल के लिए प्रसिद्ध हैं। इनमें मंडला और डिंडोरी के जनजातीय क्षेत्रों का सुगंधित चावल और बालाघाट के चिन्नौर चावल को जीआई टैग प्राप्त है। इस पहचान के कारण यहां के चावल को अन्तर्राष्ट्रीय बाजार में लोकप्रियता मिली है। मध्यप्रदेश से चावल के प्रमुख निर्यात बाजारों में चीन, अमेरिका, यूएई और यूरोप के कई देश शामिल हैं। इस निर्णय से न केवल राज्य के चावल उत्पादकों की आय में वृद्धि होगी बल्कि जनजातीय क्षेत्रों के उत्पादों को भी वैश्विक पहचान मिलेगी। मध्यप्रदेश के चावल उद्योग ने पिछले कुछ वर्षों में अत्यधिक वृद्धि देखी है। इन सालों में 200 से अधिक नई चावल मिलों की स्थापना हुई है। इस फैसले से प्रदेश के किसानों और निर्यातकों को अच्छा लाभ मिलने की संभावना है। अब वे अपने चावल को न्यूनतम निर्यात मूल्य से अधिक दरों पर अन्तर्राष्ट्रीय बाजार में बेच सकेंगे।   recent visitors 70

अभी भी लोगो के पास है 2000 रुपये के 7,117 करोड़ रुपये के नोट, RBI ने दी जानकारी

नई दिल्ली भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बताया कि 2000 रुपये के 98% नोट वापस आ चुके हैं, जबकि अभी भी 7,117 करोड़ रुपये के नोट लोगों के पास बचे हुए हैं। अक्टूबर 2024 में जारी आंकड़ों के अनुसार, नोटों की वापसी की रफ्तार धीमी हो गई है। प्रमुख बातें: कब और क्यों बंद हुए: 19 मई 2023 को क्लीन नोट पॉलिसी के तहत 2000 रुपये के नोट वापस लेने का निर्णय लिया गया था। वापसी की समयसीमा: 23 मई से 30 सितंबर 2023 तक नोट जमा करने की समयसीमा थी, लेकिन इसे कई बार बढ़ाया गया। अभी भी जमा कर सकते हैं नोट: 2000 रुपये के नोट अब सिर्फ आरबीआई की 19 क्षेत्रीय शाखाओं और डाकघरों में जमा कराए जा सकते हैं। नोट वापसी के आंकड़े: मई 2023 में बाजार में: 3.56 लाख करोड़ रुपये के नोट थे। सितंबर 2024 तक: 7,000 करोड़ रुपये के नोट वापस नहीं हुए हैं। आरबीआई ने 2018-19 से 2000 रुपये के नोटों की छपाई बंद कर दी थी क्योंकि बाजार में अन्य मूल्यवर्ग के नोट पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हो चुके थे। recent visitors 80

तिरुपति मंदिर में 4 अक्टूबर से 9 दिवसीय ‘ब्रह्मोत्सव’ उत्सव, हर दिन 1 लाख भक्तों के आने की उम्मीद

तिरुपति आंध्र प्रदेश के तिरुपति मंदिर में प्रसाद को लेकर हुए विवाद के बाद अब तिरुपति का श्री वेंकटेश्वर मंदिर 'ब्रह्मोत्सव' के लिए तैयारी कर रहा है. यह 9 दिवसीय उत्सव 4 से 12 अक्टूबर तक आयोजित किया जाएगा, जिसमें हर दिन लगभग 1 लाख भक्तों के आने की उम्मीद है. बता दें कि लड्डू विवाद के बाद मंगलवार को मंदिर में सफाई अनुष्ठान 'कोईल अल्वार तिरुमंजनम' का आयोजन किया गया था.  इस दौरान पूरे मंदिर, मूर्तियों और पूजा के बर्तनों को साफ किया गया. हर दिन बनेंगे 8 लाख लड्डू ब्रह्मोत्सव के दौरान मंदिर प्रशासन बड़ी संख्या में तीर्थयात्रियों की उम्मीद कर रहा है. पवित्र रसोई, जिसे ‘पोटु’ कहा जाता है, जहां प्रतिदिन लगभग 3.5 लाख लड्डू तैयार किए जाते हैं वहां  ब्रह्मोत्सव के दौरान प्रतिदिन कम से कम 8 लाख लड्डू बनाने के लिए तैयार हो रही है. जानकारी के अनुसार, हर दिन एक लाख तीर्थयात्रियों के आने की उम्मीद है. प्रशासन व्यवस्था भी सख्त मंदिर में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी खास इंतजाम किए जा रहे हैं. 4 से 12 अक्टूबर तक सभी वीआईपी दर्शन की व्यवस्था को खत्म कर दिया गया है. मंदिर प्रशासन से जुड़े लोगों को भीड़ नियंत्रित करने की खास ट्रेनिंग दी जा रही है. लोगों को सावधानी बरतने के लिए कहा जा रहा है. कौन तैयार करता है लड्डू तिरुपति मंदिर देश के सबसे बड़े मंदिरों में से एक है. यहां हर साल करीब तीन करोड़ श्रद्धालु दर्शन करने के लिए आते हैं यानी रोजाना करीब 82 हजार श्रद्धालु भगवान वेंकटेश्वर स्वामी के दर्शन करते हैं. करीब 3.50 लाख लड्डू तैयार किए जाते हैं. सभी श्रद्धालुओं को प्रसाद के रूप में लड्डू दिए जाते हैं. इस पूरी व्यवस्था का संचालन उस कमेटी के द्वारा किया जाता है, जिसका गठन हर दो साल में आंध्र प्रदेश की राज्य सरकार करती है. इस कमेटी का नाम है- तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम्. बता दें कि हाल ही में आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने दावा किया कि पिछली सरकार में तिरुपति मंदिर में मिलने वाले प्रसाद में घी की जगह जानवरों की चर्बी और मछली के तेल का इस्तेमाल किया जा रहा था. इसी साल जून में जगन मोहन रेड्डी की पार्टी आंध्र प्रदेश में विधानसभा चुनाव हारी और नायडू ने एनडीए की सरकार बनाई. इस दावे के बाद देशभर की सियासत गर्मा गई थी. मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया था.   recent visitors 145

लव जिहाद से भारत देश को अस्थिर करने की साजिश और देश की एकता, अखंडता और संप्रभुता के लिए खतरा बताया : कोर्ट

बरेली आनंद बनकर लव जिहाद करने वाले मोहम्मद आलिम को आजीवन कारावास सुनाने के दौरान बरेली की फास्ट ट्रैक कोर्ट ने बड़ी टिप्पणी की। फास्ट ट्रैक प्रथम रवि कुमार दिवाकर की कोर्ट ने माना कि लव जिहाद के पीछे विदेशी फंडिंग है। उन्होंने इसे पाकिस्तान, बांग्लादेश की तरह भारत देश को अस्थिर करने की साजिश और देश की एकता, अखंडता और संप्रभुता के लिए खतरा बताया है। कोर्ट ने अपने फैसले में लव जिहाद को भी परिभाषित किया है। फास्ट ट्रैक प्रथम रवि कुमार दिवाकर ने अपने फैसले में लिखा है कि लव जिहाद का मुख्य उद्देश्य हिन्दुस्तान के खिलाफ एक धर्म विशेष के कुछ अराजक तत्त्वों द्वारा जनसांख्यिकीय युद्ध और अंतरराष्ट्रीय साजिश के तहत वर्चस्व स्थापित करना है। आसान शब्दों में कहें तो लव जिहाद समुदाय विशेष के पुरुषों द्वारा गैर समुदायों से जुड़ी महिलाओं को उनके धर्म में परिवर्तित करने के लिए प्रेम का ढोंग करके शादी करना है। लव जिहाद के माध्यम से अवैध धर्मांतरण, उस धर्म विशेष के कुछ अराजक तत्व करते हैं, करवाते हैं, उसमें सहयोग करते हैं या फिर इस षड्यंत्र में शामिल होते हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया है कि यह कृत्य कुछ ही अराजक तत्व कराते हैं लेकिन पूरा धर्म विशेष बदनाम होता है। फैसले में उन्होंने इसके पीछे विदेशी फंडिंग की भी आशंका जताई है क्योंकि इस कृत्य के लिए बड़ी मात्रा में रकम की जरूरत होती है। फैसले में लव जिहाद को किया परिभाषित कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि यह प्रकरण लव जिहाद के जरिये अवैध धर्मांतरण का है। ऐसे में सबसे पहले यह जानना भी जरूरी है कि लव जिहाद क्या है? लव जिहाद में समुदाय विशेष के पुरुष शादी के माध्यम से अपने धर्म में परिवर्तन कराने के लिए व्यवस्थित रूप से दूसरे समुदाय की महिलाओं को निशाना बनाते हैं। समुदाय विशेष के ये लोग इन महिलाओं का धर्मांतरण कराने के लिए प्यार का दिखावा करके धोखे से शादी कर लेते हैं। इस केस में भी अभियुक्त मोहम्मद आलिम ने अपना नाम आनंद बताकर पीड़िता को धोखे में रखकर हिंदू रीति रिवाज से शादी कर उसके साथ बलात्कार किया। फिर उसकी फोटो व वीडियो बनाकर बदनाम करने की धमकी देकर कई बार बलात्कार किया। विदेशी फंडिंग से हो रहा लव जिहाद, देश के लिए खतरा कोर्ट ने फैसले में कहा है कि लव जिहाद के माध्यम से अवैध धर्मांतरण होता है। अवैध धर्मांतरण रोकने को उप्र सरकार द्वारा उप्र विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम 2021 पारित किया गया। कोर्ट ने अपने फैसले में लिखा है कि लव जिहाद के माध्यम से अवैध धर्मांतरण किसी अन्य बड़े उद्देश्य की पूर्ति को कराया जाता है। यदि समय रहते भारत सरकार के द्वारा लव जिहाद के माध्यम से अवैध धर्मांतरण पर रोक नहीं लगाई गई तो भविष्य में इसके गंभीर परिणाम देश को भुगतने पड़ सकते हैं। कोर्ट ने माना धर्मांतरण के लिए किया लव जिहाद फास्ट ट्रैक कोर्ट प्रथम के जज रवि कुमार दिवाकर ने इसे लव जिहाद का केस मानकर सात मार्च 2024 को आरोप तय कर सुनवाई शुरू की थी। आरोप साबित करने को एडीजीसी क्राइम दिगम्बर पटेल ने पीड़िता छात्रा समेत छह गवाह पेश किए थे। कोर्ट ने दोनों पक्ष की दलीलों को सुनकर धर्मांतरण के उद्देश्य से लव जिहाद करने के दोषी आलिम को आजीवन कैद की सजा सुनाई। धर्मस्थल में की गई शादी अवैध करार कोर्ट ने आलिम द्वारा पीड़िता से फतेहगंज पश्चिमी के धर्मस्थल में की गई शादी को भी अवैध करार दिया। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि हिन्दू विवाह अधिनियम में दोनों का हिन्दू होना जरूरी है जबकि आलिम ने धर्म परिवर्तन नहीं किया है। सिर्फ लव जिहाद और धर्मांतरण के इरादे से उसने युवती को फंसाने के लिए मांग में सिंदूर भर दिया, जिसे शादी नहीं माना जा सकता। प्रमुख सचिव व डीजीपी को भेजी आदेश की कॉपी कंप्यूटर छात्रा से लव जिहाद के मामले में देवरनिया पुलिस ने उप्र विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम में कार्यवाही नहीं की। फास्ट ट्रैक प्रथम के जज रवि कुमार दिवाकर की कोर्ट ने इस केस में फैसले की प्रति मुख्य सचिव, डीजीपी पुलिस और एसएसपी बरेली को भेजकर लव जिहाद के मामलों में इस अधिनियम के तहत कार्यवाही के निर्देश दिए हैं। ताकि भविष्य में विधि अनुसार कार्रवाई हो। recent visitors 109

भारतीय विदेश मंत्रालय ने भारतीय नागरिकों के लिए ईरान की यात्रा करने के संबंध में एडवाइजरी जारी की

नई दिल्ली लेबनान में 27 सितंबर को इजरायली हमले में हिजबुल्लाह के चीफ हसन नसरल्लाह की मौत के बाद इलाके में तनाव लगातार बढ़ रहा है।  रात ईरान ने इजरायल पर मिसाइलों से भारी हमले किए। मध्य पूर्व में इस तनाव को देखते हुए भारतीय विदेश मंत्रालय ने भारतीय नागरिकों के लिए ईरान की यात्रा करने के संबंध में एडवाइजरी जारी की है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणदीप जायसवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर इसकी जानकारी दी। इस एडवाइजरी में विदेश मंत्रालय की ओर से भारतीय नागरिकों को ईरान की सभी गैर-जरूरी यात्राओं से बचने की सलाह दी गई है। उन्होंने लिखा, “हम क्षेत्र में सुरक्षा स्थिति में हाल ही में हुई वृद्धि पर बारीक नजर रख रहे हैं। भारतीय नागरिकों को ईरान की सभी गैर-जरूरी यात्राओं से बचने की सलाह दी जाती है। वर्तमान में ईरान में रहने वाले लोगों से अनुरोध है कि वे सतर्क रहें और तेहरान में भारतीय दूतावास के संपर्क में रहें।” बता दें कि रिवोल्यूशनरी गार्ड ने रात इजरायल पर बैलिस्टिक मिसाइलों की बौछार की। हमले में मुख्य रूप से “सैन्य और सुरक्षा प्रतिष्ठानों” को निशाना बनाया गया। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) के एक बयान का हवाला देते हुए मीडिया रिपोर्टों ने पुष्टि की है कि ईरान से इजरायल की ओर बड़ी संख्या में मिसाइलें दागी गई हैं। आईआरजीसी ने धमकी दी है कि अगर इजरायल जवाब देता है, तो वह दूसरा हमला करेगा। तस्नीम समाचार एजेंसी ने बताया कि आईआरजीसी ने मिसाइल हमले को “इजरायली सेना द्वारा हमास के शीर्ष नेता इस्माइल हनीयेह और आईआरजीसी कमांडर मेजर जनरल सैय्यद अब्बास निलफोरुशन की हत्या का बदला” बताया। इसने कहा कि इसकी वायु सेना ने महत्वपूर्ण ठिकानों को निशाना बनाया। इजरायली मीडिया ने बताया कि ईरान ने मंगलवार रात इजरायल पर करीब 180 बैलिस्टिक मिसाइलें दागी। इजराइल रक्षा बलों (आईडीएफ) के अनुसार, इजरायली वायु रक्षा प्रणाली ने ईरान द्वारा दागी गई 180 बैलिस्टिक मिसाइलों में से एक “बड़ी संख्या” को लक्ष्य से पहले ही रोक दिया। द टाइम्स ऑफ इजरायल ने आईडीएफ के हवाले से बताया कि अमेरिका ने इजरायल का साथ देने का ऐलान किया है। भारतीयों को ईरान की गैर जरूरी यात्रा से बचने और दूतावास के संपर्क में रहने की सलाह सरकार ने सुरक्षा के गंभीर हालात के मद्देनजर भारतीय नागरिकों को ईरान की गैर जरूरी यात्रा से बचने और वहां रह रहे भारतीयों को तेहरान में भारतीय दूतावास के संपर्क में रहने की सलाह दी है।विदेश मंत्रालय की ओर से बुधवार को यहां ईरान को लेकर जारी यात्रा परामर्श में कहा गया, “हम क्षेत्र में सुरक्षा स्थिति में हालिया वृद्धि पर करीब से नजर रख रहे हैं। भारतीय नागरिकों को सलाह दी जाती है कि वे ईरान की सभी गैर-जरूरी यात्रा से बचें।” परामर्श में कहा गया, “वर्तमान में ईरान में रहने वालों से अनुरोध है कि वे सतर्क रहें और तेहरान में भारतीय दूतावास के संपर्क में रहें।”   recent visitors 63

इतिहास में इजरायल और ईरान ने एक साझा दुश्मन से लड़ने के लिए अमेरिका की मदद से हाथ मिलाया था

नई दिल्ली मिडिल ईस्ट में तनाव चरम पर पहुंच गया है। ईरान ने मंगलवार को इजरायल पर 200 से ज्यादा मिसाइलें दागीं है जिनमें हाइपरसोनिक हथियार भी शामिल हैं। अब इजरायल ने भी कसम खाई है कि ईरान इस हमले की कीमत चुकाएगा। हालांकि दोनों देशों के बीच रिश्ते हमेशा से खराब नहीं थे। यह सुनने में भले ही अकल्पनीय लगे लेकिन इजरायल और ईरान ने एक साझा दुश्मन से लड़ने के लिए अमेरिका की मदद से हाथ मिलाया था। 1960 के दशक में इजरायल और ईरान दोनों का एक साझा दुश्मन था इराक। जहां इजरायल अरब देशों के खिलाफ संघर्ष में उलझा हुआ था वहीं शाह के नेतृत्व में ईरान के लिए सुरक्षा और क्षेत्रीय महत्वाकांक्षाओं को देखते हुए इराक एक सीधा खतरा था। इसके बाद इस समय की सबसे गुप्त साझेदारी के लिए एक आधार तैयार हुआ। इस साझेदारी में इज़राइल की खुफिया एजेंसी मोसाद और ईरान की सीक्रेट पुलिस SAVAK शामिल थे। दोनों ने इराकी शासन के खिलाफ कुर्द विद्रोहियों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। इराक के अरब नेतृत्व की कमजोरी के रूप में देखे जाने वाले ये कुर्द समूह इराकी सरकार को अंदर से कमजोर करने के लिए जरूरी थे। खुफिया गठबंधन कोड-नाम ट्राइडेंट के गठन के बाद इज़राइल और ईरान के बीच के रिश्ते नई ऊंचाइयों पर पहुंच गए थे जिसमें तुर्की भी शामिल था। 1958 की शुरुआत में ट्राइडेंट की मदद से इन तीन समूहों ने कई खुफिया जानकारियों का आदान-प्रदान किया। जैसे-जैसे संबंध परिपक्व होते गए इज़राइल और ईरान और भी करीब होते गए। शाह की महत्वाकांक्षाएं और इज़राइल का प्रभाव ईरान के शाह मोहम्मद रजा पहलवी न केवल साझा भू-राजनीतिक हितों से प्रेरित थे बल्कि अमेरिका में इज़राइल के प्रभाव से भी प्रेरित थे। शाह ने इजराइल को अमेरिका के साथ संबंधों को सुधारने के लिए एक साधन के रूप में देखा। खासकर कैनेडी प्रशासन द्वारा उनके शासन के बारे में चिंता व्यक्त करने के बाद यह और जरूरी हो गया था। इजराइली-ईरानी संबंध ईरान की पश्चिम के साथ खुद को जोड़ने की रणनीति का हिस्सा बन गए। नतीजतन 1960 के दशक के मध्य तक तेहरान में एक स्थायी इजराइली प्रतिनिधिमंडल की स्थापना हुई जो एक दूतावास के रूप में कार्य करने लगी। हालांकि इस संबंध में भी कुछ जटिलताएं थी। शाह अरब दुनिया में व्यापक इजराइल-विरोधी भावना से अवगत थे। उन्होंने ईरान के इजराइल के साथ संबंधों के सार्वजनिक तौर पर इनकार किया। इराक के खिलाफ मिलकर काम करने में दोनों देशों का फायदा ईरान में 1979 की इस्लामी क्रांति ने देश के राजनीतिक परिदृश्य को काफी हद तक बदल दिया और इसे एक इजराइल विरोधी इस्लामी गणराज्य में बदल दिया। फिर भी अयातुल्ला खोईमेनी के सत्ता में आने के बाद भी नए शासन ने इजराइल के साथ गुप्त सहयोग जारी रखा। जैसे-जैसे ईरान-इराक युद्ध (1980-1988) आगे बढ़ा दोनों देशों ने सद्दाम हुसैन के इराक के खिलाफ़ मिलकर काम करने में ही फायदा देखा। इज़राइल ने भी ईरान की मदद करने में एक अच्छा अवसर देखा। अमेरिका और सोवियत संघ दोनों ने इराकी सेना की आपूर्ति की थी और यह एक जोखिम था। इज़राइल द्वारा ईरान को हथियारों की खेप भेजना, खास कर से प्रधानमंत्री मेनाचेम बेगिन द्वारा 1980 में सैन्य उपकरणों की बिक्री को मंज़ूरी दिए जाने के बाद इराक की ताकत को कमज़ोर करने का एक सोचा-समझा फ़ैसला था। ये गुप्त हथियार सौदे अमेरिकी नीति के बावजूद किए गए जिसमें तेहरान में बंधक बनाए गए अमेरिकी लोगों की रिहाई तक ईरान को सैन्य सहायता देने पर रोक लगाई गई थी। इज़राइली सैन्य सहायता के बदले में, खोईमेनी के शासन ने बड़ी संख्या में ईरानी यहूदियों को इज़राइल या अमेरिका में रहने की अनुमति दी। ऑपरेशन फ्लावर इजरायल-ईरानी साझेदारी पारंपरिक हथियार सौदों से आगे तक पहुंच गई थी। सबसे महत्वाकांक्षी योजनाओं में से एक ऑपरेशन फ्लावर था जो एक गुप्त करोड़ों डॉलर की योजना थी जो 1977 में शाह के शासन के दौरान शुरू हुई थी। इस सौदे के तहत ईरान ने 1978 में इजरायल को 260 मिलियन डॉलर का तेल भेजकर एक बड़ा अग्रिम भुगतान किया जैसा कि 1986 की न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट में दावा किया गया था। मिसाइल कार्यक्रम पर काम 1979 में इस्लामिक क्रांति तक जारी रहा जिसके बाद खोमेनेई के शासन ने अचानक सहयोग रोक दिया। अक्टूबर 1980 में जब ईरान ने इराक के खिलाफ युद्ध छेड़ा था तब इजरायल ने गुप्त रूप से ईरान को अमेरिकी निर्मित एफ-4 लड़ाकू विमानों के लिए 250 अतिरिक्त टायर भी दिए थे। दुश्मनी की शुरुआत 1990 के दशक तक इज़राइल और ईरान के बीच सहयोग का युग लगभग समाप्त हो गया था। भू-राजनीतिक कारण जैसे अरब समाजवाद, सोवियत प्रभाव और इराक का खतरा, जो कभी उन्हें एकजुट करते थे गायब हो गए थे जिससे सहयोग के लिए वजहें नहीं बची थी। इसके बाद ईरान ने इजरायल विरोधी विचारधारा को अपनाया। ईरान ने इजरायल के साथ संघर्ष में हिजबुल्लाह और हमास जैसे समूहों का समर्थन किया है। 2000 के दशक की शुरुआत में ईरानी राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद का चुनाव, नरसंहार से इनकार और इजरायल के खिलाफ आक्रामक बयानबाजी ने तनाव को और बढ़ा दिया। इसके बाद ईरान इस क्षेत्र में इजरायल का सबसे प्रमुख विरोधी बन गया। अब मिडिल ईस्ट के ये दो देश पूरी तरह युद्ध की कगार पर हैं। recent visitors 85

मोहन सरकार प्रदेश में फ्लोर एरिया रेशियो को 2.5 से बढ़ाकर 5 या 7 कर सकती है, जाने इससे क्या होगा लाभ

भोपाल  मध्य प्रदेश से बड़ी खबर है. अब प्रदेश की कमर्शियल बिल्डिंग और ऊची होंगी. सरकार कर्मशियल बिल्डिंग में फ्लोर एरिया रेशियो (एफएआर) को दोगुना कर सकती है. भोपाल में एफएआर फिलहाल 2.5 है, लेकिन अब इसे 5 या 7 करने की योजना है. खास बात यह है कि, इस तरह की बिल्डिंगों में केंद्र सरकार के नेशनल बिल्डिंग कोड का पालन करना जरूरी होगा. इस कोड के पालन से भवन और ज्यादा मजबूत और सुरक्षित होंगे. इसके मद्देनजर टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (टी एंड सीपी) ने संशोधन प्रस्ताव तैयार किया है. यह प्रस्ताव टी एंड सीपी के भूमि विकास नियम-2012 के लिए तैयार किया गया है. गौरतलब है कि केंद्र सरकार नियमों के बदलाव होने के बाद उन्हीं के आधार पर अनुदान तय करेगी. इस तरह की बिल्डिंग बनने के बाद हर दुकान-मकान में आग के सुरक्षा के व्यापक इंतजाम करने होंगे. इस तरह की ऊंची कॉलोनी बनाने वालों को इलेक्ट्रिक गाड़ियों की चार्जिंग के लिए स्टेशन बनाना होगा. भवन निर्माताओं को ग्राउंड कवरेज की लिमिट से छूट मिल सकती है. उन्हें एक न्यूनतम क्षेत्र की खुला रखना पड़ेगा. अभी तक बनी हाईराइज बिल्डिंगों में 50 फीसदी ग्राउंड कवरेज रखना पड़ता है. रिहाशयी इलाके में 30 फीसदी ग्राउंड कवरेज रखने का नियम है. जबकि, कमर्शियल में अभी तक 40 फीसदी ग्राउंड कवरेज रखा जाता है. केंद्र सरकार तय करेगी अनुदान बताया जाता है कि केंद्र सरकार ने राज्य सरकारों से कहा है कि वे शहरी क्षेत्रों में सुधार करें. भोपाल से प्रकाशित हिंदी अखबार दैनिक भास्कर के मुताबिक, केंद्र सरकार ने यह इसलिए करने का कहा है, ताकि शहरी विकास योजनाओं और अमृत योजना के लिए अनुदान मिल सके. ये बदलाव होने के बाद जो सुधार होंगे, उन्हीं के आधार पर केंद्र सरकार अनुदान का फंड तय करेगी. इसे लेकर अधिकारियों का कहना है कि टी एंड सीपी ने नगरीय विकास एवं आवास को भूमि विकास नियम में संशोधन के लिए प्रस्ताव दिए थे. विभाग ने उन्हें और बेहतर तरीके से तैयार करने को कहा है. इसके बाद केंद्र सरकार जो मंशा होगी उस पर विचार किया जाएगा. उसके बाद इसे लागू किया जाएगा. recent visitors 74