वृद्धजनों के अनुभव का लाभ उठाकर, हम अपने जीवन को सहज और सरल बना सकते है- श्रीमती वायंगणकर

अंतर्राष्ट्रीय वृद्धजन दिवस पर "गरिमा के साथ वृद्धावस्था" कार्यक्रम सम्पन्न वृद्धजन के अनुभव का लाभ उठाये : प्रमुख सचिव श्रीमती वायंगणकर वृद्धजनों के अनुभव का लाभ उठाकर, हम अपने जीवन को सहज और सरल बना सकते है- श्रीमती वायंगणकर भोपाल वृद्धजनों के अनुभव का लाभ उठाकर, हम अपने जीवन को सहज और सरल बना सकते है। यह बात प्रमुख सचिव सामाजिक न्याय एवं नि:शक्तजन कल्याण श्रीमती सोनाली वायंगणकर ने अन्तर्राष्ट्रीय वृद्धजन दिवस के अवसर पर "गरिमा के साथ वृद्धावस्था" राज्य स्तरीय कार्यक्रम में कही। कार्यक्रम का आयोजन सामाजिक न्याय विभाग, हेल्पेज इंडिया, सीनियर सिटीजन फोरम और शासकीय होम्योपेथिक चिकित्सा महाविद्यालय द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया गया। प्रमुख सचिव श्रीमती वायंगणकर ने कहा कि प्रति वर्ष की भांति इस वर्ष भी अंतर्राष्ट्रीय वृद्धजन दिवस का आयोजन भोपाल सहित सभी जिला मुख्यालय पर किया गया है। राज्यस्तरीय कार्यक्रम में शतायु बुजुर्गों को सम्मानित किया गया, जिसमें भोपाल की रहने वाली 113 वर्षीय श्रीमती राम कुंवर बाई, 103 वर्षीय श्रीमती तुलाबाई, 108 वर्षीय हरीलाल, 120 वर्षीय श्रीमती गयाबाई तथा 101 वर्ष की श्रीमती बड़बाई को एक-एक हजार रूपये की राशि तथा शॉल-श्रीफल सम्मान स्वरूप दिया गया। कार्यक्रम स्थल पर नि:शुल्क चिकित्सा शिविरों का आयोजन भी किया गया है। आयुक्त सामाजिक न्याय डॉ. आर.आर. भोंसले ने बताया कि भारत सरकार के निर्देशानुसार प्रदेश के 5 जिलों ग्वालियर, टीकमगढ़, उज्जैन, छिंदवाड़ा तथा जबलपुर में वृद्धजनों के विशेष शिविर आायोजित किए गये है इनमें एलमिको संस्था के माध्यम से जरूरतमंद वृद्धजनों को सहायक उपकरण वितरित किए गये है। यह ग्वालियर जिले में 155, टीकमगढ़ में 147, उज्जैन में 10, जबलपुर में 28 तथा छिंदवाड़ा में 10 हितग्राहियों को सहायक उपकरण वितरित किये गये है। कार्यक्रम में शासकीय होम्योपैथिक कॉलेज के प्राचार्य एवं स्टाफ, आयुष्मान निरामयन हेल्पेज इंडिया और सीनियर सिटीजन फोरम के प्रतिनिधि तथा बड़ी संख्या में वृद्धजन सम्मिलित हुए। कार्यक्रम के प्रारंभ में सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन भी किया गया।   recent visitors 59

कांग्रेस विधायकों ने सीएम मोहन से की मुलाकात, विजन डॉक्यूमेंट, फसल के दाम समेत अन्य मुद्दों को लेकर सौंपा ज्ञापन

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने आज मुख्यमंत्री निवास में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार और कांग्रेस विधायकों से मुलाकात की। मुख्यमंत्री डॉ यादव ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस विधायक की समस्याओं को सुना और मुझे उम्मीद है कि सकारात्मक विपक्ष प्रदेश के लिए भी बेहतर काम करेगा। सीएम मोहन ने बताया कि सरकार द्वारा किए जा रहे कार्यों के बारे में भी विधायकों से परस्पर चर्चा की है। मुख्यमंत्री ने कहा खासकर के पहले हमने अपनी फसलों के सर्वे का फैसला किया। जिसके लिए जिला कलेक्टरों को निर्देशित किया कि अगर फसल खराब हुई है तो उसका निराकरण करें। गौशालाओं के लिए उनकी व्यवस्था अच्छी बनी रहे, उसका अनुदान बढ़ाने के लिए नगरीय क्षेत्र में इंदौर, उज्जैन,  भोपाल, ग्वालियर बड़ी-बड़ी  नगर निगमों में गौशाला बनाने और गौ धन को बढ़ावा देने के साथ ही दूध पर बोनस और दूध उत्पादन में भी मध्यप्रदेश देश का नम्बर राज्य बने। राज्य परिसीमन आयोग भी बनाया है। जिला संभाग, तहसीलों को अपनी सीमाएं बदलने के लिए सभी प्रकार के सुझाव भी लेंगे। विकास के मामलों में भी सरकार द्वारा किए गए कार्यो से उन्हें अवगत कराया गया है। अपनी विधानसभा क्षेत्र का विजन डॉक्यूमेंट बनाएं विधायक- मोहन यादव मुख्यमंत्री डॉ यादव ने कहा कि सभी विधायक वो चाहे कांग्रेस के हो, या बीजेपी के सभी अपनी-अपनी विधानसभाओं में विजन डॉक्यूमेंट बनाएं। पांच सालों मे विकास के मामले में वो अपनी विधानसभा को कहां ले जाना चाहते हैं और उसमें हम समान रूप से सारे विधायकों की मदद करेंगे। यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में हम मध्य प्रदेश की आर्थिक व्यवस्था भी डबल करने वाले हैं। प्रदेश को नंबर वन राज्य बनाने का प्रयास- मोहन यादव सीएम ने कहा विकास के मामलों में मध्यप्रदेश देश का नंबर वन राज्य बने इस प्रयास में हम लगे है। मैं उम्मीद करता हूं कि सारे जनप्रतिनिधि अपनी अपनी क्षेत्रों की चिंता करके आ रहे हैं। हम सबने भी कोशिश की है कि मध्यप्रदेश को एक नए रूप में लाना है। जहां से हम चले थे, उससे और भी डबल स्थिति पाना है। मैं उम्मीद करता हूँ कि आने वाले समय में विकास की गति को इसी तरह जारी रखेंगे। recent visitors 74

कोच्चि के एक गांव की जमीन पर Waqf Board ने किया दावा, सैकड़ो परिवार बेघर होने की कगार पर

कोच्चि केरल की व्यावसायिक राजधानी कोच्चि की हलचल से दूर मुनंबम उपनगर में मछुआरों का एक खूबसूरत गांव है- चेराई. समुद्र तट के करीब स्थित चेराई अपने बीच रिसॉर्ट्स के साथ आज पर्यटकों के लिए एक प्रमुख आकर्षण है. लेकिन इस गांव के लोग पलायन के डर में जी रहे हैं. गांव के लगभग 610 परिवारों ने आरोप लगाया है कि उनकी जमीन और संपत्तियों पर वक्फ बोर्ड ने दावा किया है. कानूनी विवाद में फंसने के कारण गांव वाले 2022 से ही न तो अपनी जमीन पर लोन ले सकते हैं, और न ही इसे बेच सकते हैं. सिरो-मालाबार चर्च और केरल कैथोलिक बिशप काउंसिल जैसे प्रमुख ईसाई संगठनों ने वक्फ (संशोधन) विधेयक के संबंध में गठित संयुक्त संसदीय समिति (JPC) को एक पत्र भेजकर वक्फ अधिनियम 1995 में संशोधन के लिए अपने सुझाव दिए हैं.  इस खूबसूरत गांव में पहुंची और पीड़ित परिवारों से मुलाकात की. समुद्र तट के सामने एक छोटे से घर में बूढ़ी मां गौरी और उनकी विकलांग बेटी सिंटा से मुलाकात हुई. सिंटा ने बताया कि कुछ साल पहले उन्हें स्ट्रोक हुआ था, जिससे उनका जीवन कठिन हो गया. उन्होंने कहा, 'मैं अब भी यहां लॉटरी टिकट बेचकर जीवन यापन करती हूं. हम यह घर नहीं छोड़ सकते. यह हमारा है. 2022 तक सब कुछ सामान्य था, अचानक हमें बताया गया कि जिस जमीन पर हम वर्षों से रह रहे, अब वह हमारी नहीं रही.' ग्रामीणों ने की वक्फ बोर्ड अधिनियम में संशोधन की मांग सिंटा की पड़ोसी सीना के पास भी बताने के लिए ऐसी ही कहानियां थीं. सीना ने कहा कि उनका घर ही उनकी जिंदगी की एकमात्र कमाई है. उन्होंने कहा, 'मेरे पति एक मछुआरे हैं. सालों की मेहनत के बाद उन्होंने यह घर बनाया है. हमने इस मकान के अलावा कुछ और नहीं बनाया है, जिसे अपना कह सकें. यदि यह घर हमारे हाथ से चला गया तो कुछ नहीं बचेगा. सरकार को वक्फ बोर्ड अधिनियम में संशोधन करना चाहिए और हमारी समस्याओं का समाधान ढूंढना चाहिए.' इस गांव के हर घर की यही कहानी है. थोड़ी दूर पर, प्रदीप और उनकी पत्नी श्रीदेवी मिले. उनके हाथों में अपनी जमीन और घर से जुड़े दस्तावेज थे. उन्होंने आजतक की टीम को अपने दस्तावेज दिखाए और कहा कि यह साबित करने के लिए काफी है कि जमीन हमारी है. प्रदीप ने कहा, 'मैंने यह जमीन 1991 में फारूक कॉलेज से उनके द्वारा मांगी गई राशि चुकाकर खरीदी थी. मेरे पास सभी सबूत हैं. मेरी तबीयत ठीक नहीं रहती, इसलिए मैंने अब काम करना बंद कर दिया है. मेरा बेटा परिवार की देखभाल करता है. मैं यह सुनिश्चित करूंगा कि भविष्य में उसे इस घर में रहने में कोई दिक्कत न हो. मैं हमारे अधिकारों के लिए किसी भी हद तक जाऊँगा. मैंने मेहनत से यह घर बनाया है.' प्रदीप इसके आगे अपनी बात पूरी नहीं कर पाए और रोने लगे. गांव वाले न जमीन बेच सकते हैं न ही गिरवी रख सकते हैं इलाके के लोगों को उम्मीद है कि चर्चों द्वारा वक्फ (संशोधन) विधेयक के संबंध में गठित संयुक्त संसदीय समिति (JPC) को लिखे गए पत्र से उन्हें इस संकट से उबरने में मदद मिलेगी. ग्रामीणों ने कहा कि वे एक सदी से भी अधिक समय से चेराई गांव में रह रहे हैं. उनके अनुसार, यह जमीन 1902 में सिद्दीकी सैत ने खरीदी थी और बाद में 1950 में फारूक कॉलेज को दान कर दी थी. मछुआरों और कॉलेज के बीच लंबे समय से चला आ रहा विवाद 1975 में सुलझ गया, जब उच्च न्यायालय ने कॉलेज के पक्ष में फैसला सुनाया. 1989 से स्थानीय लोगों ने कॉलेज से जमीन खरीदनी शुरू कर दी. हालांकि, 2022 में विलेज ऑफिस ने अचानक दावा किया कि गांव वक्फ बोर्ड की जमीन पर बसा है. इसके बाद ग्रामीणों को उनके राजस्व अधिकारों से वंचित कर दिया गया और उन्हें अपनी संपत्ति बेचने या गिरवी रखने से रोक दिया गया.   recent visitors 98

मंत्री पटेल ने प्रदेश की पंचायत एवं सामुदायिक भवन विहीन पंचायतों में पंचायत एवं सामुदायिक भवन बनाने कार्य में प्रगति लाने के निर्देश दिए

भोपाल पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग मंत्री प्रहलाद पटेल ने प्रदेश की पंचायत एवं सामुदायिक भवन विहीन पंचायतों में पंचायत एवं सामुदायिक भवन बनाने कार्य में प्रगति लाने के निर्देश दिए। उन्होंने 25-30 वर्ष पुराने जर्जर पंचायत भवनों का सर्वे कर, उनकी उपयोगिता की जांच कर आवश्यक कार्रवाई के निर्देश भी दिए। मंत्री पटेल मंगलवार को मंत्रालय में विभागीय कार्यों की समीक्षा कर रहे थे। उन्होंने विभागीय कार्यों की प्रगति की जानकारी ली। मंत्री पटेल ने स्वच्छता ही सेवा अभियान अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में उपलब्धियों को सराहना की। उन्होंने नर्मदा नदी किनारे के 776 तथा पर्यटन महत्व के 117 ग्रामों को ओडीएफ प्लस मॉडल घोषित करने के कार्य की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि शेष ग्रामों को ओडीएफ प्लस बनाने का कार्य भी शीघ्र पूर्ण किया जाए। मंत्री पटेल ने कहा कि गांवों में वृक्षारोपण के लिए ऐसे स्थलों को चिन्हित करे जो जल स्रोतों के किनारे स्थित है। वृक्षारोपण उपरांत वृक्षों के संरक्षण और समय- समय पर मूल्यांकन की कार्ययोजना बनाई जाए। उन्होंने कहा कि खेत सड़क योजना के लिए सभी पंचायतों से प्लान प्राप्त किया जाए। मंत्री पटेल ने निर्देशित किया कि वनाधिकार पट्टे प्राप्त अनुसूचित जनजाति वर्ग के लोगों को मनरेगा के तहत अतिरिक्त 50 दिवसों की मजदूरी मिलने के कार्य में जिलों में प्रगति लाई जाए, इसके निर्देश जारी करें। मनरेगा में अच्छा कार्य करने वाले विकासखंडों को प्रोत्साहन दिया जाए। उन्होंने कहा कि प्रदेश के सभी ग्रामों में 2 अक्टूबर को होने वाली विशेष ग्राम सभाओं का आयोजन सभी पंचायतों में अनिवार्य रूप से कराया जाए। इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव मलय श्रीवास्तव, संचालक पंचायत राज संचालनालय मनोज पुष्प, अपर सचिव एवं मिशन डायरेक्टर एसबीएम दिनेश जैन एवं आयुक्त मनरेगा अवि प्रसाद सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।   recent visitors 52

काशी में साईं प्रतिमा पर विवाद, ब्राह्मण सभा के विरोध के बाद अब तक 18 मूर्तियां हटाई गई

वाराणसी  काशी के मंदिरों से साईं बाबा की प्रतिमा हटाए जाने का मामला अब बढ़ता जा रहा है। साईं बाबा की प्रतिमा हटाने का सपा एमएलसी ने इसका विरोध करते हुए काशी का माहौल खराब करने का आरोप लगाया है। बीते एक हफ्ते में सनातन रक्षक दल के प्रदेश अध्यक्ष अजय शर्मा की अगुवाई में बीते एक हफ्ते में करीब 12 मंदिरों से साईं बाबा की प्रतिमा हटाई गई है। दो दिन पहले लोहटिया स्थित बड़ा गणेश मंदिर से साईं बाबा की प्रतिमा हटाने का वीडियो सामने आने के बाद से विवाद बढ़ गया। वहीं, दूसरी ओर सनातन रक्षक दल के अजय शर्मा का कहना है कि हिन्दू मंदिरों में देवताओं के साथ किसी फकीर की मूर्ति पूजन कर के भगवान का दर्जा दिए जाने का कोई औचित्य नहीं है। साईं नही चांद मियां हैं: सनातन रक्षक दल सनातन रक्षक दल के प्रदेश अध्यक्ष अजय शर्मा बीते एक हफ्ते से काशी खण्ड के मंदिरों से साईं प्रतिमा हटाने की मुहिम में लगे हैं। एनबीटी ऑनलाइन से बातचीत में अजय शर्मा ने बताया कि सनातन संस्कृति और परम्परा में सनातन धर्मी वैदिक पूजा अर्चना हिन्दू भूल बैठे हैं। काशी के पौराणिक धर्मस्थलों में 33 कोटि देवी देवता विद्यमान हैं। ऐसे काशी खण्ड के मंदिरों में विधर्मी चांद मियां उर्फ साईं की प्रतिमा को स्थापित करना दुर्भाग्यपूर्ण और महापाप है। हम लोग मंदिर के महंत और पुजारियों को समझा-बुझा कर प्रतिमाओं को हटा रहे हैं। अभी काशी खण्ड के अंदर आने वाले देव स्थानों से चांद मियां उर्फ साईं की प्रतिमा हटाई जा रही है। धीरे-धीरे काशी खण्ड के बाहर भी ये जनजागृति का अभियान चलाया जाएगा। राजनीतिक स्टंट : आशुतोष सिन्हा मंदिरों से साईं प्रतिमा हटाए जाने का वीडियो वायरल हुआ। आम बनारसी इस मुद्दे पर बंटे हुए दिख रहे हैं। इसी बीच सपा एमएलसी आशुतोष सिन्हा ने इसे बीजेपी का स्टंट बताते हुए कहा कि महाराष्ट्र में जिस तरह से आम जनता बीजेपी के खिलाफ हैं, उसे देखते हुए काशी में ये प्रयोग इशारे पर किया जा रहा है। काशी ने सभी धर्म और मत को हमेशा सम्मान दिया है। साईं का सबसे बड़ा केंद्र महाराष्ट्र में है और काशी से साईं के बारे में गलत प्रचार करके बीजेपी चुनाव को मुद्दों से भटकाने की कोशिश कर रही है। काशी में ही गलियों की हालत खराब है। महंगाई चरम पर है, गंगा साफ नहीं हुईं, उस पर ये लोग कोई आंदोलन नहीं करते, लेकिन जैसे ही कही चुनाव का समय आता है तो धर्म आधारित मुद्दों को हवा देकर चुनाव प्रभावित करने की कोशिश इन संगठनों की तरफ से शुरू हो जाती है। काशी में ब्राह्मण सभा ने छेड़ा अभियान, साई बाबा के मूर्ति को बताया प्रेत आत्मा काशी में ब्राह्मण महासभा के लोगो के द्वारा साई बाबा की मूर्ति को मंदिरों से हटाया जा रहा है। मंदिर से मूर्ति हटाए जाने को लेकर ब्राह्मण सभा का खुद को प्रदेश अध्यक्ष बताने वाले अजय शर्मा ने कहा कि सनातन धर्म में प्रेत आत्माओं की पूजा मंदिरों में मान्य नही है। लोहटिया क्षेत्र में बड़ा गणेश मंदिर में जो साई की मूर्ति थी वह एक प्रेत मूर्ति थी,जिसे हटाकर गंगा में विसर्जित कर दिया गया है। साई की मूर्ति के स्थान पर लक्ष्मी जी की मूर्ति जल्द बैठाई जाएगी। वही साई भक्तों के आहत होने पर अजय शर्मा ने कहा कि जिन्हे साई में भक्ति है,वह अपने घरों में साई की पूजा करे इससे उन्हें कोई नही रोकेगा। मंदिर में साई की मूर्ति स्थापित कर पूजा करने का विरोध पहले भी हुआ और हमेशा होता रहेगा। वही दूसरी बड़ा गणेश मंदिर के महंत ने भी साई बाबा के मूर्ति को हटाने का समर्थन किया।। मंदिरों से साई मूर्ति हटाने पर समाजवादी पार्टी ने जताई आपत्ति, काशी का माहौल खराब करने की जा रही कोशिश काशी के मंदिरों से साई बाबा की मूर्ति हटाए जाने को लेकर समाजवादी पार्टी ने इसे काशी के माहौल को खराबा करने कि कोशिश बताया है। समाजवादी पार्टी एमएलसी आशुतोष सिन्हा ने कहा कि बनारस सभी धर्मो के आस्था का केंद्र है और अब मूर्ति को हटाने की बाते सामने आ रही है। इससे पहले साई बाबा की पूजा मंदिर में होती रही है। तो इसे अभी हटाने का क्या मतलब है। जो लोग ऐसा काम कर रहे है वह काशी का माहौल खराब करने की कोशिश कर रहे है। recent visitors 91

टैगिंग व रेडियम बेल्ट से पशुओं की पहचान हुई आसान

समवेत प्रयासों से जिले में आवारा पशुओं का हो रहा बेहतर प्रबंधन सड़कों पर अब कम दिखाई देते हैं जानवर, दुर्घटना में आई कमी टैगिंग व रेडियम बेल्ट से पशुओं की पहचान हुई आसान गांव-गांव में चौपाल लगाकर लोगों को किया जा रहा जागरूक जोगीपुर में तेजी से विकसित हो रहा गो अभ्यारण्य रोस्टर बनाकर अधिकारी रोज कर रहे पशुओं की निगरानी बिलासपुर  मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के निर्देश पर जिला प्रशासन के समन्वित प्रयासों से आवारा पशुओं के प्रबंधन में काफी हद तक कामयाबी मिली है। सड़कों पर पशुओं का सामूहिक कब्जा अब कम देखने को मिलता है। दुर्घटना भी अब नहीं के बराबर नोट की जा रही है। पशुओं की टैगिंग और गले में रेडियम बेल्ट पहनाए जाने से पशुओं की पहचान आसान हुई है। टैगिंग से पशु मालिक का पता चल जा रहा है। राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे के ग्रामों में आयोजित जन चौपाल से मालिकों में जागरूकता आई है। वे अपने पशुओं की ठीक से निगरानी कर रहे हैं। कलेक्टर अवनीश शरण हर रोज इसकी नियमित समीक्षा करते हैं। इसके अलावा राजस्व, नगर निगम और पुलिस की संयुक्त टीम सड़कों पर पशुओं की निगरानी भी कर रहे हैं। इस बीच जोगीपुर में गो अभ्यारण्य भी तेजी से विकसित हो रहा है। पशुओ के प्रबंधन के लिए 354 वॉलेन्टियर्स भी बनाए गए हैं जो पशु प्रबंधन में मदद कर रहे हैं। बैगा, बिरहोर आदिवासियों को अब तक 300 जोड़ी बैल वितरित प्रधानमंत्री जनमन योजना के तहत बैगा, बिरहोर आदिवासियों को निःशुल्क बैल जोड़ी वितरित किया गया। अब तक 300 आदिवासी किसान परिवारों को बैल जोड़ी बांटा जा चुका है। खेती-किसानी की उन्नति में वे इन बैल जोड़ियों का उपयोग करेंगे। ये वे घूमंतु बैल हैं जिन्हें सड़क से उठाकर मोपका गोठान में रखा गया था। उनके मालिकों को सूचना देने के बावजूद उनके द्वारा नहीं ले जाया गया इसलिए इन बैलों को जब्त कर बैगा आदिवासियों को इन बैलों का वितरण किया गया। जनचौपाल का सिलसिला लगातार जारी माननीय उच्च न्यायालय के आदेश एवं मुख्य सचिव के निर्देश पर जिले के प्रमुख नेशनल और स्टेट राजमार्गों में घुमन्तू पशुओं के कारण होने वाली आकस्मिक दुर्घटनाओं को रोकने के लिए जिले में निरंतर प्रयास किया जा रहा है। इसके लिए पशुपालकों को प्रेरित करने एवं उनके व्यवहार में परिवर्तन लाने हेतु जिले के चिन्हांकित क्षेत्रों में जनचौपाल का भी आयोजन किया जा रहा है। जिला प्रशासन द्वारा जिले के राष्ट्रीय राजमार्ग क. 130 अंतर्गत दर्रीघाट वि.खं. मस्तूरी एवं सेंदरी विखं बिल्हा को चिन्हित किया गया है। यहां जनचौपाल का आयोजन कर पशुपालकों को समझाईश देते हुए इस संबंध में विस्तार से जानकारी दी जा रही है। अब तक  202 जन चौपाल का आयोजन किया गया है। इसी प्रकार अन्य जनचौपाल के लिए तिथियां निर्धारित कर ली गई है।           जनचौपाल के तहत  जिले के विभिन्न विभागों के अधिकारियों, स्थानीय जनप्रतिनिधियों, पशुपालकों की उपस्थिति में जनचौपाल का आयोजन किया जा रहा है जिसमें पशुपालकों को घुमन्तू पशुओं को सड़क पर छोड़े जाने से होने वाले समस्याओं से अवगत कराने के साथ साथ पशुओं को सड़कों पर नहीं छोड़ने हेतु अपील एवं समझाईश दिया गया, जिससे घुमन्तू पशुओं के कारण सड़कों में होने वाली समस्याओं में कमी आ आई है। इस संबंध में सभी संबंधित विभाग के अधिकारियों के द्वारा विभागीय योजनाओं के लाभ तथा इससे आवारा पशु नियंत्रण में प्रभावी उपयोग पर जानकारी दी जा रही है, जिसका सकारात्मक प्रभाव ग्रामीणों एवं पशुपालकों पर पड़ा तथा आवारा पशुओं के नियंत्रण के संबंध में ग्रामीणों द्वारा सुझाव भी दिये गये । तेजी से आकार ले रहा है जोगीपुर गो अभ्यारण्य जोगीपुर में डेढ़ सौ एकड़ क्षेत्र में गो अभ्यारण्य तेजी से आकार ले रहा है। कोटा विकासखण्ड के ग्राम जोगीपुर में विशाल गो अभयारण्य विकसित किया जा रहा है। लगभग 154 एकड़ भूमि इसके लिए चिन्हांकित की गई है। जिला मुख्यालय से कोई 30 किमी दूर नदी,नालों,तालाबों और हरियाली से भरपूर यह इलाका अभयारण्य के लिए बेहद अनुकूल जगह है। बीमार, अपाहिज, आवारा एवं सड़कों से हटाये गए जानकारों को यहां पनाह दिया जायेगा। उनकी देखरेख एवं चारा पानी की समुचित व्यवस्था इस अभयारण्य में रहेगी। अभी यहां समतलीकरण कार्य एवं शेड निर्माण किया जा रहा है। मनरेगा, पशुधन विकास सहित विभिन्न योजनाओं के अभिसरण से इसका विकास किया जायेगा। इसके नजदीक सोलर चालित पम्प एवं बोर की व्यवस्था जल्द ही की जाएगी। चारे की निरंतर उपलब्धता के लिए 24 एकड़ में चारागाह विकसित किया जायेगा। आवारा मवेशियों में जियो टैगिंग सड़कों पर घूमने वाले आवारा घूमने वाले मवेशियों की टैगिंग की जा रही है। उन्हें गले में रेडियम बेल्ट भी पहनाए जा रहे हैं। 1207 पशुओं को ईयर टैगिंग और 7284 पशुओं में रेडियम कॉलर बेल्ट लगाया जा चुका है। इस कार्य से पशुओं की पहचान आसान हुई है। टैगिंग से पशु मालिक का पता चल जा रहा है। recent visitors 55

2 लाख 8 हजार 444 सफाई मित्रों-परिजनों की 8 शिविरों में हुई स्वास्थ्य जाँच, 2 लाख से अधिक विद्यार्थियों से संवाद कर बताया स्वच्छता का महत्व

स्वच्छता ही सेवा-2024 अभियान स्वच्छता पखवाड़े की उपलब्धियों के परिणाम स्वच्छता सर्वेक्षण में दिखेंगे: मुख्यमंत्री डॉ. यादव स्वच्छता ही सेवा-2024 अभियान में प्रदेश के नगरीय क्षेत्रों में 42 हजार 500 स्वच्छता गतिविधियाँ हुई 2 लाख 8 हजार 444 सफाई मित्रों-परिजनों की 8 शिविरों में हुई स्वास्थ्य जाँच, 2 लाख से अधिक विद्यार्थियों से संवाद कर बताया स्वच्छता का महत्व "स्वभाव स्वच्छता-संस्कार स्वच्छता" थीम पर केन्द्रित रहा अभियान भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश को सवच्छ बनाने के लिए स्वच्छता पखवाड़े में जन भागीदारी के साथ चलाई गई विभिन्न गतिविधियों से बेहतर परिणाम प्राप्त हुए है। इसके परिणाम भविष्य में होने वाले स्वच्छता सर्वेक्षण-2024 में भी दिखेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जन्म दिन 17 सितम्बर से शुरू हुए स्वच्छता पखवाड़े में पूरे प्रदेश में स्वच्छता के प्रति आम नागरिकों ने जो सहभागिता की, वह जन-आंदोलन बन गया। पखवाड़े का समापन गांधी जयंती 2 अक्टूबर को होगा, जिसमें स्वच्छता संबंधी 685 करोड़ रूपये की विकास परियोजनाओं का लोकार्पण-शिलान्यास किया जायेगा। स्वच्छ भारत मिशन की 10वीं वर्षगाँठ के मौके पर इस वर्ष “स्वभाव स्वच्छता-संस्कार स्वच्छता’’ थीम पर स्वच्छता अभियान 17 सितम्बर से शुरू हुआ। अभियान में प्रदेश के 413 नगरीय निकायों में करीब 42 हजार 500 से अधिक गतिविधियाँ आयोजित की गईं। इनमें 34 हजार 22 स्वच्छता में जन-भागीदारी, वृहद स्वच्छता अभियान की 2355 और 7 हजार 990 सफाई मित्र सुरक्षा शिविर प्रमुख रूप से शामिल हैं। इसके साथ ही प्रदेश में 8 हजार स्वास्थ्य शिविरों में 2 लाख 8 हजार 444 सफाई मित्रों और उनके परिजनों की स्वास्थ्य जाँच की गई। प्रदेश में 968 ब्लैक स्पॉट चिन्हित कर उनके सुधार और सौंदर्यीकरण का कार्य किया गया। मानव श्रृंखला और सफाई मित्रों का सम्मान स्वच्छता ही सेवा अभियान में स्कूल शिक्षा विभाग और नगरीय प्रशासन विभाग ने मिलकर शालाओं में संवाद कार्यशालाओं का आयोजन किया। इनमें 2 लाख से अधिक छात्र-छात्राओं से संवाद कर उन्हें स्वच्छता के महत्व के बारे में जानकारी दी गई। इसके साथ ही सार्वजनिक रूप से सफाई मित्रों को सम्मानित किया गया। प्रदेश की 850 शालाओं में एक लाख 2 हजार 200 से अधिक विद्यार्थियों ने मानव श्रृंखला का निर्माण कर जन-सामान्य को स्वच्छता का संदेश दिया। प्रदेश के नगरीय निकायों में नागरिकों की सक्रिय भागीदारी से 2333 वृहद स्तर पर स्वच्छता अभियान संचालित किये गये, जिसमें लाखों नागरिकों, जन-प्रतिनिधियों और स्वयंसेवी संगठनों के सदस्यों की भागीदारी रही। सार्वजनिक कार्यक्रम के जरिये शामिल सदस्यों को शहरों को साफ रखने की शपथ दिलाई गई। स्वच्छता शिविरों का आयोजन प्रदेश में नगरीय निकायों में लगभग 8 हजार स्वास्थ्य शिविरों के माध्यम से 2 लाख 8 हजार 444 सफाई मित्र और उनके परिजनों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। इसके अलावा इन कार्यक्रमों में शासकीय योजनाओं का हित-लाभ दिलाने के लिये विशेष शिविर भी लगाये गये। नगरीय निकायों में 968 ब्लैक स्पॉट को उपचारित किया गया। अपशिष्ट प्र-संस्करण इकाई और पॉलीथिन के उपयोग पर रोक स्वच्छता ही सेवा अभियान के दौरान संग्रहित होने वाले कचरे के पृथक्कीकरण के बारे में नागरिकों को समझाइश दी गई। छात्रों एवं युवाओं को प्र-संस्करण इकाइयों का भ्रमण कराया गया। उन्हें कचरे के सुरक्षित निपटान की जानकारी दी गई। स्वभाव स्वच्छता-संस्कार स्वच्छता इस वर्ष का स्वच्छता अभियान का मुख्य विषय “स्वभाव स्वच्छता-संस्कार स्वच्छता’’ रखा गया था। अभियान के दौरान बच्चों को शुरू से ही स्वच्छता की आदत डालने के बारे में बताया गया। बच्चों के पालकों को अपने व्यवहार में स्वच्छता को आत्मसात करने के बारे में बताया गया। शहरी क्षेत्रों में प्लास्टिक कचरा प्रबंधन, अमृत महोत्सव, कचरा मुक्ति जैसे विषयों पर नुक्कड़ नाटक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से नागरिकों को जागरूक किया गया।   recent visitors 52